Saturday, April 4, 2026
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सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना स्वैच्छिक है: उच्चतम न्यायालय

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने अपने 2016 के आदेश में सुधार करते हुये सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन से पहले राष्ट्रगान बजाने को अब स्वैच्छिक कर दिया है।

शीर्ष अदालत ने 30 नवंबर, 2016 के अपने आदेश में संशोधन करते हुये राष्ट्रगान बजाने को स्वैच्छिक कर दिया। इससे पहले, न्यायालय ने अपने आदेश में फिल्म के प्रदर्शन से पहले सिनेमाघरों के लिये राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य बना दिया था।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि केन्द्र द्वारा गठित 12 सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी समिति सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के बारे में अंतिम निर्णय लेगी।

पीठ ने कहा कि समिति राष्ट्रगान बजाने से संबंधित सारे पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। इसके साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ताओं को इस समिति के समक्ष अपना प्रतिवेदन रखने की अनुमति प्रदान कर दी।

पीठ ने उसके समक्ष लंबित याचिकाओं का निस्तारण करते हुये कहा कि राष्ट्रीय सम्मान के अनादर की रोकथाम कानून 1971 में संशोधन के बारे में सुझाव देने के लिये 12 सदस्यीय समिति गठित की जा चुकी है।

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ को सूचित किया कि यह समिति छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।

 

पीएम मोदी बने विश्व के तीसरे बड़े लोकप्रिय नेता, ट्रंप और जिनपिंग को पछाड़ा : सर्वे

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नई दिल्ली : पीएम मोदी देश ही नहीं दुनिया में लोकप्रिय हैं और यह बात हम नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे बताता है। इस सर्वे के अनुसार पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति सी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पछाड़ दिया है और दुनिया के तीसरे बड़े नेता बन गए हैं। गैलप इंटनरनेशल द्वारा यह सर्वे दुनिया के 50 देशों में किया गया था।

इस सर्वे में इन देशों के लोगों से अलग-अलग सवाल पूछे गए थे और उनसे मिले जवाबों के आधार पर गैलप ने पीएम मोदी को विश्व नेताओं के सर्वे में तीसरे स्थान पर रखा है। सर्वे में पहले नंबर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुल मैक्रों और दूसरे नंबर पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल हैं। सर्वे में मैक्रों को 21, मर्केल को 20 और पीएम मोदी को 8 अंक मिले हैं।

इस सर्वे के लिए जिस तरीके का उपयोग किया गया उसमें गैलप ने अलग-अलग देशों के तहत कुल 53 हजार 769 लोगों ने अपनी राय दी है। सर्वे में 30 प्रतिशत लोगों ने पीएम मोदी के पक्ष में राय दी जबकि 22 प्रतिशत विपक्ष में थे। सर्वे में चौथे स्थान पर ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे हैं वहीं पांचवे नंबर पर चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग हैं। इनके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सर्वे में 11वें स्थान पर रहे।

 

पाक टीवी एंकर का अनोखा विरोध, न्यूज रूम मे साथ लेकर आई बेटी

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान में एक न्यूज चैनल की महिला एंकर न्यूज रूम में अपनी मासूम बेटी को भी साथ लेकर आई और उसकी यह बेटी नेशनल चैनल पर लाइव दिखाई गई। महिला एंकर ने यह कदम एक ऐसी घटना के विरोध में उठाया है जिसका विरोध पूरे देश में हो रहा है। एंकर के इस कदम के चलते उसकी खूब तारीफ भी हो रही है।

खबरों के अनुसार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कासुर जिले में रहनेवाली 8 वर्षीय बच्ची का पिछले हफ्ते अपहरण हो गया था। मंगलवार को उसका शव कचरे के ढेर पर मिला। बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की इस घटना ने पूरे मुल्क को हिला दिया और अब जगह-जगह इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।

इस घटना के विरोध में पाक मीडिया भी उतर आया है और इसी के चलते टीवी एंकर किरन नाज न्यूज रूम में अपनी बेटी को लेकर पहुंची। उन्होंने देश के लोगों को बताया कि कैसे वो मासूम बच्ची जैनब के साथ हुई घटना का दर्द महसूस करती हैं। नाज के इस कदम की चारों तरफ तारीफ हो रही है।

