Wednesday, July 8, 2026
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अफगान की युवती ने सूरत की यूनिवर्सिटी में रही अव्वल

कहा – 3 साल से घर नहीं जा पाई, यह मेरा तालिबान को जवाब

सूरत । अफगान महिला रजिया मुरादी ने गुजरात की एक यूनिवर्सिटी से एमए (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) में स्वर्ण पदक जीतकर तालिबान को करारा जवाब दिया है। गोल्ड मेडल जीतने वाली रजिया ने कहा, ‘मैं तालिबान को बताना चाहती हूं कि अगर मौका दिया जाए तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।’ रजिया ने तालिबान में महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता को लेकर और महिला छात्रों को स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाने के लिए अफगानिस्तान के शासकों पर निशाना साधा।
रजिया मुरादी ने 8.6 संचयी ग्रेड हासिल किए हैं। यह औसत उनके विषय में सबसे ज्यादा स्कोर है। सूरत में वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में सोमवार के दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान रजिया को गोल्ड मेडल मिला तो वह सबसे बड़ा आकर्षण रहीं।
यूनिवर्सिटी से ही कर रहीं पीएचडी
रजिया ने बताया कि उन्होंने 2022 में अपने एमए की डिग्री पूरी की। अभी वह यूनिवर्सिटी में ही पढ़ रही हैं और लोक प्रशासन में पीएचडी कर रही हैं। अपने विभाग में टॉप करने वाली रजिया को स्वर्ण पदक के अलावा, शारदा अम्बेलाल देसाई पुरस्कार भी मिला है। वह इस मौके पर खुश भी थीं और उदास भी।
3 साल से नहीं गईं अपने घर
रजिया ने कहा कि 2020 में भारत आने के बाद से वह अपने घर नहीं गई हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं पदक के लिए खुश हूं, लेकिन तीन साल से अपने परिवार से नहीं मिल पाने का दुख है।’ स्वर्ण पदक मिलने की खुशी वह अपने परिवार के साथ फोन पर ही शेयर करेंगी। रजिया ने कहा कि अफगानिस्तान से भारत आने के बाद उनका देश काफी बदल गया है। 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी हुई है।
तालिबानी शासन के नियम
तालिबान ने इस्लामिक कानून की अपनी सख्त व्याख्या को व्यापक रूप से लागू किया है। महिलाओं के लिए औपचारिक शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया है। महिलाओं को अधिकांश रोजगार से प्रतिबंधित है। उन्हें सार्वजनिक रूप से सिर से पैर तक के कपड़े पहनने का आदेश दिया गया है।
लौटना चाहती हैं अफगानिस्तान
रजिया ने कहा, ‘मैं अफगानिस्तान की महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हूं। मुझे यह अवसर प्रदान करने के लिए मैं भारत सरकार, आईसीसीआर, वीएनएसजीयू और भारत के लोगों का आभारी हूं।’ रजिया मुरादी का सपना अपनी जन्मभूमि पर लौटना और वहां काम करना है।
भारत में पढ़ रहे 14000 अफगानी छात्र
अफगानिस्तान के लगभग 14,000 छात्र भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और अन्य संस्थानों की छात्रवृत्ति सहायता से भारत में अध्ययन कर रहे हैं। पुरुषों सहित उनमें से अधिकांश ने तालिबान शासन के कारण भारत में अपना प्रवास बढ़ा दिया है।
तालिबानी हरकत को बताया शर्मनाक
रजिया ने कहा, ‘मैंने नियमित रूप से लेक्चर अटेंड किए और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। मैंने परीक्षा से कुछ दिन पहले रिवीजन किया।’ तालिबान पर निशाना साधते हुए वह कहती हैं कि यह शर्मनाक है कि उन्होंने लड़कियों और महिलाओं को औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। मुरादी दो साल के एमए प्रोग्राम के लिए भारत आई थीं, लेकिन वापस नहीं लौट सकीं क्योंकि तालिबान ने उनके देश पर कब्जा कर लिया।

एक दिन में 3500 लोगों को खाना खिलाती हैं केरल की ये महिलाएं

त्रिशूर । कैटरिंग का काम स्कूलों से ड्रॉपआउट गरीब महिलाएं अधेबा स्वयं सहायता समूह प्रशिक्षण लेकर विभिन्न संस्थानों में कैटरिंग का काम बखूबी संभाल रही हैं । स्कूलों से ड्रॉपआउट गरीब महिलाएं अधेबा स्वयं सहायता समूह प्रशिक्षण लेकर विभिन्न संस्थानों में कैटरिंग का काम बखूबी संभाल रही हैं (फोटो: के ए शाजी)

