Friday, April 3, 2026
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इस साल तीन महिलाओं समेत 50 श्रमिकों को मिलेगा प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कार

नयी दिल्ली : सरकार ने 2016 के लिये प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कारों की आज घोषणा की। यह पुरस्कार विभागीय उपक्रमों, लोक उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की इकाइयों के 50 श्रमिकों को दिया जाएगा।सरकार ने 2016 के लिये प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कारों की आज घोषणा की। यह पुरस्कार विभागीय उपक्रमों, लोक उपक्रमों तथा निजी क्षेत्र की इकाइयों के 50 श्रमिकों को दिया जाएगा। श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हालांकि इस साल कुल 32 श्रम पुरस्कार दिये जाएंगे लेकिन यह पुरस्कार पाने वाले कर्मचारियों की संख्या 50 हैं। इसमें तीन महिलाएं शामिल हैं।

बयान के अनुसार 34 सार्वजनिक क्षेत्र से तथा 16 निजी क्षेत्र के श्रमिकों को यह पुरस्कार मिला है। श्रम पुरस्कार चार श्रेणी…श्रम रत्न पुरस्कार, श्रम भूषण पुरस्कार, श्रम वीर: श्रम वीरांगना और श्रम श्री : श्रम देवी पुरस्कार… में दिये जाते हैं। इस साल प्रतिष्ठित श्रम रत्न पुरस्कार के लिये कोई नामांकन उपयुक्त नहीं पाये गये। सेल, भेल तथा टाटा स्टील के 12 श्रमिकों को श्रम भूषण से पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की गयी है। इसके तहत एक लाख रुपये नकद और सनद दिया जाता है।

नैवल डाकयार्ड, आर्डिनेंस फैक्टरी, राष्ट्रीय इस्पात निगम, टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पारादीप फास्फेट लि., ब्रह्मोस एयरोस्पेस के 18 श्रमिकों को श्रम वीर : श्रम वीरांगना पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी है। इसके तहत 60,000 रुपये का नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिया जाता है। बयान के अनुसार सीमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया, नैवल शिप रिपेयर यार्ड, टाटा मोटर्स, सुरत लिग्नाइट पावर प्लांट, लार्सन एंड टूब्रो लाइसफ आदि के 20 श्रमिकों को श्रम श्री : श्रम देवी पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी है। इसके तहत 40,000 रुपये तथा प्रमाण पत्र प्रदान किये जाते हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय हर साल प्रधानमंत्री श्रम अवार्ड की घोषणा करता है। ये पुरस्कार श्रमिकों के बेहतर कार्य, अनूठी क्षमता, उत्पादकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान आदि के लिये दिये जाते हैं।

 

बेटियों को भी बेटों की तरह देने होंगे समान अवसरः राष्ट्रपति

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देशवासियों को 69वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा कि गणतंत्र का दिन यह उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के महान प्रयासों और बलिदान को आभार के साथ याद करने का दिन है जिन्होंने अपना खून-पसीना एक करके, हमें आजादी दिलाई और हमारे गणतंत्र का निर्माण किया।

ये दिन हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को नमन करने का भी दिन है। देश के लोगों से ही लोकतंत्र बनता है। हमारे नागरिक, केवल गणतंत्र के निर्माता और संरक्षक ही नहीं हैं, बल्कि वे ही इसके आधार स्तंभ हैं।

हमारा हर नागरिक, हमारे लोकतंत्र को शक्ति देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि  जहां बेटियों को बेटों की ही तरह शिक्षा, स्वास्थ्य और आगे बढ़ने की सुविधाएं दी जाती हैं, ऐसे समान अवसरों वाले परिवार और समाज ही एक खुशहाल राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

