कई तरह से कर सकेंगे स्टेरेलाइज
लंदन : कोरोनावायरस से बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने सिलिकॉन रबर से एक दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला मास्क बनाया है। इसमें एन 95 फिल्टर लगाया गया है जो वायरस को रोकने में पूरी तरह कारगर है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ओपन में प्रकाशित शोध के अनुसार इन मास्कों को ऐसे डिजाइन किया गया है कि इन्हें स्टेरेलाइज कर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
आसानी से होता है तैयार
नया मास्क सिलिकॉन रबर से बना है और इसका उत्पादन इंजेक्शन मोल्ड में किया जाता है। इसमें पारंपरिक मास्कों की तुलना में एन 95 मटीरियल का बहुत कम इस्तेमाल होता है। मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता जियोवानी ट्रावरसो ने कहा, हम एक ऐसा मास्क बनाना चाहते थे जिसका बार-बार प्रयोग किया जा सके और जिसे कई तरीकों से स्टेरेलाइज किया जा सके। शोधकर्ताओं ने सिलिकॉन रबर का इस्तेमाल किया क्योंकि यह पदार्थ काफी टिकाऊ होता है। तरल सिलिकॉन रबर को किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। यह मास्क मशीन में तेजी से बन सकते हैं।
कई स्टेरेलाइलेशन प्रक्रियाओं का किया प्रयोग
शोधकर्ताओं ने इन मास्कों पर स्टेरेलाइजेशन की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रयोग किया। इसमें स्टीम के जरिए इन्हें स्टेरेलाइल करना, ओवन का प्रयोग करना और आइसोप्रोपाइल एल्कोहल में डूबना शामिल था। हर प्रक्रिया में मास्क को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा। बर्मिंघम वुमेन अस्पताल के 20 प्रतिभागियों पर इसका परीक्षण किया गया। चेहरे के फिट टेस्ट में मास्क सफल हो चुका है और अब वायरस को रोकने की इसकी क्षमता पर गहन अध्ययन किया जा रहा है।
बार-बार हो सकेगा इस्तेमाल एन 95 फिल्टर वाला सिलिकॉन रबर मास्क
करें असली-नकली सैनिटाइजर की पहचान
पूरी दुनिया कोरोनावायरस महामारी के प्रकोप से परेशान है। इस समय इस बीमारी से बचाव के लिए बार-बार साबुन से हाथ धोना या अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से हाथ साफ करने का सुझाव बार-बार विशेषज्ञों द्वारा दिया जा रहा है। बाजार में दुनियाभर के सैनिटाइजर मौजूद हैं और लोगों को समझ नहीं आ रहा कि किस सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। कई लोग बीमारी की आड़ में नकली सैनिटाइजर बनाने का काम भी धड़ल्ले से कर रहे हैं। आइए आपको कुछ तरीके बताते हैं जिससे आप जान सकेंगे की सैनिटाइजर असली है या नकली।
टॉयलेट पेपर पर परीक्षण करें
– सैनिटाइजर की परख करने के लिए शौचालय में इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट पेपर या टिश्यू पेपर का उपयोग करें। इस पेपर के ऊपर कलम की मदद से एक छोटा गोला पेपर के बीचोंबीच बना दें। अब इस गोले के ऊपर हैंड सैनिटाइजर की कुछ बूंदे डालें। अगर इस गोले की स्याही फैल जाती है तो समझ लीजिए आपके सैनिटाइजर में मिलावट है और यह आपके हाथों को पूरी से साफ करने में सक्षम नहीं है। अगर आपका सैनिटाइजर असली होगा तो इस गोले की स्याही बिल्कुल नहीं फैलेगी। कुछ देर के लिए पेपर गीला होगा और फिर तुरंत सूख जाएगा।
हेयर ड्रायर परीक्षण
