लुधियाना । 1200 किलोमीटर दूर पहुंच गए थे चमन लाल… लेकिन एक अनजान युवक ने हार नहीं मानी।
पंजाब के लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरां गांव के चमन लाल 11 सितंबर को श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए अमृतसर गए थे। इसी दौरान वे अपने साथियों से बिछड़ गए और अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंच गए। गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गए और आखिरकार 1200 किलोमीटर से ज्यादा दूर गया पहुंच गए।
गया में उनकी मुलाकात नीरज से हुई। चमन लाल परेशान और भूखे थे और अपना पूरा पता नहीं बता पा रहे थे। उन्हें सिर्फ अपने गांव का नाम याद था, फतेहगढ़ गुजरां।
नीरज उन्हें अपने घर ले गए, खाना खिलाया और करीब चार दिन तक अपने परिवार के साथ रखा। फिर शुरू हुई उन्हें उनके अपनों तक पहुंचाने की कोशिश।
नीरज ने करीब तीन दिन तक इंटरनेट और चैट जीपीटी की मदद से गांव के नाम के अलग-अलग तरीकों से खोजबीन की। आखिरकार उन्हें लुधियाना जिले में माछीवाड़ा साहिब के पास फतेहगढ़ गुजरां गांव का पता मिला।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
नीरज ने चमन लाल को अकेले वापस भेजने के बजाय खुद गया से पंजाब तक उनके साथ जाने का फैसला किया। माछीवाड़ा पहुंचकर उन्होंने लोगों को चमन लाल की तस्वीर दिखाई। एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें पहचान लिया और बात परिवार तक पहुंची। कुछ ही देर में उनके पोते सुखचैन सिंह वहां पहुंचे और अपने दादा को पहचान लिया।
तकनीक ने गांव का रास्ता दिखाया, लेकिन चमन लाल को घर तक पहुंचाया नीरज की इंसानियत ने।
कभी-कभी किसी की मदद करने के लिए हमारे पास बहुत कुछ होना जरूरी नहीं होता, बस किसी अनजान इंसान के लिए रुकने और हार न मानने का दिल होना चाहिए।




