Monday, April 6, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 472

श्रमदान से नहर की खुदाई में जुटे मजदूर

बांदा : बांदा जिले में मनरेगा के तहत काम नहीं मिलने पर करतल क्षेत्र की घरार नदी की श्रमदान से खोदाई करने वाले मजदूर अपनी इस मेहनत पर जिला प्रशासन द्वारा ठप्पा लगाए जाने के बाद अब नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव के मजरा माऊ सिंह के पुरवा में लगभग समतल हो चुकी नहर की खुदाई में जुट गए हैं। मजदूरों के अनुसार, सिंचाई विभाग की लापरवाही से नहर लगभग समतल हो चुकी है, जिससे उसके अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता और उनकी खेती बंजर होती जा रही है।
नरैनी क्षेत्र के नौगवां गांव के मजरा माऊ सिंह के पुरवा में नहर की खोदाई में श्रमदान (मुफ्त मेहनत) कर रहे मजदूर श्यामलाल ने रविवार बताया कि गुढ़ा कलां गांव से दिवली गांव तक जाने वाली इस छोटी नहर की सफाई कई वर्षों से नहीं हुई, जिससे अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता, परिणाम स्वरूप उनके उपजाऊ खेत बंजर भूमि में बदलते जा रहे हैं। इस मजदूर ने बताया कि मनरेगा में काम न मिलने पर खाली हाथ घर में बैठे थे। सोचा, नहर की खुदाई करें, जिससे टेल तक पानी पहुंचेगा और बच्चों की भूख मिटाने के लिए अनाज पैदा होगा।
गौरतलब है कि दो हफ्ते पूर्व करतल क्षेत्र के भंवरपुर गांव के 52 मजदूरों ने मनरेगा में काम न मिलने पर करीब करीब मृत हो चुकी घरार नदी की करीब दो किलोमीटर तक खोदाई कर उसे पानी से लबालब कर दिया था। इसके बाद ग्राम्य विकास विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने वहां जबरन ‘मनरेगा से कार्य’ होने का शिलापट गाड़ दिया है, जिससे मजदूरों और अधिकारियों के बीच सीधा टकराव है।
एक अन्य मजदूर रामस्वरूप ने बताया कि मजदूरों का हौसला बढ़ाने के लिए आस-पास के गांवों के मजदूर यहां भोजन सामग्री खुद दान कर जा रहे हैं, जिससे यहां श्रमदान कर रहीं महिलाएं नहर पटरी में ही सभी मजदूरों के लिए भोजन भी पकाती हैं। इन श्रमदानियों की टोली में दो दर्जन महिला मजदूर भी शामिल हैं।
इनमें से एक सुमित्रा ने कहा कि यदि हर खेत को पानी मिला तो फसल भी पैदा होगी, इससे मेरा मालिक (घर का मुखिया) मजदूरी करने कभी परदेश नहीं जाएगा। इस बारे में बांदा सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता शरद सिंह चौहान ने बताया कि श्रमदान से नहर खोदाई की सूचना मिलने पर शनिवार को विभाग के कर्मचारी कमलेश को कार्यस्थल भेजकर कई मजदूरों से फोन पर बात की गई है, उनका यह कार्य सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि हमने श्रमदान कर रहे मजदूरों को मजदूरी भुगतान करने का ऑफर दिया है, लेकिन वे (मजदूर) इसके लिए राजी नहीं है।

