Friday, April 3, 2026
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छह साल बाद मकर संक्रांति पर बन रहा है यह योग

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छह साल बाद मकर संक्रांति  रविवार को आ रही है। इसी दिन सर्वार्थसिद्धि एवं रवि प्रदोष का योग भी बन रहा है। ऐसे में सूर्योपासना करने एवं दान-पुण्य का कई गुना फल मिलेगा।

सूर्य भी उत्तरायण में होगा। संक्रांति पर सर्वार्थसिद्धि योग दिनभर मान्य रहेगा, क्योंकि शनिवार मध्य रात से यह योग शुरू हो जाएगा और दोपहर 1:13 बजे तक रहेगा। सूर्योदय के समय यह योग रहने से दिनभर पूजा-खरीदी भी की जा सकेगी। यह पर्व चूंकि सूर्य की उपासना से जुड़ा है। संयोग से इसी दिन सूर्य का दिन रविवार भी है। ऐसे में यह पर्व खास हो जाएगा। प्रदोष होने से रवि प्रदोष का भी संयोग बनेगा।

पं. अक्षय शास्त्री के अनुसार इससे पहले 2012 में भी रविवार को ही मकर संक्रांति आई थी। एक वर्ष में सूर्य क्रम से  राशि में भ्रमण करते हैं। इस तरह 12 वर्ष में 12 राशियों का भ्रमण करते हैं। राशि बदलने की प्रक्रिया को ही संक्रांति कहा जाता है। सूर्य अभी धनु राशि में हैं। आगे धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो यह मकर संक्रांति कहलाएगी। यह परिवर्तन 14 जनवरी को होगा, इसलिए इस दिन पर्व मनाया जाएगा।

 

अब बारी है पुरुष विमर्श की

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रेखा श्रीवास्तव

जी हाँ। बहुत हो चुका स्त्री विमर्श! स्त्री विमर्श! स्त्री विमर्श! अब समय आ गया है पुरुष विमर्श का। इसमें कोई बुराई नहीं। हमें पुरुषों के बारे में बातें करनी चाहिए। उनके बारे में विमर्श करना चाहिए। निश्चित रूप से मानिये इसमें आप पुरुष का कोई अपमान नहीं बल्कि भला ही होगा। गौर कीजिए। राजा-रानी के समय को याद कीजिए। रानियों के लिए एक राजा होता था लेकिन राजा के लिए कई रानियाँ होती थी। मर्यादा पुरुषोत्तम के पिता यानी राजा दशरथ की भी तीन रानियाँ थीं। कहानी-किस्से में भी कई रानियों की भरमार है। पर कभी भी नहीं सुना होगा कि एक रानी के दो-तीन राजा रहा होंगे। जी हाँ, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। मैं यही आपको बताना चाहती हूँ। राजा-रानी की कहानी में भी नहीं, पौराणिक कथाओं में भी नहीं। कहीं नहीं आपको मिलेगा। द्रोपदी के जरूर पाँच पति थे, पर वो भी उसकी इच्छा से नहीं। हाँ, अगर किसी जगह किसी एक लड़की या औरत का एक से ज्यादा लड़कों से संबंध है, तो उसे चरित्रहीन कह दिया जाता है। मेरी समझ में नहीं आता कि यह कैसे हुआ? पुरुष तो चाहे कितनी शादियाँ कर सकता था। उसके कितने भी संबंध हो सकते हैं। इसमें तो चरित्र का मामला नहीं पर जब यह बात लड़कियों के लिए होता है, तो वह गलत है। पहले के समय में तो खुद बड़ी रानी राजा को खुशी –खुशी छोटी रानी के पास भेज देती थी। पर ऐसा लड़कियों के साथ नहीं हो सकता। छि: छि: यह तो सपने में भी नहीं सोचा सकता।  यह तो  पाप है। समाज यही कहने लगता है।

आज चारों  तरफ बलात्कार की खबरें आम बात हो गयी है। और इससे भी ज्यादा आम बात हो गई है ऐसी घटनाओं की संख्याओं का बढ़ना। और इसमें हम बड़े बेधड़क पुरुष को दोषी बता देते हैं। पर मैं कहना चाहती हूँ कि पुरुष तो दोषी है, नि:संदेह पर उससे ज्यादा दोषी है हमारा समाज जिसने पुरुष को पुरुष बनाया। पुरुष यानी जो कंट्रोल न कर सके। पुरुष यानी जिसे जब जो चाहिए, उसे तभी वह चाहिए। पुरुष यानी इच्छा पूरी करने का लाइसेंस। जन्म लेते ही हम उसे कहने लगते हैं कि इसका क्या यह तो लड़का है। घर में सबसे पहले इसका ख्याल रखो, क्योंकि यह लड़का है। स्कूल से एक साथ घर लौटने पर हम लड़के को ही पहले खाना खाने के लिए कहते हैं। महिला अगर दिन भर बाहर है, तो वह पेशाब रोके रख सकती है, लेकिन पुरुष वर्ग कहीं भी पेशाब के लिए खड़ा हो जाता है क्योंकि उसे बर्दाश्त करना नहीं सिखाया गया। उसे मालूम ही नहीं है कि बर्दाश्त क्या चीज है। छेड़ने का तो लाइसेंस भी पुरुषों को ही है इसलिए लड़के बचपन से उसी मानसिकता से बडे होते हैं। इसमें उनकी कोई गलती नहीं। यह तो हमारे समाज की गलती है। परिवार की गलती है लेकिन सजा तो सबको भुगतना पड़ता है। कुछ पुरुष वर्ग चेत जाते हैं, और अपने ज्ञान और बुद्धि से अपने परिवार और समाज की इस सोच को खुद पर हावी नहीं होने देते पर कुछ तो जैसे इस सब को लेकर ही बड़े होते हैं। उन्हें केवल हासिल करने आता है। प्रेम से नहीं तो जबरदस्ती। इस पाने के चक्कर में वह कितना जघन्य अपराध तक कर बैठते हैं, उन्हें पता ही नहीं चलता है। हम महिलाएं भी एक समय कई चीजों में पीछे थे, काफी पीछे थे। फिर हमने पढ़ा, अपनी पहचान बनाई। अपनी कमियों को दूर कर खुद को अच्छा बनाने की कोशिश की। वैसे ही अब बारी पुरुष की है। पुरुष वर्ग को भी अब जागना चाहिए। अपने अंदर सोयी हुई इंसानियत को जगा कर महिला, औरत और बच्ची को अपने हवस के शिकार से मुक्त करवाना चाहिए। लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी है अपने अंदर के सोये हुए इंसानियत को जगाना। हो सकता है कि कुछ प्रतिशत पुरुष इसकी कोशिश करते हो, उन्हें निश्चित ही कामयाबी मिलेगी। पर वैसे पुरुष जो आज तक अपनी इस कमी को समझ ही नहीं पाये, उन्हें अपनी इस कमजोरी को समझने में अपमानित नहीं समझना चाहिए, बल्कि पूर्ण विश्वास के साथ कमजोरी को ठीक करने में जुट जाना चाहिए। लड़कियों का जीवन तो पुरुष के विभिन्न रूपों से घिरा हुआ है। उसमें प्यार, दोस्ती, संवेदना होती है। बड़े होने पर अचानक पुरुष के इस रूप को देख अच्छा नहीं लगता। हम सोचने पर मजबूर होते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है। एक जगह पहुँचकर हम अलग क्यों हो जाते हैं। इंसान क्यों नहीं रह पाते हैं। अगर वास्तव में इस पहल पर कोशिश होगी, तो हमें एक अच्छा भारत देश मिलेगा, जहाँ सही मायने में महिला की पूजा होगी और वो भी पुरुष के हाथों।

