Friday, May 1, 2026
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कोरोना संक्रमित मां के दूध में होती है कोरोना की एंटीबॉडी

नयी दिल्ली :  यह बात सब जानते हैं कि मां के दूध में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है और नवजात शिशु के स्वस्थ जीवन के लिए मां के दूध से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। अब एक नये शोध में यह दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमित मां के दूध में नोवेल कोरोना वायरस की एंडीबॉडी होती है और यह दूध बच्चों को जरूर दिया जाना चाहिए।

शोध का आधार : यह एक तथ्य है कि माँ के दूध में एंटीबॉडी की थोड़ी मात्रा रहती है, जिसका स्रोत रक्त होता है। इस तथ्य के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह विचार रखा कि कोविड-19 के संक्रमण से ठीक हो जानेवाली माँ के दूध में कोविड-19 की एंटीबॉडी की भी मौजूदगी होनी चाहिए, जो शिशुओं में कोरोना वायरस के खिलाफ रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकता है।

इस अध्ययन के लिए नोवेल कोरोना वायरस से संक्रमित हुई मांओं के ब्रेस्ट मिल्क के 15  नमूने लिये गये। 10 नेगेटिव कंट्रोल सैंपल भी इस अध्ययन का हिस्सा थे। अध्ययन में अधिकांश सैंपल में संक्रमण के बाद माँ के दूध में एक मजबूत इम्यून रिस्पांस दिखायी दिया। हालांकि अध्ययनकर्ताओं का मामला है कि इस निष्कर्ष का समग्र अध्ययन जरूरी है।

कोरोना संक्रमित माँ नवजात को पिलायें ब्रेस्ट मिल्क : इस अध्ययन का नेतृत्व करनेवाली इकैन स्कूल ऑफ मेडिसिन, माउंट सिनाई, न्यूयॉर्क की डॉक्टर रिबेका पॉवेल का कहना है कि नोबेल कोरोना वारयस से संक्रमित माओं कोविड-19 रोग के दौरान और उसके बाद भी अपने शिशु को दूध पिलाना जारी रखना चाहिए। उनका तर्क है, ‘दूसरे अध्ययनों से यह बात भी सामने आयी है कि यह संक्रमण मां के दूध से नहीं फैलता जबकि हमारे अध्ययन ने मां के दूध में एंटीबॉडी के पाये जाने की पुष्टि हुई है।

हमें उम्मीद है कि ब्रेस्ट मिल्क में एंटीबॉडी का उच्च स्तर होगा और इससे शिशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होना चाहिए।’ पिछले महीने अध्ययन की शुरुआत करने से पहले डॉ पॉवेल ने यह उम्मीद भी जतायी थी कि ब्रेस्ट मिल्क में पायी जानेवाली एंटीबॉडीज को प्यूरिफाई करके, कोविड-19 के गंभीर मामलों का इलाज करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

शिशुओं के लिए फायदेमंद है माँ का दूध : मां के दूध में ढेर सारे पोषक तत्व और मिनरल्स होते हैं, जो कि एक नवजात शिशु की विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं। माँ के दूध में ऐसे तत्व (एंटीबॉडी) होते हैं जो कि बच्चों के इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं ताकि बच्चों का शरीर बैक्टीरिया और वायरस से लड़ सके।

आधुनिक नर्सिंग आंदोलन की जन्मदाता थीं फ्लोरेंस नाइटिंगेल

फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्‍म 12 मई सन् 1820 को हुआ था। फ्लोरेंस की याद में उनके जन्‍मदिन पर हर साल 12 मई को वर्ल्‍ड नर्सिंग डे के रूप में मनाया जाता है। जिंदगीभर बीमार और रोगियों की सेवा करने वाली फ्लोरेंस का अपना बचपन बीमारी और शारीरीक कमजोरी की चपेट में रहा। फ्लोरेंस के हाथ बहुत कमजोर थे। इसलिए वह ग्‍यारह साल की उम्र तक लिखना ही नहीं सीख सकी। बाद में फ्लोरेंस ने लैटिन, ग्रीक, गणित की औपचारिक शिक्षा ली। गणित फ्लोरेंस का प्रिय विषय हुआ करता था।

