Tuesday, July 7, 2026
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ट्रेनों में भी होते हैं लगेज को लेकर नियम

रेलवे हर भारतीय के लिए परिवहन का ही नहीं बल्कि आम जिन्दगी की जीवन रेखा है । यात्रियों को ढोने से लेकर माल ढोने तक और अब धार्मिक यात्राएं करवाने तक रेलवे ने लम्बा सफर तय किया है । ट्रेनों में अफरा – तफरी आम बात है मगर रेलवे यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं। चलिए आज इन नियमों को जानते हैं –

:1. फोन पर जोर से बात करना

रेलवे की नियमावली के अनुसार कोई भी यात्री फोन पर ना तो तेज बातें कर सकता है और ना ही लाउड स्पीकर पर गाने सुन सकता है। कोई यात्री दूसरों को ऐसे परेशान ना कर पाएं, इसके लिए रेलवे ने अपने टीटीई, केटरिंग स्टाफ और अन्य सभी कर्मियों को इसका खास ध्यान रखने के लिए कहा है।

2. रात के 10 बजे के बाद के नियम

ट्रेन में रात को 10 बजे के बाद कुछ खास नियम होते हैं। रात को 10 बजे के बाद टीटीई आपकी टिकट चेक करने के लिए नहीं आ सकता है। नाइट लैंप के अलावा कोच की बाकी सभी लाइटों को बंद रखना होगा। समूह में यात्रा कर रहे यात्री भी एक-दूसरे से रात 10 बजे के बाद बात नहीं कर सकते और ना ही ऑनलाइन फुड ऑर्डर किया जा सकता है। हालांकि आप चाहे तो ई-केटरिंग सेवा से भोजन ऑर्डर कर सकते हैं। अगर आप मिडिल बर्थ को खोलते हैं तो लोअर बर्थ वाला यात्री कोई ऑब्जेक्शन नहीं कर सकता है।

3. मिडिल बर्थ का नियम

ट्रेन में अगर आपको मिडिल बर्थ मिलता है तो आप उसपर सिर्फ रात को 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ही सो सकते हैं। अगर आप इससे पहले या इसके बाद भी मिडिल बर्थ का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपका सहयात्री आपको ऐसा करने से रोक भी सकता है।

4. सामानों ले जाने के नियम

विमान की तरह ही सामानों को लेकर भी ट्रेन में नियम हैं। एसी कोच में यात्रा करने वाला यात्री अपने साथ अधिकतम 70 किलो, शयनयान श्रेणी से यात्रा करने वाले यात्री को अधिकतम 40 किलो और सेकंड क्लास श्रेणी से यात्रा करने वाले यात्री को अधिकतम 35 किलो सामान ही अपने साथ लेकर यात्रा करने की अनुमति है।

5. सर्कुलर टिकट पर यात्रा करने के नियम

अगर आप ट्रेन से पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले हैं तो आप सर्कुलर यात्रा टिकट से यात्रा कर सकते हैं। इस टिकट पर आप अपनी यात्रा के बीच में 8 ब्रेक तक ले सकते हैं। इसके लिए आप रेलवे के अपने नजदीकी जोनल ऑफिस में जाकर अपनी सुविधा के अनुसार ही सर्कुलर टिकट ले सकते हैं।

6. ब्रेक जर्नी करने के नियम

क्या आपको पता है, आप अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले रास्ते में ब्रेक भी ले सकते हैं। भारतीय रेलवे 500 किमी तक की यात्रा के बीच में एक बार और 1000 किमी तक की यात्रा के बीच में 2 बार ब्रेक लेने की अनुमति देती है। यह ब्रेक यात्रा शुरू और खत्म होने के दिन को छोड़कर 2 दिनों तक का हो सकता है। हालांकि राजधानी, शताब्दी और जनशताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में ब्रेक लेने की अनुमति नहीं होती है।

7. गंतव्य स्टेशन बदलने का नियम

कई बार टिकट नहीं मिलने की वजह से यात्री अपने गंतव्य स्टेशन से एक या दो स्टेशन पहले तक का ही टिकट ले पाते हैं। कई बार यात्री अपने निर्धारित स्टेशन पर किसी कारणवश नहीं उतर पाते हैं। ऐसी स्थिति में यात्री टिकट कलेक्टर से अतिरिक्त स्टेशनों का टिकट यात्रा के दौरान ही बनवा सकता है। ऐसी स्थिति में हो सकता है कि यात्री को सीट उपलब्धता के आधार पर अपनी सीट या कोच बदलना पड़े।

8. ट्रेन छुटने के बाद उसमें चढ़ने का नियम

क्या आपको पता है, अगर किसी वजह से निर्धारित स्टेशन से आपकी ट्रेन छुट गयी हो तो आप उस ट्रेन में अगले 2 स्टेशन पार करने से पहले तक चढ़ सकते हैं। अगर आपके पास रिजर्वेशन का टिकट है तो टीटीई निर्धारित स्टेशन के बाद दो अन्य स्टेशनों के गुजरने तक आपकी सीट किसी और को नहीं दे सकता है। 2 स्टेशनों के गुजरने के बाद भी अगर आप ट्रेन में नहीं चढ़े और सीट पर नहीं पहुंचे तो RAC लिस्ट के आधार पर टीटीई आपकी सीट किसी और को दे सकता है।

9. वेटिंग लिस्ट पर यात्रा के नियम

अगर आपने पीआरएस  काउंटर (रेलवे काउंटर) से टिकट लिया है और आपका टिकट कंफर्म नहीं बल्कि वेटिंग लिस्ट वाला है, तब भी आप उस टिकट से ट्रेन में यात्रा कर सकते हैं। लेकिन अगर आपने आईआरसीटीसी की वेबसाइट से ई-टिकट लिया है और वह वेटिंग लिस्ट में है तो आप उस टिकट पर यात्रा नहीं कर सकते हैं। रेलवे सिर्फ चार्ट तैयार हो जाने के बाद ही रुपये रिफंड करती है इसलिए काउंटर वाले टिकटों पर यात्रा करने की अनुमति होती है। अगर आपने ई-टिकट पर यात्रा करने की कोशिश की तो आप बिना टिकट यात्रा करते हुए माने जाएंगे।

10.चेन खींचने का नियम

ट्रेन में लटकती चेन को देखकर अक्सर हम उसे खींचने के बारे में बातें करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है, बेवजह ट्रेन की चेन खींचना एक कानूनन जूर्म है। ट्रेन में चेन को आपातकालिन परिस्थितियों के लिए ही दिया जाता है। ट्रेन की चेन सिर्फ तभी खींची जा सकती है जब किसी सहयात्री, बुजूर्ग, बच्चे या फिर दिव्यांग की ट्रेन छुट गयी हो या फिर कोई आपातकाल हो।
(स्त्रोत – नेटिव प्लानेट)

युवाओं और विद्वानों के उत्साह से सजा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ का 75 वर्षपूर्ति उत्सव

‘सभ्यताओं का संवाद’ एवं ‘एक भारतीय बुद्धिजीवी के सपने’ का लोकार्पण

युवाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने छोड़ा प्रभाव

कोलकाता। डॉ. शंभुनाथ एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और साहित्यकार ही नहीं हैं, बल्कि कोलकाता के हिंदी जगत के सांस्कृतिक प्राणपुरुष हैं। उन्होंने देश-विदेश में हिंदी के प्रसार के लिए विपुल कार्य किया है। भक्ति आंदोलन और भारतीय नवजागरण पर उनके काम हिंदी आलोचना के क्षितिज का विस्तार करते हैं। कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एवं प्रसिद्ध लेखक डॉ. शम्भुनाथ की 75वीं वर्षपूर्ति के अवसर पर आज ये बातें देश भर से आए विद्वानों ने कहीं। इसका आयोजन कलकत्ता विश्वविद्यालय के उनके विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों ने भारतीय भाषा परिषद के सभागार में किया था। इस अवसर पर उनकी कविताओं पर कोलाज और उनकी एक कहानी का नाट्य रूपांतरण भी प्रस्तुत हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. शंभुनाथ की जीवन यात्रा पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘सृजन यात्रा’ से हुई। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ. कुसुम खेमानी ने उनको सम्मानित करते हुए कहा कि शंभुनाथ जी ने परिषद की कई परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर प्रदान किया है, जिनमें एक ‘हिंदी साहित्य ज्ञानकोश’ का निर्माण है। प्रो. राजश्री शुक्ला ने कहा कि शंभुनाथ एक निरंतर सृजनशील और सक्रिय व्यक्तित्व बने रहें, यह हम सबकी कामना है।
सम्मान समारोह में कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए डॉ शम्भुनाथ ने कहा कि विद्यार्थियों और नौजवानों की सभागार में बड़ी उपस्थिति हिंदी भाषा और साहित्य के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के परिदृश्य में ‘झूठ जिधर है, उधर शक्ति’। साहित्य हजारों साल से सत्य का रक्षक और मानवता की आवाज है। यह उनका हथियार है, जो हार रहे हैं लेकिन हार मानने को तैयार नहीं हैं। मैं अपने शिष्यों और देश भर से आए विद्वानों का आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे इतना सम्मान दिया। वाणी प्रकाशन की ओर से अरुण कुमार माहेश्वरी और अदिति माहेश्वरी ने दिल्ली से आकर उनका सम्मान किया।
इस अवसर पर भक्ति आंदोलन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. विजयबहादुर सिंह ने कहा कि भक्ति आंदोलन को समझने के लिए गांधी की धार्मिक दृष्टि को समझना बहुत जरूरी है। इस भक्ति का सूफियों के प्रेम से गहरा संबंध रहा है। रांची विश्वविद्यालय के डॉ. रविभूषण ने कहा कि भारत के विभिन्न प्रदेशों में भक्ति आंदोलन विविध तरह से आया और उसका मुख्य संदेश ईश्वर के समक्ष सबको समान समझना था। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि शंभुनाथ ने ‘सनातन में सर्जनात्मकता’ की बात कह कर भक्ति साहित्य को देखने का एक नया परिप्रेक्ष्य दिया है। आज के धार्मिक शोर में भक्ति का संदेश खो गया है। रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के इतिहासविद प्रो. हितेन्द्र पटेल ने कहा, रवीन्द्रनाथ और गांधी दोनों को भक्ति आंदोलन ने प्रभावित किया था और उनकी दृष्टि ने भक्ति आंदोलन के मूल्यांकन को काफी प्रभावित किया है।
‘भक्ति आंदोलन और वर्तमान समय’ पर विचार के दूसरे सत्र में अंबेदकर विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो. वैभव सिंह ने कहा, भक्ति आंदोलन के दौर में जड़ धार्मिक व्यवस्था की आलोचना थी और आज भी धर्म के संबंध में कई बातें कही जा रही हैं। इन दोनों में फर्क है। आज धर्म पर बाजार और राजनीति का असर बहुत ज्यादा है। दिल्ली से आए कवि और फिल्मकार देवी प्रसाद मिश्र ने कहा, भक्ति आंदोलन से प्रेरणा लेकर एक ऐसी सभ्यता का निर्माण करना होगा, जो मानवीय हो।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. गोपेश्वर सिंह ने कहा कि गांधी तुलसी के रामराज्य से प्रभावित थे, तो वे कबीर के प्रेम, श्रमचेतना और अहिंसा के विचारों से भी प्रभावित थे। उन्होंने ईश्वर को अपने जीवन की प्रेरणा बना ली थी। डॉ. अवधेश प्रधान ने कहा कि भक्ति साहित्य की प्रेरणा से ही आज मनुष्य जाति सुख और शांति की ओर बढ़ सकती है। श्री रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि एक प्रोफेसर के रूप में शंभुनाथ का विद्यार्थियों के बौद्धिक निर्माण में एक बड़ी भूमिका है। श्री मृत्युंजय ने कहा कि शंभुनाथ ने हिंदी आलोचना को एक नई भूमि प्रदान की है। इस अवसर पर भाषाविद डॉ. अवधेश प्रसाद सिंह सहित शिक्षा जगत के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
इस आयोजन के मुख्य आह्वायक प्रो. संजय जायसवाल द्वारा डॉ. शंभुनाथ की कृतियों पर संपादित ग्रंथ ‘सभ्यताओं का संवाद’ और रामनिवास द्विवेदी द्वारा संपादित सचित्र पुस्तक ‘एक भारतीय बुद्धिजीवी के सपने’ का लोकार्पण हुआ। प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि दिन भर सभागार में डॉ. शंभुनाथ के विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों की व्यापक उपस्थिति और इतने विद्वानों का आगमन उनकी राष्ट्रीय लोकप्रियता का प्रमाण है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में श्रीप्रकाश गुप्ता, रमाशंकर सिंह, इबरार खान, मधु सिंह, पूजा गोंड, सूर्यदेव राय, राजेश सिंह, रूपेश यादव, अपराजिता, सपना खरवार, राज घोष, सुशील सिंह, आदित्य तिवारी, विशाल बैठा, आदित्य साव और चंदन भगत ने नाटक तथा स्नेहा चौधरी, अंकिता कुमारी, शाहीन परवीन, रिया सिंह, इशरत जहां, संजना, अंशुल, कुसुम भगत, अदिति दुबे, कंचन भगत, मधु साव, अदिति, ज्योति चौरसिया, सुषमा कुमारी, मनीषा गुप्ता ने कविता कोलाज किया। इस सम्मान समारोह में विश्वम्भर नेवर, डॉ. शुभ्रा उपाध्याय, अजय राय, डॉ मंजूरानी सिंह, अरुण माहेश्वरी, अदिति माहेश्वरी, शंकर सान्याल, कृष्ण श्रीवास्तव, रविशंकर सिंह, ऋषि भूषण चौबे, जयराम पासवान, यतीश कुमार, प्रियांगु पाण्डेय, मानव जायसवाल सहित सैकड़ों की संख्या में साहित्यप्रेमी, सर के पूर्व विद्यार्थीगण मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ संजय जायसवाल, डॉ गीता दुबे, डॉ श्रद्धांजलि सिंह, नागेंद्र पंडित ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राजश्री शुक्ला, डॉ प्रीति सिंघी, राजेश कुमार साव ने दिया।

भवानीपुर कॉलेज के प्रातःकालीन कॉमर्स सत्र में “कैलकुलेटर रहस्य” पर संगोष्ठी

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्रातःकालीन वाणिज्य विभाग और आईक्यूएसी के सहयोग से गुरुवार, 11 मई, 2023 को प्रोफेसर विवेक पटवारी के साथ “कैलकुलेटर सीक्रेट्स” सेमिनार के छठवें संस्करण का आयोजन किया गया। दो घंटे तक चलने वाले इस सेमिनार में छात्रों और संकाय सदस्यों सहित 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जो महत्वपूर्ण बात रही।
कार्यक्रम के आरंभ में डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स प्रो दिलीप शाह ने कैलकुलेटर के रहस्य जैसे गंभीर विषय पर रुचिकर तरीके से सहज बनाने के लिए प्रो विवेक पटवारी के प्रति उत्साह व्यक्त किया। प्रो पटवारी वाणिज्य के क्षेत्र में केलकुलेटर के त्वरित प्रयोग के लिए अपनी विशिष्टता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आगामी करियर कनेक्ट सोर्सेज और कॉमर्स लैब 3.0 की भी घोषणा की। वाणिज्य विभाग (मॉर्निंग सेक्शन) के सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। प्रो पटवारी ने संगोष्ठी में विभिन्न युक्तियों और तरकीबों को शामिल किया जिनका उपयोग नियमित कैलकुलेटर का उपयोग करके जटिल गणितीय गणना करने के लिए किया जा सकता है।
सभागार में उपस्थित सभी 250 विद्यार्थियों को संगोष्ठी के दौरान कवर की गई तकनीकों की एक हार्ड कॉपी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, छात्रों को तकनीकों से संबंधित 30 व्यावहारिक चित्रों का एक पीडीएफ दिया गया, जो अवधारणाओं को समझने में उनकी सहायक हो।
प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही । संगोष्ठी के दौरान छात्र अत्यधिक व्यस्त थे और उन्होंने अपनी शंकाओं को दूर करने के लिए कई प्रश्न पूछे। उन्होंने प्रोफेसर पटवारी की अनूठी शिक्षण शैली की सराहना की, जिससे जटिल अवधारणाओं को समझना आसान हो गया। संकाय सदस्यों ने भी संगोष्ठी को अत्यधिक जानकारीपूर्ण और उनकी सिक्रेट शिक्षण पद्धतियों को उपयोगी पाया।
संगोष्ठी में भाग लेने वाले छात्रों को प्रशंसा के प्रतीक के रूप में प्रमाण पत्र प्रदान किए गए । प्रभारी शिक्षक डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया और सेमिनार को सफल बनाने के लिए प्रोफेसर पटवारी और आयोजकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।एम प्लस, एम माइनस, एम आर सी मैमरी रिकॉल क्लीयर, जी टी, जीटी और एम आर सी को एक साथ करना और लोगोरिथम, स्टेस्टिक आदि को सुलझाने के बहुत से सरल सूत्रों को साझा किया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने बताया कि कैलकुलेटर सीक्रेट्स पर यह मूल्यवान अंतर्दृष्टि सत्र एम सी क्यू परीक्षा प्रतिभागियों के लिए उपयोगी और प्रभावी है।

व्यवसायिक विचार से कार्यान्वयन तक – यूपीआई की कहानी

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने यूपीआई स्टोरी पर केंद्रित एक उल्लेखनीय सत्र आयोजित किया, जो 19 मई 2023 को कॉलेज के जुबली हॉल में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह द्वारा दिए गए एक उत्साहजनक परिचयात्मक भाषण से हुई, विशिष्ट वक्ता की विशेषज्ञता पर प्रकाश डाला। वक्ता डॉ सुपर्णा धर, कंप्यूटिंग और एनालिटिक्स के क्षेत्र में एक अत्यधिक कुशल पेशेवर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से सूचना प्रणाली में विशेषज्ञता के साथ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी रखती हैं। वर्तमान में डॉ धर एनएसएचएम कॉलेज, कोलकाता में आईटी वर्टिकल की प्रमुख हैं।

अपने सत्र के दौरान, डॉ धर ने डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए दर्शकों को यूपीआई पर काम करते हुए उनके सामने आने वाली सामाजिक चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल सेवाओं के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में डिजिटल भुगतान के महत्व पर जोर दिया। साथ ही डॉ धर ने यूपीआई के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डाला, जो भुगतान को आसान बनाता है। उन्होंने भारतीयों द्वारा इसके व्यापक उपयोग पर प्रकाश डालते हुए भारत के भीतर इसके विकास, कार्यान्वयन और प्रचार पर जोर देते हुए यूपीआई समाधान के बारे में विस्तार से बताया। एक विचार की शुरुआत से लेकर इसके व्यावहारिक अहसास तक इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए, छात्रों के साथ एक समृद्ध अनुभवों की अपनी अंतर्दृष्टि से साझा किया।

कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र के साथ एक इंटरैक्टिव मोड़ आया लिया, जहांँ छात्रों जतिन मूंदड़ा, अनीश अग्रवाल और नोमिक टांटिया ने यूपीआई स्टोरी पर उत्कृष्ट प्रश्न पूछे। जिसमें एक उल्लेखनीय प्रश्न उन कारकों के बारे में था जिन्होंने उपयोगकर्ताओं और व्यवसायों दोनों के बीच यूपीआई को व्यापक रूप से अपनाने में योगदान दिया। इसके अतिरिक्त फैकल्टी सदस्य प्रो विवेक पटवारी ने व्यक्तियों की खर्च करने की आदतों पर यूपीआई भुगतान के प्रभाव और क्रेडिट कार्ड के साथ इसके संबंध के बारे में एक सम्मोहक प्रश्न उठाया। डॉ. धर ने प्रत्येक प्रश्न का उत्तर बड़ी चतुराई और उत्साह के साथ दिया, अंतर्दृष्टिपूर्ण और सूक्ष्म उत्तर प्रदान किए।

बौद्धिक उत्तेजना और ज्ञान के माहौल को बढ़ावा देने के लिए इस घटना ने दर्शकों को मोहित कर लिया। इसने छात्रों और प्रतिभागियों को एक प्रसिद्ध पेशेवर से मूल्यवान ज्ञान बटोरने, उनके क्षितिज का विस्तार करने और उन्हें विषय वस्तु पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करने का एक अनूठा अवसर प्राप्त किया। यूपीआई कहानी पर भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के कार्यक्रम ने अपने छात्रों को अत्याधुनिक ज्ञान और उभरते क्षेत्रों के संपर्क में लाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता का उदाहरण दिया।
डॉ. सुपर्णा धर की विशेषज्ञता और प्रो दिलीप शाह के सहयोग से यह आयोजन अकादमिक उत्कृष्टता के लिए महत्त्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम का समापन प्रो. शाह द्वारा डॉ. सुपर्णा धर के सम्मान के साथ हुआ। प्रभारी शिक्षक डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय भी सत्र में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों की उपस्थिति ने एक स्थायी प्रभाव छोड़ा। इसने प्रतिभागियों के बीच नवाचार और बौद्धिक जिज्ञासा की भावना को बढ़ावा देने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य किया।इसके रिपोर्टर रुचिका सचदेव और फोटोग्राफर पारस गुप्ता रहे। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

सिद्धांत से अभ्यास तक: अनुसंधान पद्धति पर संगोष्ठी”

कोलकाता । अनुसंधान औपचारिक जिज्ञासा है, यह एक उद्देश्य के साथ ताक-झाँक कर रहा है। इस सूत्र के साथ भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के प्रातःकालीन कॉमर्स द्वारा प्रोजेक्ट एंड असाइनमेंट के लिए रिसर्च मेथडोलॉजी विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। पैनल में दो विशिष्ट वक्ताओं में वाणिज्य विभाग के सहायक प्रोफेसर राहुल सरकार (सिद्धो-कान्हो-बिरसा विश्वविद्यालय) और प्रोफेसर (डॉ.) तुतुन मुखर्जी (सेंट जेवियर्स विश्वविद्यालय) सहायक प्रोफेसर को आमंत्रित किया गया। यह सच पूर्ण संगोष्ठी गत 15 मई, 2023 को भवानीपुर कॉलेज के जुबली हॉल में हुई।

संगोष्ठी की शुरुआत में छात्र मामलों के डीन प्रोफेसर दिलीप शाह ने शोध पत्र के महत्व के बारे में अपने ज्ञान और गहन ज्ञान को साझा करने के साथ करते हुए बताया कि कैसे आने वाले युगों में यह क्रांति लाएगा। इसके बाद प्रो. शाह द्वारा आमंत्रित वक्ताओं का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के प्रथम वक्ता श्री सरकार ने अपने भाषण में शोध पत्र पद्धति के जटिल विवरण को संबोधित किया, उन्होंने प्रत्येक महत्वपूर्ण कारक को शामिल किया जो प्राथमिक डेटा, माध्यमिक डेटा, वर्णनात्मक सांख्यिकी आदि जैसे शोध पत्र पद्धति से संबंधित है और इसके आगे। शोध पत्र के अर्थ से लेकर शोध पत्र के प्रकार और शोध पत्र के लेआउट तक, जिस तरह से उन्होंने दर्शकों को संबोधित किया, वह उल्लेखनीय रहा।
कार्यक्रम के दूसरे वक्ता डॉ मुखर्जी ने प्रमुख रूप से शोध पत्र के सांख्यिकीय भाग पर जोर दिया जो शोध पत्र पद्धति की रीढ़ है और दर्शकों की बेहतर समझ के लिए आंकड़ों और उसके विभिन्न घटकों का गहन विश्लेषण किया। उनके विश्लेषण के माध्यम से विभिन्न प्रकार के सांख्यिकी और आंकड़ों के विश्लेषण के तरीकों की व्याख्या की गई। इसके बाद एमएस एक्सेल के माध्यम से डेटा विश्लेषण का एक प्रदर्शन सत्र आयोजित किया गया, जो इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताओं में से एक था। जिस तकनीकी युग में हम हैं, उसे देखते हुए छात्रों के लिए तकनीकी प्रगति के अनुकूल होना अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उनकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।कार्यक्रम का आयोजन किया प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, समन्वयक बीकॉम मॉर्निंग के प्रो. इब्राहिम हुसैन रहे।कार्यक्रम की रिपोर्ट की अक्षत कोठारी ने और जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने । अंत में, वाणिज्य विभाग को धन्यवाद देने के साथ इस कार्यक्रम का समापन हुआ।

1 जून को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी स्पाइडर मैन : अक्रॉस द स्पाइडर-वर्स

कोलकाता । भारतीय स्पाइडर-मैन 1 जून को सिनेमाघरों में आ रही है । हाल ही में मुम्बई में फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया । फिल्म में पवित्र प्रभाकर के जरिये उनके शहर मुंबाटन को देखेंगे। साथ ही यह पहली बार होगा जब कोई हॉलीवुड फिल्म 10 भाषाओं में एक साथ रिलीज होगी।चाहे वह प्रासंगिक संवाद हों या ट्रेलर में दिखाई देने वाली आकर्षक कहानी, इसका हर अंश प्रत्येक भारतीय फिल्म प्रशंसकों को जोड़ेगा । स्पाइडर-मैन: अक्रॉस द स्पाइडरवर्स अमेरिका में रिलीज होने से एक दिन पहले भारत में रिलीज होगी । सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट इंडिया की ओर से ‘स्पाइडर-मैन: अक्रॉस द स्पाइडर-वर्स’ फिल्म को आगामी 1 जून 2023 को पूरे देश के सिनेमाघरों में अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, पंजाबी और बांग्ला भाषा में रिलीज कर एक और मील का पत्थर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। निर्देशक केम्प पॉवर्स ने बताया कि कैसे पवित्र प्रभाकर मल्टीवर्स में अन्य स्पाइडर-लोगों से अलग हैं, “पवित्र की शक्तियां जादू के जरिए आईं है, इसलिए वह बहुत से अन्य स्पाइडर लोगों से काफी अलग हैं जिन्हें रेडियोएक्टिव मकड़ियों ने काट लिया था। उसने सच में एक रहस्यमय जादूगर से अपनी शक्तियों को प्राप्त किया था। कई अन्य स्पाइडर लोगों की तरह, उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ा, और उनके मामले में, यह उनके चाचा के द्वारा था। फिर भी वह शायद फिल्म के सबसे आशावादी किरदारों में से एक है। वह निश्चित रूप से एक स्थिति में हमेशा बुरी चीजों के बजाय अच्छी चीजों के बारे में सोचने वाला आदमी है। वह माइल्स का समकालीन है, और उनका खुश, सकारात्मक स्वभाव शायद माइल्स को गलत तरीके से परेशान कर सकता है।”

माध्यमिक में 86.15 प्रतिशत सफल, मेधा सूची से कोलकाता गायब

कोलकाता : पश्चिम बंगाल माध्यमिक परीक्षा के रिजल्ट 76 दिनों बाद आखिरकार शुक्रवार को घोषित कर दिए गए। परीक्षा परिणाम में जहां जिलों के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, वहीं कोलकाता के छात्र-छात्राओं ने निराश किया है। टॉप टेन में 16 जिलों के 118 छात्र-छात्राएं हैं, जिनमें कोलकाता का एक भी छात्र या छात्रा नहीं है। टॉप टेन में सबसे ज्यादा नाम मालदा जिले के छात्र हैं। पूर्व मेदिनीपुर के 11 परीक्षार्थी इसमें हैं। इस बार पासिंग रेट 86.15 रहा है। हालांकि इसमें पिछली बार से कमी आई है।

देवदत्ता मांझी बनीं टॉपर

माध्यमिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन कर रिजल्ट जारी किया है। इस वर्ष की माध्यमिक परीक्षा में देवदत्ता मांझी प्रथम आई है़। वह पूर्व बर्दवान के कटवा दुर्गादासी गर्ल्स हाईस्कूल से हैं। उनका स्कोर 697 है। दक्षिण दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी, झारग्राम और नदिया से 1-1 परीक्षार्थी टॉप टेन में है।

