Thursday, April 9, 2026
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तकनीक की दुनिया से

नयी दिल्ली : तकनीक की दुनिया हमेशा बदलती है और हर बार इसमें नया अपडेट होता रहता है। ऐसी ही कुछ खबरें आपके लिए हम दे रहे हैं –
व्हाट्सऐप में आए दो नए फीचर –सबसे पहले बात करते हैं हम सभी के पसंदीदा ऐप यानी व्हाट्सऐप की। तो इस सप्ताह कम्पनी ने इसमें दो नए फीचर्स को जोड़ा है। इसमें पहला है ग्रुप कॉलिंग के लिए नयी रिंगटोन। यानी अब आप  व्हाट्सऐप पर ग्रुप कॉल उसकी रिंगटोन से ही पहचान लेंगे। हालांकि, कोई यूजर वन-टू-वन कॉलिंग यानी सिंगल कॉल करता है, तब पुरानी रिंगटोन ही बजेगी। इसके साथ, कम्पनी ने व्हाट्सऐप में एक साथ कई नए स्टीकर्स को अपडेट किया है। ये सभी एनिमेटेड स्टीकर्स हैं। इसके लिए आपको गूगल प्ले स्टोर पर जाकर ऐप को अपडेट करना होगा।

गूगल पे पर मिलेंगी नई पेमेंट सर्विस – दुनिया की शीर्ष टेक कम्पनियों में शुमार गूगल भारत में अपने पेमेंट प्लेटफॉर्म गूगल पे को एक्सपेंड कर रहा है। एंड्रॉयड पुलिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब कंपनी अपने ग्राहकों को कार्ड और NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन) सिस्टम के जरिए पेमेंट विकल्प दे सकती है। यह फीचर अभी एक्सिस बैंक क्रेडिट/डेबिट और एसबीआई क्रेडिट/डेबिट कार्ड्स तक ही सीमित है। रिपोर्ट के मुताबिक, कस्टमर को पेमेंट के लिए अपना कार्ड सेटअप करने से पहले वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी करनी होगी। एक बार कार्ड रजिस्टर होने के बाद गूगल पे ऐप के जरिए NFC इनेबल हो जाएगा।
ट्विटर की यूजर्स को सुरक्षा चेतावनी – आप ट्विटर पर सक्रिय हैं, लेकिन ऐप को अब तक अपडेट नहीं किया है तब जल्दी से इसे अपडेट कर लें। दरअसल, माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने एड्रॉयड यूजर्स को सुरक्षा चेतावनी दी है। ऐप में एक बड़े सिक्योरिटी लूप होल्स का पता चला है। इसके वजह से एंड्रॉयड 8 और एंड्रॉयड 9 यूजर्स प्रभावित हो रहे हैं। इस समस्या के चलते यूजर्स के निजी सन्देश भी एक्सपोज हो रहे हैं। अब ट्विटर ने प्रॉब्मल को पॉइंट आउट करके उसे फिक्स कर दिया है। ऐप को गूगल प्ले स्टोर से अपडेट किया जा सकता है।
आरोग्य ऐप में नया फीचर – कोरोना संक्रमण के मामलों को रोकने के लिए सरकार द्वारा लॉन्च किए गए आरोग्य ऐप में अब नया फीचर अपडेट किया गया है। नया फीचर बिजनेस और आर्गेनाइजेशन की मदद के लिए पेश किया गया है। इसकी मदद से संस्थान अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जानकारी हासिल कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए पहले कर्मचारियों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। नयी ओपन एपीआई सर्विस में कर्मचारियों के डेटा गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होगा। नए फीचर के जरिए आर्गेनाइजेशन अपने कर्मचारियों की रियल टाइम हेल्थ स्टेट्स स्वास्थ्य के अन्य अपडेट को हासिल कर पाएंगे।
टेलीग्राम ने शुरू की वीडियो कॉलिंग सर्विस – आप टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल करते हैं तब ये जानकारी आपके लिए है। दरअसल, टेलीग्राम अब ऐप के साथ डेस्कटॉप पर भी वीडियो कॉलिंग का फीचर शुरू कर रहा है। फिलहाल इसका फायदा बीटा वर्जन या ऐप के 7.0 वर्जन पर मिलेगा। कम्पनी ने कहा कि आप अपने कॉन्टैक्ट के प्रोफाइल पेज से वीडियो कॉल शुरू कर सकते हैं और वॉयस कॉल के दौरान किसी भी समय वीडियो को स्विच ऑन या ऑफ कर सकते हैं। टेलीग्राम को वॉट्सऐप का बड़ा कॉम्टिटर माना जाता है। हालांकि, दोनों के यूजर्स की संख्या में बड़ा अंतर है।
रेडमी नोट 8 प्रो यूजर्स को मिला नया सॉफ्टवेयर – शाओमी ने रेडमी नोट 8 प्रो को के लिए अपने लेटेस्ट सॉफ्टवेयर MIUI 12 का अपडेट जारी कर दिया है। इस अपडेट को अपने फोन में डाउनलोड करने के लिए आपको इस फोन की सेटिंग्स में जाना है। उसके बाद आपको सिस्टम अपडेट में जाना है और उसके अंदर आपको MIUI 12 अपडेट का विकल्प मिलेगा। आप उसे क्लिक करेंगे और उसके बाद एक प्रोसेस आपके फोन में होगा। आपको फोन बंद होगा फिर खुलेगा और तब आपका फोन इस नए लेटेस्ट सॉफ्टवेयर से अपडेट हो चुका है। इस फोन को अपडेट करते वक्त आपके एक बात का ध्यान रखें कि आपके फोन की बैटरी 50% से ज्यादा चार्ज हो।
नौकरी चाहिए तो गूगल करेगा मदद – गूगल ने हाल ही में अपने नौकरी लिस्टिंग ऐप Kormo Jobs को भारत में रोलआउट किया है। कोरमो जॉब्स ऐप को पहली बार 2018 में बांग्लादेश में लॉन्च किया गया था और फिर 2019 में इंडोनेशिया में इसकी सर्विस शुरू हुई थी। कोरमो जॉब्स ऐप में नौकरियों की लिस्ट है। ये यूजर्स को अपना डिजिटल सीवी बनाने की सर्विस भी देता है। गूगल के ये नया जॉब प्लेटफॉर्म माइक्रोसॉफ्ट के लिंक्डइन के साथ भारतीय के जॉब सर्च पोर्टल्स जैसे नौकरी और टाइम्सजॉब्स को कड़ी टक्कर दे सकता है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

