Thursday, July 9, 2026
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भारत में कंपनियां 2023 में 10 फीसदी वेतन बढ़ा सकती हैं: रिपोर्ट

मुंबई । भारत में कंपनियां 2023 में 10 प्रतिशत वेतन बढ़ा सकती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां श्रम बाजार में सख्त स्थितियों से जूझ रही हैं। वैश्विक सलाहकार, ब्रोकिंग और समाधान सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी विलिस टावर्स वाटसन की वेतन बजट योजना रिपोर्ट में पाया गया कि भारत में कंपनियां 2022-23 के दौरान 10 प्रतिशत वेतन बढ़ाने के लिए बजटीय व्यवस्था कर रही हैं। पिछले साल में वास्तविक वेतन वृद्धि 9.5 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट के अनुसार भारत में आधे से अधिक (58 प्रतिशत) नियोक्ताओं ने पिछले साल की तुलना में चालू वित्त वर्ष के लिए अधिक वेतन वृद्धि का बजट रखा है। इनमें से एक चौथाई (24.4 प्रतिशत) ने बजट में कोई बदलाव नहीं किया।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2021-22 की तुलना में केवल 5.4 प्रतिशत ने बजट कम किया है। रिपोर्ट के मुताबिक एशिया प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी। अगले साल चीन में छह फीसदी, हांगकांग और सिंगापुर में चार फीसदी वेतन बढ़ेगा। रिपोर्ट अप्रैल और मई 2022 में 168 देशों में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। भारत में 590 कंपनियों से बात की गई।

स्कॉटलैंड में मासिक धर्म उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने संबंधी कानून लागू

लंदन । स्कॉटलैंड में माहवारी उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने संबंधी कानून लागू हो गया है। स्कॉटलैंड सरकार ने बताया कि वह ‘पीरियड प्रोडक्ट एक्ट’ (माहवारी उत्पाद कानून) लागू होते ही दुनिया की पहली ऐसी सरकार बन गई है, जो मासिक धर्म संबंधी उत्पादों तक नि:शुल्क पहुंच के अधिकार की कानूनी रूप से रक्षा करती है।

इस नए कानून के तहत, विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों एवं स्थानीय सरकारी निकायों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि वे अपने शौचालयों में टैम्पोन और सैनिटरी नैपकिन समेत माहवारी संबंधी विभिन्न उत्पाद उपलब्ध कराएं।
स्कॉटलैंड सरकार ने शैक्षणिक संस्थाओं में माहवारी संबंधी उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए 2017 से लाखों रुपए पहले ही खर्च किए हैं, लेकिन कानून लागू होने से अब यह कानूनी अनिवार्यता बन गया है।

इसके अलावा एक मोबाइल फोन ऐप्लीकेशन भी उपलब्ध कराया गया है, जिसकी मदद से स्थानीय पुस्तकालय या सामुदायिक केंद्र जैसे ऐसे निकटतम स्थान का पता लगाया जा सकता है, जहां से माहवारी संबंधी उत्पाद लिए जा सकते हैं। स्कॉटलैंड की सामाजिक न्याय मंत्री शोना रोबिसन ने कहा, ‘‘माहवारी संबंधी उत्पाद नि:शुल्क उपलब्ध कराना समानता एवं गरिमा के लिए अहम है और इससे इन उत्पादों तक पहुंच की वित्तीय बाधा दूर होती है।’’ यह विधेयक 2020 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

कर्नाटक में सभी विद्यालयों और पीयू महाविद्यालयों में राष्ट्रगान अनिवार्य

बेंगलुरू, 18 अगस्त । कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी कर राज्य के सभी विद्यालयों और प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए प्रत्येक दिन सुबह राष्ट्रगान का सामूहिक गायन अनिवार्य कर दिया है।

राज्य सरकार की ओर से 17 अगस्त को जारी किया गया यह आदेश सभी सरकारी, वित्त पोषित और निजी विद्यालयों के अलावा प्री-यूनिवर्सिटी महाविद्यालयों पर लागू होगा। कर्नाटक सरकार के आदेश के मुताबिक इस संबंध में सरकारी आदेश लागू होने के बावजूद बेंगलुरु के कुछ प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगान का सामूहिक गायन नहीं कर रहे हैं।

