Tuesday, March 24, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 812

मुझे ‘बिग बॉस’ पसंद नहीं है : सूरज बड़जात्या

0

अपने अधिकांश फिल्मों में सलमान खान के साथ काम करने वाले फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या को सुरपस्टार के विवादित रियल्टी कार्यक्रम ‘बिग बॉस’ पसंद नहीं है।’’ बड़जात्या ने यहां पर एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे ‘बिग बॉस’ पसंद नहीं है। मैं वह खंड :वीकेंड का वार एपिसोड जिसमें सलमान खान आते हैं: नहीं देखता।’’ उन्होंेने चुटकी ली, ‘‘वास्तव में मैं ज्यादा टेलीविजन नहीं देखता। मैं नये कार्यक्रम देखता हूं। मुझे ‘शक्ति’, ‘शनि’ :टीवी कार्यक्रम’ पसंद हैं।’’ बड़जात्या अपने नये टीवी कार्यक्रम ‘एक श्रृंगार .. स्वाभिमान’ प्रस्तुत किये जाने से इतर संवाददाताओं के साथ बातचीत में यह बात कही।

पारंपरिक मूल्यों वाले एक आधुनिक नजरिये वाले दंपति की कहानी वाली धारावाहिक ‘एक श्रृंगार.. स्वाभिमान’ का निर्माण राजश्री प्रोडक्शन ने किया है। यह धारावाहिक 19 दिसंबर से कलर्स चैनल पर प्रसारित होने जा रही है।

 

पीएम ने करवाया बैंकों की 500 शाखाओं का स्टिंग, 400 सीडी वित्त मंत्रालय पहुँची

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकों में चल रही गड़बड़ियों को जांचने के लिए देश के बैंकों की करीब 500 शाखाओं का स्टिंग करवाया है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय में स्टिंग ऑपरेशन की करीब 400 सीडी पहुंच भी चुकी हैं। इन बैंकों में निजी और सरकारी दोनों बैंक की शाखाएं शामिल हैं।

सूत्रों की मानें तो सीडी में बैंक अधिकारियों, पुलिस, दलाल और जालसाजों की मिलीभगत से नोट बदले जाने के सबूत भी मिले हैं। सीडी में साफ पता चल रहा है कि बैंकों में पुलिस, दलाल और प्रभावशाली लोगों की सांठ-गांठ से कैसे पुराने नोट बदले जा रहे हैं।

बैंकों में हुई गड़बड़ी की जांच जारी है। करेंसी संकट में थोड़ा सुधार होने के बाद भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो कार्रवाई फिलहाल फरवरी या मार्च तक के लिए टाल दी गई है जिससे अभी कामकाज पर कोई असर न पड़े।

रेवेन्यू इंटेलीजेंस के सूत्रों के अनुसार अगर बैंकों की भूमिका सही रहती तो नोटबंदी के बाद से लोगों को इतनी दिक्कत नहीं होती।

आपको बता दें कि कालेधन पर लगाम लगाने के लिए सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद बैंककर्मी भी सफेद धन को काला और कालेधन को सफेद करने में लगे हैं, जिसके चलते कई बैंककर्मियों के खिलाफ कार्यवाई भी हुई है।

गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट ने एक्सिस बैंक के मैनेजर विनीत गुप्ता और शोभित सिन्हा को सात दिन की रिमांड पर भेजा था। इन दोनों मैनेजरों को यूपी की राजधानी लखनऊ में काले धन को सफेद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है।

इससे पहले पटना स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बिड़ला मंदिर शाखा के एक कर्मी को कालेधन को सफेद और सफेद को कालाधन करने के मामले में निलंबित किया गया था।

 

जब-जब संसद में कामकाज ठप रहा इस सांसद ने लौटा दिया वेतन

0

संसद का पूरा शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। महीने भर चले सत्र में एक भी दिन अच्छी तरह से काम नहीं हो सका।  जानकारों ने इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को लताड़ा। यहां तक की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी इस पर चिंता जाहिर की। संसद में कार्यवाही के दौरान 1 मिनट पर 2.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। 1 घंटे का खर्च 1.5 करोड़ रुपये और पूरे 1 दिन का खर्च 9 करोड़ रुपये होता है। ऐसे में कई लोगों ने सांसदों के वेतन में कटौती करने को कहा।

