नयी दिल्ली : दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक महिला के साथ हुए सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। इसके साथ ही देश को झकझोर देने वाले, यौन उत्पीड़न के इस भयानक अध्याय का अंत हो गया।
मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को गत 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी के फंदे पर लटकाया गया।
इस मामले की 23 वर्षीय पीड़िता को ‘‘निर्भया’’ नाम दिया गया था जो फिजियोथैरेपी की छात्रा थी। तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने कहा, ‘‘डॉक्टरों ने शवों की जांच की और चारों को मृत घोषित कर दिया।’’
जेल अधिकारियों ने बताया कि चारों दोषियों के शव करीब आधे घंटे तक फंदे पर झूलते रहे जो जेल नियमावली के अनुसार फांसी के बाद की अनिवार्य प्रक्रिया है।
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर तिहाड़ जेल में पहली बार चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई। इस जेल में 16,000 से अधिक कैदी हैं।
चारों दोषियों ने फांसी से बचने के लिए अपने सभी कानूनी विकल्पों का पूरा इस्तेमाल किया और बृहस्पतिवार की रात तक इस मामले की सुनवाई चली।
सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के इस मामले के इन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीन बार सजा की तामील के लिए तारीखें तय हुईं लेकिन फांसी टलती गई। अंतत: आज सुबह चारों दोषियों को फांसी दे दी गई।
आखिरी पैंतरा चलते हुए एक दोषी ने दिल्ली उच्च न्यायालय और फांसी से कुछ घंटे पहले उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
फांसी से कुछ घंटों पहले पवन कुमार गुप्ता ने राष्ट्रपति द्वारा दूसरी दया याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
अभूतपूर्व रूप से देर रात ढाई बजे सुनवाई शुरू हुई और एक घंटे तक चली। उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने उसकी याचिका खारिज करते हुए फांसी का रास्ता साफ कर दिया।
न्यायालय ने गुप्ता और अक्षय सिंह को फांसी से पहले अपने परिवार के सदस्यों से मुलाकात करने की अनुमति देने पर भी कोई आदेश देने से इनकार कर दिया।
सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अपनी बेटी को आखिरकार न्याय मिलने से राहत महसूस कर रहे निर्भया के माता-पिता ने कहा कि वे ‘‘भारत की बेटियों के लिए अपनी लड़ाई’’ जारी रखेंगे।
निर्भया की मां आशा देवी ने फांसी के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘हमें आखिरकार न्याय मिला। हम भारत की बेटियों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। न्याय में देरी हुई लेकिन न्याय मिला।’’
उन्होंने कहा कि दोषियों की फांसी के बाद अब महिलाएं निश्चित तौर पर सुरक्षित महसूस करेंगी।
उन्होंने कहा कि पूरा देश जाग रहा था और न्याय का इंतजार कर रहा था। तिहाड़ जेल के बाहर शुक्रवार तड़के ही सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। उनके हाथों में राष्ट्रध्वज था और वे ‘अमर रहो निर्भया’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। जैसे ही फांसी हुई तो उनमें खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
उनमें से कुछ ने फांसी के बाद मिठाइयां बांटी। जेल के बाहर एकत्रित लोगों में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी थीं। उन्होंने एक पोस्टर ले रखा था जिस पर लिखा था ‘निर्भया को न्याय मिला। अन्य बेटियों को अब भी इंतजार है।’
उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकार न्याय मिला। यह कानून व्यवस्था की जीत है।’’
द्वारका में महिलाओं के कल्याण के लिए सतचित फाउंडेशन नामक एक एनजीओ चलाने वाली अर्चना कुमारी ने कहा ‘‘मैंने निर्भया के अभिभावकों का दर्द देखा है। उम्मीद है कि दोषियों को फांसी से बलात्कार और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर लगाम लगेगी।’’
पश्चिमी दिल्ली की निवासी सना ने कहा, ‘‘हमारे समाज में इस फांसी के बाद कुछ नहीं बदलेगा लेकिन हम खुश हैं कि चारों दोषियों को फांसी दी गई और निर्भया को न्याय मिला।’’
चलती बस में निर्भया के साथ छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे बुरी तरह पीटा, घायल कर दिया और सर्दी की रात में चलती बस से नीचे सड़क पर फेंक दिया था। 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था और निर्भया के लिए न्याय की मांग करते हुए लोग सड़कों पर उतर आए थे।
करीब एक पखवाड़े तक जिंदगी के लिए जूझने के बाद अंतत: सिंगापुर के अस्पताल में निर्भया ने दम तोड़ दिया था।
इस मामले में मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह सहित छह व्यक्ति आरोपी बनाए गए। इनमें से एक नाबालिग था।
