Friday, April 3, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 465

हम पंछी उन्मुक्त गगन के

“पराधीन सपनेहु सुख नाही।”दूसरों के ऊपर निर्भर व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं हो सकता। स्वतंत्रता प्रिय व्यक्ति कभी भी गुलामी का जीवन नहीं जी सकता।जीवन में वह अनेकों दुखों, तकलीफों से गुजरता है किंतु किसी के समक्ष अपना मस्तक नहीं झुकाता।

शिक्षिका – नीलम सिंह

हम पंछी उन्‍मुक्‍त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाऍंगे।

हम बहता जल पीनेवाले
मर जाएँगे भूखे-प्‍यासे,
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से,

स्‍वर्ण-श्रृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं
तरू की फुनगी पर के झूले।

ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नील गगन की सीमा पाने,
लाल किरण-सी चोंचखोल
चुगते तारक-अनार के दाने।

होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी,
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी।

नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्‍न-भिन्‍न कर डालो,
लेकिन पंख दिए हैं, तो
आकुल उड़ान में विघ्‍न न डालो।

400 प्रवासी परिवारों की आर्थिक मदद के फिर सामने आये सोनू सूद

उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के अधिकारियों से इस काम के लिए किया संपर्क
नयी दिल्ली : फिल्म अभिनेता सोनू सूद कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों एवं जरूरतमंदों को घर पहुंचाने के लिए जी जान से जुटे रहे। वह अब तक हजारों मजदूरों, छात्रों और जरूरतमंदो को उनके घर पहुंचा चुके हैं। वहीं मुश्किल समय में मदद करने पर बहुत से लोग सोनू सूद की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ भी किया। जिसकी वजह से वह लगातार खबरों में छाए रहे। इसी बीच एक बार फिर से सोनू सूद ने उन 400 प्रवासी मजदूरों और कामगारों के परिवार मदद करने का जिम्मा लिया है जो अपने प्रियजनों को खो चुके हैं या फिर घर वापस आने के दौरान यात्रा में घायल हुए थे। इसके साथ ही साथ परिवार की आर्थिक मदद सहित उन्होंने बच्चों की पढ़ाई का खर्चा भी उठाने की बात की है।
मीडिया खबरों के अनुसार, सोनू सूद अपनी टीम और अपनी दोस्त नीती गोयल के संग मिलकर एक “घर भेजो (#GharBhejo) ” अभियान चलाया है। इस कैंपेन के तहत वह उन परिवार वालों की मदद करेंगे जिन्होंने अपने प्रियजनों को घर वापिसी के दौरान खो चुके हैं या यात्रा में घायल हो गए थे। इतना ही सोनू का यह कैपेंन उन प्रवासी दैनिक दिहाड़ी मजदूरों की भी मदद करेगा जो जिनके पास अपना परिवार चलाने के लिए कोई रोजगार नहीं हैं। सोनू ऐसे लोगों को चिन्ह्रित कर उनके पास जाकर खूद दो महीने का सहयोग देंगे जब तक उन्हें कोई रोजगार नहीं मिल जाता।
सोनू सूद और उनकी टीम उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के अधिकारियों के संपर्क में है और मृतक और घायल मजदूरों और कामगारों की जानकारी मांगी है। इस जानकारी में उनके परिवारों का पता और बैंक की जानकारी भी शामिल होंगी, जिससे की डायरेक्ट उनके अकाउंट में आर्थिक सहायता राशि को ट्रांसफर किया जा सकेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स का तो ये भी दावा है कि सोनू सूद इन प्रवासी मजदूरों के बच्चों की शिक्षा में, खेती के लिए और घरों के निर्माण के लिए भी मदद भी कर रहे हैं। एक इंटरव्यू के दौरान सोनू सूद ने इस पहल के बारे में बात करते हुए बताया, ‘मैंने मृतक या घायल प्रवासियों के परिवारों को सुरक्षित भविष्य के लिए मदद करने का फैसला किया है। मुझे लगता है कि उनका समर्थन करना मेरी व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।’