इस सबके बीच बीजू जनता जल (बीजेडी) सांसद जय पांडा ने एक उदाहरण पेश किया है। लोकसभा की कार्यवाही नष्ट होने से दुखी सांसद जय पांडा ने अपनी तरफ से इसकी भरपाई करने की कोशिश की है। पांडा ने बताया कि वो अपने वेतन का उतना हिस्सा और भत्ता लौटा देते हैं, जितना लोकसभा के समय का नुकसान हुआ है। ऐसा वो 4-5 सालों से कर रहे हैं।

संसद में जारी गतिरोध पर आडवाणी ने तृणमूल सांसद इदरीस अली को अपना दर्द बताते हुए कहा था कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी संसद में होते तो बहुत दुखी होते। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि ‘मेरा मन कर रहा है कि मैं इस्तीफ़ा दे दूं।’

राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा था कि संसद में गतिरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि भगवान के लिए अपना काम करें। राष्ट्रपति मुखर्जी ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास होने की वकालत भी की थी।

 

अम्मा के जाने से बदला तमिलनाडु की राजनीति का समीकरण

0
  • सुषमा त्रिपाठी

भारतीय राजनीति के आकाश में जयललिता उस तारे की तरह हैं जो कहीं न कहीं अकेले आकाश में अपनी चमक बिखेर रहा है। आप इसे किसी छवि से नहीं बाँध सकते मगर आप उनको नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने राजनीति में वे तमाम दाँव खेले, जिनकी उम्मीद आप किसी नेता से करते हैं। उन्होंने रात के 2 बजे डीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री करुणानीधि को गिरफ्तार करवाया और इसे प्रतिशोध की राजनीति माना गया। जयललिता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। जब भी उनका जिक्र होता है, उनके साथ उनकी साढ़े 10 हजार साड़ियाँ, 750 जूते – चप्पल और 28 किलो सोने के साथ उनकी अचल सम्पत्ति की बात भी चलती है।

jayalalithaa_650x400_71432320366

एक ऐसी नेत्री जो अकेले अपने दम पर खड़ी हुई, अपना राजनीतिक साम्राज्य बनाया और गयीं भी तो उनके पास कोई नहीं था। एमजीआर के जाने के बाद उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत की। खुद को एमजीआर के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में अकेले खुद को साबित किया। जानकी रामचंद्रन के परिवार और बाद में करुणानिधि के समर्थकों के हाथों जिस तरह वे अपमानित हुईं, वह अपमान उन्होंने राजनीतिक शस्त्र की तरह इस्तेमाल किया और इसे सहानुभूति में बखूूबी बदला। अगर कहा जाए कि जयललिता को स्थापित करने में इन घटनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है तो यह गलत नहीं होगा। अब जयललिता की मौत जिन परिस्थितियों में हुई  और  उनके आस – पास जो लोग थे, अब उन पर सवाल उठ रहे हैं और कहीं न कहीं इन सवालों में दम भी है। जयललिता की विश्वस्त मानी जानी वाली शशिकला को ये सवाल अब परेशान करने जा रहे हैं। इन तमाम सवालों का रिश्ता जयललिता की राजनीति और राजनीतिक विरासत से हैं। ये ऐसी परिस्थितियाँ हैं, जिनका लाभ हर पार्टी उठाना चाहेगी।

shashi-kala-1-570x320

हैरत की बात नहीं होगी अगर दीपा जयकुमार अगर राजनीति में कदम रखें क्योंकि शशिकला को तो वो अभी से चुनौती दे रही हैं। अब देखना यह है कि कौन सी पार्टी उनको पाने में सफल होती है। उनके हाव – भाव और उनकी छवि भी जयललिता की तरह है इसलिए तमिलनाडु की भावुक जनता अगर दीपा में जयललिता को खोज बैठे तो शशिकला के न चाहते हुए भी तमिलनाडु की नयी अम्मा बन सकती हैं। जाहिर सी बात है कि तमिलनाडु के सीएम पनीरसेल्वम जयललिता के वफादार भले ही हों मगर उनको शशिकला का खास बताया जा रहा है। एआईडीएमके में शशिकला के नाम को आगे बढ़ाया जा चुका है और अब वो पार्टी की महासचिव बनने जा रही हैं। पनीरसेल्वम को बहुत से विधायक पसंद नहीं करते इसलिए उन पर दबाव तो है ही और अगर दीपा जयकुमार जयललिता की राजननीतिक उत्तराधिकारी बनने के लिए मैदान में उतरती हैं तो पनीरसेल्वम को नापसंद करने वाले विधायक दीपा को अपना नेता मान लें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि उनको जयललिता की छवि वाला चेहरा चाहिए और वो दीपा जयकुमार में है।