17 साल की उम्र में जब फ्लोरेंस ने अपनी मां से कहा कि वो आगे गणित पढ़ना चाहती है तब उनकी मां ने यह कहकर उनका विरोध किया कि गणित औरतों के पढ़ने का विषय नहीं होता है। बहुत दिनों तक परिवारजनों को मनाने के बाद आखिरकार फ्लोरेंस को गणित पढ़ने की इजाजत मिल ही गई। 22 साल की उम्र में फ्लोरेंस ने नर्सिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन दिनों अच्‍छे घर की लड़कियां नर्स बनने के बारे में सोचती भी नहीं थी। उस पर से फ्लोरेंस एक संपन्‍न परिवार की लड़की थी। उनका यह फैसला उनके परिवारवालों को पसंद नहीं आया।
सन् 1854 में ब्रिटेन, फ्रांस और तुर्की ने रूस के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। युद्ध में घायलों के उपचार के लिए कोई सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं थी। वहां के अस्‍पतालों में गंदगी पसरी हुई थी। वहां की स्थिति इतनी विकट थी कि घाव पर बांधने के लिए पट्टियां भी उपलब्‍ध नहीं हो पा रही थीं। देश की रक्षा के खातिर सीमा पर लड़ रहे सैनिकों की इतनी दयनीय दशा होने के बावजूद वहां की सेना महिलाओं को बतौर नर्स नियुक्‍त करने के पक्ष में नहीं थी।
आखिरकार फ्लोरेंस अपनी महिला नर्सों के समूह के साथ अधिकारिक रूप से युद्धस्‍थल पर पहुंची। वहां पर भी उन सभी को केवल इसलिए उपेक्षा का सामना करना पड़ा क्‍योकि वे महिलाएं थी। इस बीच रूस ने जवाबी हमला कर दिया। रूस के सैनिकों की संख्‍या 50,000 थी, जिनका सामना केवल 8000 ब्रिटिश सैनिकों ने किया नतीजा यह रहा है कि छह घंटों में 2500 ब्रिटिश सैनिक घायल हो गए। अस्‍पतालों की दशा पहले से ज्‍यादा दयनीय हो गई।

इतनी विपरीत परिस्थितियों में वे घायलों की सेवा में जुटी रही। इसी दौरान फ्लोरेंस ने आंकडे व्‍यवस्थित ढंग से एकत्रित करने की व्‍यवस्‍था बनाई। अपने गणित के ज्ञान का प्रयोग करते हुए फ्लोरेंस ने जब मृत्‍युदर की गणना की तो पता चला कि साफ-सफाई पर ध्‍यान देने से मृत्‍युदर साठ प्रतिशत कम हो गयी है। नाइटेंगल की सेवा को देखकर सैन्‍य अधिकारियों का रवैया भी बदल गया। इस मेहनत और समर्पण के लिए फ्लोरेंस का सार्वजनिक रूप से सम्‍मान किया गया और जनता ने धन एकत्रित करके फ्लोरेंस को पहुंचाया ताकि वह अपना काम निरंतर कर सके।
युद्ध खत्‍म होने के बाद भी वे गंभीर रूप से घायल सैनिकों की सेवा और सेना के अस्‍पतालों की दशा सुधारने के अपने काम में लगी रही। सन 1858 में उनकी काम की सराहना रानी विक्‍टोरिया और प्रिंस अल्‍बर्ट ने भी की। सन् 1860 में फ्लोरेंस के अथक प्रयासों का सुखद परिणाम आर्मी मेडिकल स्‍कूल की स्‍थापना के रूप में मिला। इसी वर्ष में फ्लोरेंस ने नाइटेंगल ट्रेनिंग स्‍कूल की स्‍थापना की। इसी साल फ्लोरेंस ने नोट्स ऑन नर्सिंग नाम की पुस्‍तक का प्रकाशन किया। यह नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए लिखी गई विश्‍व की पहली पुस्‍तक है।
रोगियों और दुखियों की सेवा करने वाली फ्लोरेंस खुद भी 1861 में किसी रोग का शिकार हो गई इसकी वजह से वे छह सालों तक चल नहीं सकी। इस दौरान भी उनकी सक्रियता बनी रही। वे अस्‍पतालों के डिजाइन और चिकित्‍सा उपकरणों को विकसित करने की दिशा में काम करती रही। साथ में उनका लेखन कार्य भी जारी रहा।
उन्‍होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, बीमारों और दुखियों की सेवा में समर्पित किया। इसके साथ ही उन्‍होंने नर्सिंग के काम को समाज में सम्‍मानजनक स्‍थान दिलवाया। इससे पूर्व नर्सिंग के काम को हिकारत की नजरों से देखा जाता था। फ्लोरेंस के इस योगदान के लिए सन 1907 में किंग एडवर्ड ने उन्‍हें आर्डर ऑफ मेरिट से सम्‍मानित किया। आर्डर ऑफ मेरिट पाने वाली पहली महिला फ्लोरेंस नाइटेंगल ही है।
 फ्लोरेंस नाइटेंगल के बारे में कहा जाता हैं, कि वह रात के समय अपने हाथों में लालटेन लेकर अस्‍पताल का चक्‍कर लगाया करती थी। उन दिनों बिजली के उपकरण नहीं थे, फ्लोरेंस को अपने मरीजों की इतनी फिक्र हुआ करती थी कि दिनभर उनकी देखभाल करने के बावजूद रात को भी वह अस्‍पताल में घूमकर यह देखती थी कि कहीं किसी को उनकी जरूरत तो नहीं है।
(साभार – वेबदुनिया)