जिलों में पूर्वी मेदिनीपुर ने मारी बाजी

जिलों में पूर्वी मेदिनीपुर पहले, कलिम्पोंग दूसरे, कोलकाता तीसरे स्थान पर है। पूर्व मेदिनीपुर से 96.81 फीसदी पास हुए हैं। कालिम्पोंग 94.13 प्रतिशत के साथ दूसरा, कोलकाता 93.75 प्रतिशत के साथ तीसरा और पश्चिम मिदनापुर 92.13 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रहा। लगभग सात माध्यमिक परीक्षार्थियों में से 5 लाख 65 हजार 428 छात्र पास हुए हैं। 76 दिन बाद रिजल्ट घोषित किया गया है। छात्रों की तुलना में छात्राओं की संख्या 22 प्रतिशत अधिक थी।

परिषद की वेबसाइट पर रिजल्ट

माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर दोपहर 12 बजे से रिजल्ट उपलब्ध है। अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए उत्तीर्ण दर 76 प्रतिशत है। मालदा से सबसे ज्यादा उम्मीदवार मेरिट लिस्ट में हैं। बर्दवान के शुभम पाल और मालदा के रिफत हसन सरकार सेकंड हैं। अर्क मंडल तीसरे स्थान पर हैं। वह उत्तर 24 परगना के टाकी रामकृष्ण मिशन हाई स्कूल का छात्र हैं। सौम्यदीप मल्लिक भी थर्ड हैं। वह भी उत्तर 24 परगना जिले के बालाचापा देउलिया हाईस्कूल का छात्र है।

गारूलिया मिल हाई स्कूल (एच.एस)का माध्यमिक परीक्षा फल

श्यामनगर, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से घोषित परिणामों में गारूलिया मिल हाई स्कूल के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मेधा का परिचय दिया। विद्यालय की सूचना अनुसार कुल 140 परीक्षार्थियों में उत्तीर्ण होने वालों की कुल संख्या 114 है। इनमें दो परीक्षार्थियों को विशेष स्थान प्राप्त हुआ है। विद्यालय में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में समीर गुप्ता (प्रथम, 80 प्रतिशत), कुणाल गुप्ता (द्वितीय, 78.28 प्रतिशत) और करण कुमार चौधरी (तृतीय,73.85 प्रतिशत) प्रमुख हैं। विद्यालय के प्रभारी शिक्षक श्री सचिंद्र सिंह ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

(माध्यमिक की खबर सलाम दुनिया से, गारूलिया मिल हाई स्कूल – प्रेस विज्ञप्ति)

बंद होगा 2000 रुपये का नोट, 30 सितंबर तक चलन में रहेगा

नयी दिल्ली । आरबीआई ने कहा है कि अब 2,000 रुपये के बैंक नोट (2,000 Rupee Note) सर्कुलेशन से बाहर हो गए हैं। लेकिन अगर आपके पास हैं, तो बैंक में जाकर बदलवाना होगा। आप बैंक में जाकर इन नोटों को बदलवा सकते हैं। आरबीआई ने शुक्रवार को एक रिलीज में बताया कि दो हजार रुपये का नोट को सर्कुलेशन से वापस ले लिया गया है। लेकिन यह लीगल टेंडर बना रहेगा। 2,000 रुपये का यह नोट नवंबर 2016 में लाया गया था। आप 23 मई से बैंकों में जाकर इन नोटों को बदलवा सकते हैं। एक बार में सिर्फ 20,000 रुपये ही बदलवाए जा सकेंगे। इन नोटों को आप 30 सितंबर तक बदलवा सकेंगे। तब तक आप इन नोटों से मार्केट में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं।

2018-19 में प्रिंटिंग हुई बंद

दो हजार रुपये के नोट को आरबीआई एक्ट 1934 के सेक्शन 24 (1) के तहत लाया गया था। पुराने 500 और 1000 रुपये को नोटों के बंद होने के बाद करेंसी रिक्वायरमेंट के चलते इन नोटो को लाया गया था। दो हजार रुपये को लाने का उद्देश्य दूसरे नोट पर्याप्त मात्रा में बाजार में आने के बाद खत्म हो गया था। इसलिए 2,000 रुपये के बैंकनोट्स की प्रिंटिंग 2018-19 में बंद कर दी गई थीं।

बैंकों में जाकर बदलवा सकते हैं

आरबीआई ने कहा है कि लोग 2 हजार रुपये के नोट अपने बैंक अकाउंट में जमा करा सकते हैं। या फिर वे बैंक में जाकर इन नोटों को बदलवा भी सकते हैं। इन्हें बिना किसी प्रतिबंध के सामान्य तरीके से ही बैंकों में जमा कराया जा सकता है।

23 मई से बदलवा सकेंगे नोट

2,000 रुपये के नोटों को 23 मई, 2023 से बैंकों में जाकर आप बदलवा सकते हैं। हालांकि, परिचालन सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने कहा है कि एक बार में 20,000 रुपये ही जमा कराए या बदले जा सकते हैं।

30 सितंबर तक का है समय

आप एक निश्चित अवधि तक ही इन 2 हजार रुपये के नोट्स को बदलवा सकते हैं। आरबीआई के अनुसार, सभी बैंक 30 सितंबर, 2023 तक 2 हजार रुपये के नोट को बदलेंगे। अर्थात आप 30 सितंबर, 2023 तक इन नोटों को बैंक में जमा करा सकते हैं या बदलवा सकते हैं।

भारतीय संग्रहालय में विश्व संग्रहालय दिवस एवं हो चिह्न मिन्ह की 133 जयंती आयोजित

इंडो – वियतनाम सॉलिडैरिटी कमेटी के सहयोग से सेमिनार एवं छायाचित्र प्रदर्शनी
कोलकाता । भारतीय संग्रहालय, कोलकाता ने इंडो – वियतनाम सॉलिडैरिटी कमेटी के सहयोग से विश्व अन्तरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर एक सेमिनार तथा छायाचित्र प्रदर्शनी आयोजित की गयी । इसके साथ ही आयोजन के माध्यम से वियतनाम के पूर्व राष्ट्रपति हो चिह्न मिन्ह की 133 जयंती का पालन किया गया । भारतीय संग्रहालय के आशुतोष बर्थ सेनिटेनरी हॉल में गत 18 मई को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने किया । यह इस अवसर पर भारत में वियतनाम के राजदूत नूंग्येन थान हाई भी उपस्थित थे । राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने भारत और वियतनाम के सम्बन्धों को मजबूत बनाने पर जोर दिया । वियतनाम को भारत का पुराना मित्र बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक, राजनीतिक सम्बन्ध हैं जो और मजबूत होंगे । भारत में वियतनाम के राजदूत नूंग्येन थान्ह हाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझीदारी बढ़ी है । वियतनाम में भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाली कई धरोहरें हैं जिनका संरक्षण किया जा रहा है। भारतीय पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है । इंडो – वियतनाम सॉलिडैरिटी कमेटी की अध्यक्ष कुसुम जैन ने बताया कि वियतनाम में भारतीय संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाले कई स्थल हैं और यह छायाचित्र प्रदर्शनी उसी को सामने रख रही है । वरिष्ठ साहित्यकार स्व. गीतेश शर्मा ने इसे लेकर काफी काम किया और वियतनाम गये…तस्वीरों में इसी यात्रा को संजोया गया है । स्वागत भाषण भारतीय संग्रहालय, कोलकाता के शिक्षा अधिकारी सायन भट्टाचार्य ने दिया । उद्घाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन प्रेम कपूर ने दिया । इस एक दिवसीय सेमिनार में कई शिक्षकों, साहित्यकारों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया ।

बोर्ड परीक्षाओं में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल का बढ़िया प्रदर्शन

कोलकाता । सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने सराहनीय प्रदर्शन किया है । सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में सफलता 86.95 प्रतिशत रही है । एक छात्रा ने हिन्दी में और एक छात्रा ने फ्रेंच में शत प्रतिशत अंक प्राप्त किये हैं । एइशी मजुमदार ने सबसे अधिक 97.80 प्रतिशत अंक मिले हैं । दूसरे स्थान पर सुदीक्षा चक्रवर्ती रही जिसे 97.20 प्रतिशत अंक मिले । तीसरे स्थान पर 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से प्रियंका गुप्ता और मानवी जैन रही है।
सीबीएसई की बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में स्कूल में कॉमर्स की नित्या मल (98.80 प्रतिशत) सबसे आगे रही। दूसरे स्थान पर संयुक्त रूप से कॉमर्स की चाहना अग्रवाल एवं ह्यूमैनिटीज की मधुनिशा मजुमदार को 98 प्रतिशत अंक मिले । तीसरे स्थान पर 97.60 प्रतिशत पाकर कॉमर्स की पलक अग्रवाल रही ।
साइंस में साम्या मेहता 96.40 प्रतिशत पाकर अव्वल रही । दूसरे स्थान पर 96.20 प्रतिशत पाकर वानी अग्रवाल और तीसरे स्थान पर 95.20 प्रतिशत अंक पाकर काव्या छरिया रही ।
कॉमर्स में 98.80 प्रतिशत अंक पाकर नित्या मल स्कूल की भी टॉपर रही । दूसरे स्थान पर चाहना अग्रवाल (98 प्रतिशत) रही । तीसरे स्थान पर पलक अग्रवाल रही जिसे 97.60 प्रतिशत अंक मिले ।
ह्यूमैनिटीज की टॉपर मधुनिशा मजुमदार स्कूल में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रही । उसे 98 प्रतिशत अंक मिले । दूसरे स्थान पर 96.40 प्रतिशत अंक पाकर अन्या सराफ और तीसरे स्थान पर 96.20 प्रतिशत अंक पाकर प्रियांशी अग्रवाल रही ।