Wednesday, September 23, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 874

पिता पर दो कविताएं

दो लड़कियों का पिता होने से

Chandrakantdewtale

– चन्द्रकान्त देवताले

पपीते के पेड़ की तरह मेरी पत्नी

मैं पिता हूँ

दो चिड़ियाओं का जो चोंच में धान के कनके दबाए

पपीते की गोद में बैठी हैं

सिर्फ़ बेटियों का पिता होने से भर से ही

कितनी हया भर जाती है

शब्दों में

मेरे देश में होता तो है ऐसा

कि फिर धरती को बाँचती हैं

पिता की कवि-आंखें…….

बेटियों को गुड़ियों की तरह गोद में खिलाते हैं हाथ

बेटियों का भविष्य सोच बादलों से भर जाता है

कवि का हृदय

एक सुबह पहाड़-सी दिखती हैं बेटियाँ

कलेजा कवि का चट्टान-सा होकर भी थर्राता है

पत्तियों की तरह

और अचानक डर जाता है कवि चिड़ियाओं से

चाहते हुए उन्हें इतना

करते हुए बेहद प्यार।

goodthumb (1)

पिता से गले मिलते

Kunwar_Narayan

– कुंवर नारायण

पिता से गले मिलते

आश्वस्त होता नचिकेता कि
उनका संसार अभी जीवित है।

उसे अच्छे लगते वे घर
जिनमें एक आंगन हो
वे दीवारें अच्छी लगतीं
जिन पर गुदे हों
किसी बच्चे की तुतलाते हस्ताक्षर,
यह अनुभूति अच्छी लगती
कि मां केवल एक शब्द नहीं,
एक सम्पूर्ण भाषा है,

अच्छा लगता
बार-बार कहीं दूर से लौटना
अपनों के पास,

उसकी इच्छा होती
कि यात्राओं के लिए
असंख्य जगहें और अनन्त समय हो
और लौटने के लिए
हर समय हर जगह अपना एक घर

देश की पहली महिला जॉकी हैं रूपा सिंह

पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की भगीदारी अब चूल्हे-चौके से निकल कर हर क्षेत्र में बढ़ रही है फिर चाहे सेना में शामिल होकर देश सेवा करने का जज्बा हो या फिर जॉकी की बनकर घोड़ों को मैदान में दौड़ाने का हुनर. सारे दायरों को तोड़ते हुए 33 साल की रूपा सिंह भारत की पहली महिला जॉकी बनी हैं.

रूपा सिंह को मीडिया का साथ मिला, उनके अपनों ने उनका हौसला बढ़ाया और उनके नाम कई बड़े अवॉर्ड है। 720 रेस में हिस्सा ले चुकीं रूपा 7 बार चैम्पियन रह चुकी हैं और हाल ही में ऊटी में हुई अन्नामलाई प्लेट प्रतियोगिता भी उन्होंने अपने नाम कर ली है।

रूपा सिंह के दादा उगम सिंह ब्रिटिश सेना के घोड़ों को प्रशिक्षित किया करते थे। पिता नरपत और भाई रवींद्र भी जॉकी ही हैं। रूपा के पिता ने उन्हें चार साल की उम्र से ही घुड़सवारी सिखा दी थी। अपने में एक्सपर्ट होने के बाद भी रूपा को औसत घोड़े दिए जाते थे और उन्होंने औसत घोड़ों की सवारी करते हुए 50 रेस जीतीं और खुद को साबित किया।
एक बार जो कदम बढ़ गए तो सफलता दूर कहां थी, ऐसा ही कुछ हुआ रूपा के साथ अब वह अपनी पसंद के घोड़े पर रेस करने लगीं ओर 2010 में मद्रास क्लासिक जीतने के बाद मीडिया ने भी उन्हें नोटिस किया। 2014 में रूपा ने पौलैंड में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशीप में सभी धुरंधर महिला जॉकीज को पछाड़ते हुए खिताब अपने नाम कर लिया।
रूपा कहना है कि घोड़े दौड़ना कोई आसान काम नहीं है और इस दौरान उन्होंने कई बार चोट खाई है लेकिन एक बार इस काम को चुनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बकौल रूपा, ‘मैं बस ये चाहती हूं कि काम को जेंडर के हिसाब से नहीं काबिलियत के हिसाब से देखा जाना चाहिए।

 

चाय की पत्तियों के जादू से निखारें खूबसूरती

 

चाय की चुस्क‍ियां लेते समय क्या आपने कभी ये सोचा है कि इसका इस्तेमाल और किस तरह से कर सकती हैं। शायद आपको पता न हो लेकिन चाय की पत्त‍ियां आपको खूबसूरत भी बना सकती हैं, जिनका इस्तेमाल न केवल त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने के लिए किया जाता है बल्क‍ि ये बालों की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। आमतौर पर ग्रीन टी को ही ब्यूटी प्रोडक्ट के रूप में देखा जाता है लेकिन चाय की पत्ती चाहे जो भी हो, उसका इस्तेमाल खूबसूरती निखारने के लिए किया जा सकता है. चाय की पत्तियों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है. इसके अलावा इसमें anti-aging और anti-inflammatory गुण भी पाए जाते हैं। आप चाहें तो सौंदर्य समस्याओं के लिए चाय की पत्ती का इस्तेमाल कर सकती हैं-

बालों में चमक लाने के लिए आप ग्रीन टी या ब्लैक टी बैग्स का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए एक बर्तन में पानी उबलने के लिए रख दें। इसमें कुछ टी-बैग्स भी डाल दें। 15 मिनट तक इस पानी को उबलने दें। इसके बाद ठंडा होने के लिए रख दें। बालों में शैंपू करने के बाद इस पानी को बालों में लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। इसके बाद किसी माइल्ड शैंपू से बालों को धो लें। एक वॉश में ही आपको फर्क नजर आने लगेगा।

क्या तमाम सनस्क्रीन इस्तेमाल करने के बावजूद आपको सनबर्न की प्रॉब्लम हो गई है? अगर आपको सनबर्न दूर करने का कोई सही तरीका समझ नहीं आ रहा है तो एकबार टी-बैग्स का इस्तेमाल करके देखें। कुछ टी-बैग्स लेकर ठंडे पानी में डुबो दें। उन्हें हल्के हाथों से दबाकर चेहरे पर रखकर कुछ देर के लिए लेट जाएं। इससे आपकी सनबर्न की समस्या दूर हो जाएगी।

अगर आपकी आंखों के नीचे काले घेरे हो गए हैं या फिर आपकी आंखें पफी-पफी रहती हैं तो भी ठंडे टी-बैग्स का इस्तेमाल करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इसमें मौजूद कैफीन आंखों के नीचे के काले घेरों को दूर करने में मदद करती है।कई बार ऐसा होता है कि पार्क या बगीचे में जाने पर हमें कोई कीट-पतंगा काट लेता है। चाय की पत्त‍ियों का ये फार्मूला आप किसी भी कीट के काटने पर अपना सकते हैं. वो चाहे मच्छर ही क्यों न हो। प्रभावित जगहों पर। ठंडे टी-बैग्स रखने से बहुत जल्दी फायदा होता है।

अगर आपके पैरों से बदबू आती है तो भी चाय पत्ती का इस्तेमाल करना फायदेमंद रहेगा। चाय की पत्त‍ियों को पानी में डालकर उबाल लें। जब ये पानी ठंडा हो जाए तो इसे किसी टब में डाल दें. पैरों को कुछ देर तक इसमें डुबोकर रखें। ऐसा करने से पैरों की बदबू दूर हो जाएगी।

इसके अलावा चाय की पत्त‍ियों का इस्तेमाल ड्राई स्क‍िन को मॉइश्चराइज करने के लिए, आफ्टरशेव के रूप में और बालों का रंग बरकरार रखने के लिए भी किया जा सकता है।

 

सरहद पर तैनात इन महिला जवानों से थर-थर कांपते हैं आतंकी

यूं तो भारतीय सेना में महिलाओं की नियुक्त‍ि बहुत पहले से होती आ रही है लेकिन ये पहला मौका था जब महिला जवानों को सीमा की पहरेदारी का काम सौंपा गया। हाथों में बंदूकें लिए एसएसबी महिला जवान दिनरात सीमा की रखवाली में तैनात हैं। एसएसबी देश की पहली पैरा मिलिट्री फोर्स है जिसने सबसे पहले महिला जवानों की भर्ती की और उन्हें सरहद की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी। भारत और उसके पड़ोसरी देश नेपाल के बीच खुली सीमा है. ये करीब 17050 किलोमीटर में फैली हुई है. इस खुली सीमा का फायदा उठाकर कई बार आतंकवादी दाखिल हो जाते हैं. पिछले डेढ़-दो दशकों से ऐसा ही होता आ रहा है. लेकिन एसएसबी यानी सशस्त्र सीमा बल की महिला जवानों की मुस्तैदी से देश विरोधी गतिविधियों पर रोक लगी है। नेपाल में भूकंप के बाद मानव तस्करी का खतरा कई गुना बढ़ गया है। इसके साथ ही आतंकी घुसपैठ का खतरा भी काफी बढ़ गया हैअफीम, चरस, ब्राउन शुगर इसके अलावा जानवरों की खाल और मंहगी जड़ी बूटी की तस्करी होती है लेकिन रूपेड़िया पोस्ट पर महिला जवानों की तैनाती के बाद से इन मामलों में कमी आई है।

असिस्टेंट कमांडेंट रवि शंकर कुमार के अनुसार, ‘महिला जवान रात की पेट्रोलिंग के वक्त भी मुस्तैद रहती हैं. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल के लिए नेपाल की महिला जवानों के साथ साझा पेट्रोलिंग की जाती है. 2008 से महिला जवानों को यहां पर तैनात किया गया है। सुबह 6 बजे से बॉर्डर पोस्ट पर निगरानी और चेकिंग का काम शुरू हो जाता है। सशस्त सीमा बल की पहली महिला महानिदेशक अर्चना रामासुंदरम ने एक टीवी चैनल को कहा कि नेपाल सीमा से मानव, नशीली चीजों और जाली नोटों की तस्करी करने वालों पर अंकुश लगाने की मुहिम को तेज किया जा रहा है। इन महिलाओं के इस जज्बे, बहादुरी और हौसले को पूरा देश सलाम करता है!

सचिन ने लॉन्च किया अपना फैशन ब्रांड

मुंबई.पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर के फैशन ब्रांड का पहला आउटलेट हाल ही में लॉंच हुआ। इस मौके पर सचिन ने रैम्पवॉक भी किया। TrueBlue सचिन की फैशन लाइन है। ये सचिन का अरविंद फैशन ब्रांड के साथ ज्वाइंट वेंचर है। सचिन ने इस वेंचर के लिए मार्च 2016 में डील की थी। फिलहाल मुंबई में पहला स्टोर खोला गया है।

अगले पांच सालों में कंपनी का टारगेट बिजनेस को 200 करोड़ तक पहुंचाने का है।

इसके लिए उनकी प्लानिंग देशभर में 25 से 30 स्टोर खोलने की है।

सचिन यहां रैम्पवॉक में शर्ट-पैन्ट के साथ बंद गले की कोटी पहनकर उतरे थे।

सचिन के अनुसार उनकी इस क्लोदिंग लाइन में इंडियन टच के साथ मॉडर्न लुक मिलेगा।

इसमें सचिन की पसंद के 300 स्टाइल हैं जिसकी कीमत 1199 से शुरू है।

शो की होस्ट एक्ट्रेस और एंकर मंदिरा बेदी रहीं।

गौरतलब है कि नवंबर, 2013 में क्रिकेटर से रिटायरमेंट के बाद से ही सचिन ने कई तरह के बिजनेस में इनवेस्ट किया है।

 

मोदी से बहुत सारी उम्मीदें हैं: ज़ाकिर हुसैन

वो कहते हैं कि भारत का प्रधानमंत्री होना मुश्किल काम है। उनका मानना है कि, “भारत में अलग अलग पार्टियां है, अलग-अलग सोच है तो उसको एक साथ लाना और ये कोशिश करना कि सबकी एक जैसी सोच हो, बहुत मुश्किल है। नरेंद्र मोदी से उम्मीद है, कि वो ऐसे भारत की नींव डालेंगे जहां एकता हो, जिसमें एक दूसरे के लिए प्यार मोहब्बत हो, एक दूसरे की इज़्जत हो। अब बहुमत की सरकार है तो शायद मोदी जी ये काम कर पाएंगे।”

ज़ाकिर ने असहिष्णुता के मुद्दे पर भी अपनी राय ज़ाहिर करते हुए कहा कि उनके अनुभव में भारत में असहिष्णुता नहीं है।

वे कहते हैं,“ ये राजनीतिक मुद्दे हैं, हिन्दुस्तान में ए आर रहमान की बहुत इज़्जत है, शाहरुख शान की फिल्में हिट होती हैं, आमिर ख़ान को लोग प्यार करते हैं, उस्ताद अमज़द अली खान के श्रोतागण हैं, तो मैं ये कैसे कह सकता हूं कि असहिष्णुता है। हम संगीत की पूजा करते हैं, हम सरस्वती के पुजारी हैं, हम उस संगीत के पुजारी हैं जो भगवान कृष्ण ने बांसुरी पर बजाया और सरस्वती ने वीणा पर बजाया।”

ज़ाकिर हुसैन ने हाल में लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में बीबीसी ऑर्केस्ट्रा के साथ पश्चिमी शास्त्रीय संगीत कि धुनों पर अपने तबले से ताल मिलाई। ज़ाकिर ने तबले की एक वर्कशॉप में 100 से ज़्यादा बच्चों और दूसरे लोगों को तबला भी सिखाया.

युवा पीढ़ी में शास्त्रीय संगीत के प्रति रवैय्ये को लेकर वो कहते हैं, “शास्त्रीय संगीत स्टेडियम म्यूज़िक नहीं है. अगर हम सोचें कि क्लासिकल म्यूज़िक जे जेड और बियोंस के कॉन्सर्ट की तरह हो तो ये मुमकिन नहीं। ये ऐसा म्यूज़िक नहीं है जो पचास हज़ार लोग आपको दूर से देखें, ये अंतरंग किस्म का संगीत है जिसमें कुछ लोग बैठे हुए हैं, आखों से आंखें मिल रही हैं और आपस में वार्तालाप हो रहा है और वाह-वाह के बीच प्यार मोहब्बत हो।”

ज़ाकिर हुसैन चार पीढ़ियों के कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं लेकिन आज भी उनका व्यक्तित्व सदाबहार है। इसका राज़ पूछने पर वो कहते हैं, “संगीत इनसान को जीवित तो रखता है, लेकिन अच्छी सेहत में भी रखता है और अगर आप सिर्फ संगीत की साधना करते हैं तो शराब, सिगरेट और पान की ज़रुरत नहीं। ये सभी चीज़ें उम्र को आपके चेहरे पर ज़ाहिर कर देती हैं, मेरे पिताजी जब 75 साल की उम्र मे स्टेज पर बैठते थे तो 25 साल के नज़र आते थे।”

वो कहते हैं, “लोग हमेशा चाहते हैं कि संगीत का एक ही दौर हो, यानी या तो फ्यूज़न हो, या रॉक का हो, या शास्त्रीय का हो, ऐसा नहीं हो सकता कि सब एक साथ मिल कर एक ही छत के नीचे रहें। मेरे ख्याल से हमें खुश होना चाहिए कि अलग-अलग तरह का संगीत हम को सुनने को मिलता है। हर संगीत के लिए श्रोतागण हैं और सुनने के लिए हाज़िर भी रहते है।”

(साभार – बीबीसी)

मुंबई में अनाथ हिन्‍दू महिला का मुस्लिमों ने किया अंतिम संस्कार

मुंबई। जहां एक तरफ देश में कई जगहों पर धार्मिक सौहार्द खराब करने की कोशिशें होती रही हैं वहीं मुंबई में धर्म से उपर इंसानियत का रिश्‍ता सामने आया है। यहां रहने वाली एक हिन्‍दू महिला का मुस्लिमों ने अंतिम संस्‍कार किया है।