भगवान शिव की हैं 3 पुत्रियाँ

कम ही लोगों को ज्ञात होगा कि भगवान शिव की दरअसल 6 संतानें हैं। इनमें तीन पुत्र हैं और इन्‍हीं के साथ उनकी 3 पुत्र‍ियां भी हैं। इनका वर्णन शिव पुराण में मिलता है।
भगवान शिव के तीसरे पुत्र का नाम भगवान अयप्‍पा है और दक्ष‍िण भारत में इनको पूरी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। वहीं शिव की तीनों पुत्र‍ियों के नाम हैं – अशोक सुंदरी, ज्‍योति या मां ज्‍वालामुखी और देवी वासुकी या मनसा। हालांकि तीनों बहनें अपने भाइयों की तरह बहुत चर्चित नहीं हैं लेकिन देश के कई हिस्‍सों में इनकी पूजा की जाती है। इनमें से शिव जी की तीसरी पुत्री यानी वासुकी को देवी पार्वती की सौतेली बेटी माना जाता है। मान्‍यता है कि कार्तिकेय की तरह ही पार्वती ने वासुकी को जन्‍म नहीं दिया था।
 1. अशोक सुंदरी
शिव जी की बड़ी बेटी अशोक सुंदरी को देवी पार्वती ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए जन्‍म दिया था। वह एक पुत्री का साथ चाहती थीं। देवी पार्वती के समान ही अशोक सुंदरी बेहद रूपवती थीं। इसलिए उनके नाम में सुंदरी आया। वहीं उनको अशोक नाम इसलिए दिया गया क्‍योंकि वह पार्वती के अकेलेपन का शोक दूर करने आई थीं। अशोक सुंदरी की पूजा खासतौर पर गुजरात में होती है। अशोक सुंदरी के लिए ये भी कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने बालक गणेश का सिर काटा था तो वह डर कर नमक के बोरे में छिप गई थीं। इस वजह से उनको नमक के महत्‍व के साथ भी जोड़ा जाता है।
2. ज्‍योति
शिव जी की दूसरी पुत्री का नाम ज्‍योति है और उनके जन्‍म से जुड़ी दो कथाएं बताई जाती हैं। पहली के अनुसार, ज्‍योति का जन्‍म शिव जी के तेज से हुआ था और वह उनके प्रभामंडल का स्‍वरूप हैं। दूसरी मान्‍यता के अनुसार ज्‍योति का जन्‍म पार्वती के माथे से निकले तेज से हुआ था। देवी ज्‍योति का दूसरा नाम ज्‍वालामुखी भी है और तमिलनाडु कई मंदिरों में उनकी पूजा होती है।
 3.मनसा
बंगाल की लोककथाओं के अनुसार, सर्पदंश का इलाज मनसा देवी के पास होता है। उनका जन्‍म तब हुआ था, जब शिव जी का वीर्य कद्रु, जिन्हें सांपों की मां कहा जाता है, की प्रतिमा को छू गया था। इसलिए उनको शिव की पुत्री कहा जाता है लेकिन पार्वती की नहीं। यानी मनसा का जन्‍म भी कार्तिकेय की तरह पार्वती के गर्भ से नहीं हुआ था।
 बताया जाता है मनसा का एक नाम वासुकी भी है और पिता, सौतेली मां और पति द्वारा उपेक्ष‍ित होने की वजह से उनका स्‍वभाव काफी गुस्‍से वाला माना जाता है। आमतौर पर उनकी पूजा बिना किसी प्रतिमा या तस्‍वीर के होती है। इसकी जगह पर पेड़ की कोई डाल, मिट्टी का घड़ा या फिर मिट्टी का सांप बनाकर पूजा जाता है। चिकन पॉक्‍स या सांप काटने से बचाने के लिए उनकी पूजा होती है। बंगाल के कई मंदिरों में उनका विधिवत पूजन किया जाता है। हालांकि शिव जी की पुत्र‍ियों के बारे में ज्‍यादा लोग नहीं जानते हैं लेकिन पुराणों में कई जगह उनका उल्‍लेख होता है।
(साभार – वेबदुनिया)

