Monday, April 27, 2026
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782 बच्चों के बनाए 10 वाट्सएप ग्रुप, इसी पर शिक्षक ले रहे ई-क्लास

दंतेवाड़ा : लॉकडाउन के बीच बच्चों से जुड़े रहने और उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने कुम्हाररास डीएवी स्कूल के प्राचार्य ने एक नया तरीका निकाला है। यहाँ के शिक्षकों ने कक्षा 3 से 12वीं तक के बच्चों के 10 अलग- अलग व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया है। इन ग्रुप में कक्षावार 782 बच्चों को जोड़ा है। इसके जरिये एक अप्रैल से बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत भी कर दी गई है। इस तैयारी के लिए करीब हफ्तेभर का समय लग गया। हफ्तेभर में प्राचार्य असित बोस के साथ मिलकर शिक्षकों ने तैयारी की, बच्चों के परिजनों का मोबाइल नंबर जुगाड़ा और फिर कक्षावार ग्रुप तैयार किया। यह जिले का पहला स्कूल है, जहाँ के शिक्षकों ने डीएवी प्रखंड डीके सहायक क्षेत्रीय अधिकारी सुनील कुमार, प्रशांत कुमार के सुझाव पर लॉकडाउन के बीच भी बच्चों को पढ़ाई व खुद से जोड़े रखने ई क्लासेस का प्रयास कर रहे हैं। सभी ग्रुप्स में प्राचार्य असित बोस खुद जुड़े रहकर मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। इस पहल की परिजन भी तारीफ कर रहे हैं। अच्छी बात ये है कि बच्चों ने भी शिक्षकों के बनाए वीडियो लेसन देखकर पढ़ाई की शुरुआत भी कर दी है। गीदम की स्नेहा गणेश पिल्ले ने बताया कि बेटा 11 वी में पढ़ाई कर रहा है। लॉकडाउन के बाद बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, स्कूल, कोचिंग सबसे दूर हैं। टीचर्स की इस पहल से बच्चे एक बार फिर पढ़ाई से जुड़ेंगे।
बच्चों की पढ़ाई के लिए विषय शिक्षक वीडियो पाठ तैयार कर रहे हैं। इस वीडियो को संबंधित कक्षा के क्लास टीचर के पास विषय शिक्षक व्हाट्सएप के ज़रिए भेज रहे हैं। इन वीडियो को क्लास टीचर बच्चों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर रहे हैं। बच्चों से कहा जा रहा है कि वे इसे देखें। असाइनमेंट तैयार कर टीचर्स के पास वापस भेजें।
दंतेवाड़ा के 40,000 बच्चों को जनरल प्रमोशन
इधर प्रदेश सरकार ने पहली से 9वी व 11वी कक्षाओं के बच्चों को जनरल प्रमोशन दिए जाने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद दंतेवाड़ा जिले की स्कूलों में पढ़ने वाले 40000 बच्चों को फायदा मिला है। इनमें पहली से आठवीं तक 37000, 9वीं के 3322 और 11वीं के 2172 बच्चों को जनरल प्रमोशन मिलेगा।

प्राचार्य-शिक्षकों को इस तरह आया यह आइडिया
डीएवी स्कूल के प्राचार्य असित बोस ने बताया कि कोरोना के कारण बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल की छुट्टी कर दी गई है। घर पर बच्चे समय यूं ही गंवा रहे हैं। लंबे वक्त तक पढ़ाई से दूर रहने के बाद समस्या आती है। बच्चे पढ़ाई से दूर न हों घर पर कम से कम एक घंटा ही ई क्लासेस के ज़रिए पढ़ लें, बच्चे पढ़ाई से जुड़ें रहें। इसलिए हमने यह शुरुआत की है और जब स्कूलें खुलें तो हम पढ़ाई में लक्ष्य से भी आगे निकल गए तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।

ग्रुप में जो नहीं जुड़ पाए उनके लिए भी निकाला तरीका
10 व्हाट्सएप ग्रुप में 782बच्चों को जोड़ा गया है। लेकिन अभी कुछ ही बच्चे ऐसे हैं। जो जिले के दूरस्थ गाँवों में रहते हैं, जहां नेटवर्क की समस्या है। उनके लिए भी तरीका है कि आसपास के बच्चों की मदद से उन्हें भी यह दिखाया जाएगा।

विप्रो और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने दिए कोरोनावायरस संकट से निपटने के लिए 1,125 करोड़ रुपये

