Sunday, March 22, 2026
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भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत ,राष्ट्रपति ने लॉन्च किया नया युद्धपोत ‘विंध्यगिरि’

कोलकाता । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कोलकाता में हुगली नदी के तट पर गार्डन रीच शिपबिल्डर्स इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) केंद्र में भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17 अल्फा के छठे जहाज ‘विंध्यगिरि’ को लॉन्च किया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आज ‘भारत’ दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और हम निकट भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती अर्थव्यवस्था का मतलब है, अधिक मात्रा में व्यापार और हमारे व्यापारिक सामानों का एक बड़ा हिस्सा समुद्र के माध्यम से पारगमन करता है, जो हमारे विकास और कल्याण के लिए महासागरों के महत्व को उजागर करता है। हिंद महासागर क्षेत्र और बड़े इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा के कई पहलू हैं और सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए नौसेना को हमेशा सक्रिय रहना होगा। ऋषिकेश के आसपास रिसॉर्ट्स में बुकिंग बंद, जानिए कब तक और क्यों ? मुर्मू ने यह भी कहा कि मुझे विंध्यगिरी के लॉन्च पर यहां आकर खुशी हो रही है। विंध्यगिरी का लॉन्च भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। यह स्वदेशी जहाज निर्माण के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी एक कदम है। परियोजना 17 ए जिसका विंध्यगिरि एक हिस्सा है, आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने के लिए स्वदेशी विचारों को प्रदर्शित करती है।