मामले के एक आरोपी राम सिंह ने सुनवाई शुरू होने के बाद तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को सुनवाई के बाद दोषी ठहराया गया और उसे सुधार गृह भेज दिया गया। तीन साल तक सुधाार गृह में रहने के बाद उसे 2015 में रिहा कर दिया गया।
इस मामले में लंबी कानूनी लड़ाई चली और यह निचली अदालतों से होकर उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तथा राष्ट्रपति के पास पहुंचा।
अदालत ने इस आधार पर तीन बार मौत का वारंट रोका कि दोषियों ने अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल नहीं किया था और एक के बाद एक ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी। पांच मार्च को एक निचली अदालत ने मौत का नया वारंट जारी किया जिसमें फांसी की अंतिम तारीख 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे तय की गई।
निर्भया के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में दी गयी फाँसी
घरेलू उड़ानों के निलंबित रहने के दौरान नहीं कटेगी छुट्टी, वेतन : इंडिगो
मुम्बई : इंडिगो ने अपने कर्मचारियों को घरेलू उड़ानों के निलंबित रहने की अवधि में वेतन और छुट्टी नहीं कटने का भरोसा दिया है। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने देश में घरेलू उड़ानों को मंगलवार मध्यरात्रि से 31 मार्च तक के लिए निलंबित कर दिया है।
इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंजय दत्ता ने कर्मचारियों को भेजे एक ई-मेल में कहा कि कंपनी के पास अप्रैल के लिए पहले से ‘ठीकठाक’ अग्रिम बुकिंग है। इंडिगो कम क्षमता के साथ ही फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में जिन कर्मचारियों को इस अस्थायी निलंबन की अवधि में काम नहीं करना पड़ रहा है। हम उनके वेतन में कोई कटौती नहीं करेंगे और ना ही उनकी छुट्टियां काटेंगे।’’ पीटीआई-भाषा ने यह ई-मेल देखा है।
दत्ता ने कहा कि पिछले कुछ दिन विमानन कंपनी के लिए काफी चुनौती भरे रहे हैं और ‘‘निश्चित तौर पर आने वाले कुछ हफ्तों में हमारी आय, हमारी लागत से कम रहेगी। ऐसे में हमें अपनी नकदी और पाई-पाई बचाने के प्रयास करने होंगे।’’
उन्होंने कहा यह भी कहा कि इस अस्थायी निलंबन की अवधि के दौरान कर्मचारियों का वेतन इत्यादि देने के लिए कंपनी अपनी बचत पूंजी का इस्तेमाल करेगी।
21 दिनों तक लॉकडाउन रहेगा देश, पढ़ें पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें
नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस को लेकर मंगलवार को दूसरी बार देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यू की सफलता को लेकर देश की जनता बधाई की पात्र है। प्रधानमंत्री ने अफने संबोधन में कहा कि आज राज 12 बजे से देश पूरी तरह से लॉकडाउन (देशबंदी) हो जाएगा जो 21 दिनों तक रहेगा। उन्होंने कहा कि यह एक तरह का कर्फ्यू ही है जो जनता कर्फ्यू से ज्यादा सख्त होगा। उन्होंने कोरोना वायरस को रोकने के लिए लॉकडाउन को जरूरी बताया।
बधाई की पात्र है देश की जनता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 22 मार्च को जनता कर्फ्यू में हमने जो संकल्प लिया था उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। इस परीक्षा में हर वर्ग के लोग साथ में आए। हर भारतवासी ने जनता कर्फ्यू को सफल बनाने में योगदान दिया। इस कर्फ्यू ने बताया कि जब देश और मानवता पर संकट आता है तो सभी भारतीय मिलकर उसका मुकाबला करते हैं। सभी जनता कर्फ्यू की सफलता के पात्र हैं।
21 दिनों के संपूर्ण देश रहेगा लॉकडाउन
आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण लॉकडाउन होने जा रहा है। हिंदुस्तान को बचाने के लिए, हिंदुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए आज रात 12 बजे से, घरों से बाहर निकलने पर, पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है। यह एक तरह का कर्फ्यू ही है। देश के हर राज्य को, हर केंद्र शासित प्रदेश को, हर जिले, हर गांव, हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है।
सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र विकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग (सामाजिक दूरी) केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं। सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है। कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच, आपको, आपके बच्चों को, आपके माता पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी।
देश को उठानी पड़ेगी आर्थिक कीमत
उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर इस लॉकडाउन की एक आर्थिक कीमत देश को उठानी पड़ेगी। लेकिन एक-एक भारतीय के जीवन को बचाना इस समय मेरी, भारत सरकार की, देश की हर राज्य सरकार की, हर स्थानीय निकाय की, सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप इस समय देश में जहां भी हैं, वहीं रहें।
