Wednesday, March 18, 2026
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त्रिवेणी संयोग में महाशिवरात्रि, महाकाल भस्मारती का विशेष महत्व

इस वर्ष शिव योग, सोमवार और घनिष्ठा नक्षत्र के सुखद संयोग में महाशिवरात्रि पर्व 7 मार्च को मनाया जाएगा। यह त्रिवेणी संयोग 54 साल बाद बना है। इसके चलते पर्व पर भगवान शिव की पूजा का खास महत्व बन रहा है।

इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिष पं. श्यामजी बापू के अनुसार चतुर्दशी तिथि सोमवार को दोपहर 1.20 पर लगेगी जो दूसरे दिन 8 मार्च को सुबह 10.33 तक रहेगी। चतुर्दशी रात्रि के समय सोमवार को रहेगी। अतः इसी दिन महाशिवरात्रि मनाना शास्त्र सम्मत है।

सोमवार को शिवयोग रात 8.18 बजे तक रहेगा। घनिष्ठा नक्षत्र भी दिवस पर्यंत रहेगा। चार साल बाद सोमवार को महाशिवरात्रि आई है। इससे उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर मेंं भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। देश में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में उज्जैन के महाकालेश्वर भी शामिल हैं।

भगवान महाकाल की भस्मारती में शामिल होने देश-विदेश से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।भस्म आरती के बाद सुबह 6 बजे से दर्शनार्थियों को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। आइये जानते हैं क्या है भस्मारती का महत्व।

दरअसल भगवान महाकाल के दर्शनों और भस्मारती का अपना विशिष्ट महत्व है। मान्यता है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनों से भक्त को अकाल मृत्यु और कष्टों से मुक्ति मिलती है।

धर्मग्रंथों में तो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विविध स्वरूप में महिमा का बखान किया गया है। इसे पृथ्वी पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग बताया गया है।

विद्वानों का मत है कि भगवान महाकाल का ज्योतिर्लिंग दक्षिण मुखी है। दक्षिण दिशा का स्वामी यमराज को बताया गया है और महाकाल को पृथ्वी के अधिपति के रूप में भी जाना जाता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्‍बावाला के अनुसार अवंतिकानाथ का सनातन धर्म परंपरा में विशिष्ट महत्व है। नाथ संप्रदाय और हिंदू संप्रदाय में ब्रह्म मुहूूर्त में ही भस्मारती का महत्व है। इसी के आधार पर अलसुबह भस्मारती की जाती है। नाभि केंद्र में बसे होने से भी इस मंदिर का विशेष महत्व बताया गया है।

पंडित डब्बावाला के अनुसार यही कारण है कि भस्‍मारती के लिए भक्तों में अधिक उत्साह और श्रद्धा देखी जाती है। उन्होंने बताया कि भस्‍मारती में शामिल होना किसी अलौकिक अनुभव से कम नहीं है। भस्मारती की प्रक्रिया और उसकी आभा शब्दों से परे है। कहते हैं भस्मारती में शामिल होने से जहां भक्तों को कष्टों से मुक्ति मिलती है वहीं उन्हें मानसिक शांति का आभास भी होता है। गृह बाधाएं भी इससे दूर होती हैं। ब्रह्म मुहूर्त में भस्मारती के दौरान दसाें दिशाओं की ऊर्जा और जागृति का अहसास भी महसूस किया जाता है।

 

नंगे पैर प्रैक्टिस करती थी ये ओलिंपियन एथलीट

जयपुर.2014 इंचियोन एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीत चुकी खुशबीर कौर नेशनल पैदल चाल कामपिटीशन में हिस्सा लेने जयपुर पहुंची हैं। बता दें कि इस एथलीट के पास कभी जूते तक खरीदने के पैसे नहीं थे। पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

 मां की हिम्मत ने दिया हौसला

– खुशबीर ने बताया कि मेरी मां ने हमारे लिए क्या नहीं किया।

– पिता (बलकार सिंह) का 2000 में हार्टअटैक से निधन हो गया था। हम पांच भाई-बहन हैं।

– मां (जसवीर कौर) ने हमें कैसे-कैसे पाला है मैं ही जानती हूं।

– अब मैं चाहती हूं कि मां को हर वो खुशी दे पाऊं जिसकी वे हकदार हैं।

– मां की हिम्मत है कि उन्होंने हम तीनों बहनों (हरजीत, करमजीत और मुझे) एथलीट बनाया।

