Tuesday, March 24, 2026
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कनाडा की बर्फ में भंगड़ा करके पूरी दुनिया में अपना रंग जमा रहे है ये भारतीय युवक!

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भारत और भारत की संस्कृति हमेशा से पूरी दुनिया को अपनी ओर खींचती आई है। हमारी विविधता में ही हमारी ताकत छुपी हुई है। फिर चाहे वो अलग अलग भाषाएँ हो, त्यौहार हो या फिर कला। भारत के हर प्रदेश की अपनी एक अलग संस्कृति है जो यहाँ रहने वालो को ही नहीं बल्कि विदेशियों को भी मंत्रमुग्ध कर देती है। यूँ तो हर प्रदेश अपने आप में अनूठा है पर जब मौज मस्ती और नाच गाने की बात होती है तो सबसे पहले नाम आता है पंजाब का। पंजाब के भंगड़ा में वो थरकन है कि कोई भी अपने आपको नाचने से रोक नहीं पाता है। और पंजाबी चाहे जहाँ भी रहे अपनी खुशमिजाजी और भंगडे से लोगो का दिल जीत ही लेते है।

ऐसे ही कुछ पंजाबी युवाओं का ग्रुप है’ मैरीटाइम भंगड़ा ग्रुप‘, जो कनाडा में रहने वाले पंजाबी युवाओं ने मिलकर बनाया है। इस ग्रुप के भंगडे को देखकर पूरी दुनिया झूम रही है।

हाल ही में आये उनके एक वीडियो में ये सभी युवा भंगड़ा करते-करते बर्फ से ढकी हुई सड़के साफ़ कर रहे है। इस विडियो को अब तक 10 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके है और इसे फेसबुक पर 25000 से भी ज्यादा लोगो ने साझा किया है।

इस वीडियो में तीन कलाकार पहले तो एक पंजाबी धुन पर भंगड़ा करते है और फिर अचानक अंग्रेजी गाना ‘सिया’स चीप थ्रिल्स’ बजने लगता है। पर इस पर भी ये तीनो उतने ही मस्त होकर भंगड़ा करते है जैसे वे पंजाबी गाने पे करते है।

मनोरंजन करने के साथ-साथ ये ग्रुप लोगो को सामाजिक कार्यो में अपना योगदान करने के लिए भी प्रेरित करता है। विडिओ के साथ साथ किसी अच्छे काम के लिए योगदान देने का भी लिंक जोड़ा जाता है।

ऐसे युवाओं की वजह से ही हम गर्व से कह सकते है कि हमारा भारत और यहाँ की संस्कृति है “सारे जहाँ से अच्छा”।

 

नासिरा शर्मा को मिला 2016 का हिंदी में साहित्य अकादमी पुरस्कार

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साहित्य अकादमी ने बुधवार को 2016 के लिए अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा कर दी। हिंदी के लिए नासिरा शर्मा, उर्दू के लिए निजाम सिद्दकी, कश्मीरी में अजीज हाजिनी, पंजाबी के लिए स्वराजबीर, अंग्रेजी में जेरी पिंटो, संस्कृत के लिए सीतानाथ आचार्य शास्त्री सहित 24 भाषाओं के रचनाकारों के नामों की साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए घोषणा की गई।

अकादमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवास राव ने इन नामों की घोषणा की। पुरस्कारों की घोषणा के साथ साहित्य अकादमी ने वार्षिक कैलेंडर के साथ महान लेखक अभिनव गुप्त पर एक डायरी भी लांच की। साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवास राव ने बताया कि इस वर्ष आठ कविता-संग्रह, पांच उपन्यास, दो समालोचना, एक निबंध संग्रह और एक नाटक के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा।

यह पुरस्कार 21 से 26 फरवरी 2017 के बीच आयोजित होने वाली साहित्योत्सव में 22 फरवरी को दिया जाएगा। इसमें चयनित लेखकों के अलावा पूर्व में साहित्य अकादमी अवार्ड पा चुके लोगों को भी बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि 24 भाषाओं के अलावा चार गैर मान्यता प्राप्त भाषाओं के लेखकों को भाषा सम्मान भी दिया जाएगा।

राव ने कहा कि पुरस्कारों की अनुशंसा 24 भारतीय भाषाओं की निर्णायक समितियों द्वारा की गई। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित अकादमी के कार्यकारी मंडल की बैठक में बुधवार को इन्हें अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया। उन्होंने कहा कि इन रचनाकारों को पुरस्कार के रूप में उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रुपये दिए जाएंगे।

 

रेप पीड़िता से आरोप साबित करने के सबूत न मांगे जाएं : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने रेप के एक मामल में सुनवाई करते हुए गुरुवार को कहा कि अगर रेप पीड़िता की गवाही विश्वसनीय हो तो पीड़िता से आरोप को साबित करने के लिए पुष्टिकर सबूत नहीं मांगे जाने चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए के सीकरी और ए एम सप्रे की बैंच ने कहा कि यौन अपराधों के मामले में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण है और आरोपी को सिर्फ पीड़िता के बयान के आधार पर दोषी ठहराया जा सकता है।

बैंच का जजमेंट लिखने वाले जस्टिस सीकरी ने कहा कि कोई लड़की या महिला अगर रेप और यौन छेड़छाड़ की शिकायत करती है तो उसे शक और अविश्वास की निगाह से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोर्ट को पीड़िता का पक्ष स्वीकार करने में मुश्किल हो तो पुष्टि करने वाले कुछ सबूतों की मांग की जा सकती है।

बैंच ने यह फैसला एक व्यक्ति के अपनी भतीजी के साथ रेप करने के मामले में 12 साल की सजा सुनाते हुए दिया है। इस मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्ची और मां के बयानों में अंतर होने की वजह से आरोपी को बरी कर दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि पीड़ित परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने में काफी देर की है परिवार ने घटना के तीन साल बाद  एफआईआर दर्ज कराई। सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने कहा कि एफआईआर देर से दर्ज कराने की वजह से बलात्कार की शिकायत को झूठा नहीं करार दिया जा सकता। इस तरह के मामलों में लोग पुलिस के पास समाज में बदनामी की वजह से भी देरी से जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एफआईआर’ दर्ज कराने का निर्णय उस वक्त और ज्यादा मुश्किल होता है जब कोई आरोपी परिवार का ही सदस्य होता है।

बैंच ने कहा,’कई अध्ययनों में सामने आया है कि इस तरह के मामलों में 80 प्रतिशत अपराधी अंजान नहीं बल्कि पीड़ित के परिचित होते हैं। खतरा बाहर से ज्यादा अंदर है। इस तरह के ज्यादातर मामलों में जब बलात्कार का अपराधी परिवार का सदस्य होता है तो लोग कई कारणों से रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाते।

 

नहीं रहे पर्यावरणविद् और जल संरक्षण के लिए अपना पूरा जीवन लगाने वाले अनुपम मिश्र

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जाने-माने गांधीवादी, पत्रकार, पर्यावरणविद् और जल संरक्षण के लिए अपना पूरा जीवन लगाने वाले अनुपम मिश्र का दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. वो 68 बरस के थे।

हिंदी के दिग्गज कवि और लेखक भवानी प्रसाद मिश्र के बेटे अनुपम बीते एक बरस से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे।

विकास की तरफ़ बेतहाशा दौड़ते समाज को कुदरत की क़ीमत समझाने वाले अनुपम ने देश भर के गांवों का दौरा कर रेन वाटर हारवेस्टिंग के गुर सिखाए।

‘आज भी खरे हैं तालाब’, ‘राजस्थान की रजत बूंदें’ जैसी उनकी लिखी किताबें जल संरक्षण की दुनिया में मील के पत्थर की तरह हैं।

साल 1996 में मिश्र को इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।

गीतकार स्वानंद किरकिरे ने लिखा, “देश प्रेम के इस उन्मादी दौर में जब विकास के नाम पर सिर्फ विनाश की मूर्खतापूर्ण होड़ लगी है, आपका जाना हमें सही अर्थों में अनाथ कर गया।”

वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने फ़ेसबुक पर लिखा, “स्मार्टफोन और इंटरनेट के इस दौर में वे चिट्ठी-पत्री और पुराने टेलीफोन के आदमी थे. लेकिन वे ठहरे या पीछे छूटे हुए नहीं थे. वे बड़ी तेज़ी से हो रहे बदलावों के भीतर जमे ठहरावों को हमसे बेहतर जानते थे।”

पत्रकार सौमित्र राय ने फ़ेसबुक पर लिखा, “प्रकृति, पर्यावरण और हमारी बदलती जीवनशैली को लेकर उनकी चिंता, समुदाय आधारित उनके समाधान और खासकर राजस्थान में पानी को लेकर उनका काम कालजयी है. वे हमारे दिल में हमेशा रहेंग।.”

कुमार गंधर्व की बेटी कलापीनी कोमकली ने फ़ेसबुक पर लिखा, “सही अर्थों में भारतीय परिवेश, प्रकृति को गहराई तक समझने वाले अद्भुत विचारक,पर्यावरणविद, निश्चित ही अपनी तरह के विरले कर्मयोगी।.”

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने फ़ेसबुक पर लिखा, “हमारे समय का अनुपम आदमी। ये शब्द प्रभाष जोशीजी ने कभी अनुपम मिश्र के लिए लिखे थे। सच्चे, सरल, सादे, विनम्र, हंसमुख, कोर-कोर मानवीय। इस ज़माने में भी बग़ैर मोबाइल, बग़ैर टीवी, बग़ैर वाहन वाले नागरिक। दो जोड़ी कुर्ते-पायजामे और झोले वाले इंसान। गांधी मार्ग के पथिक. ‘गांधी मार्ग’ के सम्पादक. पर्यावरण के चिंतक। ‘राजस्थान की रजत बूँदें’ और ‘आज भी खरे हैं तालाब’ जैसी बेजोड़ कृतियों के लेखक।”

पत्रकार रजनीश झा ने फ़ेसबुक पर लिखा, “एक और तालाब सूख गया…..दादा (अनुपम मिश्र) का जाना वो खाली जगह है, जहां बस लटके हुए तालाब हैं. आप हमेशा ह्रदय में थे और रहेंगे. बस आप ना होंगे और आपके ना होने की रिक्तता कभी पूरी ना होगी. अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दादा.”

पत्रकार सचिन कुमार जैन ने फ़ेसबुक पर लिखा, “पानी और पर्यावरण की एक अलग ही समझ विकसित करने वाले और भाषा के समाज से रिश्तों को सामने लाने वाले बहुत सहृदय और स्पष्ट व्यक्ति आदरणीय अनुपम मिश्र जी हमारे बीच नहीं रहे.”

फ़ेसबुक यूज़र सुमित मिश्र, “अनुपम मिश्र जी पानी बचाने के लिए हमेशा आगे रहे, जिसका उदाहरण है जब भी उनके यहां जाएं तो पूछते थे कितना पानी पियोगे – आधा गिलास या उससे ज्यादा या फिर पूरा गिलास, जितना पियोगे उतना ही दूंगा. पानी बहुत कम है. इसे बर्बाद मत करना.”

फ़ेसबुक यूज़र देवेंद्र शर्मा ने लिखा, ”आज भी खरे हैं तालाब’ लोकमानस में सहेजे हुए ज्ञान को पुस्तक रूप में लाने का श्रमसाध्य कार्य सिद्ध करनेवाले श्री अनुपम जी मिश्र की देह शांत हो गयी. अनुपम जी गांधीवादी रहे, अपने ढंग से उन्होंने गांधी के आश्रित हो लोक को समझने का प्रयास किया.”

 

समाज को सूर्य की तरह आलोकित करे नौजवान पीढ़ी

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                                         लघु नाटक मेले के साथ आरम्भ हुआ 22वां हिंदी मेला

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हिंदी मेला नौजवानों का  मेला है जो नौजवानों के लिए नौजवानों द्वारा किया जाता है। वरिष्ठ आलोचक तथा सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के अध्यक्ष डॉ. शम्भुनाथ ने22वें हिंदी मेले के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नौजवानों को सन्देश दिया कि वे हिंदी मेले से गुजरने के बाद सांस्कृतिक अँधियारे से घिरे समाज को सूर्य की तरह आलोकित करें। मेले का उद्घाटन छपते – छपते तथा ताज़ा टीवी के प्रमुख विश्वम्भर नेवर ने किया। उन्होंने हिंदी मेले द्वारा किये जा रहे निरंतर प्रयास की सराहना की। मुख्य अतिथि के रूप में कवि मानिक बच्छावत उपस्थित रहे। मेले की शुरुआत लघु नाटक मेले के साथ हुई। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी जितेंद्र सिंह ने  कहा कि सारी विधाओं का समावेश नाटक में हैं और हिंदी मेले जैसे उत्सव रोज होने चाहिए।

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कवयित्री निर्मला तोदी ने कहा कि नाटक अवसाद को दूर करता है। उद्घाटन सत्र में रंगकर्मी महेश जायसवाल तथा सुरेश शॉ ने भी अपने विचार रखे। लघु नाटक मेले में माधव मिश्र सम्मान सोमनाथ चक्रवर्ती को प्रदान किया गया। मेले में प्रतिवेदन मिशन के महासचिव डा. राजेश मिश्र ने दिया। लघु नाटक मेले में 16 नाटकों का मंचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन ममता पाण्डेय तथा अनिता राय ने किया। अग्रसेन बालिका शिक्षा सदन की तरफ से बूढ़ी काकी, संकल्प कला मंच की तरफ से संस्कार और भावना, रेनेसां की ओर से शर्त, नील दर्पण की तरफ से पिज्जा, आदर्श माध्यमिक की तरफ से अहमियत, नीलांबर की तरफ से द स्पून, आरबीसी सांध्य महाविद्यालय की तरफ से सदाचार की ताबीज, फ्लेम की तरफ से द फ्लेम, महाराजा मनींद्र चंद्र कॉलेज की तरफ से हिंदी बोल रही, अम्बेदकर पब्लिक स्कूल की तरफ से नई सोच नई उड़ान, सरोजनी नायडू कॉलेज की ओर से औरत, प्रकाश ग्रुप की तरफ से मंत्र, विद्यासागर विश्वविद्यालय की तरफ से दंडाराज, सेंट लुईस डे स्कूल की तरफ से जामुन का पेड़, खिदिरपुर कॉलेज की तरफ से रिफंड और कालकूट की तरफ से दादी मां का भूत प्रस्तुत किया गया।

 

“कविता और कहानी का नाटकीय सस्वर” कोर्स के समापन कार्यक्रम

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लिटिल थेस्पियन ने कहानी और कविता की पाठ प्रस्तुति में अभिनय पक्ष की महत्ता को एक आवश्यक अंग मानते हुए भारतीय भाषा परिषद के साथ मिलकर इसके प्रशिक्षण के लिए तीन महीने का एक डिप्लोमा कोर्स , “कविता और कहानी का नाटकीय सस्वर”, प्रारम्भ किया है जिसके पहले सत्र का समापन आज भारतीय भाषा परिषद के सभाघर में  एक कार्यक्रम से हुआ जिसमे कक्षा के छात्रों ने इस सत्र की अंतिम प्रस्तुति दी।लिटिल थेस्पियन की निर्देशिका व प्रख्यात रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला की निगरानी में ये कक्षाएँ चली।

छात्रों की प्रस्तुति का आकलन करने के लिए हिंदी साहित्य व रंगमंच की प्रतिष्टित हस्तियां महेश जैस्वाल शम्भुनाथ और अज़हर आलम निर्णायकों के रूप में मौजूद थे।

छात्रों ने हिंदी के विख्यात लेखकों व कवियों की कृतियों का पाठ नाटकीय व् भावनात्मक ढंग से किया जिसने दर्शकों के दिलों को छुआ। ये कृतियाँ आनंदमय होने के साथ साथ विचारोत्तजक भी थीं। कहानियों में मंटो की कहानी खोल दो, प्रेमचंद की कफ़न, अमृता प्रीतम की ‘एक जीवी’, यशपाल की ‘फूलों का कुरता’ जैसी प्रभावशाली कहानियाँ थीं तथा कवितायों में केदारनाथ की ‘अकाल में सारस’, दिनकर की ‘आग की भीख’, मैथलीशरण गुप्त की ‘आर्य’, महादेवी वर्मा की ‘कौन हो तुम’ जैसी उत्कृष्ट रचनाएं शामिल थीं।

लिटल थेस्पियन की ये एक सराहनीय पहल है जो इस पाठ करने की शैली को बढ़ावा दे रहे हैं। इस तरह के पाठ से श्रोता नई ध्वनियों और नए बिम्बों से स्वतः जुड़ने लगता है क्योंकि हर अभिनेता अपने वाचन से उसके कई मर्म खोलता है और इसलिए कई अलग अलग बिम्बों की सृष्टि होती है ।

घर पर ऐसे सजाइये क्रिसमस ट्री

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अगर आप पहली बार क्रिसमिस ट्री को सजाने जा रही हैं तो आपको समझ में नहीं आ रहा होगा कि क्‍या करें और क्‍या नहीं। पूरी दुनिया में क्रिसमिस ट्री को सजाने की परंपरा हमेशा से ही चलती आ रही है। घरों, रेस्‍टोरेंट, चर्च, स्‍कूलों, ऑफिस आदि में क्रिसमिस ट्री को डेकोरेट करके रखा जाता है।

पेड़ की टहनियां सबसे पहले, आपको पेड़ की टहनी हो लाना होगा, जिससे क्रिसमिस ट्री बनाया जाएगा। अगर आपके पास क्रिसमिस ट्री है तो बिना दिक्‍कत के आप उसे ही डेकोरेट कर सकते हैं। आजकल मार्केट में ऐसी कई टहनियां मिलती है।

गमला या बाल्‍टी उस टहनी को किसी गमले या पॉट या किसी बाल्‍टी में कंक्रीट आदि भर लगा लें। आप इस पॉट को अपने मत मुताबिक रंग में भी रंग सकते हैं। डेकारेशन के हिसाब से इसको सजाया जा सकता है।

पत्‍थर या मध्‍यम आकार के स्‍टोन अगर आपके पास चमकदार पत्‍थर या छोटे-छोटे स्‍टोन है तो आप इसे सजा सकते हैं। ऊपर की ओर इन्‍हें रख दें। इससे अंदर भरा हुआ सामान जैसे- मिट्टी या कंक्रीट आदि नहीं दिखाई देगा।

फास्‍ट ड्राईंग सीमेंट आप हार्डवेयर स्‍टोर जाएं और वहां से फास्‍ट ड्राईंग सीमेंट लकर इस प्‍लांट की ब्रांच को फिक्‍स कर दें।पॉट में सीमेंट भरने के बाद लगभग दो घंटे के लिए यूँ ही छोड़ दें। इससे ये अच्‍छी तरह फिक्‍स हो जाएगा।

स्‍प्रे पेंट क्रिसमिस ट्री को सजाने के लिए स्‍प्रे पेंट को खरीद लें। इस स्‍प्रे को क्रिसमिस ट्री पर पूरा डाल दें। आप दो रंग या एक रंग का स्‍प्रे भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

डेकोरेटिव लाइट्स पेड़ को डेकोरेट करने के लिए आपको छोटी-छोटी वाला लाइट लानी होगी। इन्‍हें गोलाकार या रेंडम तरीके से लगा दें और जलाकर देखें। आप चाहें तो इन्‍हें तनों में भी लपेट सकते हैं। पेड को सजाने के लिए कई तरह की लाइट्स मार्केट में उपलब्‍ध हैं।

ट्री ऑरनोमेंट पेड़ को सजाने के लिए कई सारे ऑर्नामेंट भी बाजार में उपलब्‍ध हैं। माला, कैंडी कैन्‍स, स्‍टार, शॉक्‍स आदि को मार्केट से लेकर आएं और ट्री को अच्‍छे से डेकोरेट करें। आप चाहें तो कलरफुल रिबन भी बांध सकती हैं।

 

तो इसलिए कहते हैं क्रिसमस को बड़ा दिन

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भारतीय संस्‍कृति को परंपराओं का संगम कहें तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। सभी त्‍योहारों की तरह क्रिसमस यानी बड़े दिन का त्‍यौहार पूरे विश्‍व की तरह भारत भर में मनाया जाता है, मगर क्‍या कभी आपने सोंचा है भारत में क्रिसमस को बडे दिन के नाम से क्‍यों पूकारा जाता है। वैसे तो क्रिसमस को प्रभु ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।

