Friday, May 29, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]

 अजीम शायर बशीर बद्र

– वसुधा ‘कनुप्रिया’

“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।”

उर्दू के मशहूर शायर, पद्मश्री बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में भोपाल स्थित अपने निवास पर निधन हो गया। आप कई वर्षों से डिमेंशिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

उर्दू शायरी की दुनिया में बशीर बद्र ने आम आदमी की संवेदना, रिश्तों की नर्मी, टूटते भरोसे और प्रेम की तड़प को बेहद सादा लेकिन गहरे अंदाज़ में अभिव्यक्त किया है। उनकी शायरी ने साहित्यिक मंचों से लेकर आम जनमानस के दिलों तक एक ख़ास जगह बनाई।

बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या नगर में हुआ था। उनका पूरा नाम सैयद मोहम्मद बशीर था। बचपन से ही साहित्य और भाषा के प्रति उनका रुझान रहा था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में वहीं से उर्दू साहित्य में पीएचडी. की उपाधि अर्जित की। वे कुछ समय तक अध्यापन कार्य से भी जुड़े रहे। साहित्यिक वातावरण और उर्दू अदब की समृद्ध परम्परा ने उनके व्यक्तित्व और शायरी को गढ़ा।

बशीर बद्र ने स्वयं स्वीकार किया था कि वे परम्परागत उर्दू शायरी से गहरे प्रभावित रहे। मीर, ग़ालिब, फ़िराक़ और जिगर जैसे शायरों की परम्परा से उन्होंने बहुत कुछ सीखा, लेकिन अपनी शैली बिल्कुल अलग विकसित की। उनकी शायरी में कठिन फ़ारसी नहीं, बल्कि संवेदना युक्त सादा भाषा रही। शायरी में इसी सादगी और गहराई के कारण देश और दुनिया में उनके लाखों मुरीद हैं। उन्होंने प्रेम, अकेलापन, बिछोह और बदलते सामाजिक मूल्यों को बड़े सहज ढंग से अपने अशआर में व्यक्त किया।
उनके कई शेर अक़्सर लोगों की ज़ुबान पर रहते हैं –

“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी

यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता।”

और

“कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,

ये नए मिज़ाज का शहर है, ज़रा फ़ासले से मिला करो।”

या

“दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे,

जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।”

इन पंक्तियों में जीवन का अनुभव और मानवीय संवेदना ख़ूबसूरती से पेश किये गए हैं।

बशीर बद्र देश और विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मुशायरों में शामिल हुए। भारत के बड़े साहित्यिक मंचों से लेकर पाकिस्तान, दुबई, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन तक उनकी ग़ज़लों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उनकी प्रस्तुति में एक विशेष ठहराव और सादगी थे। वे मंच पर ऊँची आवाज़ या नाटकीयता के बजाय भावनात्मक संप्रेषण के लिए जाने जाते थे। उनकी लोकप्रियता का कारण यह भी था कि वे कठिन उर्दू के बजाय ऐसी भाषा में शे’र कहते थे जिसे हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं के पाठक आसानी से समझ सकें।

उर्दू साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया।

उनकी ग़ज़लों के कई संग्रह प्रकाशित हुए, जिनमें “आस”, मुसाफ़िर, उजालों की परियां, मैं बशीर हूँ प्रमुख हैं।

बढ़ती उम्र के साथ वे डिमेंशिया सहित कई बीमारियों से ग्रस्त हो गए। धीरे-धीरे उनकी स्मृति कमजोर होती चली गई। बताया जाता है कि वे कई परिचित लोगों और अपनी ही रचनाओं को पहचानने में कठिनाई महसूस करने लगे थे। उनकी पत्नी और बेटे ने कई बार इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट किया कहाँ बद्र साहब अपनी की शायरी नहीं पहचान पाते थे।

कल, 28 मई 2026 को भोपाल में बशीर बद्र का निधन हो गया। उनकी शायरी हमेशा उनके मुरीदों के बीच उन्हें ज़िंदा रखेगी।

(लेखिका, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

शुभजिता

शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।

शुभजिताhttps://www.shubhjita.com/
शुभजिता की कोशिश समस्याओं के साथ ही उत्कृष्ट सकारात्मक व सृजनात्मक खबरों को साभार संग्रहित कर आगे ले जाना है। अब आप भी शुभजिता में लिख सकते हैं, बस नियमों का ध्यान रखें। चयनित खबरें, आलेख व सृजनात्मक सामग्री इस वेबपत्रिका पर प्रकाशित की जाएगी। अगर आप भी कुछ सकारात्मक कर रहे हैं तो कमेन्ट्स बॉक्स में बताएँ या हमें ई मेल करें। इसके साथ ही प्रकाशित आलेखों के आधार पर किसी भी प्रकार की औषधि, नुस्खे उपयोग में लाने से पूर्व अपने चिकित्सक, सौंदर्य विशेषज्ञ या किसी भी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। इसके अतिरिक्त खबरों या ऑफर के आधार पर खरीददारी से पूर्व आप खुद पड़ताल अवश्य करें। इसके साथ ही कमेन्ट्स बॉक्स में टिप्पणी करते समय मर्यादित, संतुलित टिप्पणी ही करें।
Latest news
Related news