इनोवेटिव बच्चे ही एक इनोवेटिव राष्ट्र का निर्माण करते हैं। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें एक जुनून के साथ जुट जाना चाहिए। हमारी शिक्षा-प्रणाली में रटकर याद करने और सुनाने के बजाय बच्चों को सोचने और तरह-तरह के प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमने साक्षरता को काफी बढ़ाया है। अब हमें शिक्षा के दायरे और बढ़ाने होंगे। शिक्षा-प्रणाली को ऊंचा उठाना, और उसके दायरे को बढ़ाना तथा 21वीं सदी की डिजिटल अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन की चुनौतियों के लिए समर्थ बनाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमने खाद्यान्न उत्पादन में काफी बढ़ोतरी की है, लेकिन अभी भी कुपोषण को दूर करने और प्रत्येक बच्चे की थाली में जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। यह हमारे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए और देश के भविष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

 

सुप्रीम कोर्ट में सीधे नियुक्त होने वाली पहली महिला वकील इंदु मल्होत्रा 

भारतीय न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सीधे उच्चतम न्यायालय में बतौर जज नियुक्त कर दिया है। आजादी के बाद से भारत के इतिहास में अब तक सिर्फ 6 महिला जज ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची हैं। इंदु सातवीं ऐसी महिला होंगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ जस्टिस आर भानुमति ही एकमात्र महिला जज हैं।

हालांकि उच्चतम न्यायालय में महिला जज की नियुक्ति का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। 1989 में पहली बार जस्टिस एम फातिमा बीवी को सुप्रीम कोर्ट में जज के बनाया गया था। उसके बाद जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सुप्रीम कोर्ट में जज की जिम्मेदारी मिली।

इंदु काफी वरिष्ठ वकील हैं। वे बीते 30 साल से इस पेशे में हैं। 2007 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली दूसरी महिला वकील के रूप के रूप में वह पदस्थ हुई थीं। इंदु का जन्म 1956 में बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने 1983 में इस पेशे में कदम रखा था। दिल्ली बार काउंसिल में उन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर प्रैक्टिस शुरू की थी। 1998 में वह सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में क्वॉलिफाई हुई थीं। उन्होंने परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया था। जिसके लिए उन्हें न्याय दिवस पर मुकेश गोस्वामी मेमोरियल प्राइज भी मिला था।

इंदु को विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से भारत में मध्यस्थता तंत्र के संस्थानीकरण मुद्दे की समीक्षा करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने ‘मध्यस्थता और सुलह का कानून और अभ्यास-2014’ नाम से एक किताब भी लिखी थी। जिसका अनावरण अप्रैल 2014 में किया गया था। इंदु के साथ-साथ कोलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ को भी देश की सर्वोच्च अदालत में जज के लिए नामित किया है। जोसेफ उस बेंच का हिस्सा थे जिसने उत्तराखंड में 2016 में लगे राष्ट्रपति शासन को खारिज कर दिया था।

 

दंडकारण्य और लेह में है मां सरस्वती का निवास

मां सरस्वती जी के भारत में दो ही सबसे प्राचीन देवस्थल माने जाते हैं पहला आंध्र प्रदेश में है जो ऋषि वेद व्यास द्वारा बनाया गया था।

आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले के मुधोल क्षेत्र में है बासर गांव। गोदावरी के तट पर बने इस गांव में है विद्या के देवी मां सरस्वती जी का विशाल मंदिर। सरस्वती जी का ऐसा ही दूसरा मंदिर जम्मू कश्मीर के लेह में है।

बासर गांव स्थित मंदिर के विषय में कहते हैं कि महाभारत के रचयिता महाऋषि वेद व्यास जब मानसिक उलझनों से उलझे हुए थे तब शांति के लिए तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े, अपने मुनि वृन्दों सहित उत्तर भारत की तीर्थ यात्राए कर दंडकारण्य (बासर का प्राचीन नाम) पहुंचे। उन्होंने गोदावरी नदी के तट के सौंदर्य को देख कर कुछ समय के लिए यहीं पर रुक गए।

