Saturday, March 14, 2026
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बंगाल में 26 लाख मतदाताओं का 2002 के रिकॉर्ड से मिलान नहीं

-मुंबई में 11 लाख से अधिक डुप्लीकेट नाम मिले

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी घमासान के बीच अब चुनाव आयोग ने एक बड़ा खुलासा किया है। बंगाल की मौजूदा मतदाता सूची और 2002 में तैयार हुई सूची के मिलान में करीब 26 लाख नाम मेल नहीं खाते। चुनाव आयोग ने बताया कि मुंबई की मतदाता सूची में भी 10.64 प्रतिशत यानी 11 लाख से अधिक डुप्लीकेट नाम पाए गए हैं। लेकिन बंगाल का मामला कहीं अधिक बड़ा और संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यहां एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल लगातार विरोध जता रहे थे। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा मतदाता सूची की तुलना पिछली SIR प्रक्रिया (2002-2006) के रिकॉर्ड से करने पर इन 26 लाख नामों की विसंगति सामने आई। आयोग के पोर्टल पर बुधवार दोपहर तक पश्चिम बंगाल से 6 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्र अपलोड किए जा चुके थे। अधिकारी के अनुसार, जब ये प्रपत्र मैपिंग प्रक्रिया में आते हैं, तब उनका मिलान पुराने रिकॉर्ड से किया जाता है। प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि बंगाल में लगभग 26 लाख मतदाताओं का मिलान 2002 के रिकॉर्ड से नहीं हो पा रहा है। यह बयान उस समय आया है, जब राज्य के कई हिस्सों में एसआईआर को लेकर राजनीतिक स्तर पर विरोध हो रहा है और सत्तारूढ़ दल इसे अनुचित हस्तक्षेप बताता रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में रिकॉर्ड मिसमैच चाहे वह आउटमाइग्रेशन, डेथ रिकॉर्ड्स, एड्रेस शिफ्ट या डुप्लिकेशन की वजह से हो; चुनाव की पारदर्शिता को सीधे प्रभावित करने वाला पहलू है। चुनाव आयोग का यह खुलासा अब उस राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है, जिसमें राज्य सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर मतदाता सूची में गड़बड़ी कराने के आरोप लगाते रहे हैं।
दूसरी ओर, मुंबई की ताजा मतदाता सूची भी चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 1.03 करोड़ मतदाताओं में से 11 लाख से अधिक नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं। कुछ वार्डों में एक ही व्यक्ति का नाम 2 से लेकर 103 बार तक दर्ज मिला। एसईसी ने आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख अब 3 दिसंबर कर दी है और अंतिम सूची 10 दिसंबर को प्रकाशित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई की स्थिति बताती है कि देशभर में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कितना आवश्यक है, जबकि बंगाल के आंकड़े इस दिशा में सबसे बड़ा अलार्म हैं।

असम में बहुविवाह प्रतिबंध विधेयक पारित

गुवाहाटी । असम विधानसभा ने गुरुवार को असम प्रोहिबिशन ऑफ पॉलिगैमी बिल, 2025 को मंजूरी दे दी। इसी दौरान मुख्यमंत्री डॉ हिमंत बिस्व सरमा ने सदन में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यदि वे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद फिर से सत्ता में लौटते हैं तो नई सरकार के पहले सत्र में ही यूसीसी पेश किया जाएगा और बिना किसी देरी के लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बहुविवाह प्रतिबंध कानून “यूसीसी की दिशा में उठाया गया ठोस कदम” है और सभी समुदायों में व्यक्तिगत कानूनों की एकरूपता लाना उनकी प्रतिबद्धता है। विधेयक में बहुविवाह को दंडनीय अपराध माना गया है, जिसके लिए 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और षष्ठ अनुसूची के अधीन क्षेत्रों को इस कानून से मुक्त रखा गया है। सरमा ने स्पष्ट किया कि यह कानून “धर्म निरपेक्ष” है और किसी एक समुदाय को लक्षित नहीं करता। उनके अनुसार, “हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चियन—सभी समाजों में बहुविवाह के मामले मिलते हैं, इसलिए यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा।” सरकार की एकता की अपील के बावजूद एआईयूडीएफ और माकपा ने विधेयक में संशोधन की मांग की, लेकिन सभी संशोधन ध्वनिमत से खारिज कर दिए गए। सरमा ने यह भी घोषणा की कि सरकार फरवरी अंत तक “छलपूर्वक विवाह” के खिलाफ एक अलग विधेयक लाएगी, जिसे वे आम बोलचाल में “लव-जिहाद” से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की दिशा में एक कदम बताते हैं।

