Thursday, April 2, 2026
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नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी जिंदल स्टील

नयी दिल्ली । अपने कॉर्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील ने नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने और अन्य हरित पहल पर 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी का इरादा अपने तापीय बिजली इस्तेमाल को कम कर नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने का है। कंपनी के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने यह जानकारी दी है।
विभिन्न इस्पात कंपनियां अपने खुद के इस्तेमाल के लिए ताप बिजली उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल करती हैं। इस्पात मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कुल कॉर्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में लौह एवं इस्पात उद्योग का हिस्सा करीब आठ प्रतिशत बैठता है। भारत में कुल सीओ2 उत्सर्जन में इन उद्योगों का हिस्सा करीब 12 प्रतिशत है। ऐसे में सीओपी-26 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में जताई गई प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए भारतीय इस्पात उद्योग को उत्सर्जन में काफी कमी लाने की जरूरत है।
जिंदल स्टील ने कहा, ‘‘हमने विभिन्न पहल से अपने कॉर्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। इसके तहत हम तापीय बिजली के स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाएंगे और कच्चे माल की गुणवत्ता में सुधार से अपनी ईंधन दर को बेहतर करेंगे।’’
जिंदल ने कंपनी की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा, ‘‘हमने पहले ही एक गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा के लिए अनुबंध किया है। इसमें से 225 मेगावॉट अप्रैल, 2022 में परिचालन में आ गई है। शेष नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग भी चरणों में शुरू होगा।’’ उन्होंने कहा कि कंपनी के विजयनगर संयंत्र की क्षमता को 1.2 करोड़ टन सालाना से बढ़ाकर 1.95 करोड़ टन करने का काम चल रहा है। इसपर जो लागत आ रही है वह वैश्विक मानकों से काफी कम है।

ओलंपिक पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी वरिंदर सिंह का निधन

नयी दिल्ली । ओलंपिक और विश्व कप पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे हॉकी खिलाड़ी वरिंदर सिंह का मंगलवार सुबह जालंधर में निधन हो गया। वर्ष 1970 के दशक में भारत की कई यादगार जीत का हिस्सा रहे वरिंदर 75 साल के थे।
वरिंदर 1975 में कुआलालंपुर में पुरुष हॉकी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। यह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारत का अब तक का एकमात्र स्वर्ण पदक है। भारत ने तब फाइनल में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 2-1 से हराया था।
वरिंदर 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक और एम्सटरडम में 1973 विश्व कप में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थे। वरिंदर की मौजूदगी वाली टीम ने 1974 और 1978 एशियाई खेलों में भी रजत पदक जीता। वह 1975 मांट्रियल ओलंपिक में भी भारतीय टीम में शामिल थे।
वरिंदर को 2007 में प्रतिष्ठित ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी नवाजा गया था। हॉकी इंडिया ने वरिंदर के निधन पर शोक जताया है। हॉकी इंडिया ने विज्ञप्ति में कहा, ‘‘वरिंदर सिंह की उपलब्धि को दुनिया भर का हॉकी समुदाय याद रखेगा।’’

एसपी समूह के पालोनजी मिस्त्री का 93 साल की उम्र में निधन

मुम्बई । अरबपति कारोबारी और शापूरजी पालोनजी समूह के प्रमुख पालोनजी मिस्त्री का यहां उनके आवास पर निधन हो गया। कंपनी के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वह 93 वर्ष के थे। मिस्त्री का एसपी समूह 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ टाटा समूह का सबसे बड़ा शेयरधारक है। अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को आधी रात के बाद दक्षिण मुंबई स्थित उनके आवास पर नींद के दौरान उनका निधन हो गया। उन्होंने आयरलैंड की नागरिकता हासिल कर ली थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया कि वह पालोनजी के निधन से दुखी हैं। मोदी ने कहा, “उन्होंने वाणिज्य और उद्योग की दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।”
मिस्त्री को 2016 में भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मिस्त्री के निधन को एक युग का अंत बताया। नितिन गडकरी, मनसुख मंडाविया, हरदीप सिंह पुरी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस बोम्मई समेत अन्य मंत्रियों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
मिस्त्री का जन्म 1929 में हुआ था। उन्होंने पांच अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के एसपी समूह का नेतृत्व किया। समूह की शुरुआत निर्माण व्यवसाय से हुई थी और बाद में कारोबार रियल एस्टेट, कपड़ा, शिपिंग और घरेलू उपकरणों के विनिर्माण तक फैला।
उनके परिवार में साइरस मिस्त्री सहित चार बच्चे हैं। साइरस मिस्त्री ने टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में रतन टाटा का स्थान लिया था। हालांकि, उन्हें 2016 में बोर्ड ने हटा दिया। वित्तीय लिहाज से एसपी समूह के लिए पिछले कुछ वर्ष कठिन रहे हैं और उसे टाटा समूह के शेयरों को गिरवी रखकर धन जुटाना पड़ा।

जुगाड़ से बना दी ये इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल

मिर्जापुर । मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो दुनिया की कोई भी ताक़त आपको नहीं रोक सकती है। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और लगन से इंसान असंभव को भी संभव बना सकता है। उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर के रहने वाले नीरज मौर्य ने यह साबित कर दिखाया है। बता दें कि नीरज ने बैटरी से चलने वाली बाइक बनाई है जो एक बार के चार्ज में 50 किलोमीटर तक जा सकती है लेकिन नीरज के लिए ये काम इतना आसान नहीं था। नीरज के पिता पेशे से किसान हैं और साथ ही पंचर बनाने का काम भी करते हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि नीरज इस बाइक को बनाने में होने वाले ख़र्चों को पूरा कर पाता। ऐसे में नीरज ने देसी जुगाड़ लगाकर इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल को बनाया है।
बिना किसी तकनीकी शिक्षा के बना दी इलेक्ट्रिक बाइक
नीरज ने हालात से हार नहीं मानी। उन्होंने देसी जुगाड़ और दिमाग लगाकर नवरात्रि में मूर्तियां बनाईं। उन मूर्तियों को बेचकर बाइक बनाने के लिए पैसे का इंतज़ाम किया। इस बाइक को बनाने में 30 हज़ार रुपए का खर्च आया। ख़ास बात यह है कि बिना किसी तकनीकी शिक्षा लिए नीरज ने यह बाइक बनाई है।
ये हैं इस बाइक की खूबियां
यह बाइक एक बार चार्ज होने पर 50 किलोमीटर तक का सफ़र आसानी से तय कर सकती है। साथ ही इसमें गियर भी लगाया गया है जो इसे आगे या पीछे ले जाने में मदद करता है। यह बाइक अन्य बाइकों की तरह ही रफ़्तार में चलती है।
प्रदूषण से मिल सकता है छुटकारा
नीरज का कहना है कि यदि सरकारी सब्सिडी मिले तो इस बाइक को बनाने का खर्च और भी कम हो सकता है। नीरज चाहते हैं कि लोग उनके द्वारा बनाई गई इस बाइक का प्रयोग करें जिससे इंधन वाली बाइकों से होने वाले प्रदूषण से छुटकारा मिल सके।
(साभार – जी न्यूज)

‘गूँगी रुलाई का कोरस’ सामूहिकता के स्वप्न का महाआख्यान है —अरुण होता

आसनसोल । आसनसोल के जिला ग्रंथागार में सहयोग संस्थान के तत्वाधान में रणेन्द्र के उपन्यास ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ पर “बदलता समाज, संगीत और गूँगी रुलाई का कोरस” विषय पर एक साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर रणेन्द्र, आलोचक रविभूषण,सृंजय, अरुण होता, सुधीर सुमन तथा डॉ. प्रतिमा प्रसाद एवं अन्य विद्वान आमंत्रित थें। बी. बी कॉलेज के विभागाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा के अवकाश ग्रहण पर उनका नागरिक अभिनन्दन भी इस कार्यक्रम में किया गया। उनके लिए उनके सहकर्मी अरुण पाण्डेय एवं कवि निशांत ने उनकी सराहना की। मंच का संचालन कर रहे बी. बी कॉलेज के अध्यापक के. के. श्रीवास्तव साहित्यिक -सांस्कृतिक गतिविधियों को शहर की संवेदनशीलता का मापदंड बताया।  वक्ता के रूप में डॉ. प्रतिमा प्रसाद ने कहा, “ आज के समय के विशिष्ट उपन्यासकार अपनी महत्ती उपस्थिति को, उत्तरदायित्व को बड़ी ईमानदारी, बड़ी निडरता के साथ, बड़ी गतिशीलता के साथ निर्वाह करने में सक्षम है। ‘ग्लोबल गाँव का देवता’ से जो वैचारिकी आई है, वह ‘गायब होता देश’ के बाद ‘गूँगी रुलाई का कोरस’ तक आते -आते एक प्रौढ़ विचारधारा में परिवर्तित हो जाता है।” कहानीकार सृंजय ने मौसीक़ी के अर्थ और शास्त्रीय संगीत पर अपने सूक्ष्म दृष्टिकोण को रखा। उपन्यास के सन्दर्भ में उन्होंने कहा, “यह उपन्यास लगातार सायरन बजा रहा है। हमें इसे सुनना है, समझना है और संगीत तथा संस्कृति को बचाना है।” उनका मानना हैं समाज बदल गया है। बहुत कुछ बदल गया। समय बदल गया है, लोग बदल गए हैं ; पर संगीत का प्रभाव आज भी नहीं बदला। आलोचक अरुण होता ने  लम्बी कहानी को किसी उपन्यास में तब्दील करने की मानसिकता पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘किसी को खुश करने के लिए नहीं। जहाँ लेखक दर-ब-दर दिन-रात अपने से जूझता है, संज्ञान करता है और लड़ाई करता है। सवालों से टकराता है और उन चीजों को जब अपने उपन्यासों में लेकर आता है, रचनाओं में लेकर आता आता है वह सचमुच हमारे लिए विश्वसनीय हो जाता है, महत्वपूर्ण हो जाता है, प्रासंगिक हो जाता है। और सही मायने में उस रचना को हम रचना कहते हैं।” कार्यक्रम में, श्रोताओं के मन उठे जरुरी प्रश्नों को भी मंच के सामने रखा गया, जिसका उत्तर स्वयं रणेन्द्र ने दिया। अध्यक्षीय वक्तव्य में आलोचक रविभूषण ने ‘गूंगी रुलाई के कोरस’ के बहाने आज के समय में प्रेम,मुक्ति के स्वप्न और मनुष्यता के बचाने की हर संभव कोशिश के लिए रणेन्द्र को साधुवाद दिया कार्यक्रम में शहर के साहित्य प्रेमी,बुद्धिजीवी,छात्र,शिक्षक-प्राध्यापक और संस्कृतिकर्मी काफी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का अंत शिव कुमार यादव के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

आचार्य विष्णुकांत शास्त्री स्मृति आयोजन में बही ‘गंगा – गाथा’ की भावधारा

कोलकाता । श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा आचार्य विष्णुकांत शास्त्री की स्मृति में किस्सागोई शैली में ‘गंगा – गाथा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। रथीन्द्र मंच सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उद्योगपति पद्मश्री प्रह्लाद राय अग्रवाल उपस्थित थे। अध्यक्षीय वक्तव्य में कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री शुक्ला ने अपने गुरु आचार्य विष्णुकांत शास्त्री को ‘संस्कृति पुरुष’ बताते हुए साहित्य, संस्कृति एवं अध्यात्म के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान का स्मरण किया। ‘गंगा – गाथा’ की सराहना करते हुए उन्होंने उम्मीद जतायी कि युवा पीढ़ी इससे अपनी संस्कृति का सम्मान करने की प्रेरणा पायेगी। स्वागत भाषण में श्री बड़ाबाजार कुमार सभा पुस्तकालय के अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि आचार्य शास्त्री सबके हितकारी थे। ‘गंगा – गाथा’ के आयोजन की उन्होने सराहना की। समारोह में प्रख्यात कलाकार डॉ. हिमांशु वाजपेयी, डॉ. प्रज्ञा शर्मा (लखनऊ) तथा वेदान्त भारद्वाज (चेन्नई) ने अपनी संगीतमय प्रस्तुति से देवनदी की महत्ता का वर्णन साहित्यिक एवं पारम्परिक संस्कृत की रचनाओं को आधार बनाकर किया। गंगा की महिमा के साथ प्रदूषण और मानवीय अतिशय महत्वाकांक्षा के कारण होने वाली दुर्दशा को चित्रित करते हुए इस प्रस्तुति में जागरुकता लाने का प्रयास भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सत्यनारायण तिवाड़ी की श्रीराम वंदना से हुई। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कमल कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन पुस्तकालय के मंत्री महावीर बजाज ने दिया। कार्यक्रम में भागीरथ चांडक, दुर्गा व्यास, सागरमल गुप्त, आचार्य राकेश पांडेय एवं डॉ. सत्या उपाध्याय ने अतिथियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज काकड़ा, रामचन्द्र अग्रवाल, शैलेश बागड़ी एवं श्रीमोहन तिवारी समेत कई अन्य लोगों का योगदान रहा।

राजारहाट में खुले मिया तनिष्क के 2 स्टोर

कोलकाता ।  तनिष्क ने कोलकाता में दो नये ज्वेलरी कलेक्शन ‘मिआ तनिष्क स्टोर’ खोले हैं। इन दोनो स्टोरों का उद्घाटन अभिनेत्री एवं सांसद नुसरत जहां और मिआ तनिष्क टाइटन कंपनी लिमिटेड की बिजनेस हेड सुश्री श्यामला रामनन द्वारा किया गया था। ग्राहकों को इस मौके पर विशेष छूट दी गयी।
मिआ तनिष्क के इन दोनो आलीशान आउटलेट स्टोर में पहला आउटलेट कोलकाता के जेसोर रोड में स्थित है और 500 वर्ग फुट में फैला स्टोर है। मिआ तनिष्क का दूसरा भव्य आउटलेट स्टोर न्यू टाउन राजारहाट में स्थित सिटी सेंटर 2 में 270 वर्ग फुट में फैला स्टोर है। इन दोनो स्टोर में विभिन्न प्रकार के स्टड, फिंगर रिंग्स, ब्रेसलेट, पेंडेंट और नेकवियर में सोने, हीरे और रंगीन पत्थरों से तैयार किए गए ट्रेंडी, लोकप्रिय और आधुनिक डिजाइनों की एक विस्तृत श्रृंखला ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं। इस अवसर पर श्यामला रामनन (बिजनेस हेड- मिआ तनिष्क) ने कहा, ‘इन स्टोर के माध्यम से हमारा प्रयास ग्राहकों को ट्रेंडी डिजाइन के गहनों की खरीददारी का अनोखा अनुभव प्रदान करना है।’

एमसीसीआई में ‘साथी’ पर परिचयात्मक सत्र

कोलकाता । आईआईटी खड़गपुर एवं एमसीसीआई ने उद्योग जगत को लेकर “साथी (सोफिस्टीकेटेड एनालिटिकल टेक्निकल हेल्प इंस्टीट्यूट ) आरम्भ की है। इस योजना में साथी एवं साथी सेंटर के चेयरमैन और साथी फाउंडेशन के निदेशक प्रोफेसर रविब्रत मुखर्जी शामिल हैं और इनके साथ हाल ही में एमसीसीआई की तरफ से एक परिचयात्मक सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर साथी के सदस्य डॉ. सांवर धनानिया एनं साथी के सीओओ डॉ. अविनाश जोश शामिल थे।
बैठक का उद्देश्य उद्योग के सदस्यों के साथ जुड़ना था ताकि प्रौद्योगिकी के संबंध में उद्योग की आवश्यकताओं को समझा जा सके कि खड़गपुर में इनक्यूबेशन सेंटर उद्योग के लाभ के लिए स्थापित करने पर विचार कर सकता है। सदस्यों को साथी की योजनाओं और रणनीतियों के बारे में भी जानकारी दी गई।
बैठक की अध्यक्षता एमएसएमई पर एमसीसीआई काउंसिल के चेयरमैन संजीव कुमार कोठारी ने की। एमसीसीआई की एमएसएमई काउंसिल के को चेयरमैन अखिल सोंथालिया, स्टार्टअप एवं स्किल डेवलपमेंट पर एमसीसीआई काउंसिल के चेयरमैन सम्रजीत मित्रा भी उपस्थित थे।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में मनाया गया फादर्स डे

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल के प्राथमिक विभाग में असेम्बली के दौरान फादर्स डे मनाया गया। इस मौके पर नर्सरी की कक्षा में, बच्चों ने अपने पिता के साथ इस अवसर को चिह्नित करने के लिए शिक्षकों द्वारा संकलित एक वीडियो देखा। काम पर जाने से नन्हीं छात्राओं ने अपने पिता के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया।
जहां पिता-बेटी की जोड़ी मिल्कशेक बनाने में लगी हुई थी, वहीं मांएं इन खूबसूरत पलों को कैद करने में लगी थीं। शिक्षिकाओं द्वारा द्वारा सुनाई गयी कहानियों का आनन्द लिया। मनमोहक गीत गाए और अपने पिता को उनके विशेष दिन की शुभकामनाएं देते हुए सुंदर कार्ड उपहार में दिए।
पहली और दूसरी कक्षा की छात्राओं ने अपने पिता को प्यार करने और उनकी देखभाल करने के लिए धन्यवाद देने के लिए पेंट और ऑटो ड्रॉ का उपयोग करके कंप्यूटर कक्षा में कार्ड बनाए। साथ ही उनकी सलामती और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना भी की। तीसरी कक्षा के छात्रों ने उन्हें एक गीत समर्पित कर फादर्स डे मनाया। प्यारी बेटियों द्वारा बनाए गए सुंदर कार्ड और वीडियो कक्षा के साथ साझा किए गए।
चौथी एवं पाँचवीं की छात्राओं ने इस अनमोल रिश्ते की खूबसूरत यादों को संजोते हुए पीपीटी प्रस्तुत किए। इस सम्बन्ध की खूबसूरती को निखारते हुए हस्तनिर्मित और ‘कैनवा’ पर बनाए गए कार्ड दोनों के बीच साझा किए गए। कुल मिलाकर, प्रत्येक बच्चे द्वारा किए गए प्रयास ने एक पिता और एक बेटी के सबसे प्यारे रिश्तों में से एक को सम्मानित और गौरवान्वित किया।