बेटियों की बात करते हैं तो बहनों के बारे में भी सोच लीजिए

पिछले महीने बेटियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला आया था…वह यह कि पैतृक सम्पत्ति पर उनका अधिकार भी बेटों की तरह माना जाएगा मतलब उनको भी हिस्सा मिलेगा। कहने की जरूरत नहीं है कि सुप्रीम कोेर्ट का यह निर्णय एक झटके की तरह था और इसे लेकर तंज भरी प्रतिक्रियाएँ आयीं। घर – परिवार के टूटने की आशंका भी जतायी गयी और इससे भी हैरत भरी बात थी कि इन प्रतिक्रियाओं का विरोध बहुत कम या न के बराबर देखा गया…खुद लड़कियाँ भी सामने नहीं आयीं। हम यह बात इसलिए भी कर रहे हैं कि अब जल्दी ही दुर्गा पूजा आऱम्भ होगी तो देवी पूजा का आडम्बर आरम्भ होने वाला है। हम बात जब स्त्रियों की कर रहे हैं तो सीधा सम्बन्ध माँओं और बेटियों और बहुत हुआ तो पत्नी से जुड़ेगा…मगर जिस रिश्ते पर हमारी नजर नहीं जाती…वह एक रिश्ता है बहन का..।

बहनों को लेकर ज्यादा बात नहीं होती। छवि उसकी बेचारी की है जिसे हर समय संरक्षण की जरूरत है मगर वह अधिकार माँग सकती है या उसका अपना एक व्यक्तित्व हो सकता है। इस बात को पचाना भारतीय समाज के लिए कठिन है। परिवारों को उसका मुखर होना नहीं भाता और यही कारण है कि देश की शीर्ष अदालत में बेटियों के हक में जब फैसला आया तो पिता के रूप में तो पुरुषों ने स्वीकार किया मगर भाइयों के रूप में इसे खारिज भी कर दिया….एक ही समाज के दो चेहरे हैं…बात बड़ी है गहरी भी….आगे – आगे देखते जाइए कि क्या होता है…।
कोरोना ने बहुत कुछ छीना और हमारे पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को ले गया,..उनको हमारा नमन…शुभजिता को पढ़ते रहिए और जुड़ते रहिए…कहने को बहुत कुछ है…कहते रहेंगे…।

कठिन समय में उम्मीद न छोड़ें, जरूरतमंदों की मदद करें

पायल वर्मा उद्यमी हैं, प्राणिक हीलिंग प्रोफेशनल और व्यक्तित्व निर्माण प्रशिक्षक हैं और फैशन की दुनिया से भी जुड़ी हैं। इसके साथ ही वे इन दिनों अपने सामाजिक कार्यों के कारण चर्चा में हैं। कोरोना काल के बीच जहाँ वे प्राणिक हीलिंग सिखाकर जहाँ लोगों का तनाव कम करने में लगी हैं, वहीं बेस्ट फ्रेंड्ज सोसायटी की ब्रांड अम्बास्डर के रूप में वे अम्फान पीड़ितों की मदद कर रही है। अभिनेत्री हैं, कोरियोग्राफर भी हैं। शुभजिता जीवन योद्धा के रूप में ओजस्विनी स्तम्भ में एनिग्मा की संस्थापक पायल वर्मा से बात की, पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश –

प्र. आप अपने बारे में जानकारी दें ?

