Saturday, March 28, 2026
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110वें स्थापना वर्ष पर ऑक्सफोर्ड लाया ब्लेंडेड लर्निंग सॉल्यूशन ‘ऑक्सफोर्ड इंस्पायर’

शिक्षकों एवं प्रिंसिपलों के लिए 2 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की।

कोलकाता । प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड के विभाग ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया ने भारत में अपनी स्थापना के 110 वर्ष पूरे कर लिये हैं। इस अवसर पर राज्य भर के शिक्षकों एवं प्रिंसिपलों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी । इसके साथ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (ओयूपी) ने मिश्रित शिक्षण समाधानों के अपने नए सूट – ऑक्सफोर्ड इंस्पायर को आरम्भ करने की भी घोषणा की । ग्रेड 1 से 8 के छात्रों के लिए, ऑक्सफोर्ड इंस्पायर भारत का पहला योग्यता आधारित मिश्रित शिक्षण समाधान है, जिसके मूल में ‘शिक्षार्थी सफलता’ है। समाधान श्री द्वारा लॉन्च किया गया था। सुमंत दत्ता, प्रबंध निदेशक, ओयूपी इंडिया।
नए समय की शिक्षा को ध्यान में रखकर लाये गये ब्लेंडेड लर्निंग प्रोडक्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ओयूपी इंडिया के एमडी सुमंत दत्ता ने कहा, पश्चिम बंगाल की एक मजबूत सांस्कृतिक और शैक्षिक राज्य होने की प्रतिष्ठा है। हमें विश्वास है कि राज्य के छात्र और शिक्षक ऑक्सफोर्ड इंस्पायर के अभिनव प्रारूपों की सराहना करेंगे, ताकि अवधारणात्मक सीखने और गुणवत्ता सामग्री तक पहुंच में सुधार हो सके। नया मिश्रित उत्पाद स्कूली किताबों और साथी डिजिटल समाधानों जैसे वीडियो, प्रश्न बैंक, क्विज़ आदि की पेशकश करके समग्र रूप में शिक्षा के लिए छात्रों की निरंतर बदलती जरूरतों को पूरा करेगा। ऑक्सफोर्ड इंस्पायर की नींव एनईपी 2020 द्वारा अनुशंसित दृष्टिकोण के साथ प्रतिध्वनित होती है और आकर्षक विषय और गतिविधि-आधारित मिश्रित शिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से प्रदान की जाने वाली अवधारणा-आधारित, क्रॉस-डिसिप्लिनरी शिक्षा पर केंद्रित है।
इस कार्यक्रम में, ओयूपी ने अंग्रेजी पुस्तकों की अपनी बेस्टसेलर श्रृंखला – न्यू ऑक्सफोर्ड मॉडर्न इंग्लिश के एक नए संस्करण का अनावरण किया। पाठ्यपुस्तक (पहली बार 1987 में शुरू की गई), वर्तमान में अपने 36वें संस्करण में है। नया संशोधन, पूरी तरह से नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, अपने शैक्षणिक मूल को बरकरार रखते हुए पाठ्यक्रम का एक आधुनिक संस्करण प्रदान करता है।
ओयूपी ने एक नई व्याकरण श्रृंखला – द ग्रामर स्कॉलर भी लॉन्च की। कक्षा 1 से 8 तक की किताबें मज़ेदार, इंटरैक्टिव तरीके से भाषा सिखाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। यह एनईपी 2020 और सरकार के पारख मूल्यांकन दिशानिर्देशों के अनुरूप है। यह पहला व्याकरण पाठ्यक्रम है जो इंटरैक्टिव शिक्षण उपकरण और शिक्षण सामग्री के साथ एकीकृत डिजिटल एड्स प्रदान करता है।

हेक्सागन इंडिया ने पेश किया न्यू लेइका एपी20 ऑटोपोल 

निर्माण और सर्वेक्षण क्षेत्र के पेशेवरौं के लिए दुनिया का पहला टिल्ट-कंपेंसेटेड टोटल स्टेशन पोल सॉल्यूशन 

