Sunday, March 22, 2026
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भवानीपुर कॉलेज के एन सी सी कैडेटों द्वारा डिकोडिंग एस एस बी सेमिनार

कोलकाता ।  डिकोडिंग एसएसबी सेमिनार स्वयं से पहले सेवा की धारणा को ध्यान में रखते हुए, 27 फरवरी 2024 को, हमारे पूर्व कैडेट जेयूओ शिवांश सोमवंशी (बैच 2020-2023) ने हमारे एनसीसी कैडेटों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की, जिसमें उन्होंने एसएसबी साक्षात्कार के अपने अनुभव और टिप्स और ट्रिक्स साझा किए। इससे उन्हें अपने पहले प्रयास में ही सफल होने में मदद मिली। शिवांश को एनसीसी स्पेशल एंट्री के लिए 19 एसएसबी-इलाहाबाद 55वें कोर्स से अनुशंसित किया गया और उसने अखिल भारतीय रैंक 35 हासिल की है।
सेमिनार एसएसबी साक्षात्कार के सभी विभिन्न चरणों के बारे में था। साक्षात्कार पांच दिनों की अवधि में आयोजित किया जाता है, और इसे 2 चरणों में वर्गीकृत किया जाता है। उन्होंने पहले दिन की शुरुआती स्क्रीन-इन के बारे में बताया, जिसमें ओआईआर (ऑफिसर्स रेटिंग टेस्ट), पीपीडीटी (पिक्चर परसेप्शन एंड डिस्कशन टेस्ट) और उसके बाद ग्रुप डिस्कशन शामिल था। शिवांश ने नियमों पर प्रकाश डाला और हमारे सीडीटी को कुछ नोट्स दिए। चरण दो में मनोवैज्ञानिक परीक्षण, समूह कार्य और बाधाएं, व्याख्यान, समूह योजना अभ्यास, साक्षात्कार और अंतिम सम्मेलन शामिल है। उन्होंने एसएसबी साक्षात्कार के लिए क्या करें और क्या न करें के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपना अनुभव भी साझा किया। बाद में, प्रोफेसर दिलीप शाह, रेक्टर और डीन बीईएससी ने उन्हें उनकी उपलब्धि के लिए एक स्मृति चिन्ह भेंट किया और साथ ही सशस्त्र बलों में करियर चुनने के लिए कैडेटों को परामर्श देने और प्रेरित करने के लिए उन्हें एक स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। अरित्रिका दुबे एनसीसी प्रभारी एयर विंग ने आयोजन और संयोजन में भाग लिया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

कोलकाता ।  भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज ने तीन दिवसीय महिला दिवस मनाया जो 7-8-9 मार्च तक चला। प्रथम दिन बाल झड़ने की और त्वचा की विभिन्न समस्याओं को लेकर इंटर एक्टिव सत्र चला जिसमें इपटा क्लिनिक के डॉ विसवपति मुखर्जी ने छात्र छात्राओं को बालों की समस्याओं के विषय पर महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन दिया। इपटा क्लिनिक की टीम ने 130 से अधिक छात्र छात्राओं और संकायों का ब्लड प्रेशर, वेट, सूगर आदि सभी का चेकअप किया।कार्यक्रम का संचालन इपटा क्लिनिक की प्रमुख प्रो चंद्रेयी बागची ने किया। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने सभी छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर स्वागत किया। द्वितीय दिन सीएमआरआई के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ मंजरी चटर्जी और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ अयन राय द्वारा विशेष सत्र का आयोजन किया गया। डॉ मंजरी चटर्जी ने युवा पीढ़ी से लेकर वृद्धा स्त्रियों की गायनिक समस्याओं को प्रजेंटेशन द्वारा रखा जो वर्तमान छात्र छात्राओं के लिए महत्त्वपूर्ण जानकारी रही। स्त्रियों के गर्भाशय में होने वाली विभिन्न समस्याओं जैसे मासिक धर्म, सिस्ट, फेब्रायड आदि पर विचार रखे। डॉ अयन राय आईपीएल के खिलाडिय़ों की हड्डी संबंधित समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विद्यार्थियों और शिक्षक शिक्षिकाओं ने इस सत्र में बहुत सी हड्डी और मांसपेशियों संबंधित जानकारी ली। डॉ अयन ने वर्तमान समय में खान पान और आदतों के प्रति भी ध्यान दिलाया। घर का बना भोजन हमें बहुत सी बिमारियों से बचा सकता है। मोटापा, और वजन को कम करने के उपाय भी बताए।150 से अधिक विद्यार्थियों छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही और सभी ने अपनी समस्याओं को साझा किया। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने डॉ कार्यक्रम का आयोजन किया।
तृतीय दिन दामिनी कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय कंपनी सचिव संस्थान ईस्टर्न इंडिया रिजनल कौंसिल के साथ भवानीपुर कॉलेज द्वारा शक्ति रूपेण संस्थिता के अंतर्गत पद्मविभूषण ऊषा उत्थुप द्वारा उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। दिन भर चलने वाले इस कार्यक्रम में पैनल डिस्कशन और सेमिनार किया गया। अपने को शक्तिशाली बनाने के लिए यह सेमिनार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक महत्वपूर्ण कदम था। इस कार्यक्रम का आयोजन और संयोजन भारतीय कंपनी सचिव संस्थान ईस्टर्न रिजनल कौंसिल के अध्यक्ष डॉ मोहित शॉ ने किया।सन्मार्ग हिंदी दैनिक कोलकाता की प्रमुख रुचिरा गुप्ता को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी ने अपने वक्तव्य में प्रसिद्ध गायिका पद्मविभूषण ऊषा उत्थुप और छात्र छात्राओं को शुभकामनाएँ दीं। सीएस कंपनी की प्रमुख रुपांजना दे ने अपना अनुभव साझा किया। 160 विद्यार्थियों ने ऊषा उत्थुप जी के ऊर्जा से भरे वक्तव्य का आनंद लिया और उनके गीतों के साथ स्वर मिलाया। आर जे कुहेली 91.9एफ एम, आर जे जिमी टेंगरी, सुकिरती अग्रवाल, सुमंत्र बोस, विशाल दवे, सीएस उदित जालान, प्रो विवेक पटवारी इस सेमिनार के महत्वपूर्ण पैनलिस्ट रहे। कॉमर्स और अन्य विभाग के प्रोफेसर इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

