Wednesday, September 23, 2026
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मानसून बेहतर रहा तो साल के अंत तक सेंसेक्स पहुंचेगा 35000 के पार!

मुंबई।मौसम विभाग ने इस साल बेहतर मानसून के संकेत दिए हैं। इसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर मानसून की उम्मीद से बाजार में निवेश बढ़ेगा। अगर जुलाई से सितंबर तक मानसून बेहतर रहा तो सेंसेक्स में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा सरकार की मौद्रिक नीति भी निवेशकों को बाजार में निवेश करने के लिए प्रेरित करेगी।

अंग्रेजी अखबार द इकनॉमिक टाइम्स ने डच बैंक के मैनेजिंग डॉयरेक्टर अभय लाइजावाला के हवाले से कहा है कि मानसून बेहतर होता है तो इससे ग्रामीण भारत में विकास की गति और तेज करने में बढ़त मिलेगी।

पिछले दो सालों से कमजोर मानसून देखने के बाद मौसम विभाग ने पिछले हफ्ते बयान जारी कर कहा था कि इस साल पूरे देश में उम्मीद से बेहतर मानसून देखने को मिलेगा।

मौसम विभाग के इस अनुमान के बाद से ही शेयर बाजार में रौनक नजर आई और सेंसेक्स करीब 351 अंक तक उछलकर 27 हजार के पार हो गया। इसके अलावा विकास दर और निवेश की बेहतर संभावनाएं भी बाजार को मजबूत करने में अहम भूमिकाएं निभाएंगी।

बाल विवाह की सूचना देने वाले को 100 रुपए का टॉक टाइम

मंदसौर। महिला सशक्तिकरण एवं बाल संरक्षण विभाग ने हाल ही में जिले में बाल विवाह की सूचना देने वालों को 100 रुपए का टॉकटाइम देने की योजना लागू की है।

शुरुआत में ही योजना के अच्छे परिणाम मिलने ले हैं। अभी तक जिले में 7 लोगों को 100-100 रुपए का टॉकटाइम दिया जा चुका है। जिले के बंजारों का खेड़ा गांव में बाल विवाह होने की सूचना के लिए तीन लोगों को टॉक टाइम दिया गया है।

विभाग के राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि यह योजना केवल आम लोगों के लिए ही है सरकारी, संविदा कर्मचारियों व जनप्रतिनिधियों पर लागू नहीं है।

हालात ये हैं कि एक बाल विवाह की शिकायत दो या तीन जगहोें से मिल रही है। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2014-15 में कुल 42 बाल विवाह स्र्कवाए गए थे। इस वर्ष 16 अप्रैल तक ही 59 बाल विवाह स्र्कवाए जा चुके हैं

पद्मश्री लेकर लौटे ‘राजा’ का यूं हुआ स्वागत

रांची (झारखंड)। राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित पहड़ा राजा सिमोन उरांव शनिवार को रांची लौटे। रेलवे स्टेशन पर अखिल भारतीय आदिवासी महासभा ने उनका शानदार स्वागत किया। उनके सम्मान में ढोल-नगाड़े और गाने-बाजे के साथ सैंकड़ों लोग मौजूद थे। सिमोन उरांव राजधानी एक्सप्रेस से नई दिल्ली से रांची आए। स्टेशन पर सबसे पहले उर्सलाइन स्कूल की स्टूडेंट्स ने सिमोन उरांव को बुके देकर स्वागत किया।

स्टेशन पर सिमोन उरांव को देखने भीड़ लगी हुई थी। यात्री और रेलवे कर्मचारी पद्मश्री से सम्मानित उरांव की फोटो मोबाइल में कैद करते दिखे।

सिमोन ने जब बांध बनाना शुरू किया था तो लोग उनका मजाक तक उड़ाते थे। बीते मंगलवार को इन्हें राष्ट्रपति ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा।

स्टेशन से बाहर खुले जिप्सी में उरांव को सम्मान के साथ ले जाया गया। वे सबसे पहले रेलवे गेस्ट हाउस गए। वहां पर उनका जोरदार स्वागत हुआ।