हैदराबाद । हेक्सागन इंडिया की ओर से न्यू लेइका एपी20 ऑटोपोल बाजार में आ गया है। निर्माण और सर्वेक्षण छेत्र से जुड़े प्रोफेशनल के लिए यह दुनिया का पहला टिल्ट-कंपेंसेटेड टोटल स्टेशन पोल सॉल्यूशन होगा। हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर जियो स्मार्ट इंडिया 2022 कॉन्क्लेव में इसे भव्य तरीके से लांच किया गया। इस मौके पर विशिष्ट लोगों में प्रमोद कौशिक (प्रेसिडेंट हेक्सागन इंडिया), मनोज शर्मा (डायरेक्टर मार्केटिंग एंड सेल्स एक्सीलेंस, हेक्सागन इंडिया), पंकज गुप्ता (डायरेक्टर सेल्स जियोसिस्टम्स, हेक्सागन इंडिया), परेश त्रिवेदी (निदेशक, सेल्स, एसआईजी, हेक्सागन इंडिया) के अलावा अन्य कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

लेइका एपी20 ऑटोपोल, नए एपी रिफ्लेक्टर पोल के साथ अपग्रेडेड सेंसर मॉड्यूल को जोड़ती हैं। यह दुनिया का पहला उपकरण है, जो तीन सामान्य वर्कफ़्लो से मिलनेवाली चुनौतियों को त्वरित हल करता है। इसके अलावा पोल को लंबवत और स्थिर रखना, फ़ील्ड सॉफ़्टवेयर में मैन्युअल रूप से पोल की ऊंचाई दर्ज करना और कई रिफ्लेक्टर वाली साइट पर फॉरेन टारगेट को लॉक करना भी इसका अन्यतम कार्य है। हेक्सागन इंडिया के अध्यक्ष प्रमोद कौशिक ने कहा, हम समझते हैं कि आज के व्यस्ततम समय में समय-सारणी, सटीक ऑन-डिमांड डेटा की बढ़ती उम्मीदें और बजट की कमी ने सर्वेक्षकों और इससे जुड़े प्रोफेशनल्स पर काफी दबाव डाला है। इस चुनौती के बीच एपी20 ऑटोपोल एक गेम चेंजर बनकर हमारे बीच आया है, क्योंकि यह एक साथ कई चुनौतियों का समाधान करता है। यह बिल्कुल अद्वितीय हैं और पेशेवरों को उनके काम करने के तरीके में बदलाव लाने में सक्षम है।

इस अवसर पर पंकज गुप्ता (डायरेक्टर, सेल्स जियोसिस्टम्स, हेक्सागन इंडिया) ने कहा, नया एपी20 ऑटोपोल अत्याधुनिक सेंसर से युक्त तकनीकों को मिश्रित करता है, ताकि लेइका जियोसिस्टम्स की मदद से टोटल स्टेशनों के साथ डिजिटल वर्कफ़्लो में मैन्युअल प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से स्वचालित किया जा सके। इसे हम कठिन मौसम की स्थिति में भी माप सकते हैं, इसके साथ ही हम पहले दुर्गम बिंदुओं को भी इसकी मदद से माप सकते हैं।

लेइका जिओसिस्टम्स- आनेवाले अगले 200 वर्षों के लिए सर्वेक्षण की दुनिया में क्रांति लाते हुए हेक्सागन का हिस्सा बनने के बाद लेइका जियोसिस्टम्स इस छेत्र के प्रोफेशनल्स के लिए अब संपूर्ण समाधान बनकर सामने आया है। प्रीमियम उत्पादों और अभिनव समाधान के विकास के लिए जाने जानेवाले एयरोस्पेस, रक्षा, सुरक्षा, निर्माण और विनिर्माण जैसे उद्योगों से जुड़े प्रोफेशनल्स अब अपनी सभी भू-स्थानिक आवश्यकताओं के लिए लेइका जियोसिस्टम्स पर भरोसा करते हैं। सटीक उपकरणों, परिष्कृत सॉफ्टवेयर और विश्वसनीय सेवाओं के साथ, लेइका जियोसिस्टम्स इस छेत्र के भविष्य को आकार देने वालों को उनकी समस्या का समाधान कर उन्हें सुविधा प्रदान करता है।