pm-panneerselvam_650x400_71481026250

 

भाजपा फिलहाल शशिकला के साथ दिखायी दे रही है मगर परिस्थितियों को देखते हुए अभी कुछ भी मान लेना या निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाजी होगी। कहा जा सकता है कि पार्टी अभी इंतजार करो और देखो की स्थिति में है। दूसरी ओर काँग्रेस अभी डीएमके के साथ खड़ी है मगर 93 साल के करुणानिधि की पार्टी का भविष्य अभी बहुत उज्ज्वल नहीं दिखायी पड़ रहा है। शशिकला भी पार्टी की कमान सम्भाल भी लें तो भी उनके लिए आगे की राह बेहद कठिन है। पनीरसेल्वम के सामने चुनौती है कि वे खुद को बतौर मजबूत मुख्यमंत्री साबित करें। इसके लिए उनको ‘शशिकला का वफादार’ छवि से बाहर निकलना होगा मगर ये करना उनके लिए आसान नहीं होगा। सम्भव है कि ऐसे में केन्द्र की भाजपा सरकार के साथ उनके रिश्ते मजबूत हो और भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करे। जाहिर है कि जयललिता के जाने से तमिलनाडु की राजनीति का पूरा समीकरण बदल चुका है और वह किस करवट लेगी, वह सिर्फ आने वाला वक्त बता सकता है।

सिगरेट को कहिए अलविदा

0

यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो डिब्‍बी से सिगरेट निकालते वक्‍त जब उस पर बने चित्र पर नजर पड़ती होगी, तो मन में जरूर खयाल आता होगा कि ‘छोड़ दूंगा’, लेकिन उसके बाद भूल जाते होंगे। हम आज आपको बतायेंगे सिगरेट छोड़ने के 10 अचूक उपाय, जिन्‍हें अपनाकर आप अपनी उम्र बढ़ा सकते हैं, कैंसर से छुटकारा पा सकते हैं और अपने परिवार के लिये कुछ अच्‍छा कर सकते हैं।

लेकिन उससे पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि लोग सिगरेट पीना क्‍यों शुरू करते हैं। पहला- ज्‍यादा तर युवा सिगरेट शौक में आकर पीना शुरू करते हैं। मौज-मस्‍ती के लिये, फिर आगे चलकर वही मौज-मस्‍ती लत बन जाती है। कई लोग सिगरेट अन्य लोगों से प्रेरित होकर पीना शुरू करते हैं और तमाम लोग ऐसे हैं, जिनके मन में गलत फहमी होती है कि सिगरेट स्‍मोकिंग से टेंशन कम होता है।

सिगरेट से होने वाला कैंसर लोगों को मौत के सिवा कुछ नहीं दे रहा है। हम यहां आंकड़े देकर लेक्‍चर नहीं देना चाहेंगे, क्‍योंकि मौत के आंकड़े सिर्फ पुष्टि करते हैं, हम मौत नहीं जिंदगी देने के लिये यह लेख लिख रहे हैं….

सिगरेट खरीदते वक्‍त खुद से ये सवाल करें –

यदि आप छात्र हैं तो खुद से पूछें- क्‍या मैं अपने माता-पिता की कमाई से मौत खरीद रहा हूं?
यदि आप नौकरी करते हैं, बेचलर हैं- क्‍या मैं इसी के लिये कमा रहा हूं?
यदि आप एक पति हैं- यदि मैं जल्‍दी मर गया, तो क्‍या मेरी पत्‍नी मेरे बगैर रह सकेगी?
यदि आप पिता हैं- तो सवाल करें, इस सिगरेट के बदले मैं अपने बच्‍चों के लिये क्‍या खरीद सकता हूं?

अपने आस-पास के लोगों को बतायें

यदि आप सिगरेट छोड़ने का मन बना चुके हैं, तो अपने आस-पास के लोगों को बतायें कि आप सिगरेट छोड़ने जा रहे हैं। खास तौर से वर्कप्‍लेस पर काम करने वाली महिलाओं को।

जेब में चिल्‍लर मत रखें

यदि आप सिगरेट छोड़ने जा रहे हैं, तो सबसे पहले पूरा पैकेट खरीदना बंद कर दें। जाहिर सी बात है, बाहर निकलते ही आपका मन एक सिगरेट पीने का होगा। यदि आपकी जेब में चिल्‍लर यानी खुले पैसे हैं, तो आप तुरंत दुकान पर जाकर सिगरेट खरीद लेंगे। लिहाजा यदि आप कुछ दिनों तक अपनी जेब में 100 या 500 के नोट रखेंगे, तो 7 रुपए की सिगरेट खरीदने से पहले दस बार सोचेंगे। हो सकता है दुकानदार ही आपको मना कर दे।

सफल लोगों के बारे में पढ़ें

तमाम सफल लोग हैं, जो पहले सिगरेट का सेवन करते थे, बाद में छोड़ दी। आप उनकी सक्‍सेस स्‍टोरी पढ़ें और देखें, कि सिगरेट छोड़ने के बाद उनके जीवन में क्‍या बदलाव आये।

एक दिन में नहीं छोड़ें

यदि आप सिगरेट छोड़ने जा रहे हैं, तो धीरे-धीरे छोड़ें। एक दिन में इसकी आदत कभी नहीं छूटती। यदि आप एक दिन में 10 सिगरेट पीते हैं, तो एक सप्‍ताह तक 8 कर दीजिये, फिर अगले सप्‍ताह 6, फिर 4, 2, 1 और फिर शून्‍य।

व्रत रखें

भारत में तमाम लोग मन्‍नत मांगते हैं और उसके लिये व्रत रखते हैं। यदि आप वाकई में सिगरेट छोड़ना चाहते हैं, तो कोई भी मन्‍नत मांगें और ईश्‍वर के सामने संकल्‍प लें, कि आपकी मन्‍नत पूरी होने तक आप सिगरेट नहीं पीयेंगे। मन्‍नत ऐसी होनी चाहिये, जो आपके जीवन में सबसे महत्‍वपूर्ण है। तब आप खुद अपने जीवन में बड़ा फर्क देखेंगे। और मन्‍नत पूरी होने के बाद भी आपको सिगरेट पीने की इच्‍छा नहीं होगी। यह व्रत कम से कम 6 महीने का होना चाहिये।

खुद को इनाम दें

सिगरेट छोड़ने के बाद आपके जीवन में जो कोई भी अच्‍छे काम हों, उन्‍हें लोगों को बतायें। आपके स्‍वास्‍थ्‍य में जो फर्क पड़े, उसे ध्‍यान से वॉच करें।

शराब छोड़ दें

यदि आप शराब पीते हैं, तो उसे भी कम कर दें, क्‍योंकि शराब पीने के बाद सिगरेट पीने की तलब जरूर लगती है।

एक मनी बॉक्‍स बनायें

एक मनी बॉक्‍स बनायें और जब भी सिगरेट पीने की इच्‍छा हो, जितने की सिगरेट है, उतने पैसे उस बॉक्‍स में डाल दें। फिर महीने के अंत में उस पैसे से अपनी पसंदीदा चीज खरीद कर लायें। यदि आप उस पैसे से अपनी गलफ्रेंड, पत्‍नी या बच्‍चों के लिये कोई गिफ्ट खरीदते हैं, तो आपको अजब सा सुकून मिलेगा। हां आप यह पैसा किसी जरूरतमंद को भी दान कर सकते हैं।

ऐशट्रे और लाइटर फेंक दें

सिगरेट छोड़ने से ठीक पहले ऐशट्रे और लाइटर फेंक दें। क्‍योंकि जब तक वो आपके साथ हैं आपका मन उतावला जरूर होता रहेगा।

 

 

‘टाइम पर्सन ऑफ दी इयर’ : ट्रम्प ने मुकाबला जीता, पीएम मोदी ने दिल

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘टाइम पर्सन ऑफ दी इयर, 2016’ के लिए ऑनलाइन रीडर्स सर्वेक्षण जीत लिया है। हालाँकि टाइम के सम्पादकों ने अंतिम फैसला डोनाल्ड ट्रम्प के हक में सुनाया मगर रीडर्स सर्वेक्षण में मोदी ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को पीछे छोड़ दिया।

सर्वे में 18 फीसदी मतों के साथ मोदी विजेता के तौर पर उभरे। मोदी को मिले मत उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी ओबामा, ट्रंप और विकीलीक्स के संस्थापक जुलियन असांजे को मिले सात फीसदी मतों के मुकाबले उल्लेखनीय रूप से अधिक हैं।

टाइम के मुताबिक मोदी इस साल की प्रख्यात शख्सियतों मसलन फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग :दो फीसदी: और अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन :चार फीसदी: से कहीं आगे रहे।

पर्सन ऑफ दी इयर के नाम पर अंतिम फैसला डोनाल्ड ट्रम्प के हक में रहा। टाइम के संपादक इस मसले पर उनको विजेता मान चुके हैं मगर इस चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक मोदी वर्ष 2016 के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व के तौर पर उभर कर आए हैं।

टाइम ने कहा कि रीडर सर्वे एक महत्वपूर्ण झरोखा है जो बताता है कि वर्ष 2016 में छाए रहने वाले व्यक्ति उनके मुताबिक कौन हैं।
मोदी ने यह सर्वे दूसरी बार जीता है। इससे पहले वर्ष 2014 में उन्हें पचास लाख मतों में से 16 फीसदी से ज्यादा मत हासिल हुए थे। लगातार चौथे साल वह ‘पर्सन ऑफ दी ईयर’ की दौड़ में शामिल हुए हैं। यह सम्मान हर साल उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने ‘‘अच्छी या बुरी वजह से सालभर हमारी दुनिया को प्रभावित किया और खबरों में छाया रहा।’’ पिछले साल यह सम्मान जर्मन चांसलर एंजेला मार्केल को मिला था।
टाइम ने सेप्टेंबर प्यू पोल के हवाले कहा कि हाल के महीनों में मोदी को पसंद करने वाले भारतीयों की उच्च रेटिंग देखने को मिली है।

 

ये हैं लखनऊ मेट्रो को पहली बार चलाने वाली प्राची और प्रतिभा

0

1 दिसम्बर को लखनऊ भारत का पहला ऐसा शहर बन गया जहाँ दो महिला चालको द्वारा मेट्रो रेल की शुरुआत की गयी। इस मेट्रो को चला रही थी अलाहबाद की प्रतिभा शर्मा और प्राची शर्मा।

यह फैसला लखनऊ मेट्रो रेल कोरपोरेशन (एलएम्आरसी )द्वारा महिलाओं को इस क्षेत्र में प्रेरित करने के लिए लिया गया। जब एलएम्आरसी द्वारा 97 रेल चालको की जगह की घोषणा की गयी तो आवेदकों में 19% महिलायें थी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 20% आरक्षण के नियम के तहत एलएम्आरसी ने 21 महिलाओं को इस नौकरी के लिए चुना।

चेन्नई के अलावा मेट्रो की सुविधा वाले बाकी सभी भारतीय शहरो में 3% से भी कम महिलाओं को रेल चालक के रूप में नौकरी दी जाती है।

“हमने पहली बार मुख्यमंत्री और आम लोगों के सामने मेट्रो चलाने के लिए दो महिला चालको को चुना। हमारी महिला चालकें आत्मविश्वास से भरी हुई है। वे मेट्रो चलाने के लिए इतनी उत्साहित थी कि परीक्षण के दिन भी इसे चलाने की इच्छा रखती थी। इन महिलाओं को बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने पहले एलएमआरसी के सेंटर ऑफ़ एक्सलेंस से प्रशिक्षण लिया और फिर दिल्ली मेट्रो रेल कोरपोरेशन में रहकर भी सीखा,” एलएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री कुमार केशव ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया।

