Saturday, April 4, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 725

‘सदमा’ दे कर ‘चांदनी’ हुई मौन

मुम्बई : करीब चार दशकों तक अपने दमदार अभिनय और दिलकश अदाओं से सिने प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली वरिष्ठ अभिनेत्री श्रीदेवी का दुबई में बीती रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। ‘‘सदमा’’, ‘‘चांदनी’’, ‘‘लम्हे’’ से लेकर ‘‘इंग्लिश विंग्लिश’’ और ‘‘मॉम’’ आदि फिल्मों में तक विविधतापूर्ण किरदारों को पर्दे पर सजीव बनाने वाली श्रीदेवी 54 वर्ष की थीं।
फिल्म निर्माता बोनी कपूर से विवाह करने वाली श्रीदेवी की दो पुत्रियां… जाह्नवी और खुशी हैं। वर्ष 2013 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित की जा चुकीं श्रीदेवी ने अपने अभिनय की शुरूआत चार साल की उम्र में तमिल फिल्म ‘‘थुनाइवन’’ से 1969 में की। मलयालम, तेलुगु ओर कन्नड़ फिल्मों में अभिनय की अपनी सफल पारी के बाद श्रीदेवी दक्षिण भारतीय फिल्मों का एक लोकप्रिय चेहरा बन गईं।
बॉलीवुड में उन्होंने अपना कदम फिल्म ‘‘सोलवां सावन’’ से रखा। यह फिल्म 1978 में आई लेकिन श्रीदेवी को पहचान नहीं दे पाई। पांच साल बाद श्रीदेवी फिल्म ‘‘हिम्मतवाला’’ में अभिनेता जीतेंद्र के साथ आईं और इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी।‘‘हिम्मतवाला’’ के बाद श्रीदेवी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और नायक प्रधान फिल्मों के दौर में उन्होंने ‘‘मवाली’’ (1983), ‘‘तोहफा’’ (1984), ‘‘मिस्टर इंडिया’’ (1987), ‘‘चांदनी’’ (1989), ‘‘चालबाज’’ (1989), ‘‘लम्हे’’ (1991) और ‘गुमराह’ (1993) जैसी फिल्में दीं। बॉक्स ऑफिस पर हिट कहलाने वाली इन फिल्मों के बीच उनकी फिल्म ‘‘सदमा’’ एक अलग पहचान रखती है। यह फिल्म 1983 में आई थी।

फिल्म ‘‘जुदाई’’ में उन्होंने अनिल कपूर और उर्मिला मातोंडकर के साथ काम किया। इसके बाद ही श्रीदेवी ने अनिल कपूर के बड़े भाई बोनी कपूर से विवाह किया और करीब 15 साल तक रूपहले पर्दे पर नजर नहीं आईं। इस लंबे अंतराल में अपनी दो बेटियों की परवरिश करने के बाद श्रीदेवी साल 2012 में गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी ‘‘इंग्लिश विंग्लिश’’ में नजर आईं। इस फिल्म में श्रीदेवी अपनी ‘‘ग्लैमर क्वीन’’ की छवि से बिल्कुल अलग, मध्यम वर्गीय गृहणी की भूमिका में नजर आईं जो इंग्लिश बोलने की चाहत इसलिए रखती है कि उसका परिवार उसकी अहमियत समझे।

बीते साल वह ‘‘मॉम’’ फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी ओर अक्षय खन्ना के साथ दिखाई दीं। उन्होंने अभिनेता शाहरूख खान की आगामी फिल्म ‘‘जीरो’’ में एक अतिथि भूमिका के लिए भी शूटिंग की। यह फिल्म दिसंबर में रिलीज होगी। श्रीदेवी ने अपनी अंतिम श्वांस दुबई में ली जहां वह अपने परिवार के साथ अपने भतीजे मोहित मारवाह के विवाह समारोह में शामिल होने गई थीं।

श्रीदेवी के परिवार से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि विवाह समारोह के बाद कुछ संबंधी दुबई से भारत लौट आए थे, लेकिन श्रीदेवी और उनकी छोटी बेटी खुशी दुबई में रूक गई थीं। श्रीदेवी की बड़ी बेटी जाह्नवी अपनी पहली फिल्म की शूटिंग की वजह से मुंबई में ही थीं।

 

वो चेहरा नकली है, ये खूबसूरती आपकी अपनी है….