सुमधुर संगीत के वादे के साथ आई इंटरनल साउड्स संगीत कम्पनी

कोलकाता।  संगीत की दुनिया में गुणवत्तापरक मधुर संगीत लाने के उद्देश्य से नयी संगीत कम्पनी “इटरनल साउंड्स” ने कदम रखा है। टाटा 88 ईस्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में इसका उद्घाटन किया गया । वित्त बाजार विशेषज्ञ उत्सव पारेख, उद्योगपति मयंक जालान, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एवं फिल्म निर्माता गौरांग जालान एवं विख्यात तबला वादक विक्रम घोष की भागीदारी में यह कम्पनी आरम्भ हुई है। इस मौके पर मशहूर गायिका उषा उत्थुप, फिल्म निर्देशक अरिंदम सिल, संगीतज्ञ उस्ताद राशिद खान के साथ टॉलीवुड अभिनेत्री जया सील घोष व अन्य संगीत जगत से जुड़ीचर्चित हस्तियाँ उपस्थित थीं।
इस अवसर पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए संगीतज्ञ विक्रम घोष ने कहा, ‘आज के जमाने में ज्यादातर लोग अब केवल ऐसा संगीत बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहें हैं, जो मौसम की तरह बदलते रहता है जबकि दूसरी ओर, इटरनल साउंड्स का विजन स्थायी संगीत बनाने पर ध्यान केंद्रित करना है। यहां उल्लेखनीय संगीत जगत के कुछ चर्चित चेहरों में जैसे, हरिहरन, उषा उत्थुप, सोनू निगम, शान, कविता सेठ, महालक्ष्मी अय्यर आदि प्रमुख हैं। शास्त्रीय विधा में हम पंडित विश्वमोहन भट्ट, पंडित अजय चक्रवर्ती, उस्ताद राशिद खान, पंडित रोनू मजूमदार, कौशिकी चक्रवर्ती सहित कई अन्य गणमान्य लेखक के साथ मिलकर हम कई भावपूर्ण रचनाएँ आगे चलकर करेंगे! हम जॉन मैकलॉघलिन, नोरा जोन्स, रिकी केज, अनुष्का शंकर, ग्रेग एलिस, स्टीव स्मिथ आदि जैसे कई प्रमुख कलाकारों को उनकी सहमति के आधार पर उनके लिए कई अंतरराष्ट्रीय मंच बनाना चाहते हैं।  केवेंटर एग्रो लिमिटेड के एमडी मयंक जालान ने कहा, हम ऐसा संगीत बनाना चाहते हैं, जो भारतीय संगीत को संपूर्ण रूप से कवर कर इसे परिपूर्ण करे। यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि, जरूरी नहीं कि मौसमी हिट के उद्देश्य से यह संगीत संचालित हो। हमें उम्मीद है कि हम आने वाले वर्षों में अपने दर्शकों को बहुमूल्य संगीत उपहार में देने में सक्षम होंगे। उत्सव पारेख (चेयरमैन, एसएमआइएफएस कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड) ने कहा, ‘इटर्नल साउंड्स’ में हमेशा महान प्रतिभा की झलक छिपी रहेगी। हम दृढ़ता से मानते हैं कि कई लोगों में अभी भी गुणवत्तापूर्ण संगीत की कई शैलियां मौजूद है, वे ऐसे संगीत के पुनरुत्थान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गौरांग फिल्म्स के निदेशक श्री गौरांग जालान ने कहा कि, ”इटर्नल साउंड्स में हम इसके भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं। इसके जरिए स्थायी संगीत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, सदाबहार गायक हरिहरन जी के साथ 5 गानों वाला रोमांटिक एल्बम हम जल्द ही रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं, जो हमारी पहली रिलीज होगी।

 

भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के अध्यक्ष चंपक लाल ए दोशी का निधन

कोलकाता । गत 14 नवम्बर को प्रातः 8 बजे भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के लोकप्रिय अध्यक्ष चंपक लाल दोशी जी नहीं रहे। विद्यार्थियों और शिक्षक गणों तथा मैनेजमेंट के सभी पदाधिकारियों में गहरा शोक व्याप्त है। इस अवसर पर राज्य की मुख्यमंत्री माननीय ममता बनर्जी ने शोक पत्र द्वारा समाज सेवी चंपक लाल ए दोशी जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। वहीं मेयर फिरहाद हकीम ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के लोगों को सांत्वना प्रदान की। भवानीपुर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह, डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी, डीन प्रो दिलीप शाह और टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय एवं सभी शिक्षक गणों ने चंपक लाल ए दोशी जी का जाना समाज शिक्षा के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताई।

