Tuesday, March 24, 2026
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80 वर्षों से विराजते आ रहे हैं लाल बाग़ के राजा

गणेश चतुर्थी, सबसे प्रतिष्ठित हिंदू त्योहारों में से एक, पूरे भारत में भव्य उत्सव मनाया जाता है। मुंबई के हलचल भरे शहर में, “लाल बाग के राजा” के आगमन के साथ उत्साह अपने चरम पर पहुंच जाता है । यह लेख लाल बाग में मनाए जाने वाले इस प्रतिष्ठित गणेशोत्सव के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालता है, इसकी उत्पत्ति, महत्व और इसके द्वारा अर्जित की गई भक्ति के वर्षों का पता लगाता है।
लाल बाग में गणेशोत्सव का समृद्ध इतिहास : गणेशोत्सव, जिसे विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, दस दिवसीय हिंदू त्योहार है जो ज्ञान और समृद्धि के हाथी के सिर वाले देवता भगवान गणेश के जन्म का जश्न मनाता है। हालाँकि यह त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन यह मुंबईकरों के दिलों में एक अद्वितीय स्थान रखता है, जो इसे अद्वितीय उत्साह और भक्ति के साथ मनाते हैं । लाल बाग के राजा, जिसका अनुवाद “लाल बाग का राजा” है, मुंबई में सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित गणेश मूर्तियों में से एक है। आठ दशकों से अधिक समय से, यह भव्य मूर्ति आस्था, आशा और एकता का प्रतीक रही है, जो शहर भर और बाहर से लाखों भक्तों को आकर्षित करती है।
उत्पत्ति और आरंभ : लाल बाग के राजा की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में हुई थी जब स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव के सार्वजनिक उत्सव की शुरुआत की थी। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान, तिलक ने इस उत्सव को दमनकारी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनता को एकजुट करने के एक साधन के रूप में देखा। उन्होंने लोगों को अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की मूर्तियां लाने, सामुदायिक संबंधों को बढ़ावा देने और भारतीय संस्कृति में गर्व की भावना पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया । मुंबई का एक हलचल भरा इलाका, लाल बाग, इस परंपरा को अपनाने वाले पहले लोगों में से एक था। 1934 में, पहले लाल बाग के राजा की स्थापना की गई, जिससे एक ऐसी विरासत की शुरुआत हुई जो दशकों तक निर्बाध रूप से जारी रही।
लाल बाग के राजा का महत्व : लाल बाग के राजा अपने धार्मिक महत्व से आगे बढ़कर मुंबई की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और एकता की भावना का प्रतीक बन गया है। भक्त, उनकी जाति, पंथ या धर्म के बावजूद, भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए एक साथ आते हैं। यह मूर्ति लाखों लोगों की इच्छाओं को पूरा करने और उनके दिलों को सांत्वना देने के लिए जानी जाती है । हर साल, लाल बाग के राजा की मूर्ति को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाता है, जिसमें कुशल कारीगर एक उत्कृष्ट कृति बनाने में अपना दिल और आत्मा लगाते हैं। मूर्ति को विस्तृत गहनों और कपड़ों से सजाया गया है, जो एक राजा के लिए उपयुक्त ऐश्वर्य को दर्शाता है।
भक्ति के वर्ष: 2023 तक, लाल बाग के राजा का उत्सव लगभग नौ दशकों से मनाया जा रहा है। 80 से अधिक वर्षों से, यह मुंबई की सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखने के प्रति अटूट विश्वास और प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में खड़ा है। लाल बाग के राजा का प्रतीक गणेश चतुर्थी, मुंबई की स्थायी भावना का एक प्रमाण है। यह सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है बल्कि एक सांस्कृतिक घटना है जो जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को एकजुट करती है। लाल बाग के राजा की विरासत लगातार फल-फूल रही है, जो इस शुभ समय के दौरान भगवान गणेश की दिव्य कृपा चाहने वाले सभी लोगों में खुशी, आशा और आशीर्वाद फैला रही है।

 