प्यारी लड़कियों,

हमें पता है कि आप सुन्दर दिखना चाहती हैं और इसके लिए आप बहुत कोशिशें करती हैं…अपने वेतन और अपनी पॉकेट मनी का बड़ा हिस्सा आप अपने कपड़ों और मेकअप पर खर्च कर देती होंगी…फिऱ भले ही इसके बाद महीने का खर्च आपको अपने मम्मी – पापा से माँगकर ही क्यों न चलाना पड़े।

चेहरे के पीछे है यह चेहरा

खूबसूरत बनाने वाली हर चीज पर आपकी नजर होती है और कब यह आपका तनाव बन जाती है, खुद आपको पता ही नहीं चलता…। आपको पता ही नहीं चलता कि कब आपके हँसते हुए चेहरे की चमक कोई ब्रांडेड लिपस्टिक की ख्वाहिश छीन लेती है।

आप परदों पर चमकते चेहरों को देखती हैं और वैसी ही खूबसूरती पाने के लिए कमर कस लेती हैं। तो हमने सोचा कि हम आपको उन चेहरे की चमक और उनकी हकीकत दिखा दें….जिनको देखने के बाद शायद आपको खुद पर नाज हो…होना भी चाहिए।

दिक्कत है कि ऐसा है नहीं। आप डायटिंग करने लगती हैं…आप हर वो चीज छोड़ देती हैं जो आपको बहुत प्यारी थीं। आपकी कमर की चर्बी कम होती जाती है और आपको पता ही नहीं चलता है कि कब वह कुपोषण में तब्दील हो जाता है। आप अपनी त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए महँगे से महँगा फेसपैक लगाती हैं, कई बार आप इसके लिए किसी विशेषज्ञ से ज्यादा विज्ञापन पर भरोसा करती हैं मगर क्या आपको नहीं लगता कि हर रंग की अपनी खूबसूरती होती है और नकली आवरण ओढ़कर प्राकृतिक खूबसूरती नहीं पायी जा सकती है।

आप अपनी पूरी ताकत और ऊर्जा बस सुन्दर बनने के पीछे खर्च कर देती हैं और इस बीच आपको याद भी नहीं रहता है कि आपमें इतनी खूबियाँ हैं कि आपको नकली चेहरा ओढ़ने की जरूरत ही नहीं है। हर रंग खूबसूरत है….जी हाँ…साँवला रंग भी बेहद खूबसूरत होता है…आपको त्वचा के पोषण पर ध्यान देने की जरूरत है। खुद को भूखा रहकर और तमाम मेकअप और तामझाम के बाद आयी सुन्दरता की जरूरत आपको नहीं है।

बगैर मेकअप के सितारे

प्रतिभा और सफलता आपको खूबसूरत बनाती है, जब आपके विचार चमकते हैं तो आपके चेहरे पर वह चमक आती है। जब आपकी आँखों में सच्चाई और आत्मविश्वास की चमक होती है तो आपको महँगे आईलाइनर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

प्रकृति के करीब जाइए और कभी अपनी माँ – दादी – नानी को गौर से देखिए…..उनकी खूबसूरती को महँगे सौंदर्य प्रसाधनों की जरूरत नहीं पड़ी थी। आपका दिल साफ होगा तो उसकी चमक आपकी निश्चल हँसी में दिखायी पड़ेगी…अपने – आप को स्वीकार करना सीखिए…..खूबसूरती की पहली चमक तो वहीं से आ सकती है।

खूबसूरती विचारों में, आत्मनिर्भरता में, विश्वास में, प्रतिभा में, सच मे, साहस में, कुरीतियों को तोड़ने में है,सबको आगे ले जाने में है।

यकीन मानिए, अगर आपके पास ये सब है तो आपसे सुन्दर कोई नहीं है। कोई नहीं….खुश रहिए….खुद से प्यार कीजिए…खूबसूरती तो यूं ही आ जायेगी।