महिला क्रिकेट अलग खेल, अनावश्यक बदलाव ना करें: शिखा

नयी दिल्ली : भारत की वरिष्ठ तेज गेंदबाज शिखा पांडे महिला क्रिकेट को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए छोटी गेंद और छोटी पिच जैसे सुझावों को ‘अनावश्यक’ मानती हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से अपील की कि अधिक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए नियमों से ‘छेड़छाड़ नहीं’ करें।
झूलन गोस्वामी के बाद नयी गेंद की भारत की सबसे अच्छी गेंदबाजों में से एक शिखा ने न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन और भारत की उभरती हुई खिलाड़ी जेमिमा रोड्रिग्ज की मौजूदगी वाले आईसीसी के हाल के वेबिनार के संदर्भ में कई ट्वीट किए। इसी वेबिनार के दौरान कई तरह के सुझाव सामने आए थे।
भारतीय वायुसेना की अधिकारी 31 साल की शिखा ने लिखा, ‘‘महिला क्रिकेट की प्रगति/इसे अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए विभिन्न कई तरह के सुझावों के बारे में पढ़/सुन रही हूं। मेरा निजी तौर पर मानना है कि अधिकांश सुझाव अनावश्यक हैं।’’
भारत की ओर से 104 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 113 विकेट चटकाने वाली शिखा ने हल्की गेंद और 20 गज की पिच की तुलना 100 मीटर फर्राटा दौड़ से करके चीजों को समझाया। उन्होंने लिखा, ‘‘ओलंपिक 100 मीटर फर्राटा महिला धाविका पहले स्थान का पदक हासिल करने और पुरुष समकक्षों के बराबर समय निकालने के लिए 80 मीटर नहीं दौड़तीं।’’
शिखा ने लिखा, ‘‘इसलिए किसी भी कारण से पिच की लंबाई कम करना संदेहास्पद लगता है। साथ ही इससे एक साथ दो मुकाबलों का आयोजन भी नहीं हो पाएगा। ’’शिखा बाउंड्री छोटी करने के पक्ष में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कृपया सीमा रेखा छोटी मत कीजिए। हाल के समय में अपनी पावर हिटिंग से हमने आपको हैरान किया है, यह सिर्फ शुरुआत है, हम बेहतर होंगे। धैर्य रखिए। हम सभी कुशल खिलाड़ी हैं जो सुधार कर रही हैं।’’
इस भारतीय खिलाड़ी को यह आपत्तिजनक लगता है कि प्रगति हासिल करने के लिए मजबूत मार्केटिंग की जगह नियमों में बदलाव का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘खेल की अच्छी तरह से मार्केटिंग करके प्रगति की जा सकती है। दर्शकों को आकर्षिक करने के लिए नियमों में बदलाव की जरूरत नहीं है। ’’
शिखा ने कहा, ‘‘डीआरएस, स्निको, हॉटस्पॉट, अन्य तकनीकी चीजों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाए और दुनिया भर में कहीं पर भी खेले जाने वाले मैच का सीधा प्रसारण क्यों नहीं हो।’’
शिखा ने साथ ही कहा कि महिला और पुरुष क्रिकेट की तुलना नहीं की जानी चाहिए क्योंकि दोनों अलग हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कृपया करके महिला खेल की तुलना पुरुष खेल से मत कीजिए, इस मामले में महिला क्रिकेट की’’ शिखा ने मेलबर्न क्रिकेट क्लब में आस्ट्रेलिया के खिलाफ महिला विश्व टी20 फाइनल के संदर्भ में कहा, ‘‘हमें इसे बिलकुल अलग खेल की तरह देखने की जरूरत है। एक ऐसा खेल जिसे देखने के लिए आठ मार्च 2020 को 86174 लोग मौजूद थे और करोड़ों ने टीवी पर इसका सीधा प्रसारण देखा।’’

गूगल ने मतदान, चुनाव से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों को हटाया

वाशिंगटन : गूगल ने कहा कि उसने अमेरिका में नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर गलत जानकारी देने वाले एवं भ्रामक विज्ञापनों को अपने मंच से हटा दिया है। इन विज्ञापनों में से कुछ ने मतदान के लिए पंजीकरण करने के लिए लोगों से शुल्क लिया। वहीं, कुछ ने विपणन संबंधी लक्ष्य पूरा करने के लिए लोगों की निजी जानकारियां हासिल की। गैर-लाभकारी टेक कम्पनी ‘टेक ट्रांसपरेंसी प्रोजेक्ट’ ने इन विज्ञापनों की पहचान की है।
संगठन ने पाया कि ‘‘मतदान के लिए पंजीकरण’’, ‘‘मेल द्वारा मतदान’’ और ‘‘ मेरा मतदान स्थल कहां हैं’’ जैसे विज्ञापन लिंक उन वेबसाइट द्वारा निर्मित किए गए हैं, जो मतदान पंजीकरण के लिए शुल्क ले रहे हैं, लोगों की निजी जानकारियां हासिल कर रहें हैं या लोगों के ब्राउजर में अवांछित सॉफ्टवेयर डाल रहे हैं।
गूगल ने कहा कि उसके मंच पर ऐसे विज्ञापनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
गूगल की प्रवक्ता शैर्लेोट सिम्थ ने कहा, ‘‘ हम अपने मंच पर ग्राहकों को ऐसे अनुचित व्यवहार से बचाने को प्रतिबद्ध हैं। विशेषकर जब बात चुनाव से जुड़ी जानकारियों की हो।’

खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में वेब संगोष्ठी एवं काव्यपाठ

कोलकाता :  खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज की ओर से वेब संगोष्ठी एवं काव्यपाठ का आयोजन किया गया। इस वेब संगोष्ठी ‘आकाशदीप :एक मूल्यांकन ‘विषय पर विचार रखे गये। ‘आकाशदीप :एक मूल्यांकन ‘विषय पर विचार रखते हुए श्री शिक्षायतन कॉलेज की शिक्षिका डॉ रचना पांडे ने कहानी की रचना-प्रक्रिया और प्रयोजनीयता पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहानी के अर्थ तंतुओं को कई स्तरों पर खोला । कहानी के ऐतिहासिकता के साथ उन्होंने वर्तमान को भी जोड़कर देखने की दृष्टि प्रदान की ।  स्वागत भाषण देते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सुबीर कुमार दत्ता ने कहा कि कोरोना महामारी जैसे संकट के समय जब साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम सभागारों से वंचित हैं, तब हमारे कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम हमें आश्वस्त करता है। हिंदी विभाग के सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के साथ सभी प्रतिभागियों का मैं स्वागत करता हूँ। विभागाध्यक्ष डॉ शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि हमने पाठ्यक्रम में शामिल कहानी पर परिचर्चा का आयोजन इसलिए किया ताकि विद्यार्थी लाभांवित हो सकें। ऐसे आयोजनों का एक उद्देश्य यह भी है कि विद्यार्थियों में साहित्यिक और सांस्कृतिक अभिरुचि का विकास हो । इस अवसर पर नेहा ठाकुर, सिखा सिंह, साक्षी झा, प्रीति साव और ज्योति मिश्रा ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया । प्रो अल्पना नायक ने कहा कि ऐसे आयोजन के लिए मैं हिंदी विभाग को धन्यवाद देती हूँ । प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि यह आयोजन संवाद और सृजन का साझा मंच है । इस संगोष्ठी में प्रो. अरविंद मृधा, प्रो. तापसी घोष, प्रो. पायल नंदी, प्रो.सिउली विश्वास, प्रो कलावती कुमारी, डॉ विजया सिंह, मृत्युंजय श्रीवास्तव, श्रीराम निवास द्विवेदी, एकता गुप्ता सहित काफी संख्या में विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो राहुल गौड़ और संयोजन व धन्यवाद ज्ञापन प्रो मधु सिंह ने किया ।

यह आत्मनिर्भर होने का समय है…

साल के 6 महीने बीत गये और कोरोना काल का यह समय अब भी जारी है। पूरी दुनिया और विशेष रूप से हमारे देश में यह महामारी विकराल रूप धारण कर रही है मगर भारत की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। एक तरफ चीन को सबक सिखाना है तो दूसरी तरफ नेपाल भी परेशान करने लगा है। बड़ा अजीब सा समय है, मुश्किल है मगर हम इससे भी आगे निकलेंगे…लेकिन क्या दूसरों पर निर्भर रहकर आगे बढ़ा जा सकता है..क्या दूसरों के कन्धों पर चढ़कर आसमान छू लेना स्थायी समाधान है? थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि यह हो सकता है मगर फिर एक और सवाल है…आखिर कब तक? एक समय के बाद आपको अपने दम पर खड़ा होना ही पड़ता है…इसका अर्थ यह नहीं है कि आप दूसरों की ओर पीठ घुमाकर बैठ जाएँ मगर अपनी जरूरतें खुद पूरी कर लेना ही एक रास्ता है….आज हम उसी मोड़ पर खड़े हैं। 59 चीनी ऐप पर प्रतिबन्ध लगने से हो सकता है कि आप बहुत निराश हों मगर क्या ये सच नहीं है कि निराशा की जगह अपने देश में इनको विकसित किया जाए…अपनी राह खुद निकाली जाए। हमारा तो मानना है कि गूगल, फेसबुक और व्हाट्सऐप का भी देसी विकल्प हम जितनी जल्दी खोज लें..हमारे लिए उतना ही अच्छा है…बाकी ये तो शुरुआत है…आगे – आगे देखिए होता है…अनलॉक का मतलब लापरवाही मत समझ बैठिएगा…अबकी तो यही कहना है…सुरक्षित रहिए और आत्मनिर्भर भी। अगर आत्मनिर्भर होते, रोजगार होता तो हमारे श्रमिक भाइयों को ऐसे कठिन  दिन न देखने पड़ते और न हम सुशान्त सिंह राजपूत जैसे प्रतिभाशाली युवा को खोते…इसलिए यही समय है औऱ यह आत्मनिर्भर होने का ही समय है।