सरकार को इस संबंध में शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं। इस संबंध में शिकायतें मिलने के बाद लोक निर्देश विभाग के बेंगलुरु उत्तर और दक्षिण डिवीजन के उप निदेशकों ने संबंधित विद्यालयों का दौरा किया और इस बात की पुष्टि की कि सुबह की प्रार्थना में राष्ट्रगान का गायन संबंधित विद्यालयों में नहीं हो रहा था। राज्य सरकार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम की धारा 133(2) के तहत राष्ट्रगान के संबंध में यह आदेश जारी किया है।

भारत के खिलाफ गलत सूचना फैलाने के मामले में आठ यूट्यूब चैनल ब्लॉक

नयी दिल्ली, 18 अगस्त । सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अन्य देशों से संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कथित दुष्प्रचार के मामले में एक पाकिस्तानी चैनल समेत आठ यूट्यूब चैनल को ब्लॉक (अवरुद्ध) करने का गुरुवार को आदेश दिया।

एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि ब्लॉक किए गए इन चैनल के 114 करोड़ ‘व्यूज’ (यानी उन्हें 114 करोड़ बार देखा गया) और 85.73 लाख सब्सक्राइबर हैं तथा इन चैनल की सामग्री से धन अर्जित किया जा रहा था। जिन चैनल को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों-2021 के तहत ब्लॉक किया गया है, उनमें सात भारतीय समाचार चैनल हैं।

एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि इन यूट्यूब चैनल ने भारत सरकार द्वारा धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त किए जाने, धार्मिक त्योहारों को मनाने पर प्रतिबंध लगाए जाने, भारत में धार्मिक युद्ध की घोषणा जैसे झूठे दावे किए।

बयान में कहा गया, ‘‘ऐसा पाया गया कि यह सामग्री साम्प्रदायिक सद्भाव और देश में सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ सकती है।’’ इसमें कहा गया कि इन यूट्यूब चैनल का इस्तेमाल भारतीय सशस्त्र बलों और जम्मू-कश्मीर जैसे विभिन्न विषयों पर भी फर्जी खबरें पोस्ट करने के लिए किया जाता था। बयान में कहा गया, ‘‘इस सामग्री को राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों के दृष्टिकोण से संवेदनशील और पूरी तरह से मिथ्या पाया गया।’’

कामकाजी महिला को वैधानिक मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि किसी कामकाजी महिला को मातृत्व अवकाश के वैधानिक अधिकार से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके पति की पिछली शादी से दो बच्चे हैं और महिला ने उनमें से एक की देखभाल करने के लिए पहले अवकाश लिया था।

द हिंदू के अनुसार, कोर्ट ‘स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ में बतौर नर्स कार्यरत महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन्हें उनकी जैविक संतान होने पर मातृत्व अवकाश देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि उनके पति के पहली शादी से दो बच्चे हैं और उनकी पहली पत्नी के गुजरने के बाद वे उनमें से एक की देखभाल के लिए अवकाश ले चुकी थीं।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि प्रसव को रोजगार के संदर्भ में कामकाजी महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक पहलू माना जाना चाहिए और कानून के प्रावधानों में उसे उसी परिप्रेक्ष्य में समझा जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मातृत्व अवकाश देने का उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल में अन्य लोगों के साथ शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है, लेकिन यह बात भी कड़वा सच है कि इस तरह के प्रावधानों के बावजूद महिलाएं बच्चे के जन्म पर अपना कार्यस्थल छोड़ने के लिए मजबूर हैं। चूंकि उन्हें अवकाश सहित अन्य सुविधाजनक उपाय नहीं दिए जाते हैं।

नियमों के अनुसार, दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारी मातृत्व अवकाश ले सकती है। पीठ ने कहा कि वर्तमान मामले के तथ्यों से संकेत मिलता है कि अपीलकर्ता के पति ने पहले विवाह किया था, जो उसकी पत्नी की मृत्यु के साथ समाप्त हो गया और उसके बाद अपीलकर्ता ने उससे शादी की थी। उसके (उसके पति के) पूर्व विवाह से दो जैविक बच्चे थे, यह तथ्य वर्तमान मामले में महिला के एकमात्र जीवित (जैविक) बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश देने के लिहाज से अपीलकर्ता के वैधानिक अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा’।

