Friday, May 1, 2026
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15 साल बाद रिंग में लौटेंगे हैवीवेट बॉक्सर माइक टायसन

पैसा जुटाकर गरीबों के लिए घर बनवाएंगे

बॉक्सिंग की दुनिया में 80 के दशक में राज करने वाले हैवीवेट बॉक्सर माइक टायसन 15 साल बाद रिंग में वापसी करने वाले हैं। वे चैरिटी के लिए कुछ प्रदर्शनी मैचों में उतरेंगे। टायसन ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘मैं वापसी कर रहा हूं।’

वीडियो मे टायसन पंच मारते हुए नजर आ रहे है। उनके पावर, स्टेमिना और स्पीड को देखकर ऐसा लग रहा है कि वे आज भी डब्ल्यूबीए, डब्ल्यूबीसी और आईबीएफ का खिताब जीतने के लिए प्रैक्टिस कर रहे हैं।

2005 में टायसन ने आखिरी मैच खेला था
उन्होंने एक लाइव चैट के दौरान भी वापसी की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वे चैरिटी के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं। टायसन इस पैसे से बेघर लोगों की घर बनाने में सहायता करना चाहते हैं। चैरिटी मैच के लिए टायसन लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं। टायसन ने अपना आखिरी मुकाबला 2005 में केविन मैकब्राइड के खिलाफ खेला था। उन्हें हार के साथ अपना 20 साल का करियर समाप्त करना पड़ा था।

टायसन के नाम सबसे युवा चैम्पियन का रिकॉर्ड
टायसन 50 में से 44 मैच जीत चुके हैं। उन्हें ऑल टाइम ग्रेट बॉक्सर के नाम से भी जाना जाता है। टायसन ने 1986 में 20 साल की उम्र में ट्रेवर बेबरिक का रिकॉर्ड तोड़ दुनिया का सबसे युवा हैवीवेट चैम्पियन होने का रिकॉर्ड दर्ज कराया था। जो आज भी कायम है।

89 साल की वृद्धा रोज थाने आकर आइस्क्रीम खाती है, आशीर्वाद देकर चली जाती है

राजकोट : रविवार को मदर्स डे था, ऐसे में यहां की एक अनोखी मां की बात की जाए। जो पिछले साढ़े तीन साल से भक्तिनगर पुलिस थाने में रोज आती है और पुलिस अधिकारियों से आइस्क्रीम खाती है, फिर आशीर्वाद देकर चली जाती है।

रोज दो बार थाने आती हैं वीनू बेन
यहां के मेहुलनगर की गली नम्ब्र 6 में रहने वाली 89 साल की वीनू बेन अढ़िया हर रोज दो बार भक्तिनगर पुलिस थाने आती हैं। पुलिस वाले उसे सम्मान से बिठाते हैं, फिर उन्हें अपने हाथों से आइस्क्रीम खिलाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि वह अपने घर से पुलिस थाने तक पैदल ही चलकर आती हैं। साढ़े तीन साल से उनका यह क्रम अनवरत जारी है।

बेटी और पोते से बात भी कराती है पुलिस
वीनू बेन का परिवार 70 साल से राजकोट में है। वे जब भी थाने आती हैं, तो पुलिस वाले उसे आइस्क्रीम तो खिलाते ही हैं, इसके अलावा अपने फोन से उसकी बात उनके बेटी और पोते से भी करवाते हैं। वह थाने में दो-ढाई घंटे बैठती हैं, फिर पुलिस वाले अपनी गाड़ी से उन्हें घर तक छोड़ देते हैँ। वे कोलकात में बरसों पहले टीचर रह चुकी हैं।

पीआई से बेटे जैसे संबंध
हुआ यूं कि साढ़े तीन साल पहले वीनू बेन भक्तिनगर थाने पहुंची थी, जहाँ उन्होंने यह शिकायत की कि उनका मकान मालिक उन्हें मकान खाली करने को कह रहा है। इस पर पीआई विरल दान गढ़वी ने उन्हें सुना। मानवता के नाते उन्होंने मकान मालिक से बात की और मकान खाली न कराने के लिए कहा। उसके बाद से वीनू बेन और पीआई गढ़वी के बीच मां-बेटे जैसा संबंध हो गया। फिर दो साल पहले जब वीनू बेन की तबीयत खराब हुई थी, तब पूरा पुलिस स्टेशन उनकी चाकरी में लगा था। इसलिए वह पुलिस वालों को अपना आशीर्वाद देने से कभी नहीं चूकती।