नोएडा : विप्रो लिमिटेड, विप्रो एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने संयुक्त रूप से कोरोनावायरस संकट से निपटने के लिए 1,125 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई। कंपनी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि इस राशि से चिकित्सा व सेवा के काम में अगली कतार में लगे लोगों को और समाज पर और खासतौर से सबसे कमजोर तबके के लोगों पर कोरोनावायरस के असर को दूर करने में मदद पहुँचाई जाएगी। कुल 1,125 करोड़ रुपये में से विप्रो लिमिटेड ने 100 करोड़ रुपये, विप्रो एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने 25 करोड़ रुपये और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन ने 1,000 करोड़ रुपये का योगदान किया है।
विप्रो के सीएसआर खर्च से अलग है यह राशि
बयान में कहा गया है कि यह राशि विप्रो की सालाना कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) गतिविधियों और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की फिलांथ्रोपिक गतिविधियों पर होने वाले खर्च से अलग है। इस राशि से निश्चित इलाके में वायरस से उपजी समस्या से जूझ रहे लोगों को सहायता पहुँचाई जाएगी और स्वास्थ्य क्षमता का विस्तार किया जाएगा, जिसमें कोरोवायरस महामारी की रोकथाम और इससे संक्रमित लोगों का इलाज भी शामिल है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा कि आधुनिक वैश्विक समाज ने इस संकट का सामना नहीं किया है। हमें इस संकट से निपटने के लिए और विशेष रूप से वंचित लोगों पर इसके मानव प्रभाव को कम करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। फाउंडेशन की 1,600 सदस्यीय टीम देशभर में 350 मजबूत सिविल सोसाइटी साझेदारों के साथ मिलकर सरकारी संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करेगी ताकि लोगों को मदद मुहैया कराने के लिए धन का उपयोग किया जा सके। इस प्रयास में विप्रो की तकनीकी दक्षता, सोर्सिंग प्रणाली, इन्फ्रास्ट्रक्चर और वितरण रीच का पूरी तरह से उपयोग किया जाएगा।

कई कम्पनियां आर्थिक मदद करने के लिए आगे आईं

कोरोनावायरस का मुकाबला करने में सरकार को और आम लोगों को मदद पहुंचाने के लिए कई कंपनियां आगे आई हैं।
टाटा ट्र्रस्ट्स और टाटा समूह ने संयुक्त रूप से सर्वाधिक 1,500 करोड़ रुपए खर्च करने का वादा किया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी ने प्रधानमंत्री के कोविड-19 कोष में 500 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे पहले उन्होंने भारत के पहले कोरोनावायरस अस्तपताल, जरूरत मंदों को भोजन और आपात वाहनों के लिए ईंधन पर भी खर्च करने का वादा किया है।
इन्फोसिस फाउंडेशन ने 100 करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता जताई है।
दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग और एलजी ने कहा है कि वे भारत में स्थानीय निकायों को मदद करेंगी, उन्हें बचाव कि और इन्फ्रारेड थर्मामीटर देंगी और अस्पतालों को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु देंगी।
पेटीएम, फोनपे, अमेजन पे व अन्य डिजिटल भुगतान कंपनियों ने भी उपयोगकर्ताओं से पीएम फंड में योगदान करने का अनुरोध किया है और कहा है कि आम उपयोगकर्ता की मदद के साथ वे भी फंड में कुछ योगदान करेंगी।
कई अन्य कंपनियों भी मदद में आगे आई हैं।

संक्रमण रोकने के लिए पहनें कपड़े का मास्क : सरकार

नयी दिल्ली : देश में कोरोनावायरस के मामलों में अचानक तेजी आई है। ऐसे में मास्क की माँग बहुत बढ़ गयी है। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के 11वें दिन शनिवार को एक एडवाइजरी जारी कर लोगों से कपड़े से घर में बनाए हुए फेस कवर (मास्क) पहनने को कहा। एजवाइजरी के मुताबिक, घर में बने मास्क पहनने से बड़े पैमाने पर लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकेगा। घर से निकलते वक्त लोग कपड़े से घर में बने मास्क जरूर पहनें। कुछ देशों में इस तरह के मास्क इस्तेमाल से फायदा भी मिला है। देश में अभी तक कोरोनावायरस के संक्रमण के तीन हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी नागरिकों से गैर मेडिकल ग्रेड मास्क (घरेलू मास्क) इस्तेमाल करने को कहा था। अमेरिकी के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने भी अपील की थी कि अमेरिकी लोग कपड़े या फैब्रिक से बने मास्क पहनें। इस तरह के मास्क को या तो ऑनलाइन खरीदा जा सकता है या फिर इन्हें घर पर ही बनाया जा सकता है। सामान्य लोगों को मेडिकल ग्रेड मास्क नहीं पहनना चाहिए, क्योंकि ये बेहद कम संख्या में हैं और लोगों की जान बचाने में जुटे मेडिकल स्टाफ के लिए इनकी उपलब्धता जरूरी है –