उ. मेरा नाम पायल वर्मा है। एनिग्मा की संस्थापक हूँ, व्यक्तित्व प्रशिक्षण और प्राणिक हीलिंग सिखाया जाता है। विद्यार्थी मेडिटेशन यानी ध्यान करते हैं। थेरेपी और उपचार भी होता है। अभिनेत्री, कोरियोग्राफर हूँ। फैशन इंडस्ट्री के शोज में जाती हूँ। फिलहाल मैं बेस्ट फ्रेंड सोसायटी की ब्रांड अम्बास्डर हूँ जो समाज सेवा के काम से जुड़ा हुआ है।
प्र. कोविड – 19 के समय में काम करना कितना कठिन हुआ है, खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए?
कोविड -19 का समय सबके लिए कठिन है पर महिलाएँ घर भी देखती हैं और कामकाजी महिलाएँ अपना काम भी देखती हैं। वर्क फ्रॉम होम रहने पर थोड़ा सन्तुलन बिगड़ता है। महिलाओं ने इसका सामना किया है। मुझे भी यह सन्तुलन बनाना पड़ा है।

प्र. सामाजिक कार्य या समाज के लिए कुछ करना कितना महत्वपूर्ण है ?
पेशेवर प्राणिक हीलर के रूप में समाज में जागरुकता लाने की कोशिश करती हूँ। अपनी खुशियाँ बाँटने का सन्देश देने की कोशिश करती हूँ। दूसरों के लिए कुछ करना अच्छा अनुभव है और आप देखेंगे कि इससे आपकी जिन्दगी और बेहतर होती है।

प्र. आप किस तरह से इस तरह के काम में लगी हैं ?
एन्गिमा के जरिए मैं तनाव दूर करने में लोगों की मदद करती हूँ। कोरोना के समय में लोगों का तनाव दूर करने में मदद कर रही हूँ। बेस्ट फ्रेंड सोसायटी की ब्रांड अम्बास्डर के रूप में फंड एकत्रित करने में मदद करती हूँ। अम्फान परियोजना से जुड़ी हूँ, इस संस्था के साथ हमने सुन्दरवन इलाके में जरूरतमंद लोगों को राहत पहुँचाने की कोशिश की है। सामाजिक कार्य, अनुदान, ध्यान सिखाना, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सचेत करना, यह कुछ छोटे – छोटे कार्य हैं जिनके जरिए मैं दूसरों की मदद करने की कोशिश करती हूँ।

प्र. कोविड – 19 में अनलॉ़क के बाद किस तरह से काम पर लौटा जाए कि सावधानी बनी रहे?आपकी योजना क्या है ?
अनलॉक की प्रक्रिया तो पूरे देश में आरम्भ हो चुकी है और कुछ सावधानी के बारे में सब जानते हैं। अनलॉक तो ठीक है पर कोरोना नहीं गया अब तक तो मैं तो यही कहूँगी कि जहाँ तक सम्भव हो, वर्क फ्रॉम होम करें…मैं खुद भी यही कर रही हूँ। अगर निकलना बहुत जरूरी हो तो पूरी सावधानी बरतें। दूरी बनाए रखना, मास्क पहनना, सैनेटाइटर रखना और घर आते ही नहा लेना, अपने मास्क को हर बार इस्तेमाल के बाद धोना न भूलें। बाहर जाना है तो जाइए मगर पूरी सावधानी के साथ।

प्र. आप क्या सन्देश देना चाहेंगी ?
हर अन्धेरे के बाद सबेरा होता है। आज हम सब एक ही स्थिति में फँसे हैं तो स्थिति जरूर बदलेगी।। उम्मीद मत छोड़िए, सावधानी बरतिए और आगे बढ़िए और अगर आप चाहें तो जरूरत पड़ने पर पेशेवर तरीके से मदद कर सकते हैं। अगर आप बेस्ट फ्रेंडज सोसायटी के जरिए जरूरतमंदों को मदद पहुँचाना चाहते हैं तो भी आप मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं।

बच्चों के साथ अधिक समय बिताएँ माता – पिता

बच्चों को पढ़ाना एक मुश्किल काम है और लॉक डाउन के दौरान यह मुश्किल काम और मुश्किल हो गया है। ऐसे में एक माँ ऐसी भी है जिसने इस मुश्किल काम को आसान करने की कोशिश की और डिजिटल पैरेंटिंग, होम स्कूलिंग की अवधारणा को आगे बढ़ा रही हैं। हम बात कर रहे हैं उद्यमी श्रद्धा फोगला की, जो अपने ब्लॉग टूमंकीजएंडमी ब्लॉग के जरिए लाखों अभिभावकों की समस्या को आसान करने में जुटी हैं। स्टेम एडुकेशन को आगे ले जाना उनका उद्देश्य है। शुभजिता की ओजस्विनी श्रद्धा फोगला आप भी मिलिए –

प्र. आप अपने बारे में बताइए, मतलब टू मंकीज एंड मी कैसे शुरू किया आपने?

