कोलकाता । हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को द पाइनियर ऑफ एवेन्ट – ग्रेड लर्निंग अवार्ड अवार्ड मिला है। पीआरएसआई के कोलकाता ब्रैंडेज समिट 2022 में संस्थान को यह पुरस्कार मिला। समिट का उद्घाटन पद्मश्री पीयूष पांडेय ने किया जिनकी पुस्तक ओपन हाउस विद पीयूष पांडेय का लोकार्पण भी किया गया। सम्मेलन में डिजिटल ब्रांडिंग, कन्टेंट मार्केटिंग, आज के समय में ब्रांडिंग और जनसम्पर्क पर पद्मश्री डॉ.नीरू कुमार, टीमवर्क्स आर्ट के प्रबन्ध निदेशक संजय राय, कंटेंट क्रियेटर मनीष पांडेय, एड फैक्टर्स पीआर के उपाध्यक्ष विक्रम कर्वी ने विचार रखे। सम्मेलन में 25 स्टार्टअप प्रदर्शित किये गये जिनमें से 8 स्टार्टअप को 25 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली। हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को दिया गया द पाइनियर ऑफ एवेन्ट – ग्रेड लर्निंग अवार्ड संस्थान की ओर से हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी. के. अग्रवाल ने कोलकाता में यूएस की कौंसुल जनरल मेलिंडा पावेक से लिया। उन्होंने यह पुरस्कार राष्ट्र को समर्पित किया। समारोह में श्री शिक्षायतन फाउंडेशन और ओम दयाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस को भी उनके योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया।
सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में अलंकरण समारोह
कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में जूनियर स्टूडेंट्स काउंसिल का अलंकरण समारोह हाल ही में आयोजित किया गया। स्कूल के सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में आयोजित अलंकरण समारोह का आरम्भ हेडमिस्ट्रेस श्रीमती पांजा के वक्तव्य से हुआ। छात्राओं ने नेतृत्व को प्रेरित करता गीत गाया। विद्या मंदिर सोसायटी के महासचिव मेजर जनरल चतुर्वेदी ने छात्राओं स्व – अनुशासन, नेतृत्व एवं सशक्तीकरण हेतु प्रेरित किया। इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह हुआ। स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती दे ने कार्यकारिणी की छात्राओं को बैज पहनाया। समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ।
बिड़ला हाई स्कूल में मना भारतीय स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव
कोलकाता । बिड़ला हाई स्कूल में स्वतन्त्रता दिवस समारोह गत 15 अगस्त को आयोजित किया गया। विद्या मंदिर सोसायटी के महासचिल मेजर जनरल चतुर्वेदी ने ध्वजारोहण किया। राष्ट्रगान को देशभक्ति के जोश के साथ गाया गया और उसके बाद मेजर जनरल चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए भारतीय स्वतन्त्रता को लेकर अपने विचार साझा किये। उन्होंने छात्रों से भारतीयों के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान पर गर्व करने का आग्रह किया, और उन्हें राष्ट्र को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने की उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई। इस अवसर पर देशभक्ति के रंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बिखरे। “सारे जहां से अच्छा। वाद्य यंत्र की प्रस्तुति के बाद, अंग्रेजी की एक वरिष्ठ शिक्षिका सुश्री एल अग्रवाल ने अपना भाषण दिया। उन्होंने स्वतंत्रता, या स्वतंत्रता की हमारी धारणा के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए और हमें याद दिलाया कि पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हमारा संघर्ष खत्म नहीं हुआ था। अगला प्रदर्शन एक नृत्य था जिसमें भारतीय शास्त्रीय नृत्यों को पश्चिमी धुनों के साथ जोड़ा गया था, जिसमें हिंदू पाठ, विष्णु पुराण से एक किंवदंती को चित्रित किया गया था। स्कूल के अध्यक्ष युक्त खेमका ने समारोह को संबोधित किया, जिसके बाद जूनियर वर्ग के छात्रों के देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। अंत में, आधुनिकता और अमानवीयता की बेड़ियों से, समय के जाल से पूर्ण स्वतंत्रता के पहलू को सीनियर स्कूल के छात्रों द्वारा एक नृत्य के माध्यम से फिर से प्रदर्शित किया गया जिसमें रवीन्द्रनाथ ठाकुर के गीतों का उपयोग कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम के अंत में, सभी को स्कूल से एक अनुकूलित फ़ोल्डर और मिठाई वितरित की गयी।