पीठ ने कहा कि तथ्य यह है कि उसे उसके पति की पहले की शादी से पैदा हुए दो बच्चों में से एक के लिए ‘बाल देखभाल अवकाश’ दिया गया था, यह एक ऐसा मामला हो सकता है जहां उस समय अधिकारियों ने एक दयालु दृष्टिकोण अपनाया था। हालांकि, इसका उपयोग उसे केंद्रीय सिविल सेवा अवकाश नियम, 1972 के नियम 43 के तहत छुट्टी की पात्रता से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मातृत्व अवकाश के संबंध में केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के प्रावधानों को संसद द्वारा अधिनियमित मातृत्व लाभ अधिनियम के उद्देश्य के अनुरूप देखे जाने की जरूरत है। अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि ये प्रावधान संसद द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं कि बच्चे की डिलीवरी के लिए अपने कार्यस्थल से महिला की अनुपस्थिति के चलते, उस समय या वो अवधि जिसके लिए उसने अपने बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी ली है, का वेतन पाने के उनके अधिकार में कोई बाधा न आए।

पीठ ने हाईकोर्ट और सीएटी का निर्णय रद्द करते हुए उनका मातृत्व अवकाश मंजूर किया और निर्देश दिया कि उसके आदेश के दो महीने के भीतर जिन भी सुविधाओं/लाभ का उन्हें अधिकार है, उसका भुगतान किया जाए।

खेल – खेल में बच्चों को रखें सक्रिय

बच्चे हंसते-खेलते हुए ही अच्छे लगते हैं। घर में इधर-उधर मस्ती करते, दौड़ते-भागते बच्चे जहां खुश रहते हैं वहीँ यह उनकी फिजिकल फिटनेस के लिए भी अच्छा रहता हैं। हांलाकि आज के समय में फिजिकली एक्टिव नजर नहीं आते हैं और मोबाइल या टीवी में घुसे रहते हैं जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए घातक साबित होता हैं।

खेलना-कूदना बच्चों के विकास का अहम हिस्सा है। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चों की लाइफस्टाइल में ऐसी चीजें शामिल करें जिससे बच्चे खेल-खेल में ही फिजिकली एक्टिव रहे। आज इस कड़ी में हम आपको कुछ ऐसी ही एक्टिविटीज के बारे में बताने जा रहे हैं।

सीढ़ियां चढ़ने के लिए बोलें

बच्चों को सक्रिय रखने का सबसे अच्छा तरीका है उन्हें सीढ़ी चढ़ने के लिए कहें। इससे ना केवल बच्चे एक्टिव फील करेंगे बल्कि उनकी सुस्ती भी भाग जाएगी। ऐसे में आप बच्चे को किसी काम के लिए कह सकते हैं। या आप खुद भी उनके साथ इसको अपना सकते हैं। ऐसा करने से आप भी खुद को एक्टिव महसूस करेंगे और बच्चे आपको देख-दखकर आगे बढ़ेंगे।

लुका – छिपी

लुका -छिपी बचपन में सभी ने खेला होगा। वेरीवैल फैमिली के अनुसार कई बच्चे इस खेम को खेलने के लिए उत्साहित रहते हैं तो वहीं कुछ बच्चे छिपने से डरते हैं। बच्चे का डर निकालने के लिए उसे ऐसी जगह छिपने के लिए बताएं, जहां से उसे सब दिखाई दे रहा हो। इस गेम में बच्चा काफी समय तक व्यस्त रह सकता है और घर में ही छुपने की नई-नई जगह भी तलाश लेगा।

पार्क में ले जाएं

बच्चों को पार्क में ले जाना भी बेहद जरूरी है, इससे उन्हें दूसरे बच्चों को जानने का मौका मिलेगा। बच्चों को शुरू से सोशल स्किल्स सिखाने का यह सबसे अच्छा तरीका है। बच्चों को पार्क में ले जाएं।

डांस

बच्चे को शारीरिक गतिविधि कराने का सबसे बेहतरीन विकल्प है डांस। टोडलर्स स्वाभाविक रूप से म्यूजिक पसंद करते हैं और उस पर बॉडी मूवमेंट भी करना अच्छा लगता है। जब भी बच्चा बोर होता हुआ नजर आए तो उसका फेवरेट म्यूजिक चला दीजिए और उसे एक्टिविटी करने के लिए छोड़ दें। बच्चे को एंटरटेन करने के लिए बच्चों की डांस पार्टी भी प्लान की जा सकती है।