सिमोन के स्वागत में युवा कई बाइकों पर सवार होकर आए थे। वे सिमोन के स्वागत में सड़क के दोनों ओर मौजूद रहे।

छोटी-छोटी नहरों को मिलाकर तीन बांध बना डाले

सिमोन ने छोटी-छोटी नहरों को मिलाकर तीन बांध बना दिया। आज इन्हीं बांधों से करीब 5000 फीट लंबी नहर निकालकर खेतों तक पानी पहुंचाया जा रहा।

सिमोन झारखंड के रहने वाले हैं। इनकी उम्र 83 है। ये पहड़ा राजा हैं।

हौसले पर उम्र को नहीं होने दिया हावी

सिमोन का कॉपी-किताब से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहा। न कोई तकनीक और न ही पैसे थे। इनके पास था तो सिर्फ जिद और कुछ कर गुजरने का जज्बा।

पहड़ा राजा सिमोन उरांव ने अपने हौसले पर उम्र को कभी हावी होने नहीं दिया।

बाबा के नाम से प्रसिद्ध सिमोन ने वह कारनामा कर दिखाया, जो सरकारी मशीनरियां करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं कर पाईं।

साल में तीन फसलें उगाई जाती हैं

आज उनके बनाए बांधों से पांच गांवों की सूरत बदल गई है। एक ब्लॉक की यह कहानी पूरे झारखंड के लिए मिसाल बन गई।

सिंचाई सुविधा के अभाव में जहां एक फसल के लाले थे, वहां साल में तीन फसलें उगाई जाने लगीं।

पलायन यहां की सबसे बड़ी समस्या थी। सिमोन को यह कचोटता था। 1961 में वे कुदाल लेकर निकल पड़े।

बांध बनाना शुरू किया। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मगर हार नहीं मानी। धीरे-धीरे ग्रामीणों का साथ मिला और कारवां बनता गया।

ग्रामीणों की आर्थिक समस्याएं दूर करने के लिए फंड बनाया। बैंक में खाता खुलवाया।

अब ग्रामीणों को जरूरत के समय इसी फंड से 10-10 हजार रुपए की सहायता दी जाती है।

 

ओलिंपिक का टिकट पाने वाली पहली भारतीय बनीं दीपा

नई दिल्ली. सीनियर जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने रियो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है। ऐसा करने वाली वे भारत की पहली जिम्नास्ट हैं। रविवार को उन्होंने रियो डि जेनेरियो ओलिंपिक के आखिरी क्वालिफायर में शानदार परफॉर्मेन्स दी थी। 22 साल की दीपा ने कुल 52.698 प्वाइंट्स अपने नाम किए।

दीपा वुमन कैटेगरी में चार डिवीजन में से पहली में नौवें स्थान पर  रहीं।
दीपा ने सबसे मुश्किल माने जाने वाला प्रोडुनोवा वॉल्ट किया। इससे उन्हें 15.066 प्वाइंट्स मिले।
14 कैंडिडेट्स में यह सबसे ज्यादा स्कोर था। लेकिन अनईवन बार पर उनका परफॉर्मेन्स अच्छा नहीं रहा, जिसके कारण उन्हें केवल 11.700 प्लाइंट ही मिले। ये 14 में से दूसरी सबसे खराब परफॉर्मेन्स थी।

इसके बाद त्रिपुरा की इस प्लेयर ने बीम और फ्लोर एक्सरसाइज में 13.366 और 12.566 जुटाए। इसी के साथ ही, उनकी सीट ओलिंपिक के लिए पक्की हो गई।

ओलिंपिक अगस्त में होना है।

जीत चुकी हैं ब्रॉन्ज

2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ड मेडल जीता था। ऐसा करने वाली भी पहली महिला जिम्नास्ट थीं।

अगस्त 2015 में हिरोशिमा एशियन चैम्पियनशिप में ब्रॉन्ज जीता।

नवंबर 2015 में दीपा वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ओलिंपिक का टिकट पाने से चूक गई थीं। हालांकि, यहां भी वे फाइनल तक पहुंचने वाली पहली इंडियन वुमन जिम्नास्ट थीं।

 

द फर्न रेसिडेंसी ने पोएला बैशाख को बनाया खास

पोएला बैशाख हाल ही में गुजरा और बंगाल की इस अनोखी परम्परा में स्वाद का रिश्ता न जुड़े, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। हाल ही में द फर्न रेसिडेंसी होटल ने पोएला बैशाख को खास बनाते हुए पेश किया बंगाली फूड फेस्टिवल। इस मौके को खास बनाने के लिए टॉलीवुड अभिनेत्री सुचन्द्रा वानिया भी मौजूद थीं। इस फूड फेस्टिवल में कई तरह के परम्परागत वेज  और नॉनवेज व्यंजन मौजूद थे जिनका लुत्फ लोगों ने बखूबी उठाया।

बॉक्स ऑफिस पर छा गयी ‘द जंगल बुक’

शाहरुख खान की ‘फैन’ जैसी फिल्म से सामना कर रही हॉलीवुड फिल्म ‘द जंगल बुक’ ने 100 करोड़ क्लब में एंट्री ले ली है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शाहरुख खान की फिल्म को टिकने ही नहीं दे रही है। रविवार को इस फिल्म ने 10.67 करोड़ रुपए कमाए और कुल कमाई 101.82 करोड़ कर ली।

‘फैन’ के सामने शुक्रवार को ‘मोगली’ स्टारर इस फिल्म ने आठ करोड़ रुपए की कमाई की। शनिवार को यह कमाई बढ़कर 8.51 करोड़ रुपए हो गई। फिर रविवार को तो कमाल हो गया, इस दिन 25 फीसद बढ़त हासिल हुई।

यह अपने पहले हफ्ते में ही 74 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने में कामयाब हो गई थी। ‘द जंगल बुक’ भारत में आठ अप्रैल को चार भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और तेलुगु में रिलीज हुई। रिलीज होने के तीन दिनों के भीतर ही यानि अपने पहले सप्ताहांत में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 40 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ले गई।

‘द जंगल बुक’ इस साल पहले हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दूसरी फिल्म बनी। इस मामले में पहले नंबर पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि यह भारत में एक हफ्ते में सबसे ज्यादा कमाने वाली पहली हॉलीवुड फिल्म है।

आपको बता दें कि जॉन फेवरू की फिल्म ‘द जंगल बुक’ रूडयार्ड किपलिंग की किताब पर बेस्ड है। इस फिल्म के हिंदी वर्जन में प्रियंका चोपड़ा जैसे कई दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाज दी है। जंगल के माहौल को वीएफएक्स की मदद से बखूबी पेश किया गया है।

 

आशियाने को न लगे गर्मी की नजर

गर्मियां दस्तक चुकी हैं। ऐसे में हम अपने कपड़ों के साथ ही थोड़ा बदलाव अगर घर की सजावट में भी लाएंगे तो ज्यादा बेहतर महसूस करेंगे। जानिए किस तरह से अपने घर को समर-फ्रेंडली लुक दिया जा सकता है…

वाज केवल फूल सजाने के लिए ही नहीं होते हैं। आप चाहें तो अपने किसी खूबसूरत से प्लांट की ब्रांच यानी डाली भी काटकर पानी भरकर इसमें सजा सकते हैं। इस तरह की ब्रांच या घास घर में आउटडोर कनेक्शन को गहरा देते हैं। इस तरह के मजेदार लेकिन जोरदार प्रयोग, जेड, यूकेलिप्टस और अन्य तरह के पौधों के साथ भी किए जा सकते हैं।

अपने किचन में पीले रंग की बहार लेकर आएं। एक सफेद बाउल या कांच का वाज लें और इसमें पीले नीबू भर दें। ये बेहद सस्ता डेकॉर साबित होते हैं। इसके अलावा जब ये आपकी नजर के बिल्कुल सामने रहेंगे तो आप जब इच्छा होगी तब इन्हें उठाकर काम में भी ले सकेंगे। सलाद में डालने के लिए या नीबू शर्बत बनाने के लिए ये बेहद हैंडी हो जाएंगे। पीले डैफोडिल्स किसी भी कमरे को जगमगा सकते हैं।

अपने वॉल फ्रेम में फ्लोरल पेंटिंग या फिर पिक्चर लगाएं। गर्मियों के मौसम में जब चिड़ियों का चहकना शुरू हो जाता है तब सीजनल प्लांट्स अंदर लेकर आ जाना चाहिए। इन्हें सबसे अच्छे तरीके से डिस्प्ले भी करना चाहिए। एक तरीका ये है कि प्रेस्ड फ्लॉवर को एक कलरफुल पेपर पर चिपकाकर एक ब्राइट से फ्रेम में लगाकर सजा दें। फूल को प्रेस करने के लिए एक हेवी किताब के अंदर इसे एक हफ्ते के लिए दबा रहने दें। इस काम में पार्चमेंट पेपर का भी यूज करें।

अपने वॉल फ्रेम में फ्लोरल पेंटिंग या फिर पिक्चर लगाएं। गर्मियों के मौसम में जब चिड़ियों का चहकना शुरू हो जाता है तब सीजनल प्लांट्स अंदर लेकर आ जाना चाहिए। इन्हें सबसे अच्छे तरीके से डिस्प्ले भी करना चाहिए। एक तरीका ये है कि प्रेस्ड फ्लॉवर को एक कलरफुल पेपर पर चिपकाकर एक ब्राइट से फ्रेम में लगाकर सजा दें। फूल को प्रेस करने के लिए एक हेवी किताब के अंदर इसे एक हफ्ते के लिए दबा रहने दें। इस काम में पार्चमेंट पेपर का भी यूज करें।

यहां कलर से ज्यादा बात टेक्स्चर की है। अपने वेलवेट पिलोज हटा दें। लाईट टेक्स्टाइल यूज करें। ज्यादा केयरफ्री अपील के लिए कॉटन फैब्रिक यूज करें।

हरियाली अपने घर के चारों ओर बिखरा दें। हाउज-प्लांट किसी भी घर के इंटीरियर को ज्यादा चीयरफुल बना देते हैं। प्लांट्स नैचरल एयर फिलटर्स का काम करते हैं इसलिए इन्हें रखने से घर के अंदर भी ताजी हवा चलती रहेगी। हर कमरे में दो प्लांट्स रखने की कोशिश करें। एक बड़ा प्लांट जमीन पर और दूसरा डेस्क या टेबल पर रखें। इंडोर प्लांट्स में फर्न्स और ऑर्किड्स सबसे अच्छे रहेंगे। ये लो-मेन्टेंनेंस प्लांट्स हैं जिन्हे आसानी से घर में जगह दी जा सकती है।

वाज का काम तो कोई भी कंटेनर कर सकता है। तो क्यों न कुछ नया ट्राय करें! आपके कलरफुल रेन-बूट्स जिन्हें अब यूज नहीं करते हैं उन्हें वाज की तरह यूज करें। इसी तरह मेसन जार, कैंडल होल्डर, टिन कैंस, बीकर्स, टी-कप्स या फिर पेंट की हुई बॉटल भी वाज की तरह यूज की जा सकती है।

एंट्री वे पर अपनी पुरानी बास्केट को प्लांट होल्डर की तरह लटका सकते हैं। इस तरह से अलग-अलग हाइट पर जब ये बास्केट लटकती हैं तो बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं। आप चाहें तो गेस्ट के आने से ठीक पहले इनमें पॉटेड प्लांट्स भी रखे जा सकते हैं।

 

