लखनऊ : प्रयागराज में संगम की रेती पर बसे आस्था के कुंभ से उत्तर प्रदेश सरकार को 1,200 अरब रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने यह अनुमान लगाया है। सीआईआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 जनवरी से 4 मार्च तक आयोजित होने वाला कुंभ मेला हालांकि धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है, मगर इसके आयोजन से जुड़े कार्यों में छह लाख से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार उत्पन्न हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 दिन तक चलने वाले कुंभ मेले के लिए आयोजन के लिए 4,200 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं जो वर्ष 2013 में आयोजित महाकुंभ के बजट का तीन गुना है।
सीआईआई के अध्ययन के मुताबिक कुंभ मेला क्षेत्र में आतिथ्य क्षेत्र में करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा एयरलाइंस और हवाई अड्डों के आसपास से करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजी-रोटी मिलेगी। वहीं, करीब 45,000 टूर ऑपरेटरों को भी रोजगार मिलेगा। साथ ही इको टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म क्षेत्रों में भी लगभग 85,000 रोजगार के अवसर बनेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा टूर गाइड टैक्सी चालक द्विभाषिये और स्वयंसेवकों के तौर पर रोजगार के 55 हजार नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे सरकारी एजेंसियों तथा वैयक्तिक कारोबारियों की आय बढ़ेगी।
सीआईआई के अनुमान के मुताबिक कुंभ मेले से उत्तर प्रदेश को करीब 12 सौ अरब रुपए का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा पड़ोस के राज्यों राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को भी इसका फायदा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुंभ में शामिल होने वाले पर्यटक इन राज्यों के पर्यटन स्थलों पर भी जा सकते हैं। कुंभ मेले में करीब 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। दुनिया का यह सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन पूरी दुनिया में अपनी आध्यात्मिकता और विलक्षणता के लिए प्रसिद्ध है। (भाषा)
मालामाल कर देगा कुम्भ, होगी 1200 अरब की कमाई
मेजबान महाराष्ट्र ने 228 पदक के साथ खेलो इंडिया ट्रॉफी जीती
मुम्बई : मेजबान महाराष्ट्र 85 स्वर्ण, 62 रजत और 81 कांस्य सहित कुल 228 पदक जीतकर खेलो इंडिया यूथ गेम्स (केआईवाईजी)-2019 में रविवार को ओवरऑल ट्रॉफी हासिल की।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडे़कर और महाराष्ट्र के खेल मंत्री विनोद तावड़े ने शिव छत्रपति स्पोटर्स कॉम्पलेक्स के बैडमिंटन हॉल में आयोजित समापन समारोह में महाराष्ट्र के खिलाड़ियों और अधिकारियों को ट्रॉफी प्रदान की। जावडे़कर ने इस मौके पर कहा कि खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने प्रधानमंत्री के ‘पांच मिनट और’ के संदेश को सार्थक किया है। साथ ही कहा कि सरकार हर स्कूल में एक घंटे के खेल पीरियड को लाने को लेकर प्रतिबद्ध है।
तावड़े ने कहा कि वह ‘सिर्फ पांच मिनट’ नहीं चाहते बल्कि 50 मिनट चाहते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई भी की। महाराष्ट्र खेलो इंडिया स्कूल गेम्स 2018 के विजेता हरियाणा से आगे रहा। हरियाणा ने 62 स्वर्ण, 56 रजत और 60 कांस्य पदक सहित 178 पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया।