टिकटॉक पर प्रतिबन्ध : शेयर चैट को मिले हर घंटे 5 लाख डाउनलोड

अब माई गव इंडिया भी शेयर चैट पर
कोलकाता : देश में 59 चीनी ऐप पर प्रतिबन्ध लगाने का लाभ देसी ऐप्स को मिल रहा है। लोग अब उनकी ओर जा रहे हैं। इसी तरह शेयर चैट की लोकप्रियता भी इस प्रतिबन्ध के बाद तेजी से बढ़ी है। अब तक इसे प्रति घंटे 5 लाख लोगों ने डाउनलोड किया है और महज 36 घंटे के भीतर 15 मिलियन डाउनलोड्स हुए हैं। इस वृद्धि से उत्साहित शेयर चैट के सीओओ तथा सह संस्थापक फरीद अहसान ने इस प्रोत्साहन के लिए जनता का आभार व्य़क्त किया। शेयर चैट पर इस प्रतिबन्ध के समर्थन में 1 लाख पोस्ट देखे गये और 1 मिलियन लोगों ने इसे पसन्द किया…आधा मिलियन लोगों ने इसे व्हाट्सऐप पर साझा किया। शेयर चैट से अब माई गव इंडिया भी जुड़ गया है जिससे अब यह शेयर चैट के 60 मिलियन उपयोगकर्ताओं से 15 भारतीय भाषाओं में जुड़ सकेगा। शेयर चैट को 1 बिलियन व्हाट्स ऐप शेयर मिलते हैं और आज प्रयोगकर्ता इस पर 25 मिनट रोज बिताते हैं। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक शेयर चैट के 150 मिलियन से अधिक पंजीकृत यूजर्स हैं और हर महीने 60 मिलियन सक्रिय प्रयोगकर्ता हैं। शेयर चैट के निदेशक (जन नीति) बर्ज्स वाई मालू ने भी इस प्रगति पर खुशी जतायी।

मेडी बडी – डॉक्स ऐप ने मनाया डॉक्टर्स डे

कोलकाता : हमारे जीवन में चिकित्सकों की बड़ी भूमिका है और कोरोना काल मे तो ये कोरोना योद्धा बनकर आए हैं। 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे पर डॉक्टरों के प्रति आभार जताते हुए मेडी बडी डॉक्स ऐप ने # ‘डॉक्स यू रॉक्स’ अभियान चलाया। इसमें भाग लेने वालों को गिफ्ट वाउचर जीतने का मौका दिया गया है। इस अवसर को ध्यान में रखकर बनाये गये फ्रेम का उपयोग भी बहुत से लोगों ने किया है। वे इस फ्रेम के साथ अपनी प्रोफाइल तस्वीर अपडेट कर रहे हैं। # ‘डॉक्स यू रॉक्स ट्विटर और इन्स्टाग्राम पर भी लोकप्रिय हो गया है। मेडीबडी डॉक्स ऐप के सह संस्थापक तथा सीईओ सतीश कन्नन ने कहा कि पिछले कुछ महीने तनाव में गुजरे और इस दौरान चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। यह अभियान उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है। धन्यवाद के साथ डॉक्स ऐप मेडी बडी चिकित्सकों को उपहार भी देगा।