प्रतिभा ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की है और प्राची को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल है। इन दोनों ने जून महीने में स्टेशन कंट्रोलर के तौर पर एलएमआरसी में काम करना शुरू किया था।

“मुझे अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे। हमे गर्व है कि हम लखनऊ का पहला मेट्रो चला रहीं है,” प्राची ने जी न्यूज़ के एक रिपोर्टर के साथ बात करते हुए कहा।

प्रतिभा और प्राची ने चार कोच वाली इस रेल को पहले दिन 6 किमी की दूरी तय करके 6 स्टेशनो से गुज़रते हुए चलाया। इनकी यात्रा ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो डेपो से शुरू होते हुए लखनऊ के चारबाघ रेलवे स्टेशन पर आकर रुकी।

 

दो महिलाओं ने बदली गांव की किस्मत

0

देश के कई ऐसे हिस्से हैं जहां पर लोग सूखे और बेहाली का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।  इन्हीं में से एक तेलंगाना का हसनाबाद गांव भी है। यहां बहुत मुश्किल से पैदावार होती है और उसका भी एक हिस्सा बिचौलिए ले जाते हैं। पैसों की किल्लत के चलते यहां के लोग मजदूरी करके अपना काम चलाते थे लेकिन अब यहां पर सबकुछ बदल रहा है।

अनाज बिक्री सीधी होने लगी है और लोगों को अपनी फसल के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इस सफलता और मेहनत का श्रेय गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं को जाता है।

2013 रखी गई इस कंपनी की नींव 
इस गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं 63 साल की नागम्मा और 35 साल की लक्ष्मी ने एक कंपनी बनाई हैं। तीन साल पहले कंपनी बनाई गई इस कंपनी का सालाना टर्नओवर दो करोड़ रुपये है। इस कंपनी की शुरुआत 2013 में की गई थी। नागम्मा और लक्ष्मी के साथ इस कंपनी को 800 और महिलाएं मिल कर चलता हैं। कंपनी की फाउंडिंग कमेटी में 15 महिलाएं हैं जिनमें से कुछ पढ़ी-लिखी हैं तो कुछ अनपढ़।

कैसे आया इतना बड़ा बदलाव
पति की मौत के बाद से लगभग पिछले 20 साल से कंपनी की डायरेक्टर नागम्मा खेती करके अपना घर संभाल रही थीं। सूखे के कारण महीनों तक खेतों में जूझते रहने के बाद फसल तैयार होती है। ऐसे में बिचौलियों की वजह से ठीक दाम नहीं मिलते थे। इसके बाद जो पैसा आता था उससे घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई और नई फसल के लिए बीज और खाद खरीदना सब बहुत मुश्किल हो जाता था।
दूसरी तरफ नागम्मा जैसी ही गांव की दूसरी महिला लक्ष्मी दूध बेचने का काम करती थी। पति की मजदूरी से घर नहीं चलता था। फिर साल 2012 में एक संगठन ने गांव से आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कंपनी खोलने को कहा। बस उसी पल नागम्मा ने कंपनी खोलने का मना बना लिया। इस पहल में उनका साथ दिया लक्ष्मी ने, लेकिन इस बात के लिए उन्हें अपने पति से मार भी खानी पड़ी।

ऐसे तैयार किया गांव की महिलाओं को
लक्ष्मी को नागम्मा पर विश्वास था और इसलिए दोनों ने साथ काम करना शुरू किया और अपनी जैसी महिलाओं को कंपनी खोलने को तैयार करने लगीं। दोनों ने एक साल में 15 किमी दायरे के हर गांव में जाकर 15 महिलाएं को इकट्ठा किया और रजिस्ट्रेशन होने तक पूरी 60 महिलाएं उनसे जुड़ चुकी थीं।

जब चिटफंड वाला समझकर लोग भगा देते थे 
कंपनी के शुरुआत के दिनों में जब नागम्मा महिलाओं से कहती थीं कि हम कंपनी सरकार से लोन लेकर खोल रहे हैं और आप भी 100 रुपये देकर कंपनी मालिक बन सकती हैं, तो हमें चिटफंड वाला समझ कर भगा दिया जाता था। इस सबके बाद भी कंपनी में प्रोडक्शन से लेकर बिक्री तक का काम शुरू हुआ।
पहले साल दाल को खरीदने-बेचने का काम हुआ। कंपनी ने ना सिर्फ अपने मेंबर्स, बल्कि दूसरे किसानों से भी दाल खरीदी और बेची. ऐसा करने से बिचौलिए की जेब में जाने वाला कमीशन बचने लगा। पहले ही साल कंपनी को चार करोड़ रुपये सालाना का टर्नओवर मिला.