समीक्षा – काव्य संग्रह ‘एक उत्सव :एक महोत्सव’ बावरे मन की ये ज़ुबानी चिट्ठी

डॉ वसुंधरा मिश्र, भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज, हिंदी विभाग, कोलकाता
वीणा जैन कृत ‘एक उत्सव: एक महोत्सव’ कविता वीणा जैन का सातवाँ कविता संग्रह है। आख़िर माजरा क्या है?, तरणी तरणी आदि कई कविता संग्रहों की रचनाकार वीणा जैन जानी-पहचानी एक स्थापित कवयित्री हैं। प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ अक्सर प्रकाशित होती रहती हैं। दिलचस्प बात यह है कि वह चित्रकार भी हैं। तैलचित्रों में उन्हें महारत हासिल है। उनकी एकल प्रदर्शनी कोलकाता और विशाखापत्तनम जैसे शहरों में लग चुकी हैं। एक उत्सव: एक महोत्सव अस्सी कविताओं का संग्रह है जो अक्टूबर 2022 में प्रकाशित हुई है। किताब के आवरण की सादगी कवयित्री की सहजता, सरलता और गहराई से रूबरू कराती है। आवरण कुंवर रवीन्द्र ने बनाया है जिसमें जीवन के खुरदरेपन का अहसास तो है ही लेकिन जीवन का महोत्सव भी समाया हुआ है।
प्रत्येक कविता नए पृष्ठ से आरम्भ होती है। कविताओं में कवयित्री का चित्रकार मन अपनी तूलिका के रंग भी बिखेरती नजर आती है । 90 के दशक से कवयित्री की जो शब्दों की नाव चली वह आज भी सागर की मदमाती लहरों से अनादि काल से लड़ती हुई उस स्त्री की कथा को कहती चली जाती है जो सागर तट पर खड़ी किसी अप्रत्याशित विजय गाथा की कठिन भूमिका को लिखने का कार्य कर रही है। ‘वो दीप जला कर बैठी थी,और तेल चुकने वाला था।’ उम्र के इस पडा़व पर भी वह विचारशील और जीवंतता से परिपूर्ण है।
पांच दशकों से कविता और चित्रकारी एक दूसरे के पूरक बन रहे हैं। 1946 में राजस्थान के सरदाशहर में जन्मी वीणा जैन सरस्वती की सच्ची साधक हैं जिन्होंने वाक् देवी की आराधना की और उन्हें शब्दों की भाव भूमि पर उतारा है ।
वीणा की कविताओं को पढ़ते हुए अनामिका की
‘स्त्रियाँ’ कविता स्मरण हो आईं हैं जिसमें अनामिका क्रियात्मक बोध के बरक्स स्त्री के वजूद को तलाशती हैं । इस कविता में पढ़ना, देखना और सुनना तीन क्रियाओं के प्रयोग द्वारा समाज की उस चेतना को परखा गया है जिसके माध्यम से वे स्त्री को पढ़ते, देखते और सुनते हैं और इतना ही नहीं, भोगने की व्यथा की कथा भी अनामिका लिखती हैं।
वीणा जैन की ‘औरत ‘कविता में कवयित्री का मानना है कि कहीं यह बदले की भावना तो नहीं है, कहीं अतीत के इतिहास का रूपांतरण तो नहीं हो रहा है? ये पंक्तियाँ सचेत कराती हैं – –
‘यह दारुण दौड़ किसलिए?
वजूद को ही…
नर्क की ओर ढकेलता
ये मोड़ किसलिए?
… तुम तो खुद रोशनी हो…
अपनी रोशनी को विस्तार दो…
पुरुष!!
सहयात्री है तुम्हारा
तुम भी तो हमसफ़र हो…
फिर ये कैसी प्रतिस्पर्धा है
कैसा अंतर्द्वंद है?’ (पृष्ठ 75 एक उत्सव :एक महोत्सव)
विभिन्न अस्मिताओं के संघर्ष का प्रतिनिधित्व करते-करते स्त्री के विभिन्न अहसास जिंदगी से पूछे अनगिनत सवालों के जवाब के रूप में कवयित्री’ आहट’ कविता में अपनी’ भोली सी अनुभूतियाँ’ महसूस करती है और उसे अच्छे दिनों की आहट समझती है। (पृष्ठ 39 एक उत्सव)
‘एक अनूठा किस्सा हूँ मैं’ कविता में कवयित्री मानती है कि इस कायनात में, चहल-पहल में, एक हलचल, बैचेनी एक तिश्नगी, भ्रांत, क्लांत वातावरण में कितने ही मुखौटे लगाए इस चहल-पहल का अहम हिस्सा है।
स्त्री के अतीत, वर्तमान और भविष्य की तमाम यादों और रंगों का शब्द चित्रण इस काव्य संग्रह के उत्सव और महोत्सव हैं।
प्रथम कविता ‘जब मैं मुझसे मिलती हूँ!!’ में कवयित्री स्पष्टीकरण करती है। चिड़िया , नवल नवोढा़, नव प्रसूता, झुर्रियों के जंगलों से चुपचाप गुजरना, बचपन से आज तक की सारी यादों को बटोरती हुई वह ध्यान में चली जाती है और मोहबंध से मुक्त हो शून्य में समा जाना चाहती है।