स्कूल से घर तक जाएं पैदल

अगर बच्चों का स्कूल पास है तो किसी बस लेने की बजाय उसे पैदल छोड़ने जाएं। इससे भी उसके अंदर ऊर्जा का संचार होगा और वो पैदल चलन के लिए प्रेरित होगा। बता दें कि पैदल चलने से ना केवल बच्चे की शारीरिक गतिविधि का विकास होगा ब्लकि वे सक्रिय भी रहेंगे। इससे अलग यदि आप बच्चे के साथ मार्केट जा रहे हो तो ऐसे में खुद भी पैदल जाने की कोशिश करें।

व्यवस्थित हो व्यायाम

यदि परिवार के सदस्य मिलकर एरोबिक्स या योगा करते हैं तो बच्चे को भी उसमें शामिल करें। हो सकता है कि बच्चा एक्सरसाइज करने में इंट्रेस्ट न दिखाए, ऐसे में एक्सरसाइज को गेम की तरह करना होगा जिससे वह प्रेरित हो सके। बच्चे के साथ जंपिंग, रनिंग और एरोबिक्स की जा सकती है।

बैलेंसिंग

बैलेंसिग एक बेहतरीन शारीरिक गतिविधि है जो बच्चों के कौशल को विकसित करने में मदद कर सकता है। इससे बच्चे की एकाग्रता बढ़ती है और गिरने का डर भी कम हो जाता है। इसको करने के लिए बच्चे के सिर पर हल्की बुक्स या बैग रखें और उसे इसे बिना गिराए चलने के लिए कहें। ऐसा करने में बच्चा पूरा ध्यान लगाएगा और बेहतर परफॉर्म करेगा।
घर के कामों में मदद
अगर माता-पिता बच्चों की मदद घर के काम में लेंगे तो इससे ना केवल उन्हें सक्रिय रहने में मदद मिलेगी बल्कि घर के कामों में बच्चों की भागीदारी भी बढ़ेगी। ऐसे में माता-पिता बच्चों से बर्तन धुलवा सकते हैं या कार साफ करने के लिए कह सकते हैं।

(साभार – लाइफबेरीज)

जन्माष्टमी पर बनाएं कान्हा की प्रिय पंजीरी

. धनिया- सूखे मेवों की पंजीरी

सामग्री : 100 ग्राम साबुत खड़ा धनिया, 100 ग्राम पिसी शकर, छोटी पाव कटोरी कटे हुए मखाने, 25 ग्राम सूखे खोपरे के टुकड़े, काजू और बादाम की कतरन, 2-3 इलायची पिसी हुई, कुछेक किशमिश, 4-5 केसर के लच्छे, घी (अंदाज से)।

विधि : सबसे पहले एक कड़ाही में छोटा आधा चम्मच घी गर्म करें। अब धनिया डालकर धीमी आंच पर भूनें। जब धनिए से खुशबू आने लगे तब आंच से उतारकर ठंडा कर लें। अब सभी मेवे भूनकर अलग रखें। धनिया ठंडा होने पर मिक्सी में बारीक बीस लें। अब इसमें पिसी शकर, तले मेवे और पिसी इलायची डालकर अच्छी तरह मिलाएं। केसर से सजाएं। लीजिए तैयार है शाही धनिया-ड्राई फ्रूटस की पंजीरी। अब इस प्रसाद से कान्हा जी को भोग लगाएं।


2. राजगिरे की शाही पंजीरी

सामग्री : 100 ग्राम राजगिरे का आटा, 150 ग्राम शक्कर बूरा, 50 ग्राम किशमिश, 100 ग्राम सभी प्रकार के मेवों की कतरन, आधा चम्मच पिसी इलायची, पाव कटोरी तला व बारीक कूटा हुआ गोंद, कुछेक किशमिश, 150 ग्राम घी।

विधि : एक कढ़ाई में घी गरम कर राजगिरे का आटा डालकर धीमी आंच पर गुलाबी होने तक सेंक लें। सिका आटा थोड़ा ठंडा होने के पश्चात शक्कर बूरा और इलायची पाउडर मिलाकर मिश्रण को एकसार कर लें। अब उसमें तला गोंद व मेवों की कतरन तथा किशमिश मिक्स कर दें। लीजिए तैयार है राजगिरे की राजशाही पंजीरी।


3. बेसन की पंजीरी

सामग्री : 100 ग्राम बेसन (चना आटा), शक्कर बूरा 150 ग्राम, मेवा कतरन 100 ग्राम, पाव कटोरी खसखस, चारोली 50 ग्राम, गोंद 25 ग्राम, घी 200 ग्राम, पिसी इलायची पाव चम्मच।

विधि : घी को गरम कर गोंद तलकर रख लें। गरम घी में बेसन डालकर मध्यम आँच पर हल्का लाल होने तक सेंके। उसे थोड़ी देर ठंडा होने के लिए रख दें। अब उसमें शक्कर बूरा, खसखस, चारोली, तली गोंद व इलायची पाउडर डालकर मिश्रण को एकसार कर लें। तैयार पंजीरी में मेवों की कतरन बुरका दें और भगवान को भोग लगाएं।


4. सूखे धनिए की पंजीरी

सामग्री : 100 ग्राम सूखा धनिया पावडर, 50 ग्राम मावा, खोपरा बूरा 50 ग्राम, शक्कर बूरा 100 ग्राम, 4-5 पिसी इलायची पावडर, मेवों की कतरन 50 ग्राम।

विधि : सर्वप्रथम मावे को किसनी से कद्दूकस करके धीमी आंच पर थोड़ा सा सेंक लें। अब उसमें धनिया पाउडर डालें व दो-पांच मिनट भून लें। मिश्रण थोड़ा ठंडा होने के बाद खोपरा व शक्कर का बूरा डालकर मिक्स कर लें। अब उसमें पिसी इलायची व मेवों की कतरन डालकर मिश्रण को एकसार कर लें। तैयार है धनिए की पंजीरी।


5. शाही पंजीरी विथ खसखस और मेवा

सामग्री : 150 ग्राम सूजी, खोपरा बूरा 50 ग्राम, 200 ग्राम शक्कर बूरा, घी 150 ग्राम, बादाम 50 ग्राम, काजू 50 ग्राम, मखाने 50 ग्राम, पाव कटोरी खसखस, पाव कटोरी गोंद।

विधि : एक कड़ाही में घी गरम करके सभी मेवों को तलकर रख लें। ठंडे होने के पश्चात उसको मिक्सी में बारीक पीस लें। इसी घी में सूजी डालकर धीमी आँच पर गुलाबी होने तक भून लें। सूजी हल्की गुनगुनी रहने पर उसमें शक्कर व खोपरे का बूरा तथा खसखस मिला दें। और साथ ही बारीक कूटे मेवे डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। लीजिए तैयार है कृष्ण की मनपसंद मेवा पंजीरी।

आजादी की लड़ाई की प्रमुख वीरांगना हैं सुभद्रा कुमारी चौहान: डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी

कोलकाता । राष्ट्र के प्रति गौरव बोध को जगाने वाली वीरांगनाओं में सुभद्रा कुमारी चौहान अग्रिम पंक्ति की अधिकारिणी हैं। इस संदर्भ में महादेवी वर्मा भी हमारी स्मृतियों में सुरक्षित हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में तारा देवी हरख चंद कांकरिया जैन कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित “जाओ सुभद्रा याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ.प्रेम शंकर त्रिपाठी ने ये उद्गार व्यक्त किए। राष्ट्रीय चेतना की सजग कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘झांसी की रानी’ के वाचन और विद्यार्थियों द्वारा उनकी कहानी ‘ गुलाब सिंह’ के मंच- प्रस्तुतीकरण से अभिभूत डॉक्टर त्रिपाठी ने कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान के प्रति प्रदर्शित कृतज्ञता बोध हमारी नई पीढ़ी को कृतज्ञता का पाठ पढ़ायेगा।डॉ.तारा दूगड़ ने डॉ.प्रेमशंकर त्रिपाठी का सारगर्भित परिचय प्रस्तुत किया। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मौसमी सिंह सेनगुप्ता ने सभी का स्वागत करते हुए स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अमृत महोत्सव की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