एक पाक पत्रकार ने उनका यह वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि शायद ही कभी कोई महिला पत्रकार अपने न्यूज कास्ट में अपनी बेटी को लेकर आई हो। पाकिस्तान ही नहीं भारत में भी लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने ट्वीट कर लिखा है कि शानदार एंकरिंग और रिपोर्टिंग, भारत में भी ऐसी ही रिपोर्टिंग की जरूरत है।

 

डब्ल्यूईएफ के वैश्विक विनिर्माण सूचकांक में भारत 30वें स्थान पर, जापान शीर्ष पर

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नयी दिल्ली-जिनेवा : विश्व आर्थिक मंच :डब्ल्यूईएफ: के वैश्विक विनिर्माण इंडेक्स में भारत को 30वें स्थान पर रखा गया है। इस सूची में भारत चीन से पीछे है। चीन पांचवें स्थान पर है। हालांकि, ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका की तुलना में भारत की रैंकिंग बेहतर है।

डब्ल्यूईएफ की भविष्य के उत्पादन की तैयारियों पर रिपोर्ट में जापान अव्वल रहा है। जापान में उत्पादन का ढांचा सबसे बेहतर आंका गया है। सूची में जापान के बाद दक्षिण कोरिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, चीन, चेक गणराज्य, अमेरिका, स्वीडन, आस्ट्रिया और आयरलैंड शीर्ष दस स्थान पर हैं।

ब्रिक्स राष्ट्रों में इस सूचकांक में रूस 35वें, ब्राजील 41वें और दक्षिण अफ्रीका 45वें स्थान पर रहा है।

रिपोर्ट में आधुनिक औद्योगिक रणनीतियों के विकास का विश्लेषण किया गया है और इसमें सामूहिक कार्रवाई पर जोर दिया गया है। इसमें 100 देशों को चार समूहों में वर्गीकृत किया गया है। ये हैं…अग्रणी (मजबूत मौजूदा आधार, भविष्य के लिए उच्चस्तर की तैयारियां), बेहतर संभावना (सीमित मौजूदा आधार, भविष्य के लिये बेहतर संभावना), विरासती (मजबूत मौजूदा आधार, भविष्य में जोखिम) और उदीयमान (सीमित मौजूदा आधार, भविष्य की तैयारियां भी निचले स्तर पर) ।

भारत को इस सूची में हंगरी, मेक्सिको, फिलिपींस, रूस, थाइलैंड तथा तुर्की सहित अन्य देशों के साथ विरासत वाले वर्ग में रखा गया है। चीन अग्रणी देशों में शामिल है। जबकि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शुरुआती स्तर वाले वर्ग में हैं।

डब्ल्यूईएफ की यह रिपोर्ट उसकी इसी महीने दावोस, स्विट्जरलैंड में होने वाली वार्षिक बैठक से पहले आई है। डब्ल्यूईएफ ने कहा है कि इस सूची में शीर्ष 25 देशों को उत्पादन प्रणाली में होने वाले बदलावों का सबसे अधिक लाभ होगा।

भारत के बारे में डब्ल्यूईएफ ने कहा है कि यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और भारत में विनिर्मित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। डब्ल्यूईएफ ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत का विनिर्माण क्षेत्र सालाना आधार पर औसतन सात प्रतिशत बढ़ा है। विनिर्माण क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद :जीडीपी: में 16 से 20 प्रतिशत योगदान है।

 

हिन्दी कहानी जगत के चार में से दूसरे यार दूधनाथ सिंह का निधन

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नयी दिल्ली : हिन्दी कहानी जगत ‘‘चार यार’’ के नाम से मशहूर लेखकों में शामिल वरिष्ठ साहित्यकार दूधनाथ सिंह का निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे।

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि दूधनाथ सिंह पिछले कुछ समय से बीमार थे। वह प्रोस्टेट कैंसर से ग्रस्त थे। उनका निधन इलाहबाद के एक निजी अस्पताल में हुआ। उनका अंतिम संस्कार आज इलाहाबाद में हुआ था। सिंह का जन्म 17 अक्टूबर 1936 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सोबंथा में हुआ। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, कविता, आलोचना, संपादन आदि विधाओं में अपना रचनाकर्म किया।

हिन्दी कहानी में दूधनाथ सिंह ‘चार यार’ में शामिल थे। इसके अन्य तीन कहानीकार रवीन्द्र कालिया, ज्ञानरंजन और काशीनाथ सिंह हैं। कालिया का भी निधन हो चुका है।