आने वाले 21 दिन हैं बहुत महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 21 दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो, कोरोना वायरस की संक्रमण सायकिल तोड़ने के लिए कम से कम 21 दिन का समय बहुत अहम हैं। साथियों, आज के फैसले ने देशव्यापी लॉकडाउन ने आपके घर के दरवाजे पर एक लक्ष्मण रेखा खींच दी है।
ऐहतियात बरतिए, अपने घरों में रहिए
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपको ये याद रखना है कि कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में बिल्कुल स्वस्थ लगता है, वो संक्रमित है इसका पता ही नहीं चलता। इसलिए ऐहतियात बरतिए, अपने घरों में रहिए। घर में रहें, घर में रहें और एक ही काम करें कि अपने घर में रहें।
ये धैर्य और अनुशासन की घड़ी है
प्रधानमंत्री ने कहा कि साथियों, ये धैर्य और अनुशासन की घड़ी है। जब तक देश में लॉकडाउन की स्थिति है, हमें अपना संकल्प निभाना है, अपना वचन निभाना है। भारत आज उस स्टेज पर है जहां हमारे आज के एक्शन तय करेंगे कि इस बड़ी आपदा के प्रभाव को हम कितना कम कर सकते हैं। ये समय हमारे संकल्प को बार-बार मजबूत करने का है।
पीएम ने बताया कैसे फैलती गई महामारी
सोचिए, पहले एक लाख लोग संक्रमित होने में 67 दिन लगे और फिर इसे 2 लाख लोगों तक पहुंचने में सिर्फ 11 दिन लगे। ये और भी भयावह है कि दो लाख संक्रमित लोगों से तीन लाख लोगों तक ये बीमारी पहुंचने में सिर्फ चार दिन लगे। आपको ये याद रखना है कि कई बार कोरोना से संक्रमित व्यक्ति शुरुआत में बिल्कुल स्वस्थ लगता है, वो संक्रमित है इसका पता ही नहीं चलता। इसलिए ऐहतियात बरतिए, अपने घरों में रहिए।
कोरोना से लड़ने के लिए 15 हजार करोड़ आवंटित
कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए और देश के स्वास्थ्य सेवा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान दो बार हाथ जोड़कर अपील की और कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी से बनी स्थितियों के बीच, केंद्र और देशभर की राज्य सरकारें तेजी से काम कर रही है।
डॉक्टर्स, नर्सेस, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पैथोलॉजिस्ट के बारे में सोचिए
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन डॉक्टर्स, उन नर्सेस, पैरा-मेडिकल स्टाफ, पैथोलॉजिस्ट के बारे में सोचिए, जो इस महामारी से एक-एक जीवन को बचाने के लिए, दिन रात अस्पताल में काम कर रहे हैं। उन लोगों के लिए प्रार्थना करिए जो आपकी सोसायटी, आपके मोहल्लों, आपकी सड़कों, सार्वजनिक स्थानों को सैनिटाइज करने के काम में जुटे हैं, जिससे इस वायरस का नामो-निशान न रहे।
घर बैठे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं प्रोफेशनल और स्किल इनहांसमेंट कोर्स
देश-दुनिया बीते कुछ महीनों से लगातार कोरोना के प्रभाव को खत्म करने का प्रयास कर रही है। बचाव के लिए देश के सभी स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों को सरकार के अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। स्कूल बंद हो जाने और परीक्षाओं में देरी से आगे की पढ़ाई पर असर न पड़े। ऐसे में भास्कर आपको एक्सपर्ट हितेश पमनानी की मदद से ऑनलाइन कोर्सेस की जानकारी दे रहा है। जिन्हें स्कूली स्टूडेंट्स, यूजी, पीजी और प्रोफेशनल्स घर बैठे कर पाएंगे।
लर्निंग कंटेंट उपलब्ध
स्कूल और कॉलेज सरकार के अगले आदेश तक पूरी तरह बंद हैं, ऐसे में स्टूडेंट्स अपना समय बर्बाद करने की बजाय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर पढ़ सकते है। हाल ही में सीबीएसई ने एमएचआरडी के ‘दीक्षा प्लेटफॉर्म’ पर सभी सब्जेक्टस् के ई-कॉन्टेंट लॉन्च किए हैं। जिसकी मदद से स्टूडेंट्स घर बैठे अपने सभी सब्जेक्टस् की पढ़ाई कर सकते हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म पर एनसीईआरटी के बुक्स के मुताबिक वीडियो क्लास रूम से लेकर लर्निंग कन्टेंट उपलब्ध है। साथ ही स्टूडेंट्स सीबीएसई की वेबसाइट पर पहली से 12वीं क्लास तक के बुक्स को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट पर पढ़ सकते हैं।
इंटरव्यू फेस करना सीखे
‘उडेमी’ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रोफेशनल व स्किल इनहांसमेंट कोर्सेस उपलब्ध है। यहां फोटोग्राफी सीखी जा सकती है। वही कुकिंग से लेकर प्रोफेशनल टिप्स में रेज्यूमे तैयार करने से लेकर इंटरव्यू फेस करने से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं।
आंत्रप्रिंयोरशिप के कोर्स
यूजी और पीजी के स्टूडेंट्स ‘एमआईटी ओपन कोर्स वेयर’ प्लेटफॉर्म पर फ्री ऑनलाइन कोर्स मटीरियल्स हैं। इस प्लेटफॉर्म पर इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट से जुड़े कई कोर्सेस है। मैकेनिकल, कम्प्यूटर , कम्प्यूटर साइंस से लेकर एरोनोटिकल इंजीनियरिंग जैसे कई सब्जेक्टस् को पढ़ सकेंगे। लॉ, मैनेजमेंट और आंत्रप्रिंयोरशिप के मटीरियल्स उपलब्ध है।