अर्चना ने मनाया कविता उत्सव

कोलकाता । अर्चना संस्था की सदस्यों ने कविता उत्सव मनाया जिसमें स्वरचित रचनाएँ और गीत पढे़ गए। संगीता चौधरी ने एक दिन मन की सुप्त कंदराओं में विचारों का भूचाल आया। कविता सुनाई, मृदुला कोठारी ने देह के सारे अंगों पर दोहे एवं मुक्तक कान कोयल के सुने सोन चिरैया की बोली सुनाकर सबका मन मोह लिया और गीत निस दिन वह अंधियारे को भगाने आता है। सूरज का एक दीप लिए जो भोर में गाता है सुनाया, सुशीला चनानी ने दोहा विधा में माँ की गोदी सी लगे,ममता भीगी रात।तन पाता है थपकियाँ ,मन सपने सौगात।।और कविता तन्हाई सुनाई जिसकी पंक्तियाँ भीड़ में तो इन्सान खो जाता है, बस तन्हाई के आलम में ,अपना सा हो जाता है। पसंद की गई। अहमदाबाद से भारती मेहता ने कविता एक स्थिति के बाद, कोई भी रिश्ता ओढ़ने से रुकती नहीं हैं ठंड! और जब वह बच्ची थीउसकी मुस्कान थी हल्की- फुलकी रंग बिरंगी तितली की तरह! सुनाकर नए बिंबों का प्रयोग किया। हिम्मत चोरड़़िया प्रज्ञा ने मनहरण घनाक्षरी-सारे जग से न्यारा, लगे हमें सदा प्यारा।पावन ये देवभूमि, हिन्दुस्तान है।। गीतिका-तारे तोड़ जमीं पर लाऊँ, कहता मेरा लाल।माँ मुझको बंदूक दिला दो, बदलूँगा मैं चाल।।, बनेचंद मालू ने कवि कुछ ऐसा गीत सुनाओ, मनका मीत मिल जाए ! और मैं ढूंँढन निकला आदमी सुना कर अपने अनुभवों को शब्दों द्वारा साझा किया। प्रसन्न चोपड़ा ने उत्सव बाहर नहीं अंदर मना रही हूँ । गीत बाहर नहीं अंदर गा रही रही हूँ सुनाया जिसमें छिपे विषाद के भाव ने सबको भावुक कर दिया । उषा श्राफ ने ये शाम के धुंधलके, साए थे गहरे हल्के सुना कर अपनी रोमांटिक भावनाओं को व्यक्त किया। वसुंधरा मिश्र ने कविता सूरज ग्रहण पस्त सुनाई जिसकी पंक्तियाँ सूर्य को जन्म देना नहीं है आसान, यश, तेज, ओज यूँ ही नहीं मिल जाते। जैसी पंक्तियाँ कर्म के प्रति प्रोत्साहित करने वाली रहीं। संचालक और संयोजन करते हुए इंदु चांडक ने कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से की और कविता शब्द व्यष्टि हैं समष्टि दृश्य हैं दृष्टि हैं ब्रह्म हैं सृष्टि हैं और मुश्किलों बन संगिनी तुम साथ मेरे चलती जाओ सुनाई। धन्यवाद ज्ञापन किया बनेचंद मालू नेे । जूम पर यह कार्यक्रम अर्चना संस्था की मासिक गोष्ठी के अंतर्गत किया गया।

सेठ सूरजमल जालान गर्ल्स कॉलेज में अल्यूमनी मीट

कोलकाता । सेठ सूरजमल जालान गर्ल्स कॉलेज में हाल ही में अल्यूमनी मीट आयोजित की गयी । इस मिलनोत्सव में कॉलेज की पूर्व छात्राएं उपस्थित हुईं। इनमें से कई छात्राएं विभिन्न कार्यक्षेत्रों में स्थापित हो चुकी हैं । इस अवसर पर कॉलेज की टीचर इन्चार्ज डॉ. चंदना दत्ता ने भी अपने विचार रखे। कॉलेज की छात्राओं ने पूर्व छात्राओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। पूर्व छात्राओं में कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय, कलकत्ता विश्वविद्यालय की प्रो. डॉ. राजश्री शुक्ला, गोखले कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. कुलदीप कौर, गोखले कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग की प्रोफेसर ललिता अग्रवाल, पत्रकार सुषमा त्रिपाठी समेत कई अन्य पूर्व छात्राएं उपस्थित थीं। इस मिलनोत्सव में स्वागत भाषण डॉ. सुचिता कुजूर ने दिया तथा संयोजन अल्यूमनी एसोसिएशन की संयोजक प्रो. डॉ. इंदिरा चक्रवर्ती ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. डॉ. देवारति सेन ने किया