26 जनवरी को रिलीज होगी फिल्म ‘पद्मावत’, साथ होगी पैडमैन

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संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के प्रदर्शन की तारीख को लेकर ताजा खबर यह आ रही है कि फिल्म 26 जनवरी को रिलीज होगी। हालांकि इसके पहले फिल्म की रिलीज डेट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

वायाकॉम 18 से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फिल्म 26 जनवरी को रिलीज होगी। औपचारिक पुष्टि कुछ दिनों में आ सकती है।

आपको बता दें कि 25 जनवरी को अक्षय कुमार की ‘पैडमैन’ रिलीज होने वाली है। ऐसे में पद्मावत के रिलीज से  ‘पैडमैन’ को नुकसान हो सकता है।

‘पद्मावती’ के साथ होने वाली टक्कर पर अक्षय कुमार का कहना था कि उन्हें ‘पद्मावती’ की रिलीज डेट टकराने का कोई डर नहीं हैं। वो इस चुनौती के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि पैडमैन एक अच्छे विषय पर आधारित है। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारी फिल्म पर ‘पद्मावती’ की रिलीज का कोई असर नहीं पड़ेगा।

अक्षय कुमार ने कहा कि ‘पैडमैन’ अपनी पटकथा की वजह से जरूर सफल होगी, चाहें कितनी भी बड़ी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उसके सामने हो।

‘पद्मावत’ करीब 180 करोड़ के भारी-भरकम बजट में बनी है। ये फिल्म काफी वक्त से विवादों में भी है। संजय लीला भंसाली की इस मल्टी स्टारर फिल्म में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। ट्रेलर के मुताबिक़ सभी के किरदार की प्रशंसा की जा रही है। ‘पैडमैन’ में अक्षय की मुख्य भूमिका के साथ राधिका आप्टे और सोनम कपूर हैं।

 

हिन्दी मेला बना नयी उम्मीद, नये उत्साह से भरा सांस्कृतिक अभियान

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कोलकाता : 23वें हिंदी मेले का समापन 1 जनवरी को नयी उम्मीद और नये उत्साह के साथ हुआ। अपराजिता आपको सातों दिन की सिलसिलेवार खबर यहाँ दे रही है।

उद्घाटन सत्र और लघु नाटक प्रतियोगिता

मेले की शुरुआत लघु नाटक प्रतियोगिता में नाट्य प्रदर्शन के साथ शुरू हुई। हिंदी मेले का उद्घाटन वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर ने किया। मिशन के अध्यक्ष, हिंदी शिक्षाविद् और लेखक डॉ शंभुनाथ ने कहा कि हिंदी मेला विभिन्न भाषाओं का एक जंक्शन है। यह सभी को जोड़ने का सांस्कृतिक अभियान है। यह पश्चिमी संस्कृति और हर तरह की कट्टरता के प्रति सचेत करते हुए मानवता का संदेश देता है और युवा सृजनात्मकता मंच है। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के महासचिव डॉ राजेश मिश्र ने कहा कि स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों का यह हिंदी मेला युवाओं को स्वस्थ भारतीय संस्कृति से जोड़ता है। और हम अब रजत जयंती वर्ष के करीब पहुंच गए है। प्रो. संजय जायसवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दिन अमाजीत बसु को उनकी नाट्य सेवाओं के लिए माधव शुक्ल नाट्य सम्मान प्रदान किया। माधव शुक्ल करीब सौ साल पहले कोलकाता में हिन्दी नाटक शुरू करने वालों में थे। प्रतियोगिता में शिखर सम्मान प्रोसेनियम आर्ट सेन्टर को मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता डॉ रामाशंकर सिंह, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री नेहा चौबे (जे. के. चौबे पुरूलिया), श्रेष्ठ निर्देशक – सुमिता चट्टोराज (महाराजा मनींद्र चंद्र कॉलेज), श्रेष्ठ बाल कलाकार – गोविन्द पांडेय (श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी विद्यालय) द्वतीय प्रस्तुति औरत नाटक, आर.बी. सी सांध्य विद्यालय एव तृतीय प्रस्तुति बकरी नाटक, आर्य कन्या महाविद्यालय को मिला। पहले दिन डॉ. अनिता राय और ममता पांडेय कार्यक्रम का सफल संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ.  सुमिता गुप्ता ने दिया।

