Wednesday, March 18, 2026
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‘स्वीटी-हनी’ कहे जाने से इंद्रा नूई को है नफरत

न्यूयॉर्क. पेप्सिको की सीईओ इंद्रा नूई ने वर्कप्लेस और सोसाइटी में महिलाओं से समान बर्ताव किए जाने की मांग की है। भारतीय मूल की नूई ने कहा कि उन्हें ‘स्वीटी’ या ‘हनी’ जैसे शब्दों से नफरत है। महिलाओं को ऐसे नामों से न बुलाकर उन्हें इज्जत देनी चाहिए। समान बर्ताव को लेकर इंद्रा ने और क्या कहा…
– न्यूयॉर्क में वुमन इन द वर्ल्ड समिट में उन्होंने कहा, ”हमें अभी भी समान बर्ताव किए जाने का इंतजार है।”

– ”जब भी मुझे स्वीटी या हनी कहा जाता है, बहुत बुरा लगता है। हमें स्वीटी, हनी, बेब कहने के बजाय एग्जीक्यूटिव की तरह ट्रीट किया जाना चाहिए। महिलाओं को इस तरह से बुलाने का तरीका बदला जाना चाहिए।”
– “बहुत सालों से महिलाएं ‘रेवोल्यूशन मोड’ में रही हैं। अब वे ब्वॉयज क्लब में दाखिल हो चुकी हैं और समान सैलरी की मांग कर रही हैं।”
– ”महिलाएं अपनी डिग्री, स्कूलों-कॉलेजों में अच्छे ग्रेड के बदले वर्कप्लेस में अपनी जगह बना रही हैं। पुरुष साथियों को इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है।”
– ”हम अपनी मेहनत से ऑफिस में जगह बना रहे हैं, लेकिन हमें अभी भी समान पेमेंट की जरूरत है। हमें इसके लिए अभी भी लड़ाई करनी पड़ रही है।”

महिलाएं नहीं कर रही हैं महिलाओं की मदद
– हालांकि, नूई ने कहा कि वर्कप्लेस पर महिलाएं ही महिलाओं की मदद नहीं कर रही हैं।
– ”यह एक बड़ा मुद्दा है जिसके बारे में हमें बात करनी चाहिए। मैं नहीं समझती हूं कि वर्कप्लेस पर महिलाएं महिलाओं की पूरी मदद करती हैं।”
– ”आज हम जितना भी कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा मदद करने की जरूरत है।”

वर्ल्ड की मोस्ट पावरफुल वुमन में हैं शुमार

– इंद्रा की गिनती दुनिया की सबसे पावरफुल वुमन में होती है।

– वे पेप्सिको की सीईओ बनने के पहले जॉनसन एंड जॉनसन, मोटोरोला जैसी कंपनियों में काम कर चुकी हैं।

 

शनि शिंगणापुर में 400 साल की परंपरा खत्म मगर लड़ाई अब भी बाकी है

महिलाओं को देवी माना जाता है। शक्ति का स्वरूप माना जाता है और मातृरूप की आराधना की जाती है मगर देवियों को पूजने वाले इस देश में एक आम औरत इस कदर अपवित्र मान ली जाती है कि ईश्वर के मंदिर में उसका प्रवेश पुरोधाओं को गवारा नहीं होता। जिस औरत से सृष्टि का विस्तार होता है, उसके प्राकृतिक हालात और शारीरिक परिवर्तन से पुरूष प्रधान समाज इतना डर जाता है कि अपना एकाधिकार वह मंदिरों पर जमाता है। मंदिरों में स्त्रियाँ उसे देवदाासी के रूप में मंजूर हैं मगर वह समानता की बात करे तो परम्परा के खत्म होने का डर समाज के एक वर्ग को सताता हैै। तृप्ति देसाई की यह जीत बड़ी जीत है मगर इसे आखिरी नहीं होने देना है। आखिर क्या वजह है कि किसी धर्म की प्रमुख कभी महिला नहीं होती। धर्म आखिर महिलाओं को समान अधिकार देने से इतना कतराता है तो इसके पीछे कहीं न कहीं आधिपत्य टूटने की भावना है और यह सभी धर्मों के साथ है। हाल ही में नवरात्र के पहले ही दिन शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के हक में फैसला हुआ। मंदिर ट्रस्ट ने 400 साल से चली आ रही परंपरा खत्म कर दी। एलान हुआ कि अब महिलाएं भी चबूतरे पर चढ़कर शनि भगवान की पूजा कर सकेंगी और उन्हें तेल चढ़ा सकेंगी। इसे भूमाता ब्रिगेड की लीडर तृप्ति देसाई की जीत कहा जा रहा है मगर इस बदलाव का असर देश के और भी मंदिरों में दिखना बाकी है।