स्कूल स्टूडेंट्स के लिए खान अकेडमी
स्कूल स्टूडेंट्स इन दिनों ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘खान अकेडमी’ की मदद ले सकते हैं। यहां पहली से 12वीं तक के स्टूडेंट्स के लिए अलग-अलग सब्जेक्टस् के कंटेंट उपलब्ध है। वे मैथ्स , साइंस, कम्यूटिंग, इकनॉमिक्स एंड फाइनेंस, फिजिक्स एंड इंजीनियरिंग से लेकर आर्ट एंड ह्यूमैनिटीज तक कंटेंट है। यहां भी अधिकतर कोर्सेस फ्री में उपलब्ध है। 15 साल तक के बच्चों के लिए ‘कोड.ओआरजी’ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी है।
विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ जेब खर्च कमाने का अवसर दे रहे हैं ये ऐप्स
विषय में अच्छा कॅरिअर बनाने के लिए स्टूडेंट्स का स्कूलिंग पूरी करते ही आगे की पढ़ाई के लिए अपने शहर से बाहर जाकर किसी कॉलेज में एडमिशन लेना एक आम बात है। हालांकि जिंदगी में पहली बार लंबे समय तक घर से दूर रहने का अनुभव कर रहे ऐसे कई स्टूडेंट्स के सामने एक और चिंता आ खड़ी होती है और वह है पैसे की अनुपलब्धता। ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि वे अपने पैरों पर खड़े होने की चाह रखते हैं और इस वजह से अपने पेरेंट्स से पैसे मांगने से बचते हैं। इसके लिए वे पढ़ाई के साथ छोटी-मोटी जॉब्स का सहारा लेते हैं। अब इंटरनेट पर ऐसे कई प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं जिनका इस्तेमाल ये स्टूडेंट्स अपने मामूली खर्च पूरे करने से लेकर आर्थिक तौर पर स्वतंत्र होने के लिए कर सकते हैं। यहां ऐसे ही कुछ प्लेटफॉर्म्स के बारे में बताया जा रहा है जिनके जरिए आप जीवन में पैसे कमाने की शुरुआत कर सकते हैं।
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कई युवाओं को लिखने का शौक होता है जिसके चलते वे ब्लॉग्स के जरिए अपने विचार शेयर करना पसंद करते हैं। अगर आपका भी एक ब्लॉग है और आप उसे मोनेटाइज करना चाहते हैं तो अमेजन एफिलिएट प्रोग्राम को आजमा सकते हैं। अमेजन एसोसिएट्स के नाम से भी मशहूर इस प्रोग्राम में साइन अप करने के बाद आपको अपने ब्लॉग पर एफिलिएट लिंक्स पोस्ट करने होंगे। अगर आपका कोई रीडर उन लिंक्स पर क्लिक कर अमेजन से परचेजिंग करता है तो आप कंपनी से कमीशन प्राप्त कर सकते हैं।
वर्क फ्रॉम होम : घर से काम करते समय भी रखें अनुशासन
कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते कई कंपनियां और संस्थाएं अपने कर्मचारियों को कह रही है कि वे घर से ही अपना काम करके भेजें या करें। वर्क फ्रॉम होम इस समय की एक बड़ी जरूरत है। यह काम बहुत सरल लग सकता है, लेकिन इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि इसे करते हुए बहुत अनुशासित रहना होगा। इसके करते हुए उतनी ही गंभीरता रखना होगी जितनी कर्मचारी ऑफिस में काम करते हुए रखता है। वर्क फ्रॉम होम के तहत दिया गया काम मजाक नहीं। इसके अंजाम देने के लिए सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें यह करते हुए घर के काम और ऑफिस के काम को गड्ड मड्ड नहीं करना चाहिए।
घर और ऑफिस के कामों को रखें अलग
घर से काम करते हुए एक अच्छी गति में काम करने की जरूरत है। और यह करते हुए ध्यान रखना होगा कि घर का काम पूरा करने का एक निश्चित और निर्धारित समय हो तथा ऑफिस का काम करने का भी निर्धारित और निश्चित समय होना चाहिए। इससे दोनों की कामों को अलग- अलग रखकर बेहतर काम किया जा सकता है। यदि हमने घर के कामों और ऑफिस के कामों को मिला दिया तो यह कोई अच्छा विचार नहीं है। यदि यह मिला दिया गया तो इससे दक्षता और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
एकाग्रता का रखें ध्यान
घर से काम करते हुए इस बात को नहीं भुलाया जाना चाहिए कि जिस जगह से आप काम करने जा रहे हैं, उसमें कम से कम शोर हो। इससे आपकी एकाग्रता भंग हो सकती है और काम भी प्रभावित हो सकता है। जब आप घर से काम कर रहे हों , उस समय भी फॉर्मल ड्रेस में ही यह काम करें। यह माइंड सेट को प्रभावित करता है क्योंकि इसके मनोवैज्ञानिक साक्ष्य हैं कि यह कैसे प्रभावित करता है।
कई सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध
घर पर आपका कार्य बाहरी शोर से मुक्त होना चाहिए और आरामदायक फर्नीचर होना चाहिए। इससे आप ज्यादा सुविधाजनक ढंग से बेहतर काम कर पाएंगे। इसके लिए आपको घर में एक सही स्थान का चुनाव करना होगा। साथ ही ऐसी कुर्सी होनी चाहिए जो आपकी पीठ को आरामदायक ढंग से सहारा दे सके और टेबल पर आप आईलेवल को सही तरीके निर्धारित कर काम को अंजाम दे सकें। वर्क फ्रॉम होम के लिए कई सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ फ्री हैं जैसे- वॉट्सएप वीडियो कॉल, गूगल डुओ और स्काइप। इसका उपयोग छोटे दफ्तरों के काम के लिए बेहतर ढंग से किया जा सकता है।
