कोलकाता । भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता शाखा द्वारा सात अक्टूबर 2023 में विषय ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम के परिपेक्ष्य में राष्ट्र निर्माण मे महिलाओं की भूमिका’ पर भारतीय भाषा परिषद के छोटे सभागार में एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। संस्थापक सलाहकार सरोज भंसाली और अंजू सेठिया ने कार्यक्रम की शुरुआत की। अध्यक्ष चंदा गोलछा ने सबका स्वागत किया। काफी महिलाओं ने अपने अपने विचार प्रकट किए। नवकार मंत्र कल्पना बाफना ममता पीचा, कविता सीमा बैद ,उषा बैद, जास्मिन, प्रमिला नाहर, निर्मला बागरेचा, सुनिता सेठिया, पल्लवी सेठिया, रेशम दुग्गड़ आदि ने विचार रखे। सरोज भंसाली ने आत्म साक्षात्कार पर गीत प्रस्तुति की। शब्दाक्षर की राष्ट्रीय मंत्री अनामिका सिंह ने महिलाओं की स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किया। रचनाकार कवयित्री रीमा पांडे ने बेटियों पर गीत की प्रस्तुति दी । सुषमा छाजेड़ ने मुक्ता नैन का परिचय दिया।
आज के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बिड़ला स्कूल डायरेक्टर मुक्ता नैन, भवानीपुर कालेज प्रोफेसर डाक्टर वसुंधरा मिश्र, छपते छपते अखबार और ताजा टीवी डायरेक्टर वरिष्ठ पत्रकार श्री विश्वंभर नेवर रहे । मुक्त नैन ने स्त्री महिलाओं की समस्याओं और राजनीति में 33% की भागीदारी को सार्थक बताया। बंगाल में भी महिलाओं के लिए शौचालय और नर्सिग की व्यवस्था करने का विचार आरक्षण का ही परिणाम है। डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ने अपने वक्तव्य में स्त्रियों की प्रतिभा पर विशेष ध्यान देने को कहा। आरक्षण अभी दूर है। जाति जनगणना के आधार पर अभी उसमें समय लगेगा। स्त्रियां शुरू से ही समाज की स्तंभ रही हैं। विशंभर नेवर ने अपने वक्तव्य द्वारा महिलाओं को संबोधित करते हुए 33 परसेंट की भागीदारी के साथ सरकार और राजनीति पर विशेष वक्तव्य दिया जो महिलाओं के लिए प्रेरणादायी रहा। महिलाओं को अंधविश्वास को छोड़ना होगा और अपने महिला संगठन को प्रमुख धारा में आना होगा। महिला आरक्षण सभी महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर देगी। राजनीति में महिला एक स्वस्थ वातावरण देने में सक्षम है। सुषमा छाजेड़ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। भारत जैन महामंडल की अंजू सेठिया ने कार्यक्रम संचालन और धन्यवाद ज्ञापन दिया । कार्यक्रम के पश्चात चाय नाश्ते का सुंदर प्रबंध किया गया ।
राष्ट्र निर्माण मे महिलाओं की भूमिका और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर परिचर्चा
भवानीपुर कॉलेज में जल से जीवन’ अभियान
कोलकाता । कहा गया है कि हज़ारों लोग प्रेम के बिना जीवित रह सकते हैं लेकिन पानी के बिना एक भी जीवित नहीं रह सकता। जल संरक्षण के इस उद्देश्य के साथ, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज की एनएसएस इकाई हर साल पानी बचाने और उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के लिए ‘जल से जीवन’ अभियान का एक नया अध्याय आयोजित करती है। इस वर्ष छात्र स्वयंसेवकों ने पेशेवर प्लंबरों के साथ पूरे कोलकाता में विभिन्न स्थानों के निवासियों का दौरा किया और लीक होने वाले नलों को रोकने के लिए मुफ्त सेवा की पेशकश की और स्वच्छ पानी को बचाने, भंडारण और उपभोग करने और डेंगू जैसी बीमारियों से सुरक्षित रहने के बारे में जानकारी दी । मलेरिया.शीतज्वर, विषमज्वर, जूड़ी आदि रोगों को रोकने के उपायों पर जोर दिया। इस अभियान में 5 टीमें थीं, जिनमें 2 स्वयंसेवकों के साथ-साथ एक प्लंबर भी शामिल था, जो उत्तर और दक्षिण कोलकाता दोनों के विभिन्न स्थानों पर गए और लगातार खराब मौसम की स्थिति के बावजूद 1117 घरों को कवर किया। छात्र निम्नलिखित क्षेत्रों में गए:पहले दिन (11.09.2023) – श्यामबाजार, महात्मा गांधी रोड, गिरीश पार्क, भवानीपुर, टॉलीगंज, कालीघाट – 170 आवासों का दौरा किया।