हैंड सैनिटाइजर को एक कटोरी में निकाल लें। अब इसे हेयर ड्रायर से सुखाएं। अगर आपका हैंड सैनिटाइजर असली है तो वह 3 से 5 सेकंड में सूख जाएगा। यदि यह सैनिटाइजर नकली हुआ तो इतने कम समय में नहीं सूखेगा और कटोरी में बचा रहेगा।
आटे से परीक्षण करें
हैंड सैनिटाइजर की गुणवत्ता की जांच आप आटे के जरिए भी कर सकते हैं। इसके लिए एक कटोरी में एक चम्मच आटा लीजिए। इस आटे में थोड़ा-सा हैंड सैनिटाइजर डालिए। अब इन दोनों को अच्छी तरह मिलाकर गूथने की कोशिश कीजिए। अगर आपका हैंडसेनिटाइजर असली है तो यह आटा एक साथ आकर गोला नहीं बनेगा बल्कि बिखरा-बिखरा रहेगा। लेकिन अगर आपका सैनिटाइजर नकली है तो यह आटे को ठीक उसी तरह गूंथ देगा जैसे कि आटा पानी में गुथता है।
ये हैंड सैनिटाइजर ही खरीदें
उन्हीं हैंड सैनिटाइजर का चयन करें जिनमें 60 फीसदी अल्कोहल हो। इसे कम अल्कोहल वाले सैनिटाइजर हाथों को साफ करने में प्रभावी साबित नहीं होते। वहीं, 60 फीसदी से ज्यादा अल्कोहल वाले सैनिटाइजर से हाथों की त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। इससे त्वचा में जलन और लाल चकत्ते हो सकते हैं।
(साभार – लाइव हिन्दुस्तान)
सरबजीत फेम रंजन सहगल का निधन, 36 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
नयी दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता रंजन सहगल का गत शनिवार को निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 36 साल के रंजन के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। सिन्टा (CINTAA) ने एक्टर को याद करते हुए ट्वीट में शोक व्यक्त किया। रंजन 2010 से सिन्टा के सदस्य रहे थे।
रंजन कई शोज जैसे ‘सबकी लाडली बेबो’, ‘भाग्य’ और ‘रिश्ता डॉट कॉम’, ‘क्राइम पेट्रोल’ में काम कर चुके हैं। ‘रिश्तों से बड़ी प्रथा’ में रंजन ने बतौर लीड एक्टर काम किया था।
रंजन सहगल के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने कई फिल्मों में बतौर सहायक कलाकार काम किया था। फिल्म सरबजीत में उन्होंने रविंद्र पंडित का किरदार निभाया था। इसके अलावा वह ‘फोर्स’, ‘कर्मा’, ‘माही एनआरआई’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे। वह पंजाबी इंडस्ट्री में भी सक्रिय रहे थे।
बता दें कि रंजन से पहले ‘क्राइम पेट्रोल’ एक्टर शफीक अंसारी 10 मई को इस दुनिया को अलविदा कहकर चले गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक अंसारी का निधन कैंसर की वजह से हुआ था। शफीक अंसारी को पेट का कैंसर था और वह कई सालों से इससे जूझ रहे थे।
सूरत की दुकान में बिक रहा है हीरे का बना लखटकिया मास्क
सूरत : कोरोना वायरस के चलते देशभर में हर किसी के लिए अब फेस मास्क पहनना अनिवार्य हो गए है, ऐसे में सूरत के एक जूलरी शॉप मालिक को हीरे लगे हुए मास्क बेचने का आइडिया आया। वह अपनी दुकान में ऐसे मास्क बेच रहे हैं, जिसकी कीमत डेढ़ लाख से लेकर चार लाख तक की है। आभूषण की दुकान के मालिक दीपक चोकसी का कहना है कि उन्हें यह आइडिया उस ग्राहक से मिला, जिसके घर पर शादी थी। वह हमारी दुकान पर आया और दूल्हा-दुल्हन के लिए यूनिक मास्क की मांग की।
चोकसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि जैसे ही लॉकडाउन हटा तो उनके एक ग्राहक जिनके घर पर शादी थी, हमारी दुकान में आएं और उन्होंने दूल्हे और दूल्हे के लिए अलग तरह के मास्क की मांग की। इसके बाद हमने अपने डिजाइनरों को मुखौटे बनाने का काम दिया, जिसे ग्राहकों ने बाद में खरीदा। इसके बाद हमने अलग-अलग कीमतों के मास्क बनाए। उन्होंने कहा कि इन मास्क को बनाने के लिए हमने सोने के साथ प्योर डायमंड और अमेरिकन डायमंड का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा कि मास्क बनाने के लिए अमेरिकी हीरे के साथ पीले सोने का इस्तेमाल किया गया है और इसकी कीमत 1.5 लाख है। एक अन्य मास्क जो सफेद सोने और रियल हीरे से बना है और इसकी कीमत 4 लाख रुपये है। दुकान के मालिक ने कहा कि इन मास्क को बनाने के लिए सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन मास्क से हीरे और सोने को ग्राहकों की इच्छा के अनुसार निकाला जा सकता है और इसका उपयोग अन्य आभूषणों को बनाने में किया जा सकता है।
हाल ही में, पुणे में शंकर कुराडे नाम के एक व्यक्ति ने खुद को कोविड-19 महामारी के बचानो के लिए 2.89 लाख रुपये के सोने का एक मास्क बनाया था।
आकाश चोपड़ा ने रवींद्र जडेजा को चुना ऑल टाइम बेस्ट भारतीय फील्डर
नयी दिल्ली : आकाश चोपड़ा ने रवींद्र जडेजा को ऑल टाइम बेस्ट भारतीय फील्डर चुना है। हालांकि, उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने रवींद्र जडेजा को ऑल टाइम बेस्ट भारतीय फील्डर चुना है। हालांकि, उन्होंने ऑल टाइम बेस्ट उन छह भारतीय फील्डरों का नाम लिया, जिन्हें खुद उन्होंने देश के लिए खेलते हुए देखा है। अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल ‘आकाशवाणी’ पर चोपड़ा ने कहा, ”वह (जडेजा) पूरी तरह से शानदार हैं, उनके पास एक रॉकेट आर्म है, उनके पास अभी विश्व क्रिकेट में सबसे अच्छी आर्म है। आप बस उनकी ग्राउंड कवरेज को देखें, वह स्लिप पर फील्डिंग करते हुए सर्वश्रेष्ठ नहीं है, लेकिन यह कुछ मायने नहीं रखता है।”
हाल ही में रवींद्र जडेजा 21वीं शताब्दी के भारत के सबसे बहुमूल्य टेस्ट खिलाड़ी बने हैं। क्रिकेट की ‘बाइबल’ समझी जाने वाली पत्रिका विजडन ने ऑल राउंडर रवींद्र जडेजा को 21वीं सदी का भारत का सबसे बहुमूल्य खिलाड़ी घोषित किया है। 2012 में पदार्पण करने के बाद से जडेजा ने क्रिकेटर के रूप में लगातार ऊंचाइयों को छुआ है। पिछले दो सालों में भारतीय टीम में उनका बल्ले, गेंद और फील्डिंग से अमूल्य योगदान रहा है।
विजडन ने खिलाड़ी क्षमता आंकने के लिए क्रिकविज रेटिंग का इस्तेमाल किया है और उनकी रेटिंग 97.3 बैठती है, जो श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के बाद दूसरे नंबर पर है। रवींद्र जडेजा के बाद भारत के ऑल टाइम बेस्ट फील्डरों में आकाश चोपड़ा ने सुरेश रैना, मोहम्मद कैफ, युवराज सिंह, कपिल देव और विराट कोहली को चुना है।
विराट कोहली और कपिल देव के बारे में बात करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा, ”जैसा कि आप देख ही सकते हैं कि विराट कोहली ने एक खिलाड़ी के रूप में किस तरह विकास किया है। आपने उन्हें फील्डर के रूप में भी बढ़ते देखा है। वह वहां फील्डिंग के लिए होना चाहते हैं और यही बात उन्हें सुपर स्पेशल बनाती है।”
उन्होंने आगे कहा, ”सभी ने कपिल देव को 1983 वर्ल्ड कप के फाइनल में विवियन रिचर्ड्स का कैच लेते हुए देखा है। उनके हाथ शानदार और काफी चुस्त थे।” युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ को भारतीय क्रिकेट में सबसे प्रमुख नामों में देखा जाता है, जिन्होंने भारतीय फील्डिंग में एक नए युग की शुरुआत की।
इन दोनों का अक्सर पहले 15 ओवरों में तीस गज के घेरे के अंदर टॉप फील्ड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और इसके बाद उन्हें स्लॉग ओवरों के दौरान आउटफील्ड पर फील्डिंग करते देखा जाता था। अब यही विराट कोहली और रवींद्र जडेजा के साथ भी देखा जा सकता है। दोनों ही व्हाइट बॉल क्रिकेट में स्लॉग ओवर के दौरान बाउंड्री रोप पर फील्डिंग करते हैं।
पाश्चुराइज मां का दूध कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित, शोध में दावा
टोरंटो : ताजा शोध में दावा किया गया है कि यदि कोराना संक्रमित मां के दूध को 30 मिनट के लिए 62.5 डिग्री सेल्सियस पर पाश्चुराइज कर दिया जाए तो वह बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है। यह भी कहा गया कि ऐसा करने से आंचल के दूध में मौजूद कोरोना वायरस निष्क्रिय हो जाते हैं।
कनाडा के मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध में कोरोना संक्रमित महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे खुद के शिशुओं को स्तनपान कराना जारी रखें। कनाडा में यह मानक देखभाल है कि अस्पताल में बहुत कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं को पाश्चुराइज्ड स्तन का दूध उपलब्ध कराया जाए, जब तक कि उनकी अपनी मां के दूध की आपूर्ति पर्याप्त ना हो जाए।
ऐसे में समस्या यह आई कि यदि कोई कोरोना संक्रमित महिला अपने आंचल का दूध दान करे तो क्या होगा। इस पर शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसे दूध को 62.5 डिग्री पर पाश्चुराइज करना चाहिए,क्योंकि ऐसा करने से कोरोना के अलावा एचआईवी और हेपटाइटिस जैसे वायरस भी निष्क्रिय हो जाते हैं। इसके बाद इस दूध को किसी ऐसे स्वस्थ बच्चे को दिया जा सकता है जो उसका ना हो।
रद्द होने के बावजूद विम्बलडन 620 खिलाड़ियों को बाँटेगा इनामी राशि
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी के कारण रद्द होने के बावजूद विम्बलडन 620 खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि के रूप में 1.25 करोड़ डॉलर बांटेगा। ऑल इंग्लैंड क्लब ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की।बीमा प्रदाता कंपनी के साथ सलाह मश्विरे के बाद क्लब के अधिकारियों ने कहा कि मुख्य ड्रॉ में भाग लेने वाले 256 में से प्रत्येक खिलाड़ी को 31,000 डालर की राशि दी जाएगी।
वहीं जो 224 खिलाड़ी क्वालीफाइंग में भाग लेते, उन्हें प्रत्येक को 15,600 डॉलर की राशि मिलेगी। ऑल इंग्लैंड क्लब के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड लुईस ने कहा कि चैम्पियनशिप के रद्द होने के तुरंत बाद हमने अपना ध्यान इस बात पर लगा दिया कि हम उन लोगों की कैसे मदद कर सकते हैं जो विम्बलडन को आयोजित करने में सहायता करते हैं।
इसके साथ ही 120 खिलाड़ी युगल स्पर्धाओं में हिस्सा लेते। प्रत्येक को 7,800 डॉलर, व्हीलचेयर स्पर्धा में भाग लेने वाले 16 खिलाड़ियों को 7,500 डॉलर और ‘क्वैड (चार खिलाड़ियों की) व्हीलचेयर स्पर्धा में भाग लेने वाले चार खिलाड़ियों को 6,200 डॉलर दिए जाएंगे।
बच्चों की पसन्द बनीं ‘मणिकर्णिका’ की डॉल
मुम्बई : बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की सोशल मीडिया टीम ने साल 2019 में आई अभिनेत्री की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ में उनके द्वारा निभाए गए किरदार के तौर पर डिजाइन की गई गुड़िया की तस्वीर साझा की है। मणिकर्णिका डॉल को साड़ी व पारंपरिक भारतीय आभूषणों से सजाया गया है, जो फिल्म में कंगना के लुक से प्रेरित है।