– उन्होंने बताया कि मां के जिद के बाद सबसे पहले मेरी बड़ी बहन हरजीत ने एथलेटिक्स में हिस्सा लेना शुरू किया।

– उसके बाद मैंने पैदल चाल में करियर बनाया और अब मेरी तीसरी बहन करमजीत भी पैदल चाल में हिस्सा ले रही है और जयपुर में आयोजित हो रही प्रतियोगिता से उसके भी ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने की पूरी उम्मीद है।

कभी बिना जूतों के दौड़ी थी

– शुरू में रनर बनना चाहती थी, लेकिन वॉकिंग ज्यादा पसंद थी। 2007 में स्टेट चैंपियन बनी।

– गांव के आसपास बिना जूतों के ही वाॅक करती थी और मेरी दीदी साइकिल पर मुझे फॉलो करती थी।

– 2008 में जूनियर नेशनल में भी बिना जूते पहने ही दौड़ी थी और सिल्वर मेडल जीता था।

– इसके बाद मेरे कोच पूर्व एशियन चैंपियनशिप पदक विजेता बलदेव सिंह ने मुझे ट्रेनिंग गियर दिलवाए।

टोक्यो में पक्का पदक आएगा

– खुशबीर कहती हैं 1986 में पैदल चाल में केवल एक भारतीय एथलीट ने हिस्सा लिया था।

– लंदन ओलिंपिक के लिए 4 एथलीटों ने क्वालिफाई किया।

– रियो ओलिंपिक में पैदल चाल में और ज्यादा एथलीट हिस्सा लेंगे।

– उम्मीद यही है कि रियो नहीं तो 2020 टोक्यो ओलंपिक में पक्का पैदल चाल में पदक आएगा। मैं तब तक अपनी तैयारियां जारी रखूंगी।

 

 

कभी धूप में सिर्फ प्लेन को देखने खड़ी होती थी, अब बनी पहली महिला पायलट

रायपुर.बचपन में आसमान में उड़ते प्लेन को घर से बाहर भागकर देखकर खुश होने वाली टि्वंकल अब खुद प्लेन उड़ाएंगी। अपनी ट्रेनिंग खत्म कर अब टि्वंकल छत्तीसगढ़ की पहली कमर्शियल पायलट बन चुकी हैं।

ट्विंकल वन विभाग में अफसर प्रभाकर नागदेवे की बेटी हैं। प्रभाकर बताते हैं कि बचपन से टि्वंकल को प्लेन का बड़ा क्रेज था। वह प्लेन को सिर्फ देखने के लिए धूप में खड़ी होकर प्लेन के गुजरने का इंतजार किया करती थी। भिलाई से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद टि्वंकल  का सलेक्शन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी में हुआ। वो कहती हैं कि प्लेन उड़ाना उसका पैशन है। उन्होंने कुछ समय तक इंस्टीट्यूट में बतौर इंस्ट्रक्टर भी काम किया। अब वो यात्री विमान उड़ाएंगी।

सिर्फ यही बन सकते हैं पायलट

फ्लाइंग के लिए सरकारी के अलावा देश में कुछ प्राईवेट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी हैं। यहां ट्रेनिंग के बाद फ्लाइंग के लिए पहले प्राईवेट पायलट लायसेंस जारी होता है। ऐसे पायलट छोटे विमान उड़ाते हैं। पैसेंजर एयरक्राफ्ट सिर्फ कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल करने वाले पायलेट्स ही उड़ा सकते हैं। इसके लिए मैथ और फिजिक्स में 12वीं में कम से कम 50 परसेंट मार्क होने चाहिए। आई साइट 6/6 वाले ऐसे पायलट जो प्राइवेट एयरक्राफ्ट उड़ाने का कम से कम 150 घंटे का एक्सपीरियंस रखते हों। उनके पास कम से कम 50 घंटे तक लीड पायलट रहने का एक्सपीरियंस भी होना चाहिए, तभी उन्हें कमर्शियल पायलट लाइसेंस दिया जा सकता है।

 

एक नजर में बजट की दस बड़ी बातें

आम बजट में सरकार ने सभी पक्षों पर ध्यान देने की कोशिश की है। एक नजर विभिन्न सेक्टर्स से जुड़ी बजट की अहम बातों पर –

महंगा-सस्ता:बैटरी चलित कारों को छोड़ कर सभी कारें महंगी। सोने के गहने व ब्रांडेड कपड़े महंगे हुए। छोटी कारों पर 1 फीसदी सेस। एसयूवी पर 4 फीसद और डीजल गाड़ियों पर 2.5 फीसद टैक्स बढ़ा। तंबाकू और उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी 10-15 फीसद बढ़ी। बीड़ी छोड़ अन्य तंबाकू उत्पाद महंगे। 10 लाख से ज्यादा कीमत की कार होंगी और महंगी। 35 लाख तक के होम लोन पर 50,000 रु. की अतिरिक्त छूट, दिव्यांगों के लिए आयातित उपकरण सस्ते, सीमा शुल्क दरों में कमी, कॉर्पोरेट टैक्स को 30 फीसद से घटा कर 29 फीसद किया गया, मकान किराया छूट 24,000 की जगह 60,000 रुपए की गई।

टैक्स प्रावधान:आयकर के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया, एक करोड़ से ज्यादा आय वालों पर सरचार्ज बढ़ा, 2 करोड़ रु. टर्नओवर टैक्स कम किया गया, 5 लाख की आय पर 3000 रुपए की अतिरिक्त छूट।

हाउसिंग:सरकारी-निजी भागीदारी में सस्ते मकानों के निर्माण को बढ़ावा, पहली बार मकान खरीदने वालों को 50 लाख से कम की खरीद पर ब्याज में रियायत, किराये पर रहने वालों को बड़ा फायदा।

स्टार्टअप्स पर जोर:स्टार्टअप्स की मदद केे लिए कंपनी कानून में सशोधन किया जाएगा। कंपनी अधिनियम में संशोधन करते हुए स्टार्ट अप्स को मदद की जाएगी। इसके लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होगा।

यातायात:आम आदमी के लिए यातायात को बेहतर बनाया जाएगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर 2,21,000 करोड़ का खर्च।

ईपीएफ:पहले तीन साल तक कर्मचारियों का पैसा सरकार ही देगी। कर्मचारियों का पीएफ का पैसा नहीं काटेगी सरकार। ईपीएफ का दायरा बढ़ाने का सरकार ने लिया फैसला।

स्टार्टअप्स:स्किल डेवलेपमेंट के लिए 17000 करोड़ रुपए का फंड। 1500 स्किल डेवलेपमेंट सेंटर खुलेंगे। उद्यमिता विकास के लिए विशेष काम होंगे। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का विस्तार।

शिक्षा-बिजली:62 नए नवोदय विद्यालय स्थापित होंगे, उच्च शिक्षा के विकास के लिए नई हेफा, आम भारतीयों को उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए स्कीम, 1 मई 2018 तक सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य।प्राथमिक शिक्षा के लिए सर्वशिक्षा योजना के लिए आबंटन बढ़ाया जाएगा।

स्वास्थ्य:डायलिसिस उपकरणों पर ड्यूटी खत्म, ग्रामीणों के लिए नेशनल डायलिसिस सेवा योजना की घोषणा। जेनेरिक दवाओं की बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा।

ग्रामीण विकास:ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम। 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को गैस कनेक्शन दिया जाएगा, गरीब परिवारों के रसोईघरों की दशा सुधाररने के लिए 2200 करोड़ का आवंटन, ग्रामीण विकास के लिए 87765 करोड़ रुपए का आवंटन, नेशनल डिजिटल लिट्रेसी मिशन के तहत 6 करोड़ घरों को कवर किया जाएगा।

 

जज्बातों को महसूस करेगा ये सुपर कम्प्यूटर

हाईटेक टेक्नोलॉजी के दौर में अब कम्प्यूटर इंसान की भावनाएं भी समझ लेगा। आईबीएम का दावा है कि सुपर कम्प्यूटर वाटसन अब लोगों की जज्बातों को अच्छी तरह से समझ लेगा। वह यह तक नोटिस कर लेगा कि सामने कि सामने वाला इस समय किस मूड में बैठा है।

आप सोच रहे होंगे कि कम्प्यूटर कमांड देने से भला आपका मूड कैसे समझ लेगा, लेकिन आईबीएम का यही दावा है। कंपनी का कहना है कि उसने अपने सुपर कम्प्यूटर में बड़े बदलाव किए हैं। अपडेशन से वह काफी फास्ट ट्रैकर हो गया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि इंसानी जज्‍बातों को भी समझने लगा है।

इसका टोन एनालाइजर काफी ज्‍यादा इम्‍प्रूव हो गया है। अब यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रेंज में इमोशंस को आपकी लिखाई से आपको आसानी से डिटेक्‍ट कर सकता है। यह आपके मूड को भी पूरी तरह से भांप लेगा। इस सुपर कम्प्यूटर  को वाटसन नाम दिया गया है।

आईबीएम के मुताबिक यह ऐसा कम्प्यूटर  है जो आपके द्वारा टाइप की जाने वाली लाइंस की गहराई से जांच कर लेगा। इसके बाद वह लगभग आपकी हर मंशा को बिल्‍कुल सही तरीके से एक्‍सप्रेस करने में कामयाब होगा। इसके अलावा आप इस पर काम के समय कीपैड पर जैसे प्रेस करेंगे वैसे आपको फालो कर लेगा।

 

इनके नाम पर है अंटार्कटिका में माउंट, ग्लेशियर में की थी व्हेल की गिनती

पटना.बक्सर के NRI सांइटिस्ट अखौरी सिन्हा के नाम पर अंटार्कटिका में एक पर्वत का नाम रखा गया है। साइंस में उनके योगदान को लेकर उनके सम्मान में ऐसा किया गया है। सिन्हा 1972-74 में अमेरिकी कोस्ट गार्ड कटर्स साउथविंड और ग्लेशियरों में सील, व्हेल और पक्षियों की काउंटिंग की थी।

– मैकडोनाल्ड पर्वत श्रृंखला के साउथ पार्ट एरिकसन ब्लफ्स के दक्षिणी पूर्व छोर पर माउंट सिन्हा (990 मीटर) स्थित है।

– सिन्हा उस ग्रुप के मेंबर थे, जिन्होंने वर्ष 1972 और 1974 में बेलिंगशॉसेन और आमंडसेन समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी कोस्ट गार्ड कटर्स साउथविंड और ग्लेशियरों में सील, व्हेल और पक्षियों की काउंटिंग की थी।

– सिन्हा ने 1954 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया था।

– इसके बाद उन्होंने 1956 में पटना यूनिवर्सिटी से जू-लॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली।

– इसके बाद उन्होंने 1956 से जुलाई 1961 तक रांची कॉलेज में जू-लॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर भी रहे।

– इसके अलावा वे यूनिवर्सिटी ऑफ मिन्नेसोटा में डिपार्टमेंट ऑफ जेनेटिक्स, सेल बायोलॉजी एंड डेवलपमेंट में सहायक प्रोफेसर भी रहे हैं।

– बताया जाता है कि 1739 में नादिर शाह के आक्रमण के बाद उनका परिवार दिल्ली से बिहार के बक्सर चला गया था।

 

दिग्गज क्रिकेटर मार्टिन क्रो का निधन, शोक में डूबा क्रिकेट जगत

 

न्यूजीलैंड के महान क्रिकेटर मार्टिन क्रो का निधन हो गया है। सोशल मीडिया पर भी संदेशों का तांता लगा हुआ है। क्रो लंबे समय से ब्लड कैंसर लिम्फोमा से जूझ रहे थे. उन्होंने परिजनों के बीच आकलैंड में दम तोड़ा.

मार्टिन क्रो के परिवार ने इस दुखद अवसर पर निजता का सम्मान करने का भी आग्रह किया है. क्रो ने 1982 से 1995 के बीच अपने 13 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में खेले गए 77 टेस्ट मैचों में 45.36 की औसत से न्यूजीलैंड के लिए 5.444 रन बनाए. इनमें 17 शतक और 50 अर्धशतक शामिल हैं. संन्यास के बाद उन्होंने स्काई टीवी के लिए खेल के छोटे फॉर्मेट क्रिकेट मैक्स की शुरुआत की जिससे टी20 क्रिकेट की नींव पड़ी. आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल क्रो न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों रॉस टेलर और मार्टिन गुप्टिल के मेंटर भी रहे।

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जान की ने कहा, ‘मार्टिन सच्चा खिलाड़ी था. हमारे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों और क्रिकेट के जानकारों में शुमार.’

क्रो के चचेरे भाई हॉलीवुड स्टार रसेल क्रो ने कहा कि उन्होंने एक सच्चा दोस्त खो दिया है. क्रो ने ट्विटर पर लिखा, ‘मेरा चैम्पियन, मेरा हीरो, मेरा दोस्त. मैं तुमसे हमेशा प्यार करता रहूंगा. आरआईपी एम डी क्रो.’

न्यूजीलैंड के पूर्व खिलाड़ी क्रेग कमिंग ने कहा कि चोटों का शिकार नहीं होने पर क्रो का करियर और अच्छा होता. उन्होंने कहा, ‘उनमें गेंद को भांपने की गजब की क्षमता थी. गेंद छूटने से पहले ही वह अपनी पोजिशन बना लेते थे.’

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कहा, ‘इस शानदार क्रिकेटर और बेहतरीन इंसान को हमेशा याद किया जाएगा.’

न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने उन्हें सही मायने में महान क्रिकेटरों में से एक कहा. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘क्रो के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ. मेरे और कई अन्य के लिए प्रेरणा थे. सही मायने में महान क्रिकेटरों में से थे.’

टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने भी मार्टिन क्रो को श्रद्धांजिल दी. उन्होंने क्रो को परम दिग्गज और न्यूजीलैंड का प्रतिष्ठित स्टार बताया.

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर पैट सिम्कॉक्स ने लिखा, ‘सुबह उठते ही दुखद खबर, RIP मार्टिन क्रो. खेल में योगदान के लिए धन्यवाद. एक दिग्गज चला गया.’

कमेंटेटर हर्षा भोगले ने लिखा, ‘अच्छा इंसान, महान क्रिकेटर, बेमिसाल कप्तान और एक जुझारू हमारे बीच से जल्दी चला गया. अलविदा मार्टिन क्रो.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं क्रो से आखिरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल के दौरान मिला. क्रो वहां आकर बहुत खुश थे.’

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर टॉम मूडी ने अपने ट्वीट में क्रो को मास्टर बैट्समैन के साथ ही खेल का महान विचारक बताया.

सचिन तेंदुलकर ने भी ट्वीट किया.

28 मार्च को लॉन्च होगी टाटा की नई हैचबैक टियागो

28 मार्च को स्वदेशी कंपनी टाटा की नई हैचबैक टियागो लॉन्च की जाएगी। यह कार कई इनोवेटिव और फ्रेश डिजाइन और फीचर्स के साथ आएगी। साथ ही भारत के ग्लोबल नागरिकों के लिए इसमें कटिंग एज ड्राइविंड डायनमिक्स भी होंगे।

जीका वायरस के चलते बदला नाम
गौरतलब है टाटा जीका का नाम बदलकर टाटा टियागो कर दिया गया है. हाल ही में जीका वायरस के फैलने से सैकड़ों लोगों को की जान चली गई। कार का नाम कंपनी की गाड़ी के नाम मिलता-जुलता होने के चलते यह कॉन्ट्रोवर्सी में आ गई थी. इसके बाद ही कंपनी ने इसे बदलने का फैसला किया था।

इन कार को टक्कर देगी टियागो
इसके लिए कार निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने नए नाम के चुनाव के लिए बकायदा एक ऑनलाइन कैंपेन चलाया। इसके तहत ब्रांड के फॉलोअर्स को मौका मिला कि वे कार का नया नाम चुन सकें और अंत में टाटा टियागो नाम चुना गया। इस कार का मुकाबला मारुति सुजुकी सेलेरियो, ह्युंडई आई10 और फोर्ड फीगो से होगा।

ये होगी खासियत
यह कार फ्रेश डिजाइन और कई इनोवेटिव फीचर्स के साथ आएगी. साथ ही भारत के ग्लोबल नागरिकों के लिए इसमें कटिंग एज ड्राइविंड डायनेमिक्स भी होंगे। खबरों के मुताबिक, यह कार दो इंजन ऑप्शन के साथ उपलब्ध होगी जिनमें 4 सिलिंडर वाला 1.2 लीटर पेट्रोल और 3 सिलिंडर का 1.05 लीटर डीजल इंजन शामिल हैं।

 

दुप्पटा लें कुछ अलग अंदाज में

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चाहे वो शादी हो, डिनर पार्टी या फिर ऑफिस का एक आम दिन, आपके दुपट्टा पहनने का तरीका पूरी तरह से आपके लुक को बदल सकता है. क्लासिक्स से लेकर सीधे रैंप से लिए गए न्यू-एज स्टाइल्स तक, आपके पास हैं ढेर सारे तरीके अपने दुपट्टे को पहनने के। तो जरा आजमा कर देखिए दुप्पटे के अलग – अलग अंदाज –

सिंपल और बेसिक वी-स्टाइल

दुपट्टे को बीच से मोड़ें और मोड़ी ही जगह को अपने गले के बीच वाली जगह पर लाएं. दुपट्टे को दोनों हिस्से अपने दोनों कंधों के पीछे डाल लें और ये आप तय करें कि आपको इसका ‘वी’ वाला हिस्सा कितना गहरा चाहिए. आसान है!Screen-Shot-2015-12-28-at-7.49.12-pm

वी-स्टाइल को दें थोड़ा ट्विस्ट

पिछले वी-स्टाइल को थोड़ा ट्विस्ट देते हुए, किसी भी एक खुले सिरे को क तरफ से आगे की ओर ले आएं जिससे एक Y बन जाए!

 वन-शोल्डर क्लीन ड्रेप

दुपट्टे को आधा मोड़ें और उसके मोड़ को अपने एक कंधे पर पिन कर लें. ये स्टाइल इससे आसान नहीं हो सकता. ये सबसे आसान तरीका है अपनी सेक्सी कॉलर बोन्स को फ्लॉन्ट करने का!

 कलाई पर बंधा हुआ वन-शोल्डर ड्रेप

पिछली स्टाइल की तरह ही दुपट्टे को ओढ़ें, बस पीछे वाले सिरे को थोड़ा लंबा रखें. अब अपने दूसरे हाथ से दुपट्टे को लंबे हिस्से को अपने हिप के ऊपर से लाते हुए से अपनी कलाई पर बांधे. आप से अपनी चूड़ी पर भी फंसा सकती हैं.

 कलाई पर रखा हुआ वन-शोल्डर ड्रेप

ये स्टाइल बेहद ग्रेसफुल है और हमारा पसंदीदा भी. पुराने स्टाइल को ही फॉलो करें और एक सिरे को कलाई पर बांधने की जगह इसे कलाई पर एक बार घुमाकर ऐसे ही थोड़ा सा लटकना दें.

 बेल्ट के साथ

बेल्ट्स पहले से ही इंडियन फैशन सीन में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. जाने-माने डिज़ाइनर Tarun Tahiliani बेल्टेड साड़ियां और लहंगे पेश कर चुके हैं. तो हम सलाह देंगे कि आप बेल्टेड दुपट्टा लुक किसी भी चीज़ से के साथ ट्राय करें, जो आपको पसंद हो. पायल सिंघल के इस आउटफिट की तरह आप भी इसे धोती पैंट्स और ट्यूनिक्स के साथ ट्राय कर सकती हैं.duppata 4

 दुपट्टा बने साड़ी

एक और आसान लुक है लहंगा साड़ी का. दुपट्टे के एक सिरे को अपने लहंगे के एक तरफ कमर पर खोंसे र दूसरे हिस्से को हिप के ऊपर से आगे लाते हुए कंधे पर डालें. और आप तैयार हैं! आप इसे और ज़्यादा साड़ी का लुक दे सकती हैं दुपट्टे में साड़ी की तरह प्लीट्स बनाकर, साड़ी की तरह ड्रेप करके पिन कर सकती हैं।duppata with belt

 गले के पीछे से आगे को किया गया ड्रेप

आखिर में आप इसे गर्दन के पीछे की तरफ से आगे की तरफ ला सकती हैं. इसमें थोड़ा ड्रामा डालें, अपने गले पर पहनकर और एक छोर को कलाई पर घुमाकर दूसरे हिस्से को ऐसे ही छोड़ दें।

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सशक्तिकरण की राह तो हमारे घर से ही निकलती है