  • आपकी दोस्त

बॉलीवुड अभिनेत्रिय़ों की खूबसूरती पर सोनम कपूर के आर्टिकल का अनुवाद

पुनीत शुक्ला  की फेसबुक वॉल से अपराजिता ने साभार यह पत्र लिया है। इसका हिन्दी अनुवाद अजीत भारती ने किया है…ये आपके लिए है और आपको ये ध्यान से पढ़ना चाहिए क्योंकि ये आपको मौका देगा कि आप खुद से प्यार कर सकें।   खासकर इस स्वीकार करने और उसे सामने लाने का साहस जो सोनम ने दिखाया है, उसके लिए वह बधाई की पात्र हैं।            

टीनएज लड़कियो, अगर सुबह जगकर अपने बेडरूम के शीशे में खुद को जब देखती हो और ये सोचती हो कि आख़िर तुम उन तमाम सेलिब्रिटीज़ की तरह क्यों नहीं दिखती, तो ये जान लो कि कोई भी लड़की बिस्तर छोड़ते ही वैसी नहीं दिखती। मैं तो नहीं दिखती, न ही कोई भी और हिरोइनें जिन्हें तुम फ़िल्मों में देखती हो। (बियॉन्से भी नहीं, मैं कसम खाकर कह रही हूँ।)

अब असली बात जान लो: हर पब्लिक आयोजन में जाने से पहले, मैं अपने मेकअप की कुर्सी में बैठकर 90 मिनट का समय देती हूँ। तीन से छः लोग मेरे बाल और मेकअप पर काम करते हैं, जबकि एक आदमी मेरे नाख़ून तराशता रहता है। हर सप्ताह मेरी भवें सँवारी जाती हैं, उनकी थ्रेडिंग और ट्वीज़िंग की जाती है। मेरे शरीर के कई हिस्सों पर ‘कन्सीलर’ लगा होता है जिसके बारे में मैं कभी सोच नहीं सकती थी कि इन्हें छुपाने की ज़रूरत होती होगी!

मैं हर रोज सुबह 6 बजे जग जाती हूँ, और 7:30 बजे तक जिम में होती हूँ। लगभग 90 मिनट का समय हर सुबह, और कई शाम सोने से पहले भी, व्यायाम के लिए होता है। मैं क्या खाऊँ, क्या नहीं खाऊँ, ये बताने के लिए किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखा जाता है। मेरे फ़ेसपैक में मेरे भोजन से ज्यादा चीज़ें होती हैं। मेरे कपड़ों को चुनने के लिए लोगों की एक पूरी टीम है।

इतने के बाद भी जब मैं ‘फ़्लॉलेस’ नहीं दिखती तो फोटोशॉप पर खूब काम किया जाता है।

मैंने पहले भी कहा है, और फिर से कहूँगी कि किसी मॉडल/सेलिब्रिटी को वैसा दिखाने के लिए कई लोगों की एक पूरी फ़ौज, बहुत ज्यादा पैसा, और काफ़ी समय लगता है। ये न तो वास्तविक है, न ही कोई ऐसी चीज है जिसको पाने की कोशिश करनी चाहिए।

खुद में विश्वास करो। ऐसा बनने की सोचो जहाँ तुम खूबसूरत, उन्मुक्त और खुश रहो, जहाँ तुम्हें एक खास तरीक़े का बनने की कोई ज़रूरत न हो।

और हाँ, अगली बार से जब भी किसी तेरह साल की बच्ची को किसी मैगजीन कवर पर चमकती बॉलीवुड सेलिब्रिटी की तस्वीर को ललचायी निगाहों से देखती देखो तो उसी वक्त उसे ये बता कर उसका भ्रम तोड़ दो।

उसको बता दो कि वो कितनी ख़ूबसूरत है। उसकी सुंदर मुस्कुराहट की बातें करो, उसकी हँसी, उसकी बुद्धि या उसके आत्मविश्वास की बात करो।

उसके भीतर ये विचार पनपने मत दो कि उसमें कोई कमी है, या उसमें कुछ ऐसा नहीं है जो पोस्टर, बिलबोर्ड आदि पर लगी तस्वीर में दिखती सेलिब्रिटी में है। उसको अपने लिए ऐसे मानक बनाने से रोको जो उसके लिए ही नहीं, उन तारिकाओं के लिए भी बहुत ऊँचे हैं।

सोनम कपूर (हिन्दी अनुवाद: अजीत भारती)