अमेरिकी नौसेना में पहली अश्वेत महिला के लड़ाकू विमान पायलट का स्वागत

किंग्सविले (अमेरिका) : अमेरिकी नौसेना ने पहली बार नौसेना में किसी अश्वेत महिला के लड़ाकू विमान पायलट बनने का स्वागत किया है। अमेरिकी नौसेना ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘इतिहास रचते हुए।’ लेफ्टिनेंट जेजी मेडलाइन स्वीगल ने नौसैन्य फ्लाइट स्कूल पूरा किया और इस महीने के अंत में उन्हें फ्लाइट अधिकारी का बैज मिलेगा जिसे ‘विंग्स ऑफ गोल्ड’ के नाम से जाना जाता है।
नौसेना वायु प्रशिक्षण कमान ने ट्वीट किया कि स्वीगल नौसेना की पहली ज्ञात अश्वेत महिला टैकएयर पायलट हैं। ‘स्टार्स एंड स्ट्राइप्स’ अखबार के मुताबिक स्वीगल वर्जीनिया के बुर्के की रहने वाली हैं और उन्होंने 2017 में यूएस नवल एकेडमी से स्नातक किया है। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें टेक्सास के किंग्सविले में रेडहॉक्स ऑफ ट्रेनिंग स्कवाड्रन 21 की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
खबरों के अनुसार स्वीगल की इस उपलब्धि से 45 वर्ष पहले 1974 में रोजमैरी मरीनर लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली महिला बनी थीं।

बार-बार हो सकेगा इस्तेमाल एन 95 फिल्टर वाला सिलिकॉन रबर मास्क

कई तरह से कर सकेंगे स्टेरेलाइज
लंदन : कोरोनावायरस से बचाव के लिए वैज्ञानिकों ने सिलिकॉन रबर से एक दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला मास्क बनाया है। इसमें एन 95 फिल्टर लगाया गया है जो वायरस को रोकने में पूरी तरह कारगर है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ओपन में प्रकाशित शोध के अनुसार इन मास्कों को ऐसे डिजाइन किया गया है कि इन्हें स्टेरेलाइज कर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
आसानी से होता है तैयार
नया मास्क सिलिकॉन रबर से बना है और इसका उत्पादन इंजेक्शन मोल्ड में किया जाता है। इसमें पारंपरिक मास्कों की तुलना में एन 95 मटीरियल का बहुत कम इस्तेमाल होता है। मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ता जियोवानी ट्रावरसो ने कहा, हम एक ऐसा मास्क बनाना चाहते थे जिसका बार-बार प्रयोग किया जा सके और जिसे कई तरीकों से स्टेरेलाइज किया जा सके। शोधकर्ताओं ने सिलिकॉन रबर का इस्तेमाल किया क्योंकि यह पदार्थ काफी टिकाऊ होता है। तरल सिलिकॉन रबर को किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। यह मास्क मशीन में तेजी से बन सकते हैं।
कई स्टेरेलाइलेशन प्रक्रियाओं का किया प्रयोग
शोधकर्ताओं ने इन मास्कों पर स्टेरेलाइजेशन की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रयोग किया। इसमें स्टीम के जरिए इन्हें स्टेरेलाइल करना, ओवन का प्रयोग करना और आइसोप्रोपाइल एल्कोहल में डूबना शामिल था। हर प्रक्रिया में मास्क को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा। बर्मिंघम वुमेन अस्पताल के 20 प्रतिभागियों पर इसका परीक्षण किया गया। चेहरे के फिट टेस्ट में मास्क सफल हो चुका है और अब वायरस को रोकने की इसकी क्षमता पर गहन अध्ययन किया जा रहा है।