महिला सशक्तिकरण की बातें यूँ तो साल भर चलती रहती हैं मगर मार्च आते ही इसमें अनायास तेजी आ जाती है। साल में एक दिन महिलाओं के सम्मान को लेकर बड़े – बड़े दावे और बड़ी – बड़ी बातें की जाती हैं और 8 मार्च बीतते ही एक बार फिर घड़ी की सुई पुराने समय पर लौट आती है। समय बदला है और महिलाओं की स्थिति भी बदली है मगर क्या जमीनी हकीकत बदली है? यह सच है कि महिलाएं आगे बढ़ रही हैं और आवाज भी उठा रही हैं और बढ़ती चुनौतियों या यूँ कहें कि बढ़ते महिला अपराधों का एक बड़ा कारण यह है कि अब पितृसत्तात्मक व्यवस्था को बड़ी चुनौती मिल ही है। दिल्ली का निर्भया कांड हो या पार्क स्ट्रीट का सुजैट जॉर्डन कांड, अभियुक्त इन दोनों महिलाओं को सबक सिखाना चाहते थे। आज भी फतवे, पाबंदी और नसीहतों के साथ बयानबाजी सब महिलाओं के हिस्से आ रही है। महिलाओं को लेकर सोच आज भी नहीं बदली है। आज भी दोहरी मानसिकता महिलाएं हो रही हैं। एक ओर उनको परदे पर सराहा जाता है, इंटरनेट पर खोजा जाता है तो दूसरी ओर उनको अछूत मानकर लोग किनारा भी करते हैं। जाट आरक्षण के नाम पर आंदोलन में महिलाओं को शिकार बनाया जाता है तो दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में आजादी के नाम पर महिलाओं की गरिमा को ताक पर रखने का काम भी खुद महिलाएं ही कर रही हैं और इन सब के बीच जो पिस रही है, वह एक आम औरत है। वह आज भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ये सारे संघर्ष उठा रही है। यह सही है कि जब कुछ टूटता है तो प्रतिक्रिया होती है और इन अपराधों के पीछे महिलाओं की खामोशी का टूटना है। यह तस्वीर का एक पहलू है मगर स्वाधीनता, अधिकार और अभिव्यक्ति के नाम पर कहीं न कहीं रास्ते भटक रहे हैं और महिलाएं खुद आम महिलाओं की राह में मुश्किलें ला रही हैं। ऐसे में हमारी कठिनाइयों के लिए सिर्फ पुरुष नहीं, कहीं न कहीं हम भी जिम्मेदार हैं क्योंकि एक अदद पुरुष के लिए स्त्री के खिलाफ स्त्री ही खड़ी होती है और पुरुष की गलतियों को नजरअंदाज भी वही रिश्तों के नाम पर करती है। जरा सोचिए कि अगर बलात्कार, हत्या और ऐसे तमाम आरोपियों के घरों की स्त्रियाँ अगर इन अपराधियों का बहिष्कार करने लगे, पति की गलतियों को छुपाने की जगह पत्नी उसका साथ छोड़ दे और अपराध की राह पर चलने वाले या लड़कियाँ छेड़ने वाले भाई को माँ और बहन ही छोड़ दे तो क्या अपराधियों का मनोबल बचेगा? फिर भी ऐसा होता नहीं है। रिश्वत की कमाई से किटी पार्टी करने वाली और घरेलू सहायिकाओं के खिलाफ ज्यादती करने वाली, धारा 498 का दुरुपयोग कर एक आम औरत की लड़ाई को मुश्किल बनाने वाली भी औरतें ही हैं। यह सही है कि महिला सशक्तिकरण जरूरी है मगर क्या एक पहिए को ऊपर उठाने के लिए दूसरे पहिए को जमीन में गाड़ना क्या समस्या का समाधान है? क्या यह गलती को दोहराना नहीं है? प्रतिशोध से विनाश हो सकता है मगर सृजन और परिवर्तन करने के लिए संतुलन होना जरूरी है। जो गलत है, उसे छोड़िए और इसके लिए एक औरत बनकर सोचने की जरूरत है, रिश्ते उसके बाद में आते हैं। निश्चित रूप से हमें अपना अधिकार चाहिए मगर उसके लिए शुरुआत घरों से करनी होगी, जिस दिन हर घर का बेटा महिलाओं का सम्मान करना सीखेगा, उस दिन से अपराध भी अपने – आप कम होंगे और यह काम कोई और नहीं हमें और आपको करना होगा। अपराजिता की ओर से सभी को महिला दिवस और फाल्गुन की होली की हार्दिक शुभकामनाएं।