मैंने टू मंकीज दिसंबर 2018 को शुरू किया था शुरू करने से पहले मैं हमेशा से अपने बच्चों के साथ एक्टिविटीज़ करती थी ,उनको उनके तरीक़े से पढ़ाती थी और नए तरीक़े से समझाने का प्रयत्न करती थी। इसी कारण से मेरे दोस्त और परिवार वाले जिन के छोटे बच्चे थे,मुझसे मदद माँगा करते थे । मैंने अपनी ब्लॉग की शुरुआत इसी कारण से की ताकि मैं दूसरे अभिभावकों की मदद कर सकूँ और जो भी मैं जानती हूँ और सिखा सकती हूँ उसको डॉक्यूमेंट करू यानी वह दस्तावेज के रूप में सुरक्षित किया जा सके।

प्र. हम पढ़ाने के एक पारम्परिक तरीके से बन्धे हैं…ऐसे में होम स्कूलिंग को लेकर अभिभावकों की प्रतिक्रिया कैसी रही ?

होम स्कूलिंग एक ज़रूरत बन चुकी है क्योंकि लॉकडाउन में बच्चों को अच्छे से पढ़ाने का और कोई तरीक़ा नहीं है। बड़े बच्चे ऑनलाइन स्कूल में बैठकर पढ़ते हैं परंतु छोटे बच्चे को स्क्रीन के सामने बैठाकर पढ़ाना एक मुश्किल काम है। छोटे बच्चे ज़्यादा देर तक स्क्रीन के सामने बैठकर फ़ोकस नहीं कर पाते हैं, ध्यान केन्द्रित करना उनके लिए कठिन होता है क्योंकि उनका अटेंशन स्पैन बहुत कम होता है छोटे बच्चे अध्यापिकाओं द्वारा दिए गए इंस्ट्रक्शन यानी निर्देशों का भी अच्छी तरह पालन नहीं कर पाते। इसी कारण से माता-पिताओं को उनके साथ बैठकर उनको समझाना और उनको पढ़ाना ज़रूरी है। इसी कारण से हमारे होम स्कूल यानी घर में ही स्कूल के तरीक़े माता- पिताओं को अच्छे लग रहे हैं और अभिभावक उनको फॉलो कर रहे हैं और मुझे सन्देश भेजते हैं कि यह तरीक़े उनके बच्चों को पढ़ाई करने में मदद कर रहे हैं।

प्र. आम तौर पर भारतीय महिलाएँ तकनीक के नाम पर व्हाट्स ऐप ही इस्तेमाल करती हैं और कई ऐसी हैं जो ये भी नहीं इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं..तो आप इनकी मदद कैसे करना चाहेंगी ?

आज, प्रत्येक महिला व्हाट्सऐप का उपयोग करना जानती है और यदि उन्हें अपने व्हाट्सऐप पर एक लिंक प्राप्त होता है जो उन्हें यू ट्यूब पर निर्देशित करता है तो वे वीडियो देखना पसंद करते हैं और यदि लिंक उन्हें किसी वेबसाइट पर भेजा जाता है, तो वे सीखते हैं कि यह क्या है और यदि वे पाते हैं फायदेमंद चीजें, वे इसे खरीदते हैं। इसलिए हमने सोचा कि अपनी होमस्कूलिंग यूनिट को बढ़ावा देने के लिए और अधिक से अधिक संख्या में लोगों तक पहुंचने के लिए, हमने अपनी वेबसाइट पर एक शेयर बटन बनाया है, जिसे व्हाट्सएप पर भी लोगों के साथ साझा किया जा सकता है और वे सीधे वेबसाइट पर जाकर ब्लॉग, वीडियो ढूंढ सकते हैं, और बच्चों को शिक्षित करने के लिए होमस्कूलिंग यूनिट खरीद सकते हैं।

प्र. बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने के लिए क्या किया जा सकता है ?