भारत में क्रिसमस को बड़ा दिन कहने के पीछे कई अलग अलग मान्‍यताएं प्रचलित है कहा जाता है।पहले इसे रोमन उत्‍सव के रूप में मनाया जाता था इस दिन लोग एक दूसरे को ढेर सारे उपहार देते थे। जब धीरे-धीरे ईसाई सभ्‍यता पनपने लगी तब भारत में यह दिन मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाने लगा। इसके अलावा बड़े दिन के पीछे प्रभू ईसा के जन्म से जुड़ी कई कथाएं भी प्रचलित हैं।

25 दिसंबर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था भारत में इस तिथि को एक रोमन पर्व यामकर संक्रांति से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया है जिसकी वजह से इसे बड़े दिन के नाम से मनाया जाने लगा। वैसे तो पूरी दुनिया में इसे इसे 25 दिसंबर को मनाया जाता है मगर जर्मनी में 24 दिसंबर को ही इससे जुडे समारोह शुरू हो जाते हैं।

क्रिसमस के दिन संता क्‍लॉज का भी अपना अलग महत्‍व है, कहते हैं इस दिन सांता क्‍लॉज बच्‍चों के लिए ढेर सारे खिलौने और चॉकलेट लाते है। सांता क्‍लॉज को क्रिसमस का पिता भी कहा जाता है जो केवल क्रिसमस वाले दिन ही आते हैं। क्रिसमस का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि ईसा मसीह के जन्म की कहानी का संता क्लॉज की कहानी के साथ कोई संबंध नहीं है, कहते हैं तुर्किस्तान के मीरा नामक शहर के बिशप संत निकोलस के नाम पर सांता क्‍लॉज का चलन करीब चौथी सदी में शुरू हुआ वे गरीब और बेसहारा बच्‍चों को तोहफे दिया करते थे।

चाहे क्रिसमस कहें या फिर बड़ा दिन कुल मिलाकर इस दिन चारों ओर खुशियां ही खुशियां दिखाई देती है, लोग अपने घरों को सजाते है, गिरजाघरों में प्राथनाएं होती है। अब क्रिसमस को आने में कुछ ही दिन बचें है बाजारों में क्रिसमस गिफ्ट, कार्ड, प्रभु ईशु की चित्राकृतियाँ, सांता क्लॉज की टोपी, सजावटी सामग्री और केक मिलने भी शुरू हो गए है।

 

क्रिसमस पर बनाइए एगलेस केक

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वेज स्पंजी केक
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सामग्री: मैदा 200 ग्राम, मक्खन या घी, कन्डेंस्ड मिल्क, दूध 200 ग्राम, काजू 50 ग्राम, किसमिस, चीनी, बेकिंग पाउडर, छोटी चम्मच, खाने वाला सोडा


विधि: अगर आप ओवन इस्तेमाल कर रही है तो..सबसे पहले एक बर्तन में मैदा, बेकिंग पाउडर और खाने वाला सोडा मिलाइये और 2 बार छान लीजिये। मक्खन या घी को पिघला लीजिये। पीसी चीनी भी डाल दीजिये।  मिश्रण में कन्डेंस्ड मिल्क मिला कर अच्छी तरह फैट लीजिये।

मैदा बेकिंग पाउडर मिक्स को अब अच्छी तरह मिला लीजिये। दूध को थोड़ा थोड़ा डालिये और मिश्रण को पर्याप्त पतला कर लीजिये। 2 मिनट तक फैटिये और काजू, किसमिस डाल कर अच्छी तरह मिला दीजिये। केक बनाने वाले बर्तन में घी लगाकर चिकना कर लीजिये अब केक के लिये तैयार किया हुआ मिश्रण इस बर्तन में डालिये। अब इसे ओवन को 160 डिग्री तक बेक कीजिये। 10-15 मिनट के बाद इसे बाहर निकाल लीजिये। अब आपका स्पंजी केक तैयार है।

 

एगलेस वनिला केक

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सामग्री1 कप मैदा – 1½  छोटे चम्मच बेकिंग पाउडर, ½ कप कंडेंस्ड मिल्क, ½ छोटा चम्मच बेकिंग सोडा, 1 छोटा चम्मच वनिला एसेंस, 4 बड़े चम्मच पिघला हुआ मख्खन या रिफाइंड ऑयल, 2 बड़े चम्मच पिसी चीनी, 2 बड़े चम्मच दूध, 2 बड़े चम्मच कोकोया पाउडर, ½ चम्मच तेल बर्तन में लगाने के लिए, 1 चम्मच मैदा बर्तन में डालने के लिए

विधि: सबसे पहले मैदा, कोकोया पाउडर, बेकिंग पाउडर और सोडा मिला के दो से तीन बार छान लें। दूध, कंडेंस्ड मिल्क, मक्खन, वनिला एसेंस और चीनी अच्छे से मिला लें। फिर दूध वाला मिश्रण धीरे धीरे मैदे के मिश्रण में डालें और अच्छे से फेटें जिससे मुलायम मिश्रण तैयार हो जाए।

एक केक बनाने के बर्तन में तेल लगा के चिकना करें फिर मैदा बुरक दें, अब केक का मिश्रण बर्तन में डाल दें। और कुकर को गैस पर रखें फिर कुकर में आधी कटोरी नमक डाल दें और केक का बर्तन कुकर में रख के तेज आंच पर 5 मिनट तक पकाएं फिर गैस धीमी करके कुकर के ढक्कन से रबर और सीटी निकाल के ढक्कन बंद करदे और धीमी आंच पर 30 मिनट तक पकने दें।

30 मिनट के बाद सावधानी से केक को कुकर से बाहर निकाले और एक टूथपिक या चाकू डाल के चेक करें अगर चाकू में मैदा लग के बाहर आ जाये तो केक को 5 मिनट तक और कुकर में रख के पका लें। पकने के बाद चाकू की सहायता से केक को बाहर निकाले और अपनी मनपसंद ड्रेसिंग से सजाये ठंडा होने के बाद खाए और खिलाएं।

 

 

सुषमा स्वराज को फॉरेन पॉलिसी की 2016 की ग्लोबल थिंकर्स लिस्ट में शामिल

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और परोपकार का काम करने वाले दंपति अनुपमा और विनीत नायर उन भारतीयों में शामिल हैं जिन्हें फॉरेन पॉलिसी पत्रिका द्वारा तैयार की गई साल 2016 की ग्लोबल थिंकर्स लिस्ट में जगह दी गई है।

स्वराज को ‘डिसीजन मेकर्स’ की श्रेणी में डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रहीं हिलेरी क्लिंटन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और अमेरिकी अटॉर्नी जनरल लॉरेटा लिंच समेत अन्य के साथ जगह दी गई है।

पत्रिका ने ‘ट्विटर कूटनीति के अनोखे ब्रांड को प्रचलित’ करने के लिए सुषमा को बधाई दी।

पत्रिका ने लिखा है, ‘‘यमन में फंसे भारतीयों को निकालने से लेकर खोए हुए पासपोर्ट को बदलने में मदद के लिए स्वराज ने ट्विटर के आक्रामक इस्तेमाल के लिए ‘कॉमन ट्वीपल्स लीडर’ का उपनाम हासिल किया है।’’ पत्रिका ने संपर्क फाउन्डेशन के सह-संस्थापकों नायर दंपति को ‘द मुगल्स’ श्रेणी में ‘ऐसी प्रौद्योगिकी की राह खोलने के लिए रखा है जिससे बच्चे सीख सकें।’’ अपने संपर्क फाउन्डेशन के जरिए एचसीएल टेक्नोलॉजीज के पूर्व अधिकारी और उनकी पत्नी ग्रामीण भारत की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था का सस्ती प्रौद्योगिकी से लैस शिक्षण उपकरणों के जरिए कायाकल्प करने के मिशन पर हैं।

जिन अन्य भरतीयों को सूची में जगह दी गई है उसमें नीतेश कादयान, निखिल कौशिक और ग्रैविकी लैब्स के अनिरूद्ध शर्मा और इम्यूनोलॉजिस्ट गुरशरण प्रसाद तलवार शामिल हैं। तलवार ने एक ऐसा टीका विकसित किया है जो अगले तीन साल में कुष्ठ रोग की दर 65 फीसदी तक घटा सकता है।