पीएम ने लॉन्च किया स्काईरूट का इन्फिनिटी कैंपस और रॉकेट ‘विक्रम-I’

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हैदराबाद में भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप स्काईरूट का नया इन्फिनिटी कैंपस उद्घाटित किया। उन्होंने कंपनी का पहला कक्षीय रॉकेट विक्रम-I भी पेश किया, जो उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम है। इन्फिनिटी कैंपस में लगभग 2,00,000 वर्ग फीट का अत्याधुनिक कार्यक्षेत्र है। यहाँ वैज्ञानिक और इंजीनियर रॉकेट डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण कर सकेंगे। स्काइरूट के इस नये इन्फिनिटी कैंपस में अत्याधुनिक रॉकेट बनाने की सुविधा है। इस कैंपस में हर महीने एक नया कक्षीय रॉकेट बनाने की क्षमता है। मोदी ने कहा कि यह भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत को अंतरिक्ष में नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं और युवाओं के लिए उच्च तकनीक की दुनिया में अवसर पैदा कर रहे हैं। भारत बड़े सपने देख रहा है, बड़े कदम उठा रहा है और बेहतरीन परिणाम दे रहा है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत के विकास यात्रा में सह-निर्माता बनें। भारत का विमानन क्षेत्र अब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू बाजारों में शामिल है और हमारा घरेलू बाजार वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत का 85 प्रतिशत एमआरओ कार्य विदेशी भूमि पर होता था, जिससे लागत अधिक होती थी और विमानों की ग्राउंडिंग लंबी रहती थी। अब सरकार इस स्थिति को बदल रही है। देश की उड़ान केवल विमानन तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष की दुनिया में भी भारत तेजी से अपनी जगह बना रहा है। स्काईरूट भारत की प्रमुख निजी अंतरिक्ष कंपनी है। इसे दो भारतीय इंजीनियर और पूर्व इसरो वैज्ञानिक पवन चंदना और भरत ढाका ने शुरू किया। दोनों आईआईटी के पूर्व छात्र हैं और विज्ञान में अपनी पकड़ रखने के साथ उद्यमिता में भी सफल रहे। नवंबर 2022 में स्काईरूट ने अपना उप-कक्षीय रॉकेट विक्रम-S लॉन्च किया। इस सफलता के साथ यह पहली भारतीय निजी कंपनी बनी जिसने रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा। इसी सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद में सफ्रान एयरक्राफ्ट इंजन सर्विसेज की नई मेन्टेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल ( एमआरओ) सुविधा का वर्चुअली उद्घाटन किया। यह सुविधा जीएमआर एयरोस्पेस और इंडस्ट्रियल पार्क में स्थापित की गई है और यह भारत का सबसे बड़ा इंजन एमआरओ सेंटर होगा। इस सेंटर के खुलने से विमान और उनके इंजनों की मरम्मत का काम अब भारत में ही संभव होगा। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और विमान संचालन की लागत भी घटेगी।

बारासात मेडिकल कॉलेज में चूहों ने ही चुरा लीं मृत प्रीतम की आँखें

बारासात । किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि मृतक की आंखें चूहों ने ही ‘चुरायी’ हैं। बारासात मेडिकल कॉलेज के मॉर्ग से मृतक की आंखें चुराने के आरोप में जांच अधिकारियों ने इसी बात पर ही मुहर लगाया है। बताया जाता है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चूहों द्वारा ही मृतक की आंखें नोच लेने की बात कही गयी है। बता दें, पिछले दिनों ही प्रीतम घोष के शव से आंखें गायब होने का आरोप लगाया जा रहा था। तब अस्पताल प्रबंधन की तरफ से दावा किया गया था कि आंखों को चूहों ने नोच खाया है। लेकिन परिजन इस दावे को मानने से इनकार कर रहे थे। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के जांच अधिकारियों की रिपोर्ट में चूहों द्वारा नोचने की तरफ ही इशारा किया गया गया है। दूसरी बार पोस्टमार्टम होने के बाद 3 सदस्यीय कमेटी ने स्पष्ट कर दिया कि ऑपरेशन कर आंखें नहीं निकाली गयी हैं बल्कि चूहे या उसके जैसे ही किसी जीव के आक्रमण से ही आंखों को नुकसान हुआ है। बताया जाता है कि बारासात मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में दूसरा पोस्टमार्टम किया था। उस कमेटी में एक नेत्ररोग विशेषज्ञ, एक शल्य चिकित्सक व एक सहायक मेडिकल सुपर (एएमएस) मौजूद थे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गयी है। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया है। बुधवार की रात को स्वास्थ्य विभाग को जांच अधिकारियों द्वारा भेजी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि शव में आईबॉल का कुछ हिस्सा मौजूद है। बाकी हिस्से में खून जमकर काला हो गया है। इसलिए ही बाहर से देखने पर ऐसा लग रहा है कि आंखें नहीं है। जांच अधिकारियों ने लिखित रूप से बताया है कि आंखों को ऑपरेशन कर नहीं निकाला गया है। चूहों या उनके जैसे किसी जीव के आक्रमण की वजह से ही ऐसा हुआ है। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मॉर्ग में कोई चूहा घुसा है अथवा नहीं, इसकी जांच की जा रही है। बता दें, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को रोककर प्रीतम घोष के परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद ही मुख्यमंत्री ने एक जांच कमेटी का गठन करने का आदेश दिया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में भी चूहों द्वारा ही आंखें नोच लेने का दावा किया जा रहा है।