देवी का का अद्भुत रूप, दक्षिण का कन्याकुमारी

यह नारा नहीं वास्तविकता है, जिसका तीव्रता से आभास तब होता है जब हम भारत के दक्षिणी छोर पर देवी कन्या कुमारी के दर्शन करते हैं। अनायास ही उत्तर में हिमालय की पर्वत शृंखलाओं में बसी वैष्णो माता का ध्यान आता है। दोनों मां पार्वती के रूप हैं। एक ओर समुद्र तटवासिनी मां, तो दूसरी ओर बर्फीली पहाड़ियों पर बसी मां। कन्या कुमारी में देवी कुंवारी अर्थात अविवाहिता कन्या रूप में है और उधर वैष्णो माता के मंदिर में प्रतिदिन कन्याओं का पूजन होता है। एक अदृश्य बंधन उत्तर से दक्षिण तक बांधता है- देश को, संस्कृति को और हम सबको।
कन्या कुमारी तमिलनाडु का एक जिला है जो भारत के दक्षिणी छोर पर है। यहां की लुभावनी खासियत तीन समुद्रों का संगम है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिंद महासागर और पश्चिम की ओर अरब सागर। यह संगम इसे तीर्थ स्थान की संज्ञा देता है। प्रकृति की दृष्टि से देखा जाए तो संगम के स्थान पर चट्टानों से टकराती लहरें और पानी का उफान मन में श्रद्धायुक्त भय पैदा करता है और इंसान नतमस्तक हो जाता है।
धार्मिक दृष्टि से माता का मंदिर और विवेकानंद स्मारक तीर्थस्थल हैं, तो तिरुवल्लावुर की प्रतिमा तमिल साहित्य के महान संत कवि की याद दिलाती है। भौगोलिक दृष्टि से यह जिला पश्चिमी घाट की पहाड़ियों और समुद्र के बीच भिंचा हुआ है। भू-वैज्ञानिकों के मतानुसार, भौगोलिक उथल-पुथल से बने इस भू-भाग की चट्टानें 25 लाख वर्षों से अधिक पुरानी नहीं हैं।
माना जाता है कि देवी कन्या कुमारी की मूर्ति की स्थापना ऋषि परशुराम ने की थी और यह मंदिर लगभग 3000 वर्ष पुराना है। परंतु इतिहास के अनुसार, शहर में स्थित वर्तमान मंदिर 8वीं शताब्दी में पांडया सम्राटों ने बनवाया था। चोल, चेरी, वेनाह और नायक राजवंशों के शासन के दौरान समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण हुआ।


यहां की मंदिर स्थापत्य कला इन्हीं शासकों की देन है। मंदिर समुद्र तट से कुछ ऊंचाई पर है तथा इसके चारों ओर लगभग 18-20 फुट ऊंची दीवार है। राजा मार्तंड वर्मा (1729 से 1758) के राज्य काल में कन्या कुमारी का इलाका त्रावणकोर राज्य का हिस्सा बन गया, जिसकी राजधानी पद्मनाभपुरम थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद त्रावणकोर राज्य का भारतीय संघ में विलय होने पर वर्ष 1956 में यह तलिमनाडु का एक जिला बन गया।
कन्या कुमारी मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली की है, जिसमें काले पत्थर के खम्भों पर गूढ़ और पेचीदा नक्काशी है। मंदिर में एक छोटा गुम्बद है जिसके चारों ओर अन्य गुम्बद हैं, जिनमें देवी- देवताओं की मूर्तियां हैं, जैसे गणेश, सूर्यदेव, अय्यपा स्वामी, काल भैरव, विजय सुंदरी और बाला सुंदरी मंदिर परिसर में मूल गंगा तीर्थ नामक कुआं है, जहां से देवी के अभिषेक का जल लाया जाता है।
वास्तव में मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर है परंतु यह वर्ष में पांच बार विशेष त्यौहारों के समय ही खुलता है, अन्य समय बंद रहता है तथा प्रवेश उत्तरी द्वार से किया जाता है। पूर्व द्वार बंद होने के पीछे एक कारण है। कहते हैं कि देवी की नथ का हीरा इतना तेजस्वी है कि उसकी चमक दूर तक जाती थी और इस प्रकाश को दीपस्तंभ समझ कर जहाज इस दिशा में आ जाते और चट्टानों से टकरा जाते थे।
मंदिर से जुड़े 11 तीर्थस्थल, इसके भीतर के तीन गर्भ गृह, गलियारे और मुख्य नवरात्रि मंडप गहन हैं और यह कहना न होगा कि इन्हें एकदम से समझना किसी भूल-भुलैयां से कम नहीं। अन्य दर्शनीय स्थलों में पद्मनाभपुरम महल, थोलावलाई मंदिर, सुचिंद्रम मंदिर, देवी भगवती मंदिर और ओलाकावुरी जलप्रपात विशेष रूप से शामिल हैं।