बोर नहीं होने देंगे ये काम
बड़ों द्वारा रखी हुई पुरानी पुस्तकें पढ़ें और उसको बारे में जाने
अपने पुरानी तस्वीरें देखिए।
एक्ट कीजिए और इंटरेस्टिंग वीडियोज बनाइए।
घर को सजाइए
परिवार के साथ मिलकर पसन्दीदा व्यंजन बनायें
क्राफ्ट/ क्रिएटिव वर्क एंड डिजाइन।
परिवार के सभी सदस्य एक बैठकर अपनी पसंदीदा फिल्म देख सकते हैं।
कैंपेन गेम डम शिराज, सांप सीढ़ी, लूडो, अंताक्षरी, नेम प्लेस एनिमल थिंग्स गेम।
अपने शेफ्स से कैरम बोर्ड, कार्ड्स, चेस निकालकर गेम्स खेल सकते हैं।
घर के बुजर्गों से उनके जीवन के कहानी सुनिए और उससे सीख लीजिए।
(साभार – दैनिक भास्कर)
दूरी बनाने के लिए गुजरात में गजब का जुगाड़
पाटन : पीएम मोदी के भाषण के बाद गुजरात ने निकाला दूरी बनाने का गजब का जुगाड़। कोरोना वायरस के प्रकोप के खिलाफ जंग में पीएम मोदी ने पूरे देश के 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। पीएम मोदी ने बताया कि कोरोना वायरस को खत्म करने का एक ही उपाय है, वो है सोशल डिस्टेंसिंग यानी दूरी बनाए रखना। पीएम मोदी ने सभी लोगों को घर के अंदर रहने कहा है। पीएम मोदी के भाषण के बाद गुजरात के व्यापारियों ने दूरी बनाने के लिए गजब का जुगाड़ लगया है। गुजरात के पाटन में हिंगला बाजार में एक किराने वाले ने अपनी दुकान के बाहर कुछ दूरी पर गोले बनाए. जिससे लोग दूर खड़े रहकर सामान खरीद कर सकें। सोशल मीडिया पर ये तस्वीर काफी वायरल हो रही है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला गुजरात के मूंदड़ा के एक स्टोर में, जहाँ सामाजिक दूरी बनाने के लिए सरलता से पालन हो रहा है। दूरी बनाने के लिए यहां भी मार्क लगाए गए हैं, जहां खड़े होकर खरीददारी के लिए इंतजार कर रहे हैं. भीड़भाड़ से बचने के लिए इस किराना स्टोर ने ये आइडिया निकाला।
कोई हाय-तौबा नहीं। कोई मारा-मारी नहीं। सामाजिक दूरी के नियम का सरलता से पालन।
492 साल बाद चांदी के सिंहासन पर विराजे रामलला, हुई भव्य आरती, लगा भोग
अयोध्या : 492 साल बाद चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के दिन रामलला आज तड़के करीब 3 बजे नए अस्थाई मंदिर में विराजमान हो गए हैं। रामलला तीनों भाइयों भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमान जी के साथ अस्थायी मंदिर में विराजमान हुए। सभी को अलग-अलग पालकियों में बिठाकर ले जाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में शंखनाद व घंटे-घड़ियाल के बीच भोर में तीन बजे चार पात्रों में फूल व अक्षत के बीच रामलला समेत चारों भाइयों की पालकी नए मंदिर के लिए हनुमानलला के साथ प्रस्थान किया। वैदिक मंत्रोउच्चरण के साथ रामलला अस्थाई भवन में विराजमान हुए। सुबह 5 बजे अस्थाई भवन में श्री रामलला। श्री रामलला की भव्य आरती हुई । श्रीरामलला 1528 के बाद पहली बार चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुए हैं।इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला को 11 लाख रुपये का चेक सौंपा। राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को यह 11 लाख का चेक दिया गया। रामलला के मूर्ति विस्थापन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या मंदिर निर्माण का आह्वान करती है। मंदिर निर्माण के मद्देनजर पहला चरण पूरा हो गया है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम त्रिपाल से नए आसन पर विराज गए हैं। आरती पूजन कर सीएम योगी गोरखपुर के लिए रवाना हो गए।
श्रीरामजन्मभूमि परिसर के गर्भगृह में उदक शांति पूजा के बाद मंगलवार को सुबह से पूरे दिन विराजमान रामलला को नए गर्भगृह में विराजमान करने के लिए विशेष अनुष्ठान हुआ। उधर, अस्थाई मंदिर परिसर को जागृत करने के साथ ही रामलला के आने के लिए तय मार्ग के परिक्रमा पथ का शुद्धिकरण भी किया गया।
कोरोना से डरना नहीं, लड़ना है और हराना भी है
चीन के बाद इटली में कहर बरपा रही कोरोना वायरस महामारी, कोविड19 ने भारत में दस्तक देने के साथ ही अपनी भयावहता दिखानी शुरू कर दी है। अब तक चार लोगों की मौत जे शेप में फैल रहे खतरनाक कोरोना वायरस से हो चुकी है। जबकि 200 से अधिक लोग देशभर में अभी इससे संक्रिमत बताए गए हैं। ऐसे में पहला चरण पूरा करने के बाद अब कोरोना वायरस अपना मिजाज बदल रहा है। यह सही है कि स्थिति भयावह है मगर यह भी सही है कि इस महामारी से निपटने के लिए हम सजग हो रहे हैं, सचेत हो रहे हैं और इस पर काम भी हो रहा है। आज चलिए इस बारे में ही बात करते हैं –