सबसे पहले, अगर हम चाहते हैं कि बच्चे पढ़ाई में रुचि विकसित करें, तो हमें उन्हें पढ़ाई के लिए मजबूर करने से रोकना चाहिए। भारत में, अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई में सर्वश्रेष्ठ होने की इच्छा रखते हैं और इसके कारण, माता-पिता अपने विचारों को थोपने की कोशिश करते हैं और अपने बच्चों पर दबाव बनाना शुरू कर देते हैं। अगर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा इंजीनियर बने, तो शुरू से ही वे बच्चों को पढ़ाई के लिए मजबूर कर रहे हैं, कि आपको विज्ञान को एक धारा के रूप में लेना होगा। इन चीजों से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते हैं, लेकिन पढ़ाई में रुचि उनमें फीकी पड़ने लगती है।
उदाहरण के लिए, आज मेरे बच्चे छोटे हैं। बड़ा एक 5 साल का है और छोटा 2 साल का है। मैं अपने छोटे बच्चे को ABCD और संख्या सिखा रही हूँ। अधिकांश माता-पिता क्या करते हैं कि जब वे अपने बच्चों को नंबर सिखाते हैं, तो वे चाहते हैं कि बच्चे 1 या 2 घंटे पढ़ाई करें, लेकिन बात यह है कि ऐसे छोटे बच्चों का ध्यान कम रहता है। चूँकि ऐसे छोटे बच्चों के लिए ध्यान देने की अवधि कम होती है, इसलिए 2-3 साल के बच्चे के लिए इसका मुश्किल से 10-12 मिनट का ध्यान होता है, लेकिन जब से हम इसके बारे में अनजान होते हैं, हम बच्चों की लंबी अवधि के लिए अध्ययन करते हैं और जब बच्चा मना कर देता है इतने लंबे समय तक बैठने के लिए, माता-पिता उन्हें डांटते हैं, उन्हें मजबूर करते हैं और पूरे नंबर चार्ट को पूरा करने पर हमारे विचार लागू करते हैं। माता-पिता अक्सर बच्चों को रिश्वत देते हैं कि यदि आप ऐसा करते हैं, तो हम आपको चॉकलेट या ऐसा कुछ देंगे। हमें अपनी मानसिकता को बदलने और यह समझने की जरूरत है कि बच्चों का ध्यान कम रहता है। बढ़ती उम्र के साथ, बच्चों का ध्यान अवधि 3-4 मिनट बढ़ जाती है। एक 2 साल के बच्चे का ध्यान अवधि 10 मिनट है, 3 साल के बच्चे का ध्यान 14-15 मिनट और इसी तरह यह बढ़ता जाता है।
अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ाई में रुचि पैदा लें, तो हमें पढ़ाई को खेल बनाने की जरूरत है। किताबों के सामने बैठना, प्रत्येक वाक्य को रेखांकित करना बच्चों के लिए बहुत उबाऊ और नीरस हो जाता है। इसे रोमांचक बनाने के लिए, आपको अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए नए तरीकों और तकनीकों पर काम करने की आवश्यकता है। माता-पिता को अपने रोजमर्रा के जीवन से उदाहरण लेने की जरूरत है जैसे कि यदि आपका बच्चा एक बादाम खा रहा है, तो आप उनसे पूछ सकते हैं कि आपको 4 या 6 बादाम की जरूरत है? आप इसे मेरे कटोरे से गिनें और ले जाएं। इस तरह, आपका बच्चा आसानी से नंबर सीखेगा। रोजाना उदाहरण लेने से बच्चे को बढ़ने और तेजी से सीखने में मदद मिलेगी। हम, 2monkeysandme, बच्चों के लिए सीखने को मज़ेदार बनाते हैं और इसी तरह हमारी होमस्कूलिंग यूनिट को भी उसी तरीके से डिज़ाइन किया गया था। हम अपने Instagram, Facebook या अपनी वेबसाइट पर जो गतिविधियाँ दिखाते हैं, वे सभी ऐसे तरीके से डिज़ाइन किए गए हैं जहाँ बच्चे मज़े करते हैं और सीखते हैं, एक खेल के रूप में।

प्र. लॉकडाउन का असर महिलाओं पर कितना पड़ा है?

लॉकडाउन ने हर व्यक्ति को हर जगह प्रभावित किया था, चाहे वह पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे। बच्चों ने वयस्कों की तुलना में इस लॉकडाउन को आसानी से अपना लिया है क्योंकि बच्चे आमतौर पर किसी भी स्थिति में आसानी से ढल जाते हैं। पुरुष भी इस लॉकडाउन से निपटने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि घर से काम भी थकाऊ काम है। महिलाओं के लिए, यह कठिन हो गया है, यानी लॉकडाउन से पहले हमारे पास हमारे घरों के लिए घरेलू मदद थी। वे हमारे रोजमर्रा के कामों में हमारी मदद करते थे, चाहे वह कपड़े धोना, वाहनों को धोना या बर्तन धोना। अब, ज्यादातर, घर की महिलाओं को यह करना है क्योंकि मुझे लगता है कि हम अभी भी एक पुरुष-प्रधान समाज में रहते हैं और भारत के कई क्षेत्रों में, घर के पुरुष अभी भी घर के काम करने में भाग नहीं लेते हैं। हालाँकि ऐसे लोग हैं, जहाँ घर के कामों में भी पुरुष मदद करते हैं, वहाँ महिलाओं को थोड़ी राहत है, लेकिन जिन घरों में पुरुष मदद नहीं करते हैं, वहाँ काम का बोझ महिलाओं के लिए दो-तीन बार बढ़ गया हैं।
महिलाओं को अपने घर की देखभाल करनी होती है, अगर महिला कामकाजी है तो उन्हें दफ्तर का काम भी देखना होगा  , उन्हें अपने बच्चों पर भी अधिक समय देना होगा क्योंकि ऑनलाइन स्कूल शुरू हो गए हैं। इसके साथ उन्हें बच्चों को उनका होमवर्क करवाना होगा, उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं का प्रारूप समझना होगा और परिवार के लिए खाना भी बनाना होगा। इसलिए, महिलाओं पर मानसिक और शारीरिक रूप से दबाव और तनाव बढ़ गया है।

प्र. आपकी आगे की योजना क्या है ?

मैं बच्चों को स्टेम एडुकेशन (STEM education) के माध्यम से पढ़ाना पसन्द करती हूं और इसलिए हम हर दिन एक activity लेते हैं और उस पर विचार-मंथन करते हैं और बच्चों को शिक्षित करने के लिए नई चीजों को देखते हैं।
मैं न केवल इसे स्वयं करती हूं, मैं अपने बड़े बच्चे को  brainstorming के लिए भी शामिल करती हूँ और फिर हम चर्चा करते हैं कि हमें आज क्या करना चाहिए और फिर उन्हें निष्पादित करने का प्रयास करना चाहिए।
कई बार, हम कुछ गतिविधियाँ नहीं कर पाते हैं तो कुछ गतिविधियों को कर पाना सम्भव होता है।  व्यक्तिगत रूप से मैं   स्टेम एडुकेशन  पर ध्यान केंद्रित करती हूं और मैं वास्तव में स्टेम एडुकेशन को विकसित करना चाहती हूं क्योंकि यह भारत में वास्तव में कम देखा जाता है और इस पर ध्यान भी नहीं दिया गया है। बहुत सारे लोग इस प्रकार की शिक्षा से काफी अनजान हैं और इसे समझते भी नहीं हैं
आज भी, पारंपरिक स्कूल एक ऐसी प्रणाली का पालन करते हैं जहां वे केवल किताबों से गुजरते हैं, उन्हें रट्टा सीखते हैं और फिर वे परीक्षाएं देते हैं। शिक्षा के इस तरीके से, कोई यह नहीं जानता कि बच्चा अपने ज्ञान को विकसित करने में सक्षम है या नहीं। इस प्रणाली में वे सभी मामले जो बच्चे को प्राप्त होते हैं, वे अंक हैं। अच्छे अंकों से शिक्षक और अभिभावक खुश होते हैं। वे यह भी नहीं जानते कि बच्चे ने कुछ सीखा या नहीं। मैंने भी इतिहास का अध्ययन किया है लेकिन ईमानदारी से, मुझे नहीं पता कि मैंने क्या अध्ययन किया है। मैंने एक दिन रट्टा, अगले दिन मैंने जो कुछ पढ़ा था उसे भूल गयी। मैं इस तरह की शिक्षा में विश्वास नहीं करती और इसीलिए मैं स्टेम एडुकेशन को प्रोत्साहित करती हूं और इसे अधिक से अधिक ऊंचाइयों तक ले जाना चाहती हूं और प्रत्येक घर तक पहुंचना चाहती हूं और उन्हें समझाना चाहती हूं कि शिक्षा के कई और अधिक प्रभावी तरीके हैं जो कि प्रभावी हैं।
इस प्रकार की शिक्षा बच्चे को जल्दी और लंबे समय तक सीखने में मदद करेगी। मैं भारत में STEM शिक्षा का चेहरा बदलना चाहती हूं और इसे लाइमलाइट में लाना चाहती हूं। मैं एक किताब भी लिख रही हूं, जो शिक्षा से संबंधित नहीं है, बल्कि बच्चों के खानपान पर है। मैं और भी किताबें लिखना चाहती हूं और अपना ज्ञान दूसरों को भी मैं बाथना चाहती हूं। मुझे और अच्छा करने की उम्मीद है और हां, इस समय के लिए, यह मेरी कार्य योजना है।

प्र. आप अभिभावकों को क्या सन्देश देना चाहेंगी?