करें असली-नकली सैनिटाइजर की पहचान

पूरी दुनिया कोरोनावायरस महामारी के प्रकोप से परेशान है। इस समय इस बीमारी से बचाव के लिए बार-बार साबुन से हाथ धोना या अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से हाथ साफ करने का सुझाव बार-बार विशेषज्ञों द्वारा दिया जा रहा है। बाजार में दुनियाभर के सैनिटाइजर मौजूद हैं और लोगों को समझ नहीं आ रहा कि किस सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। कई लोग बीमारी की आड़ में नकली सैनिटाइजर बनाने का काम भी धड़ल्ले से कर रहे हैं। आइए आपको कुछ तरीके बताते हैं जिससे आप जान सकेंगे की सैनिटाइजर असली है या नकली।
टॉयलेट पेपर पर परीक्षण करें
– सैनिटाइजर की परख करने के लिए शौचालय में इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट पेपर या टिश्यू पेपर का उपयोग करें। इस पेपर के ऊपर कलम की मदद से एक छोटा गोला पेपर के बीचोंबीच बना दें। अब इस गोले के ऊपर हैंड सैनिटाइजर की कुछ बूंदे डालें। अगर इस गोले की स्याही फैल जाती है तो समझ लीजिए आपके सैनिटाइजर में मिलावट है और यह आपके हाथों को पूरी से साफ करने में सक्षम नहीं है। अगर आपका सैनिटाइजर असली होगा तो इस गोले की स्याही बिल्कुल नहीं फैलेगी। कुछ देर के लिए पेपर गीला होगा और फिर तुरंत सूख जाएगा।
हेयर ड्रायर परीक्षण
हैंड सैनिटाइजर को एक कटोरी में निकाल लें। अब इसे हेयर ड्रायर से सुखाएं। अगर आपका हैंड सैनिटाइजर असली है तो वह 3 से 5 सेकंड में सूख जाएगा। यदि यह सैनिटाइजर नकली हुआ तो इतने कम समय में नहीं सूखेगा और कटोरी में बचा रहेगा।
आटे से परीक्षण करें
हैंड सैनिटाइजर की गुणवत्ता की जांच आप आटे के जरिए भी कर सकते हैं। इसके लिए एक कटोरी में एक चम्मच आटा लीजिए। इस आटे में थोड़ा-सा हैंड सैनिटाइजर डालिए। अब इन दोनों को अच्छी तरह मिलाकर गूथने की कोशिश कीजिए। अगर आपका हैंडसेनिटाइजर असली है तो यह आटा एक साथ आकर गोला नहीं बनेगा बल्कि बिखरा-बिखरा रहेगा। लेकिन अगर आपका सैनिटाइजर नकली है तो यह आटे को ठीक उसी तरह गूंथ देगा जैसे कि आटा पानी में गुथता है।
ये हैंड सैनिटाइजर ही खरीदें
उन्हीं हैंड सैनिटाइजर का चयन करें जिनमें 60 फीसदी अल्कोहल हो। इसे कम अल्कोहल वाले सैनिटाइजर हाथों को साफ करने में प्रभावी साबित नहीं होते। वहीं, 60 फीसदी से ज्यादा अल्कोहल वाले सैनिटाइजर से हाथों की त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। इससे त्वचा में जलन और लाल चकत्ते हो सकते हैं।

(साभार – लाइव हिन्दुस्तान)

सरबजीत फेम रंजन सहगल का निधन, 36 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

नयी दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता रंजन सहगल का गत शनिवार को निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक 36 साल के रंजन के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। सिन्टा (CINTAA) ने एक्टर को याद करते हुए ट्वीट में शोक व्यक्त किया। रंजन 2010 से सिन्टा के सदस्य रहे थे।
रंजन कई शोज जैसे ‘सबकी लाडली बेबो’, ‘भाग्य’ और ‘रिश्ता डॉट कॉम’, ‘क्राइम पेट्रोल’ में काम कर चुके हैं। ‘रिश्तों से बड़ी प्रथा’ में रंजन ने बतौर लीड एक्टर काम किया था।
रंजन सहगल के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होंने कई फिल्मों में बतौर सहायक कलाकार काम किया था। फिल्म सरबजीत में उन्होंने रविंद्र पंडित का किरदार निभाया था। इसके अलावा वह ‘फोर्स’, ‘कर्मा’, ‘माही एनआरआई’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके थे। वह पंजाबी इंडस्ट्री में भी सक्रिय रहे थे।
बता दें कि रंजन से पहले ‘क्राइम पेट्रोल’ एक्टर शफीक अंसारी 10 मई को इस दुनिया को अलविदा कहकर चले गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक अंसारी का निधन कैंसर की वजह से हुआ था। शफीक अंसारी को पेट का कैंसर था और वह कई सालों से इससे जूझ रहे थे।