धुआं रहित चूल्हा’ परियोजना शुरू करेगी बंगाल सरकार

कोलकाता। बंगाल सरकार कोलकाता और राज्य के 5,000 घरों को ‘धुआं रहित चूल्हा’ प्रदान करने के लिए एक पायलट परियोजना चलाने की योजना बना रही है । धुआं रहित चूल्हा यह निर्णय तब आया जब सरकार को एहसास हुआ कि कई गरीब परिवार पहले महंगे एलपीजी सिलेंडर के लिए भुगतान नहीं कर सकते हैं और फिर अपने बैंक खातों में सब्सिडी जमा होने का इंतजार नहीं कर सकते। यह अंततः पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों को खत्म करने का भी प्रयास करता है, जो स्वास्थ्य और वायु गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
धुआं रहित चूल्हा
इस परियोजना की शुरुआत शुक्रवार को एक कार्यशाला के साथ की जाएगी। धुआं रहित चूल्हा, जिसे ‘स्मार्ट चूल्हा’ भी कहा जाता है, पारंपरिक ईंधन, जैसे गाय के गोबर, कोयला, जलाऊ लकड़ी और सूखी पत्तियों से संचालित होता है, लेकिन जहां इन ईंधनों का उपयोग करने वाले पारंपरिक चूल्हे धुएं के उत्सर्जन के कारण अत्यधिक प्रदूषण फैलाते हैं, वहीं ये चूल्हे अधिक कुशलता से ईंधन जलाने में सक्षम हैं, जिसके परिणामस्वरूप बहुत कम धुआं निकलता है । पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष कल्याण रुद्र ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह धुआं रहित चूल्हा सभी प्रकार के पारंपरिक ठोस ईंधन को संभाल सकता है।
उन्होंने कहा कि जब दहन अधूरा होता है तो धुआं होता है। चूंकि स्मार्ट ओवन को पूर्ण दहन की सुविधा के लिए डिजाइन किया गया है, इसलिए बहुत कम उत्सर्जन होता है। केंद्र की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUI) एलपीजी सिलेंडर के लिए सब्सिडी प्रदान करती है, लेकिन इसके लिए प्रत्येक परिवार को पहले सिलेंडर खरीदना पड़ता है और फिर सब्सिडी के लिए इंतजार करना होता है। हालांकि, ऊंची कीमत का मतलब है कि कई परिवारों को पहले से पैसा जुटाना बेहद मुश्किल हो रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि कई लोग खाना पकाने के पारंपरिक, अत्यधिक प्रदूषणकारी तरीकों पर वापस लौट आए हैं। रुद्र ने कहा, हमने शहर में खाद्य विक्रेताओं के बीच गैस ओवन और एलपीजी सिलेंडर वितरित किए हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश एलपीजी की ऊंची कीमत बर्दाश्त नहीं कर सके और ठोस ईंधन की ओर लौट गए। ग्रामीण परिवारों के साथ भी यही बातें हो रही हैं। स्मार्ट चूल्हा पीएम 2.5 को 70 से 90 प्रतिशत तक कम कर सकता है। धुआं रहित चूल्हा परियोजना का लक्ष्य पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन को 70 से 90 प्रतिशत तक कम करना है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय फंडिंग हासिल करने की कोशिश
सूत्रों ने कहा कि डब्ल्यूबीपीसीबी शुरुआत में इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय फंडिंग हासिल करने की कोशिश कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र फाउंडेशन के नेतृत्व में एक सहयोगात्मक प्रयास, ग्लोबल अलायंस फार क्लीन कुकस्टोव्स के तहत सरकारी अनुदान के माध्यम से वित्त पोषण की सुविधा प्रदान की जाएगी। डब्ल्यूबीपीसीबी का अंतिम उद्देश्य पूरे बंगाल में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। राज्य में 1.5 करोड़ ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों में से 1.1 करोड़ लोग खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन का उपयोग करते हैं, जिससे वायु प्रदूषण का खतरनाक स्तर और समय से पहले मौतें होती हैं।
रुद्र ने कहा कि खाना पकाने के स्वच्छ तरीकों पर स्विच करने से पीएम 2.5 से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस पहल में प्रति घर प्रति वर्ष 1.2 टन कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन को बचाने की क्षमता है। पायलट प्रोजेक्ट छह गांवों और झुग्गी-झोपड़ियों वाले परिवारों को कवर करेगा, जिसका लक्ष्य एक लाख ग्रामीण परिवारों तक लाभ पहुंचाना है।
पायलट की प्रारंभिक लागत डब्ल्यूबीपीसीबी द्वारा अपने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) और पर्यावरण मुआवजा (ईसी) भंडार से धन का उपयोग करके वहन की जाएगी। आईआईटी-दिल्ली को धुआं रहित चूल्हों की स्थापना के दौरान और बाद में इनडोर और आसपास की परिवेशी वायु की गुणवत्ता का आकलन करने का काम सौंपा गया है।

