Thursday, October 1, 2026
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तस्वीरें ऐसी जिनमें रंगों को छुआ नहीं गया, फिर भी तपन साहा की तस्वीरें बोलती हैं

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वो तस्वीर ही क्या जिसमें रंग न हो ! अच्छा कभी आपने कल्पना की है कि बगैर रंगों का इस्तेमाल किए भी तस्वीर बन सकती है और वह रंगों से भी भरी हो। यकीन नहीं होता मगर ये मुमकिन है और इसे मुमकिन किया है कोलाज चित्रकार तपन साहा ने।

हुगली में बंडेल के गान्धीनगर से कोलकाता गए। इस कला की बारीकियों को समझा। समझा कि किस तरह अखबारों, सिनेमा के पोस्टरों और पत्रिकाओं की कतरनों से एक तस्वीर जीवंत हो सकती है। तपन की कला से प्रभावित होकर प्रख्यात चित्रकार रामानन्द बंद्योपाध्याय ने उनका उत्साह बढ़ाया।

तब 90 का दशक था और तपन का कलात्मक सफर टेराकोटा के जेवर बनाने से शुरू हुआ। यह आसान नहीं था, मिट्टी को ढोकर लाना, उसे गूँथना, कलात्मक जेवर तैयार करना और फिर उसे बाजार तक पहुँचाना मगर तपन ने हार नहीं मानी।

मेहनत का फल मिला और तपन की कला मशहूर हो चली। 90 के दशक के अंतिम वर्षों में रंगीन कागज, सड़कों पर पड़े फिल्मों के पोस्टर और इन सारे पोस्टरों से बनने लगी खूबसूरत तस्वीरें, खूबसूरत चेहरे….उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, सत्यजीत राय, लता मंगेशकर, सुचित्रा सेन, रामकिंकर बेज, अमर्त्य सेन, से लेकर मनोरम प्राकृतिक दृश्य।

हर बार तपन ने प्रमाणित किया तस्वीरों में रंग का इस्तेमाल नहीं किया गया मगर इन तस्वीरों में बगैर इस्तेमाल किए ही कला के अनूठे रंग थे। हाल में इन तपन ने अपने सँग्रह की 50 तस्वीरों को लेकर एक तीन दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की। प्रदर्शनी का उद्घाटन मनसिज मजूमदार ने किया। प्रधान अतिथि के रूप में प्रसिद्ध चित्रकार वसीम कपूर उपस्थित थे।

 

 

 

 

 

भारत के 45वें प्रधान न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा

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नयी दिल्ली : न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने आज भारत के 45वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ग्रहण की। वह उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 16 दिसंबर को हुए सामूहिक बलात्कार मामले में चार दोषियों को मौत की सजा की पुष्टि की थी और सिनेमा हॉलों में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने का आदेश पारित किया था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में एक सादे समारोह में न्यायमूर्ति मिश्रा को पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति मिश्रा ने ईश्वर के नाम शपथ अंग्रेजी में ली।

न्यायमूर्ति जे एस खेहर के कल सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति मिश्रा (64) ने यह पद संभाला है।

न्यायमूर्ति मिश्रा दो अक्तूबर 2018 तक इस पद पर अपनी सेवाएं देंगे।

स्थापित परिपाटी के अनुसार न्यायमूर्ति खेहर ने पिछले महीने मिश्रा को देश का आगामी प्रधान न्यायाधीश नामित किया था।

वह पटना उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। अक्तूबर 2011 में वह शीर्ष अदालत में आ गए थे।

वर्ष 1977 में वकालत शुरू करने वाले न्यायमूर्ति मिश्रा ने उड़ीसा उच्च न्यायालय में संवैधानिक, दीवानी, फौजदारी, राजस्व, सेवा और बिक्री कर मामलों में प्रैक्टिस शुरू की।

उन्हें 17 जनवरी, 1996 को उड़ीसा उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति मिली। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भी सेवाएं दी। वह 19 दिसंबर 1997 में स्थायी न्यायाधीश बने।

न्यायमूर्ति मिश्रा वर्तमान में उस पीठ की अध्यक्षता कर रहे हैं जो कावेरी तथा कृष्णा नदी जल विवाद, बीसीसीआई सुधार और सहारा मामले समेत कई अन्य मामलों की सुनवाई कर रही है। उनकी ही अध्यक्षता में एक पीठ ने देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने का आदेश दिया था।

वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने 16 दिसंबर 2012 सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी।

न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति पीसी पंत ने मई माह में मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अभिव्यक्ति के अधिकार का यह मतलब नहीं है कि कोई भी किसी की भी मानहानि कर सकता है। इस अपराध में दो वर्ष के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

शपथ ग्रहण समारोह में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद थे।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी इस समारोह में शामिल हुए।

 

बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच में दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जाता : अध्ययन

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नयी दिल्ली : एक अध्ययन में दावा किया गया है कि बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं की जाती है। अध्ययन में इस प्रकार की चिकित्सा जांच करने के लिये स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने की मांग की गयी है।

यह अध्ययन कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की सहायता से गैर सरकारी संगठन ‘पार्टनर्स फॉर लॉ इन डेवलपमेंट’ ने किया है।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि कुछ बलात्कार पीड़िताओं को प्राथमिकी दर्ज कराने में पुलिस के हाथों उत्पीड़न और अवरोध का अनुभव भी करना पड़ा।
अध्ययन के मुताबिक प्राथिमिकी की प्रति तुरंत उपलब्ध नहीं करायी जाती है और अक्सर पीड़िताओं को इसकी प्रति हासिल करने के लिये पुलिस का चक्कर लगाना पड़ता है। हालांकि बाद में प्राथिमिकी की एक प्रति पीड़ितों को भेज दी जाती है।
अध्ययन में कहा गया है कि ये स्वास्थ्य जांच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों में अनुरूप नहीं की जाती हैं।
इसमें कहा गया है कि औपचारिक तौर पर बलात्कार पीड़िताओं से स्वास्थ्य जांच की सहमति नहीं ली जाती है और अक्सर ही इसके लिये बाद में उनके हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान ले लिए जाते हैं।
अध्ययन रिपोर्ट में बलात्कार पीड़िता के केवल उन्हीं कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिये भेजने की अनुशंसा की गयी है, जोकि उस अपराध से जुड़े हों।
इसके अलावा बलात्कार पीड़िता अथवा उसके गवाह एवं उसके रिश्तेदारों को सुरक्षा प्रदान करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
मुकदमे के दौरान अदालत में लगे कैमरा के माध्यम सेअभियोजन पक्ष को अदालत में आरोपी की धमकी से बचाया जाता है। रिपोर्ट में दिल्ली में चार त्वरित अदालतों में चल रहे 16 मामले को शामिल किया गया था। अध्ययन में जिन मामलों को शामिल किया गया है, वे परिचितों द्वारा बलात्कार से संबंधित हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत और दुनिया भर में होने वाले बलात्कार के अधिकतर मामले इसी श्रेणी में आते हैं।

 

बकाया भुगतान करें अन्यथा दूसरों के हवाले करें कारोबार: जेटली

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नयी दिल्ली :  केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकों का कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पाने वाली निजी कंपनियों के मालिकों से कहा है कि वह अपना बकाया चुकायें या फिर कारोबार छोड़कर उसका नियंत्रण किसी दूसरे के हवाले कर दें।

भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के तहत हाल ही में ऐसी 12 बड़ी कर्जदार कंपनियों के खिलाफ दिवाला कारवाई शुरू करने का बैंकों को निर्देश दिया है। इन कंपनियों में दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। यह राशि बैंकों के कुल फंसे कर्ज का एक चौथाई के करीब है।

बैंकों से कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पा रहे कुछ और कर्जदारों के खिलाफ भी कारवाई को अधिसूचित किया जा रहा है।

जेटली ने कहा कि सरकार बैंकों को और पूंजी उपलब्ध कराने के लिये तैयार है लेकिन फंसे कर्ज का समाधान सरकार के लिये बड़ी प्राथमिकता है।

वित्त मंत्री ने यहां इकोनोमिस्ट सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा, ‘‘दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के जरिये, मैं समझता हूं कि देश में पहली बार फंसे कर्ज के मामले में सक्रिय कारवाई की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज का समाधान करने में समय लगेगा। ‘‘आप इस मामले में एक झटके में सर्जिकल कारवाई नहीं कर सकते हैं।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने बैंकों को पहले ही 70,000 करोड़ रुपये तक पूंजी उपलब्ध करा दी है और उन्हें और पूंजी देने के लिये भी तैयार है। कुछ बैंक बाजार से भी पूंजी जुटा सकते हैं। ‘‘हम बैंकिंग क्षेत्र में एकीकरण की कारवाई आगे बढ़ाने के लिये भी सक्रियता से काम कर रहे हैं। हमें ज्यादा बैंक नहीं चाहिये, हमें कम लेकिन मजबूत बैंक चाहिये।’’ केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह ही देश के सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों के बीच विलय प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया ताकि इन बैंकों की कार्यक्षमता और उनमें संचालन को बेहतर बनाया जा सके।

ध्यानचन्द के नाम पर होगा सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण

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लखनऊ, 30 अगस्त (भाषा ) उत्तर प्रदेश के सैफई स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण ‘हॉकी के जादूगर’ मेजर ध्यानचन्द के नाम पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने कल ध्यानचन्द की जयन्ती ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘हॉकी के जादूगर’ को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचन्द ने उत्कृष्ट खेल से पूरी दुनिया में देश को पहचान दिलायी है । उन्होंने एलान किया कि सैफई स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण मेजर ध्यानचन्द के नाम पर किया जाएगा।

योगी ने कहा कि केन्द्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार भी ओलम्पिक खेलों में प्रदेश के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को छह करोड़, रजत पदक विजेता खिलाड़ी को चार करोड़ तथा कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी को दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि देगी।

इसी प्रकार, एशियाई एवं राष्ट्रमण्डल खेलों में भी केन्द्र सरकार की पुरस्कार राशि की तर्ज पर ही प्रदेश के पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 14 खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार एवं रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार तथा आठ अन्य खिलाड़ियों को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उम्दा प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया।

योगी ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनको उचित अवसर मुहैया कराये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए वर्तमान राज्य सरकार खेल के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का काम कर रही है।

 

टेनिस सुपरस्टार सेरेना विलियम्स ने बेटी को जन्म दिया

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मियामी : ( एएफपी ) टेनिस सुपरस्टार सेरेना विलियम्स ने बेटी को जन्म दिया जिससे उनके साथी खिलाड़ियों और प्रशंसकों की ओर से उन्हें बधाइयों का तांता लग गया है । सेरेना की बड़ी बहन वीनस जब अमेरिकी ओपन तीसरे दौर के मैच के लिये कोर्ट पर आई तो कहा कि वह बहुत उत्साहित है । उसने कहा ,‘‘ मैं टेनिस के बारे में सवालों का जवाब दूंगी ।’’ स्पेन के रफेल नडाल ने ट्विटर पर लिखा ,‘‘ बधाई हो सेरेना । इस खुशी के लिये ।’’ अमेरिका की महान टेनिस खिलाड़ी क्रिस एवर्ट ने कहा ,‘‘ मैं उसके लिये बहुत खुश हूं । वह अपनी बेटी के लिये आदर्श रोलमाडल होगी।

 

आतिश

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धीरज पांडेय

दोनों एक दूसरे के आग़ोश में थे, ओम् की साँसे जैसे ठहर गयी थीं सिया के होंठों पर । खो दिया था ख़ुद को एक दूसरे में । जैसे उनके होंठों पर रुकी हुई प्यास, सदियों से बंजर में रही हो। थोड़ी देर बाद अलग हुए । साँसें नॉर्मल हो रही थीं और बेक़ाबू पर क़ाबू । शर्म से सिया की आँखें झुक गयी थीं । ओम् सिया को घर छोड़ कर अपने घर चला गया । ऑफ़िस में दिन भर बात करने के बहाने ढूंढ़ता रहता। एक दिन इसी चक्कर में बॉस ने ओम् की टेबल ही अलग करवा दी। पर इश्क़ तो अपना रास्ता बना चुका था। दोनों बेपरवाह जी रहे थे एक साथ। जल्दी आकर ऑफ़िस के नीचे मिलना और रात को सिया के घर उसे ड्रॉप करना, ओम् की ज़िंदगी का हिस्सा हो गया था । सिया के साथ बिताए हर एक लम्हे को वो एक लाख के बराबर जीता था । उसे लाइफ से और कुछ नहीं चाहिए था । सिया ही उसके सब कुछ थी।

कुछ समय के बाद ओम् को सिया से एक अलग तरह का इग्नॉरेंस फील हुआ। सिया फ़ोन पर अक्सर किसी से बात करती रहती और पूछने पर भड़क जाती । सिया को खोने के डर से कभी खुल के नहीं पूछता था । एक दिन दोनों मूवी देखने गए। मूवी स्टार्ट होने में थोड़ा समय बचा हुआ था कि सिया अपना फ़ोन ओम् को देकर वॉशरूम चली गयी । सिया का फ़ोन बजा एक मेसैज के साथ।
– एंड व्हाट अबाउट हनीमून ?????

ओम् फट गया ग़ुस्से से । सिया के बाहर निकलते ही बरस पड़ा….
– हाँ मैं कर रही हूँ शादी, क्यूँकि मैं करना चाहती हूँ । वो तुमसे पाँच गुना ज़्यादा कमाता है
और हमारा रिश्ता?

सी….. तुम कुछ ज़्यादा ही सीरियस हो गए हो

और तड़ाक से एक तमाचे के साथ सब कुछ साइलेंट  हो गया।

रूम में आते ही किसी हारे हुए खिलाड़ी की तरह गिर गया । एक झटके में उसके शरीर से आत्मा निकल गयी ।
समय ने करवट बदली धीरे – धीरे अपने आप को सम्हाल लिया ओम् ने । अब बॉस को उसका काम अच्छा लगने लगा था पर ओम् को अब ग़ालिब अच्छा लगा था। कुछ न कुछ खरोंचता रोज़ रात को।
एक दिन बॉस ने कहा – ओम् तुम्हारा प्रमोशन  हो गया है
ओम् – सर आज मैं ये नौकरी छोड़ रहा हूँ ।………और पाँच साल बाद –

सिया एक कवि सम्मेलन को होस्ट कर रही थी कि तभी ऑर्गनाइजर ने पीछे से आकर कहा “आतिश ” साहब आ गए हैं पहले उन्हें इन्वाइट करो । ऑडियेंस उनका इंतज़ार कर रही है । सिया मजबूरन आतिश साहब का नाम लेकर नीचे बैठ गयी – तालियों की गड़गड़ाहट के बाद
अर्ज़ किया है –
“तेरे इश्क़ के चढ़ाव का उतार आ गया
इतना रोए कि हुनर पे निखार आ गया”
(सिया – ये ओम्……………)
उठ गयी ग़ुस्से में जाने के लिए कि अगला शेर –
“जो मेरी मुफ़लिसी पर कभी मुझे छोड़ गया था
आज मेरी शोहरत देख कर उसे बुखार आ गया…..”
अब दोनों की नज़रें मिल चुकी थीं और ऑडिएंस – जनाब एक बार फिर पढ़ दीजिए…..

(लेखक युवा कहानीकार और कवि हैं। पत्रकारिता भी कर चुके हैं। फिलहाल मुम्बई में हैं और एक प्रोडक्शन हाउस के लिए काम कर रहे हैं)

 

 

70 साल बाद देश को मिलीं पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

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नई दिल्ली : आजादी के 70 साल बाद निर्मला सीतारमण के रूप में देश को पहली पूर्णकालिक        महिला रक्षा मंत्री मिली हैं। रविवार को राष्ट्रपति भवन में कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद उन्हें ये जिम्मा सौंपा गया। सीतारमण ने कहा, “ये बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मुझे उम्मीदों पर खरा उतरना है।” इससे पहले 1975 और 1980 में प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी डिफेंस मंत्रालय संभाल चुकी हैं। 2019 लोकसभा चुनाव से 20 महीने पहले हुए कैबिनेट फेरबदल में पीयूष गोयल को रेलवे का जिम्मा सौंपा गया है। सुरेश प्रभु कॉमर्स और इंडस्ट्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। जेटली के पास अब वित्त  कॉरपोरेट अफेयर्स मन्त्रालय है।   कैबिनेट में 9 नए चेहरे शामिल गए गए। इनमें तीन चुनावी राज्यों के नेताओं  के अलावा पूर्व आईएएस तथा आईपीएस अधिकारी हैं। जेडीयू के सरकार में शामिल होने और बड़ा फेरबदल किए जाने की चर्चाएं थीं। लेकिन, इससे उलट ये बदलाव छोटा ही रहा।

मोदी कैबिनेट में फेरबदल
1) किसको, कौन सा मंत्रालय मिला?
रक्षा – निर्मला सीतारमण
रेलवे- पीयूष गोयल
क्रीड़ा तथा युुवा मामले –  राज्यवर्धन राठौर (स्वतंत्र प्रभार)
क्रीड़ा तथा युुवा मामले- विजय गोयल (राज्यमंत्री)
उर्जा  – आरके सिंह (स्वतंत्र प्रभार)
पर्यटन/इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी- अल्फाेन्स कन्ननथानम (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)
कौशल विकास मंत्रालय- धर्मेंद्र प्रधान
पेयजल तथा निकासी-   उमा भारती
जल संसाधन तथा गंगा संरक्षण – नितिन गडकरी
शहरी विकास – हरदीप पुरी (राज्यमंत्री)
खनन- नरेंद्र सिंह तोमर
संसदीय मामले- विजय गोयल (राज्यमंत्री)
स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण – अश्विनी कुमार चौबे (राज्यमंत्री)
स्किल डेवलपमेंट मंत्री- अनंत कुमार हेगड़े (स्वतंत्र प्रभार)
वाणिज्य तथा उद्योग- सुरेश प्रभु
2) फेरबदल क्यों?
4 P और न्यू इंडिया विजन
– मोदी ने नए नामों के चयन में 4 P को तरजीह दी, ताकि उनके न्यू इंडिया विजन पर काम हो।
पैशन: काम करने का जुनून
प्रोफिशिएंसी: काबिलियत
पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग: राजनीतिक समझ
प्रोफेशनल एक्युमेन: पेशेवर महारत
3) किनका प्रमोशन?
पीयूष गोयल (53), धर्मेंद्र प्रधान (48), निर्मला सीतारमण (58), मुख्तार अब्बास नकवी (59) को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। ये सभी पहले स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री थे।
4) नए चेहरे कौन?
विशेषज्ञ
– सत्यपाल सिंह (62): वे 34 साल IPS रहे हैं। मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे।
– अल्फाेन्स कन्ननथानम (64): वे 27 साल तक IAS रहे। केरल में बीजेपी का चेहरा।
– आरके सिंह (64): 38 साल तक IAS रहे। देश के गृह सचिव भी रह चुके हैं।
हरदीप सिंह पुरी (65): 39 साल तक IFS रहे। 2009-13 तक यूएन में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव रहे।
अनुभवी
अश्विनी कुमार चौबे (64), बिहार
शिव प्रताप शुक्ल (65), यूपी
डॉ. वीरेंद्र कुमार (63), मध्यप्रदेश
एनर्जेटिक
अनंत कुमार हेगड़े (49), कर्नाटक
गजेंद्र सिंह शेखावत (49), राजस्थान
5) फेरबदल के मायने?
एक्सपर्टाइज पर जोर:नौ नए चेहरों में चार पूर्व ब्यूरोक्रेट्स हैं। तीन चुनावी राज्यों से हैं।
कैबिनेट में कितनी जगह बाकी: कॉन्स्टिट्यूशन के मुताबिक, मंत्रिमंडल में मंत्रियों की लिमिट लोकसभा की कुल स्ट्रैंथ (545) से 15% ज्यादा नहीं हो सकती। ये स्ट्रैंथ 81 है। मौजूदा फेरबदल में 4 को प्रमोशन मिला, 9 नए मंत्री बने और 6 ने इस्तीफा दिया। अब कुल मंत्रियों की संख्या 76 है। यानी 5 और मंत्री बनाए जा सकते हैं।
फिर हो सकता है बदलाव: माना जा रहा था कि 2019 चुनाव से पहले ये आखिरी फेरबदल होगा। लेकिन, 5 और मंत्री बनाए जा सकते हैं। जेडीयू और एआईएडीएमके को इस बार सरकार में जगह नहीं मिली। संभव है कि चुनाव से पहले समीकरण साधने के लिए दोनों को कैबिनेट में हिस्सेदारी दी जाए।
6) फेरबदल पर क्या बोले मोदी?
– नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया- जिन लोगों ने आज शपथ ली है, उनका अनुभव और ज्ञान कैबिनेट की ताकत में इजाफा करेगा।
7) रेल मंत्री ने क्या संकेत दिए?
– शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सुरेश प्रभु ने संकेत दे दिए थे कि वे अब रेल मंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने ट्वीट कर प्रमोशन पाने वाले पीयूष गोयल, नकवी, प्रधान और सीतारमण को बधाई दी। इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया- रेलवे के 13 लाख इम्प्लॉइज का उनके प्यार और सहयोग के लिए शुक्रिया। ये खूबसूरत यादें जीवन भर मेरे साथ रहेंगी। आपको भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं।
8) शपथ ग्रहण का नजारा
– शपथ ग्रहण समारोह में मोदी के दाहिनी तरफ अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, थावरचंद गहलोत, कलराज मिश्र, अनंत कुमार और जेपी नड्डा बैठे थे। स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर साथ बैठे थे। उनकी पीछे की कतार में राज्यवर्धन सिंह राठौर, मनोज सिन्हा बैठे थे। एक अलग कतार में रामविलास पासवान, मेनका गांधी, रविशंकर प्रसाद, अशोक गजपति राजू, हरसिमरत कौर और चौधरी बीरेंद्र सिंह बैठे थे।
– शपथ लेने वाले मंत्रियों की पहली कतार में मुख्तार अब्बास, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान बैठे थे। इन्हें राज्यमंत्री से प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
9) अटक गए धर्मेंद्र प्रधान
– कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को बुलाया गया। प्रधान ने हिंदी में शपथ ली। जब उन्हें ‘प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संसूचित’ बोलना था तो वे अटक गए। कोविंद ने ये शब्द दोबारा पढ़े। इसके बाद प्रधान ने शपथ पूरी की। प्रधान अब तक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। उन्हें प्रमोट किया गया है। वे पेट्रोलियम मिनिस्टर हैं। गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी छोड़ने के लिए गिव अप स्कीम और गरीब महिलाओं को फ्री रसोई गैस कनेक्शन देने वाली ‘उज्ज्वला स्कीम’ की कामयाबी के बाद वे प्रमोट हुए हैं।
10) कितने मंत्रियों ने दिया था इस्तीफा?
कलराज मिश्र
बंडारू दत्तात्रेय
राजीव प्रताप रूडी
फग्गन सिंह कुलस्ते
संजीव कुमार बाल्यान
महेंद्र नाथ पांडेय

आप भेड़ नहीं इंसान हैं, अपनी सोच और जमीर को जिन्दा रखिए

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बच्चे इस देश का भविष्य हैं मगर जिस देश में बच्चों को जीने के लिए ऑक्सीजन न मिल रहा हो, उस देश का भविष्य क्या होने वाला है, सोचने वाली बात है। अगस्त महीने में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 250 बच्चों की मौत बेहतरी के सपनों को मारने वाला हादसा है। इस देश में हादसों के बाद हादसे हो रहे हैं मगर इन तमाम हादसों के पीछे कहीं न कहीं बगैर सोच के पीछे चल देने वाली सोच है। गोरखपुर में कमिशन पाने की सोच और ख्वाहिश ने लोगों को बेईमान बना दिया और हाल ही में खुद को ईश्वर बताने वाले गुरमीत राम रहीम की अंधभक्ति ने उसके अनुयायियों को हैवान बना दिया। इस हैवान की कहानियाँ इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं मगर ऐसे तो न जाने कितने धर्मगुरु शोषण कर रहे हैं और जाने कितनी बार हमारा विश्वास हिल जाता है। अनचाहा जबरन स्पर्श किसी दंश से ज्यादा भयावह होता है और जब आप किसी को गुरु या शिक्षक मानकर सिर झुकाते हैं और हद से ज्यादा किसी पर भरोसा करते हैं और वह आपको सिर्फ सेक्स के खिलौने की तरह इस्तेमाल करे तो यह अन्दर से तोड़कर रख देता है। शिक्षकों पर शोषण के आरोप लगते हैं और बाबाओं और धर्मगुरुओं के इस देश में पीड़ित को ही मुजरिम बनाकर शोषण की ओर धकेल दिया जाना आम बात है। ये कैसी अंधश्रद्धा है जो सही और गलत का फर्क नहीं जानती, एक बलात्कारी जिसे अदालत ने भी 15 साल की लम्बी कार्रवाई के बाद दोषी पाया, एक हत्यारा जिसने न जाने कितनों की हत्या करवा दी, अगर उसे पूजने वाले इस देश में हैं तो भूल जाइए कि हम आगे बढ़ने वाले हैं। जीवन का सबक सिखाने वाला गुरु ही होता है जो एक समाज तैयार करता है, यकीनन समाज में बुराई है तो यकीन भी है। हाल ही में इस देश की न्यायपालिका ने आम लोगों के इस यकीन को जिन्दा रखा। पहले एक बार में तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित किया, फिर निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना और इसके बाद राम रहीम को 20 साल की सजा मिलना इस बात का सबूत है कि इस देश में उम्मीदों को जिन्दा रखने के लिए जमीन बाकी है। इस तरह की घटनाओं ने एक बार फिर मजहब और सिसायत के रिश्ते को बेपर्दा कर दिया। पंचकुला में इतनी जानें जाना इस रिश्ते की हैवानियत को सामने रख दिया। बड़े शर्म की बात है कि जिन चीजों को विधायिका को बचाना था, जिनके खिलाफ सरकारों को कार्रवाई करनी थी, अब उसके लिए न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। इस देश की सरकारों को अब खुद को लेकर सोचना चाहिए मगर इससे भी जरूरी यह है कि बगैर विवेक के और बगैर किसी सोच के अंधभक्ति से इस देश की जनता दूर रहना सीखे क्योंकि गलत हर हाल में गलत है, अपराध हर हाल में अपराध है, फिर भले ही वह ईश्वर ही क्यों न करे। आपका जमीर आपकी गवाही खुद देगा, आप हर चीज से भाग सकते हैं मगर खुद से नहीं भाग सकते। आपको खुद को जवाब देना है इसलिए अपनी समझ और जमीर को जिन्दा रखिए क्योंकि बगैर सोच के आप इन्सान नहीं झुंड में चलने वाली भेड़ें हैं। आज मजहब और सियासत दोनों आपको भेड़ बनाए रखना चाहते हैं, यह आपको तय करना है कि आप भेड़ बनना पसन्द करते हैं या फिर एक आजाद और समझ वाली सोच के साथ समाज को दिशा देने की पहल करते हैं। बहरहाल इस महीने से ही देश भर में उत्सवों की शुरुआत होने जा रही है। हिन्दी दिवस भी मनाया जा रहा है, आप सभी को बहुत – बहुत अग्रिम शुभकामनाएँ। साथ देते रहिए….साथ चलकर हम बहुत कुछ बेहतर कर सकते हैं।