दूसरे दिन (12.09.2023) – बेलगछिया, दमदम, उल्टाडांगा, बेलेघाटा, हावड़ा – 240 आवासों का दौरा किया। तीसरे दिन (13.09.2023) – सियालदह, टॉप्सिया, जतिन दास पार्क, पार्क सर्कस, रवीन्द्र सरोवर – 360 आवासों का दौरा किया ।
चौथे दिन (27.09.2023) – रवीन्द्र सरोबार, रासबिहारी एवेन्यू, क्वेस्ट मॉल एरिया, लैंसडाउन एरिया, साउथ सिटी मॉल एरिया – 347 आवासों का दौरा किया । जल से जीवन परियोजना 2019 में 1000 घरों के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी और स्वयंसेवकों ने लक्ष्य का 40% हासिल किया और अगले सेट में शेष 600 घरों को हासिल करने का अनुमान लगाया। पिछले साल स्वयंसेवकों ने कुल 850 घरों का दौरा किया और इस साल गर्व से हमने अपने लक्ष्यों को पार कर लिया है और कुल 1117 घरों को कवर किया है।
इस पहल का उद्देश्य युवाओं में जिम्मेदारी की भावना पैदा करना और लोगों को पानी के महत्व और इसे बचाने के बारे में जागरूक करना है। सभी स्वयंसेवकों ने पिछले दिनों के अपने अनुभवों का आनंद लिया। प्रोफेसर दिलीप शाह, छात्र मामलों के डीन, प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी और कॉलेज के पूरे प्रबंधन को पूरे आयोजन में उनके अपार योगदान के कारण यह अभियान सक्रिय रूप से कार्यरत है। रिपोर्टिंग की कृपा सहल ने। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
भवानीपुर कॉलेज द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इवेंट मैनेजमेंट कार्यशाला
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने इवेंट मैनेजमेंट कार्यशाला का आयोजन 1 अक्टूबर से 3 अक्टूबर 2023 तक जुबली हॉल में किया वैसे तो कॉलेज में वर्ष भर दो सौ से अधिक इवेंट्स का आयोजन किया जाता है लेकिन एक उद्योग के रूप में इवेंट मैनेजमेंट कार्यशाला का प्रथम बार स्नातक छात्रों के लिए इवेंट मैनेजमेंट उद्योग क्या है इस पर विचार रखे गए। तीन दिवसीय कार्यशाला में 6 सत्र शामिल थे, जिसमें प्रत्येक दिन 2 सत्र सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और दोपहर 2.30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किए गए। कार्यशाला बहुत फायदेमंद साबित हुई क्योंकि इसने कॉलेज को इच्छुक स्वयंसेवक प्रदान किए, जो अब कॉलेज के विभिन्न कार्यक्रमों में स्वयंसेवक बनने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित होंगे। कार्यशाला के पहले दिन के पहले सत्र में, 300 से अधिक छात्र छात्राओं ने सुबह 9 बजे पंजीकरण करवाया और जुबली हॉल में प्रवेश करने के लिए एकत्र हुए। कार्यक्रम की शुरुआत गौरव बाजोरिया द्वारा छात्रों को इवेंट मैनेजमेंट की दुनिया से परिचित कराने के साथ हुई। पहले दिन के दूसरे भाग में दिन की शुरुआत 2.30 बजे हुई, जहां छात्रों को गौरव सर द्वारा 4 टीमों में बांटा गया और उन्हें विचार-विमर्श से लेकर उमंग महोत्सव तक का कार्यान्वयन किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन इसे प्रस्तुत करने का काम सौंपा गया था। 4 टीमों में टीम 1 (सेमेस्टर 5 के छात्र जो पिछले साल के उमंग में स्वयंसेवक थे), टीम 2 (सेमेस्टर 3 के छात्र जो पिछले साल के उमंग में स्वयंसेवक थे), टीम 3 (सेमेस्टर 1 के छात्र जो इस विचार में नए हैं) शामिल थे। उमंग के), और टीम 4 (सेमेस्टर 3 और 5 के छात्र जो स्वयंसेवक नहीं थे पिछले वर्ष के उमंग में)।दूसरे दिन पहली छमाही में, छात्र उमंग के लिए अपनी अवधारणा प्रस्तुत करने के लिए तैयार होकर कॉलेज में आए और उनका मूल्यांकन किया गया । तीसरे दिन, पहले सत्र में सम्मानित पैनलिस्टों के साथ एक इंटरैक्टिव सेमिनार आयोजित किया गया। काइल मुखर्जी (फ्रेंड्स ऑफ शिवा प्राइवेट लिमिटेड), विक्की तुलस्यान (मिराज नेटवर्क), निधि पोद्दार (एमराल्ड इवेंट्स), गौतम जैन (रियल रील प्राइवेट लिमिटेड), प्रेरणा खुल्लर (इवेंटज़िनस्पायर्ड) और सरनजीत सिंह (द सॉल्यूशनिस्ट) जिन्होंने इस कार्यक्रम का संचालन किया। अंततः कार्यशाला छात्रों से यह पूछे जाने के साथ समाप्त हुई कि वे भविष्य के आयोजनों में किन विभागों में शामिल होना चाहेंगे। 3 दिवसीय कार्यशाला ने टीम वर्क की मजबूत भावना पैदा करने में मदद की क्योंकि छात्रों ने एक साथ काम करना सीखा।रिपोर्टिंग की अनिकेत दासगुप्ता ने। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
शुभजिता हिन्दी दिवस विशेषांक
शुभजिता हिन्दी दिवस विशेषांक…युवाओं की कलम से सजा…अन्य स्थायी स्तम्भ आपके समक्ष
ग्लोबल टीचर अवॉर्ड 2023 में बंगाल के दीप नारायण नायक नामांकित
बर्दवान /कोलकाता । पश्चिम बंगाल के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक दीप नारायण नायक और आंध्र प्रदेश से अंग्रेजी के शिक्षक हरि कृष्ण पतचारू के नाम को ‘वैश्विक शिक्षक पुरस्कार 2023’ के लिए शीर्ष 50 लोगों की सूची में शामिल किये गए हैं। दीप नारायण नायक पश्चिम बंगाल एक सरकारी शिक्षक हैं। पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया गांव में तिलका माझी आदिबाशी फ्री प्राइमरी स्कूल में वह पढ़ाते हैं। उन्हें ‘रास्तार मास्टर’ के नाम से जाना जाता है। रास्तार मास्टर का मतलब है सड़कों का शिक्षक। इस 34 वर्षीय शिक्षक ने इलाके के बच्चों को शिक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत की । कोरोना लॉकडाउन में जब दो साल तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, ऑनलाइन लाइन क्लासेस लगीं तो यहां के बच्चों की पढ़ाई छूट गई। आदिवासी गांव में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों के पास मोबाइल नहीं था। आखिर दीप नारायण ने पहल की और महामारी लॉकडाउन के दौरान बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव के घरों की दीवारों पर ब्लैकबोर्ड बना डाले । सड़कों को क्लासरूम में बदल दिया । देश भर के स्कूलों के बंद होने के बाद 45 दिनों बाद मई 2020 में नायक ने नीले आसमान के नीचे गांव के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। 6 बच्चों के साथ शुरू हुई क्लास में छात्र बढ़ते गए । अब पश्चिम बर्दवान 14 सड़क अध्ययन केंद्रों में 2,000 छात्र पढ़ रहे हैं। दीप नारायण ने बताया कि 2018 में राज्य सरकार ने उन्हें तिलका माजी आदिवासी फ्री प्राइमरी में शिक्षक नियुक्त किया था। तब से ही उन्होंने बच्चों को फ्री ट्यूशन देना शुरू कर दिया था। हालांकि, मार्च 2020 में स्कूलों के बंद होने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि उनके अधिकांश छात्र डिजिटल उपकरणों का खर्च वहन नहीं कर सकते थे और इसलिए दिन गांव में घूमते हुए या मवेशियों को चराते हुए बिताते थे। उन्होंने बच्चों का भविष्य बचाने के लिए सड़क पर क्लासेस शुरू करने का फैसला लिया । दीप नारायण ने पेड़ों के नीचे और सड़क के कोनों पर अनौपचारिक कक्षाएं आयोजित करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे बच्चों की संख्या बढ़ती गई, उन्होंने गांव के घरों की मिट्टी की दीवारों को ब्लैकबोर्ड के रूप में उपयोग करने का फैसला किया और किताबें और मध्याह्न भोजन प्रदान करना शुरू कर दिया । उनकी पहल में उनकी पत्नी झूमा पात्रा ने भी साथ दिया। झूमा पश्चिम बर्धमान के रानीगंज गर्ल्स कॉलेज में बांग्ला की प्रोफेसर हैं। दीप की पहल में कुछ और लोग जुड़े और उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया । दीप नारायण कहते हैं कि महामारी के दौरान भी उन्हें बिना काम किए सरकार से मासिक वेतन मिल रहा था लेकिन उन्हें बच्चों की फिक्र थी । मन बच्चों को लेकर अशांत था। जिन बच्चों को स्कूल में पढ़ाकर और ट्यूशन देकर उन्होंने शिक्षित किया, वह लॉकडाउन में सब भूल सकते थे। बच्चे पूरा दिन मवेशियों को चराते और गांव में घूमते फिरते थे। इसलिए उन्होंने बच्चों को सड़क पर ही पढ़ाने की ठानी। दीप नारायण नायक ने इस पहल को और विस्तारित किया और पश्चिम बर्धमान के 14 गांवों में अपने शिक्षण मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करन रहे हैं। वह बांकुड़ा, पुरुलिया और मिदनापुर जिलों में भी इस तरह के केंद्र शुरू करने का विचार कर रहे हैं।
भारत की प्रथम मूक -बधिर अधिवक्ता बनीं सारा सनी, सीजेआई के समक्ष पेश किया मामला
नयी दिल्ली । पहली बार, एक श्रवण-बाधित वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष अपने मामले पर बहस की, जिससे अधिक शारीरिक रूप से अक्षम वकीलों के लिए अपने मामलों की रक्षा करने का मार्ग प्रशस्त हो गया।सारा सनी ने शुक्रवार को एक भारतीय सांकेतिक भाषा दुभाषिया की मदद से अपना मामला पेश किया। वरिष्ठ वकील संचिता ऐन ने मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ से गुहार लगाई कि सारा को एक दुभाषिया के साथ अपने मामले पर बहस करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने तुरंत अपनी सहमति दे दी । यह ऐतिहासिक क्षण नहीं आया होगा क्योंकि आभासी सुनवाई के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार नियंत्रण कक्ष सारा और उसके दुभाषिया को समायोजित करने में झिझक रहा था। सीजेआई की मंजूरी के साथ, नियंत्रण कक्ष में सारा, जो बेंगलुरु में रहती हैं, और उनके दुभाषिया सौरव रॉयचौधरी भी वस्तुतः उपस्थित हुए। जैसे ही सारा की बारी आई, उसका दुभाषिया आगे आया और उसके और दुनिया के बीच एक पुल के रूप में काम किया। इस प्रक्रिया में, उन्हें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से प्रशंसा मिली, जिन्होंने कहा कि जिस गति से दुभाषिया सांकेतिक भाषा में अनुवाद कर रहा है वह अद्भुत है। सारा के दृढ़ संकल्प ने और अधिक बाधाओं को तोड़ दिया है। सीजेआई ने, जब पिछले साल नवंबर में अपने पद की शपथ ली थी, तो कहा था, “शब्द नहीं, मेरा काम बोलेगा।” अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, उन्होंने न्यायमूर्ति एसआर भट्ट की अध्यक्षता में “एक्सेसिबिलिटी पर एससी समिति” की स्थापना की। इस समिति का मिशन सुप्रीम कोर्ट परिसर और इसके संचालन की व्यापक पहुंच ऑडिट करना है। इसमें सुप्रीम कोर्ट आने वाले विकलांग व्यक्तियों तक पहुंचना, उनकी प्रतिक्रिया मांगना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की प्रकृति और सीमा का आकलन करना शामिल है। इस पहल का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय सभी के लिए सुलभ हो और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के साथ बातचीत में दिव्यांग व्यक्तियों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उनकी गहरी समझ हासिल करना है।
बीटेक युवा किसान ने काला नमक की खेती कर पेश की नजीर
बलिया । कम्प्यूटर साइंस में बीटेक युवा किसान ने खेती में नए प्रयोग से सबको चौंका दिया है। जिले में पहली बार बड़े पैमाने पर काला नमक धान उगाकर उन्होंने दूसरों के लिए नजीर पेश की है। जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित बसंतपुर गांव निवासी दुष्यंत सिंह ने 2017 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया। कई प्राइवेट कंपनियों में जॉब भी किया, लेकिन इनका मन खेती-किसानी की तरफ आकर्षित हो रहा था। आखिरकार 2018 में सब कुछ छोड़कर गांव लौट आये । प्राकृतिक कृषि प्रेमी सुभाष पालेकर और आनंद से परामर्श लेकर प्रयोग के तौर पर धान की चर्चित प्रजाति काला नमक की खेती किया। यह फसल नई थी, लिहाजा पहले वर्ष बहुत कम मात्रा में काला नमक चावल की खेती किया। लेकिन दुष्यंत सिंह को जब लगा कि उनका यह प्रयोग सफल है तो इस वर्ष 60 बीघे में काला नमक खेती की। इस बार फसल काफी अच्छी है। युवा किसान दुष्यंत सिंह की मेहनत को देख अन्य युवा भी खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
फसल में करते हैं जीवामृत का इस्तेमाल
किसान दुष्यंत ने बताया कि इस फसल को उगाने में किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसको उगाने के लिए जीवामृत तैयार किया जाता है जो गाय के मूत्र, गोबर, बेसन और गुड़ से तैयार होता है। कीटनाशक के लिए जमीन के दो फीट नीचे की काली मिट्टी और जल का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि काला नमक एक सुगंधित चावल है। यह काफी स्वास्थ्यवर्धक भी है जो इस जिले के लिए बहुत ही खास है। क्योंकि जनपद में इसकी खेती व्यापक पैमाने पर नहीं होती।
घर बैठे धान बेचते हैं युवा किसान दुष्यंत
युवा किसान दुष्यंत बताते हैं कि इस बार 60 बीघा में काला नमक धान की खेती की है। एक बीघा की खेती में लगभग चार से पांच हजार तक की लागत आयी है। इससे प्रति बीघा तकरीबन 60 हजार तक का फायदा होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जैसे ही मेरा चावल तैयार होगा, इसके लिए ऑर्डर मिलने शुरू हो जाएंगे। ऑर्डर आने के बाद मैं ट्रकों के जरिए भेज दूंगा। कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ स्टार्टअप्स से ऑर्डर मिलने भी लगे हैं। बताया कि ऑर्डर प्राप्त करने के लिए मैं इंटरनेट का भी सहारा लेता हूं। ऑनलाइन जाकर ऑर्गेनिक स्टार्टअप्स के नम्बर निकालकर सम्पर्क करता हूं। जिसका मुझे काफी फायदा मिलता है। यही नहीं प्राकृतिक खेती के लिए देश भर में मशहूर सुभाष पालेकर के नेटवर्क से जुड़े लोगों के भी सम्पर्क में हूं। दुष्यंत ने बताया कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी पिछले साल अपने खेत में उगाई काला नमक चावल भेंट स्वरूप दिया है। उन्होंने काफी सराहना की जो मेरे लिए प्रेरणा है।
इस तरह सप्ताह भर से ज्यादा चलेंगी फ्रिज में रखी सब्जियां
हर रोज सब्जी मार्केट से खरीदकर लाने में काफी समय खर्च होता है। लेकिन उससे भी ज्यादा मेहनत वाला काम है सब्जी को फ्रिज में स्टोर करके रखना। सब्जियों को लंबे समय तक फ्रेश बनाकर रखना जरूरी है नहीं तो सब्जियों के पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं लेकिन फ्रिज में अगर आप सब्जियों को डायरेक्ट रख देंगी तो भी उनके खराब हो जाने का डर रहता है। इसलिए स्टोरेज टिप्स की मदद से फ्रिज में सब्जियों को हफ्तेभर से ज्यादा समय तक फ्रेश रखा जा सकता है।
सब्जियों को साफ करके रखें
सब्जियों को फ्रिज में रखने से पहले अच्छी तरह से साफ करके सुखा लें। इससे ना केवल सब्जियों पर जमा बैक्टीरिया साफ हो जाएंगे। बल्कि इन बैक्टीरिया की वजह से सब्जियों के खराब होने का डर भी कम हो जाता है।
एयरटाइट कंटेनर का करें इस्तेमाल
हरी धनिया और हरे प्याज को धोकर अच्छी तरह से एयरटाइट कंटेनर में भरकर रख दें। साथ ही ध्यान रखें कि इस कंटेनर में हवा निकलने की भी थोड़ी जगह हो।
पेपर टॉवेल में लपेटकर रखें
बींस, ब्रोकली जैसी सब्जियों को पेपर टॉवेल में लपेटकर रखने से इनमे मॉइश्चर नहीं पैदा होता और ये फ्रिज में फ्रेश बनी रहती हैं। इसके अलावा पालक और पत्तेदार सब्जियों को पेपर टॉवेल में लपेटकर रखें।
लौकी-कद्दू ऐसे करें स्टोर
लौकी-कद्दू जैसी सब्जियों को स्टोर करने के लिए फ्रिज के सबसे निचले डार्क साइड वाले हिस्से को इस्तेमाल करें। जिससे इन्हें ज्यादा ठंड ना लगे और ये खराब ना होकर फ्रेश बनी रहें।
सब्जियों को काटकर फ्रिज में ना रखें
गाजर, आलू जैसी जड़ वाली सब्जियों को फ्रिज में काटकर ना रखें। इससे वो जल्दी खराब हो जाती है। आलू को फ्रिज में रखने की गलती ना करें।
जांच करते रहें सब्जियां
सब्जियों को पॉलीबैग या एयरटाइट कंटेनर में करके रखे हैं तो इन्हें एक दो दिन के अंतराल पर चेक करते रहें। अगर इनमे मॉइश्चर इकट्ठा हो रहा है तो बाहर निकालकर अच्छी तरह से सुखाकर फिर से रख दें। इससे सब्जियां हफ्तेभर से ज्यादा समय तक फ्रेश बनी रहेंगी।
इन सब्जियों को ना करें फ्रिज में स्टोर
आलू, प्याज, लहसुन, अदरक को फ्रिज में स्टोर करके ना रखें। ये सब्जियां मॉइश्चर की वजह से खराब हो जाती हैं।
जन्म प्रमाणपत्र बना एकल दस्तावेज
नयी दिल्ली । देश भर में 1 अक्टूबर 2023 से जन्म प्रमाणपत्र यानी जन्म प्रमाणपत्र यानी बर्थ सर्टिफिकेट सिंगल डॉक्यूमेंट यानी एकल दस्तावेज बन चुका है। ऐसे में आपके कई कामों के लिए बर्थ सर्टिफिकेट का होना जरूरी हो गया है। ज्यादातर जगहों पर आपको किसी भी दूसरे दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आपके पास बर्थ सर्टिफिकेट होगा तो आप आधार कार्ड से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस जैसे कई दस्तावेज भी आसानी से बनवा सकेंगे। इसके अलावा कई अन्य कामों के लिए भी बर्थ सर्टिफिकेट एक जरूरी दस्तावेज बन चुका है।
नहीं होगी किसी दूसरे दस्तावेज की जरूरत
देश में अभी तक आधार कार्ड को एक जरूरी दस्तावेज माना जाता था, जिसके बिना किसी काम को करवाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, अब आधार कार्ड से भी ज्यादा जरूरी दस्तावेज बर्थ सर्टिफिकेट बन चुका है। राष्ट्रपति से जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 2023 को मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद बर्थ सर्टिफिकेट भी एक जरूरी दस्तावेज बन चुका है। इसका इस्तेमाल आधार कार्ड को बनवाने के लिए भी जरूरी हो गया है। आधार कार्ड बनवाने , वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने शादी के पंजीकरण , शिक्षण संस्थान में प्रवेश और सरकारी नौकरी पाने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर पर मान्य हो गया है।
जन्म प्रमाणपत्र क्या है?
जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे के जन्म स्थान जन्मतिथि ,लिंग, माता-पिता का नाम आदि अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जाती है। इस दस्तावेज के जरिए बच्चे की पहचान के साथ माता-पिता की डिटेल्स भी मिलती है, जो उम्रभर काम आने वाला दस्तावेज होता है। अब आधार कार्ड होने पर भी जन्म प्रमाणपत्र एक जरूरी दस्तावेज हो गया है।
ग्लोबल इंडियन अवार्ड पाने वाली पहली महिला बनीं सुधा मूर्ति
टोरंटो । इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति की पत्नी प्रसिद्ध लेखिका सुधा मूर्ति को इंडो-कैनेडियन समारोह में कनाडा इंडिया फाउंडेशन द्वारा ‘ग्लोबल इंडियन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया । ग्लोबल इंडियन अवार्ड हर साल एक प्रमुख भारतीय को दिया जाता है जिसने अपने चुने हुए क्षेत्र में एक प्रमुख छाप छोड़ी है. अवार्ड की राशि 50,000 डॉलर है । कनाडा इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष सतीश ठक्कर ने कहा, ‘हमें सुधा मूर्ति को ग्लोबल इंडियन अवार्ड प्रदान करते हुए बहुत खुशी हो रही है । उन्होंने अपना पूरा करियर आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके द्वारा चुने गए क्षेत्र में सफलता पाने का मार्ग प्रशस्त करने में बिताया है और वह समाज को कुछ वापस देने के लिए उत्साहित हैं ।’ भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा से पुरस्कार स्वीकार करते हुए सुधा मूर्ति ने कहा, ‘आपके देश से यह पुरस्कार पाना मेरे लिए सम्मान की बात है । ‘
इस पुरस्कार के लिए उन्हें चुनने के लिए कनाडा इंडिया फाउंडेशन (सीआईएफ) को धन्यवाद देते हुए मूर्ति ने कहा, ‘सीआईएफ महाभारत में कृष्ण की तरह है । कृष्ण देवकी के भी पुत्र हैं और यशोदा के भी. देवकी उनको जन्म देने वाली मां थीं और यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया. आप भारत में पैदा हुए हैं लेकिन यहीं बसे हैं, यह यशोदा है और आपकी माता भारत है ।’ दोनों देशों के बीच एक सेतु के रूप में भारत-कनाडाई प्रवासियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘आप एक अलग भूमि में भारतीय संस्कृति के वाहक हैं । कृपया इसे जारी रखें ।’ जैसा कि उनके पति को भी 2014 में यही पुरस्कार दिया गया था, सुधा मूर्ति ने हंसी के बीच कहा, ‘इस पुरस्कार के बारे में एक मजेदार बात है क्योंकि नारायण मूर्ति को भी यह पुरस्कार 2014 में मिला था और मुझे यह 2023 में मिला है. इसलिए पुरस्कार प्राप्त करने वाले हम पहले जोड़े हैं ।’
उन्होंने पुरस्कार राशि द फील्ड इंस्टीट्यूट (टोरंटो विश्वविद्यालय) को दान कर दी जो गणित और कई विषयों में सहयोग, नवाचार और सीखने को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है । टोरंटो उत्सव कार्यक्रम में सुधा मूर्ति के साथ उनके दामाद और ब्रिटिश प्रधान मंत्री ऋषि सुनक के माता-पिता भी थे ।