दूधनाथ सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया और यहीं वह हिंदी के अध्यापक नियुक्त हुए। 1994 में सेवानिवृत्ति के बाद से लेखन और संगठन में निरंतर सक्रिय रहे। उनका अंतिम उपन्यास ‘आखिरी कलाम’ काफी चर्चित रहा। उनके अन्य उपन्यास ‘निष्कासन’ एवं ‘नमो अंधकारम्’ हैं।

उनके कहानी संग्रहों में ‘सपाट चेहरे वाला आदमी’, ‘सुखांत’, ‘प्रेमकथा का अंत न कोई’, ‘माई का शोकगीत’, ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’, ‘तू फू’, ‘जलमुर्गिर्यों का शिकार’ शामिल हैं। ‘अगली शताब्दी के नाम’, ‘एक और भी आदमी है’, ‘युवा खुशबू’, ‘सुरंग से लौटते हुए (लंबी कविता)’, ‘तुम्हारे लिए’, ‘एक अनाम कवि की कविताएँ’ उनके कविता संग्रह हैं। उन्होंने ‘यमगाथा’ नाम से एक नाटक लिखा था।

उन्होंने ‘निराला : आत्महंता आस्था’, ‘महादेवी’, ‘मुक्तिबोध : साहित्य में नई प्रवृत्तियाँ’ आदि आलोचना ग्रन्थ भी लिखे। सिंह को उत्तर प्रदेश के शीर्ष सम्मान भारत भारती से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें भारतेंदु सम्मान, शरद जोशी स्मृति सम्मान, कथाक्रम सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

 

17 साल के राजीव ने बनाया डेंगू से लड़ने वाला ड्रोन

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उम्र कोई भी हो, आर्थिक हालात कैसे भी हों, अगर मंशा अच्छी हो और मन में समर्पण हो तो समाज के लिए कुछ बेहतर करने से आपको कोई नहीं रोक सकता है। इस बात को सही साबित करती है, सिलिगुड़ी के राजीव घोष की कहानी है। राजीव की उम्र महज 17 साल है और वह 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं। उनकी आर्थिक हालत भी खराब है, लेकिन ऐसे विपरीत हालात में भी राजीव ने डेंगू जैसी बीमारी से लड़ने में मददगार एक ड्रोन बनाया है।

राजीव के पिता, रंजीत घोष 56 वर्ष के हैं और सिलिगुड़ी में चाय की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। राजीव अपने पिता के काम में हाथ भी बंटाते हैं और साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी करते हैं। इस चुनौती की वजह से राजीव 10वीं कक्षा में अच्छे अंक नहीं ला सके और 11वीं में उन्हें साइंस स्ट्रीम नहीं मिली।

इसके बावजूद भी विज्ञान और तकनीक के लिए राजीव का लगाव बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। पिछले साल उनके शहर में डेंगू के खतरे ने काफी आतंक मचा रखा था। इस बात को ध्यान में रखते हुए राजीव एक ऐसा ड्रोन बनाने की जुगत में लग गए, जो मच्छरों के खतरे से लोगों को सुरक्षित रख सके। उन्हें इस ड्रोन को बनाने के लिए 1.5 लाख रुपए की जरूरत थी। उन्होंने यह राशि अपने माता-पिता और पड़ोसियों की मदद से इकट्ठा की। राजीव ने सात महीनों की कड़ी मेहनत के बाद यह ड्रोन तैयार किया।

राजीव ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए बताया, ‘मेरे माता-पिता ने सहमत होने के बाद कुछ पैसा उधार लिया। मेरे कुछ पड़ोसियों ने अपनी ओर से मदद की। मैंने इस ड्रोन को बनाने में 1.5 लाख रुपए खर्च किए।’ राजीव ने इकट्ठा किए हुए पैसों की मदद से चीन और अमेरिका से, तकनीकी रूप से अडवांस उपकरण मंगवाए।

क्या है ड्रोन की खासियत

राजीव ने अपने इस खास ड्रोन में एक हाई रेजॉलूशन का कैमरा लगाया है। इस कैमरे की मदद से डेंगू फैलाने वाले मच्छर के लारवा को ट्रैक किया जा सकता है। यह ड्रोन 1.8 किमी. की ऊंचाई तक जा सकता है, लेकिन सुरक्षा कारणों की वजह से इसकी क्षमता को 200 मीटर तक ही सीमित रखा गया है। इतनी ऊंचाई पर कैमरे की मदद से राजीव का ड्रोन यह पता लगा सकता है कि कहां-कहां पानी का जमाव है और वहां पर डेंगू के मच्छर होने की संभावना है।

अपने ड्रोन का 6 महीने तक परीक्षण करने के बाद राजीव ने सिलिगुड़ी के मेयर अशोक भट्टाचार्य को अपना प्रयोग दिखाया, जिसे देखकर वह काफी आश्चर्यचकित हुए। अशोक ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पहले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब राजीव ने उन्हें ड्रोन के फंक्शन के बारे में बताया तो वह राजीव के हुनर के कायल हो गए। मेयर ने बताया कि नगर निगम ने तय किया है कि राजीव के ड्रोन को इस्तेमाल में लाया जाएगा और राजीव को जरूरत की सारी चीजें मुहैया कराई जाएंगी।

सिलिगुड़ी नगर निगम ड्रोन के साथ कुछ प्रयोग करने की योजना बना रहा है और उनकी प्राथमिकता है कि जल्द-जल्द से इसकी मदद से इलाके में काम शुरू किया जाए। राजीव चाहते हैं कि भविष्य में वह अपने ड्रोन में और भी बेहतर रेजॉलूशन का कैमरा इस्तेमाल करें। नगर निगम का सहयोग मिलने के बाद राजीव जल्द ही एक और ड्रोन बनाना चाहते हैं। ड्रोन के जरिए डेंगू के खतरे से बचने की यह तरीका कोलकाता में पहले से इस्तेमाल हो रहा है। कोलकाता में साउथ सिटी मॉल के आस-पास के इलाके में ड्रोन्स को इस काम के लिए तैनात किया गया है।

(साभार – योर स्टोरी)

 

गुलाबी गैंग के बाद अब बनीं लाल गैंग, महिलाओं की  कर रहीं है मदद

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सागरशराबियों को सबक सिखाने एक साल पहले रहली क्षेत्र में बनी गुलाबी गैंग से प्रेरित होकर जिले में महिलाओं की मदद के लिए अब एक नई गैंग तैयार हुई है, नाम है लाल गैंग। इस गैंग की महिलाओं द्वारा गरीब, अनपढ़ महिलाओं की मदद के लिए कार्य किया जाता है। गैंग में फिलहाल 9 महिलाएं शामिल हैं, जो घरेलू कार्यों के साथ महिलाओं की मदद के लिए भी कार्य करती हैं।

अधिकारियों को आवेदन देकर बताती हैं समस्याएं

लाल गैंग की सदस्य सपना चौरसिया ने बताया कि हमारी गैंग में कोई अध्यक्ष, उपाध्यक्ष नहीं बल्कि सभी सदस्य हैं। हम लोग अपने-अपने क्षेत्र की महिलाओं की राशन, पेंशन, कुटीर, घरेलू हिंसा सहित अन्य कई समस्याओं का आवेदन तैयार करके अधिकारियों को अवगत कराते हैं ताकि घरों में चूल्हा फूंकने वाली इन गरीब महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं होने के कारण हम लोग उनका आवेदन बनाकर उनकी मदद करते हैं।

दिल्ली की मैडम देती हैं प्रशिक्षण

दल की सदस्यों का कहना है कि दिल्ली की एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी की मैडम हम लोगों को इस संबंध में ट्रेनिंग देती हैं कि कैसे कार्य करें और महिलाओं की समस्या कैसे दूर करें। इसमें एक कानूनी सलाहकार नरेंद्र अहिरवार भी हमारी मदद करते हैं, जिसके बाद हम लोग इन महिलाओं की मदद करते हैं। इसलिए इन महिलाओं की मदद के लिए मंगलवार को हम लोग यहां इन महिलाओं को लेकर आए हैं ताकि उनकी समस्याएं दूर हो सके। दल की सदस्यों का कहना है कि टीवी और अखबारों में जिले में एक गुलाबी गैंग की खबर पढ़ी थी, जो शराब के लिए अभियान चलाती है। इस गैंग की लंबे समय से कोई गतिविधि नहीं दिखी तो हम लोग महिलाओं की मदद के लिए यह कार्य कर रहे हैं।