तस्वीर को ट्विटर पर साझा करते हुए टीम ने लिखा, “मणिकर्णिका डॉल बच्चों की नई पसंद है। यह अच्छी बात है जब बच्चे अपने नायकों के बारे में सीखते हुए बड़े होते हैं और देशभक्ति व बहादुरी से प्रेरित होते हैं।
‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी’ पिछले साल 25 जनवरी को रिलीज हुई थी। कंगना फिल्म में शीर्षक भूमिका में थीं और यह फिल्म एक निर्देशक के तौर पर उनके डेब्यू को चिन्हित करती है। इस फिल्म के बाद कंगना ने अपने प्रोडक्शन हाउस का नाम भी मणिकर्णिका फिल्म्स रख दिया।
मेरी कप्तानी छीनने और टीम से बाहर करने में ग्रेग चैपल ही नहीं, सभी थे शामिल’ : गांगुली
नयी दिल्ली : टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर को लेकर बात की है। गांगुली टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं, लेकिन 2005 का साल उनके लिए काफी निराशाजनक रहा था। उनसे कप्तानी छिनी और इसके बाद उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया गया था। गांगुली ने कहा कि उन्हें टीम से निकालने में सिर्फ पूर्व कोच ग्रेग चैपल ही नहीं बल्कि पूरा सिस्टम शामिल था। गांगुली का मानना है कि उनसे कप्तानी छीनना नाइंसाफी थी।
एक बांग्ला दैनिक को दिए साक्षात्कार में गांगुली ने अपने कॅरियर के उस सबसे मुश्किल दौर के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘वो मेरे करियर का सबसे बड़ा झटका था। मेरे साथ सरासर नाइंसाफी हुई थी। मुझे पता है कि आपको हमेशा न्याय नहीं मिल सकता, लेकिन फिर भी जो कुछ हुआ था मेरे साथ वो नहीं होना चाहिए था। मैं टीम इंडिया का कप्तान था और जिम्बाब्वे से जीतकर लौटा था और स्वदेश लौटते ही मुझे कप्तानी से हटा दिया गया था। मैंने 2007 वर्ल्ड कप भारत के लिए जीतने का सपना देखा था।’
‘2007 विश्व कप जीतना मेरा सपना था’
गांगुली ने आगे कहा, ‘इससे पहले हम फाइनल (2003 वर्ल्ड कप) में पहुंचे थे, मेरे पास यह सपना देखने के कारण थे। पांच सालों में टीम ने मेरी कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन किया था, वो चाहे भारत में हो या फिर बाहर। इसके बाद आप अचानक मुझे टीम से ड्रॉप कर देते हैं? आप कहते हैं कि मैं वनडे इंटरनैशनल टीम का हिस्सा नहीं हूं और फिर मुझे टेस्ट टीम से भी बाहर कर दिया जाता है।’ गांगुली ने कहा कि मुझे इसमें कोई शक नहीं कि इसकी शुरुआत ग्रेग चैपल के बीसीसीआई को भेजे उस ई-मेल से हुई, जिसमें उनके खिलाफ काफी बातें लिखी गई थीं और जो लीक हो गया था।
क्या ऐसा होता है?’
गांगुली ने कहा, ‘मैं सिर्फ ग्रेग चैपल को इसका दोषी नहीं ठहराऊंगा। इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने ही यह सब शुरू किया था। उन्होंने मेरे खिलाफ बोर्ड को एक ई-मेल लिखा, जो लीक हो गया। क्या ऐसा कुछ होता है? क्रिकेट टीम एक परिवार की तरह होती है। लोगों में मतभेद हो सकते हैं, मिसअंडरस्टैंडिंग हो सकती है, लेकिन यह सब बातचीत से सुलझाया जा सकता है। आप कोच हैं, अगर आपको लगता है कि मुझे कुछ खास तरीके से खेलना चाहिए, तो आप मुझे बताइये। जब मैं खिलाड़ी के तौर पर टीम में लौटा, तो उन्होंने मुझे बताया, तो पहले क्यों नहीं ऐसा किया गया?’
‘टीम से ड्रॉप करने में सबका था हाथ’
गांगुली ने इसके लिए अकेले चैपल को जिम्मेदार नहीं ठहराया, कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि कोई सिस्टम की मदद के बिना कप्तान को हटा दे। उन्होंने कहा, ‘बाकी लोग भी निर्दोष नहीं थे। एक विदेशी कोच, जिसकी टीम सिलेक्शन में कोई नहीं राय मायने नहीं रखती थी, वो टीम इंडिया के कप्तान को ड्रॉप नहीं कर सकता। मुझे समझ में आ गया था यह बिना सिस्टम के सपोर्ट के नहीं हो सकता है। मुझे टीम से निकालने में सभी लोग शामिल थे, लेकिन मैं दबाव में बिखरा नहीं, मेरा आत्मविश्वास खत्म नहीं हुआ।’ 2005 में टीम से ड्रॉप होने के बाद गांगुली ने 2006 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे के साथ टीम में वापसी की। इंटरनैशनल क्रिकेट में वापसी गांगुली ने रनों के साथ की और अगले दो साल में अपने करियर की कुछ यादगार पारियां खेलीं।
2008 में गांगुली ने लिया संन्यास
उन्होंने 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था और रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी। गांगुली ने 311 वनडे इंटरनैशनल मैचों में 11363 रन और 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन बनाए। उनके खाते में 22 वनडे इंटरनैशनल और 15 टेस्ट सेंचुरी शामिल हैं। गांगुली को महान कप्तानों में बिना जाता है, क्योंकि उन्होंने 2000 में हुए फिक्सिंग कांड के बाद टीम इंडिया को संभाला और अपनी कप्तानी में टीम को आगे बढ़ाया।
प्लास्टिक कचरे से बनीं एक लाख किलोमीटर सड़कें
नयी दिल्ली : केंद्र सरकार का सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का प्रयोग सफल रहा है। विभिन्न सड़क निर्माण एजेंसियों ने अब तक एक लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें प्लास्टिक कचरे से बनाई हैं। यह अधिक टिकाऊ, सस्ती और गड्ढा रहित हैं।
दशकों बाद प्लास्टिक कचरे को ठिकाने लगाने की राह मिल गई है। प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा कम होगा। इसके खाने से पशुओं की जान नहीं जाएगी और कूड़ा बीनने वालों की अतिरिक्त कमाई होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जुलाई 2016 में सड़क निर्माण में ठोस और प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल करने की घोषणा की थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग में 10 फीसदी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल किया गया। सेंटर रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) द्वारा गुणवत्ता और क्षमता के अध्ययन के बाद जनवरी 2017 में राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें, नगर निगम, नगर निकाय आदि सड़कों निर्माण में 10 फीसदी प्लास्टिक कचरे के प्रयोग करने के आदेश जारी हुए।
अधिकारी ने बताया कि देश के 11 राज्यों में एक लाख किलोमीटर सड़कें बन चुके हैं और चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा दो गुना बढ़ेगा। असम में इस साल पहली बार राष्ट्रीय राजमार्गों में एनएचएआईडीसीएल प्लास्टिक कचरे का प्रयोग शुरू हो गया है। इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) ने कोड ऑफ प्लास्टिक के नए मानक नवंबर 2013 में तैयार किए थे। प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने का यह विश्व का यह पहला कोड ऑफ प्लास्टिक है।
270 किलोमीटर लंबे जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग में प्लास्टिक का कचरा मिलाया गया। नोएडा सेक्टर 14ए में महामाया फ्लाइओवर तक सड़क निर्माण में छह टन प्लास्टिक कचरा लगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे के यूपी गेट के पास दो किमी सड़क के लिए 1.6 टन प्लास्टिक कचरा लगा। दिल्ली के धौलाकुआं से एयरपोर्ट जाने वाले एक किलोमीटर राजमार्ग में प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हुआ।
इन जगहों पर भी चल रहा है निर्माण
चेन्नई, पुणे, जमशेदपुर, इंदौर, लखनऊ आदि शहरों में प्लास्टिक कचरे की सड़कें बनाई जा रही हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय की पांच लाख और अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में 50 किलोमीटर के दायरे में प्लास्टिक कचरे के लिए कलेक्शन सेंटर बनाने की योजना है।
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