कोई पंद्रह साल पहले केरल की तीर्थनगरी गुरुवायुर की स्कूल शिक्षिका रति कुन्नीकृष्णन ने जमीनी स्तर पर स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से आरंभ की गई राज्य सरकार की प्रमुख योजना कुदुंबश्री से संपर्क किया था। उनका उद्देश्य मामूली ग्रामीण महिलाओं को बड़े पैमाने पर खाना पकाने और कैटरिंग जैसों से कामों में प्रशिक्षित करना था। हालांकि रती खुद पेशेवर नहीं थी और उनके पास एक स्पष्ट योजना भी नहीं थी।

49 वर्षीया रति का कहना है “अधिकतर ग्रामीण महिलाएं बढ़िया खाना पकाती हैं, और अपने इस हुनर में प्रयोग करने को लेकर भी वे बहुत उत्सुक रहती हैं । लेकिन उनके पास अवसर नहीं थे।” बहरहाल अब इन महिलाओं ने कुछ अलग कर दिखाया है। रति मध्य केरल के त्रिशूर में ए.आई.एफ.आर.एच.एम. या “अधेबा” इंस्टिट्यूट ऑफ फूड रिसर्च हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट नाम से एक अनोखा स्वयं-सहायता समूह संचालित करती हैं। “अधेबा” का क्या अर्थ होता है? रति फौरन इस सवाल का जवाब देती हैं, यह ‘अतिथि देवो भव’ का संक्षिप्त रूप है।

“अधेबा” की शुरुआत कुदुंबश्री की स्थापना के केवल दस वर्ष बाद ही हुई थी । आज कुदुंबश्री अपनी स्थापना का पच्चीसवां साल पूरा कर चुकी है । इस अवधि में इसने केरल में 3.09 लाख स्वयं-सहायता समूहों की स्थापना की है जो आज पूरे राज्य में सुसंगठित और व्यवस्थित रूप से सक्रिय हैं । इन स्वयं-सहायता समूहों में “अधेबा” इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कुदुंबश्री से संबद्ध प्रत्येक स्वयं-सहायता समूह से उन औरतों का चयन करती है जो भोजन बनाने की कला में दक्ष हों।

आज कुदुंबश्री दूसरे काम के अलावा देश भर में महिला कैटरर्स के सबसे बड़े नेटवर्क को संचालित करती है । ये महिलाएं शीघ्र सूचना के आधार पर किसी भी बड़े आयोजन के लिए खाना पका सकती हैं, चाहे वह अनेक दिनों तक चलने वाले राष्ट्रीय खेल हों अथवा कोई अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन। महिलाएं किसी भी तरह का भोज मसलन चीनी व्यंजन, भूमध्यसागरीय, यूरोपीय, उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय या स्थानीय बना सकती हैं।

“हम कैटरिंग की आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं और बहुत कम कीमत पर भोजन उपलब्ध कराते हैं। अर्जित पैसों को निर्धन परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में खर्च किया जाता है। रती बताती हैं शुरुआत में “अधेबा” में महज सात सदस्य थे, आज यह विस्तृत होकर 3000 सदस्यों का एक विशाल समूह बन चुका है। 200 महिलाओं को सीधा रोजगार देने के अलावा पूरे राज्य में 3500 महिला रसोइयों और कैटर्स के नेटवर्क को संचालित करता है। इसके प्रशिक्षित स्टाफ आंध्रप्रदेश और झारखण्ड के कुछ इच्छुक महिला एसएचजी को यही प्रशिक्षण देने का काम भी करते हैं ।

एक साल से भी अधिक की अवधि तक कुदुंबश्री के आउटरीच शाखा में प्रतिनियुक्त प्रो. मैना उमैबान के अनुसार, एक सुरक्षित भविष्य के लिए इच्छुक महिलाओं को सहारा देने और उन्हें प्रशिक्षित करने की दृष्टि से “अधेबा” की भूमिका दुर्लभ है । इसी भूमिका से प्रभावित होकर प्रो. उमैबान इस समूह को अपनी सेवा के लिए प्रेरित हुईं। अपनी शुरुआत के बाद के सालों में अधेबा ने 35,000 महिलाओं को भोजन पकाने और कैटरिंग के कामों में बुनियादी प्रशिक्षण देने का काम किया है। एक पखवाड़े के इस सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम का पूरा खर्च राज्य सरकार ने उठाया। प्रशिक्षुओं में से 15,000 को चयनित कर उन्हें विविध विशेज्ञता में प्रशिक्षित किया गया ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर छोटे कैटरिंग इकाइयों को चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
विगत वर्षों 3500 सदस्यों का एक अति दक्ष समूह विकसित हो चुका है जो अब “अधेबा” की रीढ़ की हड्डी के रूप में काम कर रहा है । भोजन तैयार करने के अतिरिक्त “अधेबा” आज के दिन महिलाओं को भोजन सर्व करने, बुनियादी साफ-सफाई और हिसाब-किताब रखने जैसे काम भी सिखा रहा है । इस योजना की लाभुकों में एक वीके शेरीबा बताती हैं कि वे ग्राहकों की मांग के मुताबिक किसी भी प्रचलित क़िस्म का कोई भी व्यंजन बनाने में सक्षम हैं । अभी एक महीना पहले जब कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के निकट पंचायती राज पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें भारत के सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। शेरीबा ने बताया “हमने तीन दिन तक प्रतिदिन 15,000 लोगों को खाना देने की व्यवस्था की थी, और वे सभी लोग अलग-अलग स्वाद और आहार-संबंधी आदतों वाले लोग थे । हमने उन सबके लिए उत्तर भारतीय, चीनी व्यंजन, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारतीय खाने की व्यवस्था की थी और हमारे द्वारा की गई व्यवस्था के लिए अतिथियों ने हमें खूब सराहा।
मैना बताती हैं कि “अधेबा” की शुरुआत से पहले कैटरिंग कर व्यवसाय में गिनी-चुनी महिलाएं ही थीं । जब रती और उनकी टीम ने अपनी योजना के साथ कुदुंबश्री से संपर्क किया, तब एजेंसी ने उन पर “औषधि” का प्रभार संभालने और उसकी कैंटीन चलाने की जिम्मेदारी सौंपी । “औषधि” त्रिशूर में सार्वजनिक क्षेत्र की एक दवा बनाने वाली कंपनी है जिसमें लगभग 2,000 लोग काम करते हैं ।
रति बताती हैं कि “औषधि” के पास सभी जरूरी बुनियादी और वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध थीं, ऐसे में हमारे लिए शुरुआत करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं था । इसलिए हमने “औषधि” में मिलने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल अपनी महिलाओं को खाना बनाने और कैटरिंग का काम करने के लिए प्रशिक्षित करने करने में किया । साथ ही हमने कंपनी के स्टाफ की भोजन-संबंधी जरूरतों को पूरा करना भी जारी रखा।
फिलहाल यह संस्था केरल सरकार के एक विशाल भोजनालय को संभालती है जिसमें कोच्चि के निम्न-आय वर्ग के कर्मचारियों को केवल 20 रुपए में भरपेट भोजन कराया जाता है । 3500 से भी अधिक लोग इस रेस्टोरेंट में खाना खाते है जिसमें सरकार भोजन की हर थाली के बदले 10 रुपये का अनुदान देती है । बाकी खर्च के लिए पैसे “अधेबा” मछलियों की किस्में, मटन की किस्में और दूसरे मूल्य-संवर्धित उत्पादों की बिक्री से कमाती हैं ।
यह मलप्पुरम के सिविल स्टेशन की कैंटीन भी संचालित करती हैं, जहां लगभग 400 लोग इससे लाभान्वित होते हैं । “अधेबा” में विभिन्न कामों में समन्यव करने वाले अजय कुमार के अनुसार, केरल में जब कभी राष्ट्रीय खेलों का आयोजन होता है तब “अधेबा” ही इस आयोजन का आधिकारिक कैटरर्स होगी ।
वे बताते हैं “अभी तक राष्ट्रीय खेलों के आयोजनों में हमने तीन मौकों पर खानपान की व्यवस्था संभाली है जिनमें बड़ी तादाद में दूसरे राज्यों से आए भागीदार शामिल हुए हैं । हम शादी-विवाह की पार्टियों, अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशनों और अन्य उच्चस्तरीय आयोजनों के लिए भी आर्डर लेने का काम करते हैं।
हमारी ग्रामीण महिलाएं इन मौकों पर पेशेवर परिधान पहनती हैं और उनकी सेवाएं गुणात्मकता की दृष्टि से उच्चस्तरीय होती हैं। राठी कहती हैं “यदि आप केरल के 14 जिलों में कहीं भी कोई आयोजन करते हैं तो हमसे संपर्क कर सकते हैं, और हमारी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं । हम अपनी गुणवत्ता, कीमत, स्वाद और स्वच्छता के प्रति दृढ़प्रतिज्ञ,” उनकी यह पहल लाभ पर आधारित नहीं है क्योंकि इससे होने वाली आमदनी को संबद्ध परिवारों में बांट दिया जाता है ।

वायुसेना में पहली बार फ्रंटलाइन कॉम्बैट यूनिट की कमान महिला को

ग्रुप कैप्टन शालिजा धामी ने रचा इतिहास
भारतीय वायुसेना ने ग्रुप कैप्टन शालिजा धामी को वेस्टर्न सेक्टर में फ्रंटलाइन कॉम्बैट यूनिट की कमान सौंपकर महिलाओं की बंदिशों को तोड़ दिया है । भारतीय वायुसेना के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी महिला को ये जिम्मेदारी मिली है । सेना ने मेडिकल स्ट्रीम से बाहर निकलते हुए महिला अधिकारियों को कमान सौंपने की शुरुआत कर दी है । इनमें से 50 महिलाएं ऐसी होंगी जो नॉर्दर्न और ईस्टर्न ऑपरेशनल एरिया में यूनिट्स को लीड करेंगी ।
अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी के मुताबिक, ग्रुप कैप्टन धामी को साल 2003 में हेलिकॉप्टर पायलट के रूप में नियुक्त किया गया था । शालिजा के पास 2 हजार 800 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव है । वो एक क्वालीफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं । उन्होंने वेस्टर्न एरिया में हेलिकॉप्टर यूनिट के फ्लाइट कमांडर के रूप में भी काम किया है । भारतीय सेना में एक ग्रुप कैप्टन की रैंक सेना के कर्नल के बराबर होती है ।
कौन हैं शालिजा धामी?
शालिजा का जन्म पंजाब के लुधियाना में शहीद करतार सिंह सराभा गांव में हुआ था । यहां से उनमें देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा आया । इस गांव का नाम देश की आजादी में सराहनीय योगदान देने वाले शहीद के नाम पर रखा गया। शालिजा के माता-पिता सरकारी नौकरी करते थे. पिता हरकेश धामी बिजली बोर्ड में अधिकारी रहे और मां देव कुमारी जल आपूर्ति विभाग में रहीं । शालिजा की शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई और बाद में उन्होंने घुमार मंडी के खालसा कॉलेज से बीएससी की ।
ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते-करते ही उनका सिलेक्शन फ्लाइंग एयरफोर्स में हो गया। हालांकि उनकी लम्बाई को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति बनी थी लेकिन बाद में उन्हें वायुसेना में भर्ती कर लिया गया। इस मामले पर वायुसेना के अधिकारी का कहना है कि धामी को एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की ओर से दो बार कमांड किया जा चुका है। फिलहाल वो एक फ्रंटलाइन कमांड हेडक्वार्टर के ऑपरेशन ब्रांच में तैनात हैं ।

कोलकाता में कम हुए अपराध, बेहतर हुआ है ट्रैफिक – विनीत गोयल

95 प्रतिशत लोग पहनने लगे हैं ट्रैफिक
कोलकाता । मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने हाल ही में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर विनीत कुमार गोयल, ज्वाएंट कमिश्नर (क्राइम) मुरलीधर (आईपीएस) और ज्वाएंट कमिश्नर (ट्रैफिक) संतोष पांडे के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया।
कुमार ने कहा कि हत्या जैसे बड़े अपराधों में कमी आ रही है और शहर में पिछले वर्ष 45 के मुकाबले 2022 में 35 हत्या के मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरों का एक नेटवर्क अपराधों का पता लगाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है और पिछले साल मामलों की संख्या घटकर 103 प्रति लाख रह गई है। कुछ मामलों में निजी लोगों ने भी सीसीटीवी कैमरे लगवाए, जिससे पुलिस को अपराधों का पता लगाने में मदद मिली। उन्होंने एमसीसीआई से सीसीटीवी कैमरों के अपने नेटवर्क का विस्तार करने का आग्रह किया, जो एक अच्छे कारोबारी माहौल में मदद करने वाले अपराधों पर और नियंत्रण और अंकुश लगा सके। गोयल ने कहा, “कोलकाता यातायात नियंत्रण में उत्कृष्ट है और पूरे शहर के सिग्नलिंग को प्रोग्रामिंग लॉजिक कंट्रोलर (पीएलसी) के माध्यम से केंद्रीय रूप से नियंत्रित किया गया था, जिसे कोलकाता पुलिस ने सबसे पहले पेश किया था। उन्होंने कहा कि इस्राइल कोलकाता के यातायात नियंत्रण से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि कैमरों ने मामलों का पता लगाने में सुधार किया है और 99 प्रतिशत गति अनुपालन के साथ सड़क सुरक्षा में सुधार हुआ है। कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने इस साल जनवरी में 7 मौतें दर्ज की हैं जबकि पिछले साल इसी महीने में 14 लोगों की मौत हुई थी। कोलकाता में हेलमेट का इस्तेमाल 95 प्रतिशत तक बढ़ गया है लेकिन कोलकाता पुलिस इसे शत – प्रतिशत तक कवर करने की कोशिश कर रही है । हालाँकि, साइबर और आर्थिक अपराध बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहे थे और लोगों में जागरूकता पैदा करनी होगी ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि शहर में सड़क की जगह सीमित थी क्योंकि शहर में 20 प्रतिशत की आवश्यकता के मुकाबले केवल 7 प्रतिशत सड़क स्थान था, लेकिन वाहन साल-दर-साल 6% की दर से बढ़ रहे थे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एमसीसीआई के अध्यक्ष नमित बाजोरिया ने शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अथक प्रयास करने के लिए बधाई दी। उन्होंने बढ़ते आर्थिक अपराधों और साइबर अपराधों पर चिंता जताई जो कभी-कभी सीमा पार क्षेत्रों से होते थे। बाजोरिया ने हालांकि, 2021 की राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसने कोलकाता को सबसे सुरक्षित शहर के रूप में दिखाया।