मुस्लिम पिता ने अनाथ हिंदू लड़के को लिया गोद फिर हिंदू रीति रिवाजों से की शादी

हमारे समाज में बच्चों को जितना प्यार दिया जाता है उससे कहीं ज्यादा उनपर बंदिशे भी लगा दी जाती हैं। बच्चे के पैदा होने से लेकर उसकी पढ़ाई-लिखाई, पसंद नापसंद, शादी और रहने के तरीके तक में मां-बाप का पूरा दखल होता है। लेकिन उत्तराखंड में एक पिता ने अपने गोद लिए बेटे को उसके मन मुताबिक और उसके धर्म के अनुसार शादी की। यह अनोखी शादी देहरादून में हुई जहां मोइनुद्दीन ने अपने गोद लिए बेटे राकेश रस्तोगी का विवाह हिंदू रीति रिवाजों से किया। मोइनुद्दीन ने राकेश को 12 साल की उम्र में गोद लिया था।

मोइनुद्दीन की दो बेटियां और एक और बेटा भी है, लेकिन वह राकेश को ही बड़ा बेटा मानते हैं। एएनआई के मुताबिक राकेश को घर में हिंदू धर्म को मानने की पूरी आजादी थी। घर में सभी हिंदू त्यौहार मनाए जाते हैं और हिंदू देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। राकेश के पालन-पोषण में भी मोइनुद्दीन ने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जब बात शादी की आई तो मुश्किल आ खड़ी हुई। कोई भी हिंदी परिवार मोइनुद्दीन के यहां अपनी बेटी भेजने को राजी नहीं था। लेकिन बाद में मोथरोवाला के आत्माराम चौहान अपनी बेटी सोनी की शादी राकेश के साथ करने को राजी हो गए।

हालांकि मोइनुद्दीन ने आज से 15 साल पहले जब राकेश को गोद लिया था तो उनके परिवार वालों और करीबियों ने उन्हें ताने दिए थे और ऐसा न करने को कहा था। लेकिन मोइनुद्दीन ने सिर्फ अपने दिल की सुनी। उन्होंने बताया कि उनका परिवार ईद की तरह ही होली और दिवाली मनाता है। राकेश ने भी कहा कि उसे कभी नहीं लगा कि वह एक मुस्लिम परिवार में पला बढ़ा है। आत्माराम जब रिश्ते के लिए मोइनुद्दीन के घर आए तो वे घर का नजारा देखकर हैरान रह गए। एक मुस्लिम के यहां हिंदू बेटे का रहना और उसे अपने धर्म के मुताबिक काम करने के लिए मिली पूरी आजादी देखकर आत्माराम को खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने फौरन अपनी बेटी का ब्याह राकेश के साथ करने के लिए हां बोल दिया।

 सब कुछ तय होने के बाद पिछले सप्ताह शुक्रवार को राकेश की बारात आत्माराम के यहां गई और पूरे हिंदू रीति रिवाजों के साथ शादी संपन्न हुई। इस अनोखी शादी का स्वागत भी धूमधाम तरीके से किया गया। इस शादी में प्रशासन के भी कई अधिकारी शामिल हुए। बाद में जब सोनी ब्याहकर मोइनुद्दीन के घर आई तो वहां भी लोगों ने उसका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया। घर में रिसेप्शन में मोइनुद्दीन ने मेहमानों के लिए शाकाहारी खाना ही परोसा। हिंदू मुस्लिम एकता की इस मिसाल से वाकई पूरे देशवासियों को काफी कुछ सीखने की जरूरत है।
(साभार – योर स्टोरी)

इस महिला पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा विमान हादसा

हाल ही में भारत में दो विमानों की टक्कर होते-होते बची। यह हादसा एयर इंडिया की फ्लाइट A-631 और विस्तारा की फ्लाइट UK 997 के बीच होने वाला था। एयर इंडिया की फ्लाइट मुंबई से भोपाल और विस्तारा दिल्ली से पुणे के लिए जा रही थी। इन दोनों में कुल 261 यात्री सवार थे। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के बयान के मुताबिक किसी गलतफहमी के चलते दोनों विमान एक दूसरे के काफी पास आ गए थे, लेकिन एयर इंडिया की पायलट अनुपमा कोहली की सूझ-बूझ से काफी बड़ा हादसा टल गया।

दोनों विमान इतने करीब आ गए थे कि उन दोनों में महज 100 फीट का फासला बचा था। आपस में टकराने में कुछ सेकेंड्स ही काफी थे। रिजॉल्यूशन एडवाइजरी रिपोर्ट में अनुपमा ने बताया कि दोनों विमानों के बीच की दूरी 100 फीट से ज्यादा नहीं थी। लेकिन यह हादसा टल गया क्योंकि ऑटोमेटिक वॉर्निंग की वजह से दोनों विमानों के पायलटों ने अपनी स्थिति बदल ली। दिलचस्प बात यह है कि दोनों विमानों की कमान महिलाओं के हाथों में ही थी। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों विमानों को मैनेज करने वाले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को निलंबित करने के आदेश दे दिए हैं।

 एयर इंडिया की पायलट अनुपमा कोहली के पास विमान उड़ाने का 20 साल से अधिक लंबा अनुभव है। कोहली ने देखा कि उनके विमान की दिशा में विस्तारा का विमान रहा है। कोहली ने अपने अनुभव का पूरा प्रयोग करते हुए स्थिति को संभाल लिया। विस्तारा विमान को अपनी तरफ बढ़ते देख उन्हें रेड सिग्नल मिला। विस्तारा की महिला पायलट ने एटीसी को संपर्क के दौरान कहा कि आपने मुझे इसी लेवल पर उड़ान भरने का निर्देश दिया है। कोहली ने जब विस्तारा के विमान को इस तरफ आते देखा तो उन्होंने दाहिनी तरफ मुड़कर विमान के उड़ान के लिए जगह बना दी और अपने विमान को थोड़ा नीचे कर लिया। इस तरह दोनों विमान के यात्री सुरक्षित बच गए।

पायलट कोहली के त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और कुशलता से स्थिति संभालने के लिए एयर इंडिया ने काफी तारीफ की। विस्तारा एयरलाइंस का कहना है कि पायलट का टॉइलट ब्रेक नियमानुसार ही था और हमारा विमान निर्देश के अनुसार ही उड़ान भर रहा था। फाइनैंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की तरफ से मामले की जांच करने के लिए टीम गठित कर दी गई है। एयर इंडिया ने अनुपमा कोहली के काम को सराहा। AAIB ने उन्हें फिर से उड़ान भरने की मंजूरी दे दी है।

नौवीं कक्षा के छात्र ने रुकवाया अपना बाल विवाह

रुढ़िवादी मानसिकता को छोड़ युवा पढ़ लिखकर खुद के साथ ही देश की तरक्की की बात करने लगे हैं। मामला बाल विवाह सरीखी कुप्रथा का है। वैसे तो श्रवस्ती में नाबालिगों का विवाह आम बात है। लेकिन यह पहली दफा है जब किसी नाबालिग (कक्षा-नौ के छात्र) ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। पीड़ित ने अपने पिता के ही खिलाफ मल्हीपुर थाने में तहरीर दे दी। मामला मल्हीपुर थाने के ग्राम फत्तेपुर बनगई स्थित गड़रियनपुरवा गांव का है।

यहां रहने वाले बिकाऊ लाल ने अपने नाबालिग पुत्र हनुमान प्रसाद की शादी तय की है। जबकि हनुमान प्रसाद अभी कक्षा नौ की पढ़ाई कर रहा है। शादी की बात सुनकर हनुमान प्रसाद के होश उड़ गए। उसने पिता को कानून का हवाला देकर कहा कि उसकी शादी अभी नहीं की जा सकती। उसने तर्क दिया कि उसे पढ़ लिखकर कुछ बनना है, लिहाजा शादी नहीं करेगा। हालांकि परिजनों ने हनुमान की बात नहीं मानी और उल्टा दबाव बनाने लगे। यह देख हनुमान ने पुलिस से मदद की ठानी। शनिवार को मल्हीपुर थाने में पिता के खिलाफ तहरीर देकर शादी रुकवाने की गुहार की।

पिता के तनाव से बच्चों के दिमाग पर होता है असर

एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि बहुत ज्यादा तनाव आपके बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित कर सकता है।  शोधकतार्ओं के मुताबिक, तनाव पिता के शुक्राणुओं को बदल देता है, जिससे बच्चे के दिमाग का विकास बाधित हो सकता है।

शोधकतार्ओं ने कहा है कि नया शोध बच्चों के दिमाग के विकास में पिता की भूमिका की बेहतर समझ प्रदान करता है। इससे पहले यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल के शोधकतार्ओं ट्रेसी बेल व अन्य ने नर चूहों पर किए गए प्रयोग में पाया कि उसके क्रोनिक तनाव का मुख्य कारण उसके पिता के शुक्राणु में हुआ जेनेटिक मैटेरियल माइक्रोआरएनए में हुआ उत्परिवर्तन है। यह जीन प्रोटीन की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अब शोधकतार्ओं ने इन माइक्रोआरएनए में हुए बदलाव के संबध में नई जानकारियां हासिल की हैं। पिता के शुक्राणुओं के माइक्रोआरएनए में हुए परिवर्तन का मुख्य कारण तनाव है। इस शोध के परिणाम को ऑस्टिन में हुए एएएएस 2018 सालाना सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया। शोधकतार्ओं ने यह भी कहा कि पिता के जोखिम और बच्चों में बीमारी के जोखिम के बीच संबंधों के बारे में अधिक जानकारी हासिल कर हम इन विकारों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, जिससे इनका पता लगाने और इन्हें रोकने में कामयाबी मिलेगी।

निर्देश: तीन साल से ज्यादा बैंक की एक शाखा में नहीं रहेंगे अधिकारी

बैंकों द्वारा भेजे गए अधिकारियों के नियमित आवर्तन (रोटेशन) के निर्देश में कहा गया है कि सीवीसी के निर्देशों के मुताबिक हरेक अधिकारी का प्रत्येक तीन वर्ष में रोटेशन होना चाहिए। ऐसे में बैंक स्थानांतरण के नियमों के मुताबिक कोई भी अधिकारी एक पद पर तीन साल से ज्यादा एक शाखा में नहीं रहना चाहिए। यानी हरेक अधिकारी का स्थानांतरण तीन साल में अनिवार्य तौर पर होगा। क्लर्क समेत अन्य स्टाफ की सेवाएं भी पांच वर्ष से अधिक एक ब्रांच में नहीं होनी चाहिए। विभिन्न बैंकों द्वारा यह निर्देश सभी महाप्रबंधकों, उप महाप्रबंधकों, क्षेत्रीय प्रबंधक , उप क्षेत्रीय प्रबंधक और प्रबंधकों को भेजे गए हैं।
‘हिन्दुस्तान’ को मिले बैंक ऑफ इंडिया के निर्देश पत्र में उन अधिकारियों की सूची को भी संलग्न किया गया है, जो अधिकारी एक ही बैंक कार्यालय में तीन साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं।

सीवीसी ने 31 दिसंबर 2017 को दिए थे निर्देश  
सीवीसी ने 31 दिसंबर 2017 में बैंकों के अधिकारियों के रोटेशन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि 31 दिसंबर की तारीख से तीन साल पूरा करने वाले सभी अधिकारियों का सार्वजनिक बैंक अन्यत्र कहीं स्थानांतरित करें। अन्य स्टाफ को भी पांच साल पूरा होते ही स्थानांतरित किया जाए। बैंकों को यह दिशा-निर्देश जारी कर सीवीसी ने उसे तत्काल सूचित करने को भी कहा था। हालांकि वित्त मंत्रालय के सूत्रों की माने बैंकों की ओर से अब तक सीवीसी को इस बारे में सूचित नहीं किया गया।

अधिकारी कर रहे हीलाहवाली 
एक अधिकारी के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों के शीर्ष अधिकारी इस तरह के निर्देशों पर लचर रवैया अपनाते हैं। इसलिए उनका अनुपालन नहीं हो पाता है। माना जा रहा है कि बैंकों के शीर्ष अधिकारियों से जब सीवीसी के दिशा-निर्देशों के अनुपालन के बारे में मंत्रालय द्वारा पूछा गया तो इक्का-दुक्का को छोड़कर सभी की ओर से निराशाजनक जवाब दिया।

सीवीसी सख्त
अधिकारियों के निराशाजनक जवाब के बाद सीवीसी के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सख्ती से किए जाने को कहा गया। इसके बाद ही बैंक प्रबंधनों ने तीन साल में अनिवार्य रोटेशन के संबंध में निर्देश जारी किए।

साखपत्रों पर रिपोर्ट तलब 
मंत्रालय की ओर से एलओयू और एलओसी के संबंधित दस्तावेज भी सार्वजनिक बैंकों से तलब किए गए हैं। दरअसल सरकार यह जानने का प्रयास कर रही है कि पीएनबी की तरह अन्य बैंकों में भी कहीं इस तरह के हजारों करोड़ के घोटाले तो नहीं हुए हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा अन्य कोई मामला सामने नहीं आया है।

दिव्यांगों को छोड़ सभी पर सख्ती बरतें : अश्वनी 
नई दिल्ली। नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर के उपाध्यक्ष अश्वनी राणा ने कहा कि अधिकारियों के तीन साल के अनिवार्य स्थानांतरण के मामले में दिव्यांगजनों का ख्याल रखा जाए। उनके स्थानांतरण में नरमी बरती जाए, ताकि वह सुचारु अपना काम कर सकें। शेष अधिकारियों के लिए सीवीसी के दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन कराया जाए। जबकि स्टाफ का पांच साल में अनिवार्य स्थानांतरण के निर्देश का सख्ती से पालन कराया जाए।

सऊदी अरब में अब व्यवसाय शुरू करने के लिए महिलाओं को पुरुष की इजाजत की जरूरत नहीं

सऊदी अरब में महिलाओं को कुछ और राहत मिल गई है। पहले उन्हें ड्राइविंग करने और फुटबॉल मैच देखने की इजाजत मिली थी। अब उन्हें बिजनेस करने की भी इजाजत मिल गईहै। इसके लिए उन्हें अपने पति या पुरुष रिश्तेदार से अनुमति लेने की भी जरूरत नहीं होगी।

दरअसल सऊदी अरब के शाह प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देना चाहते हैं। यही वजह है कि वे अब महिलाओं को भी इसमें आगे करना चाहते हैं और उन्हें अपनी मर्जी से कारोबार शुरू करने की इजाजत दे दी है।

गुरुवार को सऊदी की सरकार ने नीतियों में इस बदलाव का ऐलान किया। इसी के साथ ही मजबूत गार्जियनशिप की परंपरा भी खत्म हुई।
सऊदी के कॉमर्स एवं इनवेस्टमेंट मिनिस्ट्री ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि महिलाएं अपना बिजनेस लॉन्च कर सकती हैं और सरकार की ई-सर्विसेज की सुविधा ले सकती हैं। इसके लिए उन्हें अपने गार्जियन की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

क्या है गार्जियनशिप सिस्टम?

सऊदी में गार्जियनशिप सिस्टम काफी मजबूत है। इसके मायने हैं कि कोई भी महिला बगैर पति, भाई या पिता की इजाजत के बगैर किसी सरकारी पेपर पर साइन नहीं कर सकती है। इतनी ही नहीं, सऊदी अरब में महिलाओं को अकेले ट्रैवल करने या किसी क्लास में एडमिशन लेने के लिए भी किसी पुरुष की इजाजत लेनी पड़ती है।

अभी तक सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कच्चे तेल के उत्पादन पर टिकी है। अब वहां की सरकार देश में प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देना चाहती है। इस योजना में वहां की सरकार महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाना चाहती है।
इससे पहले क्राउन प्रिंस के पिता किंग सलमान ने महिलाओं की ड्राइविंग पर लगे बैन को हटाया था। यह बैन भी दशकों से लगा हुआ था। क्राउन प्रिंस ने सऊदी अरब के लिए ‘विजन 2030’ तैयार किया है, इसमें वह महिलाओं की हिस्सेदारी को 22 प्रतिशत से एक तिहाई करना चाहते हैं।

विलुप्त होने के कगार पर 42 भारतीय भाषाएं

नयी दिल्ली : विशाल और प्राचीनतम संस्कृति वाले भारत में भाषाओं और उनसे जुड़ी संस्कृतियों का खजाना है। लेकिन हाईटेक युग में आने के बाद भारत में 42 भाषाएं या बोलियां संकट में हैं। ऐसा माना जाता है कि संकटग्रस्त इन भाषाओं को बोलने वाले कुछ हजार लोग ही हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार इन 42 भाषाओं में से कुछ भाषाएं विलुप्त प्राय भी हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी ऐसी 42 भारतीय भाषाओं या बोलियों की सूची तैयार की है। यह सभी खतरे में हैं और धीरे-धीरे विलुप्त होने की ओर बढ़ रही हैं।

संकटग्रस्त भाषाओं में 11 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की हैं। इन भाषाओं के नाम :- ग्रेट अंडमानीज, जरावा, लामोंगजी, लुरो, मियोत, ओंगे, पु, सनेन्यो, सेंतिलीज, शोम्पेन और तकाहनयिलांग हैं। मणिपुर की सात संकटग्रस्त भाषाएं एमोल, अक्का, कोइरेन, लामगैंग, लैंगरोंग, पुरुम और तराओ हैं। हिमाचल प्रदेश की चार भाषाएं- बघाती, हंदुरी, पंगवाली और सिरमौदी भी खतरे में हैं।

अन्य संकटग्रस्त भाषाओं में ओडिशा की मंडा, परजी और पेंगो हैं। कर्नाटक की कोरागा और कुरुबा जबकि आंध्र प्रदेश की गडाबा और नैकी हैं। तमिलनाडु की कोटा और टोडा विलुप्त प्राय हैं। असम की नोरा और ताई रोंग भी खतरे में हैं। उत्तराखंड की बंगानी, झारखंड की बिरहोर, महाराष्ट्र की निहाली, मेघालय की रुगा और पश्चिम बंगाल की टोटो भी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं।

सरकार कर रही बचाने की कोशिश 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मैसूर स्थित भारतीय भाषाओं के केंद्रीय संस्थान देश की खतरे में पड़ी भाषाओं के संरक्षण और अस्तित्व की रक्षा करने के लिए केंद्रीय योजनाओं के तहत कई उपाय कर रहा है। इन कार्यक्रमों के तहत व्याकरण संबंधी विस्तृत जानकारी जुटाना, एक भाषा और दो भाषाओं में डिक्शनरी तैयार करने के काम किए जा रहे हैं। इसके अलावा, भाषा के मूल नियम, उन भाषाओं की लोककथाओं, इन सभी भाषाओं या बोलियों की खासियत को लिखित में संरक्षित किया जा रहा है। यह सभी वह भाषाएं हैं जिन्हें दस हजार से भी कम लोग बोलते हैं।

22 आधिकारिक भाषाएं

जनगणना निदेशालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 सूचीबद्ध भाषाएं हैं, जो आधिकारिक भाषाएं हैं। संविधान की आठवीं सूची में निहित अनुच्छेद 344(1) और 351 के तहत राजभाषा हिंदी समेत जिन 22 भाषाओं को मान्यता मिली है, वह इस प्रकार हैं :-

असमी, बांग्ला, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मैतेई (मणिपुरी), मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू।

इसके अलावा, देश में 100 गैर-सूचीबद्ध भाषाएं भी हैं। इन्हें लोग बड़े पैमाने पर बोलते और लिखते-पढ़ते हैं। समझा जाता है कि इन भाषाओं को कम से कम एक लाख लोग या उससे अधिक लोग बोलते हैं। इनके अतिरिक्त देश में 31 अन्य भाषाएं भी हैं जिन्हें विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आधिकारिक भाषा की मान्यता दी हुई है। जनगणना के आंकड़ों के अतिरिक्त देश में 1635 भाषाएं तार्किक रूप से मातृभाषा हैं। जबकि 234 अन्य मातृभाषाओं की भी पहचान की गई है।

38 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में डालने की मांग

अंगिका, बंजारा, बाजिका, भोजपुरी, भोति, भोतिया, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी, धातकी, गढ़वाली, गोंडी, गुज्जरी, हो, कच्चाछी, कामतापुरी, कार्बी, खासी, कोडावा (कोरगी), कोक बराक, कुमांयुनी, कुरक, कुरमाली, लीपछा, लिम्बू, मिजो (लुशाई), मगही, मुंदरी, नागपुरी, निकोबारीज, हिमाचली, पाली, राजस्थानी, संबलपुरी/कोसाली, शौरसेनी (प्रकृत), सिरैकी, तेन्यिदी, तुल्लू।