विदेशों में अपनी संपत्ति छुपाने वाले आयकर विभाग के राडार पर

नयी दिल्‍ली। आयकर विभाग विदेशों में अपनी संपत्ति छुपाने को लेकर कई टैक्सपेयर्स पर सख्ती बरतने की तैयारी में है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने गुरुवार को ‘एनयूडीजीई’ पहल के दूसरे चरण को लॉन्च करने का ऐलान किया है, जिसका मकसद विदेशी एसेट्स और इनकम की रिपोर्टिंग में वॉलंटरी कम्प्लायंस को मजबूत करना है। वित्त मंत्रालय ने जारी एक बयान में बताया कि आयकर विभाग ने ऐसे अधिक-जोखिम वाले मामलों को चिह्नित किया है जिनमें करदाताओं ने मूल्यांकन वर्ष 2025-26 के आयकर रिटर्न में अपनी विदेशी परिसंपत्तियों का ब्योरा नहीं दिया है। सीबीडीटी के मुताबिक आयकर विभाग की ओर से 28 नवंबर से इन करदाताओं को एसएमएस एवं ई-मेल भेजा जाएगा और उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए 31 दिसंबर, 2025 तक संशोधित आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की सलाह दी जाएगी। आयकर विभाग ने एक बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए एईओआई जानकारी के विश्लेषण से ऐसे कई मामलों का पता चला है, जिनमें विदेशी संपत्तियां होने की संभावना है, लेकिन इस साल के रिटर्न में उनका ब्योरा नहीं दिया गया है। सीबीडीटी अपनी दूसरे ‘एनयूडीजीई’ इनिशिएटिव के तहत सीबीडीटी 28 नवंबर से पहचाने गए टैक्सपेयर्स को एसएमएस और ई-मेल भेजेगा, जिसमें उन्हें सलाह दी जाएगी कि वे 31 दिसंबर तक या उससे पहले अपनी मर्जी से अपने रिटर्न को रिव्यू और रिवाइज करें, ताकि सजा से बचा जा सके। मंत्रालय के मुताबिक सीबीडीटी को भारतीय निवासियों की विदेशी वित्तीय संपत्तियों की जानकारी सूचना-साझाकरण प्रणालियों- कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (सीआरएस) और अमेरिकी विदेशी खाता कर अनुपाल अधिनियम के तहत मिलती है। यह सूचना रिटर्न में संभावित त्रुटियों को पहचानने और करदाताओं को सही अनुपालन के लिए मार्गदर्शन करने में सहायक होती है। इस अभियान का उद्देश्य आईटीआर में विदेशी परिसंपत्तियों (एफए) और विदेशी स्रोत से आय (एफएसआई) खंडों के तहत सही और पूर्ण विवरण सुनिश्चित करना है। विदेशी संपत्तियों एवं विदेशी स्रोत से आय का सही खुलासा आयकर अधिनियम, 1961 और काला धन अधिनियम, 2015 के तहत कानूनी रूप से अनिवार्य है। उल्‍लेखनीय है कि पिछले साल भी आयकर विभाग ने स्वचालित सूचना आदान-प्रदान (एईओआई) व्यवस्था के तहत विदेशी क्षेत्राधिकारों द्वारा सूचित ऐसे करदाताओं को संदेश भेजे थे, जिन्होंने अपने विदेशी निवेश और खातों का विवरण आयकर रिटर्न (आईटीआर) में नहीं दिया था। इस पहल का परिणाम यह हुआ कि कुल 24,678 करदाताओं ने अपने रिटर्न में संशोधन किया था और 29,208 करोड़ की विदेशी परिसंपत्तियों एवं 1,089.88 करोड़ रुपये की विदेशी इनकम का खुलासा किया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसएससी ने जारी किये 1,806 दागी उम्मीदवारों के नाम

– नियुक्तियों की विस्तृत सूची 10 दिसंबर तक पेश करने का निर्देश
कोलकाता । पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) ने गुरुवार को 1,806 दागी उम्मीदवारों की एक नई व्यापक सूची जारी की। इन्हें पहले 2016 राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (एसएलएसटी) में सहायक शिक्षक पदों के लिए योग्य के रूप में चिह्नित किया गया था। कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए आयोग ने दोपहर के आसपास सूची अपलोड की जिसमें अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के नाम, उनके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषय, रोल नंबर और जन्मतिथि शामिल थी। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की अदालत ने आयोग से 2016 के नियुक्ति पैनल की मियाद खत्म होने के बाद जारी की गई सभी नियुक्तियों की विस्तृत सूची 10 दिसंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही 2025 की नियुक्ति प्रक्रिया की लिखित परीक्षा की ओएमआर शीट भी वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया गया है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि एसएससी के 2016 पैनल की वैधता समाप्त होने के बावजूद, जिन अभ्यर्थियों को वर्ष 2025 में 9-10वीं और 11-12वीं कक्षाओं के लिए शिक्षक नियुक्ति पत्र दिए गए, उनकी पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। कोर्ट का कहना है कि यदि इस सूची में नाम होने के बावजूद कोई अभ्यर्थी 2025 की नई भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुआ है, तो उसका भविष्य इस केस के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने एसएससी से यह भी पूछा कि 2025 की परीक्षा की ओएमआर शीट अब तक वेबसाइट पर क्यों नहीं डाली गई है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। ऐसे में शुरू से ही पारदर्शिता बरतना जरूरी है, नहीं तो भविष्य में फिर अनियमितता के आरोप लग सकते हैं। इस आदेश के बाद अभ्यर्थियों के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीदें जागी हैं। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने गुरुवार को कहा कि स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार ‘दागी’ या ‘टेंटेड’ उम्मीदवारों की पूरी सूची आज ही प्रकाशित करेगा। शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष रूप से सक्षम अभ्यर्थी के ‘टेंटेड’ सूची में नाम रहने के विषय में एसएससी ही निर्णय लेगा। एक बार फिर मंत्री ने दोहराया कि एसएससी का कार्य पूर्ण निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ चल रहा है और 31 दिसंबर की समयसीमा में नियुक्ति प्रक्रिया समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल, बुधवार को उच्चतम न्यायालय ने एसएससी से जुड़े सभी मुकदमे फिर से उच्चतम न्यायालय में भेज दिए थे। इस पर मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि जज या कोर्ट के अनुसार कानून या निर्णय बदलता है और वे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर पूरा विश्वास रखते हैं। न्यायालय ने एसएससी को निर्देश दिया था कि वह विस्तृत पहचान संबंधी जानकारी के साथ अयोग्य शिक्षकों के नाम पुनः प्रकाशित करे। हालांकि, अद्यतन सूची में उन स्कूलों का नाम नहीं बताया गया है जहां ये दागी शिक्षक लगभग एक दशक से काम कर रहे थे। इस सवाल पर कि क्या ये उम्मीदवार सितंबर 2025 में आयोजित नई भर्ती परीक्षा में शामिल होने वालों में शामिल थे ? एसएससी के एक अधिकारी ने इस संभावना से इन्कार किया। उन्होंने कहा, “हमने पहले भी दागी शिक्षकों की यही सूची अपलोड की थी। लेकिन इस बार उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, हमने पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त विवरण शामिल किए हैं।” यह घटनाक्रम सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें 2016 एसएलएसटी के माध्यम से चयनित 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अमान्य करार दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि पूरी भर्ती प्रक्रिया दूषित थी, जिसे सुधारा नहीं जा सकता।
५.१३

पंजाब के तीन तख्त साहिब वाले स्थान पवित्र शहर घोषित

-लगा शहरों में शराब-मांस की बिक्री पर प्रतिबंध
श्री आनंदपुर साहिब। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसले में अमृतसर शहर के आंतरिक हिस्से (वॉल्ड सिटी), तलवंडी साबो और श्री अनंदपुर साहिब, जहां तख्त साहिबान स्थित हैं, को पवित्र शहर का दर्जा देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दशकों से श्रद्धालु लोग इन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा देने की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिखों के पांच तख्त साहिबान हैं, जिनमें से तीन तख्त – श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर), तख्त श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो, बठिंडा) और तख्त श्री केसगढ़ साहिब (श्री आनंदपुर साहिब) पंजाब में स्थित हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित समारोहों के दौरान श्री आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती पर पंजाब विधानसभा का यह विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और आप के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा कि महान सिख गुरुओं ने हमेशा सर्व कल्याण के आदर्श को कायम रखा है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने मानव अधिकारों की रक्षा के लिए महान बलिदान दिया।भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए और पंजाब विधानसभा के इस सत्र को इतिहास में स्थायी रूप से यादगार बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने इन शहरों को पंजाब के पवित्र शहर घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए इन शहरों में मांस, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री एवं उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये शहर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक भी हैं। इसलिए यह मांग किसी एक राजनीतिक पार्टी, समुदाय या धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत की संरक्षा और इसके वैश्विक प्रसार की दिशा में आवश्यक कदम है।

संकल्प सिद्धि : अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण

अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर पीएम मोदी ने सदियों पुराने सपने के साकार होने और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष किया, इसे संघर्ष से विजय और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक बताया। यह ध्वज भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान और रामराज्य के आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर औपचारिक रूप से भगवा ध्वज फहराया, जो मंदिर निर्माण के पूरा होने का प्रतीक है। इस समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। हर रामभक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष है, असीम कृतज्ञता है, अपार, अलौकिक आनंद है।
मोदी ने कहा कि सदियों के घाव भर रहे हैं। सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। आज उस यज्ञ की पूर्णाहुति है, जिसकी अग्नि 500 वर्ष तक प्रज्वलित रही। जो यज्ञ एक पल भी आस्था से डिगा नहीं, एक पल भी विश्वास से टूटा नहीं। उन्होंने कहा कि आज भगवान श्रीराम के गृभगृह की अनंत ऊर्जा, श्रीराम परिवार का दिव्य प्रताप, इस धर्मध्वजा के रूप में इस दिव्यतम, भव्यतम मंदिर में प्रतिष्ठापित हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्म ध्वज संकल्प का प्रतीक है। यह धर्म ध्वज संघर्ष से उत्पन्न विजय की गाथा है। यह धर्म ध्वज सदियों से संजोए गए स्वप्न का साकार रूप है। यह संतों की भक्ति और समाज की सामूहिक भागीदारी का पावन परिणाम है। आने वाली सदियों और सहस्राब्दियों तक, यह धर्म ध्वज भगवान राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करता रहेगा। ये धर्मध्वजा केवल एक ध्वजा नहीं, ये भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग, इसपर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ॐ शब्द और अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है। नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये ध्वज…संकल्प है, सफलता है! ये ध्वज…संघर्ष से सृजन की गाथा है, सदियों से चले आ रहे स्वप्नों का साकार स्वरूप है। ये ध्वज…संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। उन्होंने कहा कि ये धर्मध्वज प्रेरणा बनेगा कि प्राण जाए, पर वचन न जाए अर्थात जो कहा जाए, वही किया जाए। ये धर्मध्वज संदेश देगा – कर्मप्रधान विश्व रचि राखा अर्थात विश्व में कर्म और कर्तव्य की प्रधानता हो। ये धर्मध्वज कामना करेगा – बैर न बिग्रह आस न त्रासा, सुखमय ताहि सदा सब आसा यानी भेदभाव, पीड़ा, परेशानी से मुक्ति और समाज में शांति एवं सुख हो।

भारत को सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाने वाले श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन

भारत को श्वेत क्रांति के जरिए दुनिया में दुग्ध उत्पादन में पहले पायदान पर पहुंचाने वाले और अमूल के संस्थापक डॉ.वर्गीज कुरियन जन्मदिन ‘नेशनल मिल्क डे’ के रूप में मनाया जाता है। ‘मिल्कमैन ऑफ इंडिया’ नाम से प्रसिद्ध कुरियन ने ‘ऑपरेशन फ्लड’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया और लाखों किसानों को आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया। डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को केरल के कोझिकोड में एक समृद्ध सिरियन ईसाई परिवार में हुआ था। उनके पिता सरकारी सर्जन थे। उन्होंने 1940 में चेन्नई के लोयोला कॉलेज से स्नातक और 1943 में गिंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। 1948 में मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया, जहां उन्होंने डेयरी इंजीनियरिंग को सहायक विषय के रूप में पढ़ा।
1949 में भारत लौटने पर सरकार के साथ हुए बांड की अवधि को पूरा करने के लिए उन्हें गुजरात के आनंद में डेयरी डिवीजन में भेजा। यहीं उनकी मुलाकात त्रिभुवनदास पटेल से हुई, जो किसानों को एकजुट कर दूध सहकारी समितियों की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे।
कुरियन ने त्रिभुवनदास के साथ मिलकर 1946 में कैरा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड (केडीसीएमपीयूएल) की स्थापना की, जो बाद में ‘अमूल’ बना।
उनके मित्र एच.एम. दयाला ने भैंस के दूध से मिल्क पाउडर और कंडेंस्ड मिल्क बनाने की तकनीक विकसित की, जिसने भारतीय डेयरी उद्योग को क्रांतिकारी बदलाव दिया। पहले केवल गाय के दूध से ये उत्पाद बनाए जाते थे। इस इनोवेशन ने भारत को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कुरियन के आनंद मॉडल को देखते हुए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की स्थापना की और कुरियन को इसका पहला अध्यक्ष नियुक्त किया। 1970 में शुरू हुए ‘ऑपरेशन फ्लड’ ने भारत के दूध उत्पादन को 1968-69 में 23.3 मिलियन टन से 2006-07 में 100.9 मिलियन टन तक बढ़ाया। 25 वर्षों में 1700 करोड़ रुपए के निवेश से यह कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम बना। 1998 में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल किया।
कुरियन ने सहकारी मॉडल के जरिए किसानों को सशक्त किया, उन्हें प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का नियंत्रण दिया। इससे ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिला और विशेष रूप से महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त हुई। 75 मिलियन से अधिक महिलाएं डेयरी कार्य से जुड़ीं। कुरियन ने नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आनंद जैसे संस्थानों की स्थापना की। उनकी पुस्तक ‘आई टू हैड अ ड्रीम’ और श्याम बेनेगल की फिल्म ‘मंथन’, जिसे 5 लाख किसानों ने 2 रुपए दान देकर फंड किया, उनकी उपलब्धियों को दर्शाती है।
कुरियन को 1963 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, 1989 में वर्ल्ड फूड प्राइज और 1999 में पद्म विभूषण सहित कई सम्मान मिले। उन्होंने 9 सितंबर 2012 को 90 वर्ष की आयु में गुजरात के नडियाद में अपनी अंतिम सांस ली।