सूरत की दुकान में बिक रहा है हीरे का बना लखटकिया मास्क

सूरत : कोरोना वायरस के चलते देशभर में हर किसी के लिए अब फेस मास्क पहनना अनिवार्य हो गए है, ऐसे में सूरत के एक जूलरी शॉप मालिक को हीरे लगे हुए मास्क बेचने का आइडिया आया। वह अपनी दुकान में ऐसे मास्क बेच रहे हैं, जिसकी कीमत डेढ़ लाख से लेकर चार लाख तक की है। आभूषण की दुकान के मालिक दीपक चोकसी का कहना है कि उन्हें यह आइडिया उस ग्राहक से मिला, जिसके घर पर शादी थी। वह हमारी दुकान पर आया और दूल्हा-दुल्हन के लिए यूनिक मास्क की मांग की।
चोकसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि जैसे ही लॉकडाउन हटा तो उनके एक ग्राहक जिनके घर पर शादी थी, हमारी दुकान में आएं और उन्होंने दूल्हे और दूल्हे के लिए अलग तरह के मास्क की मांग की। इसके बाद हमने अपने डिजाइनरों को मुखौटे बनाने का काम दिया, जिसे ग्राहकों ने बाद में खरीदा। इसके बाद हमने अलग-अलग कीमतों के मास्क बनाए। उन्होंने कहा कि इन मास्क को बनाने के लिए हमने सोने के साथ प्योर डायमंड और अमेरिकन डायमंड का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा कि मास्क बनाने के लिए अमेरिकी हीरे के साथ पीले सोने का इस्तेमाल किया गया है और इसकी कीमत 1.5 लाख है। एक अन्य मास्क जो सफेद सोने और रियल हीरे से बना है और इसकी कीमत 4 लाख रुपये है। दुकान के मालिक ने कहा कि इन मास्क को बनाने के लिए सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन मास्क से हीरे और सोने को ग्राहकों की इच्छा के अनुसार निकाला जा सकता है और इसका उपयोग अन्य आभूषणों को बनाने में किया जा सकता है।
हाल ही में, पुणे में शंकर कुराडे नाम के एक व्यक्ति ने खुद को कोविड-19 महामारी के बचानो के लिए 2.89 लाख रुपये के सोने का एक मास्क बनाया था।

आकाश चोपड़ा ने रवींद्र जडेजा को चुना ऑल टाइम बेस्ट भारतीय फील्डर

नयी दिल्ली : आकाश चोपड़ा ने रवींद्र जडेजा को ऑल टाइम बेस्ट भारतीय फील्डर चुना है। हालांकि, उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने रवींद्र जडेजा को ऑल टाइम बेस्ट भारतीय फील्डर चुना है। हालांकि, उन्होंने ऑल टाइम बेस्ट उन छह भारतीय फील्डरों का नाम लिया, जिन्हें खुद उन्होंने देश के लिए खेलते हुए देखा है। अपने ऑफिशियल यूट्यूब चैनल ‘आकाशवाणी’ पर चोपड़ा ने कहा, ”वह (जडेजा) पूरी तरह से शानदार हैं, उनके पास एक रॉकेट आर्म है, उनके पास अभी विश्व क्रिकेट में सबसे अच्छी आर्म है। आप बस उनकी ग्राउंड कवरेज को देखें, वह स्लिप पर फील्डिंग करते हुए सर्वश्रेष्ठ नहीं है, लेकिन यह कुछ मायने नहीं रखता है।”
हाल ही में रवींद्र जडेजा 21वीं शताब्दी के भारत के सबसे बहुमूल्य टेस्ट खिलाड़ी बने हैं। क्रिकेट की ‘बाइबल’ समझी जाने वाली पत्रिका विजडन ने ऑल राउंडर रवींद्र जडेजा को 21वीं सदी का भारत का सबसे बहुमूल्य खिलाड़ी घोषित किया है। 2012 में पदार्पण करने के बाद से जडेजा ने क्रिकेटर के रूप में लगातार ऊंचाइयों को छुआ है। पिछले दो सालों में भारतीय टीम में उनका बल्ले, गेंद और फील्डिंग से अमूल्य योगदान रहा है।
विजडन ने खिलाड़ी क्षमता आंकने के लिए क्रिकविज रेटिंग का इस्तेमाल किया है और उनकी रेटिंग 97.3 बैठती है, जो श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के बाद दूसरे नंबर पर है। रवींद्र जडेजा के बाद भारत के ऑल टाइम बेस्ट फील्डरों में आकाश चोपड़ा ने सुरेश रैना, मोहम्मद कैफ, युवराज सिंह, कपिल देव और विराट कोहली को चुना है।
विराट कोहली और कपिल देव के बारे में बात करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा, ”जैसा कि आप देख ही सकते हैं कि विराट कोहली ने एक खिलाड़ी के रूप में किस तरह विकास किया है। आपने उन्हें फील्डर के रूप में भी बढ़ते देखा है। वह वहां फील्डिंग के लिए होना चाहते हैं और यही बात उन्हें सुपर स्पेशल बनाती है।”
उन्होंने आगे कहा, ”सभी ने कपिल देव को 1983 वर्ल्ड कप के फाइनल में विवियन रिचर्ड्स का कैच लेते हुए देखा है। उनके हाथ शानदार और काफी चुस्त थे।” युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ को भारतीय क्रिकेट में सबसे प्रमुख नामों में देखा जाता है, जिन्होंने भारतीय फील्डिंग में एक नए युग की शुरुआत की।
इन दोनों का अक्सर पहले 15 ओवरों में तीस गज के घेरे के अंदर टॉप फील्ड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और इसके बाद उन्हें स्लॉग ओवरों के दौरान आउटफील्ड पर फील्डिंग करते देखा जाता था। अब यही विराट कोहली और रवींद्र जडेजा के साथ भी देखा जा सकता है। दोनों ही व्हाइट बॉल क्रिकेट में स्लॉग ओवर के दौरान बाउंड्री रोप पर फील्डिंग करते हैं।