तनाव को लेकर अध्ययन में नये तथ्य का खुलासा

कोलकाता । डॉ. देवासिस घोष और अनिंदिता गुहा के अध्ययन में पाया गया कि हमारे रक्त में रसायन इस बात से जुड़े होते हैं कि हम तनाव को कैसे संभालते हैं। अध्ययन, “प्लेटलेट सेरोटोनिन स्तर: मानव व्यवहार, तनाव प्रतिक्रिया और साइकोट्रोपिक दवाओं के चयन में एक आवश्यक भूमिका”, दिखाता है कि ये रसायन तनाव को कैसे प्रभावित करते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि तनाव के दौरान दो रक्त रसायन, सेरोटोनिन और डोपामाइन एक साथ काम करते हैं। इससे हमें तनाव को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
पहले, लोगों को लगता था कि ये रक्त रसायन जन्म से ही वैसे ही रहते हैं, लेकिन अध्ययन कहता है कि तनाव उन्हें बदल देता है। उन्होंने तनावग्रस्त लोगों का अध्ययन किया और उन्हें उनके रासायनिक स्तरों के आधार पर समूहित किया।
उन्होंने पाया कि इन रसायनों के बहुत अधिक या बहुत कम होने का मतलब बहुत अधिक तनाव हो सकता है। एक रसायन का बहुत अधिक मात्रा में होना उदा. सेरोटोनिन का मतलब अन्य यानी डोपामाइन का कम होना भी हो सकता है और इसके विपरीत भी। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. देवासिस घोष ने कहा, “इन रसायनों की जांच से हमें तनाव को समझने में मदद मिल सकती है। दोनों को देखकर डॉक्टरों को उपचार चुनने में मदद मिलती है।”

बेंगलुरु में गणेश उत्सव, ढाई करोड़ रुपये के सिक्कों और नोटों से सजावट

5, 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोटों की मालाएं तैयार
बंगलुरू । कर्नाटक के बेंगलुरु में जेपी नगर स्थित सत्य गणपति मंदिर परिसर को करीब ढाई करोड़ रुपये के सिक्कों और नोटों से सजाया गया है। बेंगलुरु और समूचे कर्नाटक में सोमवार से गणेश चतुर्थी उत्सव धार्मिक उत्साह के साथ शुरू हो गया। श्रद्धालु भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिरों और पंडालों में जा रहे हैं।
अपनी अनूठी सजावट के चलते सत्यगणति मंदिर श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है। न्यासियों के मुताबिक, इस मंदिर का प्रबंधन संभाल रहे गणपति शिर्डी साई न्यास ने पांच, 10 और 20 रुपये के सिक्कों की मालाएं तैयार की हैं। इसी के साथ-साथ 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोटों की भी मालाएं तैयार की गई हैं। ये सभी मालाएं करीब ढाई करोड़ रुपये की हैं। एक न्यासी ने बताया कि करीब 150 लोगों की टीम ने एक महीने के दौरान सिक्कों और नोटों की मालाओं से मंदिर की सजावट की। उनके मुताबिक, इसके लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जा रही है।
सिक्कों का इस्तेमाल कर कलात्मक चित्रण किया गया है। इनमें भगवान गणेश, ‘जय कर्नाटक’, ‘राष्ट्र प्रथम’, ‘विक्रम लैंडर’, ‘चंद्रयान’ और ‘जय जवान जय किसान’ की छवियां शामिल हैं। एक न्यासी ने बताया कि नोटों और सिक्कों से की गई यह सजावट एक हफ्ते के लिए रहेगी ।

हिन्दी दिवस के अवसर पर पुस्तकालय का उद्घाटन

भाटपाड़ा । हिंदी दिवस के अवसर पर कांकिनाड़ा ज्योति फाउंडेशन द्वारा ‘निःशुल्क लाइब्रेरी’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर हिंदी दिवस का पालन किया गया और बर्ष 2023 में बैरकपुर शिल्पांचल से एसएससी जी.डी.  में चयनित लगभग 300 फौजियों को ‘जय जवान प्रतिभा सम्मान- 2023’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर वैजनाथ साव, मनीषा गुप्ता, नागेंद्र पण्डित, कोमल साव, आदित्य तिवारी, आशुतोष राउत और संजना जायसवाल ने काव्य पाठ किया। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष कुमार घोष, डॉ संजय जायसवाल, ख्वाजा अहमद हुसैन, एस. के. अग्रवाल, जगतदल विधायक सोमनाथ श्याम, गोपाल राउत, आतिफ़ जलीस, अब्दुल वदूद अंसारी, तरुण साव, उत्तम कुमार, डॉ मंटू साव, कार्तिक साव, देव प्रसाद सरकार और अन्य सम्मानीय शिक्षकगण उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के सचिव प्रियांगु पाण्डेय ने कहा कि बैरकपुर शिल्पांचल को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा ही एकमात्र विकल्प है। धन्यवाद ज्ञापन बांकेलाल यादव ने दिया ।

