Sunday, March 22, 2026
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तबला वादक जाकिर हुसैन की जिंदगी पर किताब

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नयी दिल्ली : ‘जाकिर हुसैन: ए लाइफ फॉर म्युजि़क, इन कॉनवर्सेशन विद नसरीन मुन्नी कबीर’ नाम की पुस्तक गहन साक्षात्कारों के माध्यम से तबला वादक की जिंदगी को लिपिबद्ध करेगी।

यह किताब हार्पर कोलिंग्स पब्लिशर्स द्वारा जनवरी 2018 में भारत में विमोचित की जाएगी। यह किताब हुसैन की जिंदगी और करियर का विस्तृत दृश्य देगी।
पुस्तक में हुसैन के शुरूआती दिनों का भी जिक्र है जब उन्होंने अपने पिता उस्ताद अल्लाराखा से प्रशिक्षण लिया । वहीं इसमें पंडित रवि शंकर और उस्ताद अली अकबर खान के साथ एक संगीतकार के तौर पर भी उनके सफर को बताया गया है।
नसरीन मुन्नी कबीर द्वारा लिखी गई पुस्तक पाठकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत और वैश्विक संगीतकार की सोच को लेकर व्यक्तिगत नजरिये को पेश करेगी।
पुस्तक के बारे में बात करते हुए हुसैन ने कहा कि उनकी जिंदगी के अनदेखे हिस्सों को खोजना एक आकषर्क खुलासा है।

 

गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान रखें कुछ सावधानियां 

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एक महिला के लिए गर्भावस्था सबसे मुश्किल समय है, खासकर अगर वह पहली बार गर्भवती है। फार्मास्यूटिकल स्टोर में उपलब्ध परीक्षण किट का उपयोग करके घर पर गर्भावस्था परीक्षण करना ठीक है, लेकिन फिर भी आपको डॉक्टर से मिलने और गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए सलाह दी जाती है। यह सुनिश्चित करें कि आपमें दिखाई देने वाले लक्षण झूठे न हो!

क्या आप जानना चाहती हैं कि गर्भावस्था के पहले महीने में क्या सावधानियां ली जाएं? एक सरल सूची बनाएं और इसे किसी ऐसी जगह पर रखें जहां आप इसे अक्सर देख सके।

निम्नलिखित को मोटे अक्षरों में लिखें और इसे जितना संभव हो उतना ही पालन करें, पैदल चलें, कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं, ताजे फल और सब्जियां खाएं, सकारात्मक रहें।

  1. नियमित व्यायाम: नियमित व्यायाम बहुत महत्वपूर्ण है जो आपको थकाए नहीं बल्कि आपके सिस्टम को सामान्य रूप से काम करना में मदद करें। इसलिए, चलना काफी मददगार माना जाता हैए बस इस बात का ध्यान रखें कि यह आपको तनाव न दें। आजकल होने वाली माताओं के लिए विशेष योग कक्षाएं आयोजित की जाती हैं प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ के साथ चर्चा करें और उसके बाद इनका विकल्प चुनें। हमेशा अपने प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ को आपकी गतिविधियों के बारे में सूचित करें, जो आपको बेहतर मार्गदर्शन करने में उसे मदद कर सकता है।
  2. फाइबर रिच फूड्स: फाइबर समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे फल कब्ज की समस्याओं को कम करने में आपकी मदद करेंगे और अापके पेट के कार्यों को नियमित कर सकते हैं। इस समय संतुलित आहार बहुत महत्वपूर्ण है। अधिक खाने की कोशिश न करें, यहां तक कि अपने सबसे पसंदीदा भोजन को भी सही मात्रा में ही लिया जाना चाहिए। स्ट्रॉबेरी जैसे फल फोलिक एसिड में समृद्ध होते हैं, और उनका सेवन करना उचित है। आप अपने आहार में स्प्राउट्स, अनाज, पालक और फलियां भी ले सकते हैं गर्भावस्था के दौरान दिन में कई बार थोड़ा- थोड़ा भोजन करना हमेशा बेहतर होता है चूंकि यह आपको भरपेट महसूस करने, फिट और स्वस्थ रहने में मदद करेगा।
  3. स्वस्थ मन: मानें या न मानें, मां की भावनाओं और मनोदशा का बच्चे की भावनात्मक परवरिश पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए, अपने आप को शांत, सकारात्मक और खुश रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इस तरह की सकारात्मकता को अपने भीतर लाने के लिए ध्यान सबसे अच्छा तरीका है। आप किसी भी प्रकार के मेडिटेशन कर सकती हैं और इसे कम से कम एक घंटे के लिए दैनिक आधार पर अभ्यास करने का प्रयास कर सकती हैं। क्या नहीं करना है? अब तक हमने जाना कि क्या करना चाहिए, और अब समय इस पर ध्यान देने का है कि गर्भधारण के पहले महीने में क्या नहीं करना चाहिए।
  4. डरें नहीं: क्या आपने बच्चे के लिए इतनी जल्दी योजना नहीं बनाई है? या क्या आप चिंतित हैं कि आपके बच्चे के पास कुछ असामान्यता है? ऐसे सभी विचार और भय एक होने वाली माँ के लिए आम हैं, लेकिन आपको इस तरह के विचार न करने का एकमात्र कारण याद रखना चाहिए कि ये आपके बच्चे को सीधे प्रभावित करेगे। यदि आप पहले से ही ध्यान और योग कक्षाएं शुरू कर चुकी हैं या समाधान के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श लें चुकी हैं तो डरना छोड़ दें।
  5. कॉफी से बचें : कैफीन को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है जो कि आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है . पहले महीने से ही कॉफी से बचने की कोशिश करें। कॉफी से एसिडिटी बढ़ जाती है और यह दिल में जलन कारण बनता है।
  6. जंक फ़ूड से बचें: जंक फूड वजन में वृद्धि करता है और चूंकि आप बच्चे के विकास के कारण स्वाभाविक रूप से आपका वजन बढेगा, तो अवांछित वसा आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। याद रखें कि गर्भावस्था के दौरान वज़न का बढ़ना रक्तचाप और मधुमेह से सीधे संबंधित है। हमेशा हाइड्रेटेड रहें। यकीनन आप IV के कारण अस्पताल में नहीं जाना चाहेंगी।
  7. तंग कपड़े और ऊँची एड़ी से बचें: आपके शरीर में परिवर्तन हो रहा है और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए श्वास लेने की जगह आवश्यक है। इसलिए कुछ समय के लिए सभी तंग फिटिंग वाले कपड़े एक तरफ रख दें। आरामदायक फ्लैट जूते पहनें। इस तरह आप अकस्मात ट्रिपिंग से भी बच जाएंगी और अापके पैरों में सही जगह दबाव भी पड़ेगा।
  8. नींद का समय बढ़ाएं : आपका शरीर कई भौतिक और हार्मोनल परिवर्तनों से गुजर रहा है। इन परिवर्तनों को बिना किसी समस्या के होने के लिए और आप पर इन बदलती परिस्थितियों का अचानक प्रभाव न होने के लिए, पर्याप्त नींद लें।
  9. खमीर संक्रमण: योनि कैंडिडिआसिस गर्भवती माताओं में बहुत आम संक्रमण है। यह एस्ट्रोजन के उच्च स्तर और योनि में ग्लाइकोजन स्राव की मात्रा में वृद्धि के कारण होता है। योनि को स्वच्छ बनाए रखना और चिकित्सक के परामर्श के अनुसार प्रोबायोटिक्स जैसे लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलसलेना उचित होगा। मातृत्व में पहला महीना पहला कदम है।

 

केरल की नई मुख्य सचिव बनेंगी नलिनी नेट्टो

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तिरवनंतपुरम: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नलिनी नेट्टो केरल की नई मुख्य सचिव होंगी। वह एसएम विजयनाद की जगह लेंगी जो इस महीने की अंत में सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि नेट्टो की नियुक्ति का फैसला मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। वर्तमान में नेट्टो अतिरिक्त मुख्य सचिव :गृह: और मुख्यमंत्री की सचिव हैं।

मंत्रिमंडल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव :पीडब्ल्यूडी: सुब्रत विश्वास को नया अतिरिक्त मुख्य सचिव :गृह: बनाने को मंजूरी दे दी है।

योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वीएस सेंथिल मुख्यमंत्री के सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।

1981 बैच की आईएएस अधिकारी नेट्टो राज्य पर्यटन निदेशक, कर विभाग, सिंचाई विभाग और परिवहन विभाग में सचिव रह चुकी है और इसके अलावा और भी कई पद संभाल चुकी हैं।

वह राज्य की पहली मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी रह चुकी हैं। मंत्रिमंडल ने केरल ज्यूडिशियल ऐकेडमी में 53 नए पदों के सृजन का भी फैसला लिया। विज्ञप्ति के मुताबिक राज्य की भारतीय रिजर्व बटालियन कमांडो विंग में 210 कमांडो पद सृजन का भी फैसला लिया गया।

 

किसानों की आत्महत्या गंभीर मामला, 4 हफ्ते में बताएं कार्ययोजना : सुप्रीम कोर्ट

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किसानों की आत्महत्या को ‘बेहद गंभीर मामला’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इसे रोकने के लिये कार्ययोजना बनाने को कहा है। शीर्ष अदालत ने सरकार को इसके लिये चार हफ्ते का वक्त दिया है।

चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिंहा से कहा कि सरकार को ऐसी नीति लेकर आना चाहिए जिसमें किसानों की आत्महत्या के मूल कारण को दुरुस्त किया जा सके।

पीठ ने कहा, ‘यह बेहद गंभीर मामला है। केंद्र सरकार को रोडमैप तैयार करना होगा। केंद्र यह बताए कि किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए राज्यों को क्या कदम उठाने चाहिए।’

पीठ ने केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए क्योंकि कृषि राज्यों का विषय है। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिंहा ने कहा कि सरकार इसके लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। वह सीधे किसानों से फसल लेना, बीमा राशि बढ़ाने, ऋण देने और फसल की क्षति होने पर मुआवजे की रकम बढ़ाने सहित कई सकारात्मक कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार इसे लेकर विस्तृत योजना लाने जा रही है।

वहीं याचिकाकर्ता संगठन सिटीजंस रिर्सोस एंड एक्शन एंड इनिसिएटीव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि तीन हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार को सभी पहलुओं पर विचार कर कारगर नीति लाना चाहिए।

मालूम हो कि गत तीन मार्च को सुनवाई के लिए किसान  द्वारा की जाने वाली खुदकुशी के मामले में केंद्र सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खुदकुशी के मामले में मुआवजे की व्यवस्था करने की बजाए सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी किसान खुदकुशी जैसा बड़ा कदम उठाने पर मजबूर न हो। अदालत ने कहा था कि हमारा मानना है कि पीड़ित परिवार को मुआवजा देना समाधान नहीं है बल्कि खुदकुशी को रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए।

किसानों द्वारा आत्महत्या के मामले

2015 में 8,007 किसानों ने की आत्महत्या
– जान देने वाले किसानों में से 73 फीसदी दो एकड़ या इससे कम जमीन के मालिक थे।
– आत्महत्याओं के पीछे कर्ज और दिवालियापन को मुख्य वजह बताया गया।
– किसानों द्वारा आत्महत्या करने की सबसे ज्यादा घटनाएं महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में हुईं।
– वर्ष 2014 में 5,650 किसानों ने आत्महत्या की थी।
(आंकड़े : राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो)

कारण : भारतीय किसान बहुत हद तक मानसून पर निर्भर हैं। इसकी असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना आत्महत्याओं का मुख्य कारण माना जाता रहा है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, कर्ज का बोझ आदि समस्याओं की शुरुआत करती हैं। बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फंसकर भारत के विभिन्न हिस्सों के किसानों ने आत्महत्याएं की हैं।
वर्तमान में दिल्ली के जंतर-मंतर पर तमिलनाडु के कई जिलों से आए 100 से अधिक किसानों ने नर मुंड के साथ धरना-प्रदर्शन किया।
इनकी मांग है कि सरकार उनका कर्जा माफ करे और राज्य को एक विशेष राहत पैकेज देने की घोषणा करें।
तमिलनाडु में पिछले कुछ महीनों में लगभग 400 किसानों ने आत्महत्या की है।
बताया जा रहा है कि तमिलनाडु में पिछले 140 सालों में सबसे भयावह सूखा पड़ा है।

(साभार – अमर उजाला)

किशोरियों में यौवन प्रक्रिया को तेज कर सकता है यौन उत्पीड़न

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न्यूयॉर्क –  बचपन में यौन उत्पीड़न की शिकार हुई बच्चियां में अन्य के मुकाबले करीब एक साल पहले अपने यौनावस्था में प्रवेश कर जाती हैं।

अमेरिका के पेनसिल्वेनिया राजकीय विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने यौन उत्पीड़न की शिकार हुई 84 और 89 अन्य लड़कियों में यौवन प्रक्रिया शुरू होने का अध्ययन किया।
अध्ययनकर्ताओं ने इन सभी बच्चियों पर उनकी यौवनावस्था शुरू होने से पहले से लेकर उनकी पूर्णयौवना बनने तक प्रत्येक स्तर का अध्ययन किया।
उन्होंने पाया कि यौन उत्पीड़न का शिकार हुई बच्चियों में यौनावस्था के दौरान होने वाले परिवर्तन अन्य के मुकाबले बहुत पहले शुरू हो गये। जैसे उनके शरीर के गुप्तांगों पर अन्य के मुकाबले करीब एक साल पहले बाल उगने लगे, जबकि उनमें अन्यों से आठ महीने पहले ही स्तन का विकास होने लगा।
पेनसिल्वेनिया राजकीय विश्वविद्यालय की जेनी नोल ने कहा, ‘‘हालांकि लंबी जीवन अवधि में यह एक साल का समय बहुत छोटा लगे, इसने प्रत्येक रूप में परिपक्वता को बढ़ा दिया है और उससे अन्य चीजें भी तेज हो गयी हैं। जैसे व्यवहार गंभीर होना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें और जननांगों में कैंसर आदि का खतरा भी है।’’ इस अध्ययन का परिणाम जर्नल ऑफ एडोल्सेंट हेल्थ में प्रकाशित हुआ है।

 

उमेश यादव बोले- पत्‍नी की नजरों में काबिल बनना जरूरी था

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मुझे लगा कि सबकी नजरों में तो ठीक है, पहले अपनी पत्नी की नजरों में मैं ऐसा बनूं कि उसे लगे कि हां उसके पति में काबिलियत थी और उसने खुद को साबित किया। यहीं से मेरी गेंदबाजी में सुधार की शुरुआत हुई।

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अगर 2016-17 का सत्र शानदार रहा तो इसमें तेज गेंदबाज उमेश यादव का योगदान बहुत बड़ा है। भारत ने 2016-17 के होम सीजन में कुल 13 टेस्ट मैच खेले, चूंकी भारतीय पिचों से तेज गेंदबाजों को बहुत मदद नहीं मिलती फिर भी उमेश यादव ने अपनी गति, लाइन लेंथ और कंसिसटेंसी के दम पर बेहतरीन गेंदबाजी का नमूना पेश किया। क्रिकेट विशेषज्ञों ने उमेश यादव की गेंदबाजी को विश्व स्तरीय करार दिया, जो भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए बहुत ही कम सुनने को मिलता है। उमेश यादव ने 2016-17 के सत्र में 11 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 330.5 ओवर गेंदबाजी की और 40.5 की औसत से 25 विकेट चटकाए। इस दौरान उनका इकॉनमी रेट 3.03 का रहा। उमेश यादव ने अपनी गेंदबाजी में इस अप्रत्याशित सुधार के पीछे क्या राज है इसका खुलासा इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए इंटरव्यू में किया है। पेश है उमेश यादव की सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी…

उमेश यादव ने इंडियन एक्सप्रेस को दिय गए इंटरव्यू में बताया, ‘जब मैं टीम में आया था तो टीम से अंदर बाहर हुआ करता था। मैं कभी विकेट लेता था तो कभी नहीं ले पाता था। मुझे टेस्ट मैचों के लिए टीम में स्थान नहीं मिल रहा था, मुझे कई टेस्ट सीरीज से बाहर कर दिया गया, मैं टीम में अपना स्थान सुरक्षित नहीं कर पाया था। लेकिन, जब मेरी शादी हो गयी तब मेरे अंदर अपने प्रदर्शन को लेकर ज्यादा समझ विकसित हुई। शादी के बाद आप जो कुछ भी करते हैं तो आप अपने साथी के बारे में भी सोचते हैं और आपको पता रहता है कि कोई ऐसा भी है जो किसी भी परिस्थिति में आपके साथ देने के लिए तैयार रहता है। इस वजह से आप अपने भविष्य को लेकर और चौकन्ने हो जाते हैं और प्रैक्टिकल भी। मेरी शादी के बाद जब मेरी पत्नी ने शुरू के दो तीन साल तक मेरे प्रदर्शन में स्थिरता नहीं देखा तो उसने मुझे टोकना शुरू किया। उसने मुझसे कहा कि तुम अच्छा कर रहे हो और मेहनत भी, लेकिन तुम और मेहनत कर सकते हो और इससे भी अच्छा प्रदर्शन भी।’

उमेश यादव ने बताया, ‘मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि उमेश तुम्हारे पार काबिलियत है। मुझे लगता है तुम अपनी काबिलियत के साथ न्याय नहीं कर रहे हो। तुम इससे अच्छा कर सकते हो।।’ उमेश ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया था, जब उन्होंने ये सोच लिया था कि अब ट्रेनिंग छोड़कर घर बैठ जाएं। लेकिन उनकी पत्नी ने उनसे कहा, ‘कोई छुट्टी नहीं लेनी है। प्रैक्टिस पर जाना है तो जाना है।’ उमेश यादव ने बताया, ‘उसकी पहरेदारी में मैं बंक भी नहीं मार सकता था और ना ही प्रैक्टिस के लिए लेट हो सकता था। वह कहती थी, तुम ट्रेनिंग करके आओ और उसके बाद खाली समय में जो भी करना है करो, यही तुम्हारी जॉब है। यही तुम्हारा जूनून है, इसको हासिल करो।’ अपने किसी खास के मुंह से ऐसी बातें सुनकर, उसका साथ पाकर मुझे एक बार फिर अहसास हुआ कि क्रिकेट ही मेरी जिंदगी है। मुझे लगा कि सबकी नजरों में तो ठीक है, पहले अपनी पत्नी की नजरों में मैं ऐसा बनूं कि उसे लगे कि हां उसके पति में काबिलियत थी और उसने खुद को साबित किया। यहीं से मेरी गेंदबाजी में सुधार की शुरुआत हुई। उसके शब्द हमेशा के लिए मेरे दिमाग में बैठ चुके हैं।’

अपनी शादी के बारे में उमेश यादव ने बताया, ‘हम दोनों एक दूसरे से एक कॉमन फ्रेंड के जरिए मिले थे। दो साल तक हमने एक दूसरे को डेट किया और उसके बाद हमने फैसला किया कि अब शादी करते हैं। मुझे वो पसंद आ गयी, हम दोनों को एक दूसरे की आदतें अच्छी लगने लगीं। सही समय पर अच्छा जीवन साथी मिल जाए इससे बेहतर आप क्या सोच सकते हैं।’ उमेश यादव ने अपने खान पान के बारे में बताया, ‘मैं अभी भी घी खाता हूं। मैंने अपने डाइट में बहुत ज्यादा परिवर्तन नहीं किया है। मैं वो सारी चीजें खाता हूं जो एक स्पोर्ट्सपर्सन को खानी चाहिए। मैं मीठा खाने से परहेज करता हूं, बहुत ज्यादा तला भुना नहीं खाता हूं। बस शरीर को फिट रखने के लिए इतना काफी है। मैं दिन में एक बार घी जरूर खाता हूं। मैं शिव जी को मानता हूं तो उनका टैटू बनवा रखा है। मैं सिर्फ बल्लेबाज को आउट करने के लिए बाउंसर्स डालता हूं, यही मेरा काम है और इसे मैं करता हूं। मैदान से बाहर मेरा नेचर भगवान बुद्ध जैसा है, मैं शांत रहता हूं।

 

जब होठों पर पड़ने लगें झुर्रियाँ तो ऐसे करें उपचार

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होंठों की झुर्रियों को दूर करने के 10 घरेलू उपाय हमने कुछ घरेलू उपचार बताये हैं जो न केवल आपके होंठों में कसाव लाते हैं बल्कि होंठों से मृत त्वचा कोशिकाओं को निकालते हैं और आपके होंठों की सुन्दरता को बढ़ाते हैं।

होंठ तथा उसके आसपास के भागों पर आने वाली झुर्रियां भी बढ़ती उम्र के लक्षणों में से एक है। अन्य लक्षणों की तरह ही इनसे भी बचा नहीं जा सकता। हालाँकि, आप कुछ प्राकृतिक, घरेलू और आसानी से उपलब्ध पदार्थों से इसका उपचार कर सकती हैं। होंठों की झुर्रियां आपकी कल्पना से कई अधिक सामान्य हैं।

बहुत सी महिलायें इनसे छुटकारा पाने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा लेती हैं। परन्तु इससे फायदे की बजाय नुकसान अधिक होता है। यही कारण है कि इसके लिए घरेलू उपचारों का उपयोग करना अधिक अच्छा होता है ताकि आपके होंठ झुर्रियों से बचे रहें और सुंदर दिखें। इन घरेलू उपचारों का प्रतिदिन उपयोग करने से आपके होंठों की स्थिति सुधर सकती है।

  1. ऑलिव ऑइल (जैतून का तेल) ऑलिव ऑइल को झुर्रियों का उपचार माना जाता है जो होंठों पर आश्चर्यजनक तरीके से काम करता है। अपने होंठों को नमी युक्त बनाये रखने के लिए और झुर्रियों को दूर करने के लिए होंठों पर थोडा सा ऑलिव ऑइल लगायें। इसे भी पढ़ें: अपर लिप्स के लिए बेस्ट फेशियल एक्सरसाइज़
  2. दालचीनी पाउडर दालचीनी पाउडर को डिसटिल्ड वॉटर (आसुत जल) में मिलाएं और इस मिश्रण को होंठों पर लगायें। इसे 10 मिनिट तक लगा रहने दें और बाद में धो डालें। होंठों से झुर्रियों को हटाने के लिए इस पुराने घरेलू उपचार को अपनाएँ।
  3. एलो वेरा जैल एक चम्मच एलो वेरा जैल लें और उसे होंठों पर लगायें ताकि झुर्रियों और फाइन लाइन्स से बचा जा सके। होंठों के झुर्रियों को हटाने के लिए दिन में दो बार इस उपचार को अपनाएँ।
  4. विटामिन ई ऑइल विटामिन ई की कैप्सूल से निकलने वाले तेल को होंठों पर लगायें और इसे 15 मिनिट तक रखें तथा बाद में धो डालें। झुर्रियों से मुक्त होंठ पाने के लिए इस प्राकृतिक उपचार को प्रतिदिन अपनाएँ।
  5. ओटमील होंठों की झुर्रियों को दूर करने के लिए ओटमील एक अच्छा घरेलू उपचार है। ओटमील को अपने होंठों पर लगायें और धीरे धीरे मसाज करें। बाद में पानी से धो डालें।
  6. पपीते का गूदा होंठों से झुर्रियां हटाने के लिए पपीते का गूदा एक अन्य प्रभावी उपचार है। यह मृत त्वचा कोशिकाओं को निकालता है और होंठों पर आने वाली सिलवटों को भी दूर करता है। ताज़े पपीते के गूदे को 2-3 मिनिट तक होंठों पर लगाकर रखें और बाद में धो डालें।
  7. नारियल का तेल नारियल के तेल से होंठों की मालिश करें और फिर 15 मिनिट बाद इसे धो डालें। इससे होंठों की सिलवटें प्रभावी रूप से दूर होती हैं और फिर से आती भी नहीं हैं।
  8. अनानास का जूस होंठों पर अनानास का जूस लगाने से होंठों तथा इसके आसपास के भागों पर आने वाली झुर्रियों से बचा जा सकता है। इसे कुछ देर तक अपन होंठों पर लगा रहने दें और बाद में पानी से धो डालें।
  9. शुगर स्क्रब शक्कर को नीबू के रस में मिलाएं और इस मिश्रण से होंठों को रगड़ें। सप्ताह में कम से कम दो बार ऐसा करें ताकि होंठ अच्छी से एक्स्फोलियेट हों और झुर्रियां न आयें।
  10. गुलाब जल पूरे दिन होंठों पर गुलाब जल लगाती रहें ताकि आपके होंठ मोहक और झुर्रियों से मुक्त दिखें। विशेष रूप से सोने से पहले ऐसा करें क्योंकि यह उपचार तभी अच्छी तरह काम करता है जब इसे रात के समय लगाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश -25 साल से ज्यादा उम्र के छात्र भी दे सकेंगे नीट परीक्षा

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7 मई को नीट एग्जाम होना है और इसका आवेदन करने की आखिरी तारीख 1 मार्च थी। सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस की तैयारी कर रहे 25 साल से ज्यादा उम्र के छात्रों को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि अब 25 वर्ष से ज्यादा उम्र के उम्मीदवार भी एमबीबीएस कोर्सेज के एंट्रेंस एग्जाम (NEET) दे पाएंगे। सीबीएसई ने 25 साल की उम्र सीमा तय की थी। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा कि मेडिकल काउंसिल अॉफ इंडिया के प्रशासनिक निर्देश पर सीबीएसई द्वारा उम्र सीमा तय करने का फैसला गलत है और स्टूडेंट्स को एंट्रेंस एग्जाम में बैठने से रोका नहीं जाना चाहिए। कोर्ट ने सीबीएसई से कहा है कि वह एक विंडो खोले ताकि 5 अप्रैल तक वह स्टूडेंट्स अप्लाई कर सकें, जिनकी उम्र 25 साल से ज्यादा है। बता दें कि 7 मई को नीट एग्जाम होना है और इसका आवेदन करने की आखिरी तारीख 1 मार्च थी।

सुप्रीम कोर्ट में स्टूडेंट्स ने अर्जी दाखिल कर कहा था कि बोर्ड ने जो फैसला लिया है, वह गैरकानूनी और असंवैधानिक है क्योंकि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए कोई उम्र नियम तय नहीं थे। छात्रों की तरफ से सीनियर वकील अमरेंद्र शरण और इंदुमल होत्रा ने बेंच को बताया कि बोर्ड के इस फैसले के करीब 20 हजार स्टूडेंट्स प्रभावित हुए हैं और उन्होंने कोर्ट से इन स्टूडेंट्स को नीट परीक्षा में बैठने देने की गुहार लगाई।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शुरुआती तौर पर लगता है उम्र सीमा मेडिकल काउंसिल अॉफ इंडिया द्वारा जारी किए गए निर्देशों के आधार पर एक नोटिस के माध्यम से निर्धारित नहीं की जा सकती। इसलिए यह सही है कि सभी छात्रों को सीबीएसई के अॉनलाइन पोर्टल पर 5 अप्रैल से पहले आवेदन करने दिया जाए। इसके बाद भरे गए फॉर्म नहीं माने जाएंगे। कोर्ट ने सीबीएसई से कहा है कि वह प्रभावित स्टूडेंट्स के लिए खास इंतजाम करे और उन्हें जगह देने के लिए अतिरिक्त सेंटर मुहैया कराए।

इस साल प्रवेश परीक्षा के लिए 11.35 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछले साल के मुकाबले 41 प्रतिशत अधिक है. साल 2016 में 8.02 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किया था। नीट का आयोजन मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस परीक्षा के द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित किया जाता है। इस साल नीट का आयोजन आठ भाषाओं- हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, मराठी, तमिल और तेलुगू में होगा।

 

ऐ पुरुष, जरा सोचिए और बदलिए जरा सा खुद को

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रेखा श्रीवास्तव

हमारे समाज व परिवार में पुरुष का स्थान काफी महत्वपूर्ण है। एक बच्ची से लेकर वयस्क औरत तक कहीं न कहीं एक पुरुष पर ही निर्भर रहती है। समाज का सबड़े बड़ा मजबूत खंभा माना जाता है पुरुष वर्ग। महिलाओं की तरह पुरुष वर्ग में भी कुछ अच्छाइयाँ और कुछ खामियाँ हैं। अब तक महिलाओं की खामियों पर बहुत बार कलम चलायी गयी है, गोष्ठियाँ की गई हैं पर पुरुष ने न तो कभी अपने गिरेवान में झांका है और न खुद को सुधारने की कोशिश की है।

महिलाओं की तो जुर्रत ही नहीं हो सकती थी कि वह पुरुष को उंगली दिखाये और बताये कि तुम्हारे अंदर भी कमियाँ है इसलिए पुरुष वर्ग काफी आत्मविश्वास से हर कार्य करते हैं, चाहे वह समाज व परिवार के लिए सही हो या नहीं। उन्हें फैसला लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती है, पर एक महिला को अगर सामान्य सी बात  भी सोचनी हो तो कई बार फैसला करती हैं और फिर उसे जाँचने की कोशिश करती रहती है कि वह फैसला सही है या नहीं।

देखा गया है कि पुरुष वर्ग चाहे वह भाई हो या पिता, दोस्त हो या पति सभी एक बार फैसला लेते हैं और उसे ही सब को मानना पड़ता है। जिस तरह स्त्री की कुछ आदतें हैं, वैसे ही पुरुषों की ही कुछ आदतें हैं। पर उनकी आदतों से घर, परिवार या समाज को कोई फर्क पड़ता है या नहीं, इसकी चिंता नहीं होती। वह बचपन से ही अपने बाहरी जीवन को बहुत खास मानता रहा है। अपने बाहरी संपर्क यानी दुनिया को ही अपनी जिंदगी, अपनी कामयाबी का हिस्सा मानता आ रहा है।

ऐसा नहीं है कि सारे पुरुष ही ऐसे होते हैं, पर अधिकांशत:। उनका सोचना है कि जिंदगी में जो रिश्ता हमें भगवान या समाज ने दिया है, यानी घरेलू रिश्ते वो तो जिंदगी भर यूँ ही चलते रहेंगे। उन्हें बनाये रखने की कोई जरूरत नहीं है। उन रिश्तों को जीवित रखने के लिए कोशिश करना बेकार है। उल्टे एक भाई घर आकर अपनी बहन पर रौब झाड़ता है। पति तो पत्नी का सर्वेसवा होता है। उसका रक्षक माना जाता है।

माँ भी अपने बेटे से डरती ही है। वही पुरुष घर में हर समय गुस्सा, एंग्री यंग मैन के रूप में हाजिर रहता है। अनुशासन के लिए कुछ हद तक जरूरी भी है, लेकिन हर समय एक ही रवैया में रहने से परिवार में दूरी आ जाती है। उनकी सोच होती है कि  बाहरी लोगों से संपर्क बनाये रखेंगे तो हमें आमदनी के अलावा एक अच्छा और परिपक्व रिश्ता मिलेगा जो हमेशा काम आयेगा। यह बात कुछ हद तक सही भी है, लेकिन पूरी तरह नहीं।

हमें चाहे घरेलू हो या बाहरी दोनों ही रिश्तों की कद्र करनी चाहिए। ठीक है कि बाहरी रिश्ते से हमें आर्थिक मदद और सामाजिक पहचान मिल सकती है, पर पारिवारिक लोगों के साथ रिश्ते बनाये रखने से हमें सकून मिलता है। अगर पारिवारिक रिश्ते को बनाये रखने में आप कोशिश करते हैं, तो माँ-पिता, भाई-बहन या पत्नी-बच्चों को एक अपनापन लगता है पर कुछ पुरुष इसे पूरी तरह से नकार देते हैं। उनका मानना है कि घर के लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियाद सुविधाओं के अलावा कुछ नहीं चाहिए। वे बच्चों को पढ़ाने के लिए आर्थिक जरूरत पूरी करना ही अपना कर्तव्य समझते  हैं। उन्हें यह नहीं समझ आता कि बच्चों के साथ कुछ पल बैठ कर खेलने, उनको पढ़ाने से, उनके भविष्य के बारे में सोच-विचार करने से परिवार मजबूत होता है। परिजन के साथ समय बिताने और उनके साथ दोस्ताना रवैया अपनाने से रिश्ते परिपक्व होते हैं।

बढ़ते बच्चों के बारे में सोचना, उनकी शादी, उनका भविष्य जैसे विषयों पर परिवार के लोगों के साथ बैठकर बात-चीत करने में बहुत से सारे पुरुष हिचकिचाहते हैं। यहाँ तक कि रिटार्यडमेंट के बाद भी अपनी आदतनानुसार वे अपनी बाहरी जिंदगी को ही भरपूर जीना चाहते हैं। हाँ, पर जैसे ही घर के बारे में कोई फैसला की बात आती है, तो  उनका सोचना है कि मैं अकेले ही परिवार का नाविक हूँ, और  मैं अकेले ही फैसला ले सकता हूँ।