 

कोई एक रिश्ता सारे रिश्तों की जगह नहीं ले सकता

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सुषमा त्रिपाठी

जिन्दगी में अच्छे दोस्तों की जरूरत सबको पड़ती है फिर भले ही आप सिंगल हों या मिंगल। दोस्त होते भी हैं मगर आमतौर पर उनका साथ शादी के बाद कम हो जाता है और अगर दोस्ती महिलाओं और पुरुषों के बीच हुई तो खत्म ही हो जाती है। यकीन नहीं होता मगर एक अजनबीपन रिश्ते में तो आ ही जाता है क्योंकि अपने जीवनसाथी के सामने किसी महिला या पुरुष दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर, या धौल मारकर आप खिलखिला नहीं सकते और न ही उसकी खिंचाई कर सकते हैं। सच तो यह है कि हम चाहते ही नहीं हैं कि हमारा जीवनसाथी हमारे दोस्तों के करीब हो या हमारी जिन्दगी के उन अनछुए पहलुओं को जाने जो हम छिपाकर रखना चाहते हैं। एक बात तो तय है कि शादी के बाद आपकी प्राथमिकता बदल जाती है क्योंकि सहेलियों या दोस्तों के साथ रहते हुए भी आप उनके साथ नहीं होते। आपकी जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं। सच तो यह है कि दोस्ती और प्यार या फिर शादी में लोग अपनी शादी बचाते हैं या फिर प्यार बचाते हैं। ये लड़कियों के साथ भी होता है और लड़कों के साथ भी होता है। जिन्दगी का एक लम्बा अरसा किसी शख्स के साथ गुजारने के बाद आप एक शख्स को इसलिए धोखा देने और छोड़ने पर मजबूर होते हैं क्योंकि आपका जीवनसाथी या परिवार उसे पसन्द नहीं करता और आप दोनों पर शक किया जाता है। हमारे समाज का ढांचा ही विचित्र है जो स्मार्ट फोन चलाता है मगर अपनी सोच को अपडेट करने की जरूरत नहीं समझता। इसके बाद जिन्दगी भर या तो खुदगर्ज होकर जीने पर मजबूर होते हैं या फिर अपराधबोध के साथ घुटते रहते हैं क्योंकि आपकी स्थिति ऐसी हो जाती है कि आप सैंडविच बन चुके होते हैं और अनायास ही आप अपने दोस्त को खो चुके होते हैं जो आपके हर अच्छे – बुरे वक्त में आपके साथ रहा, आपके दुःख में रोया और आपकी सफलता पर नाचा…जिसके कँधे पर सिर रखकर आप रोये..आप जानते हैं कि यह आपकी निजी क्षति है और आप इसकी भरपाई कभी नहीं कर सकेंगे और न ही आपका जीवनसाथी कर सकेगा।

लव यू जिन्दगी में एक संवाद है….हम अपने एक रोमांटिक रिश्ते पर सारे रिश्तों का बोझ डाल देते हैं और उसी से सारी अपेक्षायें रखते हैं मगर ये नहीं समझ पाते कि ऐसा नहीं हो सकता। जब ये उम्मीदें पूरी नहीं होतीं तो विश्वास दरकने में समय नहीं लगता और जब आपका त्याग कुंठा में बदलता जाता है। आप न चाहते हुए भी अपने साथी को दोषी मानते हैं और आपकी तल्खी आपके व्यवहार में दिखती है। आप चाहे किसी एक को चुनें या किसी एक को छोड़ें, वह क्षति तो आपकी ही है। जिन्दगी में हर रिश्ते की अपनी एक जगह है और एक रिश्ता दूसरे रिश्ते की कमी पूरी नहीं कर सकता। अगर दोस्त आपके जीवनसाथी नहीं बन सकते तो आपका जीवनसाथी हर बार आपका अच्छा दोस्त साबित हो या आपका हमराज बन जाये, यह जरूरी नहीं है। बेहतर हो कि दोस्ती का दायरा भी ऐसा ही विस्तृत हो और आपका साथी उसका हिस्सा बने। आप भी अपने साथी को उसका स्पेस दें और उसके पुराने दोस्तों से मिलवायें या खुद दोस्ती करें…मुश्किल है..मगर नामुमकिन नहीं है।