मैं लोगों को बताना चाहती हूं कि मेरा मानना है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बड़ा होकर इंजीनियर बने, तो आप बचपन से ही अपने बच्चे के दिमाग को उस तरीके से ढाल सकते हैं। एक बच्चे को ढालने से मेरा मतलब है कि उनके साथ एक स्केल, पेन्सिल और इरेज़र के साथ दौड़ने से नहीं, बल्कि अपने रोजमर्रा के जीवन में उन गतिविधियों को करें जो उनके विज्ञान या इंजीनियरिंग की ओर निर्देशित करें। आपको इंजीनियरिंग के योग्यता के लिए उनकी रचनात्मकता, तर्क, STEM-आधारित शिक्षा, समस्या सुलझाने के कौशल पर काम करना होगा।
मैं माता-पिता को ये सुझाव दूंगी कि वे खुद इन विषयों पर पढ़ें। इंटरनेट एक उपकरण है जिसका हमें उपयोग करना चाहिए क्योंकि हम किसी भी विषय पर कोई भी जानकारी पा सकते हैं। माता-पिता को इन विषयों को स्वयं पढ़ना चाहिए, उन विषयों पर खुद को शिक्षित करना चाहिए और बच्चों को शिक्षित करने का सही तरीका सीखना चाहिए। मैं माता-पिता को सलाह दूंगी कि अपने बच्चों के साथ जितना समय बिता सके, उतना बिताये। जितना अधिक बच्चा अपना समय माता-पिता के साथ बिताएगा, उतना ही वे सीखेंगे और एक बच्चा किसी भी तीसरे व्यक्ति की तुलना में अपने माता-पिता से ज्यादा सीखता है।
विशेष रूप से इस लॉकडाउन के दौरान, माता-पिता को अपने बच्चों को अधिक से अधिक समय देना चाहिए और उन्हें उन चीजों पर शिक्षित करना चाहिए जो बच्चों द्वारा अपने माता-पिता से सबसे अच्छी तरह से सीखे जाते हैं चाहे वह संस्कार हो या बड़ों का सम्मान करना या प्रकृति का सम्मान करना या पढाई करना।

बलात्कार!

  • रेशमी सेनशर्मा

बलात्कार!
क्या केवल एक शब्द ही है
जिसे सुनकर
लोग चौंक जाते हैं

बलात्कार!
क्या केवल एक जुर्म ही है
जिसे करने पर
सजा होती है
हंगामा मच जाता है
कुछ दिनों के लिए
और फिर लोग
सब भूल जाते हैं

बलात्कार तो एक प्रश्न है
जीवन और मृत्यु के बीच
मर्दों की मर्दानगी पर
और
उन मांओं की कोख पर
जिन्होंने
इन्हें पैदा किया है

बलात्कार का तीर
नारी की इज्जत को तो
घायल करता ही है
बलात्कारी की मां की कोख को भी
कलंकित करता है

बलात्कार!
एक ऐसा अभिशाप है जो
पुरुष को बनाता है
नपुंसक….

हल्की सी मुस्कुराहटें…

– प्रीति साव

ये हल्की सी मुस्कुराहटें
चिन्ताओं से मुक्ति का
देती है एहसास
न होती
किसी की तलाश
न कोई चाह
ये मुस्कुराहटें भी
कितनी अजीब है।
यह देती है
सुकून ,
यह खो देती है
खुद को
जिंदगी की महफ़िलों में,
दिल में
जगाती है उमंग
जीने की,
ये हल्की सी मुस्कुराहटें ।
यह भी कितनी
बेवजह होती है न,
फिर भी छिपी होती है
इसके पीछे
कोई न कोई वजह।
वजह, वजह क्या है?
वजह है,
मेरी जिन्दगी की
बीते हुए कुछ लम्हें,
वजह है
किसी की कही हुई बातें ,
वजह है
उन जगहों, उन गलियों से
गुज़रे हुए
कुछ अच्छी यादें ,
इन्हीं सब वजहों के पीछे छिपी है,
मेरी ये
हल्की सी मुस्कुराहटें।।

शुभजिता शॉपिंग बैग – अमेजन के नये ऑफर

अमेजन लॉन्च पैड

Amazon Launchpad | Innovations from Indian entrepreneur | Up to 40% OFF

भारतीय उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पाद, 40 प्रतिशत तक की छूट के साथ। अतिरिक्त 40% तक छूट | स्वास्थ्य से संबंधित सामान। अतिरिक्त 30% तक छूट | निजी देखभाल। अतिरिक्त 50% तक छूट | सबसे नए गैजेट में अतिरिक्त 65% तक छूट | आवश्यक घरेलू वस्‍तुएं। अतिरिक्त 60% तक छूट | कपड़े और एक्सेसरी

 

सैमसंग गैलेक्सी टैब एस 7

Samsung Galaxy Tab S7 | 8MP+5MP primary camera with 8000mAh lithium-ion battery

11 इंच का यह टैब है। एलसीडी डिस्प्ले है। 6 जीबी रैम, 128 जीबी स्टोरेज है और 1 साल की वारंटी के साथ यह आता है जो कि फोन के लिए है और बॉक्स एक्सेसरीज पर 6 माह की वारंटी है। 8 मेगा पिक्सेल और 5 मेगा पिक्सल प्राइमरी कैमरे के साथ आता है। इसमें 8000 एम एच लिथियम आयन बैटरी है जो 45 डब्ल्यू टाइप -सी, फास्ट चार्जर के साथ आती है।

 

बोट का एडिक्ट हल्का पोर्टेबल वायरलेस स्पीकर

Just launched – Edict powered by Boat | ESP01 Lightweight Portable Wireless Speaker with 5W Engaging Sound