इस जीवन को ही’ एक उत्सव एक महोत्सव ‘के रूप में देखती है। जन्म को उत्सव और मृत्यु को महोत्सव में उसका जीवन पिरोया है। इस जीवन के लंबे सफ़र में पथरीले पत्थर, सुंदर घाटियां, समंदर, गीत गाती नदियां, कंटीले जंगल, लहलहाती हरियाली के साथ – साथ मृत्यु के महोत्सव का इंतज़ार है। कवयित्री अपनी आध्यात्मिक यात्रा में  मृत्यु के महोत्सव के देखने की इच्छा व्यक्त करती है जो जादू है।( पृ 14)
कवयित्री  ध्यानस्थ हो कविता के शब्दों में जीवन के सभी पडा़व, सभी पहलुओं पर विचार रखती है।
वीणा की कविताओं को तीन प्रकार से महसूस किया जा सकता है। अध्यात्म का प्रथम, द्वितीय और तृतीय सोपान जहांँ वह साधक के अंतिम पड़ाव को पार करती नजर आ रही है।
कवयित्री की कविता सुलगते मरुस्थल से भी गुजरी है लेकिन अब उसकी कविता थक गई है वह परिंदों की मीठी बोलियाँ सुनने के लिए आतुर है। पृ 20
जीवन की अंतिम यात्रा में सत्य को जानने के लिए उत्सुक है कवयित्री  कहती है कि ‘कुछ ही दिन तो बचे हैं शेष.. ‘पृ 23
वह स्त्री की तुलना उस नदी से करती है जो निरंतर बहती रहती है और वह थकती नहीं है। वह कहती है नदी भी तो स्त्री है मेरी तरह क्या स्त्री थकती नहीं पृष्ठ 48 । लोग मुझे कहते हैं कवि , मैं ठहरी हुई अनुभूति हूँ उड़ता पंछी कविता में कवयित्री कहती है ।मैं अंतर्मुखी कविता मेरी सखी जैसे पंक्तियाँ कवयित्री के साधक मन को व्यक्त करती हैं।
बिंब प्रयोग भी अद्भुत हैं और स्त्री की उपमा नदी की मनःस्थिति और उसके भौतिक रूप के साथ समानता देखती है – – नदी की छरहरी काया, उसके तीखे कटी – कटाव, काजल घुले ज्यूं नयन कजरारे, दिपते – झिपते किनारे और अद्भुत न्यारे नज़ारे पृष्ठ 69 आदि के प्रयोग से कवयित्री एक कविता बना लेती है।  छलक – छलक कर अंतर को छू लेती नदी कवयित्री को शीत की भोर, छितरे- छितरे श्यामघन से जोड़ते हैं तो  केदारनाथ के आंसूं समंदर, प्रेम, कुछ दिन हुए, खुशी की गौरेया, रुक जाओ वसंत, यायावरी, इस पिघलती उम्र में आदि कविताओं में कवयित्री की अनुभूति के स्तर की ऊंँचाइयों को देखा जा सकता है।
भूख से रोता बच्चा, दूर वहाँ परदेस में, जहाज की डेक पर खड़ी मैं और कोलकाता का रिक्शेवाला आदि कविताओं में कवयित्री की संवेदनशीलता का और सच्चे मानवीय भावों के चित्र मिलते हैं ।
‘औरत’ कविता में कवयित्री अपनी कथा के क्लाईमेक्स को लाती है और अपनी इच्छाओं को जाहिर करती है – – छूना है आकाश /ढूंढने है अपने इंद्रधनुष /हाँ अब वक्त आ गया है/बेवजह कसी बेड़ियों को तोड़कर /अपने अद्भुत सपनों को सच करने का वक्त। पृष्ठ 75
औरत को समझाती हैं – तू औरत ही अच्छी है /औरत ही बनी रहना… पृष्ठ 76 ।उसे एक अदद नखलिस्तान की खोज है। पृष्ठ 114 अंतिम कविता ‘तुम नहीं समझोगे’ में ब्रह्मांड के लिए चिट्ठी  है जिसमें कई अनछुई चाहतें लिख देती है।
उसका बावरा मन है। वह जानती है कि ये जुबानी चिट्ठी है। पृष्ठ 128।
‘एक उत्सव :एक महोत्सव’ कविता संग्रह एक स्त्री के मन के भावों के विभिन्न चित्र बिंबों को उकेरती है। भाषा सरल और सहज है। कविताओं में ताल, छंद और लय  की गति है जो सौंदर्य को बढ़ाता है। मन की उदासी और निराशा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं ये कविताएँ। पठनीय हैं।
किताब – एक उत्सव: एक महोत्सव
विधा – कविता
रचनाकार – वीणा जैन
प्रकाशक – कलमकार मंच
मूल्य- 170 रुपए
पेज संख्या- 128
आवरण-कुंवर रवीन्द्र
संस्करण वर्ष – 2022
कवयित्री सम्पर्क- [email protected]

