Sunday, April 12, 2026
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व्यक्ति हो या विचारधारा…समग्रता से देखना जरूरी है

जीवन में दृष्टि का बड़ा महत्व है। यह हमारी दृष्टि ही यानि हमारी सोच या नजरिया ही है जो हमारी विचारधारा बनता है। जब विचारधारा बन जाती है और वह जब अडिग हो जाती है तो वही हमारी सीमा भी बन जाती है। सितम्बर की शुरुआत जब जन्माष्टमी के साथ हुई है तो चलिए हम अपनी बात को कृष्ण के ही माध्यम से ही समझाते हैं। हम सब जानते हैं कि कृष्ण योगीराज और 64 कलाओं के ज्ञाता के अतिरिक्त एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। वंशी उनको प्रिय थी मगर वह उनका एकमात्र परिचय नहीं थी। इसके बावजूद हजारों वर्ष बाद भी धरती पर उनका प्रथम परिचय वंशी से जोड़कर और माखन चोर के रूप में होता है..इसके आगे बढ़कर थोड़ा देखा जाये तो वह गीता के उपदेश या विश्वरूप तक सिमटता है मगर वे एक कुशल योद्धा थे…यह तथ्य चाहकर भी याद नहीं आता। इससे आगे बढ़कर सोचिए तो जिस द्वारिकाधीश की 16 हजार 8 पत्नियाँ हों..एक देवकी और यशोदा जैसी माँ हो. एकानंगा और सुभद्रा जैसी बहन और द्रोपदी जैसी सखी हो….उस व्यक्ति के साथ जब किसी स्त्री को देखते हैं…वह राधा ही होती है…मजे की बात यह है कि खुद श्रीमद्भागवत में भी राधा का उल्लेख सीधे नहीं आता मगर उनका होना एक सत्य है…यही हमारी दृष्टि की सीमा है क्योंकि हमने जो अपने एकांगी दृष्टिकोण से एक विराट व्यक्तित्व को देखा है।

हम उससे परे न तो उनको देखना चाहते हैं और न समझना चाहते हैं…अगर वंशी के साथ सुदर्शन चक्र और प्रतोद आप नहीं जोड़ते तो आपका हर आकलन और आपकी हर दृष्टि अधूरी है। उनकी बाल लीलाओं जितना ही महत्वपूर्ण, उनका गीता ज्ञान, उनका युद्ध और उनका समग्र दर्शन है। देखा जाए तो कृष्ण जिस विराट उद्देश्य के साथ जन्मे थे, उसे पूरा करने में उनका सबसे अधिक साथ द्रोपदी ने दिया था…एक ऐसा सशक्त चरित्र जो आज भी सशक्तीकरण की परिभाषा बना हुआ है। अगर वह न होती तो आर्यावत को धर्म की तरफ ले जाने का कृष्ण का अभियान पूरा ही नहीं हो पाता। रक्मिणी..एक ऐसी नायिका जो श्रीकृष्ण का आधार ही है और उनकी विराट द्वारिका को उनके अतिरिक्त कोई और नहीं सम्भाल सकता था मगर आज भी उनका परिचय सिर्फ श्रीकृष्ण के स्वयम्बर तक ही सीमित है। आज यह जिक्र करने का एक कारण है जो सन्देह और विवाद, दोनों इन दिनों का सत्य है…विचारधारा जब व्यक्ति केन्द्रित हो जाती है तो अपना उद्देश्य खो देती है और आज हमारे देश में विचारधारा का यह स्पष्ट विभाजन हमें दिखायी दे रहा है। राष्ट्रवाद, वामपंथ, पूँजीवाद के घटाघोप में फँसा हमारा बुद्धिजीवी वर्ग कुछ भी अपनी दृष्टि से परे देखना ही नहीं चाहता। पक्ष जब विपक्ष में था, यही करता था और आज का सत्ताधारी दल भी यही कर रहा है।

