Thursday, April 9, 2026
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कोविड-19 के दौरान शेयर बाजारों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

नयी दिल्ली : कोविड-19 महामारी के दौरान शेयर बाजारों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के दौरान घर के खर्च में योगदान देने तथा वेतन में कटौती और छंटनियों की वजह से महिलाएं अब शेयर बाजारों में रुचि ले रही हैं।
इसके अलावा बैंकों की मियादी जमा (एफडी) पर ब्याज दरें कम हो रही हैं, जिसके मद्देनजर महिलाओं बचत के अन्य विकल्पों पर विचार कर रही हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें से ज्यादातर महिलाएं पहली बार शेयर बाजारों में निवेश कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या गृहणियों की है।
शेयरखान बाय बीएनपी परिबा के निदेश शंकर वैलाया ने कहा, ‘‘लॉकडाउन के दौरान शेयर बाजारों में खुदरा भागीदारी बढ़ी है। यह बात महिलाओं पर भी लागू होती है। महिलाएं अब एफडी पर ब्याज में कटौती के मद्देनजर निवेश के अन्य विकल्पों पर विचार रही हैं।’’ उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान एक लाभ यह हुआ कि महिलाओं ने डिजिटल समाधानों के जरिये पूंजी बाजार को लेकर अपनी जानकारी को गहरा किया है।
ऑनलाइन ब्रोकरेज कंपनी अपस्टॉक्स ने कहा कि अप्रैल से जून, 2020 के दौरान महिलाओं द्वारा खोले गए खातों में इससे पिछली तिमाही की तुलना में 32 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इनमें से 70 प्रतिशत महिलाएं पहली बार शेयर बाजारों में निवेश कर रही हैं। ब्रोकरेज कंपनी की महिला ग्राहकों में से 35 प्रतिशत गृहणियां हैं।
अपस्टॉक्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवि कुमार ने कहा, ‘‘वेतन में कटौती, नौकरियों में छंटनी जैसे कारणों से अब महिलाएं भी परिवार के खर्च में कुछ योगदान करना चाहती हैं। इस वजह से उनका शेयर बाजारों के प्रति आकर्षण बढ़ा है।’’
अपस्टॉक्स के अनुसार 74 प्रतिशत महिला ग्राहक विशाखापद्यत्तनम, जयपुर, सूरत, रंगा रेड्डी, नागपुर, नासिक, गंटूर जैसे दूसरी और तीसरे श्रेणी के शहरों से हैं।
5 पैसा.कॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश गगदानी ने कहा कि महिला निवेशक अब अपने पैसे का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर रही हैं। पूर्व में ज्यादातर महिलाएं शेयरों में निवेश करने से कतराती थीं, लेकिन अब सुगम प्रौद्योगिकी तथा बाजार के बारे में आसानी से जानकारी उपलब्ध होने की वजह से उनका शेयर बाजारों के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

अरुण मिश्रा : कई बड़े मामलों और विवादों से जुड़ा उच्चतम न्यायालय का प्रतिष्ठित नाम