काव्य आवृत्ति

हिन्दी मेला के दूसरे दिन काव्य आवृत्ति मेला सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। काव्य आवृत्ति मेला में लगभग 60 संस्थानों के 200 विद्यार्थियों ने निराला, दिनकर, अज्ञेय, मुक्तिबोध, नागार्जुन, त्रिलोचन, भवानीप्रसाद मिश्र, धूमिल, कुंवर नारायण, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, केदारनाथ सिंह, राजेश जोशी, अवतार सिंह पाश, अरूण कमल, अनामिका आदि की कविताओं पर आवृत्ति प्रस्तुत की। इस प्रतियोगिता में राज्यवर्द्धन, प्रियंकर पालीवाल, ऋतेश पांडेय, सुनीता श्रीवास्तव, धर्मदेव दुबे एवं संजय राय बतौर निर्णायक उपस्थित रहे। इस प्रतियोगिता के शिशु वर्ग में शिखर सम्मान रौनक पांडेय, डॉन बास्को स्कूल,प्रथम पुरस्कार अर्पिता साव, हरिप्रसाद प्राईवेट स्कूल,द्वितीय पुरस्कार लिज्जा कर्मकार,कांचड़ापाड़ा हारनेट स्कूल एवं वर्षा  जायसवाल,हरिप्रसाद प्राईवेट स्कूल,तृतीय पुरस्कार अलीना परवीन,टर्निग पाइंट स्कूल,प्रथम प्रोत्साहन पुरस्कार शांतनु विश्वास एवं रिद्दीमान सिंह, हरियाणा विद्यामंदिर, द्वितीय प्रोत्साहन पुरस्कार श्रेया पांडेय, अग्रसेन बालिका शिक्षा सदन, स्नेहा सिंह, सेंट्रल मॉडल स्कूल एवं ईशिका धानुका, मार्डन हाई स्कूल।

वर्ग अ का शिखर सम्मान प्रकाश यादव, सेंट ल्यूक डे स्कूल, प्रथम स्थान अनिरुद्ध सिंह, हरियाणा विद्यामंदिर, द्वितीय प्रियांशु मिश्रा, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी  विद्यालय,तृतीय अंजलि रावत को, प्रथम विशेष पूजा अग्रवाल, सेंट ल्यूक डे स्कूल एवं जेबा परवीन, कांकीनाड़ा आर्य विद्यालय, द्वितीय विशेष प्रमोद तिवारी,तृतीय विशेष अश्विका सिंह, श्री शिक्षायातन, चतुर्थ विशेष नेहल मोदी, महादेवी बिरला वलर्ड अकादमी, पंचम विशेष संजना जायसवाल, गुरुकुल ग्लोबल स्कूल।

वर्ग क में शिखर सम्मान, देवेश मिश्रा,बीएचके जैन कॉलेज को, प्रथम स्थान राहुल गौड़, कलकत्ता विश्वविद्यालय को, द्वितीय स्थान रूम्पा कुमारी साव, वर्दवान विश्विद्यालय,तृतीय स्थान शुभस्वपन  मुखोपाद्याय,बेथुन कॉलेज, प्रथम विशेष रवि पंडित, आर बी सी सांध्य कॉलेज को, द्वितीय विशेष गीतांजलि साव, सेंट कैथेड्रल कॉलेज, तृतीय विशेष श्वेता तिवारी, सूरजमल जालान कॉलेज, चतुर्थ विशेष सलोनी शर्मा, खड़गपुर कॉलेज को मिला।

चित्रांकन, कहानी पोस्टर व हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता

हिन्दी मेला के तीसरे दिन चित्रांकन, कहानी पोस्टर एवं हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 70 संस्थानों के लगभग 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया। चित्रांकन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पर्यावरण विषय पर सुन्दर तस्वीरें बनाई। कहानी पोस्टर में प्रेमचन्द की कई कहानियों पर आकर्षक पोस्टर बनाए गए। चित्रांकन शिशु वर्ग का शिखर सम्मान लोपामुद्रा सेन, ओरियंटल पब्लिक स्कूल, प्रथम स्थान वर्षा जायसवाल, हरप्रसाद प्राइमरी इंस्टीट्यूशन, द्वितीय स्थान, श्वेता जायसवाल, घोष मेमोरियल प्राइमरी स्कूल एवं लावण्या साव, तीसरा स्थान विद्या दास, चौथा स्थान अर्पिता दास, हरप्रसाद प्राइमरी इंस्टीट्यूशन औऱ तृषा साव, ब्रह्मो बालिका शिक्षा सदन को पाँचवा स्थान मिला। वर्ग अ का शिखर सम्मान, सुनीता कुमारी चौरसिया, प्रथम स्थान अतुल दुसाद, गौरीपुर हिन्दी हाई स्कूल, राजीव कुमार माझी, चाँपदानी आर्य विद्यापीठ, तीसरा स्थान समृद्धि साहा, राममोहन मिशन स्कूल एवं ईशा शर्मा, आर्य कन्या महाविद्यालय, असगर अंसारी, कांकिनाड़ा हिमायतुल गुर्बा हाई स्कूल, सुनीता कुमारी साव, सेठ आनंदराम जयपुरिया कॉलेज, मो. कैफ अंसारी, गन एंड शेल फैक्ट्री हाई स्कूल एवं तितिक्षा नसकर को सांत्वना पुरस्कार मिला।

कहानी पोस्टर में शिखर सम्मान संजय ठाकुर, सुरेनद्रनाथ सांध्य कॉलेज, प्रथम पुरस्कार रहमत अली, हिमायुतल गुर्बा हाई स्कूल एवं शुभम कुमार सिंह, आशुतोष कुमार सिंह को तृतीय स्थान मिला।

ज्ञान प्रतियोगिता वर्ग अ का शिखर सम्मान चाँपदानी आर्य विद्यापीठ दल को मिला। वर्ग क का शिखर सम्मान दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय को और सर्वोत्तम श्रोता समृद्धि साहा को मिला।