कोरोना के मरीज मेडिकल ग्रेड मास्क ही पहनें
एडवाइजरी में कहा गया है कि घर में बनाए गए मास्क स्वस्थ लोगों में संक्रमण को फैलने से रोकेंगे। ये मास्क हेल्थ वर्कर्स, कोरोना के मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों और खुद मरीजों के लिए नहीं है। इन लोगों को विशेष मेडिकल ग्रेड मास्क पहनने की जरूरत है। सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर की ओर से इस पर एक मैनुअल भी जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि देश में घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष तौर पर मास्क पहनना चाहिए।

आम लोग मास्क को रोज धोकर ही पहनें
एडवाइजरी में बताया गया कि घर पर बनाया गया मास्क संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) को आप तक पहुंचने से रोकता है। इसे रोज धोकर ही इस्तेमाल में लाना चाहिए। साथ ही मास्क लगाए होने के बावजूद सोशल डिस्टेसिंग का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

सूती कपड़े से मास्क बना सकते हैं, गरम पानी में धोना जरूरी
मैनुअल के अनुसार किसी भी सूती कपड़े का इस्तेमाल मास्क बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी नहीं कपड़ा नया ही हो। यह किसी भी रंग का हो सकता है, लेकिन एक बात का ध्यान रखना होगा कि कपड़े को उबलते पानी में अच्छी तरह से 5 मिनट के लिए धोया जाए और पहनने से पहले अच्छी तरह से सुखाया जाए। मास्क बनाने में यह भी ध्यान देना चाहिए कि यह चेहरे पर अच्छी तरह से फिट बैठता हो और इसमें किनारों पर कोई गैप न हो।

किसी दूसरे का मास्क कभी इस्तेमाल न करें
फेस मास्क पहनने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोएं। अगर फेस कवर गीला या नम हो जाता है तो तुरंत उसे बदल लें और कभी भी बिना धुले इसका इस्तेमाल न करें। अपना मास्क किसी को पहनने के लिए न दें। घर में सभी लोगों के लिए अलग मास्क होने चाहिए।

कोविड -19 : मुश्किल वक्त में इन्स्टाग्राम की मदद से आगे ले जाएँ व्यापार

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हम कर रहे हैं एक नये स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा। आज पहली कड़ी में तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया आपके सामने हैं। अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं।

सन्ध्या सुतौदिया

इंस्टाग्राम ने सिर्फ एक चित्र एवं वीडियो सहभाजन मंच के रूप में शुरुआत की थी। हालांकि, आज इंस्टाग्राम ने 600 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ताओं के रोज के आधार पर इंस्टाग्राम के सहारे पोस्ट करने, संवाद स्थापित करने और चित्त आकर्षित होने के वजह से इंस्टाग्राम असाधारण रूप से लोकप्रियता हासिल कर चुका है। इंस्टाग्राम एक सामान्य परंतु प्रभाव कारी मंच है और उपयोगकर्ताओं को संभावित उपभोक्ता बनाने की क्षमता रखता है। ऐसे वक्त में जब पूरा विश्व एक अद्वितीय संकट से घिरा हुआ है, इंस्टाग्राम अपने अपरिहार्य उपभोक्ताओं की मदद से सूचना प्रसार करने के साथ-साथ जनता की सलाह को आकार देने की भी क्षमता रखता है।
* सही जानकारी प्रदान करें:- विश्व संकट कोविड -19 ( COVID-19) की इस घड़ी में, सही और लगातार जानकारी प्रदान करने से लोगों में आपके ऑर्गेनाइजेशन यानी संस्थान के प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी। कर्मचारी, ग्राहक और हित धारकों के सोशल मीडिया मंचों पर शालिनी के वजह से अपरिहार्य है। इस माहौल में, अपने ऑफिशल यानी आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से लगातार स्टेटस अपडेट करते रहना चाहिए और अपने ऑर्गेनाइजेशन को बढ़ाते रहना चाहिए।
* चिंता जताए:- अभी ही समय है जब तक कंपनियों को अपने व्यापार की रुचियों से परे अपने कर्मचारी और अन्य हित धारकों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। COVID-19 कि इस वक्त में कंपनियां अपनी ब्रांड की छवि बनाए रखने के लिए जानकारी दे कर छोटे वीडियोज पोस्ट कर सकती हैं।
* लगातार स्टोरीज़ पोस्ट करें:– इंस्टाग्राम स्टोरीज़ फॉलोअर्स को आकर्षित करने का और शिक्षित करने का एक अच्छा उपाय है। ऐसे वक्त में जब हम सभी निजी और पेशेवर दोनों तरह के कष्ट झेल रहे हैं तब ऑनलाइन समूह एक साथ मिलकर हम सब का सहयोग करने के लिए और एक सुरक्षित स्थल रूपी मंच प्रदान कर रहा है। ऐसे वक्त में स्टोरीज बना कर हम उन्हें शिक्षित करके उनसे जीवन भर का रिश्ता बना सकते हैं।
* हैश टैग का उपयोग करें:– अभी के सबसे अधिक चिंता के विषय कोविड -19 (COVID-19) से संबंधित सही जानकारी # का उपयोग करके आप अपने फॉलोअर्स को सही और अपडेटेड जानकारी तक पहुंचाने में सहायता कर सकते हैं।
* इंस्टाग्राम लाइव के जरिए साथ आएं:– कोरोना संकट के समय अपने फॉलोअर्स से जुड़े रहने के लिए इंस्टाग्राम लाइव एक दिलचस्प जरिया है। ब्रांड से जुड़े छोटे शिक्षण अपने फॉलोअर्स को प्रदान करने के लिए इंस्टाग्राम का उपयोग कर सकते हैं जिससे लॉक डाउन के इस समय में व्यस्त रहा जा सकता है।
तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी से जुड़े, जो बाकी के मार्केट से अधिक संचार की दुनिया को जानता है, जिससे आप अपने व्यापार को इंस्टाग्राम से बढ़ावा दे सकते हैं। अपने व्यापार का तुरिया की रचनात्मकता की मदद से ऑनलाइन विस्तार कीजिए।
लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक और सम्पर्क विशेषज्ञ हैं।
आप इनसे सम्पर्क कर सकते हैं
फोन : +91 89815-92855 / 8981592855
ई मेल : sandhya@ turiyacommunications.com
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(अगर आप शुभजिता के माध्यम से हमारे विशेषज्ञों से जुड़ रहे हैं तो कृपया शुभजिता का उल्लेख अवश्य करें)

