Saturday, March 21, 2026
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केबीसी जैसा क्विज शो करना चाहूंगी : सोनाक्षी

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मुंबई : बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा डांस रियलिटी शो ‘‘नच बलिये’’ को जज करने को लेकर उत्साहित हैं और उनका कहना है कि वह भविष्य में क्विज शो या कोई चुनौतीपूर्ण रियलिटी शो करना पसंद करेंगी।

सोनाक्षी ने गायिकी पर आधारित रियलिटी शो ‘‘इंडियन आइडल जूनियर’’ की जज के तौर पर 2015 में छोटे पर्दे पर पदार्पण किया था और अब वह डांस पर आधारित रियलिटी शो की जज बनने जा रही हैं।
सोनाक्षी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ :केबीसी: एक शानदार शो है शो में क्विज मास्टर बनना मजेदार रहेगा। मुझे खेल पर आधारित या चुनौतीपूर्ण शो करने से भी गुरेज नहीं है साथ ही मुझे एक्शन और स्टंट करना भी पसंद है।’’ 29 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा कि वह कोरियोग्राफर टेरेंस लुईस और निर्देशक मोहित सूरी के साथ सेलिब्रिटी कपल डांस शो ‘नच बलिये’ के आठवें सीजन की जज बनकर उत्साहित हैं।
स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले आठवें सीजन में दिव्यंका- विवेक दहिया, भारती सिंह- हर्ष लिम्बाशेय, सनाया- मोहित सहगल, प्रीतम- अमनजोत सिंह, दीपिका कक्कड़ -शोएब इब्राहिम, सिद्धार्थ- तृप्ति जाधव, उत्कष्रा नाइक- मनोज वर्मा, सोनम जौहर- अभिगेल पांडे, अश्का गोराडिया- ब्रेंट गोबल और मोनालिसा अंतारा- विक्रांत सिंह की जोडियां भाग लेंगी।

योगी आदित्यनाथ बने यूपी के सीएम, केशव मौर्य और दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री

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लखनऊ: गोरखपुर से पांच बार सांसद और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 21 वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

राजधानी के कांशी राम स्मृति उपवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने भगवाधारी योगी आदित्यनाथ को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई और इसी के साथ प्रदेश की सत्ता से भाजपा का 14 साल का वनवास खत्म हो गया।

राज्यपाल ने 44 वर्षीय योगी के साथ ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य तथा लखनउ के महापौर डॉक्टर दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री, पार्टी मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, केन्द्रीय मंत्री वैंकेया नायडू समेत तमाम वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया स्पोर्ट्स अवार्डस : पी वी सिंधु बनीं साल की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी

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मुंबई : प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी और रियो ओलंपिक में रजत पदक विजेता पी वी सिंधु को आज यहां हुये टाइम्स ऑफ इंडिया स्पोर्ट्स अवार्डस :टीओआईएसए: में साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के सम्मान से नवाजा गया।

जूरी ने सिंधु को सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी के सम्मान के लिये भी चुना। किदांबी श्रीकांत को पीपल्स च्वाइस श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी का सम्मान दिया गया।
भारतीय हॉकी को नई उंचाइयां देने वाले अजीत पाल सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
आर अश्विन को क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार दिया गया तो वहीं इसी श्रेणी में पीपल्स च्वाइस अवॉर्ड टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने जीता। बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने उनकी तरफ से ये सम्मान हासिल किया।
रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक को साल की सर्वश्रेष्ठ रेसलर का पुरस्कार दिया गया।

भारत में मातृ मृत्यु दर 254 से घटकर 167 हुई

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नयी दिल्ली : सरकार ने  बताया कि 2004.05 में देश में मातृ मृत्यु दर :एमएमआर: 254 प्रति एक लाख थी जो 2011.13 में घटकर 167 हो गयी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शिशु मृत्यु दर :आईएमआर: 2005 में 58 प्रति 1000 थी जो 2015 में घटकर 37 हो गयी। उन्होंने कहा कि भारत में आईएमआर और एमएमआर में कमी की दर अंतरराष्ट्रीय दरों से कम है लेकिन आबादी के कारण यह संख्या ज्यादा प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नवजात शिशु और देखभाल सेवाओं सहित 24 घंटे मूलभूत तथा व्यापक प्रसूति विज्ञान परिचर्या सेवाएं प्रदान करने की खातिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन एवं परिचालन किया जाता है। नड्डा ने कहा कि इन सुविधाओं के सुदृढीकरण की खातिर केंद्र सरकार राज्यों को उनकी वाषिर्क कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं में उनके प्रस्तावों के अनुसार निधियां प्रदान करती है।उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए पीजी सीटों की संख्या में वृद्धि सहित कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 5000 पीजी सीटें बढ़ायी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए एमसीआई सहित विभिन्न पक्षों से बातचीत की गयी है।

उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि आशा कार्यकर्ताएं सामाजिक कार्यकर्ताएं हैं। उन्होंेने कहा कि केंद्र ने उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के लिए तय वेतन का प्रावधान नहीं है हालांकि कुछ राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों की मांग पर केंद्र उनके लिए दी जाने वाली राशि में वृद्धि करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों को आशा कार्यकर्ताओं के एनआईओएस द्वारा प्रमाणन की खातिर दिए जाने वाले सहयोग सहित उनकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही हैं।

क्योंकि राधा न सिर्फ प्रेमिका हैं और कृष्ण सिर्फ रसिया

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मधुरिमा दत्त

राधा याद है आपको? आपको वृंदावन और गोकुल वाली राधा याद आ गयी जो कृष्ण के प्रेम में दीवानी थी, यही छवि है और हम इसी की जानकारी भी रखते हैं मगर राधा एक कामकाजी महिला भी थीं, ठीक सुना आपने श्रमजीवी।

कृष्ण का राधा से विरह आपको याद होगा मगर कृष्ण का रुदन कहीं दिखायी नहीं देता मगर उड़ान ने हाल ही में इस पर बात की। वसंतोत्सव के बाद हुए इस आयोजन में ‘अन्य रंगेर राधा’ कार्यक्रम में अध्यापिका ईशिका चक्रवर्ती ने विषय पर अपने विचार रखे।

मूल विषय को सुमित बंद्योपाध्याय ने सामने रखकर दर्शकों को विषय से जोड़ा। कार्यक्रम के दौरान हुई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में राधा और कृष्ण के इस अभिनव पक्ष को कलाकारों ने बखूबी रखा।

उड़ान जेंडर मसलों पर काम करने वाली संस्था है जो पिछले 3 साल से विभिन्न नाटकों तथा नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से इस विषय पर जागरूकता लाने की कोशिश कर रही है।

अन्य रंगेर राधा नो जेंडरिंग की दिशा में उठाया गया कदम है। राधा और कृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं मगर उनका प्रेम कई अन्य पक्षों को भी समेटता है जिन पर बात नहीं की गयी। राधा ने कृष्ण को अस्वीकार भी किया था मगर हम यह पक्ष जानते ही नहीं हैं। कृष्ण सिर्फ राधा से प्रेम करते थे मगर वे विरह में रोए भी हैं, ये बात भी सामने नहीं आ सकी। दरअसल, राधा और कृष्ण का यह एक मानवीय पक्ष है जिसे उड़ान ने सामने रखा।

(लेखका एक प्रतिभाशाली पत्रकार हैं और एक बेहतरीन संस्कृतिकर्मी भी हैं)

दो सहेलियों की दोस्ती

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  • रेखा श्रीवास्तव

  • गर्मी का समय। शाम पाँच बजने वाला है। मौसम में थोड़ी ठंडक शुरू हो चुकी है। सब अपने-अपने काम में लगे हुए हैं। बच्चे स्कूल से लौट चुके हैं। घर की औरतें अपने सुबह के काम को समेटते हुए शाम के काम की तैयारी करने वाली है। इस बीच अचानक एक महिला ने सारी महिलाओं को पुकारना शुरू कर दिया। जल्दी-जल्दी सीढ़ियों के पास महिलाओं की भीड़ और उसके पीछे उछलते-कूदते झांकते बच्चे। सभी के मन में एक ही उत्सुकता। आज उसने किस रंग की साड़ी पहनी थी, कैसा सैंडिल था। लिपिस्टिक का रंग गाढ़ा या हल्का। बस कुछ ही मिनटों में आँख से ओझल होने के बाद सभी अपने –अपने किस्मत का रोना शुरू कर दी। देखो एक हमलोगों की किस्मत, और एक यह है चाहे कोई भी मौसम हो। शाम होते ही पति के साथ घूमने के लिए निकल जाती है। घर में छोटे-छोटे बच्चों की भरमार, फिर भी कोई चिंता नहीं। सज-धज कर चल दीं। अब रात में नौ बजे के बाद आयेगी, और खा-पीकर सो जायेगी। और फिर कल शाम फिर सज-धज कर चल देगी। वाह! क्या किस्मत। यह एक दिन का रूटीन नहीं था। महीनों से महिलाएं देख रही हैं कि एक महिला है, जो 25-26 साल की होगी। सुंदर। नाम राजकुमारी। जैसा नाम वैसा रूप। उस पर से अच्छी साड़ी, लिपिस्टिक और मुस्कुराता चेहरा लेकर शाम को घूमने जाती है। चेहरे पर कभी कोई चिंता या शिकन नहीं। घर-परिवार, बच्चे की कोई चिंता नहीं। बच्चों को देखने के लिए एक बहन है, जो घर भी संभालती है और बच्चों को भी। राजकुमारी दिन भर आराम करतीं और शाम को घूमने जाती, यही उनकी दिनचर्या। इसी बिल्डिंग में रहने वाली विद्या जो बिल्कुल अलग। दिन-रात घर और बच्चों में रहने वाली। उसे बिल्डिंग से बाहर निकलने में अकेले डर लगता है। केवल दाल-रोटी की चिंता में घुलती रहती। घर में राशन, बच्चों के कपड़े के लिए रोज सुबह पति के साथ खिझ-खिझ करना पड़ता । धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती होने लगी। दोनों की उम्र में फासले थे, फिर भी गहरी दोस्ती हो गई। राजकुमारी को बिल्डिंग में ही एक दोस्त मिल गई और विद्या को एक ऐसा साथी जिसके साथ बाजार करतीं, घूमती, मूवी देखने जाती। अब राजकुमारी का घूमना बंद हो चुका था और विद्या को अपने बिल्डिंग में ही उसको एक सहेली मिल गयी थी। दोनों अपने -अपने पुराने किस्से सुनातीं। मार्केटिंग करतीं। अब दोनों मिलकर फिल्म देखने जाने लगी। यह उनदोनों का शौक हो गया। यह दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गयी। उनके बच्चे भी मिल गये। वो भी साथ खेलते और कुछ साल बाद लगभग दोनों परिवार एक परिवार जैसा हो गया।  खाना-पीना, घूमना अब सब साथ-साथ होने लगा। दोनों की दोस्ती के किस्से अब बिल्डिंग की महिलाओं की चर्चा का खास मुद्दा बन गया। वर्षों तक चले इस दोस्ती के बाद विद्या के एक बड़े बेटे की शादी हुई और फिर उसका बेटा। अब माँ के लिए एक नया फैसला किया गया। फैसला था कि माँ अपने बेटे-बहू के साथ रहेगी और अपने पोते की देखभाल करेगी। विद्या का बेटा उसी शहर में ही ऑफिस से ही मिले फ्लैट में रहता था। माँ की इच्छा नहीं थी, पर फैसला तो घर के मर्द करते हैं और उस फैसले को औरत को मानना ही होता है। वैसा ही हुआ। विद्या अपने पोते की देखभाल में व्यस्त। राजकुमारी भी अब गृहस्थ हो चुकी थी। अपनी बेटी की शादी करवाई और वह भी उसी में रम गयीं। दोनों दोस्त एक ही शहर में रहकर अलग-अलग हो गये। कभी-कभार किसी के सुख –दुख में शामिल होते और अपनी पुरानी दोस्ती की आहें भरतें और अपनी आँखों से बहते आँसू को पोंछते। वर्षों बीत गये। उम्र बढ़ती गई। अचानक एक दिन पता चला कि विद्या को गले में कैंसर हो चुका है और अब उसकी जिंदगी कुछ ही महीनों में सिमट गई है। यह खबर मिलते ही राजकुमारी जैसे टूट गई। उसने कहा यह कैसे हो सकता है? विद्या मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती। मैं उसके बिना नहीं रह सकती। अब विद्या का घर से अस्पताल स्थानांतरण हो चुका था। वह कभी इस वार्ड में उस वार्ड में पहुँचा दी जातीं। धीरे-धीरे शरीर के अंग साथ छोड़ने लगे, तभी दुर्गापूजा के समय अचानक खबर आयी कि राजकुमारी को हार्ट अटैक हुआ और वह इस दुनिया को छोड़ चुकी हैं। इस बात को विद्या से लगभग दो महीने तक छुपाया गया। और जब वह बीमारी के क्रम में ही अस्पताल से घर आयी थीं, तो उनके बेटे-बहू ने बड़ी हिम्मत करके उन्हें यह दुखद सूचना बतायीं। तब तक उनकी आवाज जा चुकी थी, उनके आँखों से आँसू बहने लगे। और दो महीने बाद ही विद्या भी इस दुनिया को छोड़ कर राजकुमारी के पास चली हमेशा-हमेशा के लिए चली गयीं।
  • (लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं)

सीयू के हिन्दी विभाग ने आयोजित की काव्य संस्कृति

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राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक काव्य संस्कृति का आयोजन कोलकाता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से किया गया।कार्यक्रम दो भागों में विभाजित था।प्रथम भाग का सञ्चालन विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो.  राजश्री शुक्ला ने किया। विश्वविद्यालय की ओर से स्वागत वक्तव्य कुलपति प्रो. आशुतोष घोष ने दिया।कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य डॉ कृष्ण बिहारी मिश्र  का था जिन्होंने कोलकाता का हिंदी साहित्य में योगदान विषय पर वक्तव्य देते हुए कहा कि हिन्दी में बांग्ला के तमाम श्रेष्ठ लेखकों की कृतियों का तुरंत हिंदी में अनुवाद कियागया। यहाँ तक कि कई बंगला लेखक हिंदी के माध्यम स्व देश दुनिया में जाने गये जबकि बंगला में हिंदी लेखकों के ऊपर एक भी श्रेष्ठ पुस्तक नहीं है। डॉ ओमप्रकाश मिश्र ने काव्य गायन करते हुए निराला  त्रिलोचन के गीतों का गायन किया। , प्रमिता मल्लिक ने रवीन्द्र संगीत एवं डॉ अनूप घोषाल ने नज़रुल गीत प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दूसरे भाग में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें देश के प्रसिद्द कवि कुँवर बेचैन ने  ‘होके मायूस यूँ न शाम सा ढलते रहिये, ‘बदरी बाबुल के घर जइयो’ ‘सबकी बात ना माना कर’, दिनेश कुशवाहा ने  अपनी प्रसिद्द कविता ‘कोलकाता’ पढ़ी। कविता सम्मलेन केवल मनोरंजन का केंद्र ही नहीं होता बल्कि ज्ञान का भी केंद्र होता है।आगरा से आए कवि डॉ रामेन्द्र त्रिपाठी  जिन्हें गीत ऋषि कहा जाता है ने ‘आ जाओ मोहब्बत की मीनार बनाते हैं,इस्कन इश्कन हवा चली, लोहार की लली गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।, कविता किरण ने अपना प्रसिद्ध गीत ‘मेरे भीतर लड़की सोलह साल की’ गाया तो सुमन दुबे ने मेरा मन मौन है तुम्हारा मन भी, फिर चुप रहकर बतियाता है कौन, तेरे प्यार की अग्नि में हम सौ -सौ बार जले  गीत गाया तो वहीँ  योगेंद्र शुक्ल ‘सुमन’ ने अपनी राष्ट्रवादी कविता पढ़ी। राज्यपाल ने कविता सम्मेलन की अध्यक्षता भी की और अपनी कविता भी पढ़ी। कार्यक्रम का संचालन देश की प्रसिद्द मंचीय कवयित्री कविता किरण ने किया ।धन्यवाद ज्ञापन पूर्वक्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र , भारत सरकर के निर्देशक ओमप्रकाश भारती ने किया।कार्यक्रम में हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अमरनाथ के अलावा अन्य विभागों के प्रोफेसर,विद्यार्थी भी मौजूद थे। इसके अतिरिक्त परिषद् की अध्यक्षा कुसुम खेमानी,मंत्री नन्दलाल शाह समेत अन्य अतिथि भी उपस्थित थे।

‘लता दीदी’ से लेकर ब्रिटिश सांसद तक सभी ने दी पीएम मोदी को बधाई

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पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजे शनिवार को सामने आ गए जिसमें यूपी औउत्तराखंड में बीजेपी के प्रचंड बहुमत ने तमाम हेडलाइन्स अपने नाम कर ली है। इन सबके बीच इस चुनावी अभियान के प्रमुख चेहरे रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास बधाइयों का तांता लगा हुआ है। ट्विटर पर उन्हें फॉलो करने वाले आम लोग और बड़ी हस्तियों ने उन्हें बधाई संदेश दिए जिसका उन्होंने धन्यवाद दिया।

लता मंगेश्कर ने पीएम मोदी को बधाई देते हुए लिखा पीएम मोदी, अमित शाह और बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओं को इस शानदार जीत की बहुत बधाई। वहीं आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने कहा कि इस जनादेश के साथ अच्छे प्रशासन की जिम्मेदारी भी आती है. पीएम ने लता मंगेश्कर को धन्यवाद देते हुए लिखा ‘धन्यवाद लता दीदी, आपकी बधाई खास है।’
स्वामी रामदेव ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बधाई देते हुए कहा है कि भारतीय लोकतंत्र अब जाति और धर्म के शिकंजे से बाहर निकल रहा है। इनके अलावा क्रिकेटर मोहम्मद कैफ, ब्रिटेन सांसद बॉब ब्लैकमैन और अभिनेत्री गुल पनाग समेत कई लोगों ने पीएम को बधाई दी है।
यही नहीं, शनिवार को ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी को ट्वीट करते हुए लिखा कि वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी की जीत पर उन्हें बधाई देते हैं। इस पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया ‘धन्यवाद, लोकतंत्र अमर रहे।

 

उत्तर प्रदेश में इन महिलाओं ने दी जबरदस्त टक्कर

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यूपी चुनाव में भले ही पीएम नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव और राहुल गांधी स्टार प्रचारक रहे हों, लेकिन इस बार अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव का जलवा भी कम नहीं रहा था। ‘भाभी’ के रूप में स्टार प्रचारक के तौर पर सामने आईं डिंपल बड़े बड़े दिग्‍गजों पर भारी रहीं। हालांकि डिंपल खुद चुनाव नहीं लड़ रही थीं, लेकिन उनकी रैली में जुटती भीड़ ने विरोधियों को हैरत में डाल दिया। वैसे डिंपल के अलावा भी कई महिलाएं हैं, जो राजनीति में अपनी पहचान बुलंद कर रही थीं।

                                             अपर्णा यादव (लखनऊ कैंटोनमेंट)


हाईप्रोफाइल चेहरों में समाजवादी पार्टी का सबसे ज्यादा चर्चित चेहरा हैं अपर्णा यादव। 26 साल की अपर्णा मुलायम सिंह यादव की बहू हैं और पार्टी की प्रतिष्ठित सीट लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में थीं। अपर्णा यादव बीजेपी की दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं और इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।

                                  स्वाति सिंह (सरोजनी नगर, लखनऊ)

स्वाति सिंह बीजेपी के पूर्व उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की पत्नी हैं। जिन्हें बसपा सुप्रीमों मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में बीजेपी ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उन्होंने अपने आप को सही साबित किया और चुनावी जंग जीत गईं।

                                            माधुरी वर्मा, ननपुरा (बहराइच)

पूर्व एमएलए दिलीप वर्मा ने अपनी पत्नी माधुरी वर्मा को बहराइच से राजनीति में उस वक्त एंट्री कराई जब वो जेल में थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 2012 में बहराइच की सीट से जीत दर्ज की थी। वक्त ने करवट ली तो इस बार वो ननपुरा विधानसभा सीट से बीजेपी की प्रत्याशी बनीं और चुनावी जंग जीत गईं।

                                परमिला धर त्रिपाठी (हंडिया, भदोई)

परमिलाधर त्रिपाठी बसपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे राकेशधर त्रिपाठी की पत्नी हैं। राकेशधर आय से अधिक संपत्ति के मामले में पिछले महीने ही जमानत पर जेल से बाहर आए हैं। राकेश ने 2014 लोकसभा चुनाव बीएसपी के टिकट से लड़ा लेकिन हार गए। इसके बाद उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया गया। परमिला धर अपना दल के टिकट पर चुनाव लड़ रही थीं और इस जंग में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।

                                     अलका राय (मुहम्मदावाद, गाजीपुर)

 

अलका राय बीजेपी के टिकट पर गाजीपुर की मुहम्मदाबाद सीट से चुनाव लड़ रही थीं। वो बीजेपी नेता और पूर्व विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी हैं। कृष्णानंद को कथित तौर पर 2005 में मुख्तार अंसारी गैंग ने मार डाला था। पार्टी के घोषणापत्र से अलग अलका अपने पति के नाम पर वोट मांग रही थीं और वो ये चुनावी जंग जीत गईं हैं।

                                     संजू देवी (टंडा, अंबेडकर नगर)

अंबेडकर टांडा सीट से संजू देवी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही थीं। संजू देवी हिंदू युवा वाहिनी के नेता रामबाबू गुप्ता की पत्नी हैं, जिनकी हत्या 2013 में क्षेत्र में हुई सांप्रदायिक हिंसा में कर दी गई थी। आपको बता दें कि संजू देवी ने जीत दर्ज की है। संजू अपने पति के नाम पर चुनावी मैदान में थीं। रामबाबू काफी लोकप्रिय व्यक्तित्व थे।

                                       पूजा पाल (इलाहाबाद, पश्चिम)

बसपा विधायक पूजा पाल एक बार फिर से चुनावी मैदान में थीं। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता की वजह से उनके पति राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का आरोप बाहुबली नेता अतीक अहमद पर लगा था। इसके बाद मायावती ने पूजा को टिकट दिया और सहानभूति की लहर में वह विधायक चुनी गईं। पूजा एक बार फिर उन्हीं संवेदनाओं को भुनाने की कोशिश में थीं पर वो कामयाब नहीं हो सकीं और चुनाव हार गईं।

                                         नीलम करवरिया (मेजा, इलाहाबाद )

इलाहाबाद की मेजा सीट से बीजेपी के नेता उदयभान करवरिया के खिलाफ कई केस दर्ज हैं। इसके चलते वो चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो गए थे। नतीजतन उन्होंने पत्‍नी को चुनावी मैदान में उतार दिया। उनकी पत्नी नीलम करवरिया बीजेपी के टिकट पर मेजा से चुनाव लड़ रही थीं और उन्होंने जीत हासिल की है।

                                            रुबाब सईदा (बहराइच )

बहराइच से मौजूदा विधायक वकर अहमद शाह की पत्नी रुबाब सईदा समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही थीं और उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। वकर, अखिलेश सरकार में मंत्री थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह इस बार चुनावों में नहीं थे। अपने पति की सीट से रूबाब इस बार चुनावी मैदान में थीं।

                                      रानी पक्षालिका सिंह (बाह, आगरा)

रानी पक्षालिका सिंह अपने पति अरिदमन सिंह की जगह बीजेपी के टिकट पर बाह सीट से चुनाव लड़ रही थीं और उन्होंने इस महासंग्राम में जीत हासिल की है।

                                            सरिता भदौरिया (इटावा)

सरिता भदौरिया इटावा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में थीं और उन्होंने इस चुनावी जंग में जीत हासिल की है। वो स्वर्गीय अभयवीर सिंह की पत्नी हैं।

 

भारत की पहली महिला डॉक्टर पर बन रही है बायोपिक

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बॉलीवुड में इस समय बायोपिक का जलवा बरकरार है। हर कलाकार बायोपिक में काम करने में लगा है चाहे वो सुशांत सिंह राजपूत हों या फिर प्रियंका चोपड़ा, आमिर खान हो या फिर रनबीर कपूर और अब खबर है कि एक्ट्रेस तनिष्ठा चटर्जी भी एक बायोपिक फिल्म में लीड रोल निभा रही हैं। इस फिल्म में देश की पहली महिला डॉक्टर के संघर्ष  को दर्शाया गया है। आपको बता दें कि ये फिल्म डॉक्टर रुक्माबाई की जिंदगी पर आधारित है, जिन्हें भारत की पहली प्रैक्टिसिंग लेडी डॉक्टर माना जाता है। तनिष्ठा को इस किरदार में अपने आप को ढालने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी है।

90 साल की उम्र तक रुक्माबाई हर रोज जाती थीं अस्पताल

एक इंटरव्यू में तनिष्ठा ने बताया कि ये इतिहास एक प्रसिद्ध हीरो की तरह हैं, जिन्हें भुला दिया गया। ये अफसोस की बात है कि कोई डॉक्टर रुक्माबाई को नहीं जानता लेकिन वो प्रैक्टिस करने वाली भारत की पहली महिला डॉक्टर हैं। जब तनिष्ठा ने उनकी बायोग्राफी पढ़ी तो वो हिल गईं। अनंत महादेवन इस बायोपिक के निर्देशक हैं। वहीं डॉक्टर रुक्माबाई का किरदार निभाना तनिष्ठा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि इसमें उन्हें युवास्था से 91 साल तक का सफर तय करना पड़ा। यहां तक कि इस किरदार के लिए उन्हें कई भाषाएं भी सीखनी पड़ी हैं।
तनिष्ठा ने बताया कि रुक्माबाई को शुरुआत में काफी संघर्ष करना पड़ा था क्योंकि महिला होने की वजह से कोई उनके पास इलाज करवाने नहीं जाना चाहता था। उन्हें ऐसे कई संघर्षों से लड़ना पड़ा और 90 साल की उम्र तक वो हर रोज अस्पताल जाती रहीं। 11 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी लेकिन इस विवाह को उन्होंने कभी स्वीर नहीं किया था।