केन्द्र पर राज्य के 2409 करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा बकाया

कोलकाता । मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने राज्य की वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया। बैठक की अध्यक्षता एमसीसीआई के अध्यक्ष नमित बाजोरिया ने की । भट्टाचार्य ने कहा कि जीएसटी मुआवजे के रूप में राज्य को केवल इस दलील पर जून 2022 के महीने के लिए 824 करोड़ रुपये मिले हैं कि महालेखाकार ने अद्यतन खातों को जमा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण ने 6 राज्यों के लिए जीएसटी मुआवजे के रूप में 16,524 करोड़ रुपये की घोषणा की, जिन्होंने दिनांकित खातों को प्रस्तुत किया और पश्चिम बंगाल को इसमें शामिल नहीं किया गया। बाद में उन्होंने 23 राज्यों के लिए 16,982 करोड़ रुपये के जीएसटी मुआवजे की घोषणा की और पश्चिम बंगाल को इसके लिए 824 करोड़ रुपये मिले, भट्टाचार्य ने कहा कि यह पश्चिम बंगाल के बारे में केंद्र के दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
केंद्र की ओर से उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल की रसीदें केवल जून महीने के लिए थीं और बाकी महीनों के मुआवजे को मंजूरी दे दी गई थी। पश्चिम बंगाल पर जीएसटी मुआवजे के रूप में 2409 करोड़ रुपये बकाया हैं और यह शुद्ध संरक्षित जीएसटी के आधार पर दिया गया है। हालांकि, भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल का पूंजीगत व्यय केंद्र के जीएसटी मुआवजे पर निर्भर नहीं है। बाजोरिया ने भट्टाचार्य को उनके 2023-24 के बजट के लिए बधाई देते हुए कहा कि बजट ने सामाजिक उत्थान और औद्योगीकरण के बीच एक अच्छा संतुलन बनाए रखा है। बजट में की गई पहलों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता को देखते हुए राज्य को अधिक पूंजीगत व्यय की आवश्यकता है। कार्यक्रम का समापन एमसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित बेरीवाला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ ।

 

खेला होबे 2.0 – एक चैरिटी व्हील चेयर क्रिकेट मैच का आयोजन

कोलकाता । खेला होबे 2.0 व्हील चेयर क्रिकेट मैच हाल ही में आयोजित किया गया । इसका आयोजन रविवार को कोलकाता के प्रगति संघ मैदान में किया गया था। इस कार्यक्रम में समाज की कई विशिष्ठ हस्तियों में से पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली, क्रिकेटर आर पी सिंह, विधायक तापस रॉय, राज्यसभा सांसद डॉ. शांतनु सेन, पार्षद अंजन पॉल समेत गणमान्य अतिथि मौजूद थे। एसए वेंचर की संस्थापक एवं सामाजिक उद्यमी शर्मिष्टा आचार्य , अंकित साव (सेलिब्रिटी एंकर और नेशनल रिकॉर्ड होल्डर) और द जंक्शन हाउस के संस्थापक राज रॉय की पहल है।
इस अवसर पर ‘द जंक्शन हाउस’ के निदेशक राज रॉय ने कहा, हम समाज में यह जागरूकता पैदा करना चाहते हैं कि समाज में हमारे बीच रहनेवाले विशेष रूप से सक्षम लोग जीवन में कभी भी कुछ भी करना चाहते हैं, तो वह एक सामान्य व्यक्ति से भी बेहतर कर सकते हैं। इस टूर्नामेंट में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ व्हील चेयर क्रिकेटरों को समर्थन और प्रेरित करने का संदेश लेकर जाएगा, क्योंकि वे किसी भी श्रेणी में रहनेवाले लोगों में कम नहीं हैं। यही “खेला होबे 2.0″ का मुख्य उद्येश्य और प्रधान मकशद समाज के एक विशेष वर्ग के लिए विशेष तरह का एक खेल (ए प्ले फॉर ए कॉज) इसका मुख्य विचार है।
सेलिब्रिटी एंकर और नेशनल रिकॉर्ड होल्डर अंकित साव ने कहा, दुनिया हर क्षेत्र के साथ खेल के क्षेत्र में भी तेजी से विकसित हो रही है। हमने समाज में समान अधिकार देकर उन लोगों के लिए व्हील चेयर क्रिकेट मैच का आयोजन किया है, जिन्हें समाज में वह खास अधिकार प्राप्त नहीं है। इस आयोजन के जरिये कोलकाता इस बार इसके पहले कभी नहीं आयोजित होनेवाले क्रिकेट मैच का गवाह बनेगा। हमें खुशी है कि भगवान ने हमें दुनिया को यह दिखाने का मौका दिया कि तूफान पैदा करने के लिए केवल एक कदम की जरूरत होती है। सामाजिक उद्यमी शर्मिष्टा आचार्य ने कहा, मैं हमेशा समाज में हर तरह से बदलाव लाना चाहती थी। मैंने हमेशा वंचित लोगों के उत्थान और उन्हें प्रेरित करने की कोशिश की है, लेकिन इस बार, यह एक विशेष प्रकार की अनोखी पहल थी, जो समाज में विशेष स्थान रखने वालों के लिए एक तरह का क्रिकेट मैच था। खेला होबे 2.0” से जुड़े एक कारण और संदेश के बारे में आइए हम सब एक साथ आएं और दुनिया को इसकी विशेषता के बारे में बतायें।

