Sunday, October 11, 2026
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पर्यटकों के लिए खुला शांतिनिकेतन गृह

– हेरिटेज वॉक में दिखेगी टैगोर की विरासत की झलक

बोलपुर । रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृतियों और उनकी ऐतिहासिक विरासत को अपने भीतर समेटे शांतिनिकेतन में अब पर्यटकों के लिए एक और महत्वपूर्ण दरवाजा खुल गया है। 19 सितंबर 2026 से शांतिनिकेतन गृह को हेरिटेज वॉक के माध्यम से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। छह साल से अधिक समय तक बंद रहने के बाद इस ऐतिहासिक भवन में पर्यटकों की आवाजाही शुरू होना शांतिनिकेतन की विरासत को करीब से जानने वालों के लिए महत्वपूर्ण खबर है।

उल्लेखनीय है कि शांतिनिकेतन की खासियत यही है कि यहां इतिहास सिर्फ संग्रहालय में बंद नहीं है—यहां की मिट्टी, पेड़, भवन, संगीत, कला और शिक्षा की परंपरा आज भी टैगोर की उस सोच की कहानी सुनाती है, जिसने बोलपुर के इस छोटे से इलाके को दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर अलग पहचान दी। शांतिनिकेतन गृह को शांतिनिकेतन परिसर का सबसे पुराना ईंटों से बना मकान माना जाता है।

वर्ष 1862 में महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर ने इस स्थान को खरीदा था। बाद में यही परिसर टैगोर परिवार की गतिविधियों और शांतिनिकेतन के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बना। रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1901 में ब्रह्मचर्याश्रम की शुरुआत की, जिसने आगे चलकर विश्वभारती की विचारधारा और शिक्षा-पद्धति की नींव तैयार की। अब हेरिटेज वॉक के दौरान पर्यटक शांतिनिकेतन गृह को देख सकेंगे।  यहां आने वाले लोगों को सिर्फ एक पुराना भवन देखने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि वे उस ऐतिहासिक वातावरण को महसूस कर सकेंगे, जहां से टैगोर की शिक्षा, साहित्य, कला और प्रकृति-केंद्रित विचारधारा की एक महत्वपूर्ण यात्रा आगे बढ़ी।

शांतिनिकेतन आने वाले पर्यटकों के लिए उत्तरायण परिसर सबसे महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक है। यहां रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़े उदयन, श्यामली, पुनश्च, कोणार्क और उदिची जैसे भवन हैं। इन भवनों की वास्तुकला एक-दूसरे से अलग है और इनमें टैगोर के जीवन, उनकी कला और उनके प्रयोगों की झलक दिखाई देती है।

विश्वभारती की योजना के अनुसार पूजा की छुट्टियों के बाद इन ऐतिहासिक भवनों को भी पर्यटकों के लिए खोलने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में शांतिनिकेतन का हेरिटेज सर्किट और विस्तृत हो सकता है।

शांतिनिकेतन की पहचान केवल टैगोर के आवासीय भवनों से नहीं है। यहां छातिमतला, उपासना गृह, बकुलबीथि, घंटातला, आम्रकुंज, पाठ भवन और सिंह सदन जैसे कई ऐतिहासिक स्थल हैं।

उपासना गृह अपनी कांच की दीवारों और विशिष्ट वास्तुकला के कारण आकर्षण का केंद्र है। वहीं छातिमतला शांतिनिकेतन के शुरुआती आध्यात्मिक इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। आम के पेड़ों से घिरा आम्रकुंज और खुले वातावरण में शिक्षा की परंपरा यह बताती है कि टैगोर की नजर में शिक्षा केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं थी।

रवींद्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना की जिसमें प्रकृति, संगीत, साहित्य, चित्रकला, नृत्य और संस्कृति को शिक्षा का हिस्सा बनाया गया। खुले वातावरण में पढ़ाई और प्रकृति के बीच सीखने की परंपरा शांतिनिकेतन की सबसे अलग पहचान बनी।

इसी सोच ने आगे चलकर शांतिनिकेतन को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कला-संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल किया। कला भवन और संगीत भवन ने इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शांतिनिकेतन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब 2023 में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यूनेस्को ने शांतिनिकेतन को टैगोर की शिक्षा और मानवतावादी विचारों से विकसित उस परिसर के रूप में मान्यता दी, जहां प्रकृति, कला और शिक्षा का अनूठा मेल देखने को मिलता है।

अब 19 सितंबर से शांतिनिकेतन गृह को हेरिटेज वॉक में शामिल किए जाने के बाद पर्यटकों को इस विरासत को और करीब से देखने का अवसर मिलेगा। आने वाले दिनों में उत्तरायण परिसर के अन्य ऐतिहासिक भवन भी पर्यटकों के लिए खुलते हैं तो बोलपुर आने वाले लोगों के लिए यह पूरा इलाका एक विस्तृत टैगोर हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित हो सकता है।

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