हमारी राजनीति और समाज से सौहार्द और परस्पर सम्मान की दृष्टि से खोती जा रही है। अब विरोध का मतलब वैचारिक नहीं बल्कि कटुक्ति, उपहास, नीचा दिखाना हो गया है क्योंकि हम अपनी सीमाओं के परे जाकर कुछ देखना ही नहीं चाह रहे। यह ऐसा है कि हमारी बात न सुनी तो हम किसी की परवाह नहीं करते, न देश की, न न्यायालय की, न संविधान की और न समाज की…हमें बस विरोध करना है और इसलिए करना है कि जो व्यक्ति हमारे सामने है, हम उसे पसन्द नहीं करते। आप सोचिए कि यह दृष्टि कितनी घातक है और कितनी संकुचित है…आप यह संकुचित दृष्टि आपको आगे नहीं बढ़ने दे रही और वह नहीं देखने दे रही जो आने वाली पीढ़ी हमें दिखाना चाहती है, चाहे वह हमारे बच्चे हों या विद्यार्थी…यही वजह है कि मतभेद….मनभेद बन रहा है। आज गुरु और शिष्य के बीच आ रही दूरी का कारण भी हमारी यही जिद है कि हम जो हैं…सही हैं…हमें न देखने की जरूरत है…न सीखने की जरूरत है…मगर यही दृष्टि आपका अहं कब बन जाती है…कब आपको एकाकी करती है और कब आपको पतन की ओर ले जाती है…खुद आपको भी पता नहीं चलता….। व्यक्ति हो या विचारधारा, किसी को देखना और समझना है तो उसकी समग्रता से देखिए….चीजें आसान हो जायेंगी…। आप सभी को जन्माष्टमी..शिक्षक दिवस और हिन्दी दिवस की स्नेहिल शुभकामनायें…हमारे साथ बने रहिए और सुझाव देते रहिए..सदैव स्वागत है।

दिनकर की ‘उर्वशी’ स्त्री के स्वत्व का उद्घोष है

कोलकाता : दिनकर ने अपने काव्य ‘उर्वशी’ में स्त्री-पुरुष संबंध को एक व्यापक सर्जनात्मक भूमि पर देखा है। वे राष्ट्रीय आक्रोश के साथ मानवीय प्रेम के कवि हैं। उन्होंने एक समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ राष्ट्रीय भावना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन वे उर्वशी में प्रेम को भौतिक भूमि पर देखते हुए भी ‘कामाध्यात्म’ के माध्यम से एक उच्च धरातल प्रदान करते हैं। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कृति ‘उर्वशी’ पर चर्चा करते हुए भारतीय भाषा परिषद में ये बातें कही गईं। पटना विश्‍वविद्यालय के प्रो. तरुण कुमार ने अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि काम एक भौतिक वस्तु ही नहीं एक सर्जनात्मक, मानवीय और आध्यात्मिक प्रेरणा भी है। स्त्री और पुरुष दो अलग सत्ता होते हुए भी अद्वैत हैं। दिनकर की ‘उर्वशी’ में पत्नी और प्रेयसी का द्वंद्व आधुनिक यथार्थ को व्यक्त करते हुए वस्तुतः एक प्रतिकात्मक संकेत है। यह वस्तुतः भौतिकता और आध्यात्मिकता में सामंजस्य की चेतना है।

अध्यात्म और मानव प्रकृति परस्पर विरोधी नहीं हैं। आरंभ में जालान गर्ल्स कॉलेज के प्रो. विवेक सिंह ने विषय प्रस्तावना करते हुए कहा कि ‘उर्वशी’ ॠग्वेद से प्रेरणा लेकर लिखी गई एक आधुनिक कृति है जिसमें दिनकर ने आधुनिक जीवन में प्रेम के अर्थ पर विचार किया है। अध्यक्षीय भाषण में डॉ.शंभुनाथ ने कहा कि कालिदास की कृति से दिनकर की कृति की भिन्नता यह है कि इसमें उर्वशी स्त्री के रूप में एक सुंदर दृश्य भर होने की जगह खुद अपनी आँखों से मर्त्यलोक के जीवन को देखना चाहती है। वह पुरूरवा के साथ रहने का निर्णय अपने हाथ में रखती है। इस तरह उर्वशी वस्तुतः सामंतवाद और उपभोक्तावाद के परिवेश में स्त्री के स्वत्व का उद्घोष है। आज बाजार ने स्त्री को महज एक देखी जाने वाली चीज बना दिया है, जबकि स्त्री को कृतज्ञता और सम्मान के साथ देखे जाने की जरूरत है। आरम्भ में स्वागत भाषण करते हुए भारतीय भाषा परिषद के मंत्री नंदलाल शाह ने कहा कि दिनकर ने हिंदी के राष्ट्रीय साहित्य को समृद्ध किया है। संचालन करते हुए पीयूषकांत राय ने कहा कि दिनकर का साहित्य आज भी विद्यार्थियों को अच्छा और उदार मनुष्य बनने की प्रेरणा देता है। परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद दिया।

 

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन

इनकी स्कूली शिक्षा सियालकोट में हुई। कानून की डिग्री लाहौर से प्राप्त की। यूएसए से पत्रकारिता की डिग्री ली। उन्होंने दर्शनशास्त्र में पीएचडी भी की थी। कुलदीप नैयर को आपातकाल  (1975-77)  के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 1990 में ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया। वह एक मानवीय अधिकार कार्यकर्ता और शांति कार्यकर्ता भी रहे हैं। उन्हें रामनाथ गोयनका ऑवार्ड से भी नवाजा गया था। कुलदीप नैयर ने इंडिया आफ्टर नोहरू किताब लिखी थी जो काफी चर्चा में रही।  कुलदीप नैयर के निधन के बाद पीएम मोदी ने उनकी मृत्यु पर दुख व्यक्त किया। वह 1996 में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। 1990 में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। अगस्त 1997 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था।

घर पर मातृ भाषा बोलने वाले बच्चे होते हैं मेधावी

लंदन : विदेश में रहनेवाले वैसे बच्चे जो अपने घर में परिवारवालों के साथ मातृभाषा में बात करते हैं और बाहर दूसरी भाषा बोलते हैं, वह ज्यादा अक्लमंद होते हैं। एक नए अध्ययन से यह जानकारी मिली है। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने शोध में यह पाया कि वैसे बच्चे जो स्कूल में अलग भाषा बोलते हैं और परिवारवालों के साथ घर में अलग भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बुद्धिमत्ता जांच में उन बच्चों के मुकाबले अच्छे अंक लाए जो सिर्फ गैर-मातृभाषा जानते हैं। इस अध्ययन में ब्रिटेन में रहनेवाले तुर्की के सात से 11 साल के 100 बच्चों को शामिल किया गया। इस आईक्यू जांच में दो भाषा बोलने वाले बच्चों का मुकाबला ऐसे बच्चों के साथ किया गया जो सिर्फ अंग्रेजी बोलते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के ब्योरे से किसान अनजान : सर्वे

नयी दिल्ली : किसान अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के ब्योरे से अनभिज्ञ हैं। जलवायु जोखिम प्रबंधन कंपनी डब्ल्यूआरएमएस के एक सर्वे में यह तथ्य सामने आया है। हालांकि, सरकार और बीमा कंपनियां इसकी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। सर्वे में कहा गया है कि कई राज्यों में इस योजना के तहत नामांकित किसान काफी संतुष्ट हैं। इसकी वजह किसानों को सहायता के लिए उचित तरीके से क्रियान्वयन और बीमा कंपनियों की भागीदारी तथा बीमित किसानों के एक बड़े प्रतिशत को भुगतान मिलना शामिल है।
पीएमएफबीवाई की शुरुआत 2016 में हुई थी। यह आज जलवायु तथा अन्य जोखिमों से कृषि बीमा का एक बड़ा माध्यम है। यह योजना पिछली कृषि बीमा योजनाओं का सुधरा रूप है। योजना के तहत ऋण लेने वाले किसान को न केवल सब्सिडी वाली दरों पर बीमा दिया जाता है, बल्कि जिन किसानों ने ऋण नहीं लिया है वे भी इसका लाभ ले सकते हैं।
वेदर रिस्क मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लि. (डब्ल्यूआरएमएस) ने कहा, ‘‘हाल में आठ राज्यों (उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, नगालैंड, बिहार और महाराष्ट्र में बेसिक्स द्वारा किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि जिन किसानों से जानकारी ली गई उनमें से सिर्फ 28.7 प्रतिशत को ही पीएमएफबीवाई की जानकारी है।’’
सर्वे के अनुसार किसानों की शिकायत थी कि ऋण नहीं लेने वाले किसानों के नामांकन की प्रक्रिया काफी कठिन है। उन्हें स्थानीय राजस्व विभाग से बुवाई का प्रमाणपत्र, जमीन का प्रमाणपत्र लेना पड़ता है जिसमें काफी समय लगता है।
इसके अलावा बैंक शाखाओं तथा ग्राहक सेवा केंद्र भी हमेशा नामांकन के लिए उपलब्ध नहीं होते क्योंकि उनके पास पहले से काफी काम है। ‘किसानों को यह नहीं बताया जाता कि उन्हें क्लेम क्यों मिला है या क्यों नहीं मिला है। उनके दावे की गणना का तरीका क्या है।’सर्वे के अनुसार 40.8 प्रतिशत लोग औपचारिक स्रोतों मसलन कृषि विभाग, बीमा कंपनियां या ग्राहक सेवा केंद्रों से सूचना जुटाते हैं

फेसबुक ने रूस-ईरान से जुड़े 652 अकाउंट हटाये, ट्विटर ने 284 अकाउंट बंद किये

सैन फ्रांसिस्को : सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक ने भ्रामक राजनीतिक गतिविधियों में लिप्त सैकड़ों अकाउंट, समूहों और पेजों की पहचान करके उन्हें प्रतिबंधित कर दिया है। ये अकाउंट और पेज ईरान और रूस से जुड़े हैं। फेसबुक ने कहा कि उसने रूस और ईरान से जुड़े 652 पेजों, समूहों और अकाउंट को “अनुचित गतिविधियों” के लिये अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। इसमें राजनीतिक सामग्री साझा करना भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि फेसबुक 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिये रूसी एजेंटों द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर अभियान चलाने की बात सामने आने के बाद अपनी नीतियों को मजबूत करने में जुटा है। इसी प्रकार, अन्य सोशल मीडिया नेटवर्क भी भ्रामक राजनीतिक अभियानों के खिलाफ सक्रिय कदम उठा रहे हैं। फेसबुक के बाद माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने भी गड़बड़ी में लिप्त रहने पर 284 अकाउंट बंद करने की जानकारी दी है। इनमें से कई अकाउंट ईरान में बनाये गये हैं। सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने कहा कि सामग्री की समीक्षा अभी पूरी नहीं हुयी है और ये भी बताने से मना किया इन अकाउंट से किस तरह का काम किया गया है। हालांकि, उसने इसकी सूचना अमेरिका और ब्रिटेन सरकार को दे दी है। साथ ही ईरान पर प्रतिबंध के मद्देनजर इसकी जानकारी अमेरिका के वित्त और विदेश विभाग को भी दी गयी है। फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने कहा, “बहुत कुछ है, जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं। लोगों के साथ-साथ देश भी हर संभव तरीके से सेवाओं का दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं।”

चन्द्रयान-1 से प्राप्त आँकडों से चंद्रमा पर बर्फ की उपस्थिति की पुष्टि

वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने चन्द्रयान-1 अंतरिक्षयान के आँकड़ों के आधार पर चन्द्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों के सबसे अंधेरे और ठंडे स्थानों पर जल के जमे हुए स्वरूप में उपस्थित होने की पुष्टि की है। नासा ने आज यह कहा। भारत ने दस साल पहले इस अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण किया था।
सतह पर पर्याप्त मात्रा में बर्फ के मौजूद होने से इस बात के संकेत मिलते हैं कि आगे के अभियानों या यहां तक कि चन्द्रमा पर रहने के लिए भी जल की उपलब्धता की सम्भावना है। ‘पीएनएएस’ जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि बर्फ इधर-उधर बिखरे हुए हैं।
दक्षिणी ध्रुव पर अधिकतर बर्फ लूनार क्रेटर्स के पास जमी हुई हैं। उत्तरी ध्रुव के बर्फ अधिक व्यापक तौर पर फैले हुए हैं लेकिन अधिक बिखरे हुए हैं। वैज्ञानिकों ने नासा के मून मिनरेलॉजी मैपर (एम3) से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल कर यह दिखाया है कि चंद्रमा की सतह पर जल हिम मौजूद हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) द्वारा 2008 में प्रक्षेपित किये गए चंद्रयान-1 अंतरिक्षयान के साथ एम3 को भेजा गया था।। ये जल हिम ऐसे स्थान पर पाये गए हैं, जहां चंद्रमा के घूर्णन अक्ष के थोड़ा झुके होने के कारण सूरज की रोशनी कभी नहीं पहुंच पाती।

सिरेमिक पर प्रिंटिंग के लिए विश्व की पहली 4डी प्रिंटिंग प्रणाली खेाजी गई

बीजिंग : वैज्ञानिकों ने सिरेमिक पर प्रिंटिंग के लिए विश्व की पहली 4डी प्रिंटिंग तकनीक विकसित करने में सफलता हासिल की है जिसका इस्तेमाल जटिल और आकार बदलने वाली वस्तुओं को बनाने में किया जा सकता है।
4डी प्रिंटिंग पारंपरिक 3डी प्रिंटिंग के ही समान है जिसमें चौथे आयाम के तौर पर वक्त को जोड़ा गया है जहां सिरेमिक को किसी बाह्य उद्दीपक जैसे कि तकनीक अथवा चुंबकीय क्षेत्र अथवा यांत्रिक बल के जरिए समय के साथ किसी दूसरे आकार में ढ़ाला जा सकता है। सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के शोधकर्ताओं ने इसके लिए इलास्टिक एनर्जी का इस्तेमाल किया।
सिरेमिक का गलनांक उच्च होता है । इस कारण से सिरेमिक बनाने के लिए लेजर प्रिंटिंग का इश्तेमाल मुश्किल है।

फिल्म ‘सुई धागा’ के लिए अनुष्का ने सीखी कढ़ाई

मुम्बई : बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने आगामी फिल्म “सुई धागा- मेड इन इंडिया” में अपने किरदार ममता के लिए कशीदाकारी की कला सीखी है। शरत कटारिया के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में अनुष्का, अभिनेता वरुण धवन के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियों का सामना करना उन्हें पसंद है।

फिल्म के एक दृश्य में अनुष्का शर्मा और वरुण धवन

अनुष्का ने एक बयान में कहा, “मैं अपनी फिल्मों के जरिए किसी भी चुनौती, नए सफर और अनुभव के लिए हमेशा तैयार रहती हूं। मुझे मालूम था कि मुझे किरदार के हिसाब से ढलना है और ‘सुई धागा’ की कला में खुद को आत्मविश्वास से पूर्ण दिखाना है।” उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि एक वास्तविक कशीदाकार दिखने के लिए मुझे काफी समय देने के साथ ही प्रयास भी करना होगा और मैं इस कौशल को सीखने के लिए वाकई बहुत उत्साहित थी। मैं तैयारी सत्रों में पूरी तरह डूब गई थी और मैंने इसका खूब आनंद उठाया।” यह पहली बार है जब अनुष्का और वरुण एक साथ किसी फिल्म में नजर आएंगे। यह फिल्म 28 सितंबर को रिलीज होगी।

अमरनाथ यात्रा सम्पन्न, 2.85 लाख श्रद्धालुओं ने किए हिम शिवलिंग के दर्शन

श्रीनगर : अमरनाथ यात्रा सम्पन्न हो गई। इस बार 2.85 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने हिम शिवलिंग के दर्शन किए। अधिकारियों के अनुसार बालटाल और पहलगाम मार्गों के जरिए गत 28 जून से शुरू हुई इस तीर्थयात्रा के दौरान 2,85,006 श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि इस बार यात्रा के दौरान मौसम संबंधी घटनाओं या प्राकृतिक कारणों की वजह से 38 तीर्थयात्रियों, सेवा प्रदाताओं और टट्टूवालों की मृत्यु हुई। अधिकारियों ने बताया कि इस बार तीर्थयात्रियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले अधिक रही। गत वर्ष 2.60 लाख श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा की थी। यात्रा को निर्बाध सुनिश्चित कराने के लिए इस बार विभिन्न सुरक्षा कदम उठाए गए। इस बार पहली बार रेडियो फ्रीक्वेंसी (आर एफ) टैग लगाए गए जिससे कि अमरनाथ जाने वाले वाहनों पर हर समय नजर रखी जा सके। सीआरपीएफ ने इस बार कैमरों और विभिन्न जीवनरक्षक उपकरणों के साथ मोटरसाइकिल दस्ते भी तैनात किए। पिछले साल तीर्थयात्रियों की एक बस पर आतंकी हमले के चलते इस बार बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गत वर्ष हुए आतंकी हमले में आठ लोग मारे गए थे और 18 अन्य घायल हुए थे। अधिकारियों ने बातया कि इस बार यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और सेना से करीब चार हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। उन्होंने कहा कि इस बार यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। अधिकारियों ने बताया कि महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में साधुओं और श्रद्धालुओं के समूह द्वारा ले जाया गया भगवान शिव का पवित्र दंड (छड़ी मुबारक) आज तड़के पवित्र गुफा पहुँचा और दिनभर चली पूजा अर्चना के साथ ही अमरनाथ यात्रा संपन्न हो गई।
साधुओं और श्रद्धालुओं के समूह ने पहलगाम से लेकर अमरनाथ गुफा तक 42 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान समूह रात्रि पड़ाव के लिए चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी में रुका।
श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी भूपेंद्र कुमार और गंदरबल के उपायुक्त पीयूष सिंगला आज सुबह अमरनाथ गुफा पहुंचे और राज्य में शांति, सौहार्द, प्रगति तथा समृद्धि की कामना की।