‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ के लिए 1,000 करोड़ रुपये की योजना
दीपंकर एडबार
रानाघाट (नदिया) । पश्चिम बंगाल में धार्मिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ विकसित करने की योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नदिया जिले के आरंगघाटा में शतदल क्लब की काली पूजा का उद्घाटन करते हुए इस महत्वाकांक्षी पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के प्राचीन मठों और मंदिरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण पर अगले दो वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस परियोजना के तहत निजी संपत्तियों को छोड़कर देवोत्तर संपत्ति, ट्रस्ट और सार्वजनिक संस्थाओं के अधीन आने वाले प्राचीन मंदिरों को शामिल करने की योजना है। इन धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार कर उन्हें नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।
बंगाल के विभिन्न जिलों में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अनेक मंदिर एवं मठ मौजूद हैं। इनमें से कई स्थान लंबे समय से बेहतर रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित परियोजना के माध्यम से धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन की संभावनाओं को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।
इस योजना के संदर्भ में नदिया जिले का विशेष महत्व है। नवद्वीप, कृष्णनगर और शांतिपुर जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपनी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जगद्धात्री पूजा के दौरान चंदननगर और कृष्णनगर को विशेष रूप से सजाया जाएगा। वहीं, रास पूर्णिमा के अवसर पर नवद्वीप, शांतिपुर और कूचबिहार के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह आगामी 22 तारीख को नवद्वीप पहुंचकर रास पूर्णिमा समारोह में शामिल होंगे। इस दौरान श्री चैतन्य महाप्रभु से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों में भी उनकी भागीदारी होगी।
इसके अलावा गंगासागर मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी सरकार की पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इसे व्यापक पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मंदिरों के आसपास परिवहन, होटल, भोजनालय, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, परियोजना के तहत किन मंदिरों का चयन होगा, धनराशि किस प्रकार खर्च की जाएगी और कार्यान्वयन की समयसीमा क्या होगी, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आनी बाकी है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा और दुर्गा पूजा विसर्जन को लेकर भी राजनीतिक बयान दिए। नदिया के हांसखाली की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान जुलूस और कांसार-घंटा बजाने पर भी प्रतिबंध लगाए जाते थे।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में दुर्गा पूजा आयोजनों की संख्या पहले लगभग 13 हजार थी, जो अब बढ़कर 58 हजार हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस वर्ष राज्य में कहीं भी पूजा आयोजन को लेकर बाधा नहीं आई।
‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ की घोषणा को बंगाल की धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजना को कितनी पारदर्शिता, प्रभावी प्रबंधन और समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाता है।