कंपनी से जुड़ी हर महिला की इनकम में हुई आठ फीसदी की वृद्धि

कंपनी की सफलता को देखते हुए दूसरे ही साल 800 महिलाएं इस काम में जुड़ गईं। इनकी आय में औसत 8000 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। हसनाबाद फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी में वह अपने सामान की पैकेजिंग से लेकर मार्केटिंग तक की खुद मालिक हैं। कंपनी के नाम पर ही बीज, पेस्टीसाइड्स, खाद और दूसरी दवाओं की डीलरशिप ली जाती है। इन महिलाओं की मेहनत और लगन से अब गांव में न सूखा है न ही कोई भूखा सोता है।

 

दुबई में फंसा भारतीय, अस्पताल में रहकर सुषमा ले आयीं वापस

0

सुषमा स्वराज तमिलनाडु के रहने वाले एक ऐसे शख्स को भारत लाने में कामयाब हुईं हैं, जो दो सालों तक दुबई की एक कोर्ट के चक्कर लगाते रहे थे। 48 वर्षीय जगन्नाथन सेल्वाराज दुबई के सोनापुर में रहकर काम करते थे। इधर भारत में सेल्वाराज की मां का देहांत हो गया था पर उन्हें भारत आकर मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं मिल पाई। इसके बाद मामला कारमा जिले की कोर्ट पहुंचा जो सोनापुर से 22 किमी दूर स्थित है। सोनापुर से कोर्ट तक बस में जाने के लिए कुछ ही दिरहम लगते थे लेकिन पैसों की कमी के चलते सेल्वाराज उतने भी खर्च करने की अवस्था में नहीं थे।  इसलिए वे सुनवाई के लिए हाईवे पर पैदल चलकर ही कोर्ट जाते और पैदल ही वापस आते।

“मेरा केस नंबर 826 था और मुझे सुबह 2 घंटे पैदल चलकर कोर्ट पहुंचना होता था। जिस दिन मेरी सुनवाई होती थी उस दिन मैं सुबह 4 बजे उठकर चल देता था। हर पंद्रह दिन में मुझे कोर्ट तक पैदल चलना पड़ता था क्यूंकि मेरे पास बस या टैक्सी के लिए पैसे नहीं थे,” सेल्वाराज ने खलीज टाइम्स को बताया।

दो साल तक चले इस मामले की सुनवाई के लिए उन्हें 20 बार पैदल कोर्ट तक आना जाना पड़ा जिसमें उन्हें चार घंटे से ज्यादा लगते थे।  सेल्वाराज अपने घर लौटना चाहते थे लेकिन उन्हें फ्लाइट की टिकट नहीं मिल रहा था। इसके लिए वो दो साल तक हर रोज 50 किमी पैदल चलकर कोर्ट जाते और लौटते, इस तरह उन्हें कुल एक हजार किमी चलकर भी सफलता नहीं मिली।

इस बात की चर्चा सोशल मीडिया पर तब हुई जब दुबई  के स्थानीय अखबार ने इस खबर को प्रकाशित किया

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अस्पताल में भर्ती विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को जैसे ही इसकी खबर मिली उन्होंने तुरंत दुबई में भारतीय दूतावास को निर्देश दिए और एक हफ्ते के अंदर यह व्यक्ति भारत लौट आया।

आखिरकार सुषमा स्वराज की कोशिशें रंग लाई और जगन्नाथन अपने घर लौट आए हैं।सुषमा स्वराज ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि हम उन्हें भारत ले आए हैं और उनके गांव पहुंचा दिया है।

 