दिल्ली 48 स्वर्ण, 37 रजत और 51 कांस्य पदक सहित 136 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर रहा। खेलों के आखिरी दिन 15 स्वर्ण पदक दांव पर थे। इनमें से आठ पदक तीरंदाजी में थे, जहां मेजबान महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा ने दो-दो पदक जीते। दिल्ली और पंजाब ने एक-एक पदक हासिल किया। हरियाणा ने हाकी में महिलाओं के अंडर-21 वर्ग के फाइनल में स्वर्ण पदक जीता। यह हरियाणा का हाकी में तीसरा स्वर्ण है। उत्तर प्रदेश, बंगाल, तमिलनाडु और केरल ने वॉलीबाल में स्वर्ण पदक जीते। टेबल टेनिस में गुजरात के मानुश शाह ने अंडर-21 वर्ग में स्वर्ण अपने नाम किया जबकि पश्चिम बंगाल की सुरभि पटवारी ने महिलाओं के अंडर-21 वर्ग में सोने का तमगा हासिल किया।
वॉलीबाल में तमिलनाडु और केरल को स्वर्ण
तमिलनाडु और केरल ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में वॉलीबाल प्रतियोगिता के अंडर-21 में क्रमश: लड़कियों और लड़कों के वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। लड़कियों के फाइनल में तमिलनाडु ने केरल को 23-25, 11-25, 25-23, 25-18, 15-9 से हराया। पश्चिम बंगाल ने महाराष्ट्र को हराकर कांस्य पदक जीता। लड़कों के अंडर-21 के फाइनल में केरल ने तमिलनाडु को 21-25, 25-15, 25-23, 25-20 से पराजित किया जबकि उत्तर प्रदेश ने पंजाब को हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-17 का स्वर्ण पश्चिम बंगाल ने महाराष्ट्र को 25-15, 25-13, 25-14 से हराकर जीता। इस वर्ग में केरल ने कांस्य पदक हासिल किया। उसने तीसरे स्थान के प्लेआफ में तमिलनाडु को हराया। उत्तर प्रदेश ने लड़कों के अंडर-17 में सोने का तमगा जीता। उसने फाइनल में गुजरात को 25-17, 25-20, 25-23 से हराया। इस वर्ग के तीसरे स्थान के मैच में तमिलनाडु ने केरल को पराजित किया।
पारस-सचिन के स्वर्ण से तीरंदाजी में शीर्ष पर हरियाणा
सचिन गुप्ता और पारस हुड्डा ने लड़कों के क्रमश: अंडर-21 और अंडर-17 रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीते जिससे हरियाणा खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तीरंदाजी प्रतियोगिता में पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। हरियाणा ने तीरंदाजी में दो स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक सहित कुल सात पदक जीते। गुप्ता ने अंडर-21 वर्ग में आंध्र प्रदेश के बी धीरज को 2-1 से हराया। तेरह वर्षीय हुड्डा ने अंडर-17 वर्ग में अच्छी वापसी की। वह अपने साथी राहुल से एक समय पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने वापसी करके आखिरी दो सेट जीते। इस बीच महाराष्ट्र की साक्षी शितोल और इशा केतन पवार ने क्रमश: लड़कियों का अंडर-21 रिकर्व और अंडर-17 कंपाउंड वर्ग का स्वर्ण पदक जीता।
गणतंत्र दिवस को लेकर भारतीय वायुसेना ने 5 राज्यों के लिए जारी किया ‘नोटम’
चंडीगढ़ : 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत देश के पांच राज्यों को ‘नोटम’ जारी किया गया है। गणतंत्र दिवस की तैयारियों के लिए वायुसेना ने कमर कस ली है। एयरफोर्स ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी व चंडीगढ़ के विभिन्न एयरफोर्स स्टेशनों में एक्सरसाइज शुरू कर दी है।
एयरफोर्स ने उक्त सभी राज्यों में ‘नोटम’ जारी किया है। इन राज्यों के एविएशन विभाग को भी संबंधित दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि नई दिल्ली से 300 किलोमीटर दायरे में कोई भी नॉन शेड्यूल फ्लाइट बिना अनुमति के नहीं उड़ाई जाएगी। प्रतिबंध दस दिन यानी 29 जनवरी तक के लिए जारी रहेगा। दरअसल, उतरी भारत में इन दिनों कोहरे का काफी असर रहता है। लिहाजा कई शेड्यूल फ्लाइट्स लेट हो जाती हैं। इनमें से कई उड़ानें तो रद्द हो जाती हैं, लेकिन कई फ्लाइट्स नॉन शेड्यूल भी उड़ाई जाती हैं। गणतंत्र दिवस को लेकर की जाने वाली एयरफोर्स की एक्सरसाइज में किसी प्रकार का खलल न पड़े, इसलिए नॉन शेड्यूल फ्लाइट पर प्रतिबंध रहेगा।
यदि इमरजेंसी के दौरान कोई नॉन शेड्यूल उड़ान भरनी पड़ी, तो इसके लिए पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। मुख्यालय की हरी झंडी मिलने के बाद ही उड़ान भरी जा सकेगी।
वीवीआईपी उड़ानों को रहेगी छूट
वहीं, इस दौरान उक्त राज्यों में वीवीआईपी उड़ानों को प्रतिबंध से छूट रहेगी। दरअसल, राज्यों में सीएम, राज्यपाल व अन्य वीवीआईपी लोगों की एक स्थान से दूसरे स्थान पर मूवमेंट होती रहती है। जल्दी पहुंचने के लिए वे हेलीकॉप्टर व एयरक्राफ्ट प्रयोग करते हैं। इसलिए इस तरह की फ्लाइट्स जारी रहेंगी, लेकिन इसकी सूचना एयरफोर्स अथॉरिटी के कंट्रोल रूम को दी जाएगी।
क्या होता है ‘नोटम’
दरअसल, ‘नोटम’का मतलब ‘नोटिस टू एयरमैन’ होता है, जो एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा विशेष परिस्थितियों में जारी किया जाता है। ये नोटिस उड़ान की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों में या किसी खतरे के मद्देनजर विमान पॉयलटों को सतर्क करने के लिए जारी होता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है जलवायु परिवर्तन : पेंटागन
वॉशिंगटन : अमेरिका के कई प्रमुख सैन्य संस्थानों को जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ती समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पेंटागन ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया। हालांकि आलोचकों ने समस्या को कमतर बताने के लिए इसे नकार दिया है।
22 पन्नों की रिपोर्ट में अमेरिका के आस-पास के 79 प्राथमिकता वाले सैन्य केंद्रों पर गौर किया गया और इनमें से कई के बाढ़ एवं जंगल की आग के साथ ही मरुस्थलीकरण, सूखे एवं बर्फ पिघलने के असर की चपेट में आने की आशंका देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है, “जलवायु परिवर्तन का प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है जो रक्षा मंत्रालय के मिशनों, अभियान संबंधी योजनाओं एवं संस्थानों पर संभवत: असर डाल सकता है।”
रिपोर्ट में देखा गया कि 79 में से दो तिहाई संस्थानों के बार-बार आने वाली बाढ़ से प्रभावित होने और आधे से ज्यादा के मौजूदा या भविष्य में पड़ने वाले सूखे से घिरने की आशंका है लेकिन आलोचकों ने रिपोर्ट में ब्यौरे नहीं देने को लेकर इसे खारिज किया है। उनका कहना है कि इसमें हाल में आए उन तूफानों का जिक्र नहीं है जिसने अमेरिकी सैन्य केंद्रों को तबाह या क्षतिग्रस्त कर दिया।
जेईई मेन परीक्षा 2019: देश के 15 छात्रों ने हासिल किए 100 प्रतिशत अंक
नयी दिल्ली : जेईई मेन परीक्षा के परिणाम: परीक्षा के परिणाम वेबसाइट पर जारी हो गए हैं। परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में पहली बार आयोजित की गई थी। पहली बार, उम्मीदवारों के पास प्रवेश के लिए एक या दो परीक्षाओं में उपस्थित होने का विकल्प है। बात टॉपर्स की करें तो मध्य प्रदेश के भोपाल से ध्रुव अरोड़ा ने जेईई मेन परीक्षा में टॉप करने के लिए 8 लाख से अधिक छात्रों को पछाड़ दिया है। जेईई मेन परीक्षा के लिए कुल 8,74,469 छात्र उपस्थित हुए थे, जिनमें से 15 ने 100 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और सभी लड़के हैं। महाराष्ट्र के राज आर्यन अग्रवाल, अरोड़ा के बाद दूसरे स्थान पर रहे। लेकिन, अधिकतम छात्र 4 छात्रों के साथ तेलंगाना से हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर घोषणा की कि जेईई द्वितीय के बाद जेईई मेन परिणाम 2019 अप्रैल 2019 में जारी किया जाएगा। जेईई मुख्य परीक्षा लगभग 8.75 लाख छात्रों द्वारा ली गई थी। इस परीक्षा में कुल 9,29,198 उम्मीदवार पेपर-I (B.E. / B। Tech।) के लिए पंजीकृत हुए थे।
जेईई (मुख्य) देश और विदेश में 258 शहरों में एक दिन में दो शिफ्टों के रूप में आयोजित किया गया था। परीक्षा में पेपर – I (B.E./B.Tech।) के लिए कुल 9,29,198 उम्मीदवार पंजीकृत थे। एक बयान के अनुसार ये बताया गया कि, देश और विदेश में 467 परीक्षा केंद्र थे।
भारत में कभी चलता था ढाई रुपये का नोट आज इसकी कीमत है सात लाख
राँची : भारत में कभी ढाई रुपये का नोट भी चलता था। इसे जानने वाले लोग शायद ही बचे हों। आज इसकी कीमत सात लाख रुपये है। यह नोट आज से सौ साल पहले 22 जनवरी 1918 को जारी हुआ था। यानी इसके चलन की शताब्दी पूरी होने वाली है। एक जनवरी 1926 को इस नोट का चलन बंद कर दिया गया।ढाई रुपये का नोट आठ साल ही चला। इसे काफी दुर्लभ माना जाता है। इसलिए इसकी कीमत भी सर्वाधिक है। वर्तमान में इसकी कीमत सात लाख रुपये के करीब है। जबकि उस समय यह एक डॉलर के बराबर था।
ढाई रुपये के नोट का साइज 12 गुणा 17 सेमी था। नोट पर एकतरफ दो रुपये आठ आना लिखा है। गौरतलब है कि देश में पहले आना प्रचलित था। उन दिनों ब्रिटिश राज में एक रुपये में 16 आने होते थे, इसलिए इसमें 2 रुपये के साथ आठ आना जोड़ा गया था। इस नोट को ब्रिटेन में प्रिंट किया गया था। हैंडमेड पेपर पर यह प्रिंट है। नोट पर जार्ज वी का चिन्ह भी होता था। इसमें उनकी अष्टकोणीय तस्वीर होती थी। नोट पर ब्रिटेन के तत्कालीन वित्त सचिव के दस्तखत हैं। सबसे ऊपर डिजाइन में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया लिखा है। फिर नंबर। इसके साथ अंग्रेजी में यह भी लिखा होता था- मैं धारक को ढाई रुपये देने का वचन देता हूं। सबसे आश्चर्य की बात है यह नोट सात सर्किल में चलता था। तब रंगून या म्यांमार भी ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन था। इसलिए यह नोट वहां भी प्रचलित था। ये सात सर्किल थे- ए-कानुपर। बी-बांबे, सी-कलकत्ता। के-कराची, एल-लाहौर, एम-मद्रास। आर-रंगून। तब कानपुर की स्पेलिंग केएएनपीयूआर नहीं होती थी। उस समय लिखा जाता था-सीएडब्ल्यूएनपीओआरई। यह नोट ब्रिटेन के तत्कालीन वित्त सचिव एमएमएस गब्बी के हस्ताक्षर से जारी हुए थे। नोट की दूसरी तरफ एक ओर ब्रिटेन का ताज और दूसरी ओर गोल घेरे में अंग्रेजी में दो बाई आठ लिखा है। बीच में आठ भाषाओं में ढाई रुपये। इन आठ भाषाओं में उर्दू, बांग्ला सहित गुजराती, ओडिया और दक्षिण की भाषाएं तो हैं लेकिन हिंदी नहीं है।
रांची में पूर्व राज्यसभा सदस्य के पास है नोट
झारखंड में यह नोट पूर्व राज्यसभा सदस्य अजय मारू के पास है। वे बताते हैं कि यह नोट उनके दादा ने दिया था। इसे उन्होंने संभालकर रखा। बाद में इसकी कीमत समझ में आई तो नोट संकलन का चस्का भी लग गया। इसके बाद अजय मारू देश-दुनिया के पुराने नोट एकत्रित करने लगे। उनके अनुसार वे जिन-जिन देशों में जाते हैं, वहां की करेंसी जरूर ले आते हैं। उनके पास करीब 25 देशों की करेंसी है। इनमें कुछ बहुत दुर्लभ हैं। स्टार मार्का नोट भी उनके पास है।
तमिलनाडु रक्षा साजोसामान विनिर्माण इकाइयों हेतु औद्योगिक गलियारे का उद्घाटन
नयी दिल्ली : देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक कदम और आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को तमिलनाडु रक्षा साजोसामान विनिर्माण इकाइयों के लिए औद्योगिक गलियारे का उद्घाटन किया। सीतारमण ने कहा कि इसको लेकर स्थानीय उद्योग की प्रतिक्रिया काफी उत्साहनक रही है। ‘वे तो यहां तक चाहते थे कि इस गलियारे का विस्तार पलक्कड़ तक किया जाए, लेकिन हमने उनसे कहा है कि अभी यह सिर्फ शहरों तक केंद्रित रहेगा।’’
तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारे को तमिलनाडु रक्षा उत्पादन चतुर्भुज भी कहा जाता है। इसमें नोडल शहर चर्तुभुज बनाते हैं। इन शहरों में चेन्नई, होसुर, सालेम, कोयम्बटूर और तिरुचिरापल्ली आते हैं। रक्षा औद्योगिक गलियारा बनाने का उद्देश्य रक्षा औद्योगिक इकाइयों के बीच संपर्क सुनिश्चित करना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले साल अपने बजट भाषण में दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन गलियारे स्थापित करने की घोषणा की थी। सरकार ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में गलियारा बनाने का लक्ष्य रखा था। पिछले साल 11 अगस्त को उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे की शुरुआत अलीगढ़ से हुई थी। इसके तहत रक्षा उत्पादन में 3,732 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की गई थी
पर्यावरण से प्लास्टिक अपशिष्ट खत्म करने के लिए साथ आई 30 कंपनियां
नयी दिल्ली : पर्यावरण और विशेषकर जलाशयों एवं जल इकाइयों से प्लास्टिक अपशिष्ट खत्म करने के लिए कई वैश्विक कंपनियों ने मिलकर एक नयी इकाई का गठन किया और पांच साल में इस क्षेत्र में 1 अरब डालर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
यह इकाई प्लास्टिक प्रदूषण दूर करने के तरीकों में सुधार की दिशा में काम करेगी। नयी फर्म ‘अलायंस टू एंड प्लास्टिक वेस्ट’ (एईपीडब्ल्यू) में फिलहाल भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित पेट्रोलियम और पेट्रो-रसायन क्षेत्र की 30 कंपनियां शामिल हुई हैं।
कंपनियों के एक संयुक्त बयान के अनुसार वह सभी पर्यावरण से प्लास्टिक अपशिष्ट खत्म करने में मदद के लिए एक अरब डॉलर का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका लक्ष्य अगले पांच साल में निवेश को बढ़ाकर डेढ़ अरब डॉलर तक करना है।इस निवेश के जरिए प्लास्टिक का कचरा समुद्र तक पहुंचने से रोकने तथा, ऐसे कचरे को संभालने और उसके पुनर्चक्रण के तरीकों में प्रौद्योगिकी के विकास और इस काम में व्यावहारिक इकाइयों तथा उद्यमों को प्रोत्साहन किया जाएगा।
इस पहल के तहत परियोजनाओं की एक श्रृंखला तैयार की जाएगी और प्रारंभ में इस काम में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र पर ध्यान दिया जाएगा। एईपीडब्ल्यू के एक उपाध्यक्ष एवं वेओलिया कंपनी के मुख्य कार्यकारी एंटॉइन फ्रेरट ने कहा,‘ इस समस्या का समाधान किसी एक देश, एक कंपनी या एक समुदाय के अकेले के वश का नहीं है।… इस अभियान की सफलता के लिए सभी क्षेत्रों के सहयोग और समन्वय की आवश्यकता है।’’
इस इकाई की संस्थापक कंपनियों में रिलायंस के अलावा, बीएएसएफ, बेरीग्लोबल, ब्रास्केम, शेवरॉन फिलिप्स केमिकल कंपनी , क्लैरिएंट, कोवेस्ट्रो, डाऊ, डीएसएम, एक्सॉनमोबिल, फॉर्मोसा प्लास्टिक्स कार्पोरेशन, हेंकेल, लियोंडेलबासेल, मित्सुबिशी केमिकल्स, मित्सुई केमिकल्स, नोवा केमिकल्स, आक्सीकेम, पॉलीवन, प्राक्टर एंड गैंबल, साबिक, सासोल, शेल, सुएज, एससीजी केमिकल्स, सूमीतोमो केमिकल, वेओलिया, टोटल और वर्सालिस जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
भारत में फ्लाइंग कार का सपना होगा साकार, 2021 में होगी लॉन्च
देश में अभी तो इलेक्ट्रिक कारों को लेकर ही जद्दोजहद चल रही है ऐसे में उड़ने-वाली कार यानि फ्लाइंग कार के बारे में सोचना कल्पना से कम नहीं है। हालांकि अब उड़ने वाली कार के दिन बहुत दूर नहीं, गुजरात में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात समिट में एक “फ्लाइंग कार” कंपनी पीएएल -वी के मालिक ने कई रोचक जानकारियां दी हैं।
पीएएल -वी हॉलैंड की कंपनी है जिसने विश्व की पहली “फ्लाइंग कार” को बनाया है। हालांकि इस कार की प्री-बुकिंग बाहर कई देशो में शुरू हो चुकी । पीएएल -वी के मुखिया Robert Dingemanse Vibrant Gujarat Summit 2019 कार्यक्रम में पहुंचे, वहां उन्होंने कहा इस फ्लाइंग कार की डिलीवरी 2020 से शुरू होने की उम्मीद है। और हम आशा करते हैं कि भारत में इस कार को 2021 में देखा जा सकेगा।
कार की खासियतें
कार में उड़ने के लिए 197 बीएचपी की पॉवर पैदा करने वाला इंजन दिया गया है। कार एक बार में 1,287 किमी तक चलने में सक्षम है। वहीं इसकी उड़न क्षमता 310 किमी की है। कार की जमीन पर गति 160 किमी प्रति घंटा की होगी जबकि हवा में यह कार 180 किमी प्रति घंटा की गति से उड़ने में सक्षम है। कार को ड्राइव मोड़ से उड़ने में महज 10 मिनट का समय लगता है। कार को लैंड होने के लिए 330 मीटर की जगह चाहिए होगी। कार का वजन 664 किलो है।
पीएएल -वी लिबर्टी की कीमत 4.18 करोड़ है वहीं इसके लिबर्टी पाइनियर संस्करण की कीमत 3.78 करोड़ रूपए और लिबर्टी स्पोर्ट्स मॉडल की कीमत 2.52 करोड़ रूपए है।
लीक से हटकर भी फिल्में बननी चाहिए

जनवरी का महीना हो। रविवार हो। दोपहर का समय हो और आपको फिल्म देखने की इच्छा हो जाये। और उसके ऊपर आपको टिकट भी आपको फिल्म शुरू होने के दस मिनट पहले आसानी से मिल जाए तो खुद को भाग्यशाली ही समझिये। उस पर से भी काउंटर पर आपसे मनपसंद सीटें पूछे तो सच मानिए यकिन दिलाने के लिए खुद को चिमटी काटनी ही पड़ती है। मेरे साथ ऐसा ही हाल में हुआ। मैं फिल्म देखने पहुंची और देखा कि मल्टीप्लेक्स के एक हॉल में गिने चुने ही कुछ लोग फिल्म देखने आये हैं। यह फिल्म थी संजय बारू की किताब ‘द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर ‘ पर आधारित निर्देशक विजय रत्नाकर गुट्टे की फिल्म’ द ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर ‘। मुझे राजनीति समझ में नहीं आती इसलिए इसको देखने की इच्छा नहीं थी लेकिन पिछले कई दिनों से हो रही चर्चा से मेरे अंदर कोतूहल जाग उठा। मुझे लगा कि चलो राजनीति फिल्म देख कर शायद कुछ राजनीति के बारे में जान सकूं। सच मानिये। बहुत कुछ तो राजनीति के बारे में जान नहीं पायी, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में बहुत जान पायी। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे अनुपम खेर के अभिनय को देखकर महसूस हुआ कि एक पीएम भी क्या इस तरह से हो सकते हैं। उनके अंदर की घुटन का मुझे अनुभव हो रहा था। उन्होंने राजनीतिक परिवार की भलाई की खातिर देश के सवालों का जवाब देने के बजाय चुप्पी साधे रखी। फिल्म में कुछ ऐसी बातें भी हैं, जो पूर्व पीएम की इमेज को साफ करने के साथ-साथ धूमिल भी कर रही है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पुस्तक ऐक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर लिखने के बाद वो अपने प्रिय संजय बारू से नाराज हो गये और उसके बाद उनसे कभी नहीं मिले, क्यों नहीं मिले। उनके प्रिय रहे संजय को अचानक क्यों दूर कर दिया। इत्यादि… इत्यादि सवाल मेरे अंदर चल रहे हैं। 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पीएमओ से जुड़ी जिस दुनिया को दिखाया गया है, उससे मैं उस दौर के बारे में बहुत कुछ समझ पायी। । मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे अनुपम खेर का अभिनय तो जबरदस्त हैं लेकिन कई बार उनका चलना, बोलना अखरता है। कई बार तो हास्यास्पद भी लगता है। ऐसे लग रहा था कि उनके अंदर बहुत कुछ चल रहा है। संजय बारू यानी पुस्तक के लेखक का किरदार निभा रहे अक्षय खन्ना का अभिनय तो बहुत अच्छा है। मुख्य भूमिका में भी वे ही हैं। उन्हें सूत्रधार के रूप में भी दिखाया गया है, पर कई बार उनके बोलने का अंदाज अखरता हैं। समझ में नहीं आता कि उनको इतना ज्यादा फोकस क्यों किया गया है। वो प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार है। उसके साथ-साथ सबसे बड़ी बात है कि प्रधानमंत्री को समझते हैं। उनके लिए लिखते हैं। सीधे उनके साथ काम करना चाहते हैं। पीएमओ में उनका आना-जाना भी है। वहाँ उनके कई दुश्मन भी हैं, और उनका डंटकर सामना भी करते हैं। इसके बावजूद दर्शक उनके अलग अंदाज में बोलने का रहस्य नहीं जान पाते हैं। वैसे अक्षय खन्ना का अभिनय तो काबिले तारीफ है, लेकिन इसके बावजूद उनका अलग तरह से पेश आना, दर्शकों को कई बार खटकता है। लेकिन फिर भी दर्शकों से संजय का एक जुड़ाव हो जाता है। फिल्म की कहानी कुछ इस तरह से है । कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (सुजैन बर्नेट) को जीत मिलती है। वह स्वयं पीएम बनना चाहती हैं लेकिन बन नहीं पाती हैं। उनका बेटा राहुल गांधी (अर्जुन माथुर) जो राजनीति को समझ नहीं पा रहा है इसीलिए उसको पीएम नहीं बनाया जा रहा है इसलिए पीएम बनने के लिए मनमोहन सिंह को चुना जाता है। वो पीएम बनते भी हैं। उनमें कई बार ऊर्जा दिखाई भी देती हैं लेकिन वह फिर सिमट जाते हैं। आखिरमें वह इस्तीफा देना चाहते हैं लेकिन उन्हें इजाजत नहीं मिलती। प्रियंका गांधी (आहना कुमरा) अच्छी दिखती हैं। इस फिल्म में उस दौर के कई मुद्दे दिखाये गये हैं। यह भी पता चला कि कैसे प्रधानमंत्री अपनी ही पार्टी के लोगों से अलग होते रहे और त्रस्त होते रहे हैं। निर्देशक विजय रत्नाकार गुट्टे ने इस फिल्म को बहुत ही अच्छे तरीके से बनाया है। फिल्म की कहानी बहुत ही अच्छी है। चुस्त दुरुस्त हैं। इस फिल्म को देखने के बाद किताब को पढ़ने की इच्छा भी जाग रही है। मुख्य कलाकारों में केवल अनुपम खेर, अक्षय खन्ना ही हैं। इसके अलावा मनमोहन की पत्नी का किरदार निभा रही दिव्या सेठ के सीन तो कम हैं, लेकिन उनका अभिनय भी दर्शकों को याद रह जायेगा। इसके अलावा सब गिने-चुने ही हैं और अभिनय भी खास नहीं है। गाना तो केवल एक है, लेकिन अच्छा है। गुनगुनाने का मन करता है। वैसे यह फिल्म प्रेम, रोमांस से अलग हटकर बनी है और एक अलग तरह की भी है, इसलिए मुझे लगता है कि इस तरह की फिल्में बननी चाहिए जिससे लोग प्रेम, रोमांस के अलावा विषय के बारे में भी जान सके।




