Thursday, October 1, 2026
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धर्म, सियासत और ग्लैमर के हमाम में तो सब नंगे हैं, कैसे होगी सफाई?

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अपराजिता फीचर डेस्क

बाबा राम रहीम इन दिनों जेल में है और उसके अनुयायी अभी भी उसके समर्थन में हैं। डेरे से 6 साल से 18 साल की 20 लड़कियाँ छुड़वाई गयी हैं। राम रहीम को 2 अलग मामलों में 10 -10 साल की सजा हो गयी हैै। आसाराम की तरह उसने भी मुँह खोलने वालों की हत्याएँ करवायी हैं, यह बस एक झलक है, हमारा देश न जाने ऐसे कितने बाबाओं के चंगुल में फँसा है, जिसका कोई समाधान अभी नजर नहीं आ रहा। तमाम सितारों से लेकर नेता, प्रशासन सब ऐसे बाबाओं को धार्मिक गुरुओं के आगे नतमस्तक हैं। मार्क्स ने एक कहा था कि धर्म अफीम है और भारत में धर्म का नशा सिर पर चढ़कर बोलता है। इस कदर बोलता है कि नशे में डूबे लोग एक अपराधी को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, हिंसा, लूट और आगजनी कर सकते हैं। एक बात तो तय है कि भारत में धर्म कोई भी हो मगर सबसे सुलभ और सबसे सस्ता कुछ है तो वह स्त्री का शरीर है। धर्म, पैगम्बर और मजहब के नाम पर हमेशा से औरतों का शोषण होता आया है और वह मुँह नहीं खोल सकतीं क्योंकि अफीम के नशे में डूबे लोग उसे जीने नहीं देंगे और इन रहनुमाओं की ताकत का आलम यह है कि सरकारें बर्बादी का तमाशा देखती हैं और हाथ जोड़े, सिर झुकाए अपनी सियासत के खेल को जिन्दा रखती हैं। कोई मौलाना हो, कोई धर्मगुरु हो, कोई पादरी हो, उस पर आरोप लगते हैं मगर उसके खिलाफ जाने का साहस कोई नहीं करता, 99 प्रतिशत मामले तो बाहर ही नहीं जाते और जो बाहर जाते हैं, उनमें भी इन्साफ मिलते – मिलते बहुत देर हो जाती है। इन सबका का जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि वे लोग हैं जो अपनी मुश्किलों से हारकर ऐसे बाबाओं के चक्कर में पड़ते हैं और इस कदर खूँखार होते हैं कि नवजात की जान लेने में नहीं हिचकते। पिछले सप्ताह न्यायपालिका ने जिस तरह की सक्रियता दिखायी है, वह एक उम्मीद पैदा करती है मगर क्या इन फैसलों का लागू होना आसान है, खासकर तब जब प्रशासन और समाज पीड़ितों को दबाने के लिए खड़ा हो। जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री एक बलात्कारी को अपराधी नहीं मानता हो, जहाँ के डीआईजी एक सजायाफ्ता बलात्कारी का बैग उठा रहा हो, जिस प्रदेश का शिक्षामंत्री उपद्रवियों को शांत श्रद्धालु करार दे रहा हो, हम अगर वहाँ जागरुकता की उम्मीद कर रहे हैं तो खुद को बेवकूफ ही बना रहे हैं।

राम रहीम और हनीप्रीत के रिश्ते पर भी काफी कुछ कहा जा रहा है। इस मुँहबोली बेटी को डेरे का नम्बर दो माना जा रहा है

हम मानें या न मानें मगर हिन्दूओं में एक खूबी तो यह है कि वे देर से ही सही मगर गलत को गलत कहना सीख रहे हैं मगर अन्य धर्मों में ऐसा न के बराबर है। आप इसे पूरी तरह अशिक्षा से भी नहीं जोड़ सकते क्योंकि राम रहीम का प्रभाव पंजाब, हरियाणा राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में है जहाँ शिक्षा की कमी नहीं है, कम से कम बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से तो बहुत ज्यादा है। हिन्दू धर्म ही नहीं मुस्लिम में भी तीन तलाक के बाद हलाला के दौरान औरतों का जो दैहिक शोषण होता है, वह ऐसे ही मौलाना और मौलवियों द्वारा ही होता है और वे इसके लिए मोटी रकम वसूलते हैं। शिक्षा और जागरुकता के अभाव में औरतों के लिए उनका घर उनकी इज्जत पर भारी पड़ता है और नतीजा यह है कि ऐसे घटिया लोगों का काला धंधा चला आ रहा है जिसके खत्म होने के आसार तो फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। हिन्दी में मधु कांकरिया का उपन्यास संस्कृति सेज पर जैन समाज में साध्वियों के शोषण का खुलासा करता है।

इन लड़कियों को इस नर्क में कोई और नहीं धकेलता बल्कि उनके अपने धकेलते हैं जिन पर भरोसा करके वो आती हैं और जब वे अपने शोषण की कहानी सुनाती हैं तो उन पर यकीन करने वाला कोई नहीं होता। इतना ही नहीं इन लड़कियों को इस नर्क में जिन्दगी गुजारने की सलाह देने वाले भी उनके घरवाले ही होते हैं क्योंकि उनको दैवी प्रकोप और धमकियों के साथ बदनामी का डर इतना ज्यादा रहता है कि वे एक बेटी का जीवन तबाह होते देख ज्यादा श्रेयकर समझते हैं। राम रहीम के मामले में भी पीड़िता को गुमनाम होकर खत लिखना पड़ा। गनीमत मानिए कि चिट्ठी पर कार्रवाई हई मगर ऐसा नहीं होता तो और यह तो सिर्फ एक परदा उठा तो 30 जानें गयीं और शहर के शहर जल उठे, अभी तो न जाने ऐसे कितने मामले बाकी हैं और कल्पना कीजिए कि तमाशा देखने वाली सरकारें अगर हालात पर काबू नहीं करतीं तो नजारा क्या और कितना भयावह है।

अभी तो बस ये चन्द मामले हैं

राम रहीम के पहले भी बहुत से ऐसे मामले हैं जिनमें गिरफ्तारियाँ हुई हैं और मामले विचाराधीन हैं मगर जब भी ऐसे बाबाओं को अदालतों में पेश किया जाता है तो प्रशासन का सिरदर्द बढ़ जाता है और कई बार प्रशासन हुकुम बजाता अधिक नजर आता है, जैसा कि खट्टर सरकार कर रही है। पहले तो जानते हैं ऐसे मामलों में जिनमें धार्मिक रंग हैं और वोटबैंक के चक्कर में सरकारें कठपुतली बनी नजर आ रही हैं। इनमें से एक  चर्चित गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश में हुई थी।

विश्वास के नाम पर ढोंगी चलाते हैं कारोबार

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बाबा था परमानंद। असली नाम है राम शंकर तिवारी। उस पर आरोप है कि वो बच्चे पैदा करने के नाम पर महिलाओं से बलात्कार  करता था और उनके वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था। पुलिस ने उसे 24 मई 2016 को गिरफ्तार कर लिया था। उस पर 12 मुकदमे दर्ज हैं और वो अब भी जेल में है। बाराबंकी आश्रम में छापेमारी के दौरान उसके आश्रम से अश्लील सीडी और अश्लील साहित्य बरामद किया गया था। उसे मध्यप्रदेश के सतना से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब उनके आश्रम में बनाया गया एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बताया जा रहा था कि आश्रम का कम्प्यूटर खराब हो गया था। बनवाने के लिए उसे एक दुकान पर भेजा गया था. यहां से दुकानदार ने उस वीडियो को वायरल कर दिया। अब भी परमानंद लखनऊ की जेल में बंद है।

ऐसी अंधी भक्ति ही तमाम समस्याओं की जड़ है। आसाराम पर यौन शोषण के साथ गवाहों की हत्याएँ करवाने का भी आरोप है और इसके भक्तों की कतार बहुत लम्बी हैै। फिलहाल जेल में हैै

अपने ही आश्रम की एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में आरोपी आसाराम 1 सितंबर 2013 से जोधपुर में बंद है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उसकी जमानत खारिज हो चुकी है। आसाराम के अलावा उसका बेटा नारायण साईं भी महिला श्रद्धालुओं के उत्पीड़न के आरोप में जेल में बंद है। इस साल जनवरी में ही सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दस्तावेज को जाली करार दिया। इस फर्जी दस्तावेज का संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस एनवी रामन्ना की पीठ ने 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जाली दस्तावेज के लिए कोर्ट ने नया मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया था। अब तक इस मामले से जुड़े तीन लोगों की हत्या हो चुकी है, जबकि सात लोगों पर जानलेवा हमले हो चुके हैं। आसाराम पर हजारों करोड़ों की जमीन हथियाने के अलावा हत्या जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

डेली ओ वेबसाइट के मुताबिक एक तरफ तो भीमानंद खुद को भगवान का अवतार बताता था, दूसरी तरफ सेक्स रैकेट चलाता था। फरवरी 2010 में जब दो एयरहोस्टेस समेत आठ लोगों को सेक्स रैकेट चलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया तो मामले का खुलासा हुआ। जब इन लोगों से पूछताछ की गई तो पता चला कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड 39 साल का शिवमूरत द्विवेदी है। इसे दुनिया इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूट वाले के नाम से जानती है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट का रहने वाला शिवमूरत 1988 में दिल्ली आ गया था और नेहरू प्लेस के एक 5 स्टार होटल में गार्ड बन गया था। 1997 में लाजपत नगर में मसाज पार्लर में काम करने लगा। 1997 और 1998 में उसे वेश्यावृत्ति करवानने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना नाम बदल लिया और वह खुद को इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज बताने लगा। एक साईं मंदिर में काम करने के दौरान ही वो सेक्स रैकेट चलाने लगा। 2010 से ही भीमानंद जेल में है और उसकी संपत्ति को ईडी जब्त कर चुका है।

पीड़ित महिलाओं पर परिवार और समाज का दबाव इतना रहता है कि वे मुँह नहीं खोलतीं

नवंबर 2014. रेप, यौन शोषण जैसे कई आरोपों को लेकर कथित संत रामपाल की गिरफ्तारी हुई। रिपोर्ट्स की मानें तो रामपाल तमाम लड़कियों को अपने एक किले में बंधक बनाकर रखता था। वो इन्हें साधिकाएं बुलाता था। इनमें से कुछ को वो अपने कमरे में बुलाता और कथित तौर पर शारीरिक संबंध बनाता था।  27 साल की बबिता कुमारी रामपाल की सबसे खास साधिका थीं। सूत्रों का कहना है कि बबिता के रामपाल के लड़के के साथ भी संबंध थे। कहा जाता है कि बाप-बेटे के साथ रिश्ते के कारण बबिता का रामपाल पर पूरा नियन्त्रण हो गया था। सूत्रों का कहना है कि रामपाल ने बबिता के नाम पर बैंक में 10 लाख का फिक्स डिपॉजिट भी कर रखा था। कहते हैं कि बबिता जब कमरे में होती थी तो रामपाल किसी को अंदर नहीं आने देते थे। पुलिस ने जब पड़ताल की थी तो रामपाल के कमरे से प्रेग्नेंसी किट और सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाइयां मिली थीं।

जून 2012. बंगलुरु के बिदारी में स्थित अधीनम मठ के 293वें प्रधान नित्यानंद को बलात्कार और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाबा के अड्डे पर जब पुलिस ने जांच की तो वहां कई इस्तेमाल किए हुए कंडोम और गांजा मिला था। कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने नित्यानंद की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। वो भी तब जब नित्यानंद से पीड़ित उनके कई चेलों ने एक प्राइवेट चैनल पर शोषण का आरोप लगाया था। नित्यानंद की एक शिष्या ने उनका पूरा काला चिट्ठा खोल दिया था। उसने बताया था कि उसके साथ नित्यानंद ने कई बार बलात्कार किया। किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। उसका ये भी दावा था कि नित्यानंद के जो एक तमिल हिरोइन के साथ सेक्स टेप सामने आए थे, वो उसी ने शूट किए थे।

कथित महिला धर्मगुरुओं की तो यह एक झाँकी है। राधे माँ सुर्खियों में रहने केे लिए ऐसे कई हथकंडे अपनाती रहती है

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां पर 2002 में अपने सिरसा डेरे में साध्वियों के बलात्कार का आरोप साबित हो चुका है। यह तो इस खुलासे की महज शुरुआत है, ऐसे न जाने कितने यौन शोषण इस अपराधी ने किए होंगे, इसकी तो बस कल्पना ही की जा सकती है। इस बारे में एक साध्वी ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक गुमनाम खत लिखा था। इस खत की एक कॉपी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को भी भेजी गई थी। इस चिट्ठी के आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच करने के आदेश दिए। सीबीआई की जांच में लड़की की शिकायत को सही पाया गया। दो साध्वियों ने सीबीआई की जांच में उनका साथ भी दिया। डेरा सच्चा सौदा पर आरोप लगा कि इस केस को दबाने की नीयत से उसने एक शिकायतकर्ता साध्वी के भाई की हत्या करवा दी। इसके बाद इस केस की रिपोर्टिंग कर रहे एक पूरा सच अखबार के संपादक रामचंदर छत्रपति की भी हत्या हो गई। इस मामले में भी मुख्य आरोपी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम ही है। मामले में सुनवाई 17 अगस्त 2017 तक चल। 25 अगस्त 2017 को इस मामले में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम को दोषी मान लिया। राम रहीम को दो मामलों में 20 साल की सजा हो गयी मगर छत्रपति की हत्या और 400 साधुओं को नपुंसक बनाने जैसे कई मामलों पर फैसला होना बाकी है।

दूसरे धर्मों के ठेकेदार भी कुछ कम नहीं हैं

साल भर पहले बिजनौर में एक इमाम, मौलाना अनवरुल हक़ एक औरत का बलात्कार करते हुए पकड़ाया। 40 साल का मौलाना, 30 साल की औरत का बलात्ककार रहा था। मौलाना ने औरत को ये झांसा देकर अपने कमरे पर बुलाया था कि ऐसी कुछ पूजा है, जो उसे अकेले करनी होगी। वहां उसका बलात्कार कर धमकी दी, पति को बताया तो ठीक नहीं होगा।

फादर रॉबिन, जिस पर यौन शोषण का आरोप लगाया और पीड़ित पर ही सवाल उठते रहे

कुछ महीनों पहले केरल से एक 16 साल की लड़की के रेप होने की खबर आई. लड़की गर्भवती हुई, उसे बच्चा भी हुआ। बलात्कार करने वाला एक पादरी था। फादर रॉबिन, जिसपर रेप का आरोप था, कथित तौर पर बच्चों की बेहतरी के लिए काम करता था। साल केरल में पादरी के हाथों लड़की का बलात्कार हो जाने के बाद वहां की एक धार्मिक पत्रिका ने छापा था –  ‘पादरी भी इंसान ही है. उस समय उसके शरीर की इच्छाओं ने उसको काबू कर लिया होगा मगर वो लड़की भी तो धर्म से ईसाई थी। क्या ये उसका धर्म नहीं था कि वो पादरी को किसी तरह रोक ले।’ बहुत सालों पर ऐसे ही एक मसले पर फिल्म आई थी हंगामा जमकर  हुआ था मगर हंगामे हकीकत नहीं बदलते।

 

निकाह हलाला या हवस मिटाने की साजिश

 हाल ही में एक बार में तीन तलाक देने को असंवैधानिक करार दिया गया मगर शोषण की कहानी इसके बाद शुरू होती है जिस पर बात फिलहाल नहीं हुई। इसे निकाह हलाला कहते हैं। बीते दिनों इंडिया टुडे के हुए स्टिंग ऑपरेशन में मुरादाबाद में इमाम नदीम को पैसे लेकर निकाह हलाला करते हुए पाया गया यानी तलाकशुदा औरत अपने पिछले पति के पास फिर से जा सके, इसके लिए उसे फिर से शादी करना ज़रूरी होता है। इमाम उनके साथ सोकर दूसरी शादी की कमी पूरी करते हैं। ज़ाहिर सी बात है, इसके बाद औरत को अपने पिछले पति से फिर से शादी करने की इजाज़त मिल जाती है।

इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन में कई इमाम पकड़े गए थे

पता पड़ा कि इमाम एक औरत के साथ सोने के लिए 25 हजार से 1 लाख लेता था। बता दें कि झांसा देकर औरत के साथ सेक्स करना भी संविधान के मुताबिक बलात्कार के दायरे में आता है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मिलकर ऐसे कई इमाम स्टिंग में पकड़े गए।

बौद्ध भिक्षुओं में लगी ये बीमारी

बीते दिनों असम में एक 12 साल की लड़की का रेप हुआ, मीडिया में जिसकी खबर सुनने को नहीं आई। ये रेप एक बौद्ध भिक्षु ने बच्ची के हाथों पूजा करवाने के बहाने किया. घर से दूर एक मंदिर में उसे पूजा के लिए बुलाया और उसके भाई को सामान लेने भेज दिया। फिर अपने कमरे में उसका रेप कर उसे धमकी दी कि इस बारे में किसी से कहा तो परिवार का भविष्य बिगड़ जाएगा।

वोटबैंक, ग्लैमर, सियासत का खेल और बाबाओं को बर्बादी की छूट

राम रहीम रेप का दोषी है। सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा हिंसा में जल उठा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक हिंसा में 31 लोग मर चुके हैं। पंचकुला में 29 और सिरसा में दो लोगों की मौत हुई है. कम से कम 250 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 60 पुलिसकर्मी भी हैं मगर सियासी और ग्लैमर के चमकते गलियारों में कोई चूँ तक नहीं कर रहा। ऐसा लगता है मगर सारे नेताओं और अभिनेता व अभिनेत्रियों को साँप सूँघ गया है। बहुत कम लोग हैं जो सामने आकर कोर्ट की तारीफों के पुल बाँध रहे हैं या राम रहीम को बलात्कारी कहने का साहस कर रहे हैं। सिर्फ कोर्ट है, जो इस हिंसा पर पूरी नज़र बनाए हुए है।

हरियाणा जलता रहा और खट्टर सरकार तमाशा देखती रही

तभी तो कोर्ट ने नुकसान की भरपाई के लिए गुरमीत की संपत्ति ज़ब्त करने का आदेश दे दिया और खट्टर से लेकर मोदी सरकार को आईना दिखा दिया। हैरत की बात यह है कि हर बात पर ट्विट करके कोसने वाले सुरजेवाला और केजरीवाल से लेकर मायावती जैसे नेता भी खामोश बैठे हैं। कोर्ट ने तो पहले ही कह दिया है कि राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा को होने दिया गया और सच भी यही है। जाट आन्दोलन के दौरान हिंसा अत्प्रत्याशित हो सकती है मगर  इस मामले में ऐसा कतई नहीं था मगर सरकार ने इसके बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाया। पुलिस को हथियार दिए गए, सेना तैनात की गयी मगर बल प्रयोग की इजाजत सही समय पर नहीं मिली।

राम रहीम केे भक्तों में कई सेलिब्रिटी हैं और बहुत कम लोग हैं जिन्होंने जुबान खोली है

दरअसल,हरियाणा और पंजाब विधानसभा चुनाव के वक़्त गुरमीत राम रहीम सिंह ने भाजपा और अकाली दल का खुलकर समर्थन किया था। 7 अक्टूबर 2014 को इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा के 90 उम्मीदवारों में से 44 उम्मीदवार सिरसा राम रहीम से मिलाने के लिए ले जाए गए थे। उम्मीदवारों के मिलने से 6 दिन पहले अमित शाह ने भी राम रहीम से मुलाकात थी और ये पहली बार था जब राम रहीम ने खुलकर किसी राजनीतिक दल का समर्थन किया था। खुद पीएम मोदी भी इस शख्स की तारीफ कर चुके हैं।

विराट कोहली और आशीष नेहरा भी इस सूची में शामिल हैं

सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि एक बार राम रहीम ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि शिखर धवन, आशीष नेहरा, ज़हीर खान, युसूफ पठान हमसे मिलने आते थे, वो चाहे मेरा नाम ले, न लें। ये उनकी मर्ज़ी. मैंने उन्हें ट्रेंड किया है। अकाली दल और कांग्रेस के नेता भी राम रहीम की शरण में जाते रहे हैं. 15 अक्टूबर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस कतार में अनिल कपूर, जावेद अख्तर, जॉन अब्राहम, शिल्पा शेट्टी, ऋत्विक रोशन जैसे कई सितारे भी हैं और ऐसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले भी उतने ही दोषी हैं फिर वह सीनियर बच्चन हों या कोई और, हमाम में सब नंगे हैं साहब…..कितनों को पकड़ोगे, जब तक तुम होश में नहीं आओगे, जब तक औरतें इस मायाजाल को तोड़कर नहीं उतरतीं, कुछ नहीं हो सकता।

(इनपुट – साभार द लल्लन टॉप, बीबीसी हिन्दी )

 

 

तय मासिक औसत जमा नहीं रखे जाने पर एसबीआई ने खाताधारकों से वसूले 235.06 करोड़ रुपये

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इंदौर : देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपने 388.74 लाख खातों में तय मासिक औसत जमा राशि नहीं रखे जाने पर मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में अपने ग्राहकों से 235.06 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला है ।

मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामजिक कार्यकर्ता चन्द्रशेखर गौड़ ने बताया कि उन्हें इस बैंक ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सावालों पर यह यह जानकारी दी है। एसबीआई ने गौड़ को पांच अगस्त को भेजे गये जवाब में बताया है , “30 जून 2017 को समाप्त तिमाही के दौरान मासिक औसत शेष नहीं बनाये रखने के कारण वसूल किये गये प्रभारों की राशि 235.06 करोड़ रुपये और (सम्बंधित) खातों की संख्या 388.74 लाख है।’’ बैंक की ओर आरटीआई के तहत भेजे गये जवाब में हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तय मासिक औसत जमा राशि नहीं रखे जाने पर किस श्रेणी के खातों से शुल्क कटौती की गयी है । लेकिन गौड़ का कहना है कि इस वसूली से गरीब तबके के वे ग्राहक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जो एसबीआई में बचत खातों में छोटी-छोटी रकम जमा करते और निकालते रहते हैं ।

उन्होंने कहा, “एसबीआई को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के हितों में इस शुल्क वसूली के नियमों की समीक्षा करनी चाहिये, क्योंकि इस तबके के ज्यादातर ग्राहक अपने खातों में लम्बे समय तक बड़ी रकम जमा नहीं रख पाते हैं ।नतीजतन उनके खातों से शुल्क कटता रहता है।” बहरहाल, आरटीआई से पता चलता है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हालांकि बैंकों को इस बारे में कोई विशिष्ट निर्देश नहीं दिये हैं कि बचत खातों में जमा राशि का न्यूनतम स्तर क्या होना चाहिए। लेकिन केंद्रीय बैंक ने इन खातों में न्यूनतम जमा राशि नहीं रखे जाने पर सम्बंधित ग्राहकों से जुर्माने की वसूली को लेकर बैंकों के लिये कुछ शर्तें जरूर तय कर रखी हैं। गौड़ ने बताया कि उनकी ही एक अन्य आरटीआई अर्जी पर रिजर्व बैंक की ओर से भेजे गये जवाब में कहा गया है कि अव्वल तो बचत खाते खोलते वक्त सभी बैंकों को अपने ग्राहकों को न्यूनतम जमा राशि नहीं रखे जाने की स्थिति में जुर्माने की वसूली के प्रावधानों की जानकारी “पारदर्शी तरीके” से देनी चाहिए। अगर कोई ग्राहक अपने खाते में न्यूनतम जमा राशि नहीं रखता है, तो जुर्माने की वसूली से पहले बैंक को उसे कम से कम एक महीने की मोहलत देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “रिजर्व बैंक की शर्तों के मुताबिक बैंक को ई-मेल या एसएमएस या पत्र आदि माध्यमों से अपने सम्बंधित ग्राहक को स्पष्ट सूचना देनी चाहिए कि अगर तय समय-सीमा में उसके खाते की जमा राशि न्यूनतम स्तर तक नहीं पहुँची, तो उसे जुर्माना चुकाना पड़ेगा। अगर इसके बाद भी ग्राहक के खाते में न्यूनतम स्तर से कम रकम जमा रहती है, तो उससे जुर्माना वसूला जा सकता है. खाताधारक को इस वसूली की भी सूचना दी जानी चाहिये।”

मिठास भरे स्वाद के साथ करें गजानन का स्वागत

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ड्राई फ्रूट्स मोदक

सामग्री एक कटोरी बादाम, एक कटोरी काजू, आधा कटोरी पिस्ता, आधा नारियल, एक कटोरी अंजीर, एक बड़ी कटोरी बीज निकले हुए खजूर, दो बड़ा चम्मच मक्खन/घी, आधी कटोरी खसखस के दाने, मोदक बनाने का सांचा

विधि सबसे पहले बादाम, काजू, पिस्ता, नारियल और अंजीर मिक्सर जार में दरदरा पीस लें।  इसके बाद खजूर के बीज निकालकर मिक्सर में पीस लें।  धीमी आंच में एक नॉनस्टिक पैन या कड़ाही रखें।
फिर इसमें मक्खन डालकर गरम कर लें।  जब घी/बटर पिघल जाए तो इसमें काजू, बादाम वाला मिश्रण डालकर 4-5 मिनट तक हल्की आंच पर चलाते हुए भून लें। फिर इसमें खजूर और खसखस के दाने डालकर 2-3 मिनट तक चलाते हुए भूनें। आप पाएंगी कि मिश्रण हलका पिघल गया है।  आंच बंद कर दें और मिश्रण को हल्का सा ठंडा होने के बाद मोदक के सांचे में रखकर मोदक बना लें।
नोट– मिक्सर में ड्राई फ्रूट्स पीसते हुए इस बात का ध्यान रखें कि यह आसानी से पिसे नहीं तो यह मिक्सर को खराब कर सकता है। अगर खजूर न हो तो आप इसमें खजूर के गुड़ का इस्तेमाल कर सकती हैं।

कुदुमुलु या उंद्रमुल्लु

सामग्री : एक कप चावल, दो कप पानी, एक मुट्ठी चना दाल, आधा छोटा चम्मच जीरा, आधा छोटा चम्मच नमक,1 बड़ा चम्मच घी, एक स्टीमर, एक पैन

विधि : सबसे पहले चावल को पानी में भिगोकर 2 घंटे तक भिगोकर रखें।  तय समय बाद चावल का ड्रेनर या फिर कपड़े की मदद से पानी छान लें। इस चावल को या तो धूप में या फिर पंखे के नीचे फैलाकर सुखा लें। जब चावल सूख जाए तो मिक्सर में डालकर दरदरा पीस लें।  इसके बाद एक कटोरी पानी में चना दाल भिगोकर 15-20 मिनट तक रख दें। तय समय बाद मध्यम आंच पर पैन में घी डालकर गरम होने के लिए रखें। चना दाल को छानकर पानी निकाल दें। जब घी गरम हो जाए तो इसमें चना डालकर हलका चलाते हुए भून लें। फिर इसमें दो कप पानी और नमक डाल दें। जब चना दाल में उबाल आ जाए तो इसमें पिसा हुआ चावल का आटा डालकर और जीरा डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। इसे ढककर पानी सूखने तक पकने दें। आंच बंद करके इससे चना दाल और चावल को अच्छी तरह मिला लें. आंच बंद करके इसे ठंडा होने दें।

नोट – यह दक्षिण भारत में प्रसाद के रूप में  चढ़ाया जाता है और इसका नाम भी श्रीगणेश के नाम पर ही है

(साभार)

 

गणेश चतुर्थी : इस बार 10 नहीं, 11 दिन विराजेंगे गणपति

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गणेश भक्तों के लिए खुशखबरी है, इस बार उनके प्रिय गणपति बप्पा 10 दिनों के लिए नहीं बल्कि 11 दिनों के लिए उनके घर पर विराजेंगे। क्योंकि इस बार गणेश उत्सव 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर को खत्म हो रहा है।

हिंदू धार्मिक कैलेंडर के मुताबिक, गणेश चतुर्थी हर साल भाद्रपद के चौथे दिन मनाई जाती है, मान्यता है कि भगवान गणेश का इस दिन जन्म हुआ था। पूजा और मुहूर्त का समय आगमन की तैयारियां बप्पा के भक्त उनके आगमन की तैयारियां कर रहे हैं। लोगों के घरों में गणपति स्थापना की तैयारियां चल रही है। इस उत्सव का समापन अनन्त चतुर्दशी के दिन श्री गणेश की मूर्ति को समुद्र में विसर्जित करने के पश्चात होता है। लोगों में जबरदस्त उत्साह इन दिनों में जो सच्ची श्रद्धा से श्रीगणेश की की आराधना करता है उन पर वर्ष भर गणेशजी की कृपा बनी रहती है। बुद्धि, ज्ञान और विघ्नविनाशक के रूप में पूजे जाने वाले श्री गणेश जी के स्वागत की पूरी तैयारी कर ली गई है। लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शिवपुराण में गणेश जी का जिक्र शिवपुराण में कहा गया है कि मां पार्वती ने स्नान करने से पहले अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया था और कहा था किसी को भी घर के अंदर प्रवेश नहीं करने देना, जब तक कि वो स्नान करके वापस नहीं आ जातीं। शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें भी रोक दिया। इस पर शिवगणों ने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। गज के मस्तक को बालक के धड़ पर रख दिया जिससे भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे मां पार्वती नाराज हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षि नारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णु जी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया माता पार्वती ने उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। कहते हैं कि लंबोदर जी की जो कोई भी पूजा करता है तो उसके समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उस पर आने वाला संकट टल जाता है।

शेफ कुणाल कपूर ला रहे हैं शुगर फ्री मिठाइयां

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त्योहारों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है और सेलिब्रिटी शेफ कुणाल कपूर एक नए अंदाज में मिठाइयों को परोसने के लिए तैयार हैं। कुणाल ने अपने नए प्रयोग के तहत मिठाइयों से शक्कर को अलग किया है और वह भी मिठास को कम किए बगैर। यह उन लोगों के लिए काफी अच्छी खबर है जो शिकायत करते हैं कि भारतीय मिठाइयों में कैलोरी व शक्कर जरूरत से ज्यादा होती है। कुणाल यूट्यूब पर प्रसारित पांच भागों की वेब श्रृंखला ‘द स्वीट ब्रेकअप’ में शक्कर को मिठाइयों से अलग करना सिखा रहे हैं। खास बात यह है कि यहां मिठाइयों की मिठास तो बरकरार रहेगी, लेकिन सेहत के लिहाज से वह हर दिल अजीज हो जाएंगी।

शेफ कुणाल ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “हम सभी को अपनी-अपनी संस्कृति से जुड़े व्यंजनों से प्यार है और मिठाइयां हमारी संस्कृति, भोजन और दिल में विशेष स्थान रखती हैं। हमने भोजन सहित जीवन के हर पहलू में उन्नति की लेकिन इस कड़ी में हलवाई पीछे छूट गए हैं।

इसमें कुणाल के साथ पाक कला आधारित शो ‘हाइवे ऑन माइ प्लेट’ के संचालक रॉकी और मयूर भी शामिल होंगे। इस शो में कुणाल एक डेजर्ट ट्रक के जरिए भारत के पांच प्रतिष्ठित शहरों में घूम-घूम कर वहां के शेफ व हलवाइयों से मिलेंगे और यह बताने की कोशिश करेंगे कि कैसे मिठाइयों में शक्कर की जगह कृत्रिम मीठा का प्रयोग किया जाए जिससे कि उसका पारंपरिक स्वाद बरकरार रहे।

कुणाल बताते हैं, “हमने हर शहर के स्थानीय लोगों से भी बातचीत की। हमने लोगों के लिए स्थानीय व पारंपरिक स्वाद के बारे में लोगों से जानने की कोशिश की और जब मैंने बगैर शक्कर केवल शुगर फ्री के इस्तेमाल से मिठाई तैयार की तो इसे शहर के लोगों को चखने के लिए दिया, जो हमारे शो का सबसे उत्साहजनक हिस्सा था। ”

कुणाल ने अपने शो के लिए देश की सबसे प्रसिद्ध मिठाइयों का चयन किया। कुणाल बताते हैं, “हमने चांदनी चौक के तिवारी ब्रदर्स के प्रसिद्ध गुलाब जामुन, लखनऊ की मलाई गिलौरी, कोलकाता के बलराम स्वीट्स के संदेश, बेंगलुरू के धाड़वाड़ पेड़ा और मुंबई के मोदक को बनाने में शुगर फ्री का इस्तेमाल किया। हर मिठाई का अपना अलग महत्व है और मेरे लिए इनके जायकों का पुनर्निर्माण एक शानदार अनुभव था। ”

 

 

दफ्तर में ‘वर्क लोड’ से हैं परेशान तो ऐसे दूर करें अपना तनाव

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नौकरी करने वाले किसी शख्स की नींद कोई हराम करता है और सपने में भी भूत बनकर पीछा करता है, तड़के नींद से उठाकर अपना सारा गुस्सा गर्म चाय की तरह उड़ेल देता है तो ऐसा करने वाला कोई और नहीं एक बॉस ही हो सकता है। बॉस अगर खडूस हुआ और कर्मचारियों से काम करने का तरीका नहीं आता तो वह उनका जीना हराम कर देता है। ऐसे में लक्ष्य पूरा करने का दबाव और बॉस की नाराजगी का ख्याल अगर आपकी भी रातों की नींद उड़ा रहा है तो ये उपाय आजमाकर आप अपनी मदद खुद कर सकते हैं।

क्या करना हैै..तालिका तैैयार  रहे
मान लीजिए एक प्रोजेक्ट दिया गया हैै और आप परेशान हैं कि शुरु कहाँ से किया जाए तो बुद्धि इसी में हैैं कि सूची बना लें। इस सूची में आपको कौन-कौन से काम निपटाने हैं, क्या जरूरी है और क्या कम जरूरी है, यह सब एक जगह लिखें। इससे आपको योजना तैयार करने में आसानी होगी और जरूरी काम छूटेगा नहीं।

काम जितना महत्वपूर्ण, उतना ही समय
स्कूल याद है तो इम्तिहान भी याद होंगे। महत्वपूर्ण प्रश्नों पर नजर जल्दी जाती थी तो यहाँ महत्वपूर्ण कामों को पहलेे पूरा करें। तय करें कि दिन में कौन से काम के लिए आपको कितना समय देना है। साथ ही, कौन सा प्रोजेक्ट कब पूरा करना है इसकी समय सीमा भी तय करें। न सिर्फ काम करने बल्कि कितनी देर का आप ब्रेक लेंगे दिन में इसका भी समय निर्धारित करें।

नहीं’ कहना सीखें
आप किसी जरूरी प्रोजेक्ट में लगे हैं और पहले ही काम के लोड की वजह से व्यस्त हैं तो किसी नए काम को हाथ में लेने के बजाय अपनी सीमाएं समझें और ‘न’ कहना सीखें। आप किसी काम को लेकर उसे समय पर पूरा न कर पाएं इससे बेहतर होगा कि आप विनम्रता से मना कर दें।

साथी हाथ बढ़ाना
सारा काम अपने ऊपर ओढ़ने के बजाय उसे अपने सहयोगियों के साथ बांटना ही प्रबंधन की कला है। आप अकेले ही हर काम को निपटा लेंगे, यह सोच ही बहुत गलत है। सही प्रबंधन करने से काम कम समय में सही तरीके से पूरा होता है।

नहीं रहीं भक्ति माँ, एक लाख महिलाओं की नि:शुल्क डिलीवरी करवाई

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मध्य प्रदेश स्थित इंदौर की डॉ. भक्ति यादव की चौदह अगस्त को 92 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। डॉक्टर भक्ति ने अपने जीवनकाल में ‘यथा नाम तथा काम’ की आदर्श उक्ति को पूरी तरह चरितार्थ किया। उन्होंने अपने चिकित्सकीय सेवाकाल में एक लाख निर्धन महिलाओं की नि:शुल्क प्रसूति की थी। उन्होंने ऐसी स्त्रियों से किसी प्रकार का कोई शुल्क कभी नहीं लिया।

डॉक्टर भक्ति यादव भारत की समाजसेवी चिकित्सक थीं। वे एक स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं। वे गरीब स्त्रियों की नि:शुल्क चिकित्सा करती थीं। 1952 में भक्ति यादव इंदौर की पहली महिला थीं, जो एमबीबीएस डॉक्टर बनीं। उनका जन्म 3 अप्रैल 1926 को उज्जैन के निकट स्थित महिदपुर में हुआ था। वे मूलत: महाराष्ट्र के एक प्रतिष्ठित परिवार से थीं। जिस समय भारतीय समाज में लड़कियों को पढ़ाना अनुचित समझा जाता था, तब भक्ति यादव ने शिक्षा हासिल की। उनके पिता ने उनकी पढ़ने की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें निकटवर्ती गरोठ कस्बे में पढ़ाई के लिए भेज दिया। वहां से उन्होंने सातवीं कक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उनके पिता इंदौर आ गए। भक्ति की पढ़ाई के प्रति अटूट लगन को देखते हुए पिता ने उन्हें अहिल्या आश्रम स्कूल में प्रवेश दिलवा दिया। उस समय इंदौर में वह एकमात्र विद्यालय था, जो बालिकाओं के लिए था और जहां छात्रवास की सुविधा भी थी। वहां से 11वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भक्ति ने 1948 में इंदौर के होल्कर साइंस कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश में लिया। वे बीएससी प्रथम वर्ष में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुईं। उस समय शहर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) में ही एमबीबीएस का पाठ्यक्रम चल रहा था और उन्हें 11वीं कक्षा के अच्छे परिणाम के आधार पर उसमें प्रवेश मिल गया।

उस समय उस कॉलेज में एमबीबीएस के लिए चयनित कुल 40 छात्रों में से 39 लड़के थे और भक्ति ही अकेली लड़की थीं। वह एजीएम कॉलेज की एमबीबीएस के पहले बैच की पहली महिला छात्र थीं। वे मध्य भारत की भी पहली एमबीबीएस डॉक्टर थीं। सन् 1952 में भक्ति की तपस्या फलीभूत हुई और वे एमबीबीएस डॉक्टर बन गईं। उन्होंने एमजीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमएस किया। 1957 में उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले चंद्र सिंह यादव से विवाह कर लिया। उनके पति भी जीवनभर रोगियों की सेवा में तन-मन-धन से समर्पित रहे। स्थानीय लोगों में डॉक्टर भक्ति का नाम काफी प्रसिद्ध था। वे संपन्न परिवार के रोगियों से भी नाममात्र का ही शुल्क लेती थीं और गरीब मरीजों का तो उन्होंने जीवनभर नि:शुल्क इलाज किया।

तब से डॉक्टर भक्ति चिकित्सा क्षेत्र में परोपकार में लीन रहीं। 2014 में 89 वर्ष की अवस्था में उनके पति डॉ. चंद्र सिंह यादव का निधन हो गया। डॉ. भक्ति को भी 2011 में अस्टियोपोरोसिस नामक खतरनाक बीमारी हो गई, जिस कारण उनका वजन लगातार घटते हुए 28 किलो रह गया। डॉक्टर भक्ति यादव को उनकी सेवाओं के लिए सात वर्ष पूर्व डॉ. मुखर्जी सम्मान प्रदान किया गया था। वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अधिक आयु होने के कारण वे पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मिलित न हो सकीं। लिहाजा नियमानुसार इंदौर के कलेक्टर ने उन्हें उनके घर जाकर पुरस्कार प्रदान किया।

सही मायनों में चिकित्सा कर्म क्या होता है यह डॉ. भक्ति यादव ने अपने समर्पण से दिखा दिया। उन्होंने सोमवार 14 अगस्त 2017 को इंदौर स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली और हम सभी को आश्चर्य मिश्रित विषाद के साथ छोड़ गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अंसवैधानिक करार दिया

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में मंगलवार को मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक बार में ‘तीन तलाक’ कह कर तलाक देने की 1400 साल पुरानी प्रथा खत्म करते हुये इसे पवित्र कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ और इससे इस्लामिक शरिया कानून का उल्लंघन करने सहित अनेक आधारों पर निरस्त कर दिया।

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने , 3:2 के बहुमत से जिसमें प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर अल्पमत में थे, ने एक पंक्ति के आदेश में कहा, ‘‘3:2 के बहुमत में रिकार्ड की गयी अलग अलग राय के मद्देनजर तलाक-ए-बिद्दत् (तीन तलाक) की प्रथा निरस्त की जाती है।’’ संविधान पीठ के 395 पेज के फैसले मे तीन अलग अलग निर्णय आये। इनमें से बहुमत के लिये लिखने वाले न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति एस ए नजीर के अल्पमत के इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं थे कि ‘तीन तलाक’ धार्मिक प्रथा का हिस्सा है और सरकार को इसमें दखल देते हुये एक कानून बनाना चाहिए।

न्यायमूर्ति जोसेफ, न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस मुद्दे पर प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति नजीर से स्पष्ट रूप से असहमति व्यक्त की कि क्या तीन तलाक इस्लाम का मूलभूत आधार है।

सरकार, राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं ने तत्काल ही इस निर्णय का स्वागत किया। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘ऐतिहासिक’ बताते हुये कहा कि इसने मुस्लिम महिलाओं को बराबर का हक प्रदान किया है।

विधिवेत्ता सोली सोराबजी ने कहा, ‘‘यह प्रगतिशील फैसला है जिसने महिलाओं के अधिकारों को संरक्षण दिया है और अब कोई भी मुस्लिम व्यक्ति इस तरीके से अपनी पत्नी को तलाक नहीं दे सकेगा।’’ तीन तलाक की प्रथा निरस्त होने के बाद अब, सुन्नी मुस्लिम, जिनमे तीन तलाक की प्रथा प्रचलित थी, इस तरीके का इस्तेमाल नहीं कर सकेगे क्योंकि शुरू में ही यह गैरकानूनी होगा।

शीर्ष अदालत द्वारा तलाक ए बिद्दत या एकबारगी तीन तलाक कह कर तलाक देने की प्रथा निरस्त किये जाने के बाद अब इनके पास तलाक लेने के दो ही तरीके-तलाक हसन और तलाक अहसान ही उपलब्ध हैं।

 

तीन तलाक मामला : घटनाओं का कालक्रम

उच्चतम न्यायालय ने बहुमत के फैसले में कहा कि तीन तलाक अमान्य, गैरकानूनी और असंवैधानिक है। तीन तलाक की घटनाओं के कालक्रम इस प्रकार है : 16 अक्तूबर 2015 : उच्चतम न्यायालय की पीठ ने हिंदू उत्तराधिकार से संबधित एक मामले की सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश से उचित पीठ का गठन करने के लिए कहा ताकि यह पता लगाया जा सकें कि क्या तलाक के मामलों में मुस्लिम महिलाएं लैंगिक भेदभाव का सामना करती हैं।

पांच फरवरी 2016 : उच्चतम न्यायालय ने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष अदालत की मदद करने के लिए कहा।

28 मार्च : उच्चतम न्यायालय ने ‘महिलाओं और कानून : शादी, तलाक, संरक्षण, वारिस और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ पारिवारिक कानूनों के आकलन’ पर उच्च स्तरीय पैनल की रिपोर्ट दायर करने के लिए केंद्र से कहा।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) समेत विभिन्न संगठनों को पक्षकार बनाया।

29 जून : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम समाज में ‘तीन तलाक’ को ‘‘संवैधानिक रूपरेखा की कसौटी’’ पर परखा जाएगा।

सात अक्तूबर : भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में इन प्रथाओं का विरोध किया और लैंगिक समानता तथा धर्मनिरपेक्षता जैसे आधार पर इस पर विचार करने का अनुरोध किया।

14 फरवरी 2017 : उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न याचिकाओं पर मुख्य मामले के साथ सुनवाई करने की अनुमति दी।

16 फरवरी : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहुविवाह को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी और फैसला देगी।

27 मार्च : एआईएमपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि ये मुद्दे न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार के बाहर है इसलिए ये याचिकाएं विचार योग्य नहीं हैं।

30 मार्च : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ये मुद्दे ‘‘बहुत महत्वपूर्ण’’ हैं और इनमें ‘‘भावनाएं’’ जुड़ी हुई है और संविधान पीठ 11 मई से इन पर सुनवाई शुरू करेगी।

11 मई : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार करेगी कि क्या मुस्लिमों में तीन तलाक की प्रथा उनके धर्म का मूल सिद्धान्त है।

12 मई : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि तीन तलाक की प्रथा मुस्लिमों में शादी तोड़ने का सबसे खराब और गैर जरुरी तरीका है।

15 मई : केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अगर तीन तलाक खत्म हो जाता है तो वह मुस्लिम समुदाय में शादी और तलाक के लिए नया कानून लेकर आएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत यह देखेगा कि क्या तीन तलाक धर्म का मुख्य हिस्सा है।

16 मई : एआईएमपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि आस्था के मामले संवैधानिक नैतिकता के आधार पर नहीं परखे जा सकते। उसने कहा कि तीन तलाक पिछले 1,400 वर्षों से आस्था का मामला है।

तीन तलाक के मुद्दे को इस आस्था के बराबर बताया कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।

17 मई : उच्चतम न्यायालय ने एआईएमपीएलबी से पूछा कि क्या एक महिला को ‘निकाहनामा’ के समय तीन तलाक को ‘ना’ कहने का विकल्प दिया जा सकता है।

केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि तीन तलाक ना तो इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है और ना ही यह ‘‘अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक’’ का मामला है बल्कि यह मुस्लिम पुरुषों और वंचित महिलाओं के बीच ‘‘अंतर सामुदायिक संघर्ष’’ का मामला है।

18 मई : उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक पर फैसला सुरक्षित रखा।

22 मई : एआईएमपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर करते हुए कहा कि वह दूल्हों को यह बताने के लिए ‘‘काज़ियों’’ को एक परामर्श जारी करेगा कि वे अपनी शादी तोड़ने के लिए तीन तलाक का रास्ता ना अपनाए।

एआईएलपीएलबी ने उच्चतम न्यायालय में विवाहित दंपतियों के लिए दिशा निर्देश रखे। इनमें तीन तलाक देने वाले मुस्लिमों का ‘‘सामाजिक बहिष्कार’’ करना और वैवाहिक विवादों को हल करने के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त करना भी शामिल था।

22 अगस्त : उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ दो के मुकाबले तीन के बहुमत से फैसला दिया कि तीन तलाक के जरिए तलाक देना अमान्य, गैरकानूनी और असंवैधानिक है और यह कुरान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है

 

महिलाओं ने कहा – जीने का हक मिला

दिल्ली से करीब 350 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के एक गांव में रहने वाली 26 साल की रजिया के लिए फौरी तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय का फैसला उस इंसाफ की तरफ एक अहम कदम है, जिसके लिए वह सालों से लड़ाई लड़ रही है । उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में फौरी तीन तलाक पर पाबंदी का फरमान सुनाया ।

रजिया ने पूछा, ‘‘तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि अब आखिकार मेरे मामले पर सुनवाई होगी ? क्या इसका मतलब यह है कि जिन पुलिसकर्मियों ने मुझे थाने से भगाया था, उन पर कार्रवाई होगी ? क्या मुझे अब न्याय मिलेगा ?’’ करीब दो साल पहले रजिया की जिंदगी में उस वक्त भूचाल आ गया था, जब शादी के आठ साल बाद उसका पति उसे फौरी तलाक देकर कथित तौर पर सऊदी अरब चला गया । दो बेटियों, जिसमें एक दिव्यांग थी, के जन्म के मुद्दे पर रजिया के पति ने उसे तलाक दिया था।
रजिया ने कहा, ‘‘जब मैं स्थानीय पुलिस थाने गई थी तो मुझे भगा दिया गया । पुलिस ने कहा कि मेरा मामला मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़ा है । मुझे अदालत जाने को कहा गया ।’’ सलाह के मुताबिक रजिया अदालत गई, लेकिन यह धीमी प्रक्रिया थी । रजिया ने शाहजहांपुर से फोन पर बातचीत में पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘स्थानीय अदालत में कोई प्रगति नहीं हुई है ।’

उच्चतम न्यायालय में तीन तलाक के खिलाफ याचिकाकर्ताओं में शामिल ‘बेबाक कलेक्टिव’ की हसीना खान ने कहा कि अब चुनौती यह है कि इस बड़े फैसले पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है कि रजिया जैसी हजारों महिलाओं के मामलों को कैसे मजबूत किया जा सके ।

खान ने कहा, ‘‘पहली बार संविधान के चश्मे से इस मुद्दे को देखा गया है । इसे जमीनी स्तर पर उतारने में वक्त लगेगा । लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के अलावा, समाज में गहरे पैठे पूर्वाग्रहों पर इसका गहरा असर पड़ेगा ।’’ लखनऊ की रहने वाली 24 साल की रुबीना भी तीन तलाक की पीड़ित रही हैं । उनका कहना है कि यह फैसला उनके लिए राहत लेकर आया है जिन्हें फौरी तलाक की धमकी दी जाती है और परेशान किया जाता है ।

तीन तलाक का मुद्दा पिछले साल फरवरी में उस वक्त सामने आया था जब फौरी तीन तलाक का शिकार हुई शायरा बानो ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर कर फौरी तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला पर पाबंदी की गुहार लगाई । निकाह हलाला वह प्रथा है जिसके तहत यदि कोई तलाकशुदा महिला अपने पूर्व पति से फिर शादी करना चाहती है तो उसे पहले किसी अन्य पुरूष से शादी करनी होगी । शायरा की अर्जी के बाद देश की हजारों मुस्लिम महिलाओं ने दबाव समूहों का गठन किया और हस्ताक्षर अभियान चलाकर तीन तलाक खत्म करने की मांग की । इस बीच, ओड़िशा में रहने वाली तीन तलाक की पीड़िताओं ने भी न्यायालय के फैसले की जमकर तारीफ की है ।

21 साल की नजमा बेगम ने कहा, ‘‘इस फैसले ने मुझे लड़ने की हिम्मत दी है । आठ महीने पहले जब मेरे पति ने सऊदी अरब से फोन पर मुझे तीन बार तलाक कहा तो मेरी जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई । चार साल के वैवाहिक जीवन के बाद एक झटके में मैं उनसे अलग हो गई । मेरे माता-पिता ने मौलानाओं के पास इस मामले को उठाया, लेकिन मुझे बताया गया कि मेरी शादी खत्म हो चुकी है ।’’ लाली बीवी और रिजवाना बेगम ने भी न्यायालय के फैसले की तारीफ की ।

राजनीतिक दलों ने तीन तलाक पर न्यायालय के फैसले का स्वागत किया

भाजपा और कांग्रेस ने तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक ठहराने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह लैंगिक न्याय और समानता की दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक आधुनिक समाज की तरक्की में अवरोधक माने जाने वाले इस मुद्दे पर आए न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और केंद्र सरकार से इसपर जल्दी ही एक कानून लेकर आने को कहा।

चौहान ने ट्विटर पर कहा, ‘‘हम तीन तलाक के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं और केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह जल्दी ही एक कानून लेकर आए। तीन तलाक जैसी परंपराएं हमारी बहन-बेटियों के लिए मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना जैसी हैं और आधुनिक भारतीय समाज की प्रगति में रोड़ा हैं।’’ कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘‘यह एक अच्छा फैसला है।’’ हालांकि उन्होंने यह कहा कि जितना अहम फैसला है, उतनी ही अहम उसके पीछे की तर्कशीलता भी है। किसी को भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इस तर्कशीलता को देखना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी इसे ‘अच्छा फैसला’ बताते हुए कहा , ‘‘हम इसका स्वागत करते हैं। यह लैंगिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में आगे की ओर बढ़ते हुए उठाया गया कदम है। यह महिलाओं के लिए अच्छा है।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार जल्दी ही इसपर एक कानून लाएगी, तो उन्होंने कहा कि सरकार इसपर कानून बनाने पर विचार करेगी।

भाजपा के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी इसका स्वागत करते हुए कहा कि इसने सुधार लाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

स्वामी ने ट्विटर पर कहा, ‘‘प्रधान न्यायाधीश ने एक समझदार फैसला दिया है। उन्होंने तीन तलाक पर छह माह के लिए रोक लगाई है और संसद से कहा है कि वह इसकी खामियों को हटाए और कानून लेकर आए।’’ स्वामी ने कहा कि इससे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच नजदीकी आएगी और यह मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा दिन है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम खुश हैं कि हिंदू और मुस्लिम दोनों ही महिलाएं सुधार के लिए एकसाथ खड़ी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ा दिन है। उनके साहस और निर्भीकता को सलाम। वे असल सुधार के लिए खड़ी रही हैं और हमें उन्हें सलाम करना चाहिए और उनके साथ खड़े होना चाहिए।’’ भाजपा के प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील अमन सिन्हा ने कहा कि इस फैसले ने नरेंद्र मोदी सरकार के रूख को दोषमुक्त कर दिया है।

सिन्हा ने कहा कि पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ की ओर से मुस्लिमों के बीच तीन तलाक की प्रथा को ‘असंवैधानिक’ घोषित किए जाने से मुस्लिम महिलाओं को एक सम्मानित जीवन जीने का अधिकार मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने भारत सरकार के इस रूख को बरकरार रखा है कि तीन तलाक असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है।’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण का हवाला देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने तीन तलाक की प्रतिगामी प्रथा के कारण महिलाओं की दुखदायी स्थिति के मुद्दे को उठाया था और आज इसे असंवैधानिक ठहरा दिया गया है।’’ सिन्हा ने कहा, ‘‘तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार का रूख दोषमुक्त हो गया है। यह मुस्लिम महिलाओं को सम्मान एवं गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देगा।’’ उच्चतम न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुस्लिमों में तीन तलाक की प्रथा को ‘अमान्य’, ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ घोषित कर दिया।

 

85 साल बाद रचा इतिहास, श्रीलंका पस्त, 3-0 से भारत सीरीज जीता, विराट ने लहराया तिरंगा

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श्रीलंका के दौरे पर गई भारतीय क्रिकेट टीम ने वहां कैंडी में भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया। टीम इंडिया ने यहां तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया। इस खास मौके पर टीम के प्रमुख कोच रवि शास्त्री सहित भारतीय टीम के सभी खिलाड़ी और सपोर्टिंग स्टाफ मौजूद रहे। कप्तान विराट कोहली ने झंडोत्तोलन किया। दो साल पहले विराट कोहली की कप्तानी में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में भारत की हार से शुरुआत हुई थी।

12 से 15 अगस्त 2015 तक गॉल में खेले गए टेस्ट में श्रीलंका ने भारत को टेस्ट मैच के तीसरे ही दिन 63 रनों से हरा दिया था। लेकिन इस बार टीम इंडिया ने न सिर्फ बदला लिया, बल्कि सीरीज में उसका 3-0 से सफाया भी किया। इस कारण से वहां पर इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाना टीम इंडिया के लिए कुछ खास था।

कैंडी में टीम इंडिया के इस जश्न का वीडियो बीसीसीआई ने जारी किया है। बीसीसीआई ने जो वीडियो अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया है उसमें कप्तान विराट कोहली तिरंगा फहराते नजर आ रहे हैं। तिरंगा फहराने के साथ ही राष्ट्रगान भी गाया गया। इस मौके पर टीम के सभी खिलाड़ी वहां मौजूद थे। एक दिन पहले ही विराट ब्रिगेड ने 85 साल में पहली बार विदेश में व्हाइटवॉश का भारतवासियों को तोहफ दिया था।पल्लेकले टेस्ट के तीसरे ही दिन टीम इंडिया श्रीलंका पर पारी और 72 रनों से जीत के साथ ही सीरीज में 3-0 से व्हाइटवॉश का कारनामा कर चुकी है।

 

 

तिहाड़ जेल में कैदियों को मिलेगा कला का प्रशिक्षण

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भारत में कैदियों की हालत काफी बदतर है। जेलों में न जाने कितने ऐसे कैदी हैं जो समुचित पैसों के आभाव में जेलों में सड़ रहे हैं। देश की सर्वोच्च अदालत ने भी कई बार जेलों में कैदियों की संख्या कम करने और उनकी हालत सुधारने से संबंधित अपने आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा, लेकिन निराशाजनक बात है कि विचाराधीन कैदियों और दोषियों के बुनियादी हक और मानवाधिकारों पर ध्यान नहीं दिया जाता। हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ी जेल तिहाड़ में कैदियों के लिए एक अच्छी पहल शुरू हो रह है जहां कैदियों को कला की शिक्षा दी जाएगी।

तिहाड़ जेल में जल्द ही दो स्थायी आर्ट गैलरी शुरू हो रही हैं। ललित कला अकादमी और तिहाड़ प्रशासन मिलकर इन गैलरी को चलाएंगे। इसके अलावा तिहाड़ जेल में आर्ट स्कूल भी शुरू हो रहा है, जिसमें कैदियों के लिए सालभर ललित कला अकादमी की ओर से वर्कशॉप होती रहेंगी। अकादमी से जुड़े कलाकार जेल परिसर आकर कैदियों को पेंटिंग करना सिखाएंगे। तिहाड़ समेत देश की कई जेलों में विचाराधीन और दोषी दोनों कैदियों के मौलिक अधिकार और मानवाधिकार का ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में तिहाड़ जेल की यह पहल काफी सराहनीय है।

इस पहल के तहत जेल में कैदियों में छिपे आर्ट के हुनर को निखारा जाएगा। ललित कला अकादमी के एडमिनिस्ट्रेटर सी. एस. कृष्णा शेट्टीने कहा, ‘गुस्से, लालच, जलन जैसी बुराइयों की चपेट में लोग क्राइम कर बैठते हैं। मुझे लगता है कि उनमें से कई अफसोस और पछतावे में परेशान रहते हैं। यहां आर्ट काम आ सकती है।’ उन्होंने कहा कि इससे कई कैदी यकीनन हुनरमंद भी होंगे और एक आर्ट स्कूल उन्हें बेहतर इंसान बनाने में मदद करेगा। इसी मकसद से हम यहां वर्कशॉप्स का सिलसिला शुरू कर रहे हैं। कैदियों का आर्टवर्कइसके बाद जेल प्रशासन प्रदर्शनी में रखेगा और बेच भी सकेगा।

आर्ट गैलरी की शुरुआत 19 से 25 अगस्त के बीच जेल में एक एग्जिबिशन से हो रही है, जिसमें ललित कला अकादमी की ओर से 20 मशहूर आर्टिस्ट तिहाड़ में करीब 80 कैदियों की एक वर्कशॉप लगाएंगे। ये कैदी सिर्फ तिहाड़ ही नहीं देश की अलग-अलग जेलों के कैदी होंगे। खासतौर पर उन्हें पूरी सिक्योरिटी के बीच लाया जाएगा और जेल में ही इनके रहने का इंतजाम किया जाएगा। इसके बाद कैदियों का बनाया गया आर्टवर्क 25 अगस्त से 1 सितंबर तक ललित कला अकादमी, मंडी हाउस में एक एग्जिबिशन का हिस्सा बनेगा।

तिहाड़ जेल के अंदर दो परमानेंट गैलरी भी खोली जाएंगी। कृष्णा कहते हैं, यहां हर तीन-चार महीने में ललित कला अकादमी में लगने वाली एग्जिबिशन पहुंचेगी ताकि कैदी बाहर के कलाकारों के भावों से भरे आर्टवर्क को देख सकें। कैदियों के लिए आर्ट फिल्म की भी बीच-बीच में स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। हमारे समाज में आम आदमी या साधारण अपराधी के लिए जेल का मतलब वह जगह होती है, जहां सजा के लिए शरीर को कष्ट भोगना पड़ता है। शायद इसीलिए अपराधी वहां जाना नहीं चाहता और आम इन्सान जाने के खयाल से भी डरता है, लेकिन मानव अधिकार के मुताबिक हर इंसान को जिंदगी के कुछ मूलभूत अधिकार तो मिलने ही चाहिए। ऐसे में तिहाड़ जेल का यह कदम काफी सकारात्मक है।