काव्य संगीत, लोकगीत

23 वें हिंदी मेला के चौथे दिन काव्य संगीत, लोकगीत और आशु भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। 50 संस्थाओं के लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। काव्य संगीत मेला में भक्ति काव्य संगीत के लिए भक्तिकाल के कवियों में से और आधुनिक काव्य संगीत में से प्रसाद, पंत, निराला, महादेवी, नागार्जुन, नजीर अकबराबादी, फ़ैज अहमद फ़ैज,   दुष्यंत कुमार और शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ के गीतों का गायन किया गया। काव्य संगीत प्रतियोगिता में शिखर सम्मान महाराजा मनींद्रचंद्र कॉलेज की नैना प्रसाद को, पवि गौड़, प्रथम स्थान विश्वभारती विश्वविद्यालय, द्वितीय स्थान पर आयुष पांडेय,  तृतीय स्थान पर खुशी मिश्रा,  सुकन्या सरकार एवं मधु सिंह को विशेष पुरस्कार मिला। लोकगीत प्रतियोगिता में शिखर सम्मान दीपक कुमार ठाकुर, नीलांबर , प्रथम विशेष स्थान पर स्वीटी सिंह, रिषड़ा विद्यापीठ गर्ल्स हाई स्कूल, पवि गौड़, विश्वभारती विश्वविद्यालय द्वितीय स्थान, तृतीय स्थान आयुष पाण्डेय, डॉन बास्को हावड़ा, नैना प्रसाद महाराजा मनींद्रचंद्र कॉलेज  को चतुर्थ विशेष पुरस्कार मिला है। आशु भाषण अ वर्ग का शिखर सम्मान प्रमोद तिवारी, सेंट ल्यूक डे स्कूल, प्रथम पुरस्कार प्रियांशु मिश्रा, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी विद्यालय, द्वितीय राहुल कुमार राय, चांपदानी आर्य विद्यापीठ, तृतीय जयप्रकाश यादव, सेंट ल्यूक डे स्कूल, मुस्कान शर्मा, बालीगंज शिक्षा सदन को मिला। वर्ग क का प्रथम पुरस्कार अदिति दुबे जयपुरिया कालेज, द्वितीय राहुल गौड़, कलकत्ता विश्वविद्यालय, तृतीय देवेश मिश्रा, टी एस के जैन कॉलेज, चतुर्थ मधु सिंह, विद्यासागर विश्वविद्यालय को मिला।

राष्ट्रीय परिसंवाद

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित 23 वें हिंदी मेला में सामाजिक क्रांति के प्रेरक :शिवपूजन सहाय, राहुल सांकृत्यायन और त्रिलोचन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो. दामोदर मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राहुल सांकृत्यायन भारतीयता के लेखक हैं। आलोचक अरुण कुमार ने शिवपूजन सहाय के गद्य साहित्य की संवेदनाओं पर प्रकाश डाला। प्रो, श्रुति ने सामाजिक क्रांति के प्रणेता के रूप में तीनों रचनाकारों की रचनाधर्मिता पर चर्चा करते हुए कहा कि शिवपूजन सहाय  ज्ञान की खोज से ही ज्ञान के भाष्य का सृजन करते हैं। । प्रो. बसंत त्रिपाठी ने राहुल सांकृत्यायन को सामाजिक बदलाव का रचनाकार बताते हुए कहा कि भागो नहीं दुनिया को बदलो के संकल्प के साथ ही हमें आगे बढ़ना है। डॉ इतु सिंह ने कहा कि त्रिलोचन के साहित्य में परम्परा और आधुनिकता का समन्वय है। संगोष्ठी के दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए आलोचक शंभुनाथ कहते हैं कि शिवपूजन सहाय, राहुल सांकृत्यायन और त्रिलोचन का कलकत्ते से गहरा संबंध रहा है।शिवपूजन सहाय, राहुल सांकृत्यायन और त्रिलोचन तीनों ने समाज को बदलने के लिए असुविधाओं को, अनिश्चितताओं को चुना। भाषा और साहित्य को सामाजिक बदलाव के लिए जरूरी मानते हुए निश्चितताओं को त्यागने का नैतिक साहस दिखाया। । डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कवि त्रिलोचन को लोक जीवन की ओर उन्मुख कवि मानते हुए कहा कि वे जनपदीय चेतना से संयुक्त हैं। प्रो. रमाशंकर सिंह ने कहा कि त्रिलोचन का रचना संसार वैविध्यपूर्ण है। उनकी कविताओं में जीवन की सहजता और मानवीय संवेदना के प्रति गहरी आस्था है। इस अवसर पर शोधार्थी दीक्षा गुप्ता, निखिता पांडे, पूजा गुप्ता, इबरार खान, नवोनीता दास ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय राय और धन्यवाद ज्ञापन डॉ विवेक सिंह ने दिया।

युवा शिखर सम्मान व पत्रकारिता सम्मान

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित 23 वें हिंदी मेले में नववर्ष का अभिनंदन हिंदी मेला में युवाओं ने उदार भारतीय संस्कृति को बचाने के संकल्प के साथ किया। इसके अलावा बेटी नहीं है बोझ, अब तो बदलो सोच की आवाज भी गूंजी। सात दिवसीय हिंदी मेला के समापन के अवसर पर डॉ शंभुनाथ,  प्रो संजय जायसवाल, रामनिवास द्विवेदी, डॉ अवधेश प्रसाद सिंह, डॉ विवेक सिंह, डॉ गीता दुबे, डाॅ शुभ्रा उपाध्याय, अजय महमिया, रितेश पांडे ने अपने विचार रखे। इस दिन काव्य आवृत्ति, लोकगीत, काव्य नृत्य, काव्य संगीत के विजयी प्रतिभागियों की सुंदर प्रस्तुतियां हुईं और हिंदी मेला साहित्यिक गरिमा से मुखरित हो उठा। लगभग डेढ़ सौ विजयी प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न, नगद राशि और प्रमाण पत्र दिया गया। मेले में युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री राधाकृष्ण प्रसाद को दिया गया।

