Monday, March 23, 2026
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60 लीटर से 36 लाख लीटर तक का सफर दूध ब्रांड पारस मिल्क

नयी दिल्ली । पारस दूध एक विख्यात दूध ब्रांड है।  कंपनी हर दिन करीब 36 लाख लीटर दूध बेच देती है। इसकी शुरुआत मात्र 60 लीटर दूध प्रतिदिन की बिक्री से हुई थी और आज यह कंपनी 36 लाख लीटर दूध का उत्पादन रोजाना करती है। दिल्ली-एनसीआर में इसका सीधा मुकाबला अमूल के साथ है। इसके संस्थापक वेद राम नागर है, जिनका 2005 में निधन हो गया था । उन्होंने 27 साल की उम्र में एक आम दूध विक्रेता तौर पर काम शुरू किया था। तब वह 50-60 लीटर प्रतिदिन दूध बेचते थे। 1933 में जन्मे वेद राम नागर ने पहली कंपनी 1980 में स्थापित की. इसके बाद 1984 में उन्होंने दूध व उससे बने उत्पाद बनाने वाली कंपनी लगाई। 1896 में वी.आर.एस. फूड नाम से एक कंपनी स्थापित की गयी। पहला मिल्क प्लांट 1987 में गाजियाबाद के साहिबाबाद में स्थापित किया गया। इसके बाद कंपनी ने लगातार प्लांट लगाने शुरू किए। 1992 में गुलावठी में एक और बड़ा मिल्क प्लांट लगाया।  2004 में कंपनी दिल्ली-एनसीआर के बाहर निकल गई और ग्वालियर में मिल्क प्लांट लगाया।

2005 में बदला नाम
2005 में उनका देहांत हो गया. उनके निधन के बाद 2008 में उनकी कंपनी का नाम बदलकर वेदराम एंड संस प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। इसका प्रमुख ब्रांड पारस है जिसे दिल्ली-एनसीआर में काफी ख्याति प्राप्त है। यह हर दिन आज कंपनी 36 लाख लीटर दूध बेचती है। इसके अलावा कंपनी अब डेयरी के अलावा भी कई व्यापार कर रही है। वेदराम नागर के बेटों ने बिजनेस का विस्तार किया। अब कंपनी हेल्थ केयर, रीयल एस्टेट, शिक्षा व दवा उत्पादन समेत कई क्षेत्रों में काम कर रही है। यूपी के बागपत से एक साधारण दूध विक्रेता के रूप में शुरू हुए वेदराम नागर का कारवां आज देश के कई इलाकों में लाखों से लोगों को शामिल कर चुका है। वेद राम चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से समाजसेवा के क्षेत्र में अनेक कार्य कर रहे हैं। कंपनी से हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और यूपी के 5400 गांव जुड़े हुए हैं। यहां के लाखों किसानों को पशुपालन व खेती से जुड़े सामान खरीदने के लिए भी कंपनी मदद करती है।

यूपी में किन्नरों को मिलेगी पेंशन, 12 हजार रुपये मिलेगा सालाना

खनऊ । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बीते विधानसभा चुनावों के पहले किन्नर (ट्रांसजेंडर) समुदाय के जीवन को बेहतर बनाने की सुध लेना शुरू किया था। इसके तहत पहले तो ‘उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड’ (ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड ) का गठन कर सोनम किन्नर को बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया और अब प्रदेश में किन्नरों की दशा सुधारने के लिए किन्नरों को जीवन निर्वाह भत्ता देने की तैयारी की जा रही है। सरकार के अधिकारियों के अनुसार लोकसभा चुनावों के पहले योगी सरकार एक लाख से अधिक किन्नरों को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन देने की तैयारी कर रही है। इस पेंशन का भुगतान वृद्धावस्था पेंशन की तरह ही तिमाही किस्तों के रुप मेन किन्नरों के आधार लिंक बैंक खातों में किया जाएगा। इसके लिए समाज कल्याण विभाग प्रदेश में किन्नरों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवा रहा है।

समाज कल्याण विभाग के अफसरों के अनुसार, देश और प्रदेश में किन्नर समुदाय अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्षरत है। समाज द्वारा हीन भावना से देखे जाने वाले किन्नर अपने अच्छे कामों से लोगों की अपने प्रति दकियानूसी सोच को धीरे-धीरे बदल रहे हैं। आज बहुत से किन्नरों को उनके लिंग के आधार पर नहीं बल्कि उनके काम के आधार पर जाना जाता है। सूबे की सरकार ने भी किन्नर समुदाय के जीवन को बेहतर करने की कई पहल ही है, जिसका लाभ किन्नर समुदाय को मिला रहा है। इसी क्रम में अब योगी सरकार ने प्रदेश में रह रहे 1.6 लाख किन्नरों के जीवन निर्वाह भत्ता देने का फैसला किया है। इन किन्नरों को पेंशन, यात्रा सुविधा के साथ अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मुहैया कराने के लिए समाज कल्याण विभाग उन्हें चिह्नित कर विभागीय पोर्टल पर उनका रजिस्ट्रेशन करवा रहा है।

विभागीय पोर्टल पर अब तक प्रदेश में 1070 किन्नरों को रजिस्ट्रेशन कराया जा चुका है, इनमें सबसे ज्यादा 110 किन्नर गौतमबुद्धनगर के हैं और 64 किन्नर लखनऊ के हैं। जिन 1070 किन्नरों को रजिस्ट्रेशन हो गया है, इनमें 514 किन्नरों को विभाग की ओर से अधिकृत प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। विभागीय अफसरों का कहना है कि सूबे में सभी 1.36 किन्नरों का रजिस्ट्रेशन होने बाद उनका आयुष्मान कार्ड भी बनवाया जाएगा, ताकि उन्हे अस्पतालों में फ्री इलाज कराने की सुविधा भी मिल सके।

सूबे के किन्नरों को पेंशन देने के पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ ने 9 जून, 2021 को उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड का गठन किया था। सीएम योगी का यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक दृष्टि से बल्कि, सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था। बोर्ड के गठन के साथ ही सरकार ने समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई सोनम चिश्ती को तब उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बोर्ड का उपाध्यक्ष बनने के बाद सोनम चिश्ती ने किन्नरों के जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने की मांग की थी और सीएम योगी से मिलकर उन्होंने किन्नरों को पेंशन के रूप में हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का आग्रह किया था।इसके अलावा उन्होंने किन्नरों का अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने तथा किन्नरों की पढ़ाई और उनके आवासों की भी व्यवस्था सरकार की ओर से कराए जाने की मांग की थी। सोनम किन्नर की मांगों में से किन्नरों को पेंशन मुहैया कराने पर कवायद अब शुरू होने वाली है।

 उत्तर बंगाल के लिए अलग बनेगा स्कूल सेवा आयोग और जिला स्कूल बोर्ड 

कोलकाता ।  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल की पहाड़ियों के लिए अलग स्कूल सेवा आयोग शुरू करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री का शुक्रवार को कालिम्पोंग में सरकारी सेवा वितरण कार्यक्रम था। उस मंच से, ममता ने पहाड़ियों के लिए अलग से स्कूल सेवा आयोग शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसके अलावा दार्जिलिंग, कालिम्पोंग के लिए अलग जिला स्कूल बोर्ड का गठन किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए शुक्रवार को एक तदर्थ समिति गठित की जायेगी।

ममता ने शुक्रवार को कहा, ””पहाड़ियों के लिए रीजनल स्कूल सर्विस कमीशन फॉर हिल्स का गठन किया जाएगा। वे ही दार्जिलिंग, कलिम्पोंग के 146 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 590 रिक्त शिक्षण पदों पर नियुक्ति करेंगे।”” मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहाड़ों से और भी घोषणाएं कीं।

एक अधिकारी ने बताया, “इसे विकेंद्रीकरण के दृष्टिकोण से देखना बेहतर है। राज्य सरकार ने भी यह निर्णय उसी दृष्टि से लिया है। ”

ममता ने कहा, “कुछ लोग हर पांच साल में एक बार सक्रिय होते हैं और पहाड़ को परेशान करने की कोशिश करते हैं।” उद्योगपति उथल-पुथल में निवेश क्यों करेंगे? मैं आपसे कह रही हूं, पहाड़ों को शांत रखें, मैं विकास के लिए जिम्मेदार हूं। उन्होंने यह भी कहा, ””मतदान के दौरान कई लोग आते हैं, बहुत लालच दिखाते हैं। खाते में 15 लाख देने का वादा किया लेकिन कुछ नहीं होता। हम जानते हैं कि अपनी बात कैसे रखनी है।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पहाड़ों में सूचना प्रौद्योगिकी हब बनाया जायेगा। वहां 24 हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा।

कोलकाता भारत का सबसे सुरक्षित शहर: एनसीआरबी रिपोर्ट

कोलकाता । राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलकाता लगातार तीसरे साल भारत में सबसे सुरक्षित शहर बनकर उभरा है। महानगरों में प्रति लाख आबादी पर दर्ज संज्ञेय अपराध के सबसे कम मामले कोलकाता में आए। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता में 2022 में प्रति लाख लोगों पर संज्ञेय अपराध के 86.5 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद पुणे (280.7) और हैदराबाद (299.2) का स्थान रहा।
संज्ञेय अपराध वे होते हैं जिनके लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और एसएलएल (विशेष और स्थानीय कानून) की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में 2021 में प्रति लाख लोगों पर संज्ञेय अपराध के 103.4 मामले दर्ज किए गए थे, जो इस साल घटकर 86.5 हो गए। 2020 में यह आंकड़ा 129.5 था।
वर्ष 2021 में, पुणे और हैदराबाद में प्रति लाख जनसंख्या पर क्रमश 256.8 और 259.9 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए थे। बीस लाख से अधिक आबादी वाले 19 शहरों के बीच तुलना के बाद रैंकिंग जारी की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, कोलकाता में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई, क्योंकि 2021 में मामलों की संख्या 1,783 थी जो 2022 में बढ़कर 1,890 हो गई। कोलकाता में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर प्रति लाख जनसंख्या पर 27.1 थी, जो कोयंबटूर की 12.9 और चेन्नई की 17.1 से अधिक थी।
इस साल, कोलकाता में हिंसक अपराधों में भी गिरावट देखी गई और हत्या के केवल 34 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल के 45 मामलों से कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में 2022 में बलात्कार के 11 मामले दर्ज किए गए, इतनी ही संख्या 2021 में दर्ज की गई। एनसीआरबी की ‘भारत में अपराध 2022’ रिपोर्ट 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा केंद्रीय एजेंसियों से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है।

जनरल रावत स्टेडियम’ के नाम से जाना जाएगा बारामूला का झेलम स्टेडियम

श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार को बारामूला में झेलम स्टेडियम जांबाजपोरा का नाम बदलकर दिवंगत पूर्व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के नाम पर रखने की मंजूरी प्रदान की है।एक सरकारी आदेश के अनुसार, बारामूला के जांबाजपोरा स्थित झेलम स्टेडियम का नाम बदलकर जनरल बिपिन रावत स्टेडियम करने की मंजूरी प्रदान की जाती है।
देश के पहले सीडीएस जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों को लेकर जा रही हेलीकॉप्टर आठ दिसंबर, 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई जिससे उनकी मौत हो गई। कश्मीर में जनरल रावत का पिछला कार्यकाल बारामूला स्थित 19 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग का था। इस कार्यकाल के दौरान ही जनरल रावत बारामूला शहर में कई लोगों के चहेते बन गए थे। उन्होंने 2012 में 19 इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली थी। सरकारी आदेश में कहा गया कि युवा सेवा एवं खेल विभाग और बारामूला के उपायुक्त बदलाव के लिए अपने रिकॉर्ड में संशोधन सहित तत्काल आवश्यक कदम उठाएंगे।कश्मीर के संभागीय आयुक्त को सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि स्टेडियम के नामकरण के संबंध में उचित कार्यक्रम का आयोजन किया जाए।(

कलकत्ता हाईकोर्ट की किशोर लड़कियों पर टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट को ऐतराज़

नयी दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले कलकत्ता हाईकोर्ट की एक पीठ द्वारा किशोरवय की लड़कियों पर की गई एक टिप्पणी को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि जजों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे उनके आदेशों और निर्णयों के जरिये ‘उपदेश’ दें।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को करते हुए 18 अक्टूबर के कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले, जिसमें कहा गया था कि हर किशोर लड़की को ‘यौन इच्छाओं को काबू में रखना चाहिए’ और ‘अपनी देह की शुचिता की रक्षा करनी चाहिए’ पर आंशिक रूप से रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी तब की थी जब उसने एक नाबालिग के बलात्कार के दोषी ठहराए गए युवक को बरी किया था। लड़के ने बताया था कि वे उस लड़की के साथ रिश्ते में थे और यह सहमति से बनाया गया संबंध था. सुनवाई के दौरान जस्टिस चित्तरंजन दास और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की पीठ ने कहा, ‘किशोर लड़कियों को दो मिनट के सुख के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। किशोर लड़कों को युवा लड़कियों और महिलाओं और उनकी गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि ‘समाज की नजर में उसकी (किशोरी) इज़्ज़त नहीं होती जब वह मुश्किल से दो मिनट के यौन सुख के लिए तैयार हो जाती है.। हाईकोर्ट की राय को अस्वीकार करते हुए और फैसले में किशोरों के लिए ‘आदर्श व्यवहार’ से संबंधित हिस्से पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस. ओका और पंकज मित्तल की पीठ ने विवादित टिप्पणियों को ‘अत्यधिक निंदनीय और पूरी तरह से अनुचित’ कहा।
पीठ द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की गई कार्यवाही में कहा गया, ‘न्यायाधीशों से अपने व्यक्तिगत विचार जाहिर करने या उपदेश देने की उम्मीद नहीं की जाती है। उक्त टिप्पणियां पूरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 21 (सम्मान के साथ जीने का अधिकार) के तहत किशोरों के अधिकार का उल्लंघन है.’ स्वप्रेरणा से (स्वयं की गति से) पहल की गई. पीठ ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने इस पर निर्देश देने के लिए कुछ समय मांगा है कि क्या राज्य ने पहले ही हाईकोर्ट की विवादास्पद टिप्पणियों के खिलाफ अपील दायर कर दी है या वह ऐसा करने के बारे में सोच रही है।
इस मामले में सहायता के लिए अदालत द्वारा वरिष्ठ वकील माधवी दीवान को न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया गया था और वकील लिज़ मैथ्यू से दीवान की मदद का अनुरोध किया गया था। बताया गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के कहने पर स्वत: संज्ञान कार्यवाही शुरू की गई थी । यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने कहा था कि हर किशोरवय के लिए विपरीत लिंग का साथ तलाशना सामान्य है, पर बिना किसी वादे या समर्पण के यौन संबंध बनाना सामान्य नहीं है।
यौन इच्छाओं और रिश्तों के बारे में किशोर लड़कियों-लड़कों के लिए ‘कर्तव्यों’ की एक श्रृंखला बताते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि लड़कियों को अपनी ‘गरिमा’ और ‘सेल्फ वैल्यू’ को बचाना चाहिए और ‘समग्र विकास’ की कोशिश करनी चाहिए। किशोर लड़कों को लेकर अदालत का कहना था कि उन्हें ‘एक युवा लड़की या महिला के उपरोक्त कर्तव्यों की इज्जत करनी चाहिए और अपने मन को किसी महिला, उनकी सेल्फ वैल्यू, गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार का सम्मान करने के लिए तैयार करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले के जरिये इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों को कैसे देखा जाना चाहिए। साथ ही शीर्ष अदालत ने जजों और वकीलों के बीच संवेदनशीलता पैदा करने की जरूरत पर भी जोर दिया था. देश की सभी अदालतों को निर्देश दिया गया था कि वे यौन अपराधों के मामलों का फैसला करते समय महिलाओं के कपड़े, व्यवहार, पिछले आचरण, नैतिकता या शुचिता पर टिप्पणी करने से बचें, या किसी तरह का कोई ‘समझौता फॉर्मूला’ न सुझाएं।
2021 का यह आदेश उस मामले के फैसले के समय आया था, जब उसने जुलाई 2020 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश को रद्द करने को कहा था। हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के एक मामले के आरोपी को जमानत की शर्त के रूप में उसे शिकायतकर्ता से राखी बंधवाने को कहा था. शीर्ष अदालत ने माना था कि इस आदेश का देश की संपूर्ण न्यायिक प्रणाली पर गलत प्रभाव पड़ा।

यौन शोषण के शिकार बच्चों को है न्याय का इंतजार

फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों में 2.43 लाख मामले लंबित
नयी दिल्ली । केंद्र सरकार की तमाम नीतियों, प्रयासों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद पॉक्सो के मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष त्वरित अदालतों में 31 जनवरी, 2023 तक देश में 2 लाख 43 हजार 237 मामले लंबित थे। अगर लंबित मामलों की इस संख्या में एक भी नया मामला नहीं जोड़ा जाए तो भी इन सारे मामलों के निपटारे में कम से कम नौ साल का समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में 25 से ज्यादा साल तक का समय लग सकता है। साथ ही 2022 में पॉक्सो के सिर्फ तीन फीसदी मामलों में सजा सुनाई गई। ये चौंकाने वाले तथ्य इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से जारी शोधपत्र ‘जस्टिस अवेट्स : ऐन एनालिसिस ऑफ द एफिकेसी ऑफ जस्टिस डेलिवरी मैकेनिज्म्स इन केसेज ऑफ चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज’ से उजागर हुए हैं।
यौन शोषण के शिकार बच्चों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2019 में एक ऐतिहासिक कदम के जरिए फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन और हर साल इसके लिए करोड़ों की राशि देने के बावजूद इस शोधपत्र के निष्कर्षों से देश के न्यायिक तंत्र की क्षमता और दक्षता पर सवालिया निशान उठ खड़े होते हैं। शोधपत्र के अनुसार मौजूदा हालात में जनवरी, 2023 तक के पॉक्सो के लंबित मामलों के निपटारे में अरुणाचल प्रदेश को 30 साल लग जाएंगे जबकि दिल्ली को 27, पश्चिम बंगाल को 25, मेघालय को 21, बिहार को 26 और उत्तर प्रदेश को 22 साल लगेंगे। फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों जैसी विशेषीकृत अदालतों की स्थापना का प्राथमिक उद्देश्य यौन उत्पीड़न के मामलों और खास तौर से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम से मुड़े मामलों का त्वरित गति से निपटारा करना था। इनका गठन 2019 में किया गया और भारत सरकार ने हाल ही में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में इसे 2026 तक जारी रखने के लिए 1900 करोड़ रुपये की बजटीय राशि के आवंटन को मंजूरी दी है। इन फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों के गठन के बाद माना गया कि वे इस तरह के मामलों का साल भर के भीतर निपटारा कर लेंगी लेकिन इन अदालतों में आए कुल 2 लाख 68 हजार 38 मुकदमों में से महज 8 हजार 909 मुकदमों में ही अपराधियों को सजा सुनाई जा सकी है। अध्ययन से यह उजागर हुआ है कि प्रत्येक फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालत ने साल भर में औसतन सिर्फ 28 मामलों का निपटारा किया। इसका अर्थ यह है कि एक मुकदमे के निपटारे पर नौ लाख रुपये का खर्च आया। शोधपत्र के अनुसार, “प्रत्येक विशेष अदालत से हर तिमाही 41-42 और साल में कम से कम 165 मामलों के निपटारे की उम्मीद की जा रही थी लेकिन आंकड़ों से लगता है कि गठन के तीन साल बाद भी ये विशेष अदालतें अपने तय लक्ष्य को हासिल करने में विफल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए शोधपत्र आगे कहता है कि बाल विवाह बच्चों के साथ दुष्कर्म है। उधर, वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजाना 4,442 नाबालिग लड़कियों की शादी करवा दी जाती है। इसका मतलब यह है कि देश में हर मिनट तीन बच्चियों को बाल विवाह के नर्क में झोंक दिया जाता है जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हालिया रिपोर्ट कहती है कि देश में बाल विवाह के रोजाना सिर्फ तीन मामले दर्ज होते हैं। आईसीपीएफ के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह को रोकने के लिए देश में मजबूत नीतियों, कड़े कानूनों और पर्याप्त वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद सजा की मामूली दरों को गंभीर चिंता का विषय करार दिया। भुवन ऋभु ने कहा, “कानून की भावना को हर बच्चे के लिए न्याय में रूपांतरित होने की जरूरत है। अगर बच्चों के यौन शोषण के आरोपितों में महज तीन प्रतिशत को ही सजा मिल पाती है तो ऐसे में कहा जा सकता है कि कानूनी निरोधक उपाय नाकाम हैं। अगर पीड़ित बच्चों को बचाना है तो सबसे जरूरी चीज यह है कि बच्चों और उनके परिवारों की सुरक्षा की जाए, उनके पुनर्वास और क्षतिपूर्ति के इंतजाम किए जाएं और पूरा न्यायिक तंत्र निचली अदालतों से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जैसी ऊपरी अदालतों तक मुकदमे का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करे।”
यौन शोषण के पीड़ित बच्चों को एक समयबद्ध और बच्चों के प्रति मैत्रीपूर्ण तरीके से न्याय दिलाना सुनिश्चित करने और लंबित मामलों के निपटारे के लिए आईसीपीएफ ने कई अहम सिफारिशें की हैं। यह रिपोर्ट विधि एवं कानून मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से मिले आंकड़ों पर आधारित है।

संतुलित आहार लीजिए. दिल का ख्याल रखिए 

ऐसी धारणा है कि हृदय रोग हानिकारक खानों के अधिक सेवन से होता है लेकिन, वास्तव में यूरोपियन हार्ट जर्नल के जुलाई 2023 अंक में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार इसके लिए सुरक्षात्मक खाद्य पदार्थों का अंडरन्यूट्रिशन अधिक जिम्मेदार है। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि विशिष्ट प्रकार के सुरक्षात्मक भोजन जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स, फलियां, पूर्ण वसा वाले डेयरी उत्पाद और मछली के कम सेवन से दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है। हैप्पीएस्ट हेल्थ के अनुसार मणिपाल अस्पताल, मिलर्स रोड, बेंगलुरु के कार्डियोलॉजी सलाहकार डॉ. सुनील द्विवेदी कहते हैं कि आजकल का आहार असंतुलित और कैलोरी में उच्च है। इसमें प्रोसेस्ड भोजन शामिल होता है जिसमें विटामिन और खनिज सहित सूक्ष्म पोषक तत्व कम होते हैं. इसके बजाय, एक संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, जिसमें उचित हिस्सों में प्रोटीन और फैट के साथ सीमित कार्बोहाइड्रेट शामिल हो । वह इस बात पर जोर देते हैं कि कैलोरी सेवन को सीमित करने और मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। यह हमें मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप से बचाता है। एसजीएचएस अस्पताल, सोहना, मोहाली के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. हरप्रीत सिंह गिल्होत्रा ​​का भी मानना ​​है कि हमें कैलोरी की मात्रा और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए फाइबर की आवश्यकता होती है।
सेब -सेब को हृदय रोग के खतरे को कम करने वाला माना जाता है। आहार विशेषज्ञों का का कहना है कि सेब साल्यबल फाइबर से भरपूर होते हैं जो शरीर में बहुत सारे खराब फैट को कम करने में मदद करते हैं।
अनार – अनार में विटामिन सी होता है और इसे एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। इस प्रकार, यह ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने में मदद करता है जो मधुमेह और हृदय जटिलताओं सहित कई पुरानी स्थितियों से संबंधित है।
बादाम – कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने और प्लेटलेट फ़ंक्शन में सुधार करने के लिए नियमित रूप से बादाम जैसे नट्स का सेवन करना चाहिए।
पपीता – पपीता एक हृदय स्वस्थ फल है जो एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिजों से भरपूर है, जो इसे हृदय के लिए फायदेमंद बनाता है। इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है, जिससे वजन बढ़ने पर नियंत्रण रहता है. इतना ही नहीं, पपीते में विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन होता है। अखरोट – अखरोट में उच्च मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड) होता है, जिसे हृदय स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव माना जाता है। वे एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं, जो हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का प्राथमिक कारण है> इसके अलावा, वे रक्त के थक्कों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं ।
(डेली हंट के माध्यम से )

बंगाल का एक गांव जहां जलेबी की कीमत है 700 रुपये

हलवाइयों ने की जीआई टैग की मांग
बांकुड़ा । भारत अपनी सभ्यता,संसकृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लियें तो प्रसिद्ध हैं इसके साथ यहाँ का लजीज खाना भी विश्व प्रसिद्ध हैं । खाने मे भारतीय मिठाइयों का कोई जवाब नहीं है फिर चाहें वो बंगाल का रसगुल्ला ,फरुखाबाद की इमरती हो या मथुरा के पेड़े । स्वाद ऐसा की जुबान भूल ना पाएं ।आज हम एक ऐसी ही मिठाई की बात करेंगे जो किसी भी समय खाई जा सकतीं हैं । इसे लोग दूध के साथ और दही के साथ खाना ज्यादा पसंद करतें हैं जी हां हम बात कर रहें हैं रस भरी जलेबी की।शायद ही कुछ लोग होंगे जिन्हें जलेबी ना पसंद हो ।
अक्सर जब हमें जलेबी खाने का मन होता है तो हम किसी पास की हलवाई की दुकान से या नुक्कड़ पर लगे जलेबी के ठेले से खरीद कर खा लेते हैं । लेकिन आज हम बात करेंगे पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा जिले के केंजाकुड़ा गांव की सबसे बड़ी जलेबी के बारें में जिसकी कीमत 300 रुपये से 700 रुपये के बीच हैं ।
पश्चिम बंगाल में बांकुड़ा जिले के एक गाँव जिसका नाम केंजाकुड़ा गांव हैं यहां भादों के महीने मे विश्वकर्मा पूजा और भादू पूजा के अवसर पर विशालकाय जलेबी बनाने की परंपरा हैं । कुटीर उद्योगों से समृद्ध बांकुड़ा का यह औद्योगिक गांव जहां कांसा-पीतल और बुनाई का काम होता है ।बधू पूजा के अवसर पर यह केंजाकुड़ा जलेबी बंगाली परंपरा से बनाई जाती है। इस जंबो आकार की जलेबी के एक टुकड़े की कीमत 300 से 700 रुपये के बीच है।इस बड़ी सी जलेबी का वजन 2 से 4 किलो के लगभग होता हैं । मिठाई की दुकानों में बड़ी जलेबी कौन बना सकता है और इस विशाल जलेबी को किसने खरीदा, इसकी एक अघोषित और मैत्रीपूर्ण प्रतियोगिता होने लगती है। इस जलेबी को खाने और देखने के लियें दूर-दूर से लोग आते हैं ।
एक परंपरा के अनुसार पंचकोट राज नीलमणि सिंहदेव की तीसरी पुत्री भद्रावती की असामयिक मृत्यु हो गई थी। बाद में पंचकोट शाही परिवार ने ग्रेटर बंगाल में भादु पूजा शुरू की। तभी से द्वारकेश्वर नदी के तट पर स्थित बांकुरा के प्राचीन शहर केंजाकुरा में भादु पूजा लंबे समय से की जाती रही है। हर वर्ष भाद्रपद के 27 तारीख से लेकर अश्विन की पांच तारीख तक यहां जलेबी का यह मेला लगता है । कौन कितनी बडी जलेबी बनाता है और कौन इसे खरीदता है सबके लिए चर्चा का विषय रहता है । विश्वकर्मा पूजा के दिन तो लाइन लगा कर लोग इसे खरीदते हैं । इस जलेबी को अपने रिश्तेदारों के यहां भी भेजते हैं । यहां के दुकानदारों का कहना है कि अब तो इस जलेबी को विदेशों मे भी भेजा जा रहा है और वहां के लोग इसे खूब पसंद कर रहें हैं ।
व्यापारी कर रहें हैं जीआई टैग की मांग – पश्चिम बंगाल की इस जलेबी की प्रसिद्धि और डिमांड देखते हुए दुकानदारों और व्यापारियों ने जीआई टैग की मान्यता देने की मांग की है। यहां के हलवाइयों का दावा है कि यह विशाल जलेबी यहां के अलावा पूरे भारत में और कहीं भी नहीं बनाई जाती है और न ही दुनिया के किसी भी अन्य देश में।

मैक्स हेल्थकेयर ने 940 करोड़ में खरीदा लखनऊ का सहारा हॉस्पिटल

लखनऊ । मैक्स हेल्थकेयर ने टियर-I/II शहरों में अपना व‍िस्‍तार करने के ल‍िए लखनऊ में 550 बेड वाले सहारा अस्पताल को खरीद ल‍िया है। मैक्स और सहारा हॉस्पिटल की डील करीब 940 करोड़ रुपये (लगभग 113 मिलियन डॉलर) में हुई है। यह सौदा मैक्स की सहायक कंपनी क्रॉसले रेमेडीज के जर‍िये क‍िया गया। मैक्स हेल्थकेयर की तरफ से बताया गया क‍ि उसने स्टारलिट मेडिकल सेंटर प्राइवेट लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण का करार क‍िया है। स्टारलिट के पास सहारा अस्पताल का मालिकाना हक है.
250 बिस्तरों की ऑपरेशन बेड क्षमता – मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली और मैक्स मेडिकल सेंटर, नोएडा को क्रॉसले रेमेडीज की तरफ से संचालित क‍िया जाता हैय़ मैक्स हेल्थकेयर की तरफ से जुलाई 2015 में पुष्पांजलि क्रॉसले हॉस्पिटल, वैशाली को टेकओवर क‍िया गया था। सहारा अस्पताल की फ‍िलहाल ऑपरेशन बेड कैप‍िस‍िटी करीब 250 बिस्तरों की है जिसमें व‍ित्‍त वर्ष 2024 का रेवेन्‍यू रन रेट 200 करोड़ रुपये है। मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट के सीएमडी सोई ने कहा, ‘हम इस अधिग्रहण को लेकर काफी उत्साहित हैं। यह टियर I/II शहरों में प्रवेश करने की हमारी रणनीति के अनुरूप है. इन शहरों के पास विकसित हेल्‍थ केयर सर्व‍िस इकोस‍िस्‍टम है।
मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लिमिटेड 940 करोड़ रुपये में लखनऊ के सहारा अस्पताल का न‍ियंत्रण अपने हाथ में लेगा। इस अधिग्रहण के जर‍िये मैक्स हेल्थकेयर लखनऊ में प्रवेश कर रहा है, यह यूपी का सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है। मैक्स हेल्थकेयर की तरफ दी गई जानकारी में कहा गया क‍ि अस्पताल 17 मंजिला इमारत में है। यहां पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरो, सर्जरी, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी और डायग्नोस्टिक्स विभाग हैं। इसमें एक नर्सिंग कॉलेज भी है. फ‍िलहाल अस्पताल हर साल करीब दो लाख मरीजों को सेवा मुहैया कराता है। यह न्यूरोसाइंस के लिए प्रख्यात उपचार केन्द्र है।