कोरोना इफेक्ट : घर से ही वर्चुअल शिक्षण करने का निर्देश

कोलकाता : कोरोना के कारण हुए लॉ़कडाउन का असर शिक्षण संस्थानों पर भी पड़ा है। कई शिक्षण संस्थान तो घर से ही ऑनलाइन शिक्षण पर जोर दे रहे हैं और पढ़ाई शुरू भी कर दी है। अब सीआईएससीई भी इसी राह पर चल पड़ा है। इस बोर्ड ने एक विज्ञप्ति जारी कर सभी स्कूलों को ऑनलाइन व शिक्षण और वर्चुअल क्लासरूम शुरू करने को कहा है। जिन स्कूलों में अभी तक वर्चुअल क्लासरूम की व्यवस्था शुरू नहीं की गयी है, उनको भी इसे शुरू करने और अपना मॉड्यूल विकसित करने को कहा गया है। पढ़ाई लर्निंग ऐप, एमएचआरडी के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों हेतु बने ‘स्वयं ई लर्निंग पोर्टल’ के अतिरिक्त जूम का उपयोग भी कर सकते हैं। शिक्षक अपने डेस्कटॉप या लैपटॉप के जरिए विद्यार्थियों से जुड़ सकेंगे। इसके अतिरिक्त सीआईएससीई की वेबसाइट पर उपलब्ध पुराने प्रश्न पत्र (आईएससी तथा आईसीएसई), नमूना प्रश्नपत्र, विद्यार्थी के प्रदर्शन से सम्बन्धित दस्तावेज, आठवीं तक कापाठ्यक्रम और विषय के अनुसार रिसोर्स मटेरियल का उपय़ोग किया जा सकता है। शिक्षक वर्कशीट, स्व आकलन टूल्स की मदद ले सकते हैं। प्रोजेक्ट पर भी जोर दिया गया है। यह जानकारी सीआईएससीई के चीफ एक्जिक्यूटिव तथा सचिव जेरी आराथन ने दी।