रसोई – पनीर बटर मसाला

सामग्री – 2 कप पनीर के टुकड़े, 2 प्याज, 3-4 टमाटर, 3-4 कलियां लहसुन, 2 टेबलस्पून काजू, 1/2 कप दूध , 1 तेजपत्ता, 2 हरी मिर्च, 1/2 इंच टुकड़ा अदरक, 2 टी स्पून कसूरी मेथी , 2 टेबलस्पून क्रीम/मलाई,1 टेबलस्पून धनिया पाउडर, 1/2 टी स्पून गरम मसाला ,2 टेबलस्पून मक्खन, 1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर ,2 टेबलस्पून तेल , स्वादानुसार नमक
विधि – पनीर बटर मसाला बनाने के लिए सबसे पहले पनीर लेकर उसके एक-एक इंच के टुकड़े काट लें। इसके बाद प्याज, अदरक और लहसुन को मिक्सर जार में डालकर पीसकर पेस्ट तैयार कर लें। इस बीच काजू को पानी में भिगोकर 15 मिनट के लिए रख दें। तय समय के बाद काजू को मिक्सी में डालें और ऊपर से थोड़ा सा पानी डालकर पीस लें। इसके बाद टमाटर को उबालें और फिर उसे पीसकर प्यूरी तैयार कर लें।
अब एक कड़ाही में तेल और मक्खन डालकर दोनों को साथ में मीडियम आंच पर गर्म करें। जब मक्खन पिघल जाए और गर्म हो जाए तो उसमें तेजपत्ता और प्याज का पेस्ट डालकर मिलाएं और तब तक भूनें जब तक कि प्याज का रंग हल्का भूरा न हो जाए। ऐसा होने में 3-4 मिनट का वक्त लग सकता है। इसके बाद इसमें लंबी कटी हुई हरी मिर्च डाल दें। कुछ सेकंड तक पकाने के बाद इसमें काजू का पेस्ट डालकर मिलाएं और अच्छे से भूनें। काजू के पेस्ट को चम्मच से मिलाने के बाद 2 मिनट तक भून लें। इसके बाद इसमें टमाटर की प्यूरी डालें और ग्रेवी को तब तक भूनें जब तक कि ये तेल न छोड़ने लग जाए। ग्रेवी के तेल छोड़ने में 4-5 मिनट का वक्त लगेगा। फिर धनिया पाउडर और गरम मसाला डालकर मिश्रण में अच्छे से मिक्स करें। अब आधा कप दूध और आधा कप पानी मिलाएं। इसे चम्मच से चलाते हुए तेल सतह पर आने तक पकाएं। जब ग्रेवी के ऊपर तेल दिखाई देने लगे तो पनीर के टुकड़े डालकर चम्मच की मदद से उन्हें ग्रेवी के साथ अच्छी तरह से मिक्स कर दें। इसके बाद कसूरी मेथी लें और उसे हाथों से पीसकर सब्जी में डालकर मिला दें। अब कड़ाही को ढककर सब्जी को तब तक पकाएं जब तक कि ग्रेवी गाढ़ी न हो जाए। इसके बाद गैस बंद कर दें। ऊपर से ताजी क्रीम डाल दें। टेस्टी पनीर बटर मसाला बनकर तैयार है। इसे पराठा, नान के साथ सर्व करें।

ये है एशिया का सबसे पढ़ा लिखा गांव, हर घर से निकलते हैं डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर

नयी दिल्ली । प्रमोद सुबह-सुबह अपने गांव में घूम रहे थे। तभी उन्हें यूनिफॉर्म पहने स्कूल जाते हुए कुछ बच्चे दिखे। प्रमोद ने बच्चों से पूछा तुम कहां जा रहे हो। सभी बच्चों ने बताया कि वो गांव के स्कूल में पढ़ने जा रहे हैं। इसके बाद प्रमोद ने पूछा कि पढ़ लिखकर क्या बनना है? स्कूल जा रहे बच्चों ने अलग अंदाज में अपने सपनों को प्रमोद के सामने रख दिया। किसी ने कहा कि उन्हें बड़े होकर डॉक्टर बनना है, तो किसी ने प्रोफेसर और आईएएस बताया। ये तो गांव के कुछ ही बच्चे थे, लेकिन इस गांव के लगभग हर बच्चे ने बड़े ख्वाब सजा रखें हैं। ऐसा इसलिए क्यों कि गांव के सैकड़ों लोग बड़े पदों पर तैनात भी हैं। आखिर ये गांव एशिया का सबसे पढ़ा लिखा गांव माना जाता है। हम बात कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश के धोर्रा माफी गांव की। पढ़ाई-लिखाई के मामले में ये छोटा सा गांव दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है नाम
अलीगढ़ जिले के जवां ब्लॉक में आने वाला धोर्रा माफी गांव का नाम 75 फीसदी से ज्यादा की साक्षरता दर के लिए साल 2002 में ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ। इतना ही नहीं इस गांव का नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए होने वाले सर्वे के लिए भी चुना गया। धोर्रा माफी गांव में पक्के मकान, 24 घंटे बिजली-पानी और कई इंग्लिश मीडियम स्कूल और कॉलेज हैं। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां के लोगों की आमदनी का मुख्य स्रोत खेती नहीं बल्कि नौकरियां हैं। इस गांव को भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में सबसे अधिक साक्षर होने का गौरव प्राप्त है।
गांव में नहीं होती खेती
गांव के निवासी प्रमोद कुमार राजपूत ने बताया कि धोर्रा माफी गांव की आबादी करीब 10 से 11 हजार है। उनका कहना है कि गांव में करीब 90 फीसदी से ज्यादा लोग साक्षर हैं। गांव के करीब 80 फीसदी लोग देशभर में बड़े पदों पर तैनात हैं। गांव के कई लोग डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेसर और आईएएस अफसर हैं। ये गांव अलीगढ़ शहर से सटा हुआ है। गांव में 5 साल पहले खेती बंद हो गई है। अब गांव के ज्यादातर लोग नौकरियां कर रहे हैं।
गांव में हैं कई स्कूल
धोर्रा माफी गांव अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से सटा हुआ है। इसके साथ ही गांव में कई स्कूल हैं। प्रमोद ने बताया कि गांव में सरकारी प्राइमरी स्कूल, इकरा पब्लिक स्कूल, एमयू कॉलेज, मून लाइट स्कूल जैसे कई नामी शिक्षण केंद्र हैं। गांव के कॉन्वेंट स्कूलों की तरह ही सरकारी स्कूलों में भी अच्छी पढ़ाई होती है। दरअसल, ये गांव एएमयू से सटा हुआ है। इसलिए वहां के प्रोफेसर और डॉक्टर्स ने गांव में अपना घर बनाया। धीरे-धीरे इस गांव का माहौल बदला। गांव के लोगों का पढ़ाई की तरफ रुझान बढ़ा। इस गांव के ज्यादातर लोग एएमयू में काम करते हैं।
गांव की महिलाएं भी आगे
गांव के प्रधान डॉ नूरुल अमीन ने बताया कि पहले ये गांव ग्राम पंचायत था। लेकिन 2018 में नई व्यवस्था के अनुसार ये गांव अलीगढ़ नगर निगम में आ गया है। इसी साल होने वाले नगर निगम चुनाव में यहां वोटिंग होगी। उन्होंने बताया कि ये धोर्रा माफी गांव आत्मनिर्भर और शिक्षित है। साक्षरता के मामले में यहां की महिलाएं भी पुरुषों के समान ही हैं। इस गांव के डॉ सिराज आईएएस अधिकारी हैं। इसके अलावा गांव के फैज मुस्तफा एक यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर रह चुके हैं। गांव की रहने वाली डॉ शादाब बानो एएमयू में प्रोफेसर हैं। इसके अलावा डॉ नाइमा गुर्रेज भी एएमयू में पढ़ाती हैं। ये तो केवल कुछ ही नाम हैं। लेकिन गांव के सैकड़ों लोग बड़े पदों पर काम कर रहे हैं।
गांव का बड़ा तबका है एनआरआई
डॉ नूरुल अमीन ने आगे बताया कि इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां का भाईचारा है। गांव में बड़ी आबादी मुस्लिम है। वहीं, गांव में कई हिंदू भी रहते हैं। बिना किसी भेदभाव के गांव के लोग कई सालों से रह रहे हैं। गांव का बड़ा तबका विदेशों में भी रह रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन ने गांव को नगर निगम में शामिल कर दिया है। लेकिन हमारी मांग थी कि इसे आदर्श गांव बनाया जाए। अगर आप कभी अलीगढ़ जाएं तो एक बार धोर्रा माफी गांव भी घूमकर आइए। वहां का माहौल आपको जरूर पसंद आएगा।

(साभार – नवभारत टाइम्स)

केरल के इस इस्लामिक संस्थान में पढ़ाई जाती है गीता, वेद, उपनिषद

संस्कृत में ही होती है बात
कोच्चि । पूरे देश में मदरसों की पढ़ाई को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। मदरसों में आधुनिक शिक्षा की पढ़ाई कराए जाने को कहा जा रहा है। असम सरकार ने कई मदरसों को बंद कर दिया तो यूपी में भी मदरसों का सर्वे चल रहा है। मदरसों में इस्लामिक पढ़ाई ही कराई जाती है। इस्लामिक संस्थानों की पढ़ाई को लेकर सवाल खड़े होते हैं, लेकिन केरल में एक ऐसा इस्लामिक संस्थान है जहां संस्कृत पढ़ाई जा रही है। त्रिशूर जिले में एक इस्लामी संस्थान ने मिसाल कायम की है। यहां मदरसे में लंबे सफेद वस्त्र पहने और सिर पर जाली वाली टोपी लगाए छात्र अपने हिंदू गुरुओं की निगरानी में धाराप्रवाह संस्कृत के श्लोक और मंत्र पढ़ते हैं।
संस्थान में एक शिक्षक छात्र को ‘गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरा, गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नम:’ पढ़ने के लिए कहते हैं और छात्र ऐसा ही करते हैं। छात्र धाराप्रवाह इस श्लोक को बिना अटके और रुके पढ़ते हैं। छात्र जब विभिन्न श्लोक का पाठ पूरा कर लेते हैं तो उसके शिक्षक संस्कृत में उससे कहते हैं, उत्तमम।
अन्य धर्मों के बारे में ज्ञान देना मकसद
खास बात है कि इस्लामिक संस्थान की कक्षा में छात्रों और शिक्षकों के बीच संस्कृत में ही सारी बातचीत होती है। मलिक दीनार इस्लामिक कॉम्प्लेक्स (एमआईसी) संचालित एकेडमी ऑफ शरिया एंड एडवांस्ड स्टडीज (एएसएएस) के प्राचार्य ओनाम्पिल्ली मुहम्मद फैजी ने कहा कि संस्कृत, उपनिषद, पुराण आदि पढ़ाने का उद्देश्य छात्रों में अन्य धर्मों के बारे में ज्ञान और जागरूकता पैदा करना है।
शंकर दर्शन का अध्ययन कर चुके हैं फैजी
एमआईसी एएसएएस में छात्रों को संस्कृत पढ़ाने का एक और कारण फैजी की अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि हैं। फैजी ने कहा कि उन्होंने शंकर दर्शन का अध्ययन किया है। उन्होंने बताया, ‘मैंने महसूस किया कि छात्रों को अन्य धर्मों और उनके रीति-रिवाजों व प्रथाओं के बारे में पता होना चाहिए। लेकिन आठ साल की अध्ययन अवधि के दौरान संस्कृत के साथ-साथ ‘उपनिषद’, ‘शास्त्र’, ‘वेदों’ का गहन अध्ययन संभव नहीं होगा।’
फैजी ने कहा कि इसका मकसद इन छात्रों को बुनियादी ज्ञान प्रदान करने और इनमें दूसरे धर्म के बारे में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि दसवीं कक्षा पास करने के बाद आठ साल की अवधि में छात्रों को भगवद गीता, उपनिषद, महाभारत, रामायण के महत्वपूर्ण अंश छात्रों को संस्कृत में पढ़ाए जाते हैं।
इन ग्रंथों का चयनात्मक शिक्षण इसलिए प्रदान किया जा रहा है क्योंकि संस्था मुख्य रूप से एक शरिया कॉलेज है। यह संस्थान कालीकट विश्वविद्यालय से संबद्ध है और यहां उर्दू और हिंदी भी पढ़ाई जाती है।

(साभार – नवभारत टाइम्स)