एचआईटीके के पूर्व छात्र ने रोबोटिक्स में पायी उपलब्धि

कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एचआईटीके) के पूर्व छात्र अयन दत्त को रोबिटिक्स के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिली है। डॉ. अयन दत्त बीटेक-सीएसई बैच 2011 के विद्यार्थी थे। हाल ही में 27 मार्च, 2020 को अयान और उनकी टीम के प्रोजेक्ट ने मल्टी-रोबोट सिस्टम का उपयोग करके सुरक्षित कृषि सूचना संग्रह पर नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) द्वारा आधा मिलियन डॉलर का फंड दिया गया है। इस परियोजना का नेतृत्व उत्तरी फ्लोरिडा विश्वविद्यालय करेगा और इसे सेंट्रल फ्लोरिडा विश्वविद्यालय द्वारा समर्थित किया जाएगा। अयान वर्तमान में स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग, नॉर्थ फ्लोरिडा विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं। उनका पिछला शोध प्रोजेक्ट नासा ईपीएससीओआर स्टिमुली 2016-17 में भी प्रकाशित हुआ था।

संशोधित शैक्षणिक कैलेंडर जल्द ही लागू करेगी यूजीसी

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के लिए जारी होगी यह समय सारिणी 

अक्टूबर तक स्थगित रह सकता है नया शैक्षणिक सत्र

नयी दिल्ली : उच्च शिक्षा नियामक नियामक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या यूजीसी के संशोधित होने की उम्मीद है। यूजीसी के दिशा-निर्देशअंतिम वर्ष की परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर के बारे में जल्द ही निर्देश आ सकता है। गत 24 जून को इसकी उम्मीद जाहिर की गयी थी  रिपोर्टों ने अधिकारियों के हवाले से कहा था कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में जुलाई में आयोजित होने वाले अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा, कोविड – 19 के मामलों में स्पाइक और नए सत्र की शुरुआत को देखते हुए रद्द किए जाने की संभावना है। अक्टूबर तक टाले जाने की सम्भावना भी है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री रमेश पोखरियाल ‘ निशंक ‘ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से इंटरमीडिएट और टर्मिनल सेमेस्टर परीक्षा के लिए पहले जारी किए गए दिशानिर्देशों और अकादमिक कैलेंडर को बढ़ते हुए कोविड -19 मामलों के मद्देनजर फिर से जारी करने को कहा था।

अधिकारियों के अनुसार, एक पैनल, जिसे यूजीसी द्वारा स्थापित किया गया है और हरियाणा विश्वविद्यालय के कुलपति आरसी कुहाड़ के नेतृत्व में दिशानिर्देशों को फिर से जारी करने और वैकल्पिक विकल्पों के साथ आने के लिए कहा गया है। इस बीच, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और हरियाणा ने सभी विश्वविद्यालयों ने परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है। विद्यार्थियों को इन राज्यों में उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नत किया जाएगा। “मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संशोधित दिशानिर्देशों का आधार छात्रों, शिक्षकों के कर्मचारियों की स्वास्थ्य और सुरक्षा होगी । विशेषज्ञ समिति का मानना ​​है कि संशोधित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार अधिकांश विश्वविद्यालयों में जुलाई में होने वाली परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाना चाहिए और प्रत्येक छात्र के पिछले प्रदर्शन के आधार पर अंतिम परीक्षा के लिए अंक प्रदान किए जाते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा , “जो छात्र पिछली परीक्षाओं के आधार पर उन्हें दिए गए अंतिम अंकों से खुश नहीं हैं, उन्हें बाद में परीक्षा देकर अपने स्कोर को सुधारने का मौका दिया जा सकता है ।” “इसी तरह, नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, जिसे पहले अगस्त से दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए और सितंबर से फ्रेशर्स के लिए योजना बनाई गई थी, के भी अक्टूबर तक स्थगित होने की संभावना है। विचार-विमर्श जारी है और इस संबंध में अंतिम दिशा-निर्देश जल्द ही घोषित किए जाएंगे। नए दिशानिर्देश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त फीडबैक और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ व्यापक विचार-विमर्श पर आधारित हैं। गौरतलब है कि 16 मार्च से स्कूल और कॉलेज बंद हैं। सरकार ने पहले कोविड – 19, अनलॉक दिशा-निर्देशों में कहा था कि जुलाई में हितधारकों के साथ बैठक करने के बाद स्कूलों को फिर से खोलने पर फैसला लिया जाएगा।

(स्त्रोत – एनडीटीवी)

शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – ज्योति मिश्रा

प्रतियोगिता – काव्य संगीत

शिक्षण संस्थान – खुदीराम बोस सेन्ट्रल कॉलेज