रपट : एल अग्रवाल
मानवीय संस्कृति के लेखक हैं प्रेमचंद
‘आजादी के 75 साल: प्रेमचंद का भारत’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
मिदनापुर। राजा नरेंद्र लाल खान महिला महाविद्यालय (स्वायत्त) के हिंदी विभाग द्वारा ‘आज़ादी के 75 साल: प्रेमचंद का भारत’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के संगीत विभाग के अध्यापक एवं छात्राओं द्वारा संगीत प्रस्तुति के साथ हुई। कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु गुप्ता ने स्वागत वक्तव्य देते हुए बताया कि हमारे कॉलेज को देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शामिल किया गया है।हमारे कॉलेज की प्रिंसिपल के सहयोग से हम निरंतर प्रगति कर रहे हैं।प्रेमचंद का साहित्य भारतीयता का साहित्य है। प्रथम सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए रेवेंशा विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अजय पटनायक ने कहा कि आजादी के75वर्षों में देश ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काफी विकास किया है।प्रेमचंद के सपनों को पूरा करने का भरपूर प्रयास आज भी जारी है।। बीज वक्तव्य देते हुए विश्वभारती शांतिनिकेतन के पूर्व प्रोफेसर हरिश्चंद्र मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमें गलत चीजों का विरोध करना सिखलाता है।प्रेमचंद ने समाज के बड़े हिस्से को अपनी रचना के केंद्र में रखा है।वे हमें नैतिक मूल्यों से जोड़ते हैं।इस अवसर पर हिंदी विश्वविद्यालय हावड़ा के उपकुलपति प्रोफेसर दामोदर मिश्र के वक्तव्य का वाचन शोधार्थी मधु सिंह द्वारा किया गया। बतौर वक्ता विद्यासागर विश्वविद्यालय, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य में जीवन की जो छवियां हैं वे हमें बेचैन करती हैं।आज भी दलित हाशिये पर हैं।प्रेमचंद ने ऐसे भारत का सपना नहीं देखा था,जहां मटके का पानी पीने के लिए एक दलित बच्चे को मरना पड़ा। खड़गपुर कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ पंकज साहा ने कहा कि प्रेमचंद के भारत को देखने के लिए हमें प्रेमचंद को सिर्फ पढ़ना ही नहीं होगा उसे जीवन में भी उतारना होगा। इस सत्र में डॉ. प्रकाश अग्रवाल और रूपेश कुमार यादव ने आलेख पाठ किया। इस सत्र का संचालन अतिथि प्रवक्ता रवि पंडित ने किया। दूसरे सत्र की शुरुआत कॉलेज के अंग्रेजी विभाग की छात्रा प्रतिभा कारक द्वारा राष्ट्रप्रेम पर आधारित गीत के साथ हुई। इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी प्रेमचंद के सपनों का भारत नहीं बन पाया।गरीबों, दलितों, वंचितों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिली।वे राजनीतिक परिवर्तन के साथ सामाजिक क्रांति की अपेक्षा रखते हैं ताकि मानवीय संस्कृति का विकास हो सके। बतौर वक्ता विद्यासागर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद के पात्र जीवन में छोटे-छोटे संघर्षों के बीच अपनी मुक्ति का स्वप्न देखते हैं।वे भारतीय जनमानस के लेखक हैं। मिदनापुर ऑटोनोमस कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रणजीत सिन्हा ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी और उर्दू समाज में समान रूप से स्वीकृत हैं।उन्होंने भारतीय समाज को खंड-खंड में देखने के बजाय समग्रता में देखा। खड़गपुर कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. संजय पासवान ने कहा कि प्रेमचंद वंचितों के लेखक हैं। इस सत्र में राकेश चौबे, मधु सिंह एवं सोनम सिंह ने आलेख पाठ किया। इस अवसर पर अंकिता द्विवेदी ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर कॉलेज स्तर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी प्रथम स्थान के लिए संयुक्त रूप से रुथ कर एवं नेहा शर्मा को द्वितीय और तृतीय के लिए क्रमशः पायल गुप्ता और लता मेहरा को पुरस्कृत किया गया। इस सत्र का संचालन अतिथि प्रवक्ता पंकज सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका सुमिता भकत ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
