Friday, August 7, 2026
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झारखंड का आंदोलन बहुत अलग है…और यहां के युवा भी

सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया

वह कहती है पीसीएस  का मेरा सपना टूट गया….ये दुख कहीं बहुत गहरा है….भीतर तक….चलो खुद के लिए कुछ न कर पाऊं पर इन बच्चों के लिए आवाज जरूर बन जाऊंगी मैं….हेमंत सोरेन ने यदि सुना नहीं तो इसी धरती पर हिसाब करके जाना पड़ेगा । वह कहती है कि सामान्य वर्ग से हूं मैं….हमारे यहां ज्यादा से ज्यादा 24 25 साल में शादी हो जाती है….मेरे पापा ने दो साल एकस्ट्रा दिया….लेकिन इन लूट मचाने वालों ने सब छीन लिया….घर नहीं जाती मैं….मेरी शादी भी नहीं हो सकती अब तो …………मैं रो भी नहीं सकती….यहां कोई भी स्टूडेंट जंतर मंतर जैसे फैंसी नहीं हैं….यहां सब गरीब हैं….यहां सब मजदूर के बच्चे हैं….यहां खाने के लिए भी एक आध सूखी रोटी मिल जाए वही बहुत है….।  यह कहानी इस छात्र आन्दोलन में संघर्ष कर रहे हर दूसरे छात्र की है । झारखंड में चल रहे छात्र आन्दोलन की यह झलक है । रांची की सड़कों पर जेपीएससी और जेएसएससीपरीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र आंदोलन कर रहे हैं।

2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था। इसमें 2,204 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए। इसके बाद 18 से 20 जुलाई के बीच मेंस परीक्षा होनी थी। रिजल्ट आने के बाद कई उम्मीदवारों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए। उनका कहना था कि कट-ऑफ जारी नहीं की गई। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक उम्मीदवार की कथित ओएमआर शीट वायरल हुई। दावा किया गया कि उसने सिर्फ 48 सवाल हल किए, फिर भी वह मेंस के लिए चुन लिया गया। वहीं, रिजल्ट पर आयोग के अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे। विवाद बढ़ने के बाद जेपीएससी ने मेंस परीक्षा रद्द कर दी।

कुछ समय पहले ही नीट परीक्षा में धांधली को लेकर एक आन्दोलन हुआ जहां भाषा और मर्यादा की तमाम दीवारें तोड़ दी गयीं । इस आन्दोलन को छात्रों के साथ विपक्ष के नेताओं का व्यापक समर्थन मिला। राहुल गाँधी ने पीएम आवास का घेराव किया तो दूसरी तरफ डिंपल यादव से लेकर अरुंधती राय तक सबने हाजिरी लगाई । इस आन्दोलन में अधिकतर संभ्रांत घरों के युवा मोदी विरोधी और सेना विरोधी मांगों को लेकर रील बनाते नजर आए क्योंकि इनके पास सुविधाओं की कमी नहीं थी इसलिए बेपरवाह भी थे । मांग से अधिक मनमानी दिख रही थी और हाव-भाव ऐसे जैसे इसकी आयोजक कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास, विजय दहिया, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र के बाद जमकर जश्न मनाया । अगर आपको लगता है कि छात्र आन्दोलन ऐसे ही होते हैं तो रुकिए…….हम आपको असली छात्रों तक लिए चलते हैं…झारखंड चलते हैं। यहां सोनम वांग्चुक नहीं, एक युवा देवेंद्र नाथ महतो अनशन पर बैठा है जिसका निर्जला अनशन खुद वांग्चुक ने फोन कर तुड़वाया । हेमंत सोरेन सरकार दिखती सीधी है मगर अंदरूनी तौर पर छात्रों के आन्दोलन को तुड़वाने और बच्चों में फूट डलवाने की कोशिश जारी है। यहाँ फाइव-स्टार टेंट नहीं, टूटी-फूटी तिरपाल है। यहाँ पेशेवर आंदोलनजीवी नहीं, यहां असली छात्र हैं। कोडरमा के एक छात्र ने कहा कि हम कभी भी अपने प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। हम छात्र हैं और एक छात्र कभी भी असभ्य नहीं हो सकता। एक अच्छा छात्र प्रधानमंत्री के प्रति वैसा बदतमीजी भरा व्यवहार नहीं करेगा, यह तो उपद्रवी तत्वों का काम था। वहीं, एक और छात्र ने कहा, ‘हम झारखंड से हैं और हमारे लोगों के बीच छीना-झपटी या चोरी जैसी घटनाएं नहीं होतीं। हम कभी भी असभ्य नहीं रहे हैं। दिल्ली में जो विरोध-प्रदर्शन हुआ, वह बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वहां का कल्चर अलग है। दिल्ली का प्रोटेस्ट असभ्य था, हम यहां सभ्य तरीके से प्रोटेस्ट कर रहे हैं और करेंगे।

दोनों ही आन्दोलनों में अंतर है…एक में उद्दंडता थी तो यहाँ विद्रोह के बीच भी अनुशासन है। गालियां नहीं, व्यंग्य है, व्यवस्था पर तंज है। यहां जुनैद की बिरयानी नहीं मगर सोशल मीडिया पर आन्दोलन की तस्वीरें देखकर देश भर के लोगों का प्रेम इन बच्चों तक पहुंच रहा है । लोग अपना प्यार चिप्स, बिस्कुट, खाना पहुंचाकर दिखा रहे हैं । प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इनमें प्रश्नपत्र लीक होने, ओएमआर शीट में कथित हेरफेर, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दे शामिल हैं।छात्रों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता है और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। हालत यह है कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र डटे हुए हैं। छात्र यहीं रह रहे हैं। अपना खाना खुद बना रहे हैं और यहीं खा रहे हैं। इस धरने के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी है, वे टेंट के अंदर ही किताबें खोलकर पढ़ाई भी कर रहे हैं। फिलहाल बारिश के चलते उनकी परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में छात्रों ने तिरपाल लगाकर अपने लिए टेंट बना लिया है। छात्रों ने यह तय कर लिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की गारंटी नहीं दे देती, तब तक वे इस धरने से नहीं उठेंगे और उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन पर बैठे छात्रों द्वारा 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेरा का कार्यक्रम है। विधानसभा घेराव के दौरान झारखंड के कई जिलों से हजारों की संख्या में छात्रों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में किसी भी आराजक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस विभाग को अलर्ट किया गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी ) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को स्थगित कर दिया है। जेपीएससी के अध्यक्ष रहे एल. खियांगते ने इस्तीफा दे दिया है और जेपीएससी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों मामले की जांच सीआईडी कर रही है।  जेपीएससी कार्यालय के साथ-साथ खियांगते के आवास पर भी सीआईडी और रांची पुलिस की टीम ने छापेमारी की है। अब तक लगभग एक दर्जन के करीब लोगों को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है।

 

 

 

 

 

 

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