यात्रियों के लिए अनिवार्य हुआ आरोग्य सेतु एप

नयी दिल्ली :  12 मई से देश के कुछ इलाकों के लिए 15 ट्रेन चालू की गई हैं जिनमें ऑनलाइन कंफर्म टिकट पर ही यात्रा की जा सकती है। इन ट्रेनों के लिए बुकिंग 11 मई को हुई थी, वहीं आज यानी 12 मई को रेलवे ने कहा है कि ट्रेन में सफर करने वाले सभी यात्रियों के लिए आरोग्य सेतु एप अनिवार्य है।
रेल मंत्रालय ने इसकी जानकारी ट्वीट करके दी है। रेल मंत्रालय की ओर से यह ट्वीट रात को 12.24 बजे किया गया है। गैजेट 360 की रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि जिनके फोन में आरोग्य सेतु एप नहीं होगा, उन्हें स्टेशन पर ही एप को डाउनलोड करना होगा और उसके बाद ही ट्रेन में चढ़ने दिया जाएगा।
फिलहाल 15 ट्रेनें नई दिल्ली से डिब्रूगढ़, अगरतला, हावड़ा, पटना, बिलासपुर, रांची, भुवनेश्वर, सिकंदराबाद, बंगलूरू, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, मडगांव, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मू तवी तक चलाई जा रही हैं। इन ट्रेनों में केवल एसी कोच होंगे और इसका किराया राजधानी ट्रेनों के समान होगा। इसके अलावा यदि आप इन ट्रेनों में टिकट लेते हैं और कैंसिल कराते हैं तो 50 फीसदी कैंसिलेशन शुल्क कट जाएगा।
बता दें कि आरोग्य सेतु एप की प्राइवेसी को लेकर बवाल हो रहा है। इस परर सरकार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आरोग्य सेतु एप, अब तक का सबसे सुरक्षित एप है। इसके साथ डाटा प्राइवेसी और डाटा चोरी का कोई खतरा नहीं है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एम्पावर्ड ग्रुप-9 के चेयरमैन अजय साहनी ने कहा कि आरोग्य सेतु एप से निजता को कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने बताया कि आरोग्य सेतु एप के डाटा का दुरुपयोग नहीं होगा। साहनी के मुताबिक सिर्फ कोरोना पॉजिटिव यूजर्स का ही डाटा सर्वर पर जाता है और उसे भी मरीज के ठीक होने के 60 दिन बाद डिलीट कर दिया जाता है। फिलहाल यह एप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों पर मौजूद है। यह 11 भाषाओं (10 भारतीय भाषाएं और अंग्रेजी) में उपलब्ध है।
अजय साहनी ने बताया कि आरोग्य सेतु एप के यूजर्स की संख्या 9.8 करोड़ हो गई है लेकिन सिर्फ 13 हजार लोगों का ही डाटा सर्वर पर है। बता दें कि नीति आयोग के सीईओ की अध्यक्षता में एम्पावर्ड ग्रुप-9 का गठन किया गया है। यह ग्रुप कोरोना से लड़ने में सरकार की मदद कर रहा है।  उन्होंने यह भी कहा कि आरोग्य सेतु एप को 12 मई से जियो फोन के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।

युवा सृजन – चित्रांकन

पलक सिंह, वाराणसी

निखिता पांडेय

प्रीति साव

 

माँ

-विजया सिंह

माँ और मेरा पुराना आपसी गुपचुप साझा है
ऐसे ही नही होतीं बेटियाँ माँ का खुला अनझिप आकाश
किनारे और बांध तोड़ती नदियाँ
अपार कष्टों के बाद भी हरियाती पृथ्वी
माँ के दुलार में आकंठ डूबी मैं बनी रही हमेशा गैर मामूली
तुमने बताया, दुनिया बेहद छोटी है तुम्हारी साड़ी में करीने से खुसी आलपिन की तरह
जो निर्मम नुकीली तो है लेकिन जिसे मुश्किल नही होता कभी भी साध लेना
इसीलिए हम साथ-साथ चले थे दुनिया साधने वह भी पापा के जाने के बाद
पापा के जाने के रूखे खुरदुरे दुःख को भी साधा हमने साथ-साथ, तुमने फिर कहा कि
कई बार न जाना आसान होता है और न भूल जाने को साध लेना
और न जाने कैसे सध जाती हैं चीजें जैसे सध जाता है जीवन और संतप्त मन
यही तो है वास्तविक ठेठ कला हम औरतों की
ये पहली बार था कि नून-रोटी के ककहरे को मैंने सीखा तुम्हारे साथ
सच कहूं तो
अच्छा नहीं लगा था, अब क्या होगा से लेकर,
रोजी-रोटी-अपना घर- पी एच डी जैसी उलझनों में रपटना
इस रपटन में भी तुम थी संग साथ
बनती गयी मेरी सबसे प्रिय सखी
बढ़ता रहा हमारा बहनापा
जानती हो माँ मैंने हमेशा माना है कि हम संग-संग ग्यारह नहीं कुल जमा एक सौ एक हैं
सशक्त और बेहतरीन
हमारा होना गलबहियाँ डाले धरती और आकाश को मिलाते सुदूर क्षितिज का होना है
तुम्हारे साथ असंभव की कगार पर खड़ा डगमगाता वह सबकुछ संभव है
संभव है अपनी बतकहियों से भर देना समूचा आकाश
संभव हैं वह वाचाल हँसी जो लगती हो कइयों को
ख़ासी नामुमकिन
संभव है स्थान और काल की परिधि का सिकुड़ जाना
संभव है अहर्निश दूरी के बावजूद पक्की करीबियत
माँ
तुम मेरा पहला और शायद अंतिम आश्चर्य हो
जिसे जब भी देखा तो लगा कि
तुम्हारे व्यक्तित्व की गली बड़ी सहज सपाट
चलती हुई आगे बायीं ओर बिल्कुल घूम गयी है
और बस थोड़ा आगे बढ़ते ही
पूरी एक दुनिया है तुम्हारे व्यक्तित्व की
ऐसा मैंने बार बार देखा है पाया है
इतनी बार बाएं और दाएं के चक्करों में घूमफिर कर भी
रह गयी हो तुम अजब अनोखी
अब भी रह गया है बाकी तुम्हारे सुभाव का तिलस्म
मेरा इस तिलस्म में लौटना
माँ
बार बार तुममें लौटना है।

 

शुभजिता युवा सृजन चुनौती – संस्कृत

संस्कृत और भारतीयता को प्रोत्साहित करना हमारे लक्ष्यों में शामिल है। इसी कड़ी में शुभजिता युवा सृजन के तहत यह चुनौती लायी है
संस्कृत से कोई भी श्लोक, स्तुति, मंत्र, लीजिये और इसे नृत्य और संगीत से सजाइए। अवधि अधिकतम 5 मिनट। शुभजिता, शुभ सृजन नेटवर्क या shubhjita.com को फेसबुक पर टैग करिये या फिर विज़िटर पोस्ट करिये। आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी तो यह शुभजिता की वेबसाइट और यू ट्यूब चैनल पर जाएगी
इस चुनौती को आप भी आगे ले जा सकते हैं। हमारे साथ अपने दोस्तों को टैग करिये और सन्देश कॉपी पेस्ट कीजिये। अवधि अधिकतम 5 मिनट।

ऋगवेद में सीता स्तुति

ऋग्वेदः सूक्तं ४.५७

← सूक्तं ४.५६ ऋग्वेदः – मण्डल ४
सूक्तं ४.५७
वामदेवो गौतमः सूक्तं ४.५८ →
दे. १-३ क्षेत्रपतिः, ४ शुनः, ५, ८ शुनासीरौ, ६-७ सीता। अनुष्टुप्, ५ पुर उष्णिक्, २,३,८ त्रिष्टुप्

क्षेत्रस्य पतिना वयं हितेनेव जयामसि ।
गामश्वं पोषयित्न्वा स नो मृळातीदृशे ॥१॥
क्षेत्रस्य पते मधुमन्तमूर्मिं धेनुरिव पयो अस्मासु धुक्ष्व ।
मधुश्चुतं घृतमिव सुपूतमृतस्य नः पतयो मृळयन्तु ॥२॥
मधुमतीरोषधीर्द्याव आपो मधुमन्नो भवत्वन्तरिक्षम् ।
क्षेत्रस्य पतिर्मधुमान्नो अस्त्वरिष्यन्तो अन्वेनं चरेम ॥३॥
शुनं वाहाः शुनं नरः शुनं कृषतु लाङ्गलम् ।
शुनं वरत्रा बध्यन्तां शुनमष्ट्रामुदिङ्गय ॥४॥
शुनासीराविमां वाचं जुषेथां यद्दिवि चक्रथुः पयः ।
तेनेमामुप सिञ्चतम् ॥५॥
अर्वाची सुभगे भव सीते वन्दामहे त्वा ।
यथा नः सुभगाससि यथा नः सुफलाससि ॥६॥
इन्द्रः सीतां नि गृह्णातु तां पूषानु यच्छतु ।
सा नः पयस्वती दुहामुत्तरामुत्तरां समाम् ॥७॥
शुनं नः फाला वि कृषन्तु भूमिं शुनं कीनाशा अभि यन्तु वाहैः ।
शुनं पर्जन्यो मधुना पयोभिः शुनासीरा शुनमस्मासु धत्तम् ॥८॥

साभार विकीसोर्स

कामधेनु पेंट्स ने की जम्मू में जरूरतमंद परिवारों की मदद

कोलकाता : पेंट निर्माता कम्पनी कामधेनु पेंट्स लॉकडाउन के दौर में जरूरतमंदों की सहायता के लिए योगदान दे रही है। जम्मू में कम्पनी ने 100 स्थानीय परिवारों को सहायता प्रदान करते हुए जरूरी सामान मुहैया करवाये हैं। यह सामान पूर्व स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री बाली भगत, उद्यमी तृप्ता देवी, भाजपा मण्डल प्रधान सुरेश खजूरिया और जिलाध्यक्ष जम्मू जम्मू रूलर आर एस चिव की उपस्थिति में प्रदान किया गया। कामधेनु परिवार का प्रतिनिधित्व जम्मू एवं कश्मीर के ब्रांच हेड सुभाष नन्दा, एएसएम अनुराग कपूर व विक्रय टीम ने किया। कामधेनु लिमिटेड के निदेशक सौरभ अग्रवाल ने बताया कि कम्पनी के साथ जुड़े रंग करने वाले श्रमिकों की मदद कोविड -19 के दौर में की जा रही है। 5000 रंग मजदूरों तथा जम्मू में 5000 स्थानीय परिवारों की मदद की गयी है।