यह हिन्दी प्रदेश के अप्रवासियों और शिक्षित मुसलमानों के जागने का समय है

कोरोना को लेकर दो हिस्सों में बँटे लोग दिख रहे हैं। एक अत्याधिक सजग तो एक वह, जो इसे अपनी विचारधारा को पुख्ता बनाने का मौका मान रहे हैं। अत्याधिक सजग लोग खुद डर रहे हैं और दूसरे वर्ग के लोग बेशर्मी पर उतर आये हैं। अभी भी इनको जाति वाली राजनीति चाहिए। कुछ ऐसे हैं जो ईश्वर के होने पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ ऐसे हैं जो मंदिर और मस्जिद पर सवाल उठा रहे हैं। हालाँकि तबलीगी जमात की हरकतों के बाद इनके पास ऐसा करने की एक वजह मिल गयी है मगर इससे होगा क्या?
वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का पलायन जारी है। ये गरीब अपने ही देश में बेगाने हैं और नर्क झेल रहे हैं। कहीं कुछ छिड़का जा रहा है तो कहीं कुछ..देश के कोने -कोने से खबरें आ रही हैं….वह चले जा रहे हैं…नंगे पैर….धूम में…ठीक उसी वक्त जब आप अपने मोबाइल पर स्टेटस डाल रहे होते हैं…उसी वक्त एक बच्चा चलते -चलते थककर बैठ जाता है…आप परिवार के साथ हैं…वह परिवार से दूर… पलायन का सिलसिला जारी है। इन लोगों को कहीं पुलिस से खाने को कुछ सामान मिल जाता है, तो कहीं आम नागरिकों मदद के लिए आगे आ जाते हैं। अपने बीवी-बच्चों और परिवारों के साथ अपने किराये के छोटे से कमरे को छोड़, घर की ओर पलायन करने वालों की यह भीड़ थोड़ी-थोड़ी देर में घटती-बढ़ती रहती है। कुछ गठरियां, कुछ पोटलियां और थोड़ा सा पानी लेकर लोग निकल पड़े हैं। इस आस में कि कहीं कोई बस या ट्रक मिल जाये। किसी के कॉन्ट्रेक्टर ने काम बंद कर दिया तो किसी को मकान मालिक ने निकाल दिया। किसी को दिहाड़ी के लिए कोई काम ही नहीं मिल रहा, तो कोई तीन दिन से भूखा है। कोरोना ने मानो इन लोगों की जिंदगियों पर ही ताला जड़ दिया है। कुछ तो भूख से मर भी जा रहे हैं…आखिर इस अन्यास का हिसाब कौन देगा…?
हमारी समझ में यह बिहार व झारखंड के अप्रवासियों और शिक्षित मुसलमानों के जागने का समय है। ये वक्त है जब वे अपनी जानकारी, ज्ञान और हुनर से अपने राज्य औऱ कौम के लोगों के साथ खड़े हो सकते हैं…इनकी तकदीर को अपने स्टार्ट अप से नयी दिशा दे सकते हैं। शिक्षा के जरिए जिन्दगी बदल सकते हैं। यह मौका ही नहीं आपकी जिम्मेदारी भी है।
इसी जिम्मेदारी के तहत शुभजिता में हमार माटी स्तम्भ हमने शुरु किया है। इसके बारे में आप इस स्तम्भ में पढ़ भी सकते हैं और सुझाव भी दे सकते हैं…शुभ रामनवमी…।

सीता ही नहीं, उनकी बहनें भी विशेष थीं

वाल्मीकि रामायण में सीता की एक बहन उर्मिला बताई है। मांडवी व श्रुतकीर्ति जनकजी के छोटे भाई कुशध्वज की बेटियां थी। मानस मैं सीता जनकजी की इकलौती बेटी बताई गई है। कुल मिलाकर सीताजी की तीन बहनें थीं। उनके भाई का नाम मंगलदेव है जो धरती माता के पुत्र हैं।
उर्मिला : वाल्मीकि रामायण के अनुसार, उर्मिला जनकनंदिनी सीता की छोटी बहन थीं और सीता के विवाह के समय ही दशरथ और सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण को ब्याही गई थीं। जब राम और सीता के साथ लक्ष्मण भी वनवास को जाने लगे तब पत्नी उर्मिला ने भी उनके साथ जाने की जिद की, परन्तु लक्ष्मण ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि अयोध्या के राज्य को और माताओं को उनकी आवश्यकता है। उर्मिला के लिए यह बहुत कठिन समय था ऐसे में जबकि वह नववधू थी और उसके दांपत्य जीवन की तो अभी शुरुआत ही हुई थी।
लक्ष्मण के वनवास जाने के बाद उर्मिला के पिता अयोध्या आए और उर्मिला को मायके चलने का अनुरोध करने लगे, ताकि मां और सखियों के सान्निध्य में उर्मिला का पति वियोग का दुःख कुछ कम हो सके। परन्तु उर्मिला ने अपने मायके मिथिला जाने से इनकार करते हुए कहा कि पति की आज्ञा अनुसार पति के परिजनों के साथ रहना और दुख में उनका साथ न छोड़ना ही अब उसका धर्म है। यह उर्मिला का अखंड पतिव्रत धर्म था। मान्यता कर आधारित एक एक कथा पढ़ने को मिलती है। कथा यह है कि रावण के पुत्र मेघनाद को यह वरदान था कि जो व्यक्ति 14 वर्षों तक सोया न हो वही उसे हरा सकता है। हालांकि लक्ष्मण अपने भाई श्रीराम और भाभी सीता की सुरक्षा और सेवा में इत‍ने लगे रहे कि वे 14 वर्ष तक सो ही नहीं पाए। कथा अनुसार उनके बदले उर्मिला 14 वर्ष तक सोती रही। एक अन्य कथानुसार लक्ष्मण की विजय का मुख्य कारण उर्मिला का पतिव्रत था। लक्ष्मण के उर्मिला से अंगद और चन्द्रकेतु नाम के दो पुत्र तथा सोमदा नाम की एक पुत्री उत्पन्न हुई। अंगद ने अंगदीया पुरी तथा चन्द्रकेतु ने चन्द्रकांता पुरी की स्थापना की थी।
माण्डवी : मांडवी दशरथ पुत्र भरत की पत्नी थीं। मांडवी राजा जनक के छोटे भाई कुशध्वज की बेटी थी। वह एक साध्‍वी की तरह रहती थी। वचनासुर भारत अयोध्या में नहीं नंदीग्राम में रहते थे और मांडवी पति के प्रभु श्रीराम के समर्पण का सम्मान करती थीं और उनके हर कार्य में सहयोग करती थी। वह कुल की मर्यादा अनुसार आचरण करती थी। उनके दो बेटे थे- तक्ष और पुष्कल।
श्रुतकीर्ति : श्रुतकीर्ति राजा कुशध्वज की पुत्री थी, श्रुतकीर्ति का विवाह भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न से हुआ था। इनके दो पुत्र हुए, शत्रुघति और सुबाहु। कुशध्वज मिथिला के राजा निमि के पुत्र और राजा जनक के छोटे भाई थे।