पहले चरण में कोरोना वायरस से प्रभावित देशों से आने वाले आगंतुकों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों के जरिये फैला यह वायरस दूसरे चरण में अब धीरे-धीरे स्थानीय प्रसार के रास्ते ढूंढ रहा है। ऐसे में पब्लिक प्लेस में इसके फैलने के खतरे सबसे ज्यादा हैं। हालांकि अब तक सीमित दायरे में रहा कोरोना वायरस दूसरे चरण के बाद भयावह रूप अख्तियार कर सकता है। इस फेज में जाने-अनजाने लगातार लोगों का संपर्क बना रहता है, ऐसे में एक भी संक्रमित हजारों लोगों को यह बीमारी ट्रांसमिट कर सकता है। संदिग्ध मरीजों की संख्या जितनी ज्यादा बढ़ेगी, हमारी मुश्किलें उतनी ही बढ़ती रहेंगी। इससे आने वाले समय में स्थिति विकराल हो सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक तीसरा चरण और भी खतरनाक हो सकता है। क्योंकि इस फेज में कई ऐसे मरीज सामने आ सकते हैं, जिनके बारे में पूरी जानकारी जुटाना खासा मुश्किल है। ऐसे में आइसोलेशन से लेकर क्वारंटाइन तक भी मुश्किलें आएंगी। कोरोना वायरस के समाज के निचले स्तर तक फैलाव की आशंका बढ़ जाएगी। चौथे चरण में सामुदायिक स्तर पर बीमारी का फैलाव होने से कोरोना वायरस बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले लेगा। तब यह सही मायने में महामारी विभीषिका बन जाएगी। इस लिहाज से कोरोना पर दूसरे चरण में ही नियंत्रण पाना बेहद जरूरी और अहम है।
डॉक्टर का कहना है कि आइसोलेनशन और क्वारंटाइन शब्द अधिकतर लोगों के लिए नया है। ऐसे में लोग कोरोना वायरस के नाम से ही घबरा रहे हैं। यहां जानने की जरूरत है कि आइसोलेशन में उन संदिग्ध और संक्रमित मरीजों को रखा जाता है, जो इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ जाते हैं। तब उन्हें अकेले रखकर उनका इलाज प्रक्रियाबद्ध तरीके से किया जाता है।
क्वारंटाइन के बारे में बताएं तो इससे कई लोगों को परेशानी होने की बात कही जाती है। हालांकि सच्चाई ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्वारंटाइन में निश्चित समय के लिए संक्रमित मरीज को अलग वार्ड या कमरे में रखा जाता है। ताकि यह बीमारी दूसरे लोगों तक न फैले। इस प्रक्रिया में परिवार वालों को भी संक्रमित मरीज से दूर रखा जाता है।
जितना हो सके एक-दूसरे से दूर रहें। अगले 15 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी है। एहतियात के तौर पर जितना कम हो सके, उतना कम बाहरी संपर्क में रहें, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। सरकार द्वारा एहतियात के लिए जो निर्देश दिया जा रहा है, उसका कड़ाई से पालन करें। घर-परिवार को संरक्षति करने के लिए इसके लोकल ट्रांसमिशन से कोसों दूर रहें।
कोरोना वायरस को लेकर चैत्र नवरात्रि पर देश से पीएम नरेंद्र मोदी के नवाग्रह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरूवार की शाम को राष्ट्र के नाम जनता को संबोधित कर कोरोना वायरस पर खुद के बचाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में भी इतने देश प्रभावित नहीं हुए थे, जितना की कोरोना वायरस से हुए हैं। पूरा विश्व संकट से गुजर रहा है और हमें सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि भारत पर कोरोना वायरस का असर नहीं पड़ेगा, ऐसी महामारी में ‘हम स्वस्थ, जगत स्वस्थ मंत्र काम आ सकता है।
चैत नवरात्रि पर पीएम नरेंद्र मोदी का कोरोना वायरस पर देश की जनता से नवाग्रह किया। आइये जानते हैं –
1. प्रत्येक भारतवासी सजग रहे, सतर्क रहें, आनेवाले कुछ सप्ताह तक, जब बहुत जरूरी न हो अपने घर से बाहर न निकलें। यह मानना गलत है कि भारत पर कोरोना वायरस का असर नहीं पड़ेगा, ऐसी महामारी में ‘हम स्वस्थ, जगत स्वस्थ मंत्र काम आ सकता है। आप सड़कों पर घूमते रहेंगे, बाजारों में जाते रहेंगे और स्थिति से बचे रहेंगे, यह सोच ठीक नहीं है। मुझे आपके कुछ हफ्ते, कुछ समय चाहिए।
2.मेरा एक और आग्रह है कि हमारे परिवार में जो भी बुजुर्ग हों, 65 वर्ष की आयु के ऊपर के व्यक्ति हों, वे आने वाले कुछ सप्ताह तक घर से बाहर न निकलें, बहुत जरूरी होने पर ही घरों से निकलें। 60 से 65 वर्ष से ऊपर के आयु के व्यक्ति घर के भीतर ही रहें।
3- इस रविवार यानि 22 मार्च की शाम को 5 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू का पालन करें। 22 मार्च रविवार को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक सभी देशवासियों को जनता कर्फ्यू का पालन करना है, घरों से न निकलें। केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोग ही निकलें। यह कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत कितना तैयार है, ये देखने और परखने का भी समय है। आपके इन प्रयासों के बीच, जनता-कर्फ्यू के दिन 22 मार्च को मैं आपसे एक और सहयोग चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि 22 मार्च को हम ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें जो जोखिम उठाकर आवश्यक कामों में लगे हैं, इस महामारी से लड़ने में मदद कर रहे हैं।