खुद को इस लायक बनाइए कि दूसरों के काम आ सकें

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शिक्षा प्रगति का मार्ग खोलती है और शिक्षा ही समाज में बदलाव ला सकती है। दरअसल मानसिकता को बदलने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है और इसके प्रति जागरुकता लाना आसान काम नहीं है। शिक्षा के प्रसार के मामले में मुस्लिम समुदाय की स्थिति अच्छी नहीं है और इस समाज के पिछड़े वर्ग में बहुत सी समस्याओं की जड़ अशिक्षा में है। ऐसे में कोई महिला पिछले 40 साल से लगातार शिक्षा की रोशनी जरूरतमंद बच्चों तक ले जाने के  लिए काम करती रहे तो यह सफर आसान तो कतई नहीं है मगर रक्षंदा जबीन पिछले 40 साल से जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा का प्रसार करने की मुहिम में जुटी हैं। शिक्षा ही नहीं उनका जुनैद एडुकेशन फाउंडेशन बहुत सी सामाजिक बुराईयों के खिलाफ भी काम कर रहा है। अपराजिता की  मुलाकात इस बार रक्षंदा जबीन से, पेश हैं प्रमुख अंश –

प्र. आप क्या हमेशा से शिक्षिका बनना चाहती थीं?

उ. मुझे पढ़ाने का शौक बचपन से था। तब छोटे बच्चों को पढ़ाया करती थी। उस समय हम पार्क सर्कस इलाके में रहा करते थे। मुझे इन बच्चों से हमदर्दी थी और अच्छी बात यह थी कि परिवार ने भी तब मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया। मेरे वालिद जानते थे कि मुझे पढ़ाना अच्छा लगता था इसलिए उन्होंने मुझे रोका नहीं और बस सिलसिला शुरू हो गया।

प्र. किसी तरह की मुश्किलें तब आयीं?

उ. मुश्किलें तो थीं और बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं था क्योंकि आज से 40 साल पहले लोगों में जागरुकता नहीं थी। वे यह नहीं समझते थे कि पढ़ाई उनके लिए कितनी जरूरी है। ऐसे में मुझे समझाना प़ड़ता था. माहौल तैयार करना पड़ता था। शादी हुई तो पति ने भी इस नेक काम में मेरा पूरा साथ दिया। मुश्किलें तो अब भी हैं क्योंकि शिक्षा के लिहाज से मुस्लिम समाज आज भी बहुत पीछे है। माता – पिता आज भी अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। जाहिर सी बात है कि अब भी इस दिशा में बहुत काम करने की जरूरत है।

प्र. तब से लेकर आज तक क्या फर्क आप देखती हैं?

उ. लोग अब शिक्षा का महत्व समझ रहे हैं और आज के बच्चे भी सवाल करते हैं, समझना चाहते हैं। आज के माता – पिता भी अपने बच्चों को तालीम देना चाहते हैं। बच्चे अब सवाल करने से डरते नहीं हैं मगर लड़कियाँ अपनी तालीम को लेकर ज्यादा संजीदा हैं। अपने माता – पिता का सम्मान करती हैं और पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देती हैं।

प्र.  कौन सी ऐसी चीज है जिसने इस उम्र में भी आपको सक्रिय कर रखा है?

उ. बैठना मुझे पसन्द नहीं है। सालों से काम करती आ रही हूँ। कुछ न कुछ करती रहती हूँ। मेरी कोशिश रहती है कि जरूरतमंद बच्चों की मदद कर सकूँ। मैं इन बच्चों को शिक्षित बनाने और एक अच्छा भविष्य देने के मकसद से पढ़ाती हूँ और यही वजह है कि अब तक लगातार पढ़ाती चली आ रही हूँ। शिक्षा को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश में जुटी हूँ।

प्र. आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उ. शिक्षा हासिल करना का मकसद और मतलब महज डिग्री हासिल करना नहीं होता। कुछ ऐसा कीजिए जो दूसरों के काम आ सके। खुद को इस लायक बनाइए कि दूसरों के काम आ सकें।