श्रीरामरक्षा स्तोत्र का संस्कृत पाठ

ॐ अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः। श्री सीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप्‌ छंदः। सीता शक्तिः। श्रीमान हनुमान्‌ कीलकम्‌ । श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः।

अथ ध्यानम्‌:
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ । वामांकारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालंकार दीप्तं दधतमुरुजटामंडलं रामचंद्रम ।
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥1॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्‌ ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमंडितम्‌ ॥2॥
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरांतकम्‌ ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्‌ ॥3॥
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्‌ ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥
कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवंदितः ।
स्कंधौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित्‌ ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥
सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
उरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्‌ ॥8॥
जानुनी सेतुकृत्पातु जंघे दशमुखान्तकः ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥9॥
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्‌ ।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्‌ ॥10॥
पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः ।
न दृष्टुमति शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥
रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्‌ ।
नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥
जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाऽभिरक्षितम्‌ ।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥
वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्‌ ।
अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमंगलम्‌ ॥14॥
आदिष्टवान्यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
तथा लिखितवान्प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम्‌ ।
अभिरामस्रिलोकानां रामः श्रीमान्स नः प्रभुः ॥16॥
तरुणौ रूप सम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥
फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥
शरण्यौ सर्र्र्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्‌ ।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥
आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषंगसंगिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम्‌ ॥20॥
सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन्मनोरथान्नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥
रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥
वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥
इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयाऽन्वितः ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥
रामं दूवार्दलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम्‌ ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नराः ॥25॥
रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्‌ ।
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिं
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्‌ ॥26॥
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥
श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचंसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥
माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयलुर्नान्यं
जाने नैव जाने न जाने ॥30॥
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वंदे रघुनन्दनम्‌ ॥31॥
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचंद्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्‌ ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥
कूजन्तं राम रामेति मधुरं मधुराक्षरम्‌ ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्‌ ॥34॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्‌ ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्‌ ॥35॥
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्‌ ।
तर्जनं यमदूतानां राम रामेति गर्जनम्‌ ॥36॥
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रामेशं भजे
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं
रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥37॥
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥
॥ श्री बुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्ण ॥
(साभार – वेबदुनिया)