4-दूसरों की सेवा कर रहे लोगों का 22 मार्च की शाम को 5 बजे 5 मिनट तक करतल ध्वनि के साथ आभार व्यक्त करें। रविवार को ठीक 5 बजे हम अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर, बालकनी-खिड़कियों के सामने खड़े होकर पांच मिनट तक ताली-थाली बजा कर उन लोगों के प्रति कृतज्ञता जताएं, जो कोरोना से बचाने में हमें लगे हैं। 22 मार्च को हमारा यह प्रयास, हमारा आत्म संयम, देश हित में कर्तव्य पालन के संकल्प का एक मजबूत प्रतीक होगा।
5-रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल जानें से बचें, जो सर्जरी बहुत आवश्यक न हो उसे आगे बढ़वाएं। मोदी ने लोगों से अनुरोध किया कि वे नियमित जांच के लिए अस्पताल जाने से बचें ताकि स्वास्थ्यकर्मियों पर दबाव कम हो।
6-वित्तमंत्री के नेतृत्व में Covid-19 Economic Tast Force से आवश्यक फैसले लेने का आग्रह। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से उत्पन्न हो रही आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री के नेतृत्व में सरकार ने एक कोविड-19 इकनॉमिक रिस्पॉन्स टास्क फोर्स के गठन का फैसला लिया है। यह टास्क फोर्स यह भी सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक मुश्किलों को कम करने के लिए जितने भी कदम उठाए जाएं, उन पर प्रभावी रूप से अमल हो।
7-व्यापारी जगत से, उच्च आय वर्ग से, दूसरों का वेतन न काटने का आग्रह। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के इस समय में मेरा देश के व्यापारी जगत, उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि अगर संभव है तो आप जिन-जिन लोगों से सेवाएं लेते हैं, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखें।
8-जरूरी सामान संग्रह करने की होड़ न लगाएं, पहले की तरह ही सामान्य रूप से इन सामानों की खरीदारी करें। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि देश में दूध, खाने-पीने का सामान, दवाएं, जीवन के लिए ज़रूरी ऐसी आवश्यक चीज़ों की कमी ना हो, इसके लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।
9- पीएम मोदी ने देश की जनता से आशंकाओं और अफवाहों से बचने का आग्रह किया।

कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए जगह
जगह हाथ लगाने या हाथ से मुंह, नाक आदि छूने से बचने की सलाह तो दी ही जा रही थी, अब वित्त मंत्रालय ने लोगों को सुझाव दिया है कि वे बार—बार करेंसी यानी नोट छूने से भी बचें। नोटों के द्वारा भी कोरोना वायरस के फैलने का खतरा है. इसलिए मंत्रालय ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की बात कही है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस से बचाव के कुछ उपाय बताए हैं जिनमें हाथ मिलाने से बचने, मुंह या नाक को हाथ से न छूने और बार—बार हाथ धोने जैसे उपायों की बात की गई है। असल में करेंसी या नोट भी कई हाथों से गुजरकर हमारे पास पहुंचते हैं। यही वजह है कि सरकार ने बैंकों से कहा कि वह ग्राहकों को नकद यानी कैश की जगह यूपीआई, एनईएफटी, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स जैसे डिजिटल पेमेंट्स के लिए प्रेरित करें ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरे को टालने में और मदद मिले।
नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि ग्राहकों को बैंक शाखाओं, एटीएम जैसी जगहों पर बैनर-पोस्टर लगाकर भी जागरूक किया जाना चाहिए. इसके अलावा, सरकार ने बैंक कर्मियों, एजेंटों, ग्राहक सेवा प्रदाताओं को ग्राहकों के लिए सैनिटेशन की सुविधा भी सुनिश्चित करने को कहा ताकि आधार से संचालित पेमेंट सिस्टम के लिए बायोमीट्रिक रीडर और एटीएम जैसे उपकरणों को छूने पर संक्रमण का खतरा नहीं रहे।

चीन में कोरोना वायरस पर लगाम
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर चीन में अब स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। वहां के कुछ क्षेत्रों में पिछले सात दिन से कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी केस सामने नहीं आया है। महामारी पर नियंत्रण की प्रमुख वजह है, चीन के लोगों की देश के प्रति सकारात्मक सोच। लोगों ने सरकार के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया। कामगारों ने देश के प्रति अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाई। यह अनुभव साझा किए हैं मध्य प्रदेश के धार जिले में बदनावर के ग्राम खाचरौद के निवासी ऋतिक पाटीदार ने। ऋतिक चीन की नानचिंग यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस तीसरे वर्ष के विद्यार्थी हैं। कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद वे पिछले माह स्वदेश लौट आए थे। ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे ऋतिक ने बताया कि वे यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ने वाले चीन और अन्य देशों के विद्यार्थियों के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि सात दिन में जियांशी क्षेत्र में एक भी संक्रमित सामने नहीं आया है।