ESP01 शक्तिशाली 5W आकर्षक ध्वनि के लिए 45 मिमी चालक से सुसज्जित है
इसकी पावर पैक्ड 1200mAh की बैटरी 4 घंटे के प्लेबैक के साथ प्लेटाइम में विस्तारित भोग को सुनिश्चित करती है
ESP01 EDR के साथ नवीनतम ब्लूटूथ v5.0 के साथ तत्काल वायरलेस कनेक्टिविटी का समर्थन करता है।
कैरी स्ट्रैप के साथ इसका लाइटवेट कॉम्पैक्ट डिज़ाइन बेहतर पोर्टेबिलिटी प्रदान करता है ताकि आप अपनी आवाज़ को कहीं भी ले जा सकें।

ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के अलावा, आप अपनी आवाज़ को AUX केबल के माध्यम से भी कनेक्ट कर सकते हैं।

स्पीकर को IPX4 पानी और छप प्रतिरोध के साथ चिह्नित किया गया है ताकि आपको पूर्ण लापरवाह सुनने का समय मिल सके।

इसका TWS फीचर आपको दो ESP01s कनेक्ट करने और एक साथ संगीत खेलने और अधिक प्रभाव पैदा करने के लिए एक में फोर्ज करता है।आप इसके बिल्ट-इन माइक के माध्यम से सहज हाथों से मुक्त संचार में भी भाग ले सकते हैं।

 

Mi नोटबुक होरिज़न एडिशन 14 Intel कोर i5-10210U 10th Gen पतला और हल्का लैपटॉप, ग्रे(स्लेटी)

Mi Notebook Horizon edition | starting at INR 54,999

लैपटॉप प्रोसेसर: 10th Gen Intel कोर i7-10510U प्रोसेसर, 1.8 GHz बेस स्पीड, 4.9 GHz अधिकतम स्पीड, 4 कोर, 8 थ्रेड। लैपटॉप डिस्प्ले: Horizon डिस्प्ले|14-इंच (1920X 1080 ) फुल HD एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, NVIDIA MX350 2GB GDDR5 ग्राफिक्स

  • लैपटॉप में ऑपरेटिंग सिस्टम: Windows 10 Home ऑपरेटिंग सिस्टम | प्री-इनस्टॉल किया गया सॉफ्टवेयर: Office 365 – एक महीने की ट्रायल सदस्यता लैपटॉप की डिज़ाइन और बैटरी: मजबूत मेटल बॉडी | पतला और हल्का लैपटॉप | लैपटॉप का वज़न 1.35kg | बैटरी लाइफ़: 10 घंटे तक। मेमोरी स्पेक्स (लैपटॉप): 8GB DDR4-2666MHz RAM और स्टोरेज: 512 GB PCIE Gen 3×4 NVMe SSD। इस कॉम्बो पैक में दो आइटम होते हैं और उन्हें अलग से डिलीवर किया जा सकता है
  • लैपटॉप बॉक्स के अंदर: नोटबुक, पावर एडाप्टर, पावर कॉर्ड, यूजर मैनुअ। लैपटॉप ऑडियो: स्टीरियो स्पीकर + DTS ऑडियो प्रोसेसिंग | पोर्ट: USB 3.1 – 2 पोर्ट, USB 2.0 – 1 पोर्ट, USB टाइप C – 1, HDMI आउट -1 और 3.5 mm जैक। वेबकैम स्पेक्स: 720p हाई रेसोल्यूशन | हल्का वज़न | USB प्लग और प्ले। वारंटी: लैपटॉप और वेबकैम दोनों के लिए खरीदारी की दिनांक से 1 साल की निर्माता वारंटी

 

 

 

 

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भवानीपुर कॉलेज के प्रोफेसर ने गूगल शिक्षा में प्राप्त किया सर्टिफाइड ट्रेनर सर्टिफिकेट

कोलकाता :  भवानीपुर कॉलेज के बी.कॉम विभाग के प्रोफेसर विवेक पटवारी प्रथम फैकल्टी हैं जिनको गूगल शिक्षा में सर्टिफाइड ट्रेनर सर्टिफिकेट प्राप्त किया है जो बहुत ही गौरव की बात है। चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी प्रो. पटवारी की कलकत्ता विश्वविद्यालय के पैटर्न पर सात पुस्तकों का लॉप्वाइंट पब्लिकेशन से प्रकाशित भी हुई हैं। मैथमेटिक्स और स्टेस्टिक में केलकुलेटर और शॉर्ट कट ट्रिक्स में आपका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता पूनम पटवारी और पवन कुमार पटवारी को देते हैं जिनका आशीर्वाद सदैव मिला है। साथ ही कॉलेज के भूतपूर्व कोआर्डिनेटर स्वर्गीय डॉ दिव्येष शाह को समर्पित किया जिन्होंने प्रो पटवारी को प्रोत्साहित किया था। कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह और कोऑर्डिनेटर, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी और सभी शिक्षाक शिक्षक गणों ने शुभकामनाएं दीं। यह जानकारी डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी।