कोलकाता । 30 दिसम्बर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पश्चिम बंगाल को बड़ी सौगात दी। पीएम मोदी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री की मां हीराबेन के निधन हो जाने के कारण उनको अपना बंगाल दौरा रद करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद पीएम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए यहां पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में शामिल हुए। पीएम मोदी ने अहमदाबाद स्थित राजभवन से वर्चुअल माध्यम से बंगाल में कनेक्टिविटी से जुड़ी रेलवे की 7,600 करोड़ रुपये से ज्यादा की विभिन्न परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया।
कोलकाता मेट्रो जोका-तारातला खंड का उद्घाटन
पीएम ने इसके साथ ही कोलकाता मेट्रो की पर्पल लाइन के जोका-तारातला खंड का भी उद्घाटन किया। दक्षिण कोलकाता के जोका, ठाकुरपुकुर, साखेर बाजार, बेहला चौरास्ता, बेहला बाजार और तारातला जैसे छह स्टेशनों वाले 6.5 किलोमीटर के इस मेट्रो खंड का निर्माण 2,475 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है। कोलकाता शहर के दक्षिणी हिस्सों और दक्षिण 24 परगना के यात्रियों को इस परियोजना से बेहद फायदा होगा। इस मौके पर हावड़ा स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्यपाल सीवी आनंद बोस, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी गण मौजूद रहे। पीएम ने इस दौरान राज्य में चार और रेल परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
इनमें बोइंची-शक्तिगढ़ तीसरी लाइन, डानकुनी-चंदनपुर चौथी लाइन, निमतिता- न्यू फरक्का डबल लाइन और अम्बारी फालाकाटा-न्यू मयनागुड़ी-गुमानीहाट दोहरीकरण परियोजना शामिल है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री 335 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किए जाने वाले न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की भी आधारशिला रखीं। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने इस मौके पर कहा कि इन परियोजनाओं के शुभारंभ से बंगाल के लोगों को काफी लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में मौजूद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की मां के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। ममता ने कहा कि मां से बढ़कर कुछ भी नहीं है। मेरी संवेदनाएं आपके साथ है। इससे पहले ममता के हावड़ा स्टेशन पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही भाजपा समर्थकों ने नारेबाजी की, जिसको लेकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। बाद में रेल मंत्री सहित रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने ममता को मनाया
पीएम मोदी ने हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी
क्योंकि पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकालय नहीं होते
मुझे याद है कॉलेज के दिनों में पुस्तकालय एक सुकून भरी जगह होती थी, जहाँ से हटने का मन नहीं करता था । दिल उखड़ा हो या दिमाग..किताबों के पीछे सब कुछ भूल जाने की वजह होती थी । क्लास खत्म हो जाती, तब भी किसी न किसी बहाने से लाइब्रेरी कार्ड ठीक करने के लिए या किसी और काम से बहुत देर तक रुकी रहती थी । साल का दूसरा दिन किताबों के नाम रहता है और किताबें जहाँ संरक्षित की जाती हैं, वह जगह होती है पुस्तकालय…मगर क्या पुस्तकालय होते हैं…? हजारों पुस्तकों को सम्भालना, सहेजना और उसके पाठकों के जरिए समाज को समझना और जरूरत पड़ने पर सही भूमिका निभाना…आसान नहीं होता..मगर हम पुस्तकालयों को भी कमतर समझने की भूल करते हैं और पुस्तकाध्यक्ष यानी लाइब्रेरियन को भी..क्योंकि हमारे लिए वह ऐसी जगह है जो हमारी पहुँच में है और हम उसकी इज्जत करते हैं जो पहुँच के बाहर हो ।
इसी महीने वसंत पंचमी है और वसंत पंचमी के दिन ही शुभजिता (तब अपराजिता) की शुरुआत हुई थी…आज 7 साल हो गये हैं और 7 साल के बाद हम अपनी तरफ से छोटा सा योगदान देने का प्रयास करने को तत्पर हैं…उन लोगों को..जिनके योगदान का महत्व समझना बाकी है। इसी कड़ी में शुभ सृजन नेटवर्क की ओर से सृजन सारथी सम्मान प्रो. प्रेम शर्मा को प्रदान किया गया और युवाओं के अवदान को सामने रखने के उद्देश्य से आरम्भ किया जा रहा है..शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान ।
प्रथम शुभजिता सृजन प्रहरी सम्मान 2023 हम जिस व्यक्तित्व को सम्मानित करने जा रहे हैं…उनको सम्मानित करना अपने आप में स्वयं को सम्मानित करना है । हम सभी सृजन कर्म में रत हैं, पुस्तकें हमारा पाथेय हैं..जीवन की आधारशिला हैं और इनको संरक्षित करना एक बहुत बड़ा दायित्व है । पुरानी पुस्तकों के पीले पड़े पन्ने इतिहास सुनाते हैं । कहने का मतलब यह है कि पुस्तकें इतिहास की यात्रा हैं और पुस्तकों को संरक्षित करना इतिहास को, संस्कृति को, भाषा को, साहित्य को और जीवन को संरक्षित करना है । निश्चित रूप से यह आसान तो बिल्कुल नहीं है । पुस्तकालय आपको देखने में बहुत साधारण सी जगह शायद लग सकती है मगर असाधाराण सृजनात्मक क्षण यहीं पर जन्म लेते हैं । पुस्तकालयों का महत्व हमेशा से रहा है और सामाजिक क्रांति की मौम अभिव्यक्ति यहीं पर स्थान पाती है ।
हरिवंश राय बच्चन लिखते हैं कि मेल कराती मधुशाला मगर विनम्रतापूर्वक उनके इस कथन से असहमति है । मनुष्य का मेल आवश्यकता करवाती है और बाजार अपने आर्थिक सहयोग से उस आवश्यकता की पूर्ति करता है । बगैर आर्थिक शक्ति के सदुपयोग के समाज में सृजनात्मकता का संरक्षण सम्भव नहीं है और सृजनात्मकता का संरक्षण तभी होगा जब संस्थाएं अपने अस्तित्व के लिए आत्मनिर्भर बनेंगी । स्वतंत्र अभिव्यक्ति का उद्घोष उधार की वाणी से नहीं हो सकता और आत्मनिर्भरता का स्वर रोजगार से मुखरित होता है, जिसके लिए कौशल की आवश्यकता पड़ती है और वह कौशल, प्रशिक्षण आपको या तो शिक्षण संस्थान से मिलता है अथवा पुस्तकालयों से मिल सकता है । विशेष रूप से पुस्तकालय इसलिए महत्व रखते हैं क्योंकि आर्थिक विषमता यहाँ बाधा नहीं बनती और पुस्तकालय चाहे तो कौशल और प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करके न सिर्फ युवाओं को आत्मनिर्भर बना सकते हैं बल्कि स्वयं भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं । अधिक से अधिक कार्यक्षेत्रों में विशेष रूप से पुस्तक लेखन को प्रोत्साहित करके पुस्तकालयों की संख्या बढ़ाकर प्रशिक्षणमूलक, व्यक्तित्व विकास मूलक गतिविधियाँ संचालित कर युवा वर्ग को पुस्तकालयों के प्रति आकर्षित किया जा सकता है ।
सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकालय ही नहीं है, यहाँ एक शिक्षण संस्थान भी संचालित किया जाता रहा है और यहाँ पर पीढ़ियाँ बनती हैं और पुस्तकालय में आने वाले युवाओं को न सिर्फ शैक्षणिक अपितु मानसिक रूप से सम्बल देना, प्रोत्साहित करना उनको जीवन के रणक्षेत्र में खड़ा करता है और यही सामाजिक प्रगति का मार्ग है । पिछले लगभग 25 वर्षों से श्री तिवारी यही कार्य करते आ रहे हैं और बगैर किसी अपेक्षा के करते आ रहे हैं, अपने शब्दों से न जाने कितनों को इन्होंने भटकने से बचाया, न जाने कितनों को रोजगार पाने में, सामाजिक और पारिवारिक उलझनों से टकराने में सहायता की है, कभी अनुवाद से, कभी प्रूफ देखकर, कभी सम्पादन सहयोग से तो कभी सही परामर्श से न जाने कितने लेखकों को, पुस्तकों को अप्रकाशित रह जाने से बचाया । उन युवाओं से पूछिए कि उस परामर्श का कितना महत्व होता है जब जीवन में कोई हाथ पकड़ने वाला नहीं होता, जब बार – बार लगता है कि नहीं हो पा रहा और इतने में कोई आकर समाधान दे और कहे कि आगे बढ़ो…सब हो जाएगा ।
संवाद की परम्परा को बचाना, सृजन के उत्साह को बचाना, पुस्तकों को बचाना…यह एक साधारण सी कुर्सी पर बैठा व्यक्ति ही करता है जो देखा जाए तो किसी पद पर नहीं है, उसके पास कोई सत्ता नहीं है, वह संस्था या संगठन का सर्वेसर्वा भी नहीं है मगर वह है…वह आधार है..नींव की वह ईंट है जो दिखती नहीं है मगर जिसके बगैर सृजन के क्षेत्र के महल खड़े हो ही नहीं सकते । …राष्ट्र निर्माण में यही उनका बड़ा योगदान है । पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकालय नहीं होते…यहाँ सिर्फ पुस्तकें ही नहीं होतीं..यहाँ देश का वर्तमान और भविष्य पलता है । मेरा आग्रह है तमाम पुस्तकालयों से कि अपना महत्व समझिए….और पूरे आत्मविश्वास के साथ देश के निर्माण को गति दीजिए ।
तिवारी जी को इस सम्मान को स्वीकृत करने के लिए आभार…आप सचमुच सृजन के प्रहरी हैं…अशेष मंगलकामनाएं…नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं आप सभी को…। बने रहिए हमारे साथ ।
वर्तमान सभ्यता और आदिवासी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
हिंदी मेला में कविताओं पर संगीतबद्ध गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति
कोविड – हेटेरो की दवा निर्माकॉम को डब्ल्यूएचओ की मंजूरी
कोलकाता । दवा कंपनी ‘हेटेरो’ ने कोविड-19 की मौखिक दवा निर्माट्रेलविर के जेनेरिक स्वरूप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन पूर्व अहर्ता दवा कार्यक्रम (डब्ल्यूएचओ पीक्यू) के तहत स्वीकृति मिलने की सोमवार को घोषणा की। कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ‘फाइजर’ की कोविड-19 मौखिक वायरल रोधी दवा ‘पैक्सलोविड’ के किसी जेनेरिक स्वरूप को पहली बार शुरुआती मंजूरी मिली है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस से मामूली या मध्यम रूप से संक्रमित उन मरीजों को निर्माट्रेलविर और रिटोनाविर देने की मजबूत सिफारिश की है, जिनके अस्पताल में भर्ती होने का अधिक खतरा है। ऐसे मरीज या तो बुजुर्ग हो सकते हैं, या उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है या फिर हो सकता है कि उनका टीकाकरण न हुआ हो। हेटेरो द्वारा उपलब्ध कराए गए मिश्रित पैक निर्माकॉम में 150 एमजी की निर्माट्रेलविर (दो गोली) और 100 एमजी रिटोनाविर (एक गोली) है। यह दवा केवल चिकित्सक की सलाह पर ही उपलब्ध है और संक्रमित पाए जाने के बाद जल्द से जल्द एवं लक्षणों की शुरुआत से पांच दिन के भीतर इस दवा को लिया जाना चाहिए। विज्ञप्ति में बताया गया कि निर्माकॉम का उत्पादन भारत में हेटेरो की इकाइयों में किया जाएगा।
हेटेरो ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक वामसी कृष्ण बांदी ने कहा, ‘‘निर्माकॉम के लिए डब्ल्यूएचओ की शुरुआती मंजूरी मिलना कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे हमें इस अहम नवोन्मेषी एंटीरेट्रोवायरल दवा तक लोगों की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। हम भारत में 95 एलएमआईसी (कम एवं मध्यम आय वाले देशों) में किफायती दाम पर निर्माकॉम को शीघ्र उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भवानीपुर कॉलेज में फैशन शो, 39 कॉलेजों ने लिया भाग
कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली सभागार में उमंग 22 के दौरान फैशन शो का आयोजन हुआ जिसमें 39 कॉलेजों ने भाग लिया। सभी कॉलेज के नाम कोड में दिए गए। विभिन्न थीम पर आधारित विद्यार्थियों ने फैशन में भाग लिया और बेहतरीन प्रस्तुतियाँ दी। एस डी बर्मन के युग से अब तक , इंडियन सिनेमा की रिवोल्यूशन की कहानी , गॉड और डेमन, फेयरी टेल एंड रियल्टी, मेट गाला आदि अनेक विषयों पर केंद्रित फैशन शो प्रस्तुत किए गए। संचालन किया भवानीपुर कॉलेज की छात्रा तुषिता चुगानी , वैष्णवी सूर्यवंशी ने। छात्रा संजना बराई की टीम ने फैशन शो का संयोजन किया। लक्मे एकाडमी, जिंक लंडन, डाइलाइट्स इन्वेस्टमेंट द्वारा स्पॉन्सर कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ फैशन कॉलेज के विद्यार्थियों को चयनित किया गया। फैशन की दुनिया के प्रसिद्ध मॉडल प्रार्थना सरकार और प्रांतिका दास ने निर्णायक का भार निर्वहन किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने दोनों निर्णायकों को सम्मानित किया। दोनों ही मॉडल ने मंच पर अपना रैंप वॉक भी किया। दर्शक विद्यार्थियों ने गीत गज़ल और नृत्य की सुंदर प्रस्तुतियाँ भी दी। सभी चयनित कॉलेज के विद्यार्थियों को उमंग 22 के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
साहित्यिकी ने ‘मधुपुर आबाद रहे’ पर आयोजित की परिचर्चा
कोलकाता । महिलाओं के लेखन को दिशा देने और उपयुक्त मंच प्रदान करने के लिए समर्पित संस्था साहित्यिकी ने पिछले दिनों अपनी सदस्य लेखिका गीता दूबे के पहले काव्य संकलन- ‘मधुपुर आबाद रहे’ पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन जनसंसार सभागार में किया। साहित्यिकी की सचिव मंजू रानी गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए गीता दूबे की कविताओं में बहुआयामी परिदृश्य का जिक्र किया और उसे शुभकामनाएं दीं। उसके पश्चात मधुपुर आबाद रहे संग्रह से कुछ कविताओं का पाठ बाल कथा लेखिका बबिता मांधणा ने किया।
परिचर्चा में भाग लेते हुए मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित प्रख्यात आलोचक अरुण होता ने कहा कि इस संग्रह की कविताएँ स्व से ऊपर उठ कर पर की संवेदना को मुखरित करते हुए अपने समय की बड़ी चिंताओं और समस्याओं को विभिन्न बिंबों और भाव बोध के साथ व्यक्त करती हैं। स्त्री संवेदना, प्रेम, पर्यावरण, भूमंडलीकरण, प्रकृति- सौंदर्य, विवाह, कोरोना काल आदि कविताएँ शिल्प और विषय के स्तर पर विविधता लिए हैं।
जानी मानी समीक्षक और शिक्षाविद् इतु सिंह ने गीता दूबे की कविताओं पर अपने वक्तव्य में कहा कि नारी जीवन के संघर्ष और अनुभव के अलावा जिस तत्व ने मुझे सबसे ज़्यादा आकर्षित किया,वह प्रेम है पर उस पर कहीं पर्दा पड़ा है, उन कविताओं का दरवाज़ा जाने कब खुलेगा। गीता की कविताएँ अंतरजगत की अपेक्षा बहिर्जगत के आवेग की ज़्यादा हैं, वह उन्हें व्यथित करती हैं। उनकी छोटी कविताएँ अल्प शब्दों में ही बहुत कुछ कह जाती हैं और देर तक हमें स्पंदित करती रहती हैं और यह उनकी छोटी कविताओं का जादू है।
वरिष्ठ कवि पत्रकार रावेल पुष्प ने कहा कि गीता की अधिकतर कविताएं नारी मन की व्यथा का इज़हार करती हैं और वे रूमानियत के प्रतीक चांद की चाहत नहीं करतीं बल्कि तपते हुए सूरज को मांगती हैं जिसकी तेज रोशनी में वे तपकर निखर सकें। इसके अलावा बाबूलाल शर्मा,शंभुनाथ, आशुतोष सिंह, विजय गौड़ ने भी गीता दूबे के काव्य संकलन की कविताओं की विविधता के साथ उनके विभिन्न साहित्यिक पहलुओं का भी जिक्र किया।
गीता दूबे ने आभार व्यक्त करते हुए अपने काव्य लेखन के विभिन्न पड़ावों का जिक्र किया । उन्होंने कहा कि कविताएं तो उनकी सखी की तरह हैं, जिनसे वे अपने मन की बातें दिल खोलकर बखूबी कर सकती हैं। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में वरिष्ठ लेखिका रेणु गौरीसरिया ने पुनरावृत्ति से बचते हुए कहा कि गीता की कविताओं में प्रेम का शाश्वत अद्भुत राग सर्वत्र बिखरा हुआ है। धर्म, राजनीति और समाज में व्याप्त विद्रूपताएँ और विसंगतियों से उपजी कचोट उनकी कविताओं में स्पष्ट झलकती है।
इस परिचर्चा की महत्वपूर्ण उपस्थिति में शामिल थे- सर्वश्री शैलेन्द्र,शर्मिला बोहरा जालान, उमा झुनझुनवाला, प्रेम कपूर, सुषमा हंस, सुषमा त्रिपाठी, सूफ़िया यास्मीन, दुर्गा व्यास, अनिता ठाकुर, प्रमिला धूपिया, नमिता जायसवाल, सरिता बेंगानी, चंदा सिंह, कविता कोठारी, अल्पना नायक, रचना पांडेय, प्रीति सिंघी, लिली शाह, सत्य प्रकाश तिवारी, रोहित राम, विशाल सिंह, पूर्ति खंडूरी, महेन्द्र नारायण पंकज, शाहिद फरोगी, सेराज खान बातिश, प्रभाकर चतुर्वेदी तथा अन्य।
इस जीवन्त परिचर्चा तथा अच्छी उपस्थिति से जन संसार सभागार एक बार फिर गुलजार हो गया।
हिंदी मेला में चित्रांकन और हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता
आईसीएआई के ईस्टर्न इंडिया रीजनल काउंसिल पहला कार्बन न्यूट्रल सम्मेलन सम्पन्न
कोलकाता । आईसीएआई के ईस्टर्न इंडिया रिजनल काउंसिल (ईआईआरसी) की ओर से कोलकाता के विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय (23 और 24 दिसंबर, 2022) 47वें क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है। जिसका विषय था “उत्तिष्ठत जाग्रत – अपने भीतर के परिवर्तन को जागृत करना” इस सम्मेलन में संस्था के देशभर से 2500 से अधिक सदस्यों के साथ फाइनेंस प्रोफेशनल्स के अलावा अन्य लोगों ने भाग लिया।
आईसीएआई और ईआईआरसी द्वारा आयोजित 47वें क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन आईसीएआई के माननीय अध्यक्ष सीए (डॉ.) देबाशीष मित्रा ने किया। इस मौके पर सीए रंजीत कुमार अग्रवाल (परिषद के सदस्य), आईसीएआई और ईआईआरसी के अध्यक्ष सीए रवि कुमार पटवा के अलावा समाज के कई प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
मौके पर सीए (डॉ.) देवाशीष मित्रा (माननीय अध्यक्ष, आईसीएआई) ने अपने संबोधन में, वैश्विक प्रौद्योगिकी के विकास और स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने सम्मेलन के कार्बन तटस्थता पहलू की प्रशंसा की, जिससे सामाजिक और सामुदायिक लाभ मिलेगा। जी20 शिखर सम्मेलन 2023 पर बात करते हुए उन्होंने “एक पृथ्वी एक परिवार एक भविष्य” के आदर्श वाक्य को दोहराया और भारत के नेतृत्व और इस नेक काम के लिए संस्थान के प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि आईसीएआई भविष्य की युवा पीढ़ी के लिए अपने अधिकारों का उपयोग राष्ट्र की सेवा करने और समाज की भलाई के लिए करता आया है।
सम्मेलन का विषय “उत्तिष्ठत जाग्रत – भीतर के परिवर्तन को जागृत करना” था। इसमें चर्चा हुई कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी का यह क्षेत्र प्रौद्योगिकी पर अधिक जोर देने के साथ बड़े पैमाने पर बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इन परिवर्तनों के अनुकूल होने और दुनिया भर के व्यवसायों के लिए विश्वसनीय सलाहकारों के रूप में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए दुनिया भर में व्यवसायों और ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह पेशा लगातार विकसित हो रहा है। जैसे-जैसे विश्व की अर्थव्यवस्था तेजी से जटिल होती जा रही है, व्यवसाय और संगठन उन्हें वित्तीय सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए तेजी से सीए पर भरोसा कर रहे हैं। इसके कारण चार्टर्ड एकाउंटेंट्स अब विश्व स्तर पर हो रहे बदलाव के बारे में जागरूक होना होगा और बदलते परिवेश के लिए खुद को और भी सुसज्जित करना होगा।