एकाकी लोगों के चेहरे पर खुशी के रंग लाई कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की ‘सत्क्रिया’

कोलकाता । अपने सामाजिक दायित्वों के प्रति सचेतनता का परिचय देते हुए कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है । कॉलेज की ओर से बस्तियों में अकेले रह रहे और जीवन की कठिनाइयों से जूझते लोगों को सम्मानित कर उनको उपहार प्रदान किया गया । सम्मानित होने वाले लोग इस अवसर पर काफी खुश और भावुक भी दिखे । कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सत्या उपाध्याय ने इस बारे में बताया कि यह इस तरह का पहला आयोजन है । हमारा कॉलेज मध्य कोलकाता में हैं । यहाँ बहुत सी बस्तियाँ हैं जहाँ लोग अकेले रहते हैं और जीवन से जूझ रहे हैं । इसे देखकर मेरे मन में विचार आया कि हम अपने शिक्षण स्थानों में उच्च शिक्षा को प्रदान करते हैं परन्तु युवा पीढ़ी में सामाजिक दायित्वों का बोध भी होना चाहिए और इसके लिए ‘सत्क्रिया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया है । युवाओं में अभिभावकों के प्रति समर्पण और देखरेख के प्रति जागरूकता लाने के लिए हमने शिक्षिकाओं एवं छात्राओं के माध्यम से स्थिति को समझने के लिए एक सर्वेक्षण करवाया । इस सर्वेक्षण के बाद 10 परिवारों को चुना गया जिसमें स्त्री और पुरुष, दोनों हैं । इनको हमने सम्मानित किया और छोटा सा उपहार दिया । इस अवसर पर कॉलेज के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कर्मियों को भी सम्मानित किया गया ।
हमने इनको प्रतिश्रुति दी है कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन होंगे और जब भी इनको सहायता की जरूरत होगी, भविष्य में इन लोगों को कॉलेज की सीजीसी सहारा, आईक्यूएसी और एनएसएस द्वारा यह सहायता प्रदान की जाएगी। इस सर्वेक्षण को करने और आयोजन को सफल बनाने में सीजीसी सहारा की संयोजक संचिता दत्ता, आईक्यूएसी शाखा की संयोजक सुपर्णा भट्टाचार्य और एनएसएस के संयोजक प्रेम कुमार घोष एवं शिक्षिका श्रद्धा सलोनी के अतिरिक्त कॉलेज की छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।

एमएसएमई में निर्यात के मौके और व्यवसायिक अवसरों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

कोलकाता । केंद्र सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के कोलकाता में स्थित एमएसएमई डेवलपमेंट एंड फैसिलिटेशन दफ्तर की ओर से कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में निर्यात के मौके और व्यवसाय के अवसरों पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी / कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का उद्देश्य निश्चित क्षमता निर्माण के दृष्टिकोण के साथ प्रतिभागियों में उत्साह का एक नया स्तर स्थापित करना है। डिजिटल प्रौद्योगिकियों में निर्यात के अवसरों के साथ बाजार दिन-ब-दिन बड़ा और वृहद होता जा रहा है। भारतीय उद्यमी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं। नये अवसरों को लेकर इनमें नए विचार पनप रहे हैं। इस संगोष्ठी का मकशद एमएसएमई के उद्यमियों को निर्यात के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं के बारे में संवेदनशील बनाना और व्यापारिक संभावनाओं की खोज के साथ इसे दुनिया तक पहुंचना है।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन डी. मित्रा (आइईडीएस, संयुक्त निदेशक और एचओओ, एमएसएमई-डीएफओ, कोलकाता), डॉ. वी. शिवकुमार (निदेशक, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, केवीआईसी, एम/ओ एमएसएमई, भारत सरकार, कोलकाता), देबदत्त नंदवानी (क्षेत्रीय प्रमुख, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन, पूर्वी क्षेत्र, कोलकाता) और पार्थ चौधरी (संयुक्त निदेशक, एमएसएमई निदेशालय, पश्चिम बंगाल, कोलकाता) ने संयुक्त रुप से किया।
मौके पर डी मित्रा (आईईडीएस, संयुक्त निदेशक और प्रमुख, एमएसएमई-डीएफओ, कोलकाता) ने पश्चिम बंगाल राज्य के लिए एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े उद्यमियो के लिए विशेष लाभों को लेकर इस कार्यक्रम के आयोजन को सराहनीय कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सेमिनार में लगभग 200 एमएसएमई ने भाग लिया। मित्रा ने कहा, केंद्र सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) द्वारा निर्यात बढ़ाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। विदेशों में अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापारिक मेलों, क्रेता-विक्रेता बैठक आदि में एमएसएमई की भागीदारी और इसकी सुविधा के लिए कई कारगर कदम उठाये जा रहे हैं।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के विकास के लिए मंत्रालय के विभिन्न विषयों और गतिविधियों के तीन पूर्ण सत्र थे। उद्यम पंजीकरण और जेडइडी पंजीकरण के लिए एक विशेष शिविर ने भी उद्यमों की काफी सहायता की।

भवानीपुर कॉलेज ने नेपथ्य के नायकों का किया पुष्प फागुनी सम्मान

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षक गणों ने कॉलेज के गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का पुष्पों से फागुनी सम्मान किया। जुबली सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सुगंधित चंदन से सभी 290 कर्मचारियों को टीका लगाया गया। टीआईसी डॉ शुभब्रत गंगोपाध्याय, प्रिन्सिपल डॉ पिंकी साहा सरदार, डॉ रेखा नारिवाल, डॉ देबजानी गांगुली आदि शिक्षक गणों की उपस्थिति रही। कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी ने सभी प्रमुख कर्मचारियों में बयालीस साल से कर रहे सिक्यूरिटी हरिसिंह जी, मैनेजमेंट के पदाधिकारियों नरेश धोलिया, सोहिला भाटिया,सिस्टम कंट्रोल निमेश मनियार, एच आर आशीष मैत्रेय , स्पोर्ट्स से रूपेश गांधी, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रशांत चौधरी, एकाउंट्स से शुभेंदु बैनर्जी और मंटू जोश, अनुराधा दे, गंगा मुखिया,दिलीप कुमार दास, लाइब्रेरी से अनिर्बान सरकार, चित्तजीत भट्टाचार्य, एनसीसी के कैडट और कैप्टन आदित्य राज, संगीतकार सौरभ गोस्वामी का मंच से स्वागत किया गया। डीन प्रो दिलीप शाह ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी शिक्षा संस्थान की उन्नति और विकास में गैर शैक्षणिक कर्मचारियों का समपर्ण और कर्तव्य निष्ठा संस्थान के स्तंभ होते हैं। यह कार्यक्रम सभी कर्मचारियों को धन्यवाद देने के लिए किया गया है।
इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के क्रिसेंडो, इन-एक्ट और फ्लेम कलेक्टिव के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। हिंदी बंगला के नृत्य, हास्य व्यंग्य नाटिका, और बॉलीवुड के गीत नृत्य फूलों से फागुन खेल कर सभी ने बहुत आनंद उठाया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि इस कार्यक्रम का संयोजन किया प्रो दिव्या उदेशी, प्रो समीक्षा खंडूरी और डीन ऑफिस की ओर से किया गया।

 

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी (बीईएस) कॉलेज में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (एनएसडी) मनाया गया, इस अवसर पर महान भारतीय भौतिक विज्ञानी, सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा 1928 में नामांकित ऑप्टिकल घटना, रमन इफेक्ट की खोज को स्मरण करते हुए विज्ञान उत्सव मनाया गया।
इस प्रस्ताव को नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन के महान सर सी.वी. रमन द्वारा स्वीकृति दी गई । भारत सरकार ने 1987 से इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाना अनिवार्य कर दिया है।
बीईएस कॉलेज ने विज्ञान अनुभाग की संगोष्ठी/एफडीपी/कार्यशाला समिति के सहयोग से मनाई गई जिसकी एनएसडी थीम “वैश्विक भलाई के लिए वैश्विक विज्ञान” के आदर्श वाक्य के आधार पर आयोजित की गई। विज्ञान विषयों की निबंध प्रतियोगिता रखी गई जो कुछ प्रतिष्ठित स्कूलों और भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के छात्रों के लिए खुली थी। यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लेखन कौशल को परखने के लिए आयोजित किया गया। बीजीईएस स्कूल के छात्र सुवम श्रीवास्तव को स्कूल श्रेणी में इस दौर का विजेता घोषित किया गया। बीईएस कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग के सग्निक चक्रवर्ती कॉलेज वर्ग में विजयी रहे।
छात्रों के संचार और प्रस्तुति कौशल का आकलन करने के लिए एक अन्य विषय-आधारित कार्यक्रम एक मौखिक प्रस्तुति प्रतियोगिता थी जिसे स्कूल और कॉलेज दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था। स्कूल श्रेणी में बीजीईएस स्कूल की सुभाषिनी दास और भक्ति कोठारी विजेता रहीं। हार्टले हाई स्कूल, सिंधुजा सान्याल और समाद्रिता माजी के छात्र विशेष हैं क्योंकि उन्होंने अपने व्यस्त स्कूल पाठ्यक्रम से समय निकालकर अपने साथ आने वाले शिक्षकों से प्रेरित होकर कार्यक्रम में भाग लिया। कॉलेज के छात्रों ने मानसिक विकास के महत्व को भी समझाया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोई समाज तभी प्रगति कर सकता है जब उसके सदस्य ठोस निर्णय लेने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ हों। कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के छात्र गौरव चौधरी और रुद्र प्रताप नस्कर ने तर्क दिया कि प्रौद्योगिकी मनुष्य को समग्र रूप से प्रगति नहीं दे पाती बल्कि समग्र खुशी से रहित भौतिकवादी आनंद देता है। निर्णायक मंडल ने उनके तर्क को माना और अंततः उन्होंने कॉलेज श्रेणी में इस दौर के विजेता के रूप में उन्होंने स्थान प्राप्त किया ।
सबसे रोमांचक प्रतियोगिता विज्ञान अनुभाग विभागों के बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही । जिसमें प्रतिभागियों के बीच बहुत कठिन राउंड रहे। प्रश्नोत्तरी सत्र ने न केवल दिमाग पर जोर डाला बल्कि रोमांचक सवालों और उससे भी ज्यादा रोमांचक जवाबों ने दर्शकों को प्रभावित किया। चार दौर की भीषण पूछताछ के बाद गणित की टीम विजयी रही। इस सत्र ने वैज्ञानिक सोच और सूचना के आधार पर भारत के भविष्य के निवासियों के संज्ञानात्मक कौशल की खोज के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया।
आयोजनों के निर्णायकों ने कहा कि एनएसडी का उत्सव अविश्वास की दरारों को मजबूत करने और आजकल प्रचलित मनगढ़ंत तथ्यों की टूट-फूट को ठीक करने के लिए एक अनुकरणीय पहल है। स्पेन, इटली और जर्मनी के कुछ निर्णायक मंडल और युवा डॉक्टरों ने एनएसडी की पहल की सराहना की। कुल मिलाकर उन्होंने इस तरह के उत्सव के पीछे की मंशा की सराहना की और उनके वक्तव्य ने प्रतियोगियों को प्रेरित किया।
समापन सत्र में विज्ञान, विज्ञान के साथ और विज्ञान के लिए दिन भर चलने वाले इस विशाल अभ्यास के समन्वयक डॉ. उत्सा दास, डॉ यासीन सिकदर, और सुश्री शॉनी दत्ता को सम्मानित किया गया। डॉ. सुमन मुखर्जी, महानिदेशक और प्रो दिलीप शाह, छात्र मामलों के डीन ने उत्सव की प्रशंसा की और स्थिरता के मार्ग के रूप में विज्ञान के पक्ष में बात की। अंत में प्रभारी शिक्षक डॉ शुभब्रत गांगुली, विज्ञान के डीन डॉ. समीर कांति दत्ता, विज्ञान की वाइस प्रिंसिपल डॉ. पिंकी साहा सरदार ने इस कार्यक्रम को स्मरणीय बनाने और इसमें भाग लेने वाले छात्रों के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में कार्य करने के लिए विज्ञान अनुभाग की पूरी इकाई की प्रतिबद्धता की सराहना की। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि 28 फरवरी को यह कार्यक्रम जुबली सभागार में संपन्न हुआ ।

पूर्व मंत्री सत्यब्रत मुखर्जी का निधन

कोलकाता । भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री सत्यब्रत मुखर्जी का गत शुक्रवार को उनके आवास पर आयु संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे। मुखर्जी 1999 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में रसायन और उर्वरक और वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री थे। मुखर्जी, जिन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी काम किया, सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के साथ एक उच्च-प्रोफाइल अभ्यास वकील थे।
वह 1999 से 2004 तक पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के लोकसभा सदस्य चुने गए थे। हालांकि, 2004 में उन्हें उसी निर्वाचन क्षेत्र से माकपा उम्मीदवार और एथलीट से नेता बने ज्योतिर्मयी सिकदर से हार मिली थी। मुखर्जी कानूनी और राजनीतिक दोनों हलकों में जोलू बाबू के रूप में लोकप्रिय थे। 2008 में, वह पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रमुख बने। हालांकि, अगले ही साल उनकी जगह राहुल सिन्हा ने ले ली।
उनका जन्म 8 मई, 1932 को सिलहट में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में है। उन्होंने बहुत कम उम्र में एक कॉर्पोरेट वकील के रूप में अपनी पहचान अर्जित की और चार साल पहले भी अपने पेशे में सक्रिय थे। वह अपने सौहार्दपूर्ण स्वभाव और परोपकारी गतिविधियों के लिए अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच लोकप्रिय थे