1-सनातन धर्म ने अलौकिक व दैविक रूप से स्त्री को महान स्थान दिया है।
नव रात्र पर्वों में वर्ष में दो बार नौ दिनों तक अलग- अलग रूप व गुणों के साथ पूर्ण समर्पण से परिवार सहित पूजा है।
नारी रूप की आस्था व पूजा, विश्व की किसी अन्य सभ्यता व धर्म में नहीं है।
संस्कृत में उपलब्ध महानता को जनमानस की भाषा हिन्दी साहित्य में सृजित करना बहुत ही सराहनीय है, समर्पित आस्था है।
आपने इसको अपनी कविताओं से भी पुष्पित किया है।
मां दुर्गा का यह काव्य संग्रह माँ का आशीष है।शिव की पावन नगरी वाराणसी के गंगा तट से डॉ साः पूजनीय श्री भोलाशंकर जी के साहित्य प्रवाह से उत्प्रेरित होकर गंगा के दूसरे किनारे पर जाकर, माँ दुर्गा की ओजस्वी नगरी में आपने अपने साहित्य सृजन को प्रवाहित किया है, अतुल्य है।
आपका साहित्य सृजन चलता रहै हरदम,
समस्त वसुन्धरा में लहराए आपका परचम।
पुस्तक भेजने को लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद व आभार।
-कवि और साहित्य प्रेमी श्री रामदत्त दाधीच, बड़ोदरा, गुजरात
2-प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव
डॉ वसुंधरा मिश्र द्वारा लिखित ‘नव दुर्गा नव रूप’ पुस्तक में मांँ के रूप का बहुत सुंदर सरल भाषा में महत्व बताया गया है । आज के युग की प्रासंगिकता को साथ जोड़कर माँ के सभी रूपों के विषय में अपनी रचनात्मक कविताएँ लिखी है । मैं आभारी हूँ उनकी इस पुस्तक के लिए जिसमें बहुत अच्छे तरीके माँ के नौ रूपों के बारे में पता चला।
देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती हैं, और सभी नाम ग्रहण करती हैं। माँ दुर्गा के नौ रूप और हर नाम में एक दैवीय शक्ति को पहचानना ही नवरात्रि मनाना है। असीम आनन्द और हर्षोल्लास के नौ दिनों का उचित समापन बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक पर्व दशहरा मनाने के साथ होता है। नवरात्रि पर्व की 9 रातें देवी माँ के 9 विभिन्न रूपों को समर्पित हैं जिसे नवदुर्गा भी कहा गया है।
कन्याओं के पूजन की परंपरा इसी का प्रतीक है। आधुनिक युग में जब स्त्री शिक्षा, सशक्तिकरण और समानता पर बल दिया जा रहा है, तब नवरात्रि का संदेश और भी प्रासंगिक हो उठता है। यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि हम नारी को केवल घर-परिवार तक सीमित न करें बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उसकी सहभागिता और नेतृत्व को स्वीकारें।
नवरात्रि का प्रत्येक दिन एक नया संदेश देता है, प्रकृति से जुड़ाव, आत्मसंयम, ऊर्जा का उपयोग, सूर्य से ऊर्जा ग्रहण, मातृत्व की महिमा, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, भय का नाश, धैर्य और सौम्यता तथा अंत में ज्ञान और सिद्धियों की प्राप्ति। वास्तव में यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि शक्ति केवल बाहरी नहीं है बल्कि भीतर भी विद्यमान है।
एक बार पुन तहेदिल से मैं डॉ वसुंधरा मिश्र का धन्यवाद आभार व्यक्त करती हूँ और आशा करती हूँ, भविष्य में भी इसी तरह वे लिखती रहें और रोशनी फैलाती रहें ।
अंजु सेठिया, भारत जैन महिला मंडल, कोलकाता
3-पुस्तक बहुत ही भव्य बनी हैं। माँ के नव रूपों का विस्तृत वर्णन है। 7 /8 वर्ष पूर्व मैंने माँ के नव रूप को स्त्री के जीवन के नौ आयाम के रूप में प्रतिपदित कर कविता लिखी थी। वह कविता भेज रहा हूँ।-सुरेश चौधरी
विजयादशमी पर
नारियों की स्थिति पर नारी शक्ति की पूजा
हे तेजोमयी माँ !!!!
समग्र तेजों को समन्वित कर
बनी तू तेजस्विता…
हे नारी शक्ति स्वरुप महिसासुर मर्दनी….
***जो नारी अस्मिता को
भोग्य समझ
भारतीय संस्कृति को रसातल ले जा रहे हैं
सुमंगलीरियं वधूरिमां समेत पश्यत ।
आप गृह की शोभा हो
हे शांता, परमात्मिका
जीवन गर्विता
नमिता नमिता नमिता ||
-सुरेश चौधरी सी ए , कवि, आलोचक, साहित्यकार, कोलकाता
—great congratulations for your successful poetic journey–Dr Devakar Goyel, Indian Aviation Academy, Mumbai
-वसुंधरा जी को बहुत बहुत बधाई। कल मेरा शो था, अन्यथा मैं भी आती। किसी भी पुस्तक का प्रकाशित होना अक्षरों का गौरवमय क्षण होता है। आपको पुनः बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं भी.. आपकी लेखनी निरंतर चलती रहे
कविता जी को भी बहुत बहुत बधाई.. बहुत ही मीठी आवाज़ है आपकी
-उमा झुनझुनवाला, लिटिल थेसपियन, कोलकाता
-हार्दिक बधाई वसुन्धराजी , आप की प्रतिभा एवं मृदु स्वभाव के हम सब क़ायल हैं , आपकी विविधमुखी प्रतिभा को नमन, हमारे लिए आप प्रेरणा स्त्रोत हैं, आयोजन में शामिल नहीं हो पायी परंतु मेरी शुभकामनाएँ हमेशा आपके साथ हैं ❤️
– वाणीश्री दी, साहित्यकार, कोलकाता
Vasundhara di ki pustak ka lokarpan many many congratulations di-सविता पौद्दार, आर जे, आकाशवाणी, कोलकाता
पूनम त्रिपाठी – Vasundhara Mishra ma’am
आपने ही इस साहित्यिक धरातल पर ऊँगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया है। “अर्चना” संस्था जैसा पहला मंच आपने ही प्रदान किया, मेरी प्रेरणा स्त्रोत आपही हैं माँ.
यूँ ही आशीर्वाद बनाएं रखिये। भटक जाऊं तो कभी कान पकड़ कर वापस रास्ते पर लाइए. ❤️
आपकी पुस्तक ‘ नव दुर्गा नव रूप ‘ में शामिल सभी कविताएँ बहुत ही उच्च स्तर की हैं। दार्शनिकता से भरपूर,जीवन दर्शन का पाठ पढ़ती हैं ,साथ ही वर्तमान से भी जोड़ती हैं।माता के हर रूप का विस्तृत वर्णन, उनकी स्तुतियां और कविता रूपी आपकी टिप्पणियां सचमुच अद्भुत हैं। यह पुस्तक अपने आप में अलग और अनूठी पुस्तक है।
–भारती मेहता, कवयित्री, अहमदाबाद गुजरात