पाश्चुराइज मां का दूध कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित, शोध में दावा

टोरंटो : ताजा शोध में दावा किया गया है कि यदि कोराना संक्रमित मां के दूध को 30 मिनट के लिए 62.5 डिग्री सेल्सियस पर पाश्चुराइज कर दिया जाए तो वह बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है। यह भी कहा गया कि ऐसा करने से आंचल के दूध में मौजूद कोरोना वायरस निष्क्रिय हो जाते हैं।
कनाडा के मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित शोध में कोरोना संक्रमित महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे खुद के शिशुओं को स्तनपान कराना जारी रखें। कनाडा में यह मानक देखभाल है कि अस्पताल में बहुत कम वजन के साथ जन्मे शिशुओं को पाश्चुराइज्ड स्तन का दूध उपलब्ध कराया जाए, जब तक कि उनकी अपनी मां के दूध की आपूर्ति पर्याप्त ना हो जाए।
ऐसे में समस्या यह आई कि यदि कोई कोरोना संक्रमित महिला अपने आंचल का दूध दान करे तो क्या होगा। इस पर शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसे दूध को 62.5 डिग्री पर पाश्चुराइज करना चाहिए,क्योंकि ऐसा करने से कोरोना के अलावा एचआईवी और हेपटाइटिस जैसे वायरस भी निष्क्रिय हो जाते हैं। इसके बाद इस दूध को किसी ऐसे स्वस्थ बच्चे को दिया जा सकता है जो उसका ना हो।

रद्द होने के बावजूद विम्बलडन 620 खिलाड़ियों को बाँटेगा इनामी राशि

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी के कारण रद्द होने के बावजूद विम्बलडन 620 खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि के रूप में 1.25 करोड़ डॉलर बांटेगा। ऑल इंग्लैंड क्लब ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की।बीमा प्रदाता कंपनी के साथ सलाह मश्विरे के बाद क्लब के अधिकारियों ने कहा कि मुख्य ड्रॉ में भाग लेने वाले 256 में से प्रत्येक खिलाड़ी को 31,000 डालर की राशि दी जाएगी।
वहीं जो 224 खिलाड़ी क्वालीफाइंग में भाग लेते, उन्हें प्रत्येक को 15,600 डॉलर की राशि मिलेगी। ऑल इंग्लैंड क्लब के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड लुईस ने कहा कि चैम्पियनशिप के रद्द होने के तुरंत बाद हमने अपना ध्यान इस बात पर लगा दिया कि हम उन लोगों की कैसे मदद कर सकते हैं जो विम्बलडन को आयोजित करने में सहायता करते हैं।
इसके साथ ही 120 खिलाड़ी युगल स्पर्धाओं में हिस्सा लेते। प्रत्येक को 7,800 डॉलर, व्हीलचेयर स्पर्धा में भाग लेने वाले 16 खिलाड़ियों को 7,500 डॉलर और ‘क्वैड (चार खिलाड़ियों की) व्हीलचेयर स्पर्धा में भाग लेने वाले चार खिलाड़ियों को 6,200 डॉलर दिए जाएंगे।