रामायण के वे तथ्य जो जो बहुत कम जानते हैं आप

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के प्रभावशाली चरित्र पर कई भाषाओं में ग्रंथ लिखे गए हैं। लेकिन मुख्यतः दो ग्रंथ प्रमुख हैं। जिनमें पहला ग्रंथ महर्षि वाल्मीकि द्वारा ‘रामायण’ इस पवित्र ग्रंथ में 24 हजार श्लोक, 500 उपखंड, तथा 7 कांड है। दूसरा ग्रंथ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है जिसका नाम ‘श्री रामचरित मानस’ है। इनमें महर्षि वाल्मीकि की रामायण को सबसे सटीक और प्रामाणिक माना जाता है। लेकिन श्रीराम के बारे में कुछ ऐसी बातें हैं जिनका विवरण श्रीरामचरितमानस या अन्य रामायण में नहीं है। इनका विस्तृत विवरण केवल वाल्मीकि कृत रामायण में है।
रामकथा का पहला उपलब्ध आख्यान वाल्मीकि रामायण को माना जाता है। यद्यपि रामकथा का सर्व-स्वीकार्य काल निर्धारण नहीं किया जा सका है तथापि माना जाता है कि राम-सीता का विवाह 7307 ईस्वी-पूर्व (अर्थात् आज से 9324 वर्ष पूर्व) हुआ। यूरोपीय इतिहासकारों के अनुसार वाल्मीकि रामायण की रचना का काल ईसा से 5वीं शताब्दी पूर्व से लेकर ईसा से पहली शताब्दी तक माना जाता है (अर्थात् वर्तमान समय से 2500 वर्ष पूर्व से लेकर 2100 वर्ष पूर्व के बीच)।
1. रामायण के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ को मुख्य रूप ऋषि ऋष्यश्रृंग ने संपन्न किया था। ऋष्यश्रृंग के पिता का नाम महर्षि विभाण्डक था। एक दिन जब वे नदी में स्नान कर रहे थे तब नदी में उनका वीर्यपात हो गया। उस जल को एक हिरणी ने पी लिया था, जिसके फलस्वरूप ऋषि ऋष्यश्रृंग का जन्म हुआ था।
2. हिंदू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की मान्यता है, जबकि रामायण के अरण्यकांड के चौदहवे सर्ग के चौदहवे श्लोक में सिर्फ तैंतीस देवता ही बताए गए हैं। ग्रंथ के अनुसार बारह आदित्य, आठ वसु, ग्यारह रुद्र और दो अश्विनी कुमार, ये ही कुल तैंतीस देवता हैं।
3. महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित ‘रामायण’ में सीता स्वयंवर का वर्णन नहीं है। रामायण के अनुसार भगवान राम व लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे, तब विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने के लिए कहा। तब भगवान श्रीराम ने उस धनुष को उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। राजा जनक ने यह प्रण किया था कि जो भी इस शिव धनुष को उठा लेगा, उसी से वे अपनी पुत्री सीता का विवाह कर देंगे।
4. विश्वविजय के दरम्यान जब रावण स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी। रावण ने उसे पकड़ लिया। तब रंभा ने कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें, मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर के लिए हूं। इसलिए मैं आपकी पुत्रवधू हूं, लेकिन रावण नहीं माना और उसने रंभा से दुराचार किया। यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को श्राप दिया कि आज के बाद रावण बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसे स्पर्श करेगा तो उसके सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे।
5. जिस समय भगवान श्रीराम वनवास गए, उस समय उनकी आयु लगभग 27 वर्ष थी। राजा दशरथ श्रीराम को वनवास नहीं भेजना चाहते थे, लेकिन वे वचनबद्ध थे। जब श्रीराम को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने श्रीराम से यह तक कह दिया था कि हे राम तुम मुझे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाओ।
6. प्रभु राम के भाई लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा के नाक-कान काटे जाने से क्रोधित होकर ही रावण ने सीता का हरण किया था, लेकिन स्वयं शूर्पणखा ने भी रावण का सर्वनाश होने का शाप दिया था। दरअसल शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से उसका युद्ध हुआ। उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने मन ही मन रावण को शाप दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।
7. जिस दिन रावण सीता का हरण कर अपनी अशोक वाटिका में लाया। उसी रात को भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र माता सीता के लिए खीर लेकर आए, पहले देवराज ने अशोक वाटिका में उपस्थित सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया। उसके बाद माता सीता को खीर अर्पित की, जिसके खाने से सीता की भूख-प्यास शांत हो गई।
8. सीताहरण करते समय जटायु नामक गिद्ध ने रावण को रोकने का प्रयास किया था। रामायण के अनुसार जटायु के पिता अरुण हैं। ये अरुण ही भगवान सूर्यदेव के रथ के सारथी हैं।
9. जब भगवान राम और लक्ष्मण वन में सीता की खोज कर रहे थे। उस समय कबंध नामक राक्षस का प्रभु राम-लक्ष्मण ने वध कर दिया। वास्तव में कबंध एक शाप के कारण राक्षस बन गया था। जब श्रीराम ने उसके शरीर को अग्नि में समर्पित किया तो वह शाप से मुक्त हो गया। कबंध ने ही श्रीराम को सुग्रीव से मित्रता करने के लिए कहा था।
10. जब काफी समय तक राम-रावण का युद्ध चलता रहा तब अगस्त्य मुनि ने श्रीराम से आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करने को कहा, जिसके प्रभाव से भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया।
लक्ष्मण रेखा का सत्य 
वाल्मीकि रामायण में कहीं भी लक्ष्मण रेखा का जिक्र नहीं हुआ है । राम के रूप में मारीच द्वारा बचाओ बचाओ की आवाज लगाने पर सीता माता लक्ष्मण को भेजती है और लक्ष्मण परिणाम स्वरूप रावण झोंपड़ी को ही उठाकर ले गया। इस संभावना को तब बल मिलता है जब आप कंब रामायण के कुछ प्रसंगों को देखेंगे। कंब रामायण में रावण के सीता की झोंपड़ी को उठाकर ले जाने का विस्तृत प्रसंग है।
 वाल्मीकि लिखते हैं –
”रक्षन्तु त्वाम…पुनरागतः ” [श्लोक-३४,अरण्य काण्ड , पञ्च चत्वाविंशः ]
 लक्ष्मण कहते हैं कि ‘वन के संपूर्ण देवता आपकी रक्षा करें क्योंकि इस समय मेरे सामने भयंकर अपशकुन प्रकट हो रहे हैं। क्या मैं श्रीराम चंद्र के साथ लौटकर आपको सकुशल देख पाउंगा। यहाँ कहीं नही लिखा कि राम की रक्षा हेतू जाते वक्त लक्ष्मण ने सीता के लिए कोई रेखा खींची।
रामचरित मानस में क्या लिखा है?
तुलसीदास रचित राम चरित मानस में भी कहीं नहीं कहा गया है कि लक्ष्मण ने कोई रेखा खींची।
”मरम वचन जब सीता बोला , हरी प्रेरित लछिमन मन डोला !
बन दिसि देव सौपी सब काहू ,चले जहाँ रावण ससि राहु !” [पृष्ठ-५८७ अरण्य काण्ड ]
अर्थात सीता द्वारा मर्म वचन बोले जाने के बाद लखन सीता माता को वनदेवियों और दिशाओं आदि की निगरानी में छोड़कर चले गए।
किसने की लक्ष्मण रेखा की बात
जब वाल्मीकि रामायण और राम चरित मानस में लक्ष्मण रेखा का जिक्र नहीं है तो इस बात को बल कहां से मिला कि लक्ष्मण ने सीता को मर्यादा में रखने और बाहरी लोगों से सुरक्षित रखने के लिए कोई रेखा खींची थी। दरअसरल राम रावण युद्ध के समय मंदोदरी जरूर इस बात की तरफ इशारा करती है कि जो स्त्री मर्यादा के लिए खींची गई रेखा को पार करती है, वो इस तरह युद्ध का कारण बनती हैं। कृतिवास रामायण में इस बात का उल्लेख मिला है कि लक्ष्मण ने अपने बल के प्रयोग से झोपड़ी को अभिमंत्रित किया और जब रावण झोपड़ी में घुसने में नाकाम रहा तो गुस्से में पूरी झोंपड़ी ही उठाकर ले गया।
(साभार – वेबदुनिया, दैनिक भास्कर, प्रभासाक्षी)