कोलकाता के ईएम बाईपास में बनेगा पटाखा हब

कोलकाता। बंगाल सरकार ने कोलकाता के बाइपास में पटाखा हब बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सरकार की ओर से स्थान भी फाइनल कर लिया गया है। लघु एवं कुटीर उद्योग विभाग के अधिकारियों और पटाखा व्यापारियों ने पूर्व मेट्रोपालिटन (ईएम) बाईपास के पास राज्य सरकार के अधीन एक साइट का दौरा किया। विभाग के सूत्रों के मुताबिक, वह जमीन पटाखा कारोबारियों के लिए हब बनाने के काम के लिए दी जाएगी। 25 अप्रैल को पूर्व मेदिनीपुर जिले के एगरा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। उस घटना में करीब दस लोग मारे गए थे। आरोप है कि अवैध रूप से पटाखा बनाते समय यह घटना घटी । घटना के बाद पुलिस-प्रशासन ने राज्य भर में फैली पटाखा फैक्ट्रियों में छापेमारी शुरू कर दी थी। पटाखा फैक्ट्रियों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में पटाखा व्यापारियों ने प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैली पटाखा फैक्ट्रियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। अगर पुलिस ने पटाखा फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
इसके बाद कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में पटाखा हब बनाया जाएगा। उन्होंने हब बनाने के लिए एक कमेटी भी बनाई है। उस कमेटी में राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ पटाखा व्यापारियों को भी रखा गया है। समिति ने पिछले कुछ महीनों में कई बैठकें की हैं और हब बनाने के मामले को अंतिम रूप दिया है । लघु एवं कुटीर उद्योग विभाग के सूत्रों के अनुसार, हब के लिए कोलकाता के नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत पूर्व मेट्रोपालिटन बाईपास के पास एक भूखंड चुना गया है। इस हब में कुल 80 पटाखा व्यापारियों को जगह मिलेगी। जहां वे स्टोर के साथ-साथ गोदाम भी बना सकते हैं। यह हब कुल आठ बीघे जमीन पर बनाया जाएगा।
विभाग के मुताबिक इस नए हब का निर्माण काली पूजा (दीवाली) के बाद शुरू होगा। इस हब के निर्माण के लिए राज्य सरकार 90 प्रतिशत सब्सिडी देगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत पटाखा व्यापारी देंगे। ऑल बांग्ला फायरवर्क्स ट्रेडर्स एसोसिएशन की ओर से बबला राय ने कहा कि हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने पटाखा कारोबार को ध्यान में रखते हुए एक हब बनाने का फैसला किया है। इसलिए हम भी राज्य सरकार को हर तरह का सहयोग देंगे। इस बार पटाखा व्यापारी प्रस्तावित पटखा हब के लिए निर्धारित स्थान पर ही अपना मेला लगाना चाहते हैं।

रॉयल बंगाल टाइगर के लिए सुंदरवन में बनेगा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल

कोलकाता । बंगाल के वन विभाग ने राज्य चिड़ियाघर प्राधिकरण के साथ मिलकर रॉयल बंगाल टाइगर के इलाज के लिए सुंदरवन में एक विशेष वार्ड के साथ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का फैसला लिया है। इस अस्पताल को दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग उपमंडल के अंतर्गत सुंदरवन के झरखाली टाइगर रिजर्व में बनाया जाएगा ।
बाघों के इलाज के लिए स्पेशल वार्ड
वन विभाग के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित अस्पताल में विभिन्न जानवरों के साथ पक्षियों के इलाज की सुविधा भी होगी। उन्होंने बताया कि इसकी विशेषता रॉयल बंगाल टाइगर्स का इलाज होगी, जिसके लिए एक स्पेशल वार्ड भी बनेगा।
अस्पताल में क्या होंगी सुविधाएं?
‘टाइगर रेफरल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल’ नाम से प्रस्तावित अस्पताल में आपरेशन थिएटर भी होंगे। अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासोनोग्राफी मशीनों सहित अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण होंगे। इसमें जानवरों के इलाज की सुविधा के लिए विशेष हाइड्रोलिक टेबल भी होंगे। वन विभाग ने 2023 के अंत तक अस्पताल का उद्घाटन करने का लक्ष्य रखा है । सूत्रों ने कहा कि बाघों के अलावा, सुंदरवन की नदियों में अक्सर आने वाले मगरमच्छों के इलाज के लिए एक अलग वार्ड बनाने की भी योजना है। प्रस्तावित अस्पताल चार पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और एक पशु चिकित्सक के साथ संचालित होगा। दूसरे चरण में फार्मासिस्ट और पैथोलाजिस्ट की भर्ती होगी। समय आने पर जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञों और सर्जनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। वर्तमान में झरखाली टाइगर रिजर्व में अन्य जानवरों की प्रजातियों के साथ तीन बाघ और 11 मगरमच्छ हैं।