रथयात्रा पर विशेष – ये है पुरी का जगन्नाथ धाम

श्री जगन्नाथ मंदिर की चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार हैं, जो क्रमशः पूर्व मे सिंह द्वार / मोक्ष द्वार, दक्षिण अश्व द्वार / काम द्वार, पश्चिम व्याघ्र द्वार / धर्म द्वार, उत्तर मे हाथी द्वार / कर्म द्वार स्थापित है। मंदिर के सिंह द्वार पर कोणार्क सूर्य मंदिर से लाया अरुण स्तंभ स्थापित किया गया है, तथा कोणार्क मंदिर के मुख्य विग्रह भगवान सूर्य देव को भी यहीं स्थापित कर दिया गया है।

मंदिर के अश्व द्वार के साथ ही हनुमान जी का छोटा सा मंदिर है, जिसमें श्री हनुमंत लाल की विशाल विग्रह उपस्थित है। मंदिर का आर्किटेक्चर कलिंग शैली द्वारा चूना पत्थर से बना है। अभी इस मंदिर को संरक्षित करने के लिए आर्कियालजी ऑफ इंडिया ने मंदिर की बाहरी दीवारों पर सफेद रंग का जंग रोधक लेप लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार मंदिर में एकादशी दर्शन का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार में हरि एवं हर दोनों को शाश्वत मित्र माना गया है। अतः जहाँ-जहाँ हरि निवास करते हैं वहीं आस-पास हर का भी निवास निश्चित है। ऐसे संयोग के अंतर्गत ही भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर को पुरी जगन्नाथ धाम के जोड़ीदार के रूप में माना गया है।

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
विश्व प्रसिद्ध श्री रथ यात्रा, जगन्नाथ धाम का सबसे प्रमुख त्योहार/मेला/उत्सव है। इस पवित्र यात्रा का आरंभ श्री जगन्नाथ मंदिर से होता है, और मौसी माँ मंदिर होते हुए श्री गुंडिचा मंदिर तक संपन्‍न होती है। इन तीनों मंदिरों को जोड़ती हुई तीन किलोमीटर लम्बी ग्रांडरोड है। जहाँ भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा दिनभर यात्रा करते हैं। इस यात्रा में देश-विदेश से इतने भक्त शामिल होते हैं, कि ग्रांड रोड पर पैर रखने की जगह मिलना मुश्किल होती है। जगह-जगह भक्तों द्वारा, भक्तों के लिए जल-पान व भोज की व्यवस्था की जाती है।

जगन्नाथ धाम या गोवर्धन मठ?

भारत के पूर्व दिशा में स्थित जगन्नाथ पुरी उड़ीसा राज्य में स्थित है। पुरी भार्गवी व धोदिया नदी के बीच में बसा हुआ है और बंगाल की खाड़ी में विलीन हो जाती है। पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए विश्‍व प्रसिद्ध है। द्वारका की तरह पुरी में शंकराचार्य मठ मंदिर के साथ-साथ जुड़ा नहीं है। गोवर्धन मठ मंदिर से कुछ दूरी पर देवी विमला मंदिर के साथ स्थित है।

आदि गुरु शंकराचार्य के अनुसार जगन्नाथ धाम को गोवर्धन मठ का नाम दिया गया है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के पीछे आरण्य नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ का महावाक्य है प्रज्ञानं ब्रह्म तथा इसके अंतर्गत आने वाला वेद ऋग्वेद  को रखा गया है। गोवर्धन मठ के प्रथम मठाधीश पद्मपाद थे। पद्मपाद जी आदि शंकराचार्य के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे।

(साभार – भक्ति भारत)