स्वतन्त्रता दिवस पर ब्लैक कर्टेन थिएटर ” ने किया नुक्कड़ नाटक
कोलकाता । 75 वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर ” ब्लैक कर्टेन थिएटर ” ने रवीन्द्र सदन, अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स के पास एक नुक्कड़ नाटक का अयोजन किय़ा। इस नुक्कड़ नाटक के जरिये किसानो के साथ हो रहे अन्याय और उनकी समस्याओं पर प्रकाश डाल दर्शको से प्रश्न करते हुए उन्हें ये बताया की आज़ादी के इतने वर्ष के बाद भी हम अब तक समाज के बंधनो मे किस तरह बन्धे हुए हैं जो हमें मानसिक रुप से आज़ाद नहीं होने देती। हमारे सोच को एक घेरे मे बाँधी रखती हैं, और उसे विकसित होने से रोकती है l स्वतन्त्रता दिवस के शुभ अव्सर पर “ब्लैक कर्टेन थिएटर” का पहला नुक्कड़ नाटक बहुत ही सहजता से एकत्रित दर्शको पर छाप छोड़ी।
ला मार्टिनियर फॉर ब्वॉयज में तीन दिवसीय पैट्रियोटिक मीट आयोजित
कोलकाता । स्वाधीनता के 75वें वर्ष पर हाल ही में ला मार्टिनियर फॉर ब्वायज में देशभक्ति परकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस तीन दिवसीय पैट्रियोटिक मीट में विद्यालय के आत्मोदय भवन में वाद – विवाद समेत अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी। गत 10 अगस्त मिडिल स्कूल में वाद – विवाद प्रतियोगिता में छठीं से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता की विजेता बी.डी.एम. इंटरनेशनल की एंजिल भट्टाचार्य बनी जबकि ला मार्टिनियर फॉर गर्ल्स की लावण्या जैन द्वितीय स्थान पर रही। लोरेटो डे स्कूल, इलियट रोड की वेदिका टंडन और बी.डी. एम इंटरनेशनल की अवनी ने भी सराहनीय प्रदर्शन किया। 13 अगस्त को समारोह के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। इन गतिविधियों में नृत्य, संगीत,देश भक्ति गीत शामिल थे। प्रतिभागी शिक्षण संस्थानों में राजस्थान विद्या मंदिर, सिल्वर प्वाइंट स्कूल, सेंट स्टीफन्स, हावड़ा, लारेटो डे स्कूल धर्मतल्ला, आर्मी पब्लिक स्कूल, सेंट स्टीफेंस, नेपालगंज, सेंट मैरी स्कूल दमदम, कलकत्ता इम्यूनल स्कूल, सैफी गोल्डेन जुबली इंग्लिश पब्लिक स्कूल, सेंट जोसेफ काॅलेज, पार्थ मेमोरियल स्कूल, यंग हॉरिजन स्कूल, जुलियन डे स्कूल कोलकाता, जुलियन डे स्कूल हावड़ा, ला मार्टीनियर फाॅर गर्ल्स, ला मार्टीनियर फाॅर ब्वायज विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रधान अतिथि एयर कमांडर महेश अग्रवाल एवं मुख्य अतिथि राजीव कुमार झा ने आयोजन की सराहना की। कुछ स्कूल के प्रधानाचार्यों वीडियो सन्देश के माध्यम से शुभकामनाएं भेजीं। ला मार्टीनियर फाॅर ब्वायज स्कूल के कार्यवाहक प्रिंसिपल जाॅन स्टीफन्स, विद्यालय के सचिव सुप्रियो धर ने बच्चों को प्रेरक वजन कहे। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का संचालन पहले दिन डेल रे और चंदन कुमार ने किया जबकि अंतिम दिन का संचालन अदिति राज सिंह एवं आरव बच्छावत ने किया। धन्यवाद ज्ञापन स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक बलवंत सिंह ने किया।
मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड ने स्थापित की इनोवेशन सेल