एकाकी जीवन जी रहीं हैं
वीनू बेन की 3 संतानें थी। एक बेटी कच्छ में अपने ससुराल में है। एक बेटे और एक बेटी का देहांत हो चुका है। राजकोट में वे एकाकी जीवन जी रही हैं। एक समय वे बर्मा में शिक्षिका रह चुकी हैं। अब हालात ऐसे हैं कि पूरा पुलिस स्टेशन उनकी सेवा में लगा रहता है। उनके घर में राशन से लेकर हर चीज की सुविधाएं जुटाता है। अपनी छवि से अलग पुलिस वालों का यह काम उन्हें अलग ही नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है।

कोरोना काल : भारतीय खेल रहे हैं लूडो, कैरम और शतरंज जैसे खेल, बोर्ड गेम्स की बिक्री में रिकाॅर्ड उछाल

नयी दिल्ली. देशव्यापी लाॅकडाउन अपने तीसरे चरण को पूरा करने वाली है। एक माह से ज्यादा समय हो गया है जब लोग कामकाज छोड़ अपने घरों में बंद हैं। इस लॉकडाउन के दौरान लोग अपना वक्त काटने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं। ज्यादातर लोग ऑनलाइन गेमिंग और बोर्ड गेम्स के जरिए टाइम पास कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बोर्ड गेम्स जैसे कि लूडो, शतरंज और कैरम खेल रहे हैं। यही वजह है कि भारत में लाॅकडाउन के दौरान बोर्ड गेम्स की सेल में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। बिग बाजार, स्नैपडील और पेटीएम मॉल के मुताबिक, सरकार द्वारा इस महीने के शुरू में कुछ बाजारों में गैर-जरूरी वस्तुओं की बिक्री की अनुमति देने के बाद बोर्ड गेम की सेल में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। जानकारों की मानें तो बोर्ड गेम्स की बिक्री में लाॅकडाउन से पहले इतनी तेजी कभी नहीं थी।

ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स की माँग बढ़ी
लाॅकडाउन में इनडोर गेम लूडो, शतरंज के अलावा लैपटॉप और मोबाइल पर ऑनलाइन गेम लोगों की खास पसंद बन गए हैं। क्या बच्चे, क्या युवा और क्या वृद्ध। लॉकडाउन का टाइम पास करने के लिए ऑनलाइन गेम पर सभी जुटे पड़े हैं। ट्रैकर ऐप एनी के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान टाॅप डाउनलोडिंग ऐप की लिस्ट में लूडो और कैरम ऐप है। लूडो ओर कैरम सबसे ज्यादा खेले जाने वाले बोर्ड गेम्स में से भी एक है। हर वर्ग के लोग इसे डाउनलोड कर रहे हैं।

बोर्ड गेम्स की बिक्री में तीन गुना इजाफा
पेटीएम माॅल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्रीनिवास मोथे ने कहा है कि इससमय ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं जिसके चलते बोर्ड गेम्स की मांग बढ़ी है। यह डिमांड सबसे ज्यादा ग्रीन और ऑरेंज जोन में है। लाॅकडाउन के दौरान लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर हाइपरमार्केट चेन बिग बाजार के कुल 25-स्टोर चालू है। संचालित होने वाले सभी स्टोर्स में बोर्ड गेम के स्टॉक खत्म हो गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि अप्रैल में लूडो की 20,000 यूनिट्स और कैरम बोर्ड की 3,000 से अधिक यूनिट्स की बिक्री हुई है। वहीं, अमेजन इंडिया के स्पोकपर्सन के मुताबिक, लूडो, कैरम बोर्ड, शतरंज के अलावा स्मार्टविटी, माइनक्राफ्ट और लेगो की ऑनलाइन खरीदारी में बढ़ोतरी हुई है। स्नैपडील ने कहा कि लॉकडाउन में बोर्ड गेम्स की बिक्री तीन गुना ज्यादा बढ़ी है। मई के पहले सप्ताह में इस बोर्ड गेम्स को 2.5 गुना ज्यादा आर्डर मिले हैं। सरकार द्वारा गैर-आवश्यक वस्तुओं की बिक्री पर रोक लगाने के बाद, गेमिंग ऐप्स के डाउनलोड में वृद्धि देखी गई। ऐप एनी डेटा के अनुसार, 25 मार्च से 3 मई की अवधि में गेम ऐप्स का डाउनलोड 197 मिलियन तक बढ़ा है।

खिलाड़ियों को कोरोना मुक्त रखने के लिये हमें सतर्क रहना होगा : रिजिजू

नयी दिल्ली : भारत में मुख्य केंद्रों पर आउटडोर ट्रेनिंग शुरू करने की योजना बनायी जा रही है और खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि खिलाड़ियों को कोविड-19 वायरस की चपेट में आने से बचाने के लिये सरकार को थोड़ा सतर्क रहना होगा। रिजिजू पहले ही कह चुके हैं कि मंत्रालय ओलंपिक के लिये क्वालीफाई कर चुके खिलाड़ियों के लिये राष्ट्रीय शिविर चरणबद्ध तरीके से कराने के लिये योजना बना रहा है। इसकी शुरूआत इस महीने के अंत में पटियाला एनआईएस और बेंगलुरू के भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) केंद्र में ठहरे खिलाड़ियों के साथ होगी।

रिजिजू ने कहा, ‘‘एक खाका तैयार किया जा रहा है। अगर शीर्ष खिलाड़ियों को कुछ भी हुआ तो यह करारा झटका होगा इसलिये हमें सतर्क रहना होगा और इसलिये अभी तक हमारे खिलाड़ियों में कोई भी कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुआ है। खिलाड़ी हमारे देश का गौरव हैं इसलिये हम कोई भी जोखिम नहीं उठा सकते। ’’ उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ से कहा, ‘‘चिकित्सीय विशेषज्ञ, तकनीकी समिति चीजों पर काम कर रहे हैं। हमने तैयारी शुरू कर दी है और लॉकडाउन के बाद एनआईएस पटियाला, दिल्ली के आईजी स्टेडियम, साइ केंद्रो, मुख्य खेल केंद्रो को खोला जायेगा। ’’ देशव्यापी लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया गया जिससे खेल मंत्रालय को भी साइ केंद्रो पर ट्रेनिंग शिविर को शुरू करने में देरी करनी पड़ी।

रिजिजू ने साथ ही आश्वस्त किया कि सभी खिलाड़ियों और कोचों की देखभाल की जायेगी और उन्हें इस मुश्किल समय में परेशानी में नहीं छोड़ा जायेगा। उन्होंने कहा, ‘‘विदेशी कोचों को अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें भुगतान किया जा रहा है। किसी का भी इस मुश्किल समय में वेतन नहीं रोका जायेगा। उभरते हुए खिलाड़ी घर जा चुके हैं और हमें उन्हें फिर बुलायेंगे, जरूरतमंदों के लिये कुछ करेंगे ताकि उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हो। ’’

रिजिजू ने साथ ही कहा कि सरकार राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) की भी मदद करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘केवल खेलों में नहीं, सामान्य जीवन भी बदल गया है। खेल भी नये तरीके से आगे बढ़ेंगे। हमें बिना दर्शकों के खेलों को दिलचस्प बनाने की योजना बनानी होगी। भविष्य में स्टेडियम दर्शकों के बिना ही होंगे। इंडियन प्रीमियर लीग में काफी पैसा है और उसे टीवी से राजस्व मिलता है लेकिन अन्य को मदद की जरूरत है। हम उन खेलों और महासंघों की मदद करेंगे। ’’

कोविड-19 संकट देश को अधिक आत्मनिर्भर बनाने, दुनिया की अगुवाई करने का भी अवसर : सारस्वत

नयी दिल्ली : नीति आयोग के सदस्य और जाने माने रक्षा वैज्ञानिक डॉ. वी के सारस्वत ने कहा है कि कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी ने भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में और अधिक आत्मनिर्भर बनने और दुनिया की अगुवाई करने का एक अवसर भी दिया है और इसके लिए ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस संकट का एक महत्वपूर्ण सबक है कि हमें आपूर्ति श्रृंखला के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

सारस्वत ने एक अभूतपूर्व वैश्विक संकट का कारण बनी कोविड-19 महामारी और संभावनाओं पर ‘भाषा’ के साथ विस्तार से बातचीत में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों को कामकाज शुरू करने के लिये विशेष सहायता पैकेज तथा सस्ते कर्ज की व्यवस्था को बहुत जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों के चालू होने से रोजी-रोजगार के अवसर फिर सुधरेंगे।

प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के महानिदेशक रह चुके सारस्वत ने कहा कि चीन से निकलकर वियतनाम, कंबोडिया और बांग्लादेश जैसे बाजारों की ओर जा रही कंपनियों को भारत में आकर्षित करने की रणनीति अपनायी जानी चाहिए और इसके लिए नीतियों में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।

उन्होंने ‘जान और जहान, दोनों का ख्याल’ रखने की जरूरत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन पर जोर देते हुए कहा कि इस वायरस का टीका विकसित होने तक हमें कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा और प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली का महत्व समझना होगा।

डॉ. सारस्वत ने फोन पर हुई इस बातचीत में कहा, ‘‘ इस संकट से दुनिया का लगभग हर देश प्रभावित है। पर यह हमारे लिये एक अवसर है और इसके लिये हमें दुनिया के अन्य देशों की जरूरतों को ध्यान में रखकर उत्पादन का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है।’’ सारस्वत ने कहा, ‘‘इस संकट ने सिखाया है कि हमें आपूर्ति श्रृंखला के लिये एक देश पर निर्भर नहीं रहना चहिए बल्कि सभी देशों के साथ व्यापार करना चाहिए। ज्यादा-से-ज्यादा जरूरी सामान यहां बनाये जाने की जरूरत है। इसके लिये हमें मेक इन इंडिया में भी बदलाव लाना होगा। हमें इसके तहत देश में बन सकने वाले सामानों को संरक्षण देने की जरूरत है। इस प्रकार के कदम से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।’’ एक सवाल के जवाब में सारस्वत ने कहा, ‘‘चीन से अन्य देशों की कंपनियां अब बाहर निकल रही हैं। हमें इसका लाभ उठाना चाहिए। हमें अपनी नीतियां ऐसी बनानी चाहिए कि जो कंपनियां वियतनाम, कंबोडिया, मलेशिया या बांग्लादेश जा रही हैं, वे यहां आने के लिये तत्पर हों। इसके लिये उन्हें सस्ती जमीन, नियमन, कामकाज की सुगमता आदि उपलब्ध कराने की जरूरत है। साथ ही बिजली, परिवहन जैसी लागतों में भी कमी करने की जरूरत है। इससे ये कंपनियां यहां आने के लिये प्रोत्साहित होंगी और देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

बढ़ती बेरोजगारी और कई कंपनियों में वेतन कटौती से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘कई कंपनियों खासकर छोटी इकाइयों का कामकाज कोरोना वायरस संकट के कारण लंबे समय से बंद है। इससे रोजगार पर असर पड़ा है। अब रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिये जरूरी है कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) एवं छोटे कारोबारी अपना कामकाज शुरू करें। लेकिन इसमें समस्या परिचालन खर्च की है यानी कारखाना शुरू करने तथा वेतन देने के लिये जो पैसा होना चाहिए, नहीं हैं।’’ सारस्वत ने कहा, ‘‘ऐसे में आवश्यक है कि सरकार इनके लिये विशेष पैकेज दे ताकि बैंकों से इन्हें सस्ता दीर्घकालीन कर्ज मिल सके और वे अपना कामकाज शुरू कर सकें। संभवत: सरकार इस पर काम भी कर रही है। इससे फिर से लोगों को रोजगार मिलेगा और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। यह सही है कि सरकार के कहने के बाद भी कई कारोबारी हैं जिन्होंने अपने कर्मचारियों को पैसा नहीं दिया है। जैसे ही कर्मचारी लौटते हैं और काम शुरू होता है, उन्हें पैसा देना शुरू कर देना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण जो आर्थिक प्रभाव पड़ा है, वह चिंताजनक है। हमें इससे निपटने के लिये अनुशासन यानी सामाजिक दूरी और स्वच्छता का पालन करते हुए कामकाज शुरू करने की जरूरत है। सरकार छोटे दुकानों को खोलने की अनुमति देकर इसी दिशा में कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह समस्या कोई जल्दी समाप्त नहीं हो रही। जबतक कोई दवा या टीका नहीं बन जाता है या हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली इस वायरस को झेलने में मजबूत नहीं हो जाती, तबतक इस संकट से छुटकारा नहीं मिलेगा। ऐसे में जान और जहान दोनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए उद्योग के साथ सभी को अनुशासन के साथ आगे बढ़ना होगा और जीवनचर्या उसी के हिसाब से रखनी होगी।’’ कोरोना वायरस संकट के बीच पर्यावरण स्तर में सुधार से जुड़े एक सवाल के जवाब में सारस्वत ने कहा, ‘‘इस संकट ने सिखाया है कि हम जरूरत के हिसाब से ही रहें, अनुशासन में रहें। ओजोन परत में छिद्र पिछले डेढ़-दो महीने में ठीक हो गया है। इससे साफ है कि प्रदूषण का कारण बेलगाम औद्योगिक गतिविधियां, वाहन और उपभोक्तावाद है। इस समय वायु गुणवत्ता दिल्ली की बेहतर है। कोरोना वायरस संकट ने हमें प्रकृति के साथ तालमेल में रहना सिखाया है। हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी। लोग पहले पैदल चलते थे, अब चलना ही नहीं चाहते। उपभोक्तावाद कम करना होगा। हिंदुस्तानी संस्कृति भी यही कहती है। उतना ही खाना और सामानों का उपयोग करना चाहिए जितनी शरीर को जरूरत हो।’’

हॉकी के सीनियर खिलाड़ी बनेंगे लॉकडाउन में ऑनलाइन कोचिंग पाठ्यक्रम का हिस्सा 

नयी दिल्ली : कोविड-19 महामारी पर नियंत्रण के लिए देश में लागू लॉकडाउन के कारण अभ्यास करने में असमर्थ भारत के सीनियर हॉकी खिलाड़ी सोमवार से शुरू होने वाले ऑनलाइन कोचिंग कोर्स में हिस्सा लेंगे। हॉकी इंडिया यह सुनिश्चित करना चाहता है कि खिलाड़ियों के लिए इस समय का सही उपयोग हो सके। इस पाठ्यक्रम में सीनियर पुरुष टीम के संभावित खिलाड़ियों में शामिल 32 खिलाड़ी 11 मई को इस पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगे जबकि सीनियर महिला टीम की 23 संभावित खिलाड़ियों को 15 मई को इस पाठ्यक्रम के बारे में बताया जाएगा।

भारतीय महिला टीम की कप्तान रानी रामपाल पहले ही हॉकी इंडिया कोचिंग शिक्षा कार्यक्रम में भाग ले चुकी हैं। वह हॉकी इंडिया के ‘लेवल एक’ कोच प्रमाण पत्र हासिल कर चुकी हैं। हॉकी इंडिया से जारी बयान के मुताबिक, ‘‘ हॉकी इंडिया खिलाड़ियों के लिए बुनियादी स्तर के कोचिंग पाठ्यक्रम का आयोजन कर रहा जिससे खेल की उनकी समझ और व्यापक हो सके। इससे उन्हें कोच के दृष्टिकोण से खेल को देखने का मौका मिलेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हॉकी इंडिया के बुनियादी स्तर के कोचिंग पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले मुख्य संभावित खिलाड़ी भविष्य में हॉकी इंडिया ‘लेवल एक’ कोचिंग कोर्स में भाग लेने के पात्र होंगे। इससे एथलीट के साथ साथ कोच के रूप में भी उनके विकास का मार्ग प्रशस्त होगा खुलेगा।’’

हॉकी इंडिया के ‘बुनियादी स्तर’ के इस कोचिंग पाठ्यक्रम सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। इसे ‘हॉकी इंडिया कोचिंग एजुकेशन पाथवे’ के नाम से जाना जाता है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था। इसके तहत खिलाड़ियों को अपने ऑनलाइन सत्रों की समीक्षा करने के लिए 36 घंटे मिलेंगे और फिर एक ऑनलाइन मूल्यांकन परीक्षा में सफल होना होगा। यह सब अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के नवीनतम नियम पर आधारित होगा। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष मोहम्मद मुश्ताक ने कहा, ‘‘ हमने निर्णय लिया कि उन्हें हमारे हॉकी इंडिया कोचिंग एजुकेशन पाथवे के माध्यम से अभी प्रशिक्षण देना सही होगा।’’

रोबोट मानवीय संपर्क, बीमारी के प्रसार को घटाने में मददगार साबित हो सकते हैं : विशेषज्ञ

दुबई : कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के दौरान रोबोट मानवीय संपर्क और संक्रमण फैलने के जोखिम को घटा कर डॉक्टर और मरीज के बीच ‘इंटरफेस’ के तौर पर काम कर सकते हैं जहां वे जांच एवं इलाज की प्रक्रियाओं को अंजाम दे सकते हैं। रोबोटिक्स क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने यह दावा किया है।

जर्मनी की एसीसीआरईए इंजीनियरिंग में बतौर रोबोटिक्स इंजीनियर काम कर रहे बार्तलोमीज स्टेंसजिक ‘महामारी से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता के प्रयोग – कोविड-19 मॉडल’ विषय पर ई-चर्चा के दौरान यह बात कही।
स्टेंसजिक ने कहा कि रोबोट वस्तुओं एवं रिमोट से संचालित चिकित्सा उपकरणों का इस्तेमाल कर डॉक्टर को मरीज से सुरक्षित दूरी पर रहने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य रोबोटिक्स के जरिए पूरी तरह स्वतंत्र एक रोबोट डॉक्टर बनाने का है ताकि इंसानी डॉक्टर के कौशल को इलाज कर रही मशीन में स्थानांतरित करना संभव हो सके।” उन्होंने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच में इंटरफेस का अर्थ है कि रोबोट जांच से लेकर इलाज तक की सारी प्रक्रियाओं को अंजाम दे सके।
चिकित्सा क्षेत्र में रोबोट के प्रयोगों की व्यापक संभावनाओं को समझाते हुए स्टेंसजिक ने कहा कि वे अस्पतालों के अगम्य इलाकों को रोगाणुमुक्त करने में मदद कर सकते हैं। उनमें स्पर्श का बोध डालकर उन्हें मनुष्य के साथ करीब से संपर्क बनाने में भी प्रयोग किया जा सकता है। अमेरिकी की टोलेडो यूनिवर्सिटी में सर्जरी के प्राध्यापक मुनियर नजल ने कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए टीका विकसित करने में कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के प्रयोग की वकालत की है।
अमेरिका में सर्जीस्फेयर कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सपन एस देसाई ने 86,000 कोविड-19 मामलों पर कंपनी के आंकड़ों से कृत्रिम बुद्धिमता की परिवर्तनकारी क्षमता को समझाया।

तरुण बजाज बने भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक

मुम्बई : केंद्र सरकार ने आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज को भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल में निदेशक नियुक्त किया है। बजाज ने 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे अतनु चक्रवर्ती का स्थान लिया।  बजाज का नामांकन पांच मई से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। बजाज 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। आर्थिक मामलों के सचिव बनाए जाने से पहले वह प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं। वह 2015 में प्रधानमंत्री कार्यालय गए थे। उससे पहले वह वित्त मंत्रालय में ही आर्थिक मामलों के संयुक्त सचिव और वित्त सेवा विभाग के निदेशक एवं संयुक्त सचिव रहे।

डबल्यूएचओ की वैज्ञानिक डॉ. सौम्या ने की भारत की तारीफ

विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने अन्य देशों की तुलना में कोरोना संक्रमण और मौतों को कम रखने के लिए भारत की सराहना की। कहा, भारत कोविड-19 का टीका बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। भारत इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होगा तो दुनियाभर के लिए पर्याप्त मात्रा में टीके का निर्माण नहीं हो पाएगा।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर ऑनलाइन संबोधन में डॉ. सौम्या ने कहा, विश्व को संक्रमण प्रसार के लिए कई महीनों यहां तक कि कई सालों तक के लिए तैयार रहना चाहिए। इसे टीका विकसित करने और परीक्षण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। महत्वपूर्ण है टीके का बड़े पैमाने पर निर्माण के साथ ही  स्वास्थ्य प्रणाली द्वारा आबादी का टीकाकरण हो सके।
उन्होेंने कहा कि भारत के सामने बड़ी जनसंख्या, कई शहरी इलाकों में अत्यधिक भीड़ व ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी हैं। इस समय में हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और स्वास्थ्य कार्यबल को मजबूत करना चाहिए।
आयुर्वेदिक दवा संक्रमण में कारगर
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली आयुर्वेदिक दवा ‘फीफाट्रोल’ कोरोना के इलाज में रामबाण हो सकती है।  नेशनल रिसर्च डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (कंपेंडियम) की ओर से जारी 200 तकनीक की सूची में यह दवा भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो संक्रमण का खतरा कम होगा।

संक्रमित भी आसानी से ठीक हो सकता है। फीफाट्रॉल इम्युनिटी बूस्टर होने के साथ मल्टी ड्रग है, जिसमें आयुर्वेद का पूरा मिश्रण हैं। ये दवा प्राकृतिक एंटीबोटिक से युक्त है, जो फ्लू के संक्रमण और दर्द जैसी तकलीफों में आराम देती है। कंपेडियम का कहना है कि दवा से नाक संबंधी तकलीफ दूर होने के साथ गले में खराश, सिर दर्द और बदन दर्द में आराम मिलता है जो कोरोना का लक्षण है।

पहले ड्यूटी के लिए परिवार से दूरी, अब कोरोना से लड़कर फिर तैयार

इंदौर :  कोराेना वार्ड में हर कोई जाने से डरता है। डॉक्टर्स राउंड लेते हैं। मरीज को देखने के बाद दो से तीन मिनट में इलाज लिखकर चले जाते हैं लेकिन नर्स ही होते हैं जो सुनिश्चित करते हैं कि मरीज को लिखा गया इलाज मिल पा रहा है या नहीं। दवाइयां देना, खाना खिलाना, काउंसलिंग करना, कैथेटर, फूड पाइप, वेंटीलेटर आदि का ध्यान रखने का काम नर्स ही करते हैं। यही वे पहली पंक्ति के योद्धा हैं, जो घंटों मरीज के साथ वार्ड में रहते हैं।

1. स्वस्थ हो गए, पर बच्चे की खातिर अलग फ्लैट में रह रहे

36 वर्षीय राम कासवान की एमआर टीबी काेविड अस्पताल में ड्यूटी लगी थी। तभी किसी मरीज के संपर्क में आने से वे भी संक्रमित हो गए। 14 अप्रैल को उनकी सैंपल रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 3 मई को डिस्चार्ज हुए। अब घर से दूर फ्लैट में रहते हैं ताकि बच्चे पास नहीं आ सके। वे बताते हैं खाने-पीने का कोई स्वाद नहीं आ रहा है। किसी प्रकार की कोई गंध महसूस नहीं हो रही है। मेरा छह साल का बेटा है। एक ही घर में रहूंगा तो वह मेरे पास आएगा। ऐसे में उसे भी संक्रमण का खतरा रहेगा, इसलिए अब मैं अलग रहता हूं।

2. चेस्ट सेंटर में ड्यूटी के बाद क्वारेंटाइन थे, तभी संक्रमित हुए

रामकुमार शर्मा की चेस्ट सेंटर में 9 से 13 अप्रैल तक ड्यूटी थी। इसके बाद वे क्वारेंटाइन रहे। 18 अप्रैल को लक्षण आने पर उन्होंने जांच के लिए अपना सैंपल भेजा। 25 अप्रैल को उनकी कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। एमआर टीबी अस्पताल में उनका इलाज किया गया। 10 मई काे उन्हें डिस्चार्ज किया गया। वे बताते हैं पीपीई किट पहनकर ही उन्होंने ड्यूटी की। इसके बाद होटल में खुद को क्वारेंटाइन किया, जहां एक साथी संक्रमित हुआ तो उसके संपर्क में आने से वे भी संक्रमित हो गए।

3. बच्चे के टीकाकरण में संक्रमित हुई, घर में अलग रह रही हैं अब

29 वर्षीय अंकिता दास की एमवायएच में टीकाकरण केंद्र में ड्यूटी लगी थी। उन्होंने एक बच्चे का टीकाकरण किया था। अंकिता को पता चला कि बच्चे की मां ने कोरोना की जांच के लिए सैंपल दिया था। इसके बाद अंकिता ने भी अपनी जांच करवाई। बच्चे की मां की रिपोर्ट तो निगेटिव आई लेकिन अंकिता की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। एमआर टीबी अस्पताल में इलाज के बाद अब वे पूरी तरह से ठीक हैं। घर पर आइसोलेशन में हैं। खुद के बर्तन अलग कर लिए हैं। खाना भी खुद बना रही हैं, ताकि परिवार सुरक्षित रहे।

4. आईसीयू में हो गया संक्रमण, ठीक होकर अब फिर ड्यूटी पर

24 साल की प्रवीणा मंडीदीप की रहने वाली हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल की चौथी मंजिल पर आईसीयू में काम कर रही थीं। तब वह एक संदिग्ध मरीज के संपर्क में आईं। यह शुरुआती दौर था जब इंदौर में कोविड के मरीज मिलना शुरू ही हुए थे।  इसके बाद एक अप्रैल को उन्हें सर्दी-जुकाम हुआ। जांच के लिए सैंपल भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट 12 अप्रैल को मिली। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही तत्काल भर्ती किया गया। अब वह ठीक हैं। 14 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड भी पूरा हो चुका है। वह फिर से ड्यूटी करने को पूरी तरह तैयार हैं।

5. सर्जरी वार्ड में मरीज के संपर्क में आई, संक्रमण पता ही नहीं चला

आरती नाहक गर्भवती हैं। एमवायएच के सर्जरी वार्ड में ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुई थीं। पहले सामान्य वार्ड में स्टाफ मास्क व ग्लव्स पहनकर ही काम करता था। संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद सभी को किट दिए गए। जब 11 अप्रैल को आरती की तबीयत खराब हुई तो वह 12 अप्रैल को एमवायएच की ओपीडी में जांच करवाने गईं। 17 अप्रैल को सैंपल दिया। 10 दिन बाद 26 अप्रैल को कॉल आया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्हें एमआर टीबी अस्पताल में भर्ती किया गया। डिस्चार्ज होकर 10 मई को वह अपने घर लौट आई हैं।

6. मरीज का एक्स-रे किया, तब पता लगा कोरोना हो सकता है

जैफरीन बॉम्बे हॉस्पिटल में स्टाफ नर्स हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह में उनकी ड्यूटी आईसीयू में थी। वहां एक मरीज मेडिकल ऑफिसर से जांच करवाने पहुंचा। इसके बाद मरीज को ज्यादा परेशानी हुई। आईसीयू में शिफ्ट किया गया। सीपीआर दिया गया। एक्स-रे करवाया तब उसमें सफेद पैचेज नजर आए। मरीज को दूसरे अस्पताल शिफ्ट किया गया। तीन दिन बाद नर्स को गले में दर्द शुरू हुआ। सैंपल दिया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 29 अप्रैल को डिस्चार्ज किया गया। दो दिन बाद क्वारेंटाइन पीरियड भी पूरा हो जाएगा।

7. रेसीडेंट डॉक्टर के साथ ओटी में काम किया, तभी संक्रमित हुई

आरती बरफा की ड्यूटी गायनिक ओटी में थी, जहां एक रेसीडेंट डॉक्टर पॉजिटिव आ चुकी थी। उसके बाद उन्हें लगा कि उन्हें भी जांच करवाना चाहिए तो 2 अप्रैल को ओपीडी में गई। वहां कहा गया कि लक्षण होंगे, तभी सैंपल लिए जाएंगे। जुकाम की शिकायत हुई तो 9 अप्रैल को सैंपल लिया। 13 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। अरबिंदो अस्पताल शिफ्ट करवाया गया। अब 20 दिन बाद 2 मई को डिस्चार्ज किया गया। अब घर में अकेली आइसोलेशन में रह रही हैं। देखरेख के लिए बहन साथ ही रहती है।

8. शुरुआत में पीपीई किट नहीं मिली, इसीलिए संक्रमित हो गए

जितेंद्र वाल्मीकि की ड्यूटी चेस्ट सेंटर में थी। उन्होंने भी 13 अप्रैल तक ड्यूटी की। फिर उन्हें क्वारेंटाइन किया। 18 अप्रैल को बीमारी के लक्षण सामने आए। हल्का बुखार आया। जांच के लिए सैंपल दिया जिसकी रिपोर्ट 25 अप्रैल को मिली। वे बताते हैं कि शुरू में पीपीई किट की उपलब्धता ज्यादा नहीं थी। इसलिए ज्यादातर स्टाफ एचआईवी किट पहनकर ही काम करता था। वे कहते हैं यह बताना भी मुश्किल है कि किस मरीज के संपर्क में आने के कारण हम भी संक्रमित हो गए।

9. आईसीयू में पॉजिटिव मरीज से संपर्क, उसी से मिला कोरोना

वर्षा धाकड़ बॉम्बे हॉस्पिटल में कार्यरत हैं। आईसीयू में मरीज को इंट्रा-गेट लगाने सहित सारे काम किए। वर्षा ने किट भी पहनी थी, लेकिन बाद में पता लगा वह मरीज कोरोना पॉजिटिव है। 11 अप्रैल को वह मरीज के संपर्क में आई थीं। उसके बाद बुखार और बॉडी पेन हुआ। अस्पताल प्रबंधन ने जांच के लिए सैंपल भेजा। रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। 25 अप्रैल को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। इसके बाद उन्हें 14 दिन क्वारेंटाइन किया गया। सोमवार को ही यह अवधि पूरी हुई। अब वे फिर से ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)