तीन बार तलाक कहना असंवैधानिक और अपमानजनक : उच्च न्यायालय

0
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि तीन तलाक असंवैधानिक है। यह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन करता है। कोई पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं है। कोर्ट तलाक के दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई कर रहा था। कोर्ट भी संविधान से ऊपर नहीं…
  हाईकोर्ट ने कहा, “तीन तलाक क्रूरता है। यह मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।”
कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। यहां तक कि कोर्ट भी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।”
कुरान में तीन तलाक को अच्छा नहीं माना गया है। उसमें कहा गया है कि जब सुलह के सभी रास्ते बंद हो जाएं, तभी तलाक दिया जा सकता है।”
“ऐसे में, तीन तलाक को सही नहीं माना जा सकता। यह महिला के साथ भेदभाव है, जिसे रोकने की गारंटी संविधान में दी गई है।”
कोर्ट ने कहा, “पंथ निरपेक्ष देश में संविधान के तहत सामाजिक बदलाव लाए जाते हैं।”
“मुस्लिम औरतों को पुराने रीति-रिवाजों और सामाजिक निजी कानून के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।”
क्या था मामला
इलाहाबाद हाईकोर्ट में तलाक के दो अलग-मामलों में पिटीशन लगाई गई थी।
पहला केस बुलंदशहर का था। इसमें एक 53 साल के शख्स ने अपनी बीवी को तलाक देकर 23 साल की युवती से शादी कर ली थी। पहली बीवी से दो बच्चे थे।
नवविवाहित जोड़े ने कोर्ट में पिटीशन लगाकर प्रोटेक्शन मांगा था।
कोर्ट ने उनकी पिटीशन यह कहते हुए खारिज कर दी कि 23 साल की युवती से शादी करने के लिए 2 बच्चों की मां को तलाक देना सही नहीं माना जा सकता है।
 दूसरे मामले में उमर बी नाम की एक महिला ने अपने प्रेमी से शादी कर ली थी। उमर का दावा था कि दुबई में रहने वाले उसके पति ने फोन पर उसे तलाक दे दिया।
 हालांकि, कोर्ट में उमर के पहले पति ने तलाक देने की बाद से इनकार किया। उसका कहना था कि उमर ने अपने प्रेमी से निकाह करने के लिए यह झूठ बोला है।
कुछ इस्लामिक देशों में कोर्ट को बतानी पड़ती है तलाक की वजह
कोर्ट ने कहा, “कई इस्लामिक देशों में पुरुष को कोर्ट में तलाक के कारण बताने पड़ते हैं, तभी तलाक मिल पाता है।”
बता दें कि देशभर में अलग-अलग कोर्ट में मुस्लिम महिलाओं और संगठनों ने पिटीशन दायर करके तीन तलाक को चुनौती दी है।
ऐसी ही कुछ पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हो रही है।
बोर्ड ने कहा था- सुप्रीम कोर्ट को बदलाव का हक नहीं
 इससे पहले तीन तलाक को लेकर दायर पिटीशन्स पर सुप्रीम कोर्ट भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से सवाल कर चुकी है।
 इस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हलफनामा दायर करते हुए कहा था कि ये पिटीशन खारिज किए जाने चाहिए।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का दावा है कि तीन तलाक एक ‘पर्सनल लॉ’ है और नियमों के मुताबिक सरकार या सुप्रीम कोर्ट इसमें बदलाव नहीं कर सकती।
सरकार भी जता चुकी विरोध
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
7 अक्टूबर को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था, “तीन तलाक, निकाह हलाला और एक से ज्यादा शादी जैसी प्रथाएं इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं हैं।”
 यह पहला मौका था जब केंद्र सरकार ने तीन तलाक का विरोध किया था।
इसके बाद लॉ कमीशन ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर लोगों से 16 सवालों के जवाब मांगे हैं। इनमें एक से ज्यादा शादी, तीन तलाक जैसी परंपराएं खत्म करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कमीशन ने और धर्मों पर भी सवाल पूछे हैं। हिंदुओं के ‘मैत्री करार’ और महिलाओं के संपत्ति के अधिकार पर भी लोगों से सुझाव मांगे गए हैं।
  शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसले का स्वागत किया
-ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के स्‍पोक्‍सपर्सन मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, “कोर्ट ने बहुत ही अच्छा फैसला दिया है। तीन तलाक पर रोक लगनी चाहिए।”