हेरिटेज लॉ कॉलेज में कॉनकर्ड 2025 में पहुंचे कानून क्षेत्र के दिग्गज

कोलकाता | हेरिटेज लॉ कॉलेज ने शुक्रवार, 21 नवंबर, 2025 को स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में बी.ए. एलएलबी.प्रोग्राम (2025–2030) के 11वें बैच के लिए स्टूडेंट्स इंडक्शन प्रोग्राम, कॉनकर्ड 2025 का उद्घाटन सेशन सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस कार्यक्रम में भारत के सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज, माननीय जस्टिस इंदिरा बनर्जी चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुईं। अपने प्रेरणा देने वाले भाषण में, उन्होंने कानूनी पेशे की महानता पर ज़ोर दिया और भविष्य के वकीलों से अपने आगे के सफर में संवैधानिक मूल्यों, तर्क और नैतिक व्यवहार को बनाए रखने का आग्रह किया। मुख्य भाषण राज्य के एडवोकेट जनरल जयंत मित्रा ने दिया। उन्होंने स्टूडेंट्स को कानूनी सेवा में ज़िंदगी भर सीखने, एनालिटिकल सोच और बिना किसी समझौते के ईमानदारी के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया। प्रोग्राम में खास प्रधान अतिथि मिस्टर अमिताभ मित्रा (पार्टनर, सिन्हा एंड कंपनी) और मिस्टर शुभोजीत रॉय (पार्टनर, विक्टर मोसेस एंड कंपनी) भी मौजूद थे, जिन्होंने बदलते लीगल इकोसिस्टम, कोर्टरूम एक्सपीरियंस और स्टूडेंट्स के लिए इंतज़ार कर रहे प्रोफेशनल मौकों पर कीमती बातें शेयर कीं। 11वें आने वाले बैच का स्वागत करते हुए, इंस्टीट्यूशन के प्रिंसिपल, प्रो. एस.एस. चटर्जी ने हेरिटेज लॉ कॉलेज के एकेडमिक एक्सीलेंस, इंडस्ट्री रेडीनेस और कैरेक्टर बिल्डिंग के लिए कमिटमेंट पर ज़ोर दिया। सेशन को हेरिटेज के डायरेक्टर मिस्टर प्रोबीर रॉय, हेरिटेज के सीईओ पी.के. अग्रवाल और हेरिटेज के सीनियर डायरेक्टर-एजुकेशन प्रो. बासब चौधरी ने भी एड्रेस किया। हेरिटेज ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ पी.के. अग्रवाल ने कहा, ” कॉनकर्ड 2025 का मकसद विद्यार्थियों को गाइडेंस, एकेडमिक ओरिएंटेशन और लीगल फ्रेटरनिटी के जाने-माने सदस्यों के साथ इंटरेक्शन देना है, क्योंकि वे लीगल एजुकेशन में अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं।” उद्घाटन सत्र एक परिचर्चा व समापन धन्यवाद ज्ञापन से हुआ जिससे नए अकादमिक वर्ष की यादगार शुरुआत हुई।