नयी दिल्ली : हाल के वर्षों में उच्चतम न्यायालय के सबसे प्रभावी न्यायाधीशों की बात करें तो उनमें न्यायतमर्ति अरुण कुमार मिश्रा का नाम प्रमुखता से आता है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर अदालत की अवमानना के मामले में एक रुपये के जुर्माने का मामला हो या उनके द्वारा दिए गए अन्य फैसले, उनका नाम अकसर मीडिया की सुर्खियों में रहा।
तीन सितम्बर 1955 को वकीलों के परिवार में जन्मे न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा के पिता हरगोविंद मिश्रा जबलपुर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश थे। वह दिसंबर 1977 में न्यायाधीश नियुक्त हुए थे और जुलाई 1982 में पद पर रहते उनका निधन हुआ था। अरुण मिश्रा के भाई विशाल मिश्रा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश हैं। उनकी पुत्री भी दिल्ली उच्च न्यायालय में वकील हैं और उनके परिवार में कई रिश्तेदार नामी वकील हैं।
यहाँ यह जान लेना महत्वपूर्ण होगा कि कानून के जानकारों के परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने विज्ञान में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई की लेकिन उनकी स्वाभाविक रुचि कानून में ही थी, इसलिए उन्होंने बाद में कानून की पढ़ाई की।
उन्होंने 1978 से 1999 के बीच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में वकालत की। इस दौरान वह संवैधानिक, दीवानी, औद्योगिक, सेवा संबंधी और आपराधिक मामलों में प्रैक्टिस किया करते थे। 1998 में वह 43 वर्ष की आयु में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने और वकीलों के हक में कई महत्वपूर्ण कार्य किए।
उल्लेखनीय है कि लगभग 21 वर्ष की वकालत के दौरान वह मध्य प्रदेश में ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय से जुड़े रहे और वहां के छात्रों को कानून पढ़ाते रहे।
पच्चीस अक्टूबर 1999 को वह दिन आया जब उन्हें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और इसके साथ ही उन्होंने ‘माई लॉर्ड’ कहना छोड़ दिया तथा दूसरे वकील उन्हें ‘माई लॉर्ड’ बुलाने लगे। वह 2010 में राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और 2012 में वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। 2014 में केन्द्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद वह उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम की सिफारिश पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा गत दो सितंबर को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हुए। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद पर रहने के दौरान वह कई बार विवादों और आलोचनाओं के घेरे में रहे। कई अति संवेदनशील मामले उनकी अदालत में सूचीबद्ध किए जाने को लेकर भी कई बार सवाल उठाए गए और कुछ मामलों पर उनके फैसलों पर भी उंगली उठी।
न्यायाधीश के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा ने हजारों मामलों में फैसला सुनाया। उनके कुछ फैसलों की आलोचना भी हुई और इसी साल फरवरी में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर अपने आलोचकों को अपने खिलाफ बोलने का एक और अवसर दे दिया। इसमें दो राय नहीं कि न्याय की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति अपने विवेकानुसार न्यायसंगत फैसला सुनाने का प्रयास करता है। फैसला तो किसी एक के पक्ष में ही आएगा और ऐसे में दूसरे का असहमत होना बेशक स्वाभाविक है।

जरूरतमंदों को कोरोना काल से खाना खिलाती आ रही हैं, समाजसेवी बनीं अभिनेत्री जया भट्टाचार्य

मुम्बई : अभिनेत्री जया भट्टाचार्य ने लॉकडाउन में ट्रांसजेंडर्स, सेक्स वर्कर्स और उन सब जरूरतमंदों के खाने का प्रबंध किया जो कोरोना महामारी की वजह से बेरोजगार हैं। वे अपने इस काम को सिर्फ लोगों तक पहुंचने का जरिया मानती हैं। वैसे भी जया का नाम हर घर में पहचाना जाता है। कभी टीवी एक्ट्रेस के तौर पर अपनी खास पहचान रखने वाली जया ने जिज्ञासा बाई, सुधा बुआ, सक्कू बाई और वसुंधरा पांडे के नाम से अलग-अलग धारावाहिकों में भूमिका निभाई है। जया ने कई टीवी सीरियल्स जैसे सास भी कभी बहू थी, गंगा, झांसी की रानी, थपकी प्यार की में अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया है।
लेकिन एक अदाकारा होने के साथ ही वे समाज सेविका के तौर पर भी अपनी खास पहचान रखती हैं। जया पिछले 20 सालों से एनिमल वेलफेयर की दिशा में काम कर रही हैं। ये काम उन्होंने उस वक्त भी जारी रखा जब लोग कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन में घरों मे बंद थे।
वे कहती हैं लॉकडाउन होने पर मैंने पुलिस की अनुमति से एनिमल वेलफेयर के लिए काम किया। जब उनसे यह पूछा जाता है कि वे समाज सेवा से कैसे जुड़ी तो वे कहती हैं – ”लॉकडाउन के शुरुआती दौर में मैं उन महिलाओं के समुह से मिली जिनके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था”।
मुझसे उनकी हालत देखी नहीं गई। उस समय मेरे पास मेरे पिता के बैंक अकाउंट में रखे सिर्फ 3000 रुपये ही थे। पिछले एक साल से जया के पास कोई काम नहीं है। जब उनके 90 साल के पिता को निमोनिया हुआ तो उन्हें बार-बार पिता के इलाज के लिए यहां-वहां जाना पड़ता था। इसलिए वे कोई काम भी नहीं कर पाईं।
इन हालातों में घर में जो भी राशन का सामान रखा हुआ था। उससे जया ने भूख से तड़प रहीं महिलाओं के लिए खिचड़ी बनाई और अपने स्टाफ मेंबर्स के साथ मिलकर इन गरीब महिलाओं को बांट दी। उसके बाद से अब तक वे जरूरतमंदों की मदद के लिए हरदम आगे रहती हैं।
कुछ ही समय बाद उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि इतने लोगों के लिए उनके किचन में रोज खाना बनना मुश्किल है। तब जया ने अपने ड्राइवर शिराज के साथ सेक्स वर्कर्स, ट्रