Tuesday, March 24, 2026
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जिन्दगी प्रेम ही नहीं है, सम्मान के साथ खुद को सहेजना और दुनिया को सुन्दर बनाना है

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वसन्त पंचमी के आगमन के साथ ही सर्दियों ने इस बार के लिए अलविदा कहना शुरू कर दिया है। फरवरी की शुरुआत माँ सरस्वती की आराधना के साथ हो रही है। माँ सरस्वती ज्ञान की देवी हैं मगर वहाँ ज्ञान का मतलब किताबें ही नहीं हैं, डिग्रियाँ भी नहीं हैं बल्कि प्रकृति और सृष्टि से प्रेम है, कला और संस्कृति के माध्यम से संसार को सुन्दर बनाने का सपना है। वहाँ मानवीय मूल्य बसते हैं। आज ये सब जितने ही दूर जा रहे हैं, इनकी आवश्यकता और भी बढ़ती जा रही है। कट्टरता, धर्म और जाति के नाम पर होने वाले संघर्षों के बीच यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है कि हम अपने समय की चुनौतियों को समझें।

दुःख की बात यह है कि ऐसा हो नहीं रहा है। हर कोई वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहा है। अजीब सा वैषम्य है जहाँ हम समानता की दुहाई दे रहे हैं और अलगाववाद की खाई गहरी और गहरी हो रही है। कहने की जरूरत नहीं है कि आज सोशल मीडिया का दुरुपयोग इसकी बड़ी वजह है। हमारे जीवन में सहजता का स्थान आडम्बर ने ले लिया है और यही आडम्बर शत्रु है, शत्रु है हमारे सम्बन्धों का। आडम्बर ही वह कारण है जिसके कारण प्रेम जताने के लिए अब गुलाब के दो फूल कम पड़ रहे हैं। बड़ी तेजी से बाजार हमारी जरूरतें तय कर रहा है और हम भागते जा रहे हैं। एक संस्कृति दूसरी संस्कृति को तहस – नहस करने पर तुली है। गंगा – जमुना तहजीब वाले देश में लोग एक दूसरे को देखने को तैयार नहीं है।

हम विज्ञापनों की आँखों से अपने सपने पूरे करना चाहते हैं, ऐसी होड़ की, अपनी सीमा से बढ़कर सब कुछ पा लेने का सपना है मगर अंत में हाथ खाली ही रह जाता है। नतीजा यह कि अकेलेपन से परेशान कई लोग जिन्दगी से हार मान लेते हैं। कुछ दिनों बाद वेलेंटाइन्स डे मनाया जाएगा, गिफ्ट और ऑफर की बरसात होगी, सभी पर प्यार का खुमार होगा मगर इन सबके बीच आप खुद को पीछे छोड़ चुके हैं। आपको .याद ही नहीं होगा कि पिछली बार की सुबह कब देखी, खुद से बतियाए कब,, तो इस बार किसी और के पीछे मत भागिए, एक बार खुद से बात कीजिए, किसी और को शायद नहीं होगी मगर आपको आपकी जरूरत जरूर है। जिन्दगी प्रेम ही नहीं है, अपना सम्मान भी है, इस बार वेलेन्टाइन्स डे पर ही नहीं हमेशा थोड़ा वक्त खुद के साथ गुजारिए। आप सभी सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं। माँ वरदान दें कि हम जड़ता से दूर हों और हमारा विवेक हमारा साथ हमेशा दे।

शुभारंभ का दिन है वसंत पंचमी

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वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी और इसी कारण इस दिन लोग ज्ञान की प्राप्ति के लिए उनकी शरण जाते हैं। यह दिन हर तरह की नई शुरुआत के लिए शुभ माना गया है।

समूची सृष्टि ऋतु वसंत की राह तकती है। वसंत के आगमन के माघ माह के पांचवे दिन वसंत पंचमी मनाई जाती है। कहते हैं ब्रह्मा जी ने सृष्टि की उत्पत्ति तो कर दी थी लेकिन चारों तरफ मौन छाया रहता था।

जीवन था लेकिन उसका संगीत नहीं था। तब ब्रह्मा जी ने विष्णु जी की अनुमति प्राप्त करके अपने कंमडल के जल से सरस्वती की उत्पत्ति की। उनसे ही इस सृष्टि को स्वर मिले। जीवन को संगीत मिला। यही वजह है कि वसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं।

मां सरस्वती परम चेतना हैं। वे हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती हैं। पुराणों में आए वर्णन के अनुसार श्रीकृष्ण ने मां सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वर दिया था कि वसंत पंचमी के दिन उनकी आराधना की जाएगी।

वसंत को ऋतुओं का राजा माना गया है क्योंकि इस दिन पांचों तत्व अपने सुहावने रूप में प्रकट होते हैं। इस समय आकाश स्वच्छ रहता है, हवा सुहावनी बहती है, अग्नि रुचिकर लगती है, जल आत्मा को तृप्ति देता लगता है और धरती फसल से लहलहाती है।

वसंत के आगमन के साथ ही हम सर्दियों के कष्टों को पीछे छोड़कर सुहावने दिनों में प्रवेश करते हैं। यह सर्दी और गर्मी का संधिकाल वसंत बहुत ही सुहावना होता है। इसी समय प्रकृति का सौंदर्य भी उत्कर्ष पर होता है।

वसंत पंचमी को सभी तरह के कार्यों के आरंभ के लिए शुभ मुहूर्त माना गया है। इसका कारण यह है कि यह माघ मास में आती है। माघ माह आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व का महीना है। इस समय तीर्थों के जल में स्नान का विशेष महत्व है। दूसरा इस समय सूर्य देव उत्तरायण होते हैं। वसंत पंचमी ऐसे शुभ समय आती है और उससे कई संयोग जुड़ते हैं इसलिए उस दिन को शुभ मुहूर्त माना जाता है।

प्रकृति का काममय होना

वसंत के आगमन के साथ ही रति-काम महोत्सव आरंभ हो जाता है। इस समय पेड़-पौधे अपनी पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई कोपलों से सुसज्जित होते हैं। समूचा वातावरण पुष्पों की सुगंध और भौंरों की गूंज से भरा होता है। मधुमक्खियां पराग इकट्ठा करती हैं और इसलिए इसे मधुमास भी कहा जाता है।

पूरी प्रकृति काममय हो जाती है। इस मौसम पर ग्रहों में सर्वाधिक विद्वान ‘शुक्र” का प्रभाव रहता है। शुक्र काम और सौंदर्य के कारक हैं, इसलिए रति-काम महोत्सव की यह अविध कामोद्दीपक है। अधिकतर महिलाएं इन्हीं दिनों गर्भधारण करती हैं।

जन्मकुंडली का पंचम भाव विद्या का नैसर्गिक भाव है। इसी भाव की ग्रह -स्थितियों पर व्यक्ति का अध्ययन निर्भर करता है। यह भाव दूषित या पापाक्रांत हो तो व्यक्ति की शिक्षा अधूरी रह जाती है। इस भाव से प्रभावित लोगों को वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करना चाहिए। नए संकल्प के साथ प्रयास करने में जुट जाना चाहिए। वसंत पंचमी का यह पर्व नई शुरुआत का पर्व भी कहा गया है।

पीले परिधान का महत्व

पीला रंग हिंदुओं में शुभ रंग माना जाता है। यह परिपक्वता का प्रतीक है। यह उल्लास और आनंद की अनुभूति को बढ़ाता है और इसलिए यह वसंत के साथ गूंथ दिया गया है। इस दिन न केवल पीले रंग के वस्त्र पहने जाते हैं बल्कि खाद्य पदार्थों में भी पीले रंग का उपयोग किया जाता है। चूंकि इस समय प्रकृति में भी चारों ओर पीले पुष्प खिले रहते हैं तो ऐसा लगता है मानो खेतों ने पीली चुनर ओढ़ ली हो।

बसंत पंचमी से जुड़े शुभ कर्म

– इस दिन बच्चों का विधारंभ संस्कार होता है। उन्हें पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है।

– पितृ तर्पण किया जाता है।

– कामदेव का पूजन किया जाता है।

– विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।

– वसंत पंचमी के दिन ही भगवान राम शबरी के आश्रम पहुंचे थे।

– वसंत पंचमी महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला” का जन्मदिवस भी है।

वाद्य यंत्रों का पूजन

जिस तरह विजयादशमी पर सैनिक अपने शस्त्रों का पूजन करते हैं और दीपावली पर व्यापारी अपने बहीखातों को पूजते हैं उसी तरह वसंत पंचमी पर कलाकार अपने वाद्य यंत्रों का पूजन करते हैं। कवि, गायक, लेखक, नाटककार या नृत्यकार सभी इस दिन अपने यंत्रों और सामग्री का पूजन करते हैं।

 

महिला को सशक्त बनाने की राह दिखा गया विमेन इकोनॉमिक फोरम

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महानगर में हाल ही में ऑल लेडीज लीग की पहल पर एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें महिलाओं ने बात रखी। कार्यक्रम में सारी दुनिया से महिला नेत्रियों और विमेन अचीवर्स का शामिल होना एक अनूठा अवसर था। कार्यक्रम में 400 से अधिक महिलाओं तथा 120 वक्ताओं ने अपनी बात रखी। जे डब्ल्यू मैरियट की जनरल मैनेजर रंजू एलेक्स ने पूरा सहयोग दिया।

WEF 3

उद्घाटन समारोह की थीम शक्ति अनलीश्ड : अवेक्निंग द पावर विदिन थी। ऑल लेडीज लीग की संस्थापक तथा ग्लोबल चेयरपर्सन डॉ. हरबीन अरोड़ा ने कहा कि लोग अब महिला सशक्तीकरण का महत्व समझ रहे हैं। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए डिजिटल ब्रांड्ज की संस्थापक व निदेशक रितुस्मिता विश्वास भी सक्रिय रहीं।

कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताओं पर आधारित आलोचनात्मक पुस्तक का लोकार्पण

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कोलकाता के “भारतीय संस्कृति संसद” के सभागार में युवा आलोचक मृत्युंजय पांडेय की 90 के बाद के प्रमुख कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताओं पर छपी आलोचनात्मक पुस्तक “कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव” का विमोचन मॉरिशस के प्रसिद्ध लेखक ‘राज हीरामन’ जी द्वारा किया गया| कार्यक्रम दो भागों में विभाजित की गई थी जहां पहले सत्र में मॉरिशस के प्रसिद्ध के लेखक राज हीरामन द्वारा “मॉरिशस में हिन्दी की दशा और दिशा” विषय पर व्याख्यान दिया गया| हीरामन जी ने मॉरिशस में हिन्दी की महत्ता एंव मजबूती को बताया साथ ही यह भी बताया कि मॉरिशस में हिन्दी सत्ता की ,राजनीति, समाज ,अर्थिक एंव धार्मिक जगत की भाषा है| हिन्दी नहीं भोजपूरी वहां कि भाषा थी फिर भी उन्होनें हिन्दी को ही महत्ता दी| गोरे अर्थात् अंग्रेज वहां अब शक्तिहीन हो गए हैं|हिन्दी भारत में तस्तरी पर परोसी गई है परन्तु मॉरिशस में यह संघर्ष करके प्राप्त हुई है| मॉरिशस के प्रधानमंत्री,नेता,सांसद तथा शासन के लगभग सभी लोग हिन्दी बोलने वाले ही हैं| हिन्दी न आने के कारण अंग्रेज विपक्ष में बैठे हैं |  दूसरे सत्र में युवा आलोचक मृत्युंजय पांडेय की पुस्तक “कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव” को लोकार्पण किया गया|इस पुस्तक की फ्लैप प्रोफेसर ‘अरूण होता’ द्वारा लिखा गया है|पुस्तक के लोकार्पण में प्रोफेसर अरूण होता, आलोचक आशुतोष सिंह, विट्ठलदास मुधड़ा आदि मंच पर उपस्थित थें| प्रोफेसर अरूण होता जी लेखक मृत्युंजय पांडेय को बधाई देते हुए अपने भाषण में पुस्तक की सराहना करते गुए कहते हैं कि ’90 के बाद के महत्वपूर्ण युवा कवि पर केन्द्रीय पुस्तक लिखी है| मैनेजर पांडेय हो या अन्य आलोचक सभी ने अपने विचार रखें हैं| प्रायः सभी आलोचक कवि की कविताओं की कुछ संवेदनाओं को सामने रखकर इतिश्री मान लेते हैं|इस पुस्तक में आलोचक की रचना प्रतिभा का निदर्शन मिलता है|”From the text to the critic” जो वर्तमान आलोचना से लुप्त हो रहा है लेखक ने पूर्णतः अभिव्यक्त की है| इसकी यह खूबीभूमंडलीकरण, भोजपूरी , पर्यावरण, स्त्री के सभी आयाम से गुजर कर संगृहित किया है|

 

भारतीय भाषा परिषद में अब हिन्दी माध्यम से भी होगी पत्रकारिता की पढ़ाई

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भारतीय भाषा परिषद अपने साहित्यिक व सांस्कृतिक अवदानों के लिए प्रख्यात है। परिषद में अब माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल का एम. ए. पाठ्यक्रम हिन्दी माध्यम से आरम्भ हो रहा है। दो वर्ष का यह पाठ्यक्रम 4 सेमेस्टर में वि्भाजित है। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष कुसुम खेमानी ने बताया कि परिषद का प्रयास हैै कि विद्यार्थियों को महानगर से प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्रों में व्यावहारिक अनुभव के लिए प्रशिक्षण मिले। इस पाठ्यक्रम के लिए किसी भी संकाय के स्नातक की डिग्री प्राप्त विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। ऑनर्स होना जरूरी नहीं है। पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के वर्तमान व पूर्व प्रोफेसरों द्वारा शिक्षण की व्यवस्था होगी। परिषद ने हिन्दी सीखने, लेखन कौशल और मीडिया से सम्बन्धित 3 माह के बुनियादी प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की है। परिषद इस पाठ्यक्रम के लिए अध्ययन केन्द्र होगी और इसमें पत्रकारिता सम्बन्धी रोजगार के लिए प्लेसमेंट सेल भी होगा जो परामर्श का कार्य करेगा। इस अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में डॉ. शम्भुनाथ समेत अन्य अतिथि भी उपस्थित थे।

“भारत रंग महोत्सव” में होगा लिटिल थेस्पियन के ‘गैंडा’ नाटक का मंचन

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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली द्वारा आयोजित “भारत रंग महोत्सव” एशियाई महाद्वीप में होने वाला सबसे बड़ा रंग महोत्सव है l ये नाट्य महोत्सव अन्तराष्ट्रीय स्तर का है l ये महोत्सव १ फ़रवरी से २१ फ़रवरी तक चलेगा।

जिसमे 80 नाटक भारत के तथा 14 विदेशी नाटक आमन्त्रित किये गए हैं l इस वर्ष कलकत्ता शहर से हिंदी नाटक के लिए लिटिल थेस्पियन नाट्यसंस्था  अपने बहुचर्चित नाटक ‘गैंडा’ के साथ आमंत्रित किया गया है।  ‘गैंडा’ का मंचन 6 फ़रवरी को ‘श्रीराम सेंटर’,दिल्ली और 8 फ़रवरी को भारंगम के सेटेलाईट शो के अंतर्गत अगरतला के नज़रुल प्रेक्षाग्रह में किया जायेगा। बंगाल के प्रसिद्ध व बहुचर्चित निर्देशक एस० एम० अज़हर आलम द्वारा निर्देशित नाटक ‘गैंडा’ यूजेन आइनेस्को के ‘राइनोसोरस’ का हिन्दुस्तानी अनुरूपण है जिसका अनुवाद भी अजहर ने ही किया है।

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गैंडा नाटक समाज में अमानवीय सर्वाधिकारी प्रवृत्तियों के प्रसार के बारे में नाटककार की चिंता को दर्शाता है। यह नाटक एक आदमी के संघर्ष को दिखता है जो अपनी पहचान व प्रमाणिकता को एक ऐसी दुनिया में कायम रखने की कोशिश करता है जहां दुसरे लोग पाशविक बल और हिंसा की सुन्दरता के आगे घुटने टेक चुके हैं. यह एक शहर में फैली काल्पनिक महामारी- गैंडाई लहर- को दर्शाता है जिसने लोगों को भयभीत कर रखा है और उन्हें गैंडे में बदल रहा है। इसमें लोगों की आतंरिक क्रूरता को दर्शाया है जो उन्हें एक उद्दंड और कल्पनातीत गैंडे में बदल देती है।

 

नाटक के निर्देशक एस० एम० अज़हर आलम एक सुविख्यात रंगकर्मी है जो पिछले तीन दशकों से रंगमंच से जुड़े हुए हैं। कोलकाता में हिंदी व उर्दू रंगमंच की स्तिथि को उभारने में इनका बहुत बड़ा योगदान है। वे मौलाना आज़ाद कॉलेज में उर्दू के प्रोफेसर हैं और देश की पहली उर्दू पत्रिका, जो पूरी तरह थिएटर से सम्बंधित है, के सम्पादक है जिसे लिटिल थेस्पियन प्रकाशित करती है। अज़हर आलम ने 50 से ज़्यादा नाटकों में अभिनय किया है, 40 नाटकों में निर्देशन दिया है तथा 6 नाटक उर्दू में लिखे व रूपांतरित किए हैं। नाटकों में स्टेज मूवमेंट व डिज़ाइन इनकी ख़ास पहचान है. पश्चिम बंग नाट्य अकादमी की ओर से 2001 में उन्हें ‘नमक की गुड़िया’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नाटककार का पुरस्कार मिला और 2007 में ‘सवालिया निशान’ नाटक के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस नाटक का संगीत नाटक अकेडमी द्वारा पुरस्कृत मुरारी राय चौधरी जी ने दिया है तथा प्रकाश योजना जॉय सेन ने। इस नाटक के सम्बन्ध में पद्मश्री राम गोपाल बजाज साहब ने टिपण्णी की थी कि पिछले दशक में उपमहाद्वीप में खेले गये सभी नाटकों में से अगर 10 बड़े नाटकों को चुना जाए तो ‘गैंडा’ उनमें से एक ज़रूर होगा. “गैंडा” नाटक की अब तक 40 से अधिक प्रस्तुतियां हों चुकी है।

 

डॉक्टर दादी, एम्बुलेंस दादा से लेकर वृक्ष पुरुष तक पद्म पुरस्कार पाने वाले ये चेहरे

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 नयी दिल्ली – गणतन्त्र दिवस से एक दिन पहले सरकार ने पद्म पुरस्कारों का एलान किया। 89 पद्म पुरस्कारों में से 7 लोगों को पद्म विभूषण, 7 को पद्म भूषण और 75 को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। पद्मश्री पाने वालों में कई लोग ऐसे हैं, जो गुमनामी में अपना काम करते हैं और सुर्खियों से दूर रहते हैं। इन्हीं में शामिल हैं इंदौर की रहने वाली 91 साल की डॉक्टर दादी और 76 साल की सबसे उम्रदराज महिला तलवारबाज। कुछ ऐसे भी नाम हैं, जिन्हें लोग एंबुलेंस दादा और वृक्ष पुरुष के नाम से जानते हैं।

1# डॉक्टर दादी

– 91 साल की भक्ति यादव को लोग डॉक्टर दादी के नाम से जानते हैं। वो इंदौर की पहली महिला हैं, जिन्हें एमबीबीएस की डिग्री मिली।
– डॉक्टर दादी पिछले 68 साल से अपने पेशेंट का फ्री में इलाज कर रही हैं।
– गाइनकॉलजिस्ट डॉक्टर दादी ने हजारों बच्चों की सेफ डिलिवरी भी करवाई। भक्ति यादव 1948 से पेशेंट्स का इलाज कर रही हैं।
– इस उम्र में डॉक्टर दादी को चलने-फिरने में दिक्कत होती है, लेकिन वो अपने जीवन की अंतिम सांस तक पेशेंट्स का इलाज करना चाहती हैं।

2# ब्लाइंड क्रिकेट टीम के कैप्टन
– शेखर इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम के कैप्टन हैं। कर्नाटक के शिमोगा में जन्मे शेखर जन्म से ही दृष्टिहीन थे।
– 8 साल की उम्र में एक ऑपरेशन के बाद शेखर को धुंधला सा दिखना शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उनकी मां ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया। 12 साल की उम्र तक शेखर ने अपने मां-बाप को खो दिया था।

– कर्नाटक के लोकल टूर्नामेंट्स में 46 बॉल में 136 और 249 रनों की पारी खेलने वाले शेखर 2001 में अंडर-18 ब्लाइंड क्रिकेट टीम मेें चुने गए। अंडर-18 टूर्नामेंट में मैन ऑफ द सीरीज चुने गए।

– इंडिया की ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने 2012 का टी-20 वर्ल्ड कप और 2014 का वर्ल्डकप जीता।

3# 76 साल की तलवारबाज महिला
– केरला की रहने वाली मीनाक्षी अम्मा 76 साल की हैं। उन्हें भारत की सबसे उम्रदराज महिला तलवारबाज कहा जाता है। मीनाक्षी भारतीय मार्शल आर्ट कलारीपयट्टू में एक्सपर्ट हैं।
– 7 साल की उम्र से उन्होंने मार्शल आर्ट्स की क्लास लेना शुरू कर दिया था।
– 68 साल से ज्यादा समय से मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दे रही हैं।

4# एंबुलेंस दादा करीमुल
– प. बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में रहने वाले करीमुल हक को सोशल वर्क के लिए पद्मश्री दिया जाएगा। करीमुल हक को एंबुलेंस दादा के नाम से भी जाना जाता है।
– करीमुल हक ने अपने गांव धालाबाड़ी में 24 घंटे की एंबुलेंस सेवा शुरू की।
– करीमुल हक गरीब मरीजों को अपनी बाइक पर लेकर हॉस्पिटल पहुंचाते हैं और कई बार वो उन्हें फर्स्ट ऐड भी देते हैं।

5# वृक्ष पुरुष रमैया
– 68 साल के दरिपल्ली रमैया तेलंगाना के रहने वाले हैं।
– रमैया ने 1 करोड़ पेड़ लगाए हैं और उन्हें वृक्ष पुरुष के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने मन में भारत को हरा-भरा बनाने की ठानी है।
– रमैया घर से निकलते वक्त बीज साथ लेकर चलते हैं और जहां भी उन्हें खाली जमीन दिखाई देती है, वो वहां प्लांटेशन करते हैं।

6# स्वच्छता दूत

– पद्म पुरस्कार पाने वालों में पुणे के डॉक्टर मापुस्कर का नाम भी है। इन्हें स्वच्छता दूत के नाम से जाना जाता है।
– इन्होंने पुणे के देहू गांव में 1960 से ही सफाई अभियान पर जोर दिया। पूरे गांव को खुले में शौच करने से रोका और सफाई के लिए जागरूक किया। 2004 में पूरे गांव में शौचालय बना दिए गए।

7# हाई-वे मसीहा
– गुजरात के रहने वाले डॉ. सुब्रतो दास का नाम भी पद्मश्री पाने वालों में है। डॉ. सुब्रतो को मेडिसिन कैटेगिरी में पुरस्कार दिया गया है।
– डॉ. सुब्रतो को हाई-वे मसीहा के नाम से जाना जाता है। वे हाई-वे पर एक्सीडेंट में घायल होने वालों को तुरंत मेडिकल फैसिलिटी मुहैया कराते हैं।

8# फायर फाइटर
– प. बंगाल के रहने वाले बिपिन गनात्रा को सोशल वर्क कैटेगिरी में सम्मािनत किया जाएगा।
– 59 साल के बिपिन वालंटियर फायर फाइटर हैं, जो पिछले 40 साल से कोलकाता में आग लगने वाली हर जगह मौजूद रहते हैं और लोगों को बचाने में मदद करते हैं।
– एक हादसे में अपने भाई को खोने के बाद बिपिन ने ऐसे लोगों की मदद का बीड़ा उठाया, जो आग लगने जैसे हादसों में फंस जाते हैं।

9# चिंताकिंदी मल्लेशम
– तेलंगाना के चिंताकिंदी मल्लेशम ने लक्ष्मी ASU मशीन बनाई, जिससे पोचमपल्ली सिल्क की साड़ियां बनाने वाले कारीगरों की मेहनत और काम में लगने वााल वक्त काफी घट गया।
– 44 साल के मल्लेशम की मां पोचमपल्ली सिल्क की साड़ियां बनाती थीं। मेहनत के चलते उन्हें बहुत दर्द होता था, जिसको देखने के बाद मल्लेशम ने ये मशीन बनाई।
– पोचमपल्ली सिल्क से साड़ियां बनाने वाले 60% कारीगर इस मशीन से फायदा उठा रहे हैं।

10 # मरियप्पन थंगवेलु
– मरियप्पन ने रियो पैरालंपिक्स 2016 में T-42 हाईजंप में गोल्ड जीता। 21 साल के मरियप्पन तमिलनाडु के रहने वाले हैं।
– मरियप्पन ने अपनी दाई टांग एक हादसे में गंवा दी थी। उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।

जोशी, पवार, संगमा को पद्म विभूषण, विराट समेत 75 हस्तियों को मिलेगा पद्मश्री

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भाजपा में भले ही मुरली मनोहर जोशी की भूमिका महज एक संरक्षक की हो, लेकिन सरकार ने जन कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से नवाजने का फैसला किया है।

केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को जारी साल 2017 के पद्म पुरस्कारों की सूची में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इतना ही नहीं कद्दावर राजनेता एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को भी जन कार्यों के लिए पद्म विभूषण दिया जा रहा है। अंतिम समय में भाजपा के साथ होने वाले पूर्व लोकसभा स्पीकर पीए संगमा को भी मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया जाएगा। सरकार ने इस बार सात-सात हस्तियों को पद्म विभूूषण, पद्म भूषण और 75 हस्तियों को पद्म श्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा की है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के संस्थापक नेताओं में शुमार सुंदर लाल पटवा को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया जा रहा है। अपनी मोहन वीणा से दुनिया भर में नाम कमाने वाले पंडित विश्व मोहन भट्ट को पद्म भूषण दिया जा रहा है।

शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में यूपी के प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी और थाईलैंड की महारानी महा चक्री सिरीनधार्न को पद्म भूषण दिया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली, रियो ओलंपिक की पदक विजेता, साक्षी मलिक, पैरालंपिक में पदक जीतने वाली दीपा मलिक, टी मरियप्पन, हॉकी टीम के कप्तान पीआर श्रीजेश, संगीतकार, गायक कैलाश खेर, अनुराधा पोडवाल को पद्म श्री दिया जा रहा है।

पद्म श्री पाने वाले यूपी की शख्सियतों में कला और संगीत में कृष्ण राम चौधरी, साहित्य और शिक्षा से हरिहर कृपालु त्रिपाठी, चिकित्सा से मदन माधव गोडबोले, कला और संगीत से उत्तराखंड की बासंती बिष्ट, साहित्य, शिक्षा से जम्मू कश्मीर के काशीनाथ पंडिता, काली बेईं नदी का जीर्णोद्धार करने वाले पंजाब के बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल, चिकित्सा के क्षेत्र में चंडीगढ़ के प्रो. हरीकिशन सिंह, डॉ. मुकुट मिंज प्रमुख हैं।

लांस नायक हनुमनथप्पा को मरणोपरांत सेना पदक से सम्मानित किया गया

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सियाचिन के बहादुर सैनिक हनुमनथप्पा कोप्पड़ को आज यहां सेना पदक से सम्मानित किया गया। अपने मोर्चे पर तैनाती के दौरान एक हिमस्खलन के बाद बर्फ के नीचे छह दिनों तक दबे रहने के बावजूद उन्हें मलबे से जीवित बाहर निकाला गया था। हालांकि, शरीर के कई अंगों के काम करना बंद कर देने पर उनकी मृत्यु हो गई थी।

बहादुर सैनिक की पत्नी महादेवी अशोक बिलेबाल ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत से सेना दिवस परेड में यह पदक प्राप्त किया।
कर्नाटक के धारवाड़ जिला स्थित बेतादुर गांव के रहने वाले एवं मद्रास रेजीमेंट के सैनिक को 30 फुट बर्फ के मलबे से जीवित बाहर निकाला गया था। वह शून्य से 45 डिग्री नीचे तापमान में सियाचिन ग्लेशियर में छह दिनों तक मलबे के नीचे जीवित रहे थे। दरअसल, उनकी तैनाती का स्थल तीन फरवरी को हिमस्खलन की चपेट में आया था। इस घटना में कोप्पड सहित 10 सैन्यकर्मी जीवित दफन हो गए थे। सियाचिन दुनिया की सबसे उंचाई पर स्थित लड़ाई का मैदान है। छह दिनों की बचाव कोशिश के बाद कोप्पड को बर्फ के नीचे जीवित पाया गया था लेकिन उनकी हालत नाजुक थी। लांस नायक को इलाज के लिए दिल्ली लाया गया था, जहां 11 फरवरी :पिछले साल: को उनकी मृत्यु हो गई।

 

  12 बालिकाओं और 13 बालकों को मिलेगा वीरता पुरस्कार

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इस वर्ष राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के लिए चयन किए गए बच्चों में दार्जिलिंग उच्च विद्यालय की दो बालिकाएं हैं जिनकी मदद से सीमा पार देह व्यापार के गिरोह का भांडाफोड़ हुआ था। इनके अलावा आठ वर्षीय अरूणाचल प्रदेश की बच्ची भी है जिसने नदी में से अपने दोस्त को बचाने के लिए अपनी जान गवां दी थी।

असाधारण वीरता का प्रदर्शन करने के लिए तरह तराह पीजू को मरणोपरांत प्रतिष्ठित भारत पुरस्कार दिया जाएगा जबकि पश्चिम बंगाल की तेजस्विता प्रधान :18: और शिवानी गौंड :17: को प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार के लिए चुना गया है।

तेजस्विता और शिवानी एक अधिकार एनजीओ की स्वयंसेवक हैं। उन्होंने पहले फेसबुक पर एक नाबालिग लड़की से दोस्ती की जो नेपाल से लापता हो गई थी जो आखिरकार एक मानव तस्करी गिरोह की वाहक निकली।

तेजस्विता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ कक्षा आठ से मैं स्टूडेंट्स एगेंस्ट ट्रैफिकिंग क्लब :एसएटीसी: की स्वयंसेवी थी जिसका संचालन एमएआरजी नाम के गैर सरकार संगठन के तहत होता है जो मानव तस्करी को रोकने के लिए काम करता है। एनजीओ को एक लापता लड़की का पता लगाने के लिए एक अनुरोध मिला और वे चाहते थे कि मैं देह व्यापार के गिरोह का भांडाफोड़ करने वाली योजना का हिस्सा बनूं। मैं और मेरे परिवार को शुरू में संशय था लेकिन हम दोनों ने इसे करने का फैसला किया क्योंकि यह अच्छे के लिए था।’’ एमएआरजी :मैनकाइंड एन एक्शन फॉर रूरल ग्रोथ: के लिए काम करने वाले शिवानी के भाई विशाल गौंड ने कहा, ‘‘ वह गिरोह का भांडाफोड़ करने वाली योजना का हिस्सा बनने को तैयार हो गई जिसे पुलिस, सीबीआई ने बनाया और हमने :एनजीओ: उनकी सहायता की थी।’