कोलकाता । सभी के लिए उच्च गुणवत्ता, उन्नत और लागत प्रभावी नैदानिक परीक्षण तक पहुंच सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड ने मॉलिक्यूलर जीनोमिक्स पर ध्यान केंद्रित करते हुए गुरुवार को महानगर कोलकाता में मेट्रोपोलिस इनोवेशन सेल के शुभारंभ की घोषणा की। इनोवेशन सेल के तहत, मेट्रोपोलिस गर्भावस्था, कैंसर, संक्रामक रोगों और ट्रांसप्लांट प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विशिष्ट परीक्षण शुरू कर रहा है। इनोवेशन सेल के शुभारंभ की घोषणा करते हुए मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड की प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर अमीरा शाह कहा कि संगठन की इनोवेशन और आर एंड डी शाखा के रूप में, मेट्रोपोलिस इनोवेशन सेल मौलिक वैज्ञानिक खोजों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इतना ही नहीं यह बदले में सबसे भरोसेमंद वैज्ञानिक ब्रांड होने के कंपनी के दृष्टिकोण और मिशन को बढ़ावा देगा और रोगी और चिकित्सकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए विशेषज्ञता और ईमानदारी के साथ आंतरिक स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करेगा। इन क्षेत्रों में अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए, हम अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करने और देशभर में मरीजों की सेवा करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार और निवेश करना जारी रखेंगे। वहीं मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर लिमिटेड की मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कीर्ति चड्ढा ने कहा कि मेट्रोपोलिस हमेशा प्रौद्योगिकियों, परीक्षणों और प्लेटफार्मों के सत्यापन में सबसे आगे रहा है जो सीधे रोगी को सटीक समय पर निदान सुनिश्चित करता है। लाखों रोगियों को प्रभावित करने के बाद, हम नेक्स्ट जनेरेशन सीक्वेंसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से ऑन्कोलॉजी, प्रीनेटल टेस्टिंग, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलॉजी, संक्रामक और पुरानी बीमारियों के दायरे का पोषण और विस्तार करना चाहते हैं। नए विशेष परीक्षणों के शुभारंभ पर, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के क्षेत्रीय प्रयोगशाला प्रमुख (पूर्व) डॉ रजत मुखर्जी ने कहा कि पिछले पिछले 40 वर्षों में नैदानिक उद्योग में विशेष परीक्षण शुरू करने का हमारा एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। हमारा ध्यान विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का निर्माण करने और देशभर के टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी रोगियों को ‘सस्ती’ परीक्षण की पेशकश करने के लिए लगातार अधिक अवसरों की तलाश करने पर है। पश्चिम बंगाल में मेट्रोपोलिस एक दशक से अधिक समय से विभिन्न रोगी संग्रह केंद्रों और पिक-अप पॉइंट्स के साथ मौजूद है, जो 600+ ग्राहकों को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि कोलकाता में हमारे सभी केंद्रों और पूरे पश्चिम बंगाल क्षेत्र में मरीजों के लिए नए विशेष परीक्षण उपलब्ध होंगे और हमारी टीम न्यूनतम टर्नअराउंड समय सीमा के भीतर सटीक और व्यापक परिणाम सुनिश्चित करेगी। डॉ रजत मुखर्जी ने आगे कहा कि किसी भी बीमारी के मूल कारण की पहचान जीती गई लड़ाई है। यहीं पर डायग्नोस्टिक सेक्टर आता है। मेट्रोपोलिस में हम न केवल मूल कारण की पहचान करते हैं, बल्कि पैटर्न का भी अध्ययन करते हैं और स्थिति को रोकने के लिए निवारक उपायों का सुझाव दे सकते हैं।
दही हांडी…परम्परा में छुपे हैं जीवन प्रबन्धन के गुण
भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का महापर्व इस वर्ष 18-19 अगस्त को पूरे देशभर में मनाया जा रहा है। कृष्ण जन्माष्टमी त्योहार भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो हिंदुओं द्वारा पूजे जाने वाले सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर दही-हांडी उत्सव मनाने की एक विशेष परंपरा भी सदियो से चलती आ रही है। इस उत्सव में युवा टोलियां बनाकर ऊंचाई पर बंधी दही-हांडी फोड़ते हैं।
ये परंपरा किसने शुरू की, इस बात का जानकारी तो नहीं मिलती, लेकिन किसी समय छोटे से स्तर से शुरू हुई ये परंपरा आज पूरे देश में बड़े स्तर पर निभाई जाती है। महाराष्ट्र में इसका उत्साह देखते ही बनता है। इस परंपरा के पीछे भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की घटनाएं हैं। इस परंपरा के पीछे लाइफ मैनेजमेंट के कई सूत्र भी छिपे हैं। आइए जानें क्या है दही हांडी उत्सव और क्यों मनाया जाता है ये पर्व-