 

 

सर्दियों में स्वेटर से बरकरार रखिए फैशन की गरमाहट

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भारी-भारी वुलन कपड़ों को पहनने में बाद कहीं आप भी तो अपने स्टाइल और फैशन को नहीं भूल जाते। या फिर आपने भी मान लिया कि सर्दियों ने आपके स्टाइल स्टेटमेंट को भी जकड़ लिया है। अगर आपको भी ऐसा लगने लगा है तो इसका मतलब ‌कि आप अपनी शारीरिक बनावट के हिसाब से स्वेटर नहीं चुन पा रहे हैं, नहीं तो सर्दियां तो होती ही है स्टाइल में रहने के लिए। मतलब एक से बढ़कर एक जैकेट, स्वेटर सब कुछ पर्सनलिटी को चार चांद जो लगा देता है।
इस सर्दियों अगर आप इस हिसाब से वुलन वियर खरीदेंगे तो शर्त लगा लीजिए ये सर्दियां भी आपको स्टाइल को जकड़ नहीं पाएगी।

 बटन या जिप वाले स्वेटर्स

थोड़े हेल्दी या हेवी पर्सनलिटी वाले लोगों के लिए बटनटार स्वेटर या जिपर सबसे सुरक्षित विकल्प हैं। इन्हें पहनने से उनका लुक थोड़ा सा स्लिम लगेगा। हां, थोड़ी पतली काया वाले लोग चाहें तो लूज जिपर ट्राइ कर सकते हैं जो जैकेट जैसा लुक देंगे।

सदाबहार कार्डिगन्स

पुरुष, कार्डिगन्स का समझदारी से चयन करें तो ये हर दौर में फैशनेबल व ग्रेसफुल लगेंगे। खास तौर पर खाकी ट्राउजर या कॉटराय ट्राउजर के साथ ये बेहद स्मार्ट और स्टाइलिश लुक देंगे। बहुत अच्छी पर्सनलिटी वाले लोगों के लिए ये विकल्प बेहतरीन है।

टर्टल नेक स्वेटर्स

बहुत अधिक ठंड में लंबे गले के यानी टर्टल नेक स्वेटर बहुत ज्यादा इस्तेमाल में आते हैं। ये स्वेटर बहुत अधिक पतले या लंबे गले वाले लोगों के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प हैं। आप इन्हें किसी भी सेमीफॉर्मल जैकेट के भीतर भी ट्राइ कर सकते हैं। खासतौर पर प्लेन टर्टन लेक स्वेटर जैकेट के साथ पहनने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

गोल गला या क्रयू नेक स्वेटर्स 

वैसे तो गोल गले के स्वेटर्स सदाबहार होते हैं और इन्हें हर तरह की बनावट वाले लोग पहन सकते हैं फिर भी ये युवाओं पर सबसे ज्यादा फबते हैं। खासतौर पर किसी भी कैजुअल ब्लू जीन्स पर गोल गले के स्वेटर बिल्कुल कैजुअल और कंफर्टेबल लुक देते हैं। बहुत अधिक लंबे और बहुत पतले लोगों के लिए ये सबसे सुरक्षित विकल्प हैं।

हिंदी बाल साहित्य के विकास में ‘शिवपूजन सहाय’ की भूमिका   

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इबरार

सं 1893 में बिहार के शाहाबाद जिले में जन्मे ‘ शिवपूजन सहाय ‘ हिंदी गद्य साहित्य में अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं । ‘ पद्मभूषण ‘ एवं ‘ वयोवृद्ध साहित्यिक सम्मान ‘ से सम्मानित ‘ शिवपूजन सहाय ‘ हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार , कहानीकार , संपादक और पत्रकार थें । जिनकी लेखनी राष्ट्रवादी एवं सुधारवादी विचारधारा से प्रभावित थी । उन्होंने ‘देहाती दुनिया’ , ‘विभूति’ ,’मेरा जीवन’, ‘स्मृति शेष’, ‘जीवन दर्पण’, ‘मैं धोबी हूँ’, ‘राष्ट्र भाषा और उर्दू’, ‘हिंदी गद्य की विकास यात्रा’, ‘कहानी का प्लॉट’,’मुंडमाल’, ‘ग्राम सुधार’ आदि कई महत्वपूर्ण साहित्य रचा। इनके विभिन्न रचनाओं को, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद (पटना) ने चार खंडों में ‘शिवपूजन रचनावली’ नाम से प्रकाशित किया है। वहीं इन्होंने मारवाड़ी सुधार ,मतवाला, माधुरी, गंगा, जागरण, बालक, हिमालया आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया है । शिवपूजन सहाय को पत्रकारिता का स्तम्भ कहा जाता है, जो साहित्यिक सरोकारों को पत्रकारिता से जोड़ने के लिए जाने जाते हैं। परंतु इन सबके साथ साथ वे एक बाल साहित्यकार भी थे, जिनकी बाल सुलभ रचनाओं की बाल साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। परंतु जिस तरह हिंदी साहित्य के इतिहास में बाल साहित्य उपेक्षित है उसी प्रकार शिवपूजन सहाय द्वारा बड़ो के लिये लिखे गए साहित्य के तले उनका बाल साहित्यकार रूप कही दब सा गया है। मैनेजर पांडेय ने कहा है – “हिंदी में बाल साहित्य की स्थिति बहुत विचित्र है। बाल साहित्य और बाल साहित्य के लेखकों को मुख्य धारा के लेखक गंभीरता से नही लेते।… शिवपूजन सहाय बाल साहित्य के लेखक भी थे और बालको से संबंधित साहित्य के संपादक भी थे । “(१)

शिवपूजन सहाय ने बाल साहित्य का सृजन ‘बालक’ पत्रिका के संपादन एवं ‘बालोद्यान’ पुस्तक के रूप में किया। उन्होंने बालक का संपादन कर हिंदी बाल साहित्य के प्रकाशन और लेखन को नई दिशा दी। वहीं उनकी बालोपयोगी साहित्य ‘बालोद्यान’ नाम से ‘शिवपूजन रचनावली’ खण्ड २ में संकलित है, जिसमें ‘बालक प्रह्लाद का सिद्धांत’,’ प्राचीन भारत की हवाई लड़ाई’,’ महाभारत कैसे लिखा गया?’, ‘उपनिषद की एक कहानी’, ‘धनुष-भंग’ आदि ऐसे लेख हैं जिसके माध्यम से शिवपूजन सहाय ने बच्चो को अपने क्लासिक ग्रंथो का एक उत्सुकता युक्त और आदर भरा परिचय दिया है एवं अपने बाल रचनाओं द्वारा बच्चो को भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में ढालने का प्रयास किया है। यह सत्य है कि उनकी लेखनी धर्म से काफी प्रभावित रही है। उन्होंने रामायण, महाभारत अर्थात पौराणिक चरित्रों जैसे भीष्म, भीम, अर्जुन, अभिमन्यु, लव, कुश, सीता, राधा आदि को आधार बनाकर रचनाएँ की है एवं बाल रचनाओं के जरिये बच्चो के भीतर ऐसे संस्कारों को डालने की प्रबल इच्छाओं को उन्होंने पर्दे में भी नहीं रखा है। उनमें नैतिक आग्रह हठ की सीमा तक दिखाई देती है इसलिए बाल साहित्य रचते समय भी वह इससे अछूता नही रह सके। धार्मिकता से अनुप्राणित संस्कारों वाले बच्चों का समाज बनाना भावी भारत के लिये कितना सही है यह विचार का विषय है। परंतु ” बालक प्रहलाद’ का सिद्धांत के अंत मे वे लिखते हैं – ” हे देव ! मुनिजन प्रायः अपनी ही मुक्ति की इच्छा से एकांत में रहकर मौन व्रत धारण कर लेते हैं । वे दूसरे के हित मे तत्पर नहीं होते। किन्तु मुझे इन बेचारे गरीबों को छोड़ कर अकेले ही मुक्त होने की इच्छा नहीं है “(२) अर्थात उनकी लेखनी का झुकाव धर्म की और अवश्य था परंतु उनमे पाखंड नहीं था एवं धर्म के साथ साथ सामाजिक आग्रह भी उनमे मौजूद थी। उनकी यह रचनाएँ बच्चों में चारित्रिक गुण, अनुशासन एवं मनुष्यता के बीज बोने का कार्य करते हैं ‘बालोद्यान’ के अन्य लेखों जैसे विधा की महिमा, विनय, नेक-वर्ताव, स्वयं सेवक, आदर्श बालक के लक्षण आदि में उनका नैतिक आग्रह एवं आदर्शवादी सोच साफ दिखाई देता है। उनका लेख ‘भाई-बहन’ जहाँ बच्चों में भारतीय संस्कार बोध उत्पन्न करता है तो वहीं ‘नख और दांत’ एवं’ दंड-बैठक’ जैसे लेख बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा देते हैं। अतः इसमे कोई संदेह नहीं कि हिंदी बाल सहित्य के विकास में ‘ शिवपूजन सहाय ‘ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है।

१) पांडेय मैनेजर, बालसाहित्य और आलोचना ,सं० – अनुज कुमार, वाणी प्रकाशन , संस्करण -२०१६, पृ० सं० – ३६ ।२) सहाय शिवपूजन, पत्रकारिता के युग निर्माता – शिवपूजन सहाय, कर्मेंदु शिशिर, प्रभात प्रकाशन ,संस्करण २०१०,पृ०सं०- ८७ ।

विराट का वर्चस्व, मिताली ने भी खुद को स्थापित किया

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नयी दिल्ली  : प्रतिद्वंद्वी टीमों को लगातार रौंदने से विराट कोहली की महानता में इस वर्ष तेजी से बढ़ोतरी हुई जबकि भारतीय महिला टीम को भी अपने शानदार विश्व कप अभियान की बदौलत अंतत: ‘क्रिकेट को लेकर जुनूनी’ देश से प्यार और सम्मान मिला।

‘किंग कोहली’ लगातार नौ सीरीज जीतने के बाद अब अगले 18 महीनों में मिलने वाली चुनौती के लिये तैयार हैं जबकि पिछले छह महीनों में मिताली राज महिला क्रिकेट टीम की कप्तान से अब एक ब्रांड बन गयी हैं।

भारतीय महिला टीम भले ही मेजबान इंग्लैंड से विश्व कप के रोमांचक फाइनल में हार गयी हों, लेकिन इस प्रदर्शन की बदौलत उन्हें देश में लोगों का प्यार और वित्तीय प्रोत्साहन मिला जिससे महिला टीम देश में सुर्खिंयों में रहीं। यह पहली बार है जब देश में महिला क्रिकेट को इतनी गम्भीरता से लिया गया और आज महिला खिलाड़ियों को हर जगह देखा जाने लगा है जिसका श्रेय मिताली की लाजवाब कप्तानी को जाता है।

वहीं प्रतिद्वंद्वी टीमों के लिये भारतीय पुरूष टीम के बेहतरीन सफर को रोकना नामुमकिन रहा।

हालांकि भारतीय टीम ने अपने ज्यादातर मैच घरेलू मैदान पर ही खेले लेकिन लगातार नौंवी टेस्ट सीरीज जीतना और लगातार आठ वनडे सीरीज अपने नाम करना कोई उपलब्धि से कम नहीं।

कोहली और उनकी टीम को हालांकि कुछ मौकों पर परीक्षा से भी गुजरना पड़ा जैसे आस्ट्रेलिया के खिलाफ पुणे टेस्ट में मिली हार या ईडन गार्डंस में श्रीलंका के खिलाफ तेज गेंदबाजों के मुफीद पिच पर पहली पारी में सिमटना मुश्किल मौके रहे। लेकिन ऐसा एकाध बार ही हुआ।