डॉ. किरण सिपानी ने सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को उद्धृत करते हुए उनके क्रांतिकारी राष्ट्रीय चरित्र के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की। उन्होंने यह भी बताया कि सुभद्रा जी की राष्ट्रप्रेम की भावना को सम्मानित करते हुए भारत सरकार द्वारा 1976 में इनके नाम का एक डाक टिकट जारी किया गया और नए नियुक्त एक तटरक्षक जहाज को “सुभद्रा कुमारी चौहान” का नाम दिया गया है। श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन सभा के 94 वर्षीय अध्यक्ष श्री सरदारमल जी कांकरिया ने नई पीढ़ी का आह्वान करते हुए अपने उत्साहपूर्ण संबोधन में कहा कि इतिहास की घटनाओं से प्रेरणा लेकर वर्तमान परिस्थितियों में भी राष्ट्र गौरव को सुरक्षित रखें। कॉलेज के अंग्रेजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की छात्राओं ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ और ‘ये देश मेरे’ जैसे देशभक्ति के गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। प्रो. स्वाति शर्मा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।डॉ. बृजेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में फिल्म स्टडीज एवं जर्नलिज्म तथा अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक -प्राध्यापिकाओं की भूमिका सराहनीय रही। कॉलेज के सचिव ललित कांकरिया ने मंच पर उपस्थित रहकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम में प्राध्यापक-प्राध्यापिकाओं, विद्यार्थियों और अशिक्षक कर्मचारियों का उत्साह देखते ही बनता था। अंत में राष्ट्रगान की अद्भुत समवेत प्रस्तुति की गई।

देशराग अमृत – चित्रांकन प्रतियोगिता

अनन्या चौधरी

 

अयांश सिंह

 

आराध्या कुमारी

 

 

 

आरुषि कुमारी

 

पंखुड़ी कुमारी

 

फ्लोरेंस चौधरी
समृद्धि चौधरी

भवानीपुर कॉलेज ने बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

कोलकाता । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 76 वीं वर्षगांठ अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी। विद्यार्थी रौनक तातिर ने नाट्य अभिनय द्वारा बिरसा मुंडा की कहानी अपनी जुबानी सुनाई। इस अवसर पर तिरंगा फहराया गया जिसमें प्रमुख अतिथि एयर फोर्स के कमांडिंग अॉफिस विष्णु शर्मा और कॉलेज के ट्रस्टी बुलबुल भाई शाह ने ध्वजारोहण किया। साथ में उमेश ठक्कर, जीतू भाई शाह, नलिनी पारेख, रेणुका शाह, कॉलेज के डायरेक्टर डॉ सुमन मुखर्जी,डीन प्रो दिलीप शाह, टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय, और शिक्षक- शिक्षिकाएं शामिल रहे। बुलबुल भाई शाह और टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय ने अपने वक्तव्य रखते हुए सभी को स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएं दीं। कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी ने सीओ विष्णु शर्मा को कॉलेज का मोमेंटो प्रदान कर उनका सम्मान किया। क्रिसेंडो, फ्लेम, इन-एक्ट, फैशनिस्टा, डिजाइनिंग एकेडमी, के विद्यार्थियों द्वारा देशभक्ति के गीत, नृत्य, संगीत, लघु नाटक, रैंप और विभिन्न देश भक्ति के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कॉलेज की एनसीसी टीम द्वारा झंडे को सलामी दी गई और मार्च पास्ट किया गया। वहीं भवानीपुर स्कूल के आईएसीसी और आईसीएससी के विद्यार्थियों ने गीत- संगीत और नृत्य की प्रस्तुति देने के साथ ही मार्चपास्ट किया।डिजाइनिंग एकेडमी ने प्रथम बार अपनी नृत्य प्रस्तुति दी। एयर फोर्स के कमांडिंग अॉफिसर विष्णु शर्मा ने अपने बचपन में एयर फोर्स को क्यों चुना, कारगिल युद्ध और एलोसी के अनुभवों को विद्यार्थियों से साझा किया।रैंकिंग सेरेमनी में सीओ विष्णु शर्मा ने एनसीसी के नौ कैडट को रैंक प्रदान किए गए वहीं प्रो दिलीप शाह को एयर फोर्स की कैप से सम्मानित किया विष्णु शर्मा ने।आर्मी के दो प्रतिनिधि ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इन-एक्ट के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक किया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कॉलेज के शिक्षक और शिक्षिका और छात्र और छात्रा को सर्वश्रेष्ठ वेशभूषा को दी गई। भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थी अनुपूर्वा मुखर्जी द्वारा निर्देशित एक पुरस्कृत लघु फिल्म लाहौर दिखाई गई। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने बच्चों से प्रासंगिक प्रश्नोत्तर भी किए। स्वतंत्रता दिवस पर बहुत बड़ी संख्या में भवानीपुर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह और अध्यक्ष चंपक भाई डोशी ने शुभकामनाएँ प्रेषित की।