1- लोगों ने महामारी से निपटने के लिए सरकार के निर्देशों का गंभीरता से पालन किया। लक्षण दिखाई देने पर वे तत्काल अस्पताल पहुँचे, ताकि संक्रमण नहीं बढ़े। घर में रहने के लिए कहा गया तो घरों से नहीं निकले। ऋतिक का दोस्त डेविड एक माह से घर में ही रह रहा है।
2- यूनिवर्सिटी के शिक्षक अपनी जिम्मेदारी गम्भीरता से निभा रहे हैं। अन्य देशों के विद्याíथयों को वे देश की जवाबदारी मानते हैं। एक प्राध्यापक ने 30 दिन से एक भी अवकाश नहीं लिया है। अपने आठ साल के बेटे को संभालने के साथ वह विद्याíथयों का भी पूरा ध्यान रख रही हैं। काम के प्रति गंभीरता ऐसी कि कई बार ऑफिस में ही सो जाती हैं।
3- चीन के कामगार अपने देश के लिए समर्पण से काम कर रहे हैं। जब कोरोना का प्रभाव ज्यादा था, तब भी उन्होंने जोखिम उठाकर लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाया। इसके पीछे सोच यह थी कि विपदा में देश के लिए हम काम नहीं करेंगे तो कौन करेगा। घरों में कैद लोगों तक जरूरी सामान लगातार पहुंचाते रहे।

हमारे देश में भी हो रहा है काम
जैसा कि आप जानते हैं कि शिक्षण संस्थान बंद हो चुके हैं और परीक्षाएँ स्थगित हो चुकी हैं तो इस बीच इस महामारी के खिलाफ लड़ाई भी तेज हो गयी है। हैदराबाद में महिन्द्रा इकोल सेन्ट्रल कॉलेज के विद्यार्थियों ने सीओवाईडी -19 के मामलों का पता लगाने के लिए खास तरह का ट्रैकर इजाद किया है। यह जिलेवार इस तरह के मामलों का पता लगायेगा। यह ट्रैकर आप https://covindia.netlify.com. पर पा सकेंगे। यह वेबसाइट एमईसी के विद्यार्थियों राघव एन एस, अनन्त श्रीकर, ऋषभ रामानाथन, रोहित गिल्ला, अंचित शर्मा और वी मेघना रेड्डी ने महेन्द्र इकोल सेन्ट्रल कॉलेज के शिक्षक डॉ. अचल अग्रवाल. डॉ. भार्गव राजाराम और राज नारायणन के नेतत्व में विकसित की है। यह ट्रैकर सम्भवतः अपनी तरह का पहला ट्रैकर है जो देश भर में यात्रा करने वालों को वायरस संक्रमित इलाकों की जानकारी देगा। इसके साथ ही यह अधिकारियों की संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में सहायता करेगा। आप इसे किसी भी वेब ऐप और किसी भी स्मार्ट फोन पर इन्स्टॉल कर सकेंगे।
इस ट्रैकर के लिए डेटा विश्वसनीय स्त्रोतों यानी स्वास्थ्य मंत्रालय, फार्मास्यूटिकल तकनीक और प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों से एकत्रित किया जायेगा। इसके लिए विद्यार्थियों के लिए प्रतिबद्ध टीम बनायी गयी है जो यह काम करेगी।
इस बीच
ख्याल रखें
कोरोना वायरस बीमारी फैलाने वाला एक बड़ा वायरस परिवार है जो साधारण सर्दी-जुकाम से लेकर मर्स और सार्स जैसे कई गंभीर रोगों की वजह है। यदि आप को खुद में कोई गंभीर लक्षण नजर आ रहे हैं तो घर क बाकी लोगों से खुद को अलग रखना बेहतर होगा। आगे जानिए खुद को अलग रखने पर ध्यान देने वाली खास बातें-
एक ही कमरे में रहें
आपकी आवाजाही केवल एक ही कमरे तक होनी चाहिए। इसमें शौचालय संलग्न हो, जिसका इस्तेमाल कोई दूसरा न करे। बाहरी व्यक्ति वहां पर न आएं। हमेशा सर्जिकल मास्क लगाकर रखें। हर 6 से 8 घंटे में इसे बदल दें। इनका दोबारा इस्तेमाल न करें। संक्रमित मास्क का उचित रूप से निस्तारण करें।
एक ही व्यक्ति से संपर्क करें
अगर घर के किसी अन्य सदस्य का आपके कमरे में आना जरूरी हो तो उससे एक से तीन मीटर तक की दूरी बनाए रखें। घर के एक ही सदस्य को देखभाल और संपर्क के लिए चुनें। जो सदस्य कमरे में आए वह मास्क व सर्जिकल दस्ताने जरूर पहने। वह कोई ऐसी चीज या सतह न छुए, जो आपके संपर्क में आई हो। दस्ताने उतारने के बाद साबुन से अवश्य हाथ धोएं।
परिवार के अन्य सदस्य
बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिला और घर के अंदर अन्य बीमार सदस्यों से जितना हो सके दूर रहें। आपकी इस्तेमाल की गई चीजों और जगहों को वे बिल्कुल न छुएं। घर के हर सदस्य को जितना हो सके बार-बार अपने हाथ साबुन से धोने चाहिए। वे अल्कोहल वाले हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
मास्क और कपड़े का निस्तारण
आपके द्वारा इस्तेमाल चादर और कपड़े परिवार के अन्य सदस्यों के सीधे संपर्क में नहीं आने चाहिए। डिस्पोजेबल दस्ताने पहनकर आपके बर्तन धोने चाहिए। आपकी प्लेट, ग्लास, कप आदि का इस्तेमाल कोई और न करे। जो मास्क आपने पहना है उसे उतारने के बाद या तो जला दें या जमीन में गहरा दबा दें।
बाहर से खाना मंगवाने पर
घर पर अलग रहने के दौरान यदि आप बाहर से खाना मंगाते हैं तो भुगतान ऑनलाइन करें ताकि नोट या सिक्के या बिल लेने-देने से बचा जा सके। खाना पहुंचाने वाले से कहें वह खाना गेट पर ही रख दे।
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – निखिता पांडेय
शिक्षण संस्थान-ऋषि बंकिम चन्द्र काॅलेज फाॅर विमेन, कविता- उधार, कवि – अज्ञेय