ताइवान एक्सीलेंस वीकेंडर 2023 आयोजित

कोलकाता । ताइवान एक्सीलेंस द्वारा प्रस्तुत बहुप्रतीक्षित ताइवान एक्सीलेंस वीकेंडर 2023 आज कोलकाता के साउथ सिटी मॉल में आयोजित हुआ । गत 15 सितंबर से 17 सितंबर तक तीन शानदार दिनों में आयोजित होने वाला ताइवान एक्सीलेंस वीकेंडर ताइवान के बेहतरीन और देश में उभर रहे अत्याधुनिक नवाचारों का पता लगाने के लिए एक विशिष्ट मंच प्रदान किया । यह कार्यक्रम कोलकाता में ताइपे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर संपर्क कार्यालय (टीएआईटीआरए – कोलकाता) की निदेशक सिंग झेंग के नेतृत्व में एक भव्य उद्घाटन समारोह के साथ शुरू हुआ। उनके साथ आनंद के जीवंत शहर की जानी-मानी अभिनेत्री पूजा बनर्जी भी शामिल थीं। उद्घाटन समारोह में इंडियाज गॉट टैलेंट के प्रसिद्ध बैड साल्सा डांस ट्रूप द्वारा नृत्य प्रस्तुति दी गई। उल्लेखनीय उपस्थित लोगों में श्री देबाशीष सेन, जो हिडको के प्रबंध निदेशक और न्यू टाउन डीए के अध्यक्ष दोनों के रूप में कार्य करते हैं, श्री संबित दासगुप्ता, बीसीसीआई (द बंगाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के सहायक निदेशक, के के कुओ शामिल थे। , उपाध्यक्ष कर्मा, श्री एलेक्स ली, साइबरपावर के निदेशक अल्बर्ट, वान हाई कोलकाता में बिक्री और विपणन मालिकों के प्रतिनिधि, पोलिन लियाओ, मेडेन के बिक्री प्रतिनिधि, डेविड चेन, उपस्थित थे । दूसरे और तीसरे दिन क्रमशः प्रसिद्ध अभिनेता नील भट्टाचार्य और अंतरा नंदी उपस्थित रहे । सायंता मोदक और अर्चिका गुप्ता जैसी प्रभावशाली सोशल मीडिया हस्तियां भी संबंधित दिनों में उपस्थित रहीं ।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित लोगों को आईसीटी और गेमिंग, फैशन, लाइफस्टाइल, होम एंड लिविंग, स्पोर्ट्स, स्वास्थ्य और कल्याण और अन्य श्रेणियों में फैले ताइवानी उत्पादों की एक विविध श्रृंखला का पता लगाने का अवसर मिला । 21 प्रसिद्ध ताइवानी ब्रांड, जैसे एसर, आइफा, अडाटा, एरोमीज, एसर, साइबरपावर, डर्मा एंजेल, डी – लिंक , गीगाबाइट, कर्मा, एमएसआई, थर्मालटेक, कोलकाता में ताइपे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर संपर्क कार्यालय की निदेशक सिंग झेंग ने ताइवान उत्कृष्टता सप्ताहांत पर अपने विचार साझा करते हुए इसे अद्वितीय ‘उत्कृष्टता के चिह्न’ के साथ ताइवान की अभिनव भावना का एक गतिशील प्रदर्शन बताया। वह इसे ताइवान के प्रमुख ब्रांडों के साथ जुड़ने, अनुभव करने और बातचीत करने के एक उत्कृष्ट अवसर के रूप में देखती है। 2022 में, दोनों देशों के बीच 8.45 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हाल के वर्षों में, ताइवान और भारत ने अपने संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुभव किया है, विशेष रूप से व्यापार, निवेश, पारस्परिक बंधन और सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में।

सुमित बिनानी बने एसीएई के 61वें अध्यक्ष

कोलकाता । सुमित बिनानी एसोसिएशन ऑफ कॉरपोरेट एडवाइजर्स एंड एक्जीक्यूटिव्स (एसीएई) के 61वें अध्यक्ष बने। उन्होंने 2023-24 की अवधि के लिए सीए पी. डी. रुंगटा से एसीएई के अध्यक्ष के रूप में अपना कार्यभार संभाला। एसीएई वर्ष 1960 में स्थापित सबसे पुराने और प्रतिष्ठित एसोसिएशन में से एक है। लगभग 1600 पेशेवर व्यवसायी और उद्योगपति इसके सदस्य के रूप में इससे जुड़े हैं । सुमित बिनानी ने अपने कार्यकाल के दौरान “इग्नाइटिंग उत्कर्ष” नामक थीम को अपनाने का प्रस्ताव रखा है, जो प्रगति, उत्कृष्टता और सकारात्मक विकास के विचार का प्रतीक है। इस मौके पर सीए तरूण गुप्ता और सीए नीरज हरोदिया (उपाध्यक्ष), एडवोकेट रमेश पटोदिया, (महासचिव), पांच बार की केटलबेल विश्व चैंपियन सुश्री शिवानी शाह अग्रवाल (संयुक्त सचिव) और सीए मोहित भूटेरिया (कोषाध्यक्ष) के साथ एसोसिएशन के कार्यकारी समिति के सदस्यों ने नए अध्यक्ष का हर तरह से सहयोग करने की बात कही। एसोसिएशन ऑफ कॉरपोरेट एडवाइजर्स एंड एक्जीक्यूटिव्स के अध्यक्ष सुमित बिनानी ने कहा, उत्कर्ष की चिंगारी को आगे बढ़ाते के साथ मेरा प्राथमिक लक्ष्य इसके मूल्यों को बनाए रखते हुए हमारे एसोसिएशन की दृश्यता और ब्रांडिंग को बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से संलग्न होना होगा। एकजुटता और परस्पर निर्भरता मेरी यात्रा के मुख्य शब्द होंगे। प्रेसिडेंट के रूप में हमेशा मेरा लक्ष्य सभी सदस्यों के साथ मिलकर काम करना है। हमारे संघ को मजबूत और उन्नत करना और निरंतर विकास, उत्कृष्टता और सकारात्मक विकास की संस्कृति को अपनाना मेरा मुख्य लक्ष्य होगा।

बागुईहाटी के वीआइपी रोड में आयोजित गणेशोत्सव में “चंद्रयान-3” में विराजे गणपति

कोलकाता । गणेश चतुर्थी भले ही पश्चिम बंगाल की तुलना में पश्चिम भारत में बड़े स्तर पर और भव्य आकार में मनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल में भी गणेश चतुर्थी के मौके पर भक्त बड़े पैमाने पर गणपति बंदना का आयोजन कर रहे हैं। हमारे लिए हर अच्छे काम की शुरूआत बिघ्नहर्ता गणेश पूजा एवं उनकी वंदना के साथ होती है।

इस वर्ष गणेश चतुर्थी उत्सव के अवसर पर बागुईहहाटी के वीआइपी रोड में स्थित ‘एक्जीक्यूटिव पैलेस अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन’ की ओर से चंद्रयान-3 थीम पर मंडप का निर्माण किया गया है। यहां चंद्रयान-3 में भक्तों को विघ्नहर्ता गणेश के दर्शन कर भक्तों का मन प्रफुल्लित हो गया। इस वर्ष यहां की पूजा “इसरो” के वैज्ञानिकों की सफलता को समर्पित की गयी है, क्योंकि चंद्रयान-3 की उपलब्धि का यह मिशन भारत की एक ऐतिहासिक जीत है।