शरीर के अनुसार चुनें फैब्रिक

Faballey-Red-Colored-Embroidered-Bodycon-Dress-8020-8463541-1-pdp_slider_mसुन्दर तो हम सभी महिलाएं दिखना चाहती हैं मगर इसके लिए जरूरी है कि हम ऐसे कपड़े पहनें जो हम पर फबें। जाहिर है कि इसमें कपड़े की फैब्रिक एक खास भूमिका निभाती है मगर खरीददारी करने जाओ तो सबसे ज्यादा गड़बड़ यहीं होती है। आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि हमें अपने शरीर के हिसाब से सही रंग, फैब्रिक और सिलुएट चुनने और पहनने चाहिए और अगर आप भी यही करना चाहती हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें –

एथलेटिक बॉडी – अगर आप पतली हैं और आपका फिगर बिल्कुल स्ट्रेट है तो आपकी बॉडी एंगुलर है और साथ ही आपकी बॉडी में कर्व्स की भी कमी है। ऐसे में आपको अपनी शरीर में कुछ ऐसा करना होगा जिससे आपको कर्वी लुक मिले. इसके लिए आप टाइट फैब्रिक या बॉडीकॉन ड्रेसेज़ चुनें। शेपलेस ड्रेसेस और अपने साइज़ से बड़ी आउटफिट या बैगी फिट्स को न पहनें। मोनोक्रोम ड्रेसेज़ आपके लिए बेहतरीन लगेंगी। मैट जर्सी, स्पैनडेक्स और कॉटन, सिल्क और सैटिन वाले टॉप पहनें। ये आपके शरीर को एक अच्छा आकार भी देतें हैं।salwar-for-pear-shape

पीयर शेप्ड शरीर –  अगर आपकी बाँहें पतली हैं और शरीर का निचला हिस्सा चौड़ा तो आपके शरीर का आकार है पीयर शेप्ड। ऐसे परिधान पहनें जो सॉफ्ट हों और जो पहनने के बाद आपके नीचे के पार्ट पर चिपके नहीं। आप हमेशा इस बात का ध्यान रखिए कि आपकी टी-शर्ट या टॉप का किनारा आपके कमर पर खत्म ना होता हो इसलिए आप अपने लिए थो़ड़ी लंबी टी-शर्ट्स पहना करें। फैब्रिक की बात करें तो आपको ऐसे अपने लिए फैब्रिक चुनें जो हल्के हों और जिसे पहनकर आप मोटी न लगें. इसके लिए आप कॉटन, पॉलियस्टर ब्लेंड्स, मेट जर्सी, जॉर्जेट और शिफॉन चुन सकती हैं। लेदर, ऊनी, बुने फैब्रिक, के साथ साटन, मेटेलिक कपड़ों से दूर रहें। आप स्ट्रेचेबल डेनिम्स और कॉटन ट्राउजर्स भी पहन सकती हैं।apple-shape

 एपल शेप्ड शरीर – अगर आपका ऊपरी शरीर भारी और नीचे का पार्ट पतला है तो आप चमकदार फैब्रिक से दूर रहें और कॉटन व विज्कोस आउटफिट पहनें। ये आपके निचले हिस्से को अच्छे तरीके से उभारता है। मोनोक्रॉम टॉप्स या ड्रेस भी आप पर अच्छी लगेगी।priyanka-chopra-photos-in-saree-3

आवरग्लास शेप्ड शरीर – आपकी पतली कमर, चौड़े हिप्स  हैं तो आपका फिगर बिलकुल परफेक्ट है। आप शिफॉन, बॉडीकॉन, लेदर, सॉटन, सिल्क आउटफिट पहन सकती हैं।

 

अनपढ़ महिला सरपंच ने बदल दी पूरे गांव की तस्वीर

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महज 25 किमी दूर सारागांव को गांव की सरपंच प्रमिला साहू की जिद ने बदलकर रख दिया है। प्रमिला जब सरपंच बनी तो लोगों ने ताना दिया कि अनपढ़ है, क्या विकास करेगी। यह सुनने के बाद प्रमिला ने पढ़ाई शुरू की। फिर गांव की तरक्की के लिए सरकारी मदद नहीं मिली तो खुद के नाम पर 24 लाख का कर्ज लिया और गांव के हर घर से स्कूल तक टॉयलेट बनवा दिए।  150 बुजुर्गों-महिलाओं को भी पढ़ाई से जोड़ा

बलौदाबाजार रोड पर रायपुर से लगे सारागांव में छह माह पहले 70 फीसदी घरों में टॉयलेट नहीं थे। स्कूल में छात्राओं के लिए कोई सुविधा नहीं थी। यह तस्वीर सिर्फ छह महीने पहले की है।

प्रमिला के सरपंच बनने पर लोगों ने उसके पढ़े-लिखे न हाेने पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक अनपढ़ क्या गांव का विकास करेगी।

इस बात को संजीदगी से लेते हुए प्रमिला ने खुद पढ़ाई शुरू की। साथ ही, धीरे-धीरे गांव के 150 बुजुर्गों-महिलाओं को भी जोड़ा।

सरकारी मदद नहीं मिलने पर प्रमिला ने खुद के नाम पर 24 लाख का कर्ज लिया और गांव के हर घर से स्कूल तक टॉयलेट बनवा दिए।

अब सबने मिलकर ठाना है, सारागांव को मॉडल के तौर पर डेवलप करना है।

ऐसे चली तरक्की की लहर

जब प्रमिला साहू सरपंच बनी थी तो सबसे पहले उसने हर घर में टॉयलेट बनवाने की ठानी। पति ने पूरी मदद की और कुछ महिलाओं के साथ निकल पड़ी लोगों को समझाने के लिए।

कई लोगों ने बार-बार दरवाजे से लौटाया, जहां खाना पकता है, पूजा-पाठ होता है, उस घर में टॉयलेट नहीं बनाएंगे। लेकिन महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी।

– आखिर मेहनत रंग लाई है। सारागांव में 741 मकान हैं। इनमें से 419 मकानों में सिर्फ छह महीने के भीतर टॉयलेट बने हैं। जिनके घर में जगह नहीं थी, उन्हें सरकारी जमीन पर टॉयलेट बनाकर दिया।

शुरुआत अच्छी हुई तो गांव के व्यापारी भी सामने आ गए। उधार में सामान देते रहे। इन पैसों से एक बोर खुदवाया और पाइप लाइनें भी बिछवा दीं।

लोग खुलकर कहते रहे, छह महीने के भीतर ही गांव में जबर्दस्त सफाई हो गई। किसी को बाहर नहीं जाना पड़ता। ज्यादातर के पास पीने का पानी पहुंच गया।

प्रमिला ने बताया कि उसने जितना काम किया है, उसमें 44 लाख रुपए लगे हैं। 24 लाख का सामान उसने खुद उधार लिया है। उधार लौटाने के लिए लोग रोज ही टोकते हैं। सरकार की तरफ से अब तक एक रुपए नहीं मिला।

बुजुर्ग और महिलाएं किताब-कॉपी लेकर नजर आएं, हर घर में टॉयलेट दिखे, सरकारी स्कूल में छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट बना हो तो समझो कि ये सारागांव है।

 

कॉन्टैक्ट लेंसेज़ पहनने से पहले रखें ध्यान

आप वही पुराने सनग्लासेज़ यूज़ करते हुए बोर जाती हैं और कुछ नया और बोल्ड लुक के लिए कॉन्टैक्ट लेंस पहनना चाहती हैं. या हो सकता है आप पहले ही कॉन्टैक्ट लेंसेज़ पहन रही हों और अब कोई नया कलर इस्तेमाल करना चाहती हैं। बिना किसी खास मेहनत के एक नया आई कलर पाने के लिए कॉन्टैक्ट लेंसेज़ अच्छा विकल्प हैं लेकिन क्या आपको कॉन्टैक्ट लेंसेज़ खरीदते हुए और इसके साथ आई मेकअप करते हुए क्या सावधानियां बरती जानी चाहिए, ये पता है? यहां जानिए लेंसेज़ खरीदने से लेकर रोजाना इस्तेमाल करने तक सबसे ज्यादा जरूरी सावधानियां:

आपने शायद ध्यान न दिया हो, लेकिन हर किसी की आंखें और पुतलियां अलग-अलग साइज़ की होती हैं. इसलिए लेंसेज़ आपकी आंखों की साइज़ के हों, इसका खास ध्यान रखें। बेहतर होगा अगर किसी नेत्र विशेषज्ञ से आप अपनी आंखों की सही नाप के साथ लेंसेज़ का साइज़ पूछ लें और उससे मैच किए बिना लेंसेज़ न लें।

 सबसे ज़रूरी बात जो हर लेंस पहनने वाले को जानना चाहिए, वो ये कि उन्हें अपने लेंसेज़ को बहुत सावधानी से और सुरक्षित रखना चाहिए। इसमें भी सबसे जरूरी है लेंसेज़ को पानी से बचाना। स्विमिंग के दौरान या नहाते हुए, या यहां तक कि आपको चेहरा धोते हुए भी लेंसेज़ उतार देने चाहिए। कितना भी साफ पानी हो, लेकिन उनमें कुछ ऐसी गंदगी जरूर होगी जो आपके लेंस पर चिपक जाते हैं. बार-बार इन गंदगियों से संपर्क में आकर आपकी आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ सेंसेटिव मामलों में यहां तक कि आंखें हमेशा के लिए भी खराब हो सकती हैं।

 हो सकता है कि आपको पलकों के नीचे की लाइन पर और वॉटरलाइन पर आइलाइनर लगाने की आदत हो, लेकिन लेंसेज़ पहनते हुए आपको ये आदत बदलनी होगी। लेंसेज़ बहुत सेंसेटिव होते हैं और किसी छोटे से एसिड पार्टिकल से भी ये रिएक्ट कर सकते हैं। आइलाइनर हो या इसकी स्टिक, ये लेंसेज़ से टच हो सकते हैं और इनके एसिड पार्टिकल्स लेंसेज़ तक पहुंच सकते हैं. ये न सिर्फ लेंस को बल्कि आपकी आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

 आपको पाउडर आइशैडो पसंद है, इसमें कोई बुरी बात नहीं, लेकिन लेंस पहनते हुए ये आपकी आंखों के लिए अच्छी चीज़ नहीं है। पाउडर आइशैडो हवा में उड़कर आपकी आंखों तक पहुंच सकते हैं। हो सकता है, आपकी आंखों में जाकर आंसू के साथ ये बाहर निकल आएं और आंखें साफ हो जाएं लेकिन आंखों पर लगे लेंसेज़ साफ नहीं होते. इसलिए लेंस पहनते हुए बजाय पाउडर आइशैडो के कोई क्रीम या लिक्विड आइशैडो इस्तेमाल करें। अगर फिर भी आप पाउडर आइशैडो इस्तेमाल करना ही चाहती हैं, तो इसका खास ध्यान रखें कि इसे लगाते हुए आपकी आंखें पूरी तरह बंद हों और तब तक बंद रखें जब तक ये पूरी तरह सेट न हो जाए.

पलकों को बड़ा दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मस्कारा लेंसेज़ पहनते हुए पूरी तरह अवॉयड किया जाना चाहिए. उनमें माइक्रो-फ्लेक्स होते हैं जो आपकी आंखों में खुजली पैदा कर उसे नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा वाटर-प्रूफ मस्कारा से भी दूर रहें। ये मस्कारा साफ होने में ज्यादा टाइम लेता है और पलकों पर ज्यादा टाइम तक टिका भी रहता है, जो आपके लेंसेज़ को भी नुकसान पहुंचा सकता है। फिर भी अगर आप लेंसेज़ के साथ इसे इस्तेमाल करना ही चाहती हैं, तो कम एलर्जिक, ऑयल-फ्री और फ्रैगरेंस-फ्री मस्कारा इस्तेमाल करें।