। त्र्यम्बकेश्वर से सबरीमाला तक महिलाओं को अंदर जाने की अनुमति नहीं…

1# त्र्यम्बकेश्वर मंदिर (नासिक)

यहां मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं को जाने की इजाजत नहीं थी। भूमाता ब्रिगेड ने हाल ही में यहां भी बैन तोड़ने की कोशिश की थी।

– बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के बाद मंदिर अथॉरिटी ने गर्भगृह में पुरुषों की एंट्री पर भी बैन लगा दिया।

– शनि शिंगणापुर में अपनी कामयाबी के बाद तृप्ति देसाई अब इस मंदिर में भी महिलाओं को पूजा का हक दिलाने की लड़ाई तेज करेंगी।

2# सबरीमाला मंदिर (केरल)

– केरल के सबसे पुराने और भव्य मंदिरों में शामिल सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन है। ये प्रथा एक हजार साल से चली आ रही है।

– कुछ समय पहले मंदिर बोर्ड के चीफ ने एक बयान में कहा था कि जब तक महिलाओं की शुद्धता (पीरियड्स) की जांच करने वाली कोई मशीन नहीं बन जाती है, मंदिर में महिलाओं को एंट्री की इजाजत नहीं दी जा सकती।

– इससे जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

3# हाजी अली दरगाह (मुंबई)

– हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह में महिलाओं की एंट्री बैन है। 2011 तक यहां महिला जायरीनों को बेरोकटोक जाने दिया जाता था।

– हाजी अली ट्रस्ट का तर्क है कि ये एक पुरुष संत की मजार है, इसलिए वहां महिलाओं के जाने पर रोक लगाई गई है।

– इस बैन खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में केस चल रहा है।

– 9 फरवरी, 2016 को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। आखिरी फैसले का इंतजार है।

4#पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल)

– दुनिया के सबसे अमीर पद्मनाभस्वामी मंदिर में महिलाएं बाहर से पूजा कर सकती हैं। पर गर्भगृह में इनका प्रवेश मना है।

– ऐसी मान्यता है कि यदि महिलाएं यहां जाती हैं, तो खजाने पर बुरी नजर लग जाती है। इससे भगवान विष्णु नाराज हो जाते हैं।

यहां भी महिलाओं के अंदर जाने पर रोक

– म्हसकोबा मंदिर (पुणे) :यहां महिलाओं को नवरात्र जैसे खास दिनों पर ही एंट्री दी जाती है।
– घाटी देवी और सोला शिवलिंग (सतारा) –इस मंदिर में भी महिलाओं को पूजा करने की अनुमति नहीं है।
– वैबातवाड़ी मारुति (बीड़)-परंपरा के मुताबिक यहां भी महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है।

कामाख्या मंदिर (असम)-यहां पीरियड्स के दौरान महिलाओं की मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी है।

– राजस्थान में पुष्कर के कार्तिकेय मंदिर, रणकपुर के जैन मंदिरमें भी महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है।

– दिल्ली में निजामुद्दीन दरगाहके अंदर के एरिया में भी महिलाएं नहीं जा सकती हैं।

शिंगणापुर में शुक्रवार को ऐसे चला घटनाक्रम…

शुक्रवार को शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट ने एेतिहासिक फैसला लिया। हालांकि, इससे पहले रोक के बावजूद करीब 250 पुरुषों ने चबूतरे पर चढ़कर शनि की शिला पर तेल और जल चढ़ाया था। यह सारा घटनाक्रम शुक्रवार को महज ढाई घंटे के अंदर हुआ।

1# सुबह 10.30 बजे : पुरुषों ने की पूजा

– महिलाओं को पूजा का हक दिलाने का विवाद बढ़ने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने शनि चबूतरे तक पुरुषों की भी एंट्री बंद कर दी थी। जबकि गुड़ी पड़वा पर यहां शिला पूजन का रिवाज रहा है।

– एंट्री बैन होने के विरोध में सुबह करीब 250 पुरुषों ने बैरिकेड और सिक्युरिटी को तोड़ते हुए चबूतरे तक पहुंचे।

– इन पुरुषों ने यहां तेल और प्रवर संगम स्थल से गोदावरी और मूले नदी से लाया गया जल चढ़ाया।

2# दोपहर 12 बजे : तृप्ति देसाई ने कहा- हम भी मंदिर जाएंगे

– दरअसल, बॉम्बे हाईकाेर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिरों में पूजा बुनियादी हक है। इससे महिलाओं को नहीं रोका जा सकता।

– इसी फैसले के बाद मांग उठी थी कि जब पुरुषों को पूजा की इजाजत है, तो महिलाओं को क्यों न हो?

– विवाद से बचने के लिए शनि शिंगणापुर और बाद में नासिक त्र्यंबकेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने पुरुषों की भी गर्भगृह तक एंट्री रोक दी थी।

– जब शुक्रवार सुबह पुरुषों ने बैरिकेड तोड़कर पूजा की तो महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रहीं भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने कहा कि हम भी मंदिर में जाकर पूजन करेंगे। जब पुरुषों को इजाजत दी गई तो महिलाओं को भी हक मिलना चाहिए, क्योंकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने ही ऐसा कहा है।

3# दोपहर 1 बजे : मंदिर ट्रस्ट का ऐतिहासिक फैसला

– ढाई घंटे बाद मंदिर ट्रस्ट ने महिलाओं को भी शनि शिंगणापुर के गर्भगृह यानी चबूतरे पर जाकर तेल चढ़ाने और पूजा करने की इजाजत देने का फैसला किया।

– शनि मंदिर के ट्रस्टी सयाराम बनकर ने कहा कि ट्रस्टियों की आज मीटिंग हुई। इसमें फैसला किया गया है कि महिलाओं-पुरुषों की एंट्री पर रोक नहीं रहेगी। ऐसा हमने हाईकोर्ट का आदेश मानने के लिए किया है। हम भूमाता ब्रिगेड की लीडर तृप्ति देसाई का भी स्वागत करेंगे।
– वहीं, मंदिर ट्रस्ट के प्रवक्ता हरिदास गायवाले ने कहा कि अब किसी के साथ मंदिर परिसर में भेदभाव नहीं होगा।

4# शाम 5:15 बजे : महिलाओं ने पहली बार की पूजा

– मंदिर ट्रस्ट के फैसले के बाद पहली बार महिलाएं मंदिर के गर्भगृह यानी चबूतरे पर पहुंचीं।

– इन महिलाओं ने यहां पूजा की और शनि देव को तेल चढ़ाया।

– शाम करीब 7 बजे तृप्ति देसाई ने भी मंदिर में जाकर पूजा की। उन्हें मंदिर के ट्रस्टियों ने पूजा करने के लिए आमंत्रित किया था।

 

रामनवमी पर गोस्वामी तुलसीदास की रचनाएं

राम लला नहछू

आदि सारदा गनपति गौरि मनाइय हो।
रामलला कर नहछू गाइ सुनाइय हो।।
जेहि गाये सिधि होय परम निधि पाइय हो।
कोटि जनम कर पातक दूरि सो जाइय हो ।।१।।krama_thumb[2]

कोटिन्ह बाजन बाजहिं दसरथ के गृह हो ।
देवलोक सब देखहिं आनँद अति हिय हो।।
नगर सोहावन लागत बरनि न जातै हो।
कौसल्या के हर्ष न हृदय समातै हो ।।२।।

आले हि बाँस के माँड़व मनिगन पूरन हो।
मोतिन्ह झालरि लागि चहूँ दिसि झूलन हो।।
गंगाजल कर कलस तौ तुरित मँगाइय हो।
जुवतिन्ह मंगल गाइ राम अन्हवाइय हो ।।३।।

गजमुकुता हीरामनि चौक पुराइय हो।
देइ सुअरघ राम कहँ लेइ बैठाइय हो।।
कनकखंभ चहुँ ओर मध्य सिंहासन हो।
मानिकदीप बराय बैठि तेहि आसन हो ।।४।।

बनि बनि आवति नारि जानि गृह मायन हो।
बिहँसत आउ लोहारिनि हाथ बरायन हो।।
अहिरिनि हाथ दहेड़ि सगुन लेइ आवइ हो।
उनरत जोबनु देखि नृपति मन भावइ हो ।।५।।

रूपसलोनि तँबोलिनि बीरा हाथहि हो।
जाकी ओर बिलोकहि मन तेहि साथहि हो।।
दरजिनि गोरे गात लिहे कर जोरा हो।
केसरि परम लगाइ सुगंधन बोरा हो ।।६।।

मोचिनि बदन-सकोचिनि हीरा माँगन हो।
पनहि लिहे कर सोभित सुंदर आँगन हो।।
बतिया कै सुधरि मलिनिया सुंदर गातहि हो।
कनक रतनमनि मौरा लिहे मुसुकातहि हो।।७।।

कटि कै छीन बरिनिआँ छाता पानिहि हो।
चंद्रबदनि मृगलोचनि सब रसखानिहि हो।।
नैन विसाल नउनियाँ भौं चमकावइ हो।
देइ गारी रनिवासहि प्रमुदित गावइ हो ।।८।।

कौसल्या की जेठि दीन्ह अनुसासन हो।
“नहछू जाइ करावहु बैठि सिंहासन हो।।
गोद लिहे कौसल्या बैठी रामहि बर हो।
सोभित दूलह राम सीस पर आँचर हो ।।९।।

नाउनि अति गुनखानि तौ बेगि बोलाई हो।
करि सिँगार अति लोन तो बिहसति आई हो।।
कनक-चुनिन सों लसित नहरनी लिये कर हो।
आनँद हिय न समाइ देखि रामहि बर हो ।।१०।।

काने कनक तरीवन, बेसरि सोहइ हो।
गजमुकुता कर हार कंठमनि मोहइ हो।।
कर कंचन, कटि किंकिन, नूपुर बाजइ हो।
रानी कै दीन्हीं सारी तौ अधिक बिराजइ हो ।।११।।

काहे रामजिउ साँवर, लछिमन गोर हो।
कीदहुँ रानि कौसलहि परिगा भोर हो।।
राम अहहिं दसरथ कै लछिमन आन क हो।
भरत सत्रुहन भाइ तौ श्रीरघुनाथ क हो ।।१२।।

आजु अवधपुर आनँद नहछू राम क हो।
चलहू नयन भरि देखिय सोभा धाम क हो।।
अति बड़भाग नउनियाँ छुऐ नख हाथ सों हों
नैनन्ह करति गुमान तौ श्रीरघुनाथ सों हो ।।१३।।

जो पगु नाउनि धोवइ राम धोवावइँ हो।
सो पगधूरि सिद्ध मुनि दरसन पावइ हो।।
अतिसय पुहुप क माल राम-उर सोहइ हो।।
तिरछी चितिवनि आनँद मुनिमुख जोहइ हो ।।१४।।

नख काटत मुसुकाहिं बरनि नहिं जातहि हो।
पदुम-पराग-मनिमानहुँ कोमल गातहि हो।।
जावक रचि क अँगुरियन्ह मृदुल सुठारी हो।
प्रभू कर चरन पछालि तौ अनि सुकुमारी हो ।।१५।।

भइ निवछावरि बहु बिधि जो जस लायक हो ।
तुलसिदास बलि जाउँ देखि रघुनायक हो।।
राजन दीन्हे हाथी, रानिन्ह हार हो।
भरि गे रतनपदारथ सूप हजार हो ।।१६।।

भरि गाड़ी निवछावरि नाऊ लेइ आवइ हो।
परिजन करहिं निहाल असीसत आवइ हो।।
तापर करहिं सुमौज बहुत दुख खोवहिँ हो।
होइ सुखी सब लोग अधिक सुख सोवहिं हो ।।१७।।

गावहिं सब रनिवास देहिं प्रभु गारी हो।
रामलला सकुचाहिं देखि महतारी हो।।
हिलिमिलि करत सवाँग सभा रसकेलि हो।
नाउनि मन हरषाइ सुगंधन मेलि हो ।।१८।।

दूलह कै महतारि देखि मन हरषइ हो।
कोटिन्ह दीन्हेउ दान मेघ जनु बरखइ हो।।
रामलला कर नहछू अति सुख गाइय हो।
जेहि गाये सिधि होइ परम निधि पाइय हो ।।१९।।

दसरथ राउ सिंहसान बैठि बिराजहिं हो।
तुलसिदास बलि जाहि देखि रघुराजहि हो।।
जे यह नहछू गावैं गाइ सुनावइँ हो।
ऋद्धि सिद्धि कल्यान मुक्ति नर पावइँ हो ।।२०।।Tulsidas-or-Sri-Ram-milan

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन

श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।

नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुंदरम्।
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक-सुतानरम्।।

भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनम्।
रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनम्।।

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर-चाप-धर, संग्राम-जित-खर-दूषणम्।।

इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन रंजनम्।
मम् हृदय-कंज-निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनम्।।

मां दुर्गा इसलिए करती हैं शेर की सवारी

मां दुर्गा का वाहन शेर है, क्या कभी आपने सोचा है कि शक्ति की पर्याय मां भगवती की सवारी शेर ही क्यों है? आज हम आपको इससे जुड़ी एक रोचक बात बताते हैं। दरअसल इस बारे में एक दंत कथा है..पुराणों में उल्लेख है कि एक बार भगवान शिव और मां पार्वती आपस में हास-परिहास कर रहे थे लेकिन इसी हास-परिहास के बीच में भगवान शिव ने माता पार्वती को काली कह दिया जिस पर मां रूठ गईं और वन में जाकर तपस्या करने लगीं। मां पार्वती के साथ शेर ने भी सालों तपस्या की इस तपस्या में कई साल गुजर गये कि तभी एक शेर जो बहुत दिनों से भूखा-प्यासा था वो मां पार्वती को खाने के लिए उनके पास आ गया लेकिन ना जानें शेर को क्या सूझा, उसने तपस्या कर रही माता पार्वती पर हमला नहीं किया बल्कि उनके समझ बैठ गया। कई सालों बाद जब पार्वती की तपस्या से शिव प्रसन्न हुए तो उन्होंनें मां के सामने प्रकट होकर उन्हें गोरी होने का वरदान दिया। शेर के धैर्य से माता हुईं प्रसन्न जिसके बाद मां ने शेर की ओर देखा जो कि काफी समय से बिना हमला किये उनकी प्रतिक्षा कर रहा था और तपस्या का हिस्सेदार था। माता ने प्रसन्न होकर उसे हमेशा विजयी रहने का आशीर्वाद दिया और अपना वाहन बना लिया। शेरराजा, शक्ति, भव्यता और जीत का प्रतीक मालूम हो कि शेर का आशय राजा, शक्ति, भव्यता और जीत से होता। यह कहानी ये सीख देती है कि अगर आप सच्चे मन से मां को याद करते हैं तो मां आपकी हर इच्छा की पूर्ति करती है वो भी बिना मांगे।

 

बेबी बंप के साथ मॉडल कैरल ने किया रैंप वॉक

मॉडलिंग की दुनिया में कैरल ग्रेसियस एक जाना-माना नाम हैं. हो सकता है आप उन्हें उनके नाम से नहीं जानते हों लेकिन उन्हें देखकर पहचानने में आपको पलभर भी नहीं लगेगा। अगर आपने फैशन फिल्म देखी होगी तो भी आप उन्हें एक झटके में पहचान जाएंगे. इसके अलावा ये वही मॉडल हैं जो अपने मालफंक्शन के लिए भी चर्चा में रही थीं। साथ वो छोटे पर्दे के मशहूर शो बिग बॉस में भी प्रतिभागी बनकर आ चुकी हैं। वो देश की टॉप मॉडल्स में से एक हैं लेकिन बीते दिनों उनका एक नया रूप देखने को मिला। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि शादी और बच्चे हो जाने के बाद एक मॉडल का करियर खत्म हो जाता है लेकिन कैरल ने लैक्मे फैशन वीक में अपने बेबी बंप के साथ रैंप वॉक करके सबको आश्चर्य में डाल दिया। रैंप वॉक के दौरान वो पहले की ही तरह आत्मविश्वास से भरी हुई नजर आईं. गौरांग शाह की डिजाइन की हुई खूबसूरत हरी और गुलाबी साड़ी में वो बहुत ही खूबसूरत नजर आ रही थीं.।

 

नीता अंबानी बनीं एशिया की सबसे पावरफुल बिजनेस वुमन

फोर्ब्स मैगजीन ने एशिया की 50 सबसे पावरफुल बिजनेस वुमेन की सूची जारी की है जिसमें रिलायंस फाउंडेशन की प्रमुख नीता अंबानी शीर्ष पर हैं। पावरफुल बिजनेस वुमन की इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधती भट्टाचार्य हैं।

इस सूची में 50 महिला कारोबारियों के नाम हैं और खुशी की बात ये है कि इसमें से 8 भारतीय महिलाएं हैं।

2016 की एशिया की 50 सबसे शक्त‍िशाली महिला कारोबारियों की सूची में भारत के अलावा चीन, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, थाईलैंड, हांगकांग, जापान, सिंगापुर, फिलिपींस और न्यूजीलैंड की कारोबारी महिलाएं भी शामिल हैं।

फोर्ब्स के मुताबिक, ‘एक ऐसे देश में जहां अरबपतियों की पत्नियां अपने पति पर निर्भर हैं। रिलायंस में नीता का बढ़ रहा कद कोई सामान्य बात नहीं है और यही वजह है कि वह इस साल ताकतवर महिला कारोबारियों की सूची में अव्वल हैं.।

फोर्ब्स के अनुसार, इस सूची में स्वीकार किया गया है कि कारोबारी दुनिया में महिलाएं अपनी जगह बना रही हैं लेकिन महिला और पुरुष के बीच की असमानता अब भी बरकरार है.

दिल्ली की प्रियदर्शनी चटर्जी बनीं फेमिना मिस इंडिया 2016

मुंबई। दिल्ली की प्रियदर्शनी चटर्जी ने फेमिना मिस इंडिया 2016 का खिताब जीत लिया है। शनिवार रात हुए मुकाबले में उन्होंने यह खिताब अपने नाम किया। वहीं सुसृष्टि कृष्णा फर्स्ट रनर-अप रहीं और पांखुड़ी गिडवानी सेकेंड रनर-अप रहीं।

बता दें कि प्रियदर्शनी फिलहाल दिल्‍ली में रहती हैं, लेकिन उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई गुवाहाटी के मारिया पब्लिक स्कूल से पूरी की है। इससे पहले प्रियदर्शिनी ने मिस इंडिया दिल्ली का खिताब जीता था।

मिस वर्ल्ड 2016 में प्रियदर्शनी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। फर्स्ट रनरअप रहीं सुसृष्टि कृष्णा मिस इंटरनेशनल में भाग लेंगी वहीं सेकंड रनर-अप रहीं पांखुड़ी भारत की ओर से मिस ग्रैंड इंटरनेशनल ब्यूटी पेजंट का हिस्सा होंगी।

प्रियदर्शिनी को खिताब मिलने पर मॉडल व एक्ट्रेस एमी जैक्सन ने ट्वीट कर बधाई भी दी है।

पांखुड़ी का सफरनामा

18 साल की पंखुड़ी लखनऊ की रहने वाली हैं। वो लखनऊ के आईआईएम कॉलेज में 12वीं की छात्रा हैं और इसी कॉलेज की ब्यूटी प्रतियोगिता जीत चुकी हैं। इसके बाद उनका मुम्बई कैम्पस के लिए सेलेक्शन किया गया। जहां से किसी एक प्रतिभागी को सीधे मिस इंडिया के फाइनल में जगह दी जानी थी। पंखुड़ी ने दूसरी सभी प्रतिभागियों को पीछे छोड़ दिया और फेमिना मिस इंडिया 2016 में तीसरा स्थान हासिल किया।

फेमिना मिस इंडिया 2016 के निर्णायक दल में फैशन और बॉलीवुड जगत की नामी गिरामी हस्तियां मौजूद थीं। इनमें संजय दत्त, डिजाइनर मनीष मल्होत्रा, अर्जुन कपूर, निर्देशक कबीर खान, एमी जैक्सन, मिस वर्ल्ड 2015 मिरिया लालागुना, सानिया मिर्जा, अंतर्राष्ट्रीय डिजाइनर शेन पीकॉक और एकता कपूर शामिल थीं।

मिस इंडिया 2016 के कार्यक्रम में बॉलीवुड सितारों ने शिरकत की। इस रंगारंग कार्यक्रम में शाहरुख खान, टाइगर श्रॉफ, सुनिधि चौहान, जैकलीन फर्नांडीज, शाहिद कपूर जैसे कलाकारों ने खूब धमाल मचाया।

 

बीमारी है त्वचा को नोचने की आदत

डर्माटिलोमेनिया स्किन पिकिंग डिसाऑर्डर या एसपीडी है। सामान्य-सी नजर आने वाली यह समस्या कई बार गंभीर परिणाम दे सकती है। इससे ग्रसित व्यक्ति बार-बार अपनी त्वचा को छूता, रगड़ता, खरोंचता, नोचता है और उसे खींचकर बाहर निकालता रहता है। ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति इसे अपनी कमी की हीनभावना से ग्रसित होकर या किन्हीं अन्य कारणों से लगातार इस तरह का व्यवहार करता है। इससे त्वचा की रंगत पर प्रभाव पड़ता है और कई बार त्वचा पर जख्म जैसे भी बन जाते हैं।

खुद को पहुंचा सकते हैं नुकसान

यह एक ऐसा डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति खुद की त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। घबराहट, डर, उत्साह और बोरियत जैसी स्थितियों से निपटने के लिए भी लोग इस तरह के व्यवहार का सहारा लेते हैं। यह लगातार और जुनून में किया जाने वाला व्यवहार होता है जिसकी वजह से त्वचा के टिशूज को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि डर्माटिलोमेनिया ट्रिचोटिलेमेनिया यानी अपने ही बालों को खिंचने की समस्या से मिलती-जुलती है।

इन्फेक्शन का होता है खतरा

लगतार एक ही जगह की स्किन नोचते रहने से रोगी को इन्फेक्शन का खतरा भी रहता है। क्योंकि कई लोग त्वचा को निकालने के लिए चिमटे जैसी या किसी नुकीली चीज का भी प्रयोग करते हैं। इससे स्किन टिशूज के डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार समस्या इतनी बढ़ जाती है कि स्किन ग्राफिटग तक करवाने की जरूरत पड़ जाती है। डर्माटिलोमेनिया का प्रभाव मानसिक रूप से भी पड़ता है क्योंकि रोगी असहाय महसूस करता है, उसे खुद के व्यवहार पर शर्मिंदगी महसूस होती है। एक शोध में यह बात सामने आई है कि डर्माटिलोमेनिया से पीड़ित 11.5 प्रतिशत रोगी आत्महत्या करने का प्रयास करते हैं।

बिहेवियरल थैरेपी है कारगर

डर्माटिलोमेनिया के लिए कॉग्नेटिव बिहेवियरल थैरेपी मददगार होती है। इस थैरेपी की मदद से स्किन पिकिंग की आदत को छुड़ाने में मदद मिलती है। ऐसा करने के लिए उत्सुक होने से रोकने के लिए एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं भी रोगी को दी जाती हैं। अपने परिवार या मित्रों के सपोर्ट से भी इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

कम उम्र में होती है समस्या की शुरुआत

छोटे बच्चों में अकेलेपन, डर या उत्साह में अपनी ही त्वचा को नोचने की आदत लग जाती है। किशोरावस्था में एक्ने जैसी समस्या होने पर इस तरह का व्यवहार आमतौर पर देखा गया है, जब किशोरवय बच्चों को अपनी त्वचा को कुरेदकर निकालने की आदत हो जाती है।

कई बार सोरायसिस और एक्जिमा जैसी परेशानियों में भी त्वचा को इस तरह नोंचकर या कुरेदकर निकालने की आदत हो जाती है। लेकिन 30 से 45 साल उम्र का दूसरा पड़ाव होता है, जिसमें लोगों में डर्माटिलोमेनिया जैसी परेशानी देखी जाती है। इस दौर में इस समस्या के होने के पीछे तनाव को सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

 