जानकारी के अनुसार मुंबई के मुस्लिम बहुल इलाके मलाड में एक हिन्दू वृद्ध महिला श्रीमती सखु किरन सिंह बरसो से अकेले रहती थी। 2002 में सखु किरन के पति के निधन के बाद से ही वो यहां अकेले रहती थी। इतने साल अकेले रहने के बाद पिछले शुक्रवार को उनका निधन स्कोटर कॉलोनी स्थित उनके घर में हो गया।

मुस्लिम परिवारों से घिरी महिला का कोई रिश्‍तेदार नहीं आया। महिला की मौत की बात जब जब इलाके के मुस्लिम नोजवानो को पता लगी तो महिला के घर के बाहर भीड़ जमा हो गई। आखिर में निर्णय कर पूरे मोहल्ले के लोगो ने मिलकर हिंदू परंपरानुसार महिला के अंतिम संस्कार में लगने वाली सारी सामग्री का इन्तजाम किया।

इलाके के मुस्लिम युवकों ने उन्हें कंधा देकर सांप्रदायिक सौहाद्र की मिसाल कायम की। लोगो ने नम आंखों से ओशिवारा शमशान घाट ले जाकर अंतिम संस्‍कार भी किया।

 

माइग्रेन में आराम दिलाए बादाम

बादाम में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं और एस्प्रिन में प्रयोग होने वाले सेलिसिन तत्व जैसे मैगनीशियम और विटामिन ई, बादाम में भी पाए जाते हैं।

यदि नियमित रूप से बादाम का सेवन किया जाए तो इससे सिरदर्द से बचाव होता है। ऐसा पाया गया है कि जिन लोगों में मैगनीशियम का स्तर कम होता है, उन्हें माइग्रेन की समस्या उन लोगों के मुकाबले अधिक होती है, जिनमें इसका स्तर सामान्य रहता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के शोध के अनुसार जो लोग प्रतिदिन मैगनीशियम का पर्याप्त डोज लेते हैं उनमें यह समस्या 41 प्रतिशत तक कम हो जाती है

 

महिला सुरक्षा में काफी काम आ सकती है ‘सेफर’ ज्वेलरी

महिलाओं की सुरक्षा हमेशा से बड़ा मुद्दा रहा है चुनाव में भी इस मुद्दे से को जोर शोर से उठाया जाता रहा है। महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रहे क्राइम को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के पांच इंजीनियर्स के एक ग्रुप ने एक ज्वेलरी डिवाइस ‘सेफर’ बनाया है। ये डिवाइस एक पेंडेंट में होता है जो दिखने में खूबसूरत होने के साथ सुरक्षा भी करता है.

आप इसे बिना इंटरनेट के भी चला सकते हैं। इससे पहनने वाले को खतरा महसूस होने पर इसे दो बार प्रेस करना होता है जिसके बाद आपके दोस्त या परिवार को खतरे की जानकारी मिलती है. जिससे वो आपकी मदद कर सकते हैं।

इस डिवाइस में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस लगा हुआ है जिससे आप कहीं भी जाएं आपकी लोकेशन आपके परिवार को एक एप के ज़रिए मिलती रहती है. इसके अलावा इस डिवाइस के जरिए यूजर्स आस पास की सुरक्षित जगह जैसे पुलिस स्टेशन और हॉस्पिटल की लोकेशन का पता लगा सकते हैं।

इस पेंडेंट को खूबसूरत बनाया गया है और ये तीन अलग अलग रंगो में आता है। इसे इस्तेमाल करने वालों की माने तो ये उनके लिए किसी दोस्त से कम नहीं है अब वो बिना डर के घर से बाहर जा सकते हैं।

इस डिवाइस को यूज करने के लिए आपको इसे चार्ज करना पड़ता है लेकिन सिर्फ 15 मिनट चार्ज करने से ये 10 दिन का बैकअप देता है। इतनी सुविधाओं से लेस इस डिवाइस की कीमत भी किफायती रखी गई है।ये डिवाइस सुरक्षा के साथ साथ फैशन का भी ध्यान रखता है यही वजह है की आने वाले दिनो में इसके और भी प्रोडक्ट्स मार्केट में आने वाले हैं।