कहते हैं कि मां सरस्वती के मंदिर से थोडी दूर स्थित दत्त मंदिर से होते हुए मंदिर तक गोदावरी नदी में कभी एक सुरंग हुआ करती थी, जिसके द्वारा उस समय के महाराज पूजा के लिए आया-जाया करते थे।

ऐसा कहा जाता है कि यहीं वाल्मीकि ऋषि ने रामायण लेखन प्रारंभ करने से पूर्व मां सरस्वती जी को प्रतिष्ठित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। इस मंदिर के निकट ही वाल्मीकि जी की संगमरमर की समाधि बनी है।

मंदिर के गर्भगृह, गोपुरम, परिक्रमा मार्ग आदि इसकी निर्माण योजना का हिस्सा हैं। मंदिर में केंद्रीय प्रतिमा सरस्वती जी की है, साथ ही लक्ष्मी जी भी विराजित हैं। सरस्वती जी की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में 4 फुट ऊंची है।

मंदिर में एक स्तंभ भी है जिसमें से संगीत के सातों स्वर सुने जा सकते हैं। यहां की विशिष्ट धार्मिक रीति अक्षरआराधना कहलाती है। इसमें बच्चों को विद्या अध्ययन प्रारंभ कराने से पूर्व अक्षराभिषेक हेतु यहां लाया जाता है और प्रसाद में हल्दी का लेप खाने को दिया जाता है।

मंदिर के पूर्व में निकट ही महाकाली मंदिर है और लगभग एक सौ मीटर दूर एक गुफा है। यहीं एक अनगढ़ सी चट्टान भी है, जहां सीताजी के आभूषण रखे हैं। बासर गांव में 8 ताल हैं जिन्हें वाल्मीकि तीर्थ, विष्णु तीर्थ, गणेश तीर्थ, पुथा तीर्थ कहा जाता है।

स्त्री के संघर्ष की गाथा

 डॉ. साधना झा

आहत हुआ

भरी सभा में

याज्ञवल्क्य का अहम् जब

ब्रह्मवादिनी गार्गी के प्रश्नों से !

एक स्त्री से !

सहज नहीं होता पराजित होना कभी ।

फिर ?

बनाए गए नियम

गढ़े गए मिथक

देवी का !

धरती का !

त्यागमयी ममतामयी कल्याणी का ।

और ?

उलझकर रह गई वह

आचार संहिता के शब्द-जाल में !

पहचान खो गई उसकी

संस्कारों के मोह-पाश में !

टूट गए सारे उसके

रंगीन सपने सजे सुनहरे पंख ।

 

फिर ?

शुरू हुई स्त्री की

अंतहीन संघर्ष की गाथा !

                                                             

 

 

महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड मशीन लगाने वाला पहला रेलवे स्टेशन बना भोपाल

महिलाओं को पीरियड्स के वक्त सार्वजनिक जगहों और खासकर सफर करते हुए काफी मुशिकलें उठानी पड़ती हैं। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब सफर रेलवे से हो रहा हो। क्योंकि तब सैनिटरी नैपकिन का जुगाड़ करने में खासी मुश्किल होती है। लेकिन भोपाल रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन बन गया है जहां पर सैनिटरी पैड डिस्पेंसर मशीन लगाई गई है। महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया। इस मशीन का नाम हैपी नारी रखा गया है। इसे इसी साल नव वर्ष पर 1 जनवरी को इंस्टाल किया गया था। एक अच्छी बात और हुई कि मशीन का उद्घाटन रेलवे अधिकारियों की मौजूदगी में सबसे सीनियर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अंजलि ठाकुर द्वारा कराया गया।

स्टेशन पर लगी इस मशीन से सिर्फ 5 रुपये डालकर दो नैपकिन निकाले जा सकेंगे। स्थानीय संहठन ‘आरुषि’ के प्रयासों से यह मशीन लगाई गई जिसमें एक बार में 75 सैनिटरी नैपकिन डाली जा सकती हैं। इसके लिए एक महिला कर्मचारी को भी ट्रेंड किया गया है जो इसे खाली होने पर दोबारा भरेगी। भोपाल रेलवे स्टेशन पर शीघ्र ही इन नैपकिन को डिस्पोज करने वाली मशीन भी लगाई जाएगी। हैपी नारी मशीन के लगाते ही वहां पर 9 घंटे के भीतर ही वेंडिंग मशीन से 600 से ज्यादा नैपकिन निकाली गईं। इससे साबित होता है कि देशभर के रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक जगहों पर इसकी कितनी जरूरत है।

रेलवे स्टेशन पर लगी इस मशीन से सबसे ज्यादा ट्रेन पर सफर करने वाली महिलाओं और आसपास के स्लम इलाके में रहने वाली महिलाओं ने सैनिटरी नैपकिन निकाला। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि तीन दिन के भीतर 2,000 सैनिटरी नैपकिन निकाले गए। महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन उनका सही से अमल नहीं हो पाता है। मई 2017 में केरल ऐसा पहला राज्य बना था जिसने सरकारी स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन के लिए वेंडिंग मशीन इंस्टॉल की थी।

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने परिसर में ऐसी ही मशीन लगाने के आदेश दिये थे ताकि महिला वकीलों और फरियादियों को पीरियड्स की वजह से दिक्कतें न उठानी पड़ें। कोर्ट ने इसके लिए 10 लाख रुपये भी स्वीकृत किए थे, जिसमें 3 वेंडिंग मशीन और 3 डिस्पोजिंग मशीनें लगाई गई थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी 2015 में चार सैनिटरी मशीन डिस्पेंसर्स मशीन लगाई थीं। एक ऐसे देश में जहां आज भी महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैलाई जाती हैं और उस पर बात करने से दूर भागा जाता है वहां ऐसी पहलों का स्वागत तो होना ही चाहिए।

 

फिल्मफेयर से नवाजे गए इरफान खान और विद्या बालन

फिल्मफेयर के 63वें संस्करण के आयोजन के दौरान बॉलीवुड की कई बड़े सितारे नजर आए। इरफान खान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।

मुंबई में 20 जनवरी की रात को जियो फिल्मफेयर के 63वें संस्करण का रंगारंग आयोजन किया गया। बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां इस दौरान नजर आईं। इरफान खान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर अवार्ड मिला। क्रिटिक कैटेगरी में बेस्ट एक्टर राजकुमार राव और बेस्ट एक्ट्रेस जायरा वसीम बनीं। फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ को बेस्ट फिल्म (पॉपुलर) और ‘न्यूटन’ को बेस्ट फिल्म (क्रिटिक) का अवार्ड दिया गया।

फिल्मफेयर अवार्ड 2017 की पूरी लिस्ट

  • बेस्ट ऐक्टर (पॉपुलर) का फिल्मफेयर अवॉर्ड फिल्म ‘हिन्दी मीडियम’ के लिए अभिनेता इरफान खान को दिया गया।
  • फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ के लिए विद्या बालन को बेस्ट एक्ट्रेस (पॉपुलर) का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
  • राजकुमार राव को बेस्ट एक्टर (क्रिटिक) का फिल्मफेयर अवार्ड फिलम ‘ट्रैप्ड’ के लिए मिला।
  • बेस्ट एक्ट्रेस (क्रिटिक) का फिल्मेयर अवार्ड सिक्रेट सुपरस्टार के लिए जायरा वसीम ने जीता है।
  • फिल्म‘ हिंदी मीडियम’ ने जीता 2018 की बेस्ट फिल्म (पॉपुलर) का फिल्मफेयर अवार्ड।
  • फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ के लिए अश्विनी अय्यर तिवारी ने बेस्ट डायरेक्टर (पॉपुलर) का फिल्म फेयर अवार्ड जीता है।
  • फिल्म ‘न्यूटन’ को बेस्ट क्रिटिक फिल्म का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है।
  • बप्पी लहरी को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला है।
  • बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का अवार्ड ‘द डेथ इन द गंज’ की कोंकणा सेन शर्मा को मिला।
  • राजकुमार राव को फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ के लिए बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल (मेल) का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है।
  • मेहर विज को फिल्म ‘सिक्रेट सुपरस्टार’ फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल (फीमेल) का फिल्मफेयर अवार्ड मिला है।
  • बेस्ट डायलॉग का फिल्मफेयर अवार्ड फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान के लिए हितेश कैवल्य ने जीता है।
  • बेस्ट स्क्रीप्ले का फिल्मफेयर अवार्ड शुभाषीस भूटियानी ने जीता है। उन्होंने मुक्ति भवन की स्क्रिप्ट लिखी है।
  • बेस्ट ओरिजिनल स्टोरी का फिल्मफेयर अवार्ड अमित वी मासुरकर को जाता है। उन्होंने फिल्म ‘न्यूटन’ की कहानी लिखी है।
  • बेस्ट म्यूजिक एल्बम का फिल्मफेयर अवार्ड प्रीतम को जग्गा जासूस के लिए मिला है।
  • अरिजीत सिंह को बेस्ट प्लैबैक सिंगर (मेल) का अवार्ड। उन्हें बदरीनाथ की दुल्हनिया फिल्म के ‘रोके ना रुके नैना’ गाने के लिए यह अवार्ड मिला।
  • फिल्मफेयर बेस्ट प्लेबैक सिंगर (फीमेल) का अवार्ड जीता है मेघना मिश्रा ने। यह अवार्ड उन्हें फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के ‘नच दी फिरा’ गाने के लिए दिया गया।
  • फिल्मफेयर बेस्ट लिरिक्स का अवार्ड अमिताभ भट्टाचार्य को फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के लिए मिला।
  • बेस्ट एक्शन का अवार्ड फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म के लिए टॉम स्ट्रदर को मिला है।
  • बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर का अवार्ड प्रीतम को फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के लिए मिला है।
  • बेस्ट कोरियोग्राफी का अवार्ड विजय गांगुली और रुएल को फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के गाने गल्ती से मिस्टेक के लिए मिला है।

फिल्मफेयर अवार्ड मिलने के बाद कई अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और अन्य कलाकारों ने ट्वीट अपनी खुशी जताई।

आज भी प्रेरक और प्रासंगिक हैं नेताजी के ये विचार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्‍म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा (तब के उड़ीसा) के कटक में हुआ था। महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सुभाष चंद्र बोस सहमत नहीं थे। ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर सुभाष चंद्र बोस ने भारत को आजादी दिलाने के मकसद से 21 अक्टूबर 1943 को ‘आजाद हिंद सरकार’ की स्थापना की और ‘आजाद हिंद फ़ौज’ का गठन किया। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ दिया। सुभाष चंद्र बोस के विचार बहुत क्रांतिकारी थे और उनकी बातें आज भी किसी के भी तन-मन में जोश भर सकती हैं. उनके जन्‍मदिवस के मौके पर हम आपको उनके ऐसे ही 10 विचारों के बारे में बता रहे हैं –

1. तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा।

2. याद रखिए सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है।

3. ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिले, हमारे अंदर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।

4. एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा: सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान। जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है। अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में समाहित कर लो।

5. सफलता, हमेशा असफलता के स्‍तंभ पर खड़ी होती है।

6. मेरा अनुभव है कि हमेशा आशा की कोई न कोई किरण आती है जो हमें जीवन से दूर भटकने नहीं देती।

7. जिस व्यक्ति के अंदर ‘सनक’ नहीं होती वो कभी महान नहीं बन सकता लेकिन उसके अंदर, इसके अलावा भी कुछ और होना चाहिए।

8. जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं, वो आगे बढ़ते हैं और उधार की ताकत वाले घायल हो जाते हैं।

9. हमारा सफर कितना ही भयानक, कष्टदायी और बदतर हो, लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना ही है. सफलता का दिन दूर हो सकता हैं, लेकिन उसका आना अनिवार्य ही है।

10. मां का प्यार सबसे गहरा होता है- स्वार्थरहित. इसको किसी भी तरह से मापा नहीं जा सकता।

तुझे पाना चाहता हूँ- फिर से

 अरुण भारद्वाज

देखता हूँ या सोचता हूँ, बैठता हूँ या जागता हूँ।

तेरी सूरत सामने आ जाती है,तेरी मूरत सामने आ जाती है।।

आज साल भर बाद तुम्हारी रेसिपी से बने नमक को देखकर……हाँ उस स्पेशल नमक को देखकर,जिसे तुम 2-3 मसाले मिलाकर बनाती थी। तुझे पाना चाहता हूँ – फिर से।

कितने दिनों बाद तुम्हारी गुम हुई पेनड्राइव अचानक सामने आ गई और उसी के साथ तेरी हर याद सामने आ गई। उसकी हल्की मीठी आवाज मेरे कानों मे गूँजी- देखो ‘ARRY’ वाले फ़ोल्डर में सिर्फ़ तुम्हारी और मेरी फोटो है, सम्भाल कर रखना, घर जा रहे हो फ़ोल्डर हिडेन कर देती हूँ, याद आए तो फोटो देख लेना।

चाय की 4 बजे वाली हिचकी भी तो गवाह है कि तुमने मुझे याद किया होगा।

देखो लिव इन को डेढ़ साल हो गए, डिसीजन  तो लेना ही पङेगा ना, उसने चाय में वो हल्का सा स्वादिष्ट नमक डालकर एक टक ताकते हुए कहा। जवाब देने से बचने के लिए मैं उठकर अपनी चाय के कप के साथ बालकनी में तुम्हारी पसन्द वाली आरामकुर्सी पर बैठ गया। वो भी मेरे बाजू मे रखे टेबल पर आकर बैठ गई और उसने मेरी आँखों में आँखें डालकर अपनी भवें सिकोड़ी। अब तो मुझे बोलना ही पङा- पीहू ! तुम फिर से सीरियस हो रही हो, तुम्हारी मेरी जो बात हुई थी “भूलो मत”।  उसके तुरन्त जवाब से मैं झनाझना गया था ।

देखो जो तुमने कहा था वो मुझे याद है और रिश्ते ऐसे कॉन्ट्रैक्ट पर नही चलते। किसी दिन छोड़कर चली गई न तो कभी वापस नहीं आऊँगी।

लेकिन मै तुम्हें वापस पाना चाहता हूँ – फिर से।

तेरे बिना अब कुछ अच्छा नही, तू नहीं तो मैं कुछ भी नही।

मेरी सांसें तेरा पीछा करती है, दिल की हर धङकन में तू धङकती है।।

तू मेरे पास नहीं है तो लगता है पास कहीं तू रहती है।

आज फिर तुम्हें पाने की ख्वाहिश दिल में जाग रही है।

न चाहते हुए भी ‘ARRY’ वाला फ़ोल्डर भी खुल ही गया और तेरी याद की एक और तह खुल गई। जो तुमने अपनी जुल्फ़ों से आधा मुँह छिपाकर ठुड्डी वाले तिल का फोटो भेजा था न वही मेरी आँखो के सामने था।

“अरे यार पीहू तुम इंटर्नशिप  के टाइम कितनी मोटी थी।”

अरे….देखो मैं मोटी कभी नहीं थी। उसने चुलबुले अन्दाज में गुस्सा दिखाकर फिर कहा और तुम्हारे कहने से मै मोटी नही हो जाऊँगी। उस टाइम थोड़ी हेल्दी थी बस।

अब जब खोजने चला तो हर जगह तेरी याद थी,रसोई में,कमरे में, बेड पर, तकिये मे……… हाँ ये वही तकिया था जिसे तुम हटाकर मेरा हाथ अपने सिर के नीचे रख लेती थी और कहती थी मुझे ऐसे ही नींद आएगी। वैसे तुम्हें तो बिना मुझसे चिपके नींद नही आती थी फिर तुम मुझसे दूर कैसे चली गयी।

यार पीहू…अंडा नही खाया जाता मुझसे, मै अपने ट्रेनर को बोल दूँगा… बिना अंडे वाली डाइट बता दो। तुम्हारे उसी जादुई नमक ने मेरी डाईट में अंडा भी मिला दिया।

मुझे पता है तुम वो स्पेशल नमक बनाने फिर से नहीं आओगी,

लेकिन मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ – फिर से।

शायद तुम अपनी जिन्दगी में खुश हो, और थोड़े दिनों मे तुम्हारी किसी शुक्ला,तिवारी,शर्मा या झा से शादी हो जाएगी लेकिन क्या तुम्हें मेरी याद नही सताएगी। कितना इजी  था ना “दिल पर पत्थर रखकर” गाना बजाया और ब्रेकअप कर लिया, 2 दिन का डिप्रेशन  और सबकुछ खत्म।

लेकिन यार पीहू तेरी गोद मे सिर रखकर सोना चाहता हूँ- फिर से।

तुझे पाना चाहता हूँ- फिर से।

बसन्त की खूबसूरती बढ़ा देता है पीला रंग

हिन्दू धर्म में पीले रंग को शुभ माना गया है। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है। वसंत पंचमी के पर्व पर वैसे भी चटख पीला रंग उत्साह और विवेक का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ सफेद रंग से जुड़ी शांति भी शामिल हो जाती है। वसंत का अर्थ है वसंत और पंचमी का मतलब है पांचवा जिस दिन यह त्योहार मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व हर साल माघ महीने के पांचवे दिन होता है।कई समुदायों के बीच बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन को बच्चों के पढ़ने और लिखने की शुरूआत के रूप में बेहद ही शुभ माना जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा कर प्रार्थना की जाती है। यह त्योहार वसंत ऋतु आने का सूचक है। इस मौके पर लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और स्वादिष्ट मौसमी व्यंजनों का मजा लेते हैं। कई लोग इस पर्व के अवसर पर पतंग उड़ाते है या अन्य खेल खेलते हैं। इस त्योहार पर पीले रंग का बहुत महत्व है, बसंत का रंग पीला होता है जिसे बसंती रंग के नाम से जाना जाता है। जोकि समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है. यही कारण है कि लोग इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और पीले रंग के व्यंजन बनाते हैं।

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व है। दरअसल, बसंत ऋतु में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। इसे ध्यान में रखकर इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनकर वसंत पंचमी का स्वागत करते हैं। इस द‍िन सूर्य उत्तरायण होता है, जो यह संदेश देता है कि हमें सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए।

सभी ऋतुओं में बसंत ही ऐसी ऋतु है जिसमें सभी ऋतुओं की अपेक्षा धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस दौरान फसल पकती है। पेड़-पौधों में नई कोपलें फूटती हैं। वसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है। वसंत पंचमी यानी प्रकृति के उत्सव का दिन। मां सरस्वती की आराधना का यह पर्व मंद-शीतल वायु के प्रवाह, प्रकृति की पीली चुनरी के साथ नए उत्साह के संचार का संदेश लाता है। बसंत पंचमी के दिन सिर्फ कपड़े ही नहीं बल्कि खाने में भी पीले रंग की चीजें बनायी जाती हैं। इसमें पीले रंग के चावल, पीली पूरियां, पीले लड्डू और केसर की खीर शामिल है। एक शोध के अनुसार, पीले रंग के कपड़े पहने से दिमाग का सोचने समझने वाला हिस्सा अधिक सक्रिय हो जाता है जो इंसान के अंदर उर्जा पैदा करता है। पीला रंग इंसान को खुशी और उमंग प्रदान करता है।