इस मौके पर बागुईआटी के वीआईपी रोड में स्थित ‘एक्जीक्यूटिव पैलेस अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन’ की ओर से आयोजित पूजा कमेटी के सचिव श्री अंकित अग्रवाल ने कहा, गणेश चतुर्थी त्योहार का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि वह विघ्नों का नाश करनेवाले और खुशहाल वातावरण बनाने वाले हैं। इस साल हम अपने आपार्टमेंट में यह उत्सव इसरो के वैज्ञानिकों को चंद्रयान-3 के तौर पर मिली बड़ी सफलता को समर्पित करते हुए चंद्रयान-3 थीम पर पूजा का आयोजन किए हैं। इस वर्ष गणपति उत्सव छह दिनों तक मनाया गया। इस आयोजन में बड़े स्तर पर हवन का आयोजन किया गया। जिसमें पूरे अपार्टमेंट के लोग शामिल हुए। इसके बाद धूमधाम से प्रतिमा का विसर्जन किया जायेगा।

इस आयोजन में अपार्टमेंट के अध्यक्ष संजीव दुदानी के साथ अंकित अग्रवाल (सचिव), एमपी अग्रवाल (कोषाध्यक्ष), राम अवतार अग्रवाल, मनोज बिनानी, कृष्ण अवतार अग्रवाल, आशीष टेकरीवाल, अरुण कुमार अग्रवाल, अभिषेक जैन, अभिनव बसु, अमित अग्रवाल, आशीष टेकरीवाल, अमन अग्रवाल , ललित डागा, शैंकी जैन, अशोक कुमार अग्रवाल, केशव बिनानी, बिनोद टेकरीवाल और शंकर प्रसाद दुदानी ने पूरे अयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। पूजा के दौरान 2,000 से अधिक लोगों में महाप्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रहण कर श्रद्धालु महापुण्य के भागी बने।

झरोखा

– चंद्रकला गुप्ता

एक शाम, मैं अपने कमरे में बैठी थी कि, मेरी दो पोती जो कि एक 7 साल की है और दूसरी 14 साल की हैं। दोनों जिद करने लगी कि दादी मुझे एक अच्छी कहानी सुननी है। तभी मुझे अपनी दादी की एक कहानी याद आई। वही कहानी आप सभी को सुनाती हूं। मैं कोई लेखिका तो हूं नहीं, जो कहानी मेरी दादी ने मुझे सुनाई वहीं मैंने बच्चों को सुना दिया। एक राजा अपनी रानियों के साथ रोज अपने झरोखे से अपने नगर को देखा करता था। नगर के कुछ लोग उसे कुछ भेंट दिया करते थे।

भेंट देने के लिए एक फकीर भी आया करता था। वह फकीर रोज एक जंगली फल देता था। राजा सोचता था कि, फकीर के पास कुछ और देने के लिए नहीं हो सकता था। राजा उस फल को हर रोज स्वीकार कर, और पास बैठे अपने मंत्री को दें दिया करता था। यह क्रम बहुत दिनों तक चला।

एक दिन राजा का पालतू बंदर उसके पास बैठा था, राजा ने वह फल उस बंदर को दे दिया। बंदर ने फल को जैसे काटा, उसके मुंह से एक बड़ा हीरा गिर आया जो उस फल के अंदर छिपा हुआ था। राजा यह देख कर चौक उठा, उसने इतना बड़ा हीरा कभी देखा भी नहीं था। राजा ने उस मंत्री से पूछा ,”वह बाकी के फल कहां गए?”

मंत्री ने सोचा और तुरंत जवाब दिया “महाराज, वह सुरक्षित है।” तब मंत्री ने सोचा यह तो राजा की बात थी उसे संभाल कर रखना ही पड़ता है। मंत्री प्रायः उस पल को एक तहखाने में फेंकता जाता था, कई दिनों के बाद जब वह तहखाना खुला तो उससे बहुत बदबू आ रही थी।

सारे फल सड़ चुके थे, लेकिन उन सभी फलों के बीच हीरे चमक रहे थे। राजा ने फकीर को भरी सभा में बुलवाया, और पूछा “हे फकीर, इसके पीछे क्या राज़ है? आप मुझे यह जंगली पर हर रोज क्यों दिया करते थे?”

राजा ने फकीर से कहा,”झरोखे से रोज मैं अपने नगर सुंदर फूलों को देखा करता था।”

उस फकीर ने कहा, “हे राजन, होश ना हो तो जिंदगी ऐसे ही चुक जाती है।”

अब राजा सोचने लगा कि फकीर ने क्या बात कही? काफी देर सोचने के बाद वह यह सब घटनाओं का कारण समझ गया।

फिर अफसोस में उसने कहा,”मैंने तो अपनी जिंदगी यूं ही गवा दी! बस अब और नहीं।”

उसके बाद उसने निश्चय किया कि अब वह अपने जिंदगी में अच्छे काम करेगा। उसके बाद से वह अपने गुरु की शरण में जाकर, गुरु की सेवा और लोगों की भलाई में ध्यान देते हुए अपनी जिंदगी सुख और शांति से बिताने लगा। दोस्तों, कल हमारे पास हैं इस भ्रम में मत रहे। हर पल को जीएं। आशा करती हूं कि यह कहानी आप सबको पसंद आई होगा।

शुभजिता – चन्द्रविजेता भारत

शुभजिता पत्रिका का अंक चन्द्रयान 3, हमारे वैज्ञानिकों को समर्पित है । इसके साथ ही पढ़ें जन्माष्टमी एवं शिक्षक दिवस पर आलेख एवं अन्य सामग्री । युवा प्रतिभा का भी अवलोकन करें

पीडीएफ संस्करण – 20 रुपये मात्र

लिटिल थेस्पियन का 17वां रंग -अड्डा और युवा वर्ग

कोलकाता ।  हाज़रा के सुजाता देवी मंदिर में 17वां रंग अड्डा का सफल आयोजन सुप्रसिद्ध नाट्य संस्था लिटिल थेस्पियन की ओर से आयोजित किया गया l सितंबर माह में जन्मे विशिष्ट नाटककारों के ऊपर यह रंग -अड्डा केंद्रित था l रंग -अड्डा का मुख्य विषय और अगाथा क्रिस्टी के माउस ट्रैप नाटक में जिंदगी का खोखलापन, मंच के जादूगर तपन सेन और रोशनी की महक, विजय दान देथा और हबीब तनवीर चरण दास चोर :सृजन से प्रस्तुति की यात्रा, मुस्ताक काक :एक अद्भुत रंग निर्देशक, सुरेन्द्र वर्मा के शकुंतला की अंगूठी नाटक में सामाजिक संघर्ष नाटक के कुछ अंशु के पाठ के साथ, आलेख भी प्रस्तुत किया गया l इस बार रंग अड्डे को और भी ज्यादा आकर्षक बनाने एवं विद्यार्थियों को जोड़ने के लिए नया प्रयोग किया गया जिसमें कुछ कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों ने भाग लिया l उन्होंने उन विशिष्ट नाटककारों के जीवन परिचय और साहित्य के बारे में अड्डा में शामिल लोगों कों उनसे अवगत कराया l जिसमें अगाथा क्रिस्टी का साहित्यिक परिचय खिदिरपुर कॉलेज की छात्रा नेहा मलिक ने दिया l तापस सेन का रंगमंचीय परिचय लेडी बर्मन कॉलेज की छात्रा स्नेहा नोनिया ने दिया l हबीब तनवीर का रंगमंच और साहित्यिक परिचय खिदिरपुर कॉलेज की छात्रा संध्या राम ने दिया l विजय दान देथा का साहित्यिक परिचय कोलकाता विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र ज्योतिका प्रसाद ने दिया l सुरेंद्र वर्मा का साहित्यिक परिचय कोलकाता विश्वविद्यालय की छात्रा सपना खरवार ने दिया l पुस्तक का रंगमंचीय परिचय रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के छात्र किशन कुमार मांझी ने दिया l यह छात्रों के बीच के बीच नाटक की समझ पैदा करने के लिए एक सराहनीय प्रयास रहा l जिसे वहाँ उपस्थित अतिथियों ने भी सराहा तथा एक अच्छा प्रयास बताया l
लिटिल थेस्पियन के इस रंग -अड्डे का भी यही उद्देश्य है कि छात्र केवल नाटक कों पढ़े और देखे ही नहीं बल्कि उससे जुड़े सभी लोगों के विषय में अवगत हों l नाटक केवल अभिनय नहीं है बल्कि उन सभी चीजों से मिलकर बना है, जिसके द्वारा नाटक मंच पर प्रदर्शित होता है l अगाथा क्रिस्टी के माउस ट्रैप नाटक में जिंदगी का खोखलापन पर आलेख हिना जी जी ने प्रस्तुत किया इसमें उन्होंने बताया कि रहस्य में जासूसी उपन्यास से बाहर निकाल कर नाटक की तरफ आती है और उनके नाटकों में हमें रहस्य और रोमांच देखने को मिलता है l एनी दास ने मंच के जादूगर तापस सेन और रोशनी की महक के शीर्षक आलेख के माध्यम से हमें बताया कि तप सैया केवल नाटक में ही अपने रोशनी का जादू नहीं चलाया है बल्कि वह रौशनी सज्जा के लिए विश्व विख्यात रहे हैं और वह कई नामी गिरामी इमारत और प्रसिद्ध स्मारकों के लिए भी रोशनी रोशनी सजा की है l हबीब तनवीर और विजय दान देता पर आधारित आलेख का पाठ राधा ठाकुर ने किया जिसमें उन्होंने चरण दास चोर नाटक को आधार बनाया था l सुरेंद्र वर्मा का नाटक शकुंतला की अंगूठी पर आधारित आलेख का पाठ प्रियंका सिंह ने कियाl मुश्ताक का पर आलेख का पाठ पार्वती रघुनंदन ने किया जिसमें उन्होंने बनाया है बताया कि क में कई नामी गिरामी फिल्मों के लिए भी निर्देशन किया है l
इस रंग अड्डे में मुख्य अतिथि के रूप में कवि राज्यवर्धन, रंगप्रेमी विमल शर्मा, नाट्य लेखक डॉक्टर सुधांशु कुमार तथा विनोद कुमार यादव भी सम्मिलित हुए l कवि राज्यवर्धन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक जमाना था जब पुरुष ही स्त्रियों का रोल भी निभाया करते थे पर आज स्थिति एकदम विपरीत हो गई है और अब महिलाएं भी रंगमंच से जुड़ रही है इस रंग अड्डे में ही 18 लड़कियां सम्मिलित हैं जबकि 6 लड़के ही सम्मिलित हैं तो यह एक सुखद स्थिति है l इसका अर्थ यह है कि हिंदी रंगमंच का भविष्य उज्जवल है l उन्होंने प्रमुख रंग का रंग कमी तथा नाटक लेखिका प्रतिभा अग्रवाल उषा गांगुली तथा उमा झुनझुनवाला के माध्यम से बताया कि उन्हीं के संघर्षों का फल है कि आज हमें रंग अड्डा में बंगाल में हिंदी रंगमंच विकास में मुख्य भूमिका निभा रही है l वही लेखक सुधांशु कुमार चक्रवर्ती का कहना है कि इस तरह का रंग गड्ढा एक अच्छा प्रयास है जिससे छात्र भी नाटक और रंगमंच से बड़े तादाद में जुड़ सकेंगे और उनमें नाटक के प्रति रुझान तथा जिजीविषा पैदा होगी l वही रंग प्रेमी विमल शर्मा ने कहा कि लिटिल चैंपियन उमा झुनझुनवाला के निर्देशन में एक नई राह पर चल रहा है जिसमें वह युवा वर्ग को अपने साथ जोड़ रहा है और उनके भविष्य को समृद्ध कर रहा है l विनोद कुमार यादव स्नेहा नोनिया के अभिभावक तथा विद्यार्थी गण इस अड्डे में सम्मिलित हुए l सुरेंद्र वर्मा के नाटक शकुंतला की अंगूठी का अभिनयात्मक पाठ संगीता व्यास, सुधा गौड़,राधा कुमारी ठाकुर, इंतखाब वारसी,रतुल दे,सूरज सिंह ने किया l इस 17 में रंग अड्डे का सफल संचालन ज्योति शाह ने किया l इस कार्यक्रम के मुख्य भूमिका लिटिल थेस्पियन की निर्देशिका एवं प्रसिद्ध रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला रही l उन्होंने इस रंग अड्डा कों कलाकारों के विकास करने का माध्यम बताया है l नाटक व्यक्तित्व का सर्वागिक विकास करता है l वह व्यक्ति कों खोलने का कार्य करहा है l