‘सेफर’ के मार्केट में आने के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है दरअसल इसकी शुरुआत एक कॉलेज प्रोजेक्ट की तरह हुई थी लेकिन इसे बनने के लिए ज़्यादा पैसा नहीं था तो अपने स्टार्टअप के लिए इन लोगों ने बिजनेस प्लान प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू कर दिया।

ऐसी कई प्रतियोगिताओं को जीतने के बाद 2015 तक ढाई लाख डॉलर इकट्ठा हो गए। उसके बाद इसके डेवलपर्स को पीएम मोदी की मेक इन इंडिया टीम के साथ सिलिकन वैली जाने का मौका मिला और वहां भी इन्हें जबरदस्त सराहना मिली।

इस प्रोडक्ट के लिए इन्हें अब तक कई अवार्ड्स भी मिल चुके हैं वहीं दुनिया के 20 देशों में अब ये इस प्रोडक्ट को बेच भी रहे हैं।

 

बंधुआ मजदूर के बेटे मधुसूदन राव आज है 20 कंपनियों का मालिक

समाज से निकले युवा सफलता की नई इबारतें लिख रहे हैं. कोई यूपीएससी टॉप कर रहा है तो कोई आज 20 से अधिक कंपनियों का मालिक है। यहां हम आपको बता रहे हैं आंध्रपदेश के प्रकाशम जिले में पैदा हुए मधुसूदन राव के बारे में जिनके संघर्ष और जज्बे के किस्से आज लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं –

मधुसूदन के पिता किसी जमाने में बंधुआ मजदूरी किया करते थे। इसके एवज में उन्हें जमींदार से सिर्फ भोजन मिला करता था। कई बार काम पर न जाने की हालत में भूखा भी सोना पड़ता था। वे बताते हैं कि दलित समाज से ताल्लुक रखने की वजह से उनकी परछाई को भी अपशकुन माना जाता था। वे इन भयावह परिस्थितियों में भी डटे रहे और पढ़ाई जारी रखी. किसी-किसी तरह 12वीं पास की और नौकरी पाने की चाह में पॉलीटेक्निक कर लिया।

उनके पॉलीटेक्निक करने के पीछे तो यही मंशा थी कि उन्हें जल्द से जल्द नौकरी मिल जाए, लेकिन अफसोस कि उनसे हर जगह रिफरेंस मांगा जाता था। उनके घर के सदस्यों की शिक्षा का हवाला देकर उन्हें नौकरी से दूर रखा जाता। आखिर में वे हताश-निराश हो कर भाई के साथ मजदूरी करने लगे। इसके अलावा वे चौकीदारी का भी काम किया करते थे ताकि ओवरटाइम काम करके वे घर वालों का खर्चा चला सकें।

गांव और शहर में यही तो बेसिक फर्क है. गांव में पले-बढ़े लोग हमेशा गांव वापस लौटना चाहते हैं. हो सकता है कि कई बार वे शुरुआती दिक्कतों से दो-चार हों लेकिन वे जरूर वापस लौटना चाहते हैं। मधुसूदन भी कुछ ऐसे ही मिजाज की शख्सियत हैं। वे लगातार सफल होने के लिए संघर्ष करते रहे और इस क्रम में वे कई बार धोखे के भी शिकार हुए।
एक बार तो वे बिल्कुल से ही खाली हो गए। उन्होंने जिनके साथ मिल कर कंपनी खोली थी वे सारा फायदा लेकर चंपत हो गए।

अलग-अलग लोगों के साथ काम करने की वजह से वे इस बात को समझ चुके थे कि चुनिंदा लोगों पर ही विश्वास किया जाना चाहिए. वे दिन भर में 18 घंटे तक काम करते हैं और उनकी पत्नी हमेशा परछाई की तरह साथ रहती हैं। वे आज एमएमआर ग्रुप  के संस्थापक हैं और इसके अंतर्गत 20 से अधिक कंपनियां आती हैं।
वे अपने माता-पिता को अपना आदर्श मानते हैं और हर दुविधा की घड़ी में उन्हें ही याद करते हैं। वे आज हजारों युवाओं को रोजगार देने का काम कर रहे हैं और भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी प्रतिभा और जज्बे के मुरीद हैं.