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों होता है.कि शादी के बाद आप बदलते हैं या आपकी प्राथमिकतायें बदलती हैं। खुद से सवाल कीजिये कि क्या आपने कभी अपनी पत्नी या अपने पति को उसका स्पेस दिया है या उसके दोस्तों के बीच में आये हैं? ..जरा अपनी आदतों और बातचीत के तरीके पर गौर फरमाइये…अधिकतर लड़के या लड़कियों की शब्दावली अपने जीवनसाथी को लेकर कुछ ऐसी होती है कि मैं रखूँगा..मैं करवाऊंगा….मेरा होगा…मेरी पसन्अद चलेगी। अच्छा लगता है यह सुनने में मगर आपके ये शब्द अनायास ही वह स्पेस छीन रहे हैं कि जो कि उसका है। शादी के बाद क्या किसी का व्यक्तित्व खत्म हो जाना चाहिए…? लड़कों की बात करें तो यह सोच ही क्यों रहे कि उसके फैसले आप लेंगे और यही बात लड़कियों पर भी लागू होती है। कई लोग अपने साथी का सोशल प्रोफाइल से लेकर मोबाइल तक चेक करते हैं तो कुछ ऐसे होते हैं कि चाहते ही नहीं कि उसकी पत्नी फेसबुक या व्हाट्सऐप इस्तेमाल करे। अगर वह इस्तेमाल करती या करता है तो उसके दोस्तों पर नजर रखते हैं और अगर लड़कों या लड़कियों की संख्या ज्यादा हुई तो कई बार अकाउंट बंद करवा देते हैं। उस पर दोहरापन ये कि खुद लड़कियों से दोस्ती करेंगे तो ऐसी स्थिति में घर में अगर झगड़े नहीं होंगे तो क्या होगा? दूसरी ओर लड़कियाँ ऐसी होती हैं कि हर आधे घंटे पर फोन बजाकर पति की जासूसी करती हैं….या फिर उन पर नजर रखती हैं। कई लड़कियाँ ऐसी भी हैं जो इस हद तक शक्की होती हैं कि पति के दफ्तर में जाकर उसकी सहकर्मी से लड़ बैठती हैं। अब सवाल यह है कि क्या आप ऐसा करके अपनी गरिमा नहीं गिरा रहीं और क्या आपका यह कदम आपके पति को आपसे क्या दूर नहीं करेगा क्या उसकी सहानुभूति उस सहकर्मी के प्रति नहीं होगी? ये तमाशा आपकी समस्या का समाधान तो कतई नहीं है, आपको तमाशा जरूर बना देगा। इससे ये होगा कि आपके स्वभाव के कारण अगर कोई रिश्ता न भी हुआ तो बन बैठेगा और फिर आपके पास बचाने के लिए कुछ नहीं बचेगा। बतौर पति अपनी पत्नी को सात परदों में रखने की जगह आप उसके सपनों को पूरा करने में मदद करेंगे तो आपके प्रति विश्वास और गहरा होगा। पजेसिव होना हर बार प्यार नहीं होता बल्कि एक घुटन भर देता है। शादी के बाद पति की दोस्त या सहकर्मी लड़कियों को इसलिए खटकने लगती है क्योंकि पति उस दोस्त की बहुत इज्जत करता है या मानता है या चाहता है। हर चाहत का मतलब सिर्फ दैहिक भूख नहीं होती और न हर बार  प्यार का मतलब रोमांस होता है। कुछ रिश्ते विशुद्ध संवेदनात्मक और भावनात्मक होते हैं और उनका एक ही नाम होता है…इंसानियत….। जो रिश्ता आपकी ढाल बन सकता है, अनजाने में आप उसे कटार बना देती हैं और वह अंततः आपके पति के सीने से होती हुई आपको ही चीरती है। यह सिर्फ आपकी असुरक्षा के कारण होता है। अगर आप सारे रिश्तों का बोझ और अपेक्षायें सिर्फ अपने कंधों पर उठाएँगे तो कन्धे टूटेंगे…इन सारी मुश्किलों का एक ही समाधान है कि अपने जीवनसाथी को अपने जीवन के हर मोड़ पर शामिल करिए…स्पष्टवादी बनना एक समय के लिए बुरा होता है मगर आगे चलकर इसके नतीजे अच्छे ही होते हैं। बेहतर है कि आप अपने उस खास दोस्त के बारे में पहले से ही अपने साथी को बताकर रखें…उनसे मिलवायें और उनकी दोस्ती करवायें…। आपके जीवनसाथी का दोस्त आपके लिए वरदान भी बन सकता है क्योंकि ये तो सच है कि वह आपके पति को आपसे ज्यादा समझता या समझती है…आप उसकी मदद से अपने जीवनसाथी को बेहतर समझ सकेंगे जब आप रिश्तों में स्पेस देंगे तो विश्वास का बंधन ही मजबूत होगा और एक नैतिक जिम्मेदारी बनेगी। एक रिश्ता निभाने के लिए दूसरा रिश्ता तोड़ लेना अक्लमंदी का काम नहीं है और न ही इसमें ईमानदारी है…जरूरी है कि आपके साथ इस तरह की स्थिति हो तो आप स्पष्ट तौर पर अपने साथी और अपने दोस्त से खुलकर बात करें और बतायें कि आप दोनों की जगह तय है और एक रिश्ता कभी दूसरे रिश्ते की जगह नहीं ले सकेगा…आपको दोनों चाहिए। लड़कियों के मामले में यह मुश्किल हो सकता है मगर बेहतर यही है कि आपका दोस्त आप दोनों का दोस्त बनें और इसके लिए माहौल बनाना तो आपको ही होगा। सच तो यह है कि आपको यह समझना होगा कि आपकी एक सीमा है और आप अपने साथी उन तमाम रिश्तों की जगह न तो ले सकते हैं और न ही वह कमी पूरी कर सकते हैं जो आपके आने के पहले थी तो फिर ऐसी जिद किस काम की जो पूरी हो ही न सके। इसके साथ ही अगर आप दोस्त हैं तो यह आपको समझना होगा कि शादी के बाद आपके दोस्त की प्राथमिकतायें और जिम्मेदारियाँ बदलनी स्वाभाविक है…आपने दोस्ती निभायी मगर आप अपने दोस्त के पति या पत्नी की जगह नहीं ले सकते और न ही ऐसी कोशिश करनी चाहिए। शर्तें मत लादिये और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहिए और जब लगे कि आप तमाम उलझनों का कारण हैं तो बेहतर है कि अपने कदम आगे बढ़ा लें क्योंकि कई बार हमारे चाहने से चीजें हमारे हिसाब से नहीं ढलतीं। हमें उनके हिसाब से ढलना पड़ता है….अगर आप अपने दोस्त को नहीं समझेंगे तो कौन समझेगा..दोस्ती भी समझने का ही नाम है तो बेहतर है कि समय रहते एक गरिमामय दूरी बनाकर रखी जाए कि ताकि आपके हिस्से की कुछ अच्छी यादें बची रहें…जरा सा संयम और समझदारी हर बिगड़े काम को बना सकती है क्योंकि कोई एक रिश्ता सारे रिश्तों की जगह नहीं ले सकता।

एप उपयोग गतिविधियों में 2017 में दिखी सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि: रपट

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नयी दिल्ली : मोबाइल एप नवोन्मेष और विकास में रुकावट के चलते 2017 में कुल एप उपयोग गतिविधियों में सुस्ती देखी गई। एप उपयोग गतिविधियों में 2016 की तुलना में सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि रही। एक रपट से इसकी जानकारी हुई। फ्लूरी एनालिटिक्स वार्षिक वैश्विक मोबाइल और एप उपयोग अध्ययन के अनुसार एप उपयोग गतिविधियों में 2017 में सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो कि 2016 में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर से कम है। इस संदर्भ में फ्लूरी एनालिटिक्स ने एप उपयोग को उपयोगकर्ता द्वारा एक एप को खोलने को एक सत्र के रूप में दर्ज किया है। फ्लूरी एनालिटिक्स, याहू मोबाइल डेवलपर सुइट का हिस्सा है। रपट के मुताबिक, 2017 में उद्योग से जुड़ी बड़ी कंपनियों ने बाजार में अच्छी स्थिति बनाई, जबकि कुछ साल पुरानी कंपनियों को पैर जमाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। इसके कारण वृद्धि स्थिर रह सकती है। उपयोगकर्ताओं मोबाइल एप इस्तेमाल करते समय अपनी विविधता को बनाए रखा।

कंपनी ने वैश्विक स्तर पर 2.6 अरब उपकरणों के एक मिलियन से ज्यादा एप की निगरानी की और बताया कि शॉपिंग खंड के एप का इस्तेमाल 54 प्रतिशत बढ़ा हैं क्योंकि लोगों ने मोबाइल शॉपिंग एप के माध्यम से ई-कॉमर्स में अपने खर्च को बरकरार रखा है। संगीत, मीडिया और मनोरंजन एप दुसरे नंबर पर रहा। इसमें सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की वृद्धि रही।

आयकर बचाने के लिए इन जरूरतों पर करें खर्च

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नयी दिल्ली : आयकर फाइल करते वक्त आपको अपने बचत और खर्चों की पूरी जानकारी देनी होती है, जिससे आपको जरुरी टैक्स छूट मिलती है।

टैक्स डिडक्शन की श्रेणी में आने वाले ज्यादातर खर्चे आयकर की धारा 80 सी के तहत आते हैं। इसके अलावा भी कुछ ऐसे खर्चे होते हैं जो आयकर की इस दायरे में नहीं बल्कि अन्य धाराओं के तहत आते हैं। अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको ऐसे ही कुछ खर्चों के बारे में बताएंगे। जो इनकम टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं

एजुकेशन लोन से मिलेगी ये छूट-

अगर आपने अपने लिए, पत्नी या बच्चे के लिए एजुकेशन लोन लिया हुआ है या फिर आप किसी ऐसे स्टूडेंट के कानूनी रूप से अभिभावक हैं, तो सेक्शन 80ई के तहत लोन के लिए भुगतान की गई ब्याज राशि पर क्लेम कर सकते हैं। किसी भी वित्त वर्ष में भुगतान की गई कुल ब्याज राशि बिना किसी लिमिट के इस कटौती के लिए वैध है।

ट्यूशन फीस भी टैक्स छूट के दायरे में-

स्कूल की ट्यूशन फीस भी सेक्शन 80सी के टैक्स बेनिफिट्स के दायरे में आती है। टैक्स बेनिफिट की राशि डेढ लाख रुपये प्रति वर्ष की कुल सीमा के भीतर रहेगी।

मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम से होगा ये फायदा-

सेक्शन 80डी के तहत मेडिकल इंश्योरेंस के लिए भुगतान की गई प्रीमियम राशि कटौती के लिए योग्य होती है। इस सेक्शन के तहत क्लेम की जाने वाली अधिकतम राशि 60,000 रुपये है। लेकिन इसमें कई उप सीमाएं भी शामिल हैं। कोई भी व्यक्ति 25000 रुपये की प्रीमियम राशि पर अधिकतम कटौती क्लेम कर सकता है, जो उसने खुद के लिए, पत्नी या आश्रित बच्चों के लिए दी है।

साथ ही 25000 रुपये की अतिरिक्त कटौती भी वैध होती है अगर प्रीमियम माता-पिता के लिए भुगतान किया गया है। अगर पॉलिसी धारक वरिष्ठ नागरिक है तो कटौती की लिमिट 30,000 रुपये होती है।

होम लोन भी टैक्स छूट में करेगा मदद-

सेक्शन 80सी के तहत होम लोन रिपेमेंट की प्रिंसिपल राशि पर कर कटौती उपलब्ध है। इस सेक्शन के अंतर्गत लागू कटौती में यह बात मायने नहीं रखती है कि आपने किस साल में भुगतान किया है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की राशि भी इस सेक्शन के अंतर्गत कटौती योग्य होती है।

होम लोन के ब्याज भुगतान पर टैक्स ब्रेक की सुविधा आयकर की धारा 24 के अंतर्गत दी जाती है। सेल्फ ऑक्युपाइड प्रॉपर्टी पर अधिकतम टैक्स डिडक्शन की सीमा 2 लाख रुपए निर्धारित है।

फर्स्ट टाइम बायर्स के लिए होम लोन की ब्याज राशि पर सेक्सन 80ईई के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का प्रावधान है। इस स्थिति में लोन राशि 35 लाख रुपये से कम और घर की कीमत 50 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

सेविंग एकाउंट पर ब्याज-

सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज सेक्शन 80टीटीए के तहत कटौती के लिए योग्य है। क्लेम की जाने वाली अधिकतम राशि 10,000 रुपये है। इसका मतलब यह नहीं है कि 10,000 रुपये तक का ब्याज आयकर के दायरे से बाहर है।

 

(साभार – नयी दुनिया )