इन कारणों से ब्रांडिंग का एक अभिन्न अंग है रंग  

सन्ध्या सुतौदिया

रास्ते आसान हो जाते हैं. जब कोई राह बताने वाला हो…और यह तभी होगा जब कोई ऐसा मंच अथवा माध्यम हो…जब परामर्श सही जगह पर और सही समय पर पहुँचे। शुभजिता का प्रयास हमेशा से ही ऐसी सकारात्मकता को आगे ले जाना रहा है तो हम कर रहे हैं एक नये स्तम्भ की शुरुआत विशेषज्ञ परामर्श..। इसके तहत अलग – अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श आपके लिए लाने का प्रयास रहेगा। शुभ सृजन सम्पर्क में पंजीकरण करवाने वाले विशेषज्ञों को आप तक पहुँचाया जायेगा और हमारा प्रयास इससे भी आगे होगा।  व्यवसाय के प्रसार के लिए एक ठोस रणनीति जरूरी है औऱ जरूरी है सही तरीके से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से व्यवसाय का प्रचार। यह हर तरीके के पेशेवर क्षेत्र में कारगर है, किसी भी स्टार्टअप, व्यवसाय या संस्थान के सिए जरूरी है। तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक, संध्या सुतोदिया  बता रही हैं ऐसे ही अवसर के बारे  में।अगर आपके पास कोई प्रश्न हों, अपने प्रश्न आप हमारे सोशल मीडिया पेज पर भी भेज सकते हैं या शुभजिता को टैग करके अपनी बात कह सकते हैं –

” आपकी राशि क्या है?”- गुजराती उपन्यास पर आधारित 2009 में प्रियंका चोपड़ा द्वारा अभिनीत फिल्म ” किमबॉल रैवेनसवुड” से यह दर्शाया गया है की किस तरह लोगों के जीवन में रंग महत्वपूर्ण है और कैसे लोग अवचेतन रूप से कुछ रंगों की ओर आकर्षित है। आई आई एम में हुए एक खोज के दौरान यह भी पता चला है कि कोई भी निश्चित वस्तु कंपनी एक निश्चित रंग का ही उपयोग करती है। पर क्या किसी भी कंपनी की ब्रांडिंग के लिए रंग कोई भूमिका निभाती है?

लाल, नीला या हरा- आपको जो भी रंग पसंद हो, वह रंग आपके व्यक्तित्व के बारे में बताता है। उसी तरह आप एक कंपनी के बारे में; उसके द्वारा उपयोग किए जाने वाले रंगों से पता कर सकते हैं। रंगो की ब्रांडिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि इसका बहुत अधिक प्रभाव लक्ष्य दर्शक की मनोदशा पर पड़ता है। इसका पहला प्रभाव या एक क्षणिक आखरी प्रभाव रंगों के मेल के वजह से पड़ती है जो भावनाएं और अनुभव दर्शाती है। यही रहस्य है कंपनी की एक अच्छी पहचान बनाने के पीछे।

* रंगो का मनोविज्ञान: ‘रंग मनोविज्ञान’ मनोविज्ञान की एक ऐसी शाखा है जो रंगो और उनके मानव स्वभाव पर पड़ने वाले प्रभावों को संभालती है। एक खोज के अनुसार, 90% से भी अधिक ग्राहक केवल रंग के आधार पर सामग्री चुनते हैं। इसलिए यह तो निसंदेह कहा जा सकता है कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एक बुद्धिमान रंग पात्र का होना आवश्यक है जो आपकी कंपनी को सफलता दिलाएगी।

विभिन्न रंगों के विभिन्न अर्थ है इसलिए सही रंग योजना चुनने से आपकी कंपनी बन भी सकती है और बिगड़ भी। किसी भी कंपनी की सामग्री का अनुपालन करते हुए ही कंपनी के लोगों का रंग चुनें क्योंकि इसका सीधा प्रभाव लक्षित दर्शकों पर पड़ता है।