श्रीमद्भागवत के अनुसार, बाल्यकाल में भगवान श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर लोगों के घरों से माखन चुराकर अपने मित्रों को खिला देते हैं और स्वयं भी खाते थे। जब यह बात गांव की महिलाओं को पता चली तो उन्होंने माखन की मटकी को ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया, जिससे श्रीकृष्ण का हाथ वहां तक न पहुंच सके। लेकिन नटखट कृष्ण की समझदारी के आगे उनकी यह योजना भी व्यर्थ साबित हुई। माखन चुराने के लिए श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक पिरामिड बनाते और ऊंचाई पर लटकाई मटकी से दही और माखन चुरा लेते थे। इसी से प्रेरित होकर दही-हांडी का चलन शुरू हुआ।
दही-हांडी पूरे भारत में सबसे मशहूर है। खासकर गुजरात, द्वारका, महाराष्ट्र के हर गली-मुहल्ले में दहीं हांडी की प्रतियोगिता रखी जाती है। यहां मटकी में दही के साथ घी, बादाम और सूखे मेवे भी डाले जाते हैं, जिसे युवाओं की टोली मिलकर तोड़ती है। वहीं लड़कियों की एक टोली गीत गाती हैं और उन्हें रोकने की कोशिश करती हैं।
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, मक्खन एक तरह से धन का प्रतीक है। जब हमारे पास आवश्यकता से अधिक धन हो जाता है तो उसे हम संचित यानी इक्ट्ठा कर लेते हैं जबकि होने ये चाहिए धन अधिक होने पर पहले उसका कुछ भाग जरूरतमंदों को दान करें।
श्रीकृष्ण माखन चुराकर पहले अपने उन मित्रों को खिलाते थे जो निर्धन थे। श्रीकृष्ण कहते हैं कि यदि आपके पास कोई वस्तु आवश्यकता से अधिक है तो पहले उसका दान करो, बाद में उसका संचय करो। इस बात का ध्यान सभी को रखना चाहिए।
माखन और दही खाने से जुड़ा एक अन्य लाइफ मैनेजमेंट ये भी है कि बाल्यकाल में बच्चों को सही पोषण मिलना अति आवश्यक है। दूध, दही, माखन आदि चीजें खाने से बचपन से ही बच्चों का शरीर सुदृढ़ रहता है और वे आजीवन तंदुरुस्त बने रहते हैं।
(साभार – नवभारत टाइम्स)
दूध बेचकर-रिक्शा चलाकर बने स्कूल शिक्षक और सब कुछ दान कर दिया
39 साल बाद सेवानिवृत्त होकर गरीब बच्चों को बांटे लाखों रुपये
पन्ना । मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक ने 39 साल की सेवा के बाद अपनी सेवानिवृत्ति के दिन अपने कर्मचारी भविष्य निधि और 40 लाख रुपये की ग्रेच्युटी के सभी पैसे गरीब छात्रों को दान कर दिए हैं। विजय कुमार चनसोरिया को खंडिया के एक प्राथमिक विद्यालय में काम के अंतिम दिन उन्हें सम्मानित किया गया। उनके सहयोगियों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह घोषणा की।
दूध बेचा, रिक्शा चलाया फिर बना शिक्षक
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, विजय कुमार चनसोरिया ने कहा, ‘अपनी पत्नी और बच्चों की सहमति से मैंने अपने सभी भविष्य निधि और ग्रेच्युटी के पैसे गरीब छात्रों के लिए स्कूल को दान करने का फैसला किया है। दुनिया में दुखों को कोई कम नहीं कर सकता है, लेकिन हमें जो कुछ भी अच्छा हो सकता है, वह करना चाहिए।’ बाद में पत्रकारों से बात करते हुए रिटायर्ड शिक्षक ने कहा, ‘मैंने बहुत संघर्ष किया है। मैंने रिक्शा चलाया और अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दूध बेचा। मैं 1983 में एक शिक्षक बन गया।’
शिक्षक के परिवार वाले इस फैसले से खुश
चनसोरिया ने कहा कि उनके दोनों बेटे काम कर रहे हैं और उनकी बेटी की शादी हो चुकी है। उन्होंने कहा, ‘मैं गरीब छात्रों से मिला जो अभाव में रहते थे और उनके लिए दान करते थे। जब भी मैंने उनकी मदद की, मैंने उनकी खुशी देखी. मेरे बच्चे पहले से ही बसे हुए हैं और मैंने अपने सभी भविष्य निधि और 40 लाख रुपये की ग्रेच्युटी राशि दान करने का फैसला किया.’ शिक्षक की पत्नी हेमलता और बेटी महिमा ने कहा कि पूरे परिवार ने उनके फैसले का समर्थन किया था।
(साभार – जी न्यूज)
बुजुर्गों को रेल टिकट में फिर मिलेगी छूट, लेकिन अब बदलेंगे नियम!
नयी दिल्ली । भारतीय रेलवे ने कोरोना काल के समय बंद हुए बुजुर्गों और खिलाड़ियों समेत दूसरे कैटगरी के यात्रियों को रियायती टिकट की सेवा फिर से शुरू करने पर सरकार विचार कर रही है।
दरअसल, आलोचनाओं के बाद रेलवे वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायतें बहाल करने पर विचार कर रहा है लेकिन संभव है यह केवल सामान्य और शयनयान श्रेणी के लिए हो।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार इसके नियम और शर्तें जैसे आयु मानदंड में बदलाव कर सकती है। ऐसा हो सकता है कि सरकार रियायती किराये की सुविधा 70 वर्ष से ऊपर के लोगों को मुहैया कराए जो पहले 58 वर्ष की महिलाओं और 60 वर्ष के पुरुषों के लिए थी। सूत्रों ने संकेत दिया है कि इसके पीछे मुख्य कारण बुजुर्गों के लिए सब्सिडी बरकरार रखते हुए इन रियायतों को देने से रेलवे पर पड़ने वाले वित्तीय भार का समायोजन करना है।
गौरतलब है कि रेलवे ने मार्च 2020 से पहले वरिष्ठ नागरिकों के मामले में महिलाओं को किराये पर 50 फीसदी और पुरुषों को सभी क्लास में रेल सफर करने के लिये 40 फीसदी छूट देता था। रेलवे की तरफ से ये छूट लेने के लिये बुजुर्ग महिलाओं के लिए न्यूनतम आयु सीमा 58 और पुरुषों के लिये 60 वर्ष थी लेकिन कोरोना काल के बाद इन्हें मिलने वाली सभी तरह की रियायतें खत्म कर दी गई है।
एक सूत्र ने कहा, ‘हम समझते हैं कि ये रियायतें बुजुर्गों की मदद करती हैं और हमने कभी नहीं कहा कि हम इसे पूरी तरह से खत्म करने जा रहे हैं। हम इसकी समीक्षा कर रहे हैं और इस पर फैसला लेंगे।’ सूत्रों ने संकेत दिया कि रेलवे बोर्ड वरिष्ठ नागरिकों की रियायत के लिए आयु मानदंड में बदलाव करने और इसे केवल 70 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए मुहैया कराने पर विचार कर रहा है। यह रेलवे के दायित्वों को सीमित करेगा।’
2020 से बंद है सुविधा
2020 में कोरोना वायरस महामारी के दौरान वापस लेने से पहले, वरिष्ठ नागरिक रियायत 58 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं और 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए थी। महिलाएं 50 प्रतिशत छूट के लिए पात्र थीं। पुरुष और ट्रांसजेंडर सभी श्रेणियों में 40 प्रतिशत छूट का लाभ उठा सकते थे। रेलवे जिस एक और प्रावधान पर विचार कर रहा है। वह है रियायतों को केवल गैर-वातानुकूलित श्रेणी की यात्रा तक सीमित करना। एक सूत्र ने कहा, ‘तर्क यह है कि अगर हम इसे शयनयान और सामान्य श्रेणियों तक सीमित रखते हैं, तो हम 70 प्रतिशत यात्रियों को समायोजित कर लेंगे। ये कुछ विकल्प हैं जिन पर हम विचार कर रहे हैं और किसी भी चीज को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।’
रेलवे इस पर भी कर रही है विचार
रेलवे एक अन्य विकल्प पर भी विचार कर रहा है, वह यह है कि सभी ट्रेनों में ‘प्रीमियम तत्काल’ योजना शुरू की जाए। इससे उच्च राजस्व उत्पन्न करने में मदद मिलेगी, जो रियायतों के बोझ को वहन करने में उपयोगी हो सकता है। यह योजना फिलहाल करीब 80 ट्रेनों में लागू है। प्रीमियम तत्काल योजना रेलवे द्वारा शुरू किया गया एक कोटा है जो कुछ सीटें गतिशील किराया मूल्य निर्धारण के साथ आरक्षित करता है।
यह कोटा अंतिम समय में यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए है जो थोड़ा अतिरिक्त खर्च करने को तैयार हैं। प्रीमियम तत्काल किराये में मूल ट्रेन किराया और अतिरिक्त तत्काल शुल्क शामिल होता है। पिछले सप्ताह रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि रियायतें देने की लागत रेलवे पर भारी पड़ती है। उन्होंने कहा था, ‘विभिन्न चुनौतियों के मद्देनजर वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी श्रेणियों के यात्रियों को रियायतें देने का दायरा बढ़ाना वांछनीय नहीं है।’