नवरात्रि पर बनाएं ये व्यंजन

मेवा खीर

Mewa Kheer Recipe In Hindi - Dry Fruit Kheer Recipe

 सामग्री – एक लीटर फुल क्रीम दूध, एक कप मखाने कटे हुए, 15 से 20 काजू, आधा कप चिरौंजी, आधा कप किशमिश, 15 से 20 बादाम कटे हुए, 5 से 6 इलायची पिसी हुई , आधा कप चीनी।

कटे हुए बादाम और चिरौंजी से मेवे की खीर को सजाकर परोसें।

विधि –  सबसे पहले किशमिश धोकर भिगो दें।  गैस पर एक भगोने में दूध उबलने के लिए रख दें। दूध में उबाल आने के बाद मखाने, काजू, चिरौंजी और बादाम डालकर एक बड़ी चम्मच से चलाकर सारी सामग्री को मिक्स करें। अब धीमी आंच पर 8 से 10 मिनट तक दूध और मेवे पकने दें। बीच-बीच में खीर में चम्मच चलाते रहें। जब दूध गाढ़ा लगने लगे तो खीर में चीनी डालकर मिलाएं और मध्यम आंच पर 5 मिनट तक पकने दें। उसके बाद खीर में किशमिश और इलाइची पाउडर मिलाकर इसे 2 मिनट तक और पकाएं।  अब गैस बंद कर दें। मेवे की खीर तैयार है।

सिंघाड़े की बर्फी

सामग्री —100 ग्राम सिघाड़े आटा, 1 चम्‍मच घी, 100 ग्राम चीनी, 1 चम्‍मच इलाइची पाउडर, 1 चम्मच किशमिश, 1/2 कप कटे हुए मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता)।singhara-burfi

विधि – एक पैन में घी डाल कर गरम करें और सिंघाड़े  का आटा डाल कर हल्का गुलाबी होने तक भून लें। भुने हुए आटे में पानी और चीनी डालकर अच्‍छी तरह मिलाएं और उबाल आने के बाद 4-5 मिनट तक पकाएं। सिंघाड़ा जब हलुवे के जैसा बन जाए तो उसमें इलायची पाउडर डालकर चलाएं। एक थाली में घी लगा कर चिकना कर लें और सिघाड़े के हलुवे को थाली में डालकर पतला फैला कर जमा दें। सिंघाड़े की बर्फी पर कटे मेवे और किशमिश डाल दें और ठंडा होने पर चाकू की मदद से इसे मनचाहे टुकड़ों में काट लें। अब चाहे तो इसे व्रत में खाएं या फिर स्वीट डिश में सर्व करें।

 सिर्फ औरतें चलाती हैं यहां पर 4000 दुकानें

मणिपुर में एक ऐसा मार्केट है जिसे सिर्फ महिलाएं चलाती हैं। यहां पर करीब 4000 दुकानें हैं। इनमें एक भी पुरुष काम नहीं करते। इसे एशिया में महिलाओं का सबसे बड़ा मार्केट भी कहा जाता है। 500 साल पुराना है ये बाजार…

यह मणिपुर के इम्फाल में है। इस मार्केट को मदर्स मार्केट भी कहते हैं और यह करीब 4 हजार पुराना है। यहां हजारों की संख्या में कस्टमर्स रोज आते हैं। स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत करने के लिए भी लोग इस मार्केट में पहुंचते हैं। कहते हैं कि यह मार्केट तब शुरू हुआ था जब यहां पर राजा हुआ करते थे।

तब ‘लैलप’ नाम की एक ऐसी परंपरा थी जिसमें मैती कम्युनिटी के पुरुषों को राजा के दरबार में काम करने के लिए अक्सर बुला लिया जाता था। इस कारण से महिलाओं पर बाकी जिम्मेदारी आ गई। महिलाएं ही खेती भी करने लगीं और दुकानें भी चलाने लगीं। इसके बाद से यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में भी निभाया जाने लगा।

हालांकि, मार्केट की खास बात ये है कि इसमें सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को काम करने दिया जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाद के सालों में मार्केट की परंपरा को बदलने के लिए कई तरह के दबाव भी बनाए गए, लेकिन इन महिलाओं ने उनका विरोध किया और मार्केट से कब्जा नहीं छोड़ा।