* अपने ब्रांड के रंग को चुनने से पहले इन कारणों का ध्यान रखें:-

1. उपयुक्तता:- रंग योजना चुनने से पहले यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आपका व्यापार किस चीज का है और लक्षित मार्केट में भेजा जाने वाला संदेश क्या है लक्षित संदेश उचित रंग से मिलना चाहिए।

2. लक्षित मार्केट:- यह भी जानना आवश्यक है कि ब्रांड अपनी सामग्री और सेवाएं किस लक्षित मार्केट को दे रही है। योजना से लक्षित ग्राहक प्रोत्साहित होना चाहिए।

3. स्थिरता:- ब्रांड की रंग योजना की स्थिरता से लक्षित मार्केट में ब्रांड को मजबूती मिलती है। इससे ब्रांड को अलग पहचान और बढ़ोतरी मिलती है जिससे इंडस्ट्री की प्रतियोगिता में वह अलग नजर आ सकेंगे। और तो और स्थिरता से ग्राहकों का विश्वास और सूपरिचय मिलता है।

4. समय कारण:- कंपनी की शुरुआत साल के किस समय हुई थी; इसका भी ध्यान रखना आवश्यक है।

* रंगो का विश्वव्यापी अर्थ:-
जितने रंग है उनके पीछे उतने ही अर्थ है; जिससे एक भावना उत्पन्न होती है और वह रंग और अधिक महत्वपूर्ण बन जाते हैं। ज्यादातर रंगों के विश्वव्यापी अर्थ है और यह उन रंगों के सारांश:-
# नीला:- नीले रंग को सकारात्मक रंग माना जाता है। यह विश्वास, सुरक्षा और जिम्मेदारी का आह्वान करता है और रचनात्मकता और शांति से जुड़ा हुआ है।

# लाल:- लाल रंग को बहुत ही ताकतवर माना जाता है क्योंकि यह बहुत शक्तिशाली, आक्रमक और उत्तेजक है। इस रंग का इस्तेमाल ब्रांड में जोश और शक्ति के उपयोग के लिए किया जाता है।

# हरा:- यह रंग स्वास्थ्य और प्रकृति का प्रतीक है और ब्रांड का एक शांतिदायक रूप दर्शाता है।

# पीला:- यह रंग अपने गूंज और आशावादी को दर्शाता है और यह रंग हमें प्रेरित करती है और मनोहर भी लगती है। इसलिए कीमत पर जी ज्यादातर समय इस रंग में देखी जाती है, जिससे ग्राहक इससे आकर्षित होते हैं।

# बैंगनी:- बैंगनी रंग मिलावट, उदासी, विशिष्टता और शाही/ राजशी दर्शाता है; जो महंगे जेवर बेचने वाली कंपनियों के लिए बेहतरीन हैं ।

# नारंगी:- यह रंग बच्चों की ब्रांडिंग के लिए प्रभावी है क्योंकि यह रंग प्रसन्नता, मित्रवत और मस्ती के लिए है|

# भूरा:- भूरा रंग साधारणता और स्थिरता को प्रकाश में लाता है और बहुत ही नम्र नजर आता है।

# काला:- यह रंग एक दर्जे तक मिलावट और विशिष्टता है और इसलिए यह गंभीर अभियानों के लिए सही है।

* अंतिम पंक्ति:-
रंग तो हर जगह है और मार्केटिंग के लिए आवश्यक है और अगर ध्यान ना दिया जाए तो गलत संकेत भी दे सकता है। हमारी मेहनती ब्रांडिंग दल तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी में आपकी ब्रांड के लिए सही रंग चुन ने में सहायता करेगी और अन्य ब्रांडिंग समस्या का समाधान करेगी।अपनी ब्रांडिंग आवश्यकताओं के लिए आज ही हमसे संपर्क करें

लेखिका तुरिया कम्युनिकेशन एलएलपी की सह संस्थापक हैं

सम्पर्क-  फोन: +91 89815-92855 /  9748964480

ई मेल : sandhya@ turiyacommunications.com [email protected]