इस इतने शानदार वर्ष में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन चैम्पियंस ट्राफी का फाइनल रहा जिसमें उसे पाकिस्तान से हार का मुंह देखना पड़ा जबकि भारतीय टीम इसमें गत चैम्पियन के तौर पर खेल रही थी।

लेकिन इस हार के बाद जो विवाद भारतीय टीम से जुड़ा, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के भुलाने वाले अध्याय में शामिल हो गया। कोहली और कोच अनिल कुंबले के बीच बढ़ता विवाद खुले में आ गया जिसके बाद कुंबले को एक साल के सफल कार्यकाल के बाद इस्तीफा देने के लिये बाध्य होना पड़ा।

इस पूरे प्रकरण से हालांकि इस बार की फिर से पुष्टि हो गयी कि भारतीय टीम में केवल एक ही ‘बॉस’ है और वो कप्तान है।

हालांकि कोहली-कुंबले ब्रेक-अप से टीम के मैदानी प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा और थोड़े ही समय में यह सामान्य हो गया तथा ड्रेसिंग रूम में पसंदीदा रवि शास्त्री ने इस महान स्पिनर की जगह वापसी की।

मैदान के बाहर उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति ने चार लोगों के साथ बीसीसीआई का काम शुरू किया लेकिन बाद में लोगों की संख्या घटकर दो हो गयी। रामचंद्र गुहा ने सीओए के काम करने के तरीके पर कड़वाहट भरा पत्र लिखकर असंतुष्टि व्यक्त करते हुए इस पद से इस्तीफा दे दिया।

मैदान में कप्तान के प्रदर्शन पर जरा भी असर नहीं पड़ा और उनका रनों का अंबार लगाना जारी रहा, जिसमें उन्होंने टेस्ट और वनडे में 11 शतक जुटाये जिसमें पांच दिवसीय प्रारूप में तीन दोहरे शतक शामिल थे।

रोहित शर्मा का भी चोट के बाद वर्ष शानदार रहा, उन्होंने सत्र में वनडे में तीसरा दोहरा शतक जड़ने के अलावा श्रीलंका के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान सबसे तेज शतक भी जड़ा।

 

पिकनिक का मजा बढ़ा देंगे ब्रेड स्नैक्स

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ब्रेड उत्तपम

 सामग्री – ब्रेड की चार स्लाइस, आधा कप सूजी, दो बड़े चम्मच मैदा, आधा कप दही, एक बारीक कटा टमाटर, एक बारीक कटी शिमला मिर्च, दो बारीक कटी, आधा कप बारीक कटा हरा धनिया, एक बड़ा चम्मच कसा अदरक, दो बारीक कटी हरी मिर्च, नमक स्वादानुसार, तेल आवश्यकतानुसार, पानी आवश्यकतानुसार

विधि  सबसे पहले ब्रेड के किनोरों को काटकर अलग निकाल लें। अब ब्रेड के सफेद हिस्से को सूजी, मैदा, पानी और दही के साथ मिक्स कर पीस लें और एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें। पेस्ट में टमाटर, शिमला मिर्च, प्याज, अदरक , हरी मिर्च और नमक मिलाएं।  मध्यम आंच में एक तवा पर थोड़ा सा तेल गरम करने के लिए रखें। तेल के गरम होते ही उत्तपम का तैयार पेस्ट डालें। एक साइड से सिक जाने के बाद इसे पलटकर दूसरे साइड से भी सुनहरा होने तक सेंक लें।  तैयार है ब्रेड उत्तपम। चटनी या टोमैटो सॉस के साथ सर्व करें।

नोट: 
आप चाहें तो थोड़ा सब्जियां बचाकर इसे ऊपर से भी डाल सकती हैं। उत्तपम को पलटते समय किनारों पर थोड़ा तेल लगा लें। पलटने में आसानी होगी।

 

ब्रेड पापड़ी चाट

सामग्री : आठ ब्रेड स्लाइस, एक छोटी कटोरी उबले हुए काबुली चने, एक छोटी कटोरी दही, दो छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, दो छोटा चम्मच जीरा पाउडर, दो छोटी चम्मच मीठी चटनी, दो छोटी चम्मच तीखी चटनी, नमक स्वादानुसार, तेल तलने के लिए, एक छोटी कटोरी नमकीन सेव, एक छोटी कटोरी बूंदी

विधि : सबसे पहले सभी ब्रेड्स को बीच में से गोलाकार शेप में काट लें। इसके बाद तेज आंच में एक पैन में तेल गरम करने के लिए रखें। तेल के गरम होते ही ब्रेड के कटे हुए पीस डालकर सुनहरा तल लें और एक प्लेट में निकालकर रख लें। एक बॉउल में दही में नमक डालकर अच्छे से फेंट लें। अब ब्रेड पर उबले काबुली चने फैलाएं। फिर उसके बाद आलू के टुकड़े रखें, दही डालें।  दही के ऊपर मीठी और तीखी चटनी डालकर लाल मिर्च पाउडर और जीरा पाउडर छिड़कें।  तैयार है ब्रेड पापड़ी चाट। नमकीन सेव और बूंदी से गार्निश सर्व कर खाएं और सर्व करें।

नोट: 
ब्रेड तेज आंच पर ही तलें क्योंकि ब्रेड बहुत ज्यादा तेल सोख लेती है। आप चाहें तो नमकीन सेव और बूंदियों के साथ अनार के दानों से भी गार्निश कर सकते हैं।

 

नए साल में सुखी और सफल रहे जीवन, लें कुछ ऐसे संकल्प

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नए साल 2018 में प्रवेश हम कर चुके हैं। हममें से अधिकतर लोग ऐसे भी होंगे जो कि  यह संकल्प लेंगे कि जो उन्होने बीते वर्ष में गलतियां की या कुछ भी गलत किया हो, वैसा इस आने वाले साल में न करें। माना जाता है नए साल का संकल्प हम सभी अपनी किसी खामी को दूर करने के लिए लेते हैं। कोई जिम में वर्कआउट करने का संकल्प लेता है तो कोई सिगरेट छोड़ने का। कोई अपनी पढ़ाई अच्छे से करने का संकल्प लेता है तो कोई अपने शौक पूरे करने का संकल्प लेता है।