अत: जब मेरा मन करेगा, जब मुझे महसूस होगा कि उनके बारे में सोचूँ तभी सोचुँगा। पर परिवार ऐसे नहीं चलता। वैसे भी परिवारनुमा आँगन तो अब छोटा ही होता जा रहा है। संयुक्त परिवार से एकल परिवार तक पहुँच चुका है। अब तो एकल परिवार भी दम तोड़ता नजर आ रहा है। सिंगल मदर का जमाना आ गया है। पर फिर भी पुरुष वर्ग की नींद नहीं टूट रही है। अगर समय रहते पुरुष वर्ग नहीं चेता  तो हो सकता है कि जिस तरह महिलाएँ घर से निकलकर आर्थिक मजबूत हो गई है, वैसे घर के छोटे-बड़े फैसले करने का भी दायित्व ले लेगी तो इन पुरुषों का क्या होगा? समय रहते सम्भल जाएं पुरुष वर्ग नहीं तो ‘अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत!’ वाली कहावत फिट हो जायेगी।

(लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं)

वहीं करिए जो आप करना चाहती हैं

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मशहूर ज्वेलरी डिजाइनर राधिका जैन अपने शौक को बड़ी खूबसूरती के साथ अपना क्षेत्र बनाया है। जेवरों की दुनिया में हर बार वे नया प्रयोग करती हैं और हैरत में डालती रहती हैं। हाल ही में हाल ही में राधिका के सिग्नेचर मायरा के अंर्तगत पेश किए गए फाइबर ज्वेलरी कलेक्शन को लैक्मे फैशन वीक में भी खूब तारीफें मिली। मशहूर ज्वेलरी डिजाइनर राधिका जैन से अपराजिता ने मुलाकात की, पेश हैं प्रमुख अंश –

बहन के साथ काम करके सीखा

मैंने प्रोफेशनल तौर पर ज्वेलरी डिजाइनिंग का कोर्स नहीं किया। यह मेरा शौक था जो प्रोफेशन में बदला और इसके पीछे मेरी बहन से मिलने वाली प्रेरणा थी। उसे आभूषणों की दुनिया में काम करते देख मेरे अन्दर शौक जगा। मैं तब उसकी मदद किया करती थी और बाद में उसे देखकर खुद भी आभूषण बनाना सीख गयी। अपने जेवर कई दुकानों और ज्वेलरी बुटिक में उपलब्ध करवाना आरम्भ किया, काम चल निकला और सफर शुरू हो गया। मायरा नाम हम दो बहनों को लेकर बना है, मीरा और राधिका मगर मैंने इसे मीरा की जगह मायरा नाम दिया। हम सेमी प्रेशियस स्टोन पर सोने और चांदी की प्लेटिंग से जेवर बनाते हैं और अब तो फाइबर पर भी काम किया है।

सेमीप्रेशियस ज्वेलरी की माँग बढ़ ही रही है

आज ज्वेलरी उद्योग में भी काफी बदलाव आया है। प्रतियोगिता बढ़ गयी है। किफायती फैंसी जेवर तो पहले भी पसन्द किए जाते थे और अब स्टोन पर भी भारी काम पसन्द किया जा रहा है। लोग अब आभूषण खरीद रहे हैं। मेरे पास बजट के अनुसार जेवर उपलब्ध हैं। असली जेवर भी लोग अपना स्टेटस ध्यान में रखकर खरीद रहे हैं मगर आज तो जेवर जरूरत भी है और हर वक्त महँगे जेवर नहीं पहन सकते इसलिए सेमीप्रेशियस ज्वेलरी की माँग बढ़ ही रही है।

कारीगरों को पेशेवर प्रशिक्षण देने की जरूरत है

बंगाल में हस्तशिल्प बेहद अच्छा है और यहाँ के कारीगरों का काम हर जगह सराहा जाता है। उनको बस पेशेवर तरीके से प्रशिक्षण देने और उनके हुनर को तराशने की जरूरत है। व्यवसायिक तौर पर मार्केटिंग बहुत जरूरी होती है तो उस पर भी ध्यान देना होगा।

जल्दबाजी में डिजाइन नहीं करती

मैं अपने स्टोन खुद खरीदती हूँ और मेरे डिजाइन काफी अलग हैं। मैं जल्दबाजी में कभी डिजाइन नहीं करती। कच्चे माल और डिजाइन पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है और आपको हमेशा कुछ नया करना पड़ता है जैसे कि मैंने अपने कलेक्शन में हाथी दाँत की जगह फाइबर इस्तेमाल किया है। लोगों की पसन्द के अनुसार भी हम जेवर तैयार कर उनको देते हैं। फ्लोरल डिजाइन और रंगों पर खास तौर पर ध्यान देते हैं।

वहीं करिए जो आप करना चाहती हैं

मेरा मानना है कि आपको जिस काम से खुशी मिलती हो, वही करना चाहिए। लड़कियों के लिए अपने पैर पर खड़ा होना व आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। वहीं करिए जो आप करना चाहती हैं। हर काम अपने आप में महत्वपूर्ण है।