आर एस एस के 80 से ज्यादा सरस्वती शिशु मंदिर में आइसोलेशन सेंटर बनाने की तैयारी

लखनऊ : कोरोना वायरस (COVID-19) के खिलाफ देश और प्रदेश की सरकारों के साथ कई स्वयंसेवी संगठन अपने स्तर से लोगों तक सहायता पहुंचा रहे हैं वहीं, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) भी आगे आया है. संघ की तरफ से लखनऊ के माधव सभागार में 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में 80 से ज्यादा सरस्वती शिशु मंदिर (Saraswati Shishu Mandir) और अन्य स्कूल-कॉलेजों को आइसोलेशन सेंटर में तब्दील करने की तैयारी है। यही नहीं, आरएसएस कम्युनिटी किचन भी स्थापित कर रहा है।

दरअसल, देश कोरोना के कारण एक बुरे दौर से गुजर रहा है। समाज के सारे लोग अपने-अपने तरीके से इसमें देश सेवा में लगे हुए हैं। इसी में देश के सबसे बड़े संगठन में से एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी कोरोना की महामारी से लड़ने के लिए सामने आ गया है। संघ के स्कूलों को क्वॉरेंटाइन सेंटर और आइसोलेशन वार्ड के रूप में तब्दील किया जा रहा है। प्रदेश के 80 से ज़्यादा सरस्वती शिशु मंदिर और अन्य चल रहे संगठनों के स्कूल-कॉलेजों को आइसोलेशन सेंटर में तब्दील करने की मंज़ूरी दी गयी है। यही नहीं संघ की तरफ़ से 2 कम्यूनिटी किचन भी तैयार करवाया गया हैं, जिसके ज़रिए हर रोज़ हज़ारों बेसहारा लोगों का पेट भरा जाएगा।

केजीएमयू और लोहिया के 40 डॉक्टर देंगे सेवा
लखनऊ के माधव सभागार पर एंबुलेंस की गाड़ियां और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की गयी है, जिससे जो भी लोग कोरोना से प्रभावित हैं, उन्हें जल्द से जल्द आइसोलेट किया जा सके। इन सेंटर पर मात्र सैनिटाइजर बेड कम्युनिटी किचन के साथ-साथ ट्रांसपोर्टेशन की भी व्यवस्था है। इन आइसालेशन सेंटरों पर डॉक्टरों की भी टीम चौबीसों घंटे काम करेगी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और लोहिया के क़रीब 40 डाॅक्टर समय-समय पर यहां आइसोलेट होने वाले मरीज़ों का इलाज करेंगे।