भवानीपुर कॉलेज के शिक्षकों और गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्यों के बीच क्रिकेट टूर्नामेंट

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 17 और 18 फरवरी, 2024 को नॉर्दर्न पार्क में इंट्रा कॉलेज टीचर्स और नॉन-टीचिंग स्टाफ क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया। प्रथम बार इस तरह का टूर्नामेंट खेला गया जिसे आईपीएल प्रारूप के अनुसार अपनाया गया । इसमें लगभग 60 शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक  स्टाफ सदस्यों ने 10 फरवरी, 2024 को कॉलेज के 6वीं मंजिल के कॉन्सेप्ट हॉल में आयोजित नीलामी में भाग लिया।
नीलामी के दौरान, कॉलेज के विभिन्न विभागों से छह कप्तान नियुक्त किए गए। उन्हें 10 खिलाड़ियों वाली अपनी-अपनी टीमों के लिए खिलाड़ियों को खरीदने के लिए प्रत्येक को 5 लाख अंक वितरित करने का काम सौंपा गया था। नीलामी में शामिल सभी लोगों के लिए यह एक मनोरंजन और रुचि का एक बड़ा स्रोत साबित हुआ। यह मैच भवानीपुर के नार्दन पार्क में संपन्न हुआ।  सुबह 8 बजे से शाम 4.30 बजे तक क्रिकेट खेला गया। जिसमें भागीदारों की कुल संख्या 60 रही और छह टीमों में विभाजित समूह अ में टाइगर्स सस्पो चक्रवर्ती कप्तान , रॉयल आर्किमन लाहिड़ी बी कॉम मॉर्निंग कप्तान, योद्धा बिजॉय सामंतों कप्तान, समूह – बी चैलेंजर्स चंदन कुमार झा बी कॉम मॉर्निंग, कप्तान, रेंजर्स निरभ्र बसु साइंस कप्तान, सैनिक सायन सरखेल आर्ट्स कप्तान। टाइगर्स, वॉरियर्स, रॉयल्स, सोल्जर्स, चैलेंजर्स और रेंजर्स में विभाजित टीमों के नाम हैं । तीन टीमों ने ग्रुप ए के भीतर लीग मैचों में प्रतिस्पर्धा की, जबकि शेष तीन टीमों ने 17 फरवरी 2024 को ग्रुप बी में खेला।
लीग मैचों के बाद, प्रत्येक समूह से दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचीं, जिसका समापन 18 फरवरी, 2024 को आयोजित फाइनल मैच में हुआ। वॉरियर्स और टाइगर्स ने पहला सेमीफाइनल खेला और सोल्जर एंड चैलेंजेस ने दूसरा सेमीफाइनल खेला और फाइनलिस्ट टाइगर्स और वॉरियर्स थे, जिन्होंने रोमांचक फाइनल मुकाबले में अपने कौशल और खेल कौशल का प्रदर्शन किया और टाइगर्स टूर्नामेंट में चैंपियन बने। कॉलेज के खेल अधिकारी रूपेश गांधी ने बताया कि यह टूर्नामेंट एक शानदार सफलता थी, जिससे हमारे कॉलेज के शिक्षकों और गैर-शिक्षण स्टाफ सदस्यों के बीच सौहार्दपूर्ण और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया विद्यार्थियों के साथ इबीजा फ़र्न रिज़ॉर्ट में पिकनिक

कोलकाता ।  भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 200 छात्र छात्राओं के साथ 26 फरवरी 2024 को, 14 संकायों के साथ लगभग  इबीसा फ़र्न रिज़ॉर्ट में पिकनिक मनाया गया जिसका उद्देश्य शिक्षक, शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों के साथ आपसी विश्वास को मजबूत करना था । भवानीपुर कॉलेज के परिसर से  4 बसों में विद्यार्थियों ने अपनी यात्रा  शुरू की जिसमें विद्यार्थियों ने अपने स्पोर्ट्स गियर, म्यूजिक सिस्टम और चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान  साथ लिए डेढ़ घंटे की लंबे सफर को तय किया। रास्ते में यात्रा को आनंददायक बनाने के लिए बीईएससी का नारा लगाते हुए गीत और नृत्य किए । भरपूर नाश्ते के बीच प्रकृति का अभिवादन और स्वागत किया गया, पिकनिक में ज्ञात और अज्ञात चेहरों से जुड़ने के कारण परिचय का दायरा भी बढ़ा। दिन भर में शामिल होने के लिए कई विकल्पों के साथ, रिज़ॉर्ट में जिप लाइन, बोटिंग, साइकिलिंग के साथ-साथ शतरंज, टेबल टेनिस, कैरम जैसे खेल भी उपलब्ध थे। दोपहर तक छात्र छात्राओं ने  डिस्कोथेक की ओर  गए और दोपहर के भोजन तक जमकर नृत्य किया। दोपहर का भोजन हो चुका था और सभी ने प्रकृति का आनंद लिया परिसर में आनंद और म्यूजिकल चेयर खेल जमकर खेला। शाम 4.00 बजे तक इबीज़ा रिज़ॉर्ट में दिन भर चले उत्सव को समाप्त करने के लिए चाय और नाश्ते की पेशकश की गई। 5.30 बजे तक छात्र पुराने और नए चेहरों के साथ दोस्ती के अपने बंधन को नवीनीकृत करते हुए शाम को कॉलेज लौट आए। कॉलेज की पिकनिक जीवन की मीठी यादों को संजोए रखती है। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

महिला दिवस पर आपसे कुछ सवाल शुभजिता के

गृहलक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती…जाने कितनी शुभकामनाएं….पर क्या स्त्री के सम्मान का यह मापदंड हो सकता है । हम यह सोच ही रहे थे कि वेबदुनिया पर हमें यह प्रश्न मिले और ऐसा लगा कि यह प्रश्न तो वह प्रश्न हैं जो हम भी पूछना चाहते हैं तो चलिए वेबदुनिया पर प्रीति सोनी ने जो शानदार प्रश्न पूछे हैं, वही शुभजिता भी आपसे पूछना चाहती है…चलिए अब बताइए –
1. क्या किसी बस, ट्रेन या सार्वजनिक स्थल पर खड़ी महिला को सीट देने के लिए आप पहल करते हैं, या फिर आप अपनी सीट पर बैठे-बैठे उन्हें परेशान होता देखना पसंद करते हैं?
2. क्या आप किसी महिला को उसके अच्छा या बुरा दिखने पर घूर-घूरकर ऊपर से नीचे तक बार-बार देखते हैं, या एक बार नजर देखने के बाद दूसरी बार ऐसा नहीं करते?.
3. किसी महिला की गलती होने पर आप उससे बदतमीजी से बात करते हैं, या सामान्य तरीके से उसे समझाने का प्रयास करते हैं?
4. सड़क पार कर रही, या वहां से गुजर रही महिला या किशोरी पर क्या आप अच्छा या बुरा कमेंट करते हैं, या सहयोगात्मक रवैया जताकर उसे निकलने के लिए रास्ता देते हैं?
5. क्या महिलाओं की निजता से जुड़ी किसी बात पर आप अकेले में या समूह में खि‍सियाकर अपनी हंसी छुपाने का प्रयास करते हैं?
6. क्या आपने कभी महिला या किसी युवती को अवांछित रूप से छूने का प्रयास किया है? अपने अनुसार परिस्थि‍ति न बनने या आपकी बात न मानने पर आप महिलाओं के चरित्र को लेकर सवाल उठाते हैं ?
7. कुछ स्थि‍तियों में क्या आप महिलाओं की मदद सिर्फ इसलिए करते हैं, कि आपको उन पर दया आ रही हो?
8. क्या आप अपने घर में या बाहर महिलाओं के लिए अपशब्द या गाली का प्रयोग करते हैं, या फिर उनपर हथ उठाने का प्रयास करते हैं?
9. क्या आप महिलाओं को केवल उसकी देह की दृष्टि से देखते हैं, या फिर उसका अपना कोई व्यक्तित्व और अस्तित्व है इस पर यकीन करते हैं?
10. किसी महि‍ला के सफल होने या प्रतिष्ठा और कार्य के मामले में आपसे आगे निकल जाने की स्थि‍ति में आप उसका उत्साहवर्धन करते हैं, या उसका उत्साह कम करने का प्रयास करते हैं ?
इन सारे सवालों के सही जवाब आप खुद जानते हैं, लेकिन अगर आपके जवाब, सही जवाबों से मेल नहीं खाते, तो आपको एक बार विचार करने की आवश्यकता है, खुद के लिए…कि क्या आप सच में नारी का सम्मान करते हैं।
(साभार – वेबदुनिया)

महाशिवरात्रि पर ऐसे पंचामृत 

महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ का जल, दूध, घी, शहद, गन्ने के रस के साथ पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इतना ही नहीं, शिव भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में पंचामृत भी बांटा जाता है. आपको बता दें, पंचामृत पांच पवित्र चीजों से बनता है। इसे बनाने के लिए पांच अमृत सामग्री- दूध, दही, घी, शहद और चीनी का उपयोग किया जाता है। दरअसल, सभी देवी-देवताओं की पूजा में पंचामृत का उपयोग किया जाता है। लेकिन महादेव को यह बहुत प्रिय है. ऐसे में अगर आप भी महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा के लिए घर पर पंचामृत बनाना चाहते हैं तो इस रेसिपी को अपनाएं।
पंचामृत बनाने के लिए सामग्री- 5-6 बड़े चम्मच दही, 1 बड़ा चम्मच घी, 2 कप दूध, 1 चम्मच सूखे मेवे, 2 बड़े चम्मच पिसी हुई चीनी,1 बड़ा चम्मच शहद, 4-5 तुलसी के पत्ते
पंचामृत बनाने की विधि- पंचामृत बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन को अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें। इसके बाद बर्तन में दूध, दही, घी, शहद और चीनी डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें। आप चाहें तो इसके लिए ग्राइंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अब इस मिश्रण में तुलसी के पत्ते और कटे हुए सूखे मेवे मिलाएं। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए पंचामृत तैयार है।

गोटा पट्टी से सजाएं साधारण सलवार कमीज

हम सभी को बाज़ार में खरीदारी करना बहुत पसंद होता है। इसलिए हम अक्सर ट्रेंडी डिज़ाइन वाले कपड़े पहनते हैं। लेकिन कई बार हम एक ही डिजाइन के कपड़े पहनकर थक जाते हैं। ऐसे में आप अपने सादे कपड़ों को फैंसी बनाने के लिए गोटा पट्टी का इस्तेमाल कर सकती हैं।
इसमें आपका लुक भी अच्छा लगेगा. इसके अलावा आपके कपड़ों का लुक भी बदल जाएगा। आइए हम आपको बताते हैं कि आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं.
सूट के गले पर प्रयोग करें -अगर आपको लगता है कि सूट की नेकलाइन प्लेन है तो आप इसे फैंसी बनाने के लिए इस पर गोटा पट्टी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आपको एक पतली पट्टी लगानी होगी ताकि आप इसकी परत बना सकें। इसके बाद आप इससे चौकोर या बॉक्स डिजाइन बना सकते हैं। आप चाहें तो इसे सूट की स्लीव्स और बॉटम पर भी लगा सकती हैं। इसके साथ आपका सिंपल सूट अच्छा लगेगा।
सूट के किनारे पर गोटा पट्टी लगाएं – अगर आपको लगता है कि सूट में प्रिंट की कमी के कारण वह प्लेन दिखता है तो ऐसे में आप इसके किनारों पर गोटा का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए एक पतली पट्टी का प्रयोग करें। ऐसा स्कार्फ खरीदें जो सूट के रंग से मेल खाता हो और फिर आप चाहें तो इसे दुपट्टे के ऊपर भी पहन सकती हैं। इससे आपका सूट भी अच्छा लगेगा. इसके अलावा आप चाहें तो छोटे-छोटे फूलों के डिजाइन बनाकर भी गर्दन पर लगा सकती हैं।
प्रिंटेड सूट पर गोटा पट्टी लगाएं – अगर आपका सूट प्रिंटेड है तो आप उसे फैंसी बनाने के लिए गोटा पट्टी का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आप इसे गर्दन और आस्तीन और नीचे के बॉर्डर पर लगा सकती हैं। इससे आपका सूट अच्छा दिखेगा। इसके लिए आप चाहें तो मोटे बकरे का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसे पीस आपको बाजार में 20 से 40 रुपये में मिल जाएंगे ।

‘चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई’, गाने से मिली पंकज उधास को गायकी में पहचान

मुम्बई । ‘चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई’ यह गाना किसकी जुबान पर नहीं होगा। जो लोग विदेश में बसे हैं या अपने घर से दूर रहते हैं। उनके गानों की पसंदीदा सूची में पंकज उधास का ये गाना शामिल जरूर होगा। ‘चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई’ से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले पंकज उधास का 26 फरवरी को लंबी बीमार के बाद मुंबई में निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। पंकज उधास का जन्म 17 मई 1951 को गुजरात के राजकोट के निकट जेटपुर में जमींदार गुजराती परिवार में हुआ। उनके बड़े भाई मनहर उधास जाने माने है।
घर में संगीत के माहौल से पंकाज उधास की भी रूचि संगीत की ओर हो गई। महज सात वर्ष की उम्र से ही पंकज उधास गाना गाने लगे। उनके इस शौक को उनके बड़े भाई मनहर उधास ने पहचान लिया और उन्हें इस राह पर चलने के लिये प्रेरित किया। मनहर उधास अक्सर संगीत से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया करते थे। उन्होंने पंकज उधास को भी अपने साथ शामिल कर लिया। 1980 में रलीज हुई पहली एल्बम पंकज उधास ने गजल के अलावा बहुत सारी फिल्मों में गाने भी गाये। वर्ष 1986 में आई फिल्म ‘नाम’से उनको पहचान मिली। उधास ने नाम फिल्म में एक गाना ‘चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई’, गाया था।
इस गाने के बाद पंकज उधास ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई ने उनको नई पहचान दी और उधास की आवास घर, घर तक पहुंचीं। उनकी पहली गजल एल्बम ‘आहट’ 1980 में रिलीज हुई थी। यहां से उन्हें सफलता मिलनी शुरू हो गयी । 2009 तक 40 एल्बम रिलीज कर चुके थे। कई फिल्मों में गाये सुपरहिट गाने गायक के तौर पर उन्होंने साजन, ये दिल्लगी और फिर तेरी याद आई जैसी कुछ फिल्मों में गाने गाये थे। पंकज उधास की आखिली एल्बम 2010 में आया था। पंकज उधास को ‘चिठ्ठी आई है, आई है चिठ्ठी आई’ के अलावा चांदी जैसा रंग है तेरा, थोड़ी, थोड़ी पिया करो, जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके भी गाने गाए हैं।
इसके अलावा नाम फिल्म का में ‘तू कल चला जाएगा, तो मैं क्या करूंगा’, हम आपके हैं कौन फिल्म में ‘दीदी तेरा देवर दीवाना’, पास वो आने लगे धीरे-धीरे, प्यार दिलों का मेला है…गाने भी गाये थे। एक बार पकंज को एक संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेने का मौका मिला जहां उन्होंने .ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी (गीत गाया। इस गीत को सुनकर श्रोता भाव.विभोर हो उठे। उनमें से एक ने पंकज उधास को खुश होकर 51 रूपये दिए। इस बीच पंकज उधास राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी से जुड़ गए और तबला बजाना सीखने लगे। कुछ वर्ष के बाद पंकज उधास का परिवार बेहतर जिंदगी की तलाश में मुंबई आ गया। पंकज उधास ने अपनी स्नातक की पढ़ाई मुंबई के मशहूर सैंट जेवियर्स कॉलेज से हासिल की। इसके बाद उन्होंने स्नाकोत्तर पढ़ाई करने के लिये दाखिला ले लिया लेकिन बाद में उनकी रूचि संगीत की ओर हो गई और उन्होंने उस्ताद नवरंग जी से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी।
पंकज उधास के सिने कॅरियर की शुरूआत 1972 में प्रदर्शित फिल्म (कामना) से हुई लेकिन कमजोर पटकथा और निर्देशन के कारण फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह असफल साबित हुई। इसके बाद गजल गायक बनने के उद्देश्य से पंकज उधास ने उर्दू की तालीम हासिल करनी शुरू कर दी। वर्ष 1976 में पंकज उधास को कनाडा जाने का अवसर मिला और वह अपने एक मित्र के यहां टोरंटो में रहने लगे। उन्हीं दिनों अपने दोस्त के जन्मदिन के समारोह में पंकज उधास को गाने का अवसर मिला। उसी समारोह में टोरंटो रेडियो में हिंदी के कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले एक सज्जन भी मौजूद थे उन्होंने पंकज उधास की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें टोरंटो रेडियो और दूरदर्शन में गाने का मौका दे दिया। लगभग दस महीने तक टोरंटो रेडियो और दूरदर्शन में गाने के बाद पंकज उधास का मन इस काम से उब गया।