ऐसे ही संकल्पों की लंबी फेहरिस्त है। आपको अपना कोई संकल्प चुनने में कोई परेशानी हो रही है तो आप इनमें से कोई चुन सकते हैं। तो चलिए देखते हैं 2018 में आप क्या संकल्प ले सकते हैं।

-विनम्र बनें और माफ करना सीखें
-विनम्र बनें और गलती होने पर माफी मांगना सीखें
-ज्यादा गुस्सा आता है तो उसे पीना सीखें
-ज्यादा भावुक होते हैं तो अपने इमोशन्स पर काबू पाना सीखें
-अपनी जिम्मेदारियां पहचानें और उन्हें निभाना सीखें
-पैसा बचाएं और कर्ज से छुटकारा पाने की कोशिश करें
-दुश्मनी भुला दें
-लड़ाई-झगड़ा न करें
-माफ करना सीखें
-कोई नई भाषा सीखें
-खाना पकाना सीखें
-नाकाम होने पर गम में न डूबे
-लक्ष्य
-हमेशा सक्रिय रहने की आदत डालें
-काम को टालने की आदत को छोड़ दें
-डायरी लिखने की आदत डालें
-सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं और असली जिंदगी को ज्यादा वक्त दें
-अपने अंदर सकारात्मक सुविचार लाएं
-हर महीने कम से कम दो नए काम जरूर करें जो अच्छे हों
-झूठ बोलने की आदत छोड़ दें…

संकल्पों की ये लंबी लिस्ट कभी खत्म नहीं होगी। ऐसे में आपको खुद ही तय करना होगा कि आप अपनी कौन सी खामी को दूरकर एक बेहतर इंसान बनना चाहते हैं। इसलिए विचार करें और नए साल की शुरुआत नए प्रण से करें।

 

तीन बहनों ने खोला महानगर में निःशुल्क पुस्तकालय

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अक्सर हम सुनते हैं कि किताबों की दुनिया से बच्चे दूर भाग रहे हैं। सोशल मीडिया, टीवी और फिल्मों की मनमोहक दुनिया में कैद बच्चे को अक्षरों की दुनिया नहीं लुभाती, ये भी हम देख रहे हैं। ऐसे में दो बच्चियाँ पुस्तकालय खोलने के बारे में सोचें और खोलकर दिखा भी दें। यह हैरत में डालने वाली सुखद उम्मीद है। महानगर में सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में पढ़ने वाली दो बहनों 12 साल की मनस्वी और 9 साल की सुहासिनी दूगड़ ने निःशुल्क पुस्तकालय खोला है और किताबों की शौकीन और अपनी बहनों में पढ़ने की आदत डालने वाली बड़ी बहन यशस्वी ने इस पुस्तकालय को संवारने और इंटीरियर और डिजिटल कार्यों का जिम्मा सम्भाला। तीनों बहनें ब्रिटिश काउंसिल में जाती रही हैं, वहाँ की लाइब्रेरी में पढ़ती भी रही हैं।

मनस्वी बताती है कि वह जब भी लाइब्रेरी जाती, उसे महसूस होता कि बहुत से बच्चों को पढ़ने का मौका नहीं मिल पाता। वह कहती है कि पढ़ना एक अच्छी आदत है और सबको किताबें पढ़नी चाहिए। मनस्वी की माँ शीतल कहती हैं कि ये मनस्वी की इच्छा थी और इन बहनों के आग्रह को देखकर शीतल और उनके पति ने पुस्तकालय खोलने में मदद दी। तीनों बहनों के पापा के दफ्तर का एक अतिरिक्त कमरा पुस्तकालय में बदला गया। किताबें रखने के लिए आलमारी लायी गयी और साहित्यकारों की तस्वीरों से उसको सजाया गया। अब रीडर्स प्लानेट पुस्तकालय बनकर तैयार है और इसमें 15 साल तक संचित किया गया किताबों का खजाना शामिल है। पुस्तकालय में 1 हजार किताबें हैं। बालीगंज फांड़ी के डोवर रोड स्थित इस 300 वर्ग फीट जगह में स्थित इस रीडर्स प्लानेट में विज्ञान, इतिहास, भूगोल, सामान्य ज्ञान, नैतिक शिक्षा और अँग्रेजी की किताबें भी शामिल हैं। वैसे तो यह पुस्तकालय सभी के लिए है मगर जरूरतमंद बच्चों खासकर 5 से 5 साल की उम्र के बच्चों को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। पुस्तकालय में इन किताबों में पढ़ने के शौकीन मगर किताबों से वंचित हर बच्चे के लिए यह पुस्तकालय किसी वरदान से कम नहीं है। मनस्वी को इनसाइक्लोपीडिया पढ़ने में दिलचस्पी है जबकि खेलों की शौकीन सुहासिनी को फैंटेसी पढ़ना अच्छा लगता है। यशस्वी को हमेशा से पढ़ने का शौक रहा है और उसके निजी पुस्तकालय में 150 से ऊपर किताबें हैं। सिडनी में मार्केटिंग और फाइनेंस की पढ़ाई कर रही यशस्वी बताती है कि यहाँ पर बच्चों के लिए स्टोरी टेलिंग और लेखन पर कार्यशालाएँ भी आयोजित होंगी और वह खुद भी इस तरह की कार्यशालाएँ आयोजित करेगी। माँ शीतल दूगड़ को हिन्दी पसन्द है इसलिए हिन्दी किताबों का एक अलग सेक्शन है? रीडर्स प्लानेट सोमवार से शनिवार तक सुबह 11 से शाम 7 बजे तक खुला  रहेगा।