माफी काफी नहीं, सोशल मीडिया पर अश्लील पोस्ट करने की कीमत चुकानी पड़ेगी : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर अश्लील और अपमानजनक पोस्ट करने को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। एक मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी तरह की अपमानजक और अश्लील पोस्ट करने पर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। साथ ही इस तरह के मामलों में सिर्फ माफी मांग लेना ही आपराधिक कार्रवाई को माफ करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार ने एक्टर और तमिलनाडु के पूर्व विधायक एस वे शेखरराव के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करने को लेकर मुकदमा खारिज करने से इनकार कर दिया। इस पोस्ट में महिला पत्रकारों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की गई थी।
अदालत ने 72 वर्षीय अभिनेता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। एक फेसबुक पर पोस्ट शेयर करने के बाद शेखर के खिलाफ तमिलनाडु में कई मामले दर्ज किए गए थे। शेखर के वकील ने कहा कि अभिनेता ने गलती का एहसास होने के बाद पोस्ट हटा दी थी। साथ ही बिना शर्त माफी भी मांगी थी। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता ने अनजाने में किसी और की पोस्ट को बिना पढ़े साझा कर दिया क्योंकि उस समय उनकी दृष्टि धुंधली थी । किसी को सोशल मीडिया का उपयोग करते समय बहुत सावधान रहना होगा। सोशल मीडिया का उपयोग करना आवश्यक नहीं है, लेकिन अगर कोई इसका उपयोग कर रहा है तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।
वायरल हो गई थी पोस्ट
अभिनेता और तमिलनाडु के पूर्व विधायक एस वे शेखर के वकील ने कहा कि पोस्ट कुछ ही समय में वायरल हो गई। उनके वकील ने कहा कि मैं एक सम्मानित परिवार से आता हूं। मेरा परिवार महिला पत्रकारों का सम्मान करता है। मैंने उस समय अपनी आंखों में दवा ले ली थी। इसके कारण मैं अपनी तरफ से शेयर की गई पोस्ट के कंटेंट को नहीं पढ़ सका। हालांकि, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि अभिनेता ने सामग्री को पढ़े बिना इतनी लापरवाही से पोस्ट कैसे साझा किया। कोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सोशल मीडिया का यूज करने समय सावधानी
अदालत ने उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए कहा। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि किसी को सोशल मीडिया का उपयोग करते समय बहुत सावधान रहना होगा। सोशल मीडिया का उपयोग करना आवश्यक नहीं है, लेकिन अगर कोई इसका उपयोग कर रहा है तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया पर भेजा या फॉरवर्ड किया गया संदेश उस तीर की तरह होता है जिसे पहले ही धनुष से छूट चुका होता है। जब तक वह संदेश भेजने वाले के पास रहता है, तब तक वह उसके नियंत्रण में रहता है। एक बार भेजे जाने के बाद… संदेश भेजने वाले को उस तीर (संदेश) से हुई क्षति के परिणामों का स्वामित्व लेना होगा। एक बार क्षति हो जाने के बाद माफीनामा जारी करके उससे उबरना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आरटीआई के तहत सूचनाएं प्रदान करने को कहा

नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सूचना आयोगों को निर्देश जारी कर कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सार्वजनिक अधिकारी आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाएं प्रदान की जाएं । सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के अधिदेश के कार्यान्वयन की निरंतर निगरानी करने का निर्देश दिया ।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 में कहा गया है कि सभी सार्वजनिक प्राधिकरण स्वत: संज्ञान लेकर सूचना का खुलासा करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे । जनता नियमित अंतराल पर इंटरनेट और अन्य माध्यमों का उपयोग कर रही है । इस तरह के प्रावधान को लागू करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जानकारी उपलब्ध हो ।आरटीआई कार्यकर्ता व वकील केसी जैन ने जनहित याचिका को शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में किए गए पारदर्शिता ऑडिट से पता चलता है कि खुलासे कानून के अनुसार नहीं किए गए ।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शक्ति और जवाबदेही साथ-साथ चलती है और सार्वजनिक जवाबदेही एक महत्वपूर्ण विशेषता होती है जो ‘कर्तव्य धारकों’ और ‘अधिकार धारकों’ के बीच संबंधों को नियंत्रित करती है । शीर्ष अदालत ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) और राज्य सूचना आयोगों (एसआईसी) को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया । मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ ने कहा, “धारा 3 के तहत कानून द्वारा स्थापित सूचना का अधिकार, धारा 4 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों के दायित्वों के संदर्भ में, हमारी राय है कि इसका उद्देश्य और कानून का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब जवाबदेही का सिद्धांत ‘अधिकार धारकों’ और ‘कर्तव्य धारकों’ के बीच संबंधों को नियंत्रित करेगा. ।”

बनकर तैयार हुआ देश का पहला थ्री डी पोस्ट ऑफिस

बंगलुरू । केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में 3डी प्रिंटिंग से बने पोस्ट ऑफिस का उद्घाटन किया । थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक से बना यह देश का पहला पोस्ट ऑफिस है । इसे बेंगलुरू के कैम्ब्रिज लेआउट के पास उल्सूर बाजार में बनाया गया है । यह निर्माण जिस तकनीक से किया गया है वो कई मायनों में खास है । आमतौर पर 1 हजार वर्ग फीट में घर बनाने में करीब 12 महीने का समय लग जाता है, लेकिन नए पोस्ट ऑफिस को मात्र 44 दिनों में तैयार किया गया ।
ऐसे में सवाल है कि क्या है वो 3डी प्रिंटिंग तकनीक, कितने अलग तरीके से पोस्ट ऑफिस को तैयार किया गया । आम निर्माण के मुकाबले यह कितना सस्ता और टिकाऊ है और देश में कहां-कहां ऐसे निर्माण हुए हैं ।
क्या है थ्री D प्रिंटिंग तकनीक?
थ्री D प्रिंटिंग तकनीक का नाम सुनकर ज्यादातर लोग समझते हैं कि इसका कनेक्शन प्रिंटर से है, जबकि पूरी तरह से ऐसा नहीं है । इस तकनीक में रोबोटिक्स के जरिए पर्त दर पर्त दीवार, छत और जमीन का निर्माण किया जाता है । आसान भाषा में समझें तो मशीन को जिस तरह के निर्माण और डिजाइन के निर्देश दिए जाते हैं वो उसी तरह ऑटोमेटिक इसका निर्माण कर देती है । यह मशीन घर को तैयार करने में कई तरह से सपोर्ट करती है ।
आमतौर पर निर्माण को तैयार करने में ईंट का इस्तेमाल होता है, लेकिन 3डी प्रिंटिंग से तैयार होने वाले निर्माण में यह तो ब्लॉक का इस्तेमाल होता है या वो भी नहीं होता । विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से कम समय में निर्माण को पूरा किया जा सकता है । आमतौर पर ईंट के जरिए तैयार होने वाली बिल्डिंग और दूसरे निर्माण के मुकाबले इस तकनीक के जरिए उसे जल्द पूरा किया जा सकता है ।
3डी प्रिंटिंग से यूं हुआ पोस्ट ऑफिस का निर्माण
आमतौर पर किसी घर या निर्माण को तैयार करने में नक्शे का पालन किया जाता है और उसे ध्यान में रखते हुए मजबूर काम करते हैं । 3डी प्रिंटिंग के मामले में ऐसा नहीं होता. इसमें सब कुछ कम्प्यूटराइज्ड होता है । कम्प्यूटर में जो नक्शा फीड होता है, रोबोटिक्स की मदद से ऑटोमेटिक उसका निर्माण होता चला जाता है । दीवार की चौड़ाई कितनी चाहिए, ऊंचाई कितनी होगी और इंटीरियर में कहां-क्या निर्माण करना है, यह सब रोबोटिक सिस्टम तय करता है ।
3डी प्रिंटर कई तरह की मशीनें से जुड़कर बनता है. जैसे- मिक्सर, पंपिंग यूनिट, मोशन असेंबली, ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर, नॉजिल और फीडिंग सिस्टम. इसका नॉजिल ही सबसे अहम हिस्सा होता है, जो निर्माण करने का काम करता है । प्रिंटर की मदद से ही निर्माण का मैटेरियल निकलता रहता है और इमरात का निर्माण होता रहता है ।
विशेषज्ञों का कहना है, भारत में 3डी प्रिंटिंग तकनीक बड़ा बदलाव ला सकती है । भविष्य में इसकी मदद से कम लागत में घरों का निर्माण किया जा सकेगा । फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट में 3डी प्रिंटिंग कंपनी नेक्सा3डी के सीईओ और चेयरमैन अवि कहते हैं, अगर इस तकनीक से घर का निर्माण कराया जाता है तो कई फायदे मिलते हैं । आम निर्माण के मुकाबले यह कम समय में तैयार होता है. लागत कम आती है और ज्यादा मजबूत बनता है।
देश में क्या-क्या इस तकनीक से तैयार हुआ?
देश में अब तक इस तकनीक से कई निर्माण किए जा चुके हैं । आईआईटी मद्रास ने पिछले साल सितंबर में इस तकनीक से घर का निर्माण किया था । इसके बाद देश में कई निर्माण किए गए ।
3डी प्रिंटिंग से तैयार देश का पहला घर
पिछले साल अक्टूबर में आईआईटी गुवाहाटी ने भारतीय सेना के जवानों के लिए थ्री-डी प्रिंटेड मॉड्यूलर कंक्रीट चौकी को तैयार किया था ।

ईमेल, व्हाट्सऐप पर दस्तावेज साझा करने से बचें – यूआईडीएआई

नयी दिल्ली । आधार कार्ड आजकल के वक्त में एक जरूरी डॉक्यूमेंट के रूप में उभरा है । ऐसे में आधार जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ( यूआईडीएआई) समय-समय पर इसे अपडेट के लिए सूचना जारी करता रहता है ।
कई आधार यूजर्स को आधार अपडेट करने के लिए ईमेल या व्हाट्सएप पर मैसेज मिल रहे हैं । अगर आपको भी यह मैसेज मिला है तो तुरंत सावधान हो जाएं क्योंकि यह धोखाधड़ी का एक और नया तरीका है । यूआईडीएआई ने करोड़ों आधार यूजर्स को अलर्ट करते हुए अपने एक्स हैंडल से ट्वीट करके जानकारी दी है कि वह कभी भी आधार अपडेट करने के लिए ईमेल या व्हाट्सएप के जरिए डॉक्यूमेंट्स नहीं मांगता है । ऐसे में आधार अपडेट करने के लिए हमेशा My Aadhaar Portal का इस्तेमाल करें । वहीं ऑफलाइन सुविधा का लाभ उठाने के लिए करीबी आधार सेंटर पर विजिट करें ।
गौरतलब है कि यूआईडीएआई ने पिछले कुछ वक्त से मुहिम चला रखी है जिसमें उसने 10 साल से अधिक पुराने आधार को अपडेट करने के लिए कहा है । यूआईडीएआ का कहना है जिन लोगों के आधार 10 साल से अधिक पुराना है वह अपने डेमोग्राफिक डिटेल्स जैसे प्रूफ ऑफ आइडेंटिटी और प्रूफ ऑफ एड्रेस के दस्तावेज को आधार में अपडेट कर दें । इसके लिए यूआईडीएआई निशुल्क आधार अपडेट करने की सुविधा भी दे रहा है । पहले यह फ्री सेवा 14 जून 2023 तक उपलब्ध थी जिसे अब बढ़ाकर 14 सितंबर 2023 तक के लिए कर दिया गया है ।

पुणे के इस अस्पताल में ट्रांसजेंडर के लिए बना अलग वार्ड

पुणे । पुणे के ससून जनरल अस्पताल ने ट्रांसजेंडर के लिए एक समर्पित वार्ड शुरू किया है । वार्ड में 24 सामान्य बेड और दो आईसीयू बेड होंगे । इससे ट्रांसजेंडर के लिए सरकारी अस्पताल में उपचार प्राप्त करना सहज हो जायेगा । एक अधिकारी ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य अक्सर अन्य रोगियों से भेदभाव का सामना करते हैं और यह वार्ड उनके लिए चिकित्सा प्राप्त करने को आसान बना देगा ।
ट्रांसजेंडर वार्ड को नए 11-मंजिला इमारत में शुरू किया गया है । प्रारंभ में, 8 बेड के लिए व्यवस्था की गई है जो बाद में बढ़ाई जायेगी । बता दें कि 15 जनवरी, 2022 को ट्रांसजेंडर के लिए काम करने वाले संगठनों ने ससून अस्पताल के डीन डॉ. विनायक काले से इसकी मांग रखी थी । उन्होंने उस समय जल्द ही इस तरह की सुविधा का वादा किया था ।
इससे पहले ट्रांसजेंडर के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था मुंबई के जेजे अस्पताल में की गई थी । अब, ट्रांसजेंडर्स को ससून जनरल अस्पताल में भी समर्पित उपचार प्राप्त होगा । वार्ड में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के लिए एक अलग शौचालय है. परीक्षा और उपचार के लिए भी एक अलग कमरा बनाने की योजना है ।
बीजे मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ संजीव ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों को ट्रांसजेंडर के रोगियों के साथ सम्मान जनक व्यवहार करने के लिए कहा गया है । उन्होंने कहा कि अस्पताल में ट्रांसजेंडर मरीजों को वो सभी सुविधाएं मिलेंगी जिसको सामान्य मरीजों को मिलती हैं ।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को बच्चों के घर से निकालने का अधिकार नहीं देता : इलाहाबाद हाईकोर्ट

लखनऊ । इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम फैसले में कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 माता-पिता को बच्चों को घर से बाहर निकालने का अधिकार नहीं देता है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कानून के तहत गठित अधिकरण माता-पिता की अर्जी पर संतान को माता-पिता के उचित भरण-पोषण का निर्देश दे सकता है लेकिन वह संतान को घर से बाहर निकालने का आदेश पारित नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि अधिनियम की मंशा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उचित भरण-पोषण और उनका कल्याण सुनिश्चित करना है।
अदालत ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत तय होने वाले कानूनी अधिकारों के बाबत इस अधिनियम के तहत आदेश पारित नहीं किये जा सकते हैं। न्‍यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने कृष्‍ण कुमार की ओर से दाखिल रिट याचिका का निपटारा करते हुए उक्त आदेश पारित किया ।
दरअसल याची अपनी अर्जी में कहा था कि उसने अपने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध दूसरी जाति की लड़की से विवाह कर लिया जिसके कारण वे खफा हो गये और अब उन्होंने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत अधिकरण में अर्जी देकर उसे घर से बेदखल करने का आदेश देने का अनुरोध किया है।
अधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ने आठ जुलाई, 2019 को आदेश दिया कि याची घर के जिस कमरे में रहता है और जिस दुकान का उपयोग करता है उसके अलावा वह घर के अन्य किसी हिस्से में माता-पिता के अधिकार में दखल नहीं देगा।
याची के माता-पिता एसडीएम के उक्त आदेश से सहमत नहीं हुए और उन्होंने एसडीएम के आदेश के खिलाफ जिलाधिकारी, सुल्तानुपर के यहां अपील दाखिल कर दी जिस पर जिलाधिकारी ने 22 नवंबर, 2019 को एसडीएम के आदेश को रद करते हुए याची को अपने माता-पिता का मकान एवं दुकान खाली करने का आदेश जारी कर दिया और कहा कि यदि डेढ़ महीने में याची ऐसा नहीं करता तो पुलिस की मदद से उससे जगह खाली करवा ली जाएगी। इस आदेश को याची ने उच्‍च न्‍यायालय में चुनौती दी थी ।