इस तरह संवारिए अपना छोटा सा घर

जरूरी नहीं है कि घर को सजाने के लिए बेहद महंगे शोपीस या अन्य महंगी चीजों का ही इस्तेमाल किया जाए। कई बार घर की सादगी ही उसकी असली खूबसूरती होती है। चूंकि घर आपका है तो उसमें अपनेपन का एहसास होना बहुत जरूरी है और एक घर तभी घर बनता है, जब आप उसे अपने हाथों से सजाते हैं। इसे अपने प्यार के रंगों से भरें. तो आज हम आपको घर को सजाने के कुछ बेहद आसान लेकिन बेहद उपयोगी टिप्स बता रहे हैं-
फर्नीचर को पुनर्व्यवस्थित करें – किसी भी घर में फर्नीचर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लेकिन हर बार फर्नीचर बदलना संभव नहीं है, लेकिन अगर आप अपने घर में बदलाव चाहते हैं तो इसे अपने घर की जगह के अनुसार पुनर्व्यवस्थित करें। हालाँकि, आप चाहें तो अपने फर्नीचर को ब्राइट पेंट करके नया लुक दे सकते हैं। यकीन मानिए यह छोटा सा बदलाव आपके घर का पूरा लुक बदल देगा।
एक केंद्र बिंदु बनाएं – कमरे में एक केंद्र बिंदु बनाने का प्रयास करें। जब आप किसी कमरे की एक दीवार को केंद्र बिंदु बनाते हैं, तो इसका फायदा यह होता है कि यह कमरे के पूरे स्वरूप को संतुलित करती है। साथ ही आपको कमरे में हर जगह सजावट पर पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है। इस प्रकार की सजावट जेब के अनुकूल होती है। हालाँकि, दीवार को केंद्र बिंदु बनाना आवश्यक नहीं है। आप कमरे में कोई बड़ा गमला रखकर या किसी अन्य तरीके से फोकल प्वाइंट बना सकते हैं।
पर्यावरण के अनुकूल बनें – अगर घर में हरियाली हो तो पूरा घर खूबसूरत दिखता है। पौधों की मदद से अपने घर को सजाने के कई फायदे हैं। ये सस्ते तो हैं ही, आपकी सेहत भी अच्छी रखते हैं. आप कई तरीकों से अपने घर में हरियाली ला सकते हैं। आप चाहें तो एक दीवार पर पौधे लगाकर उसे नया लुक दे सकते हैं या फिर अगर आपका घर छोटा है तो आप हैंगिंग प्लांटिंग की मदद भी ले सकते हैं। कोशिश करें कि घर में ऐसे पौधों को जगह दें जो किचन के साथ-साथ हवा को भी शुद्ध करने में आपकी मदद कर सकें।
दीवार को नया आकार दें – कमरे की दीवारें आपके पूरे कमरे की शान होती हैं। इसमें बदलाव करने से कमरे में जान आ जाती है। आप इसे कई तरीकों से नया लुक दे सकते हैं। चाहे आप दीवारों का रंग बदलना चाहें या फिर आजकल 3डी वॉल डिजाइन का चलन है जो कमरे को रियल लुक देता है।
छोटे परिवर्तन – अगर आप अपने घर में कुछ नया चाहते हैं तो छोटी-छोटी चीजों में बदलाव करें। जैसे आप कुशन कवर, टेबल रनर, बेडशीट, पर्दे आदि बदलते हैं। साथ ही घर के लिए ऐसे कुशन कवर, टेबल रनर, बेडशीट, पर्दे चुनें जो न सिर्फ घर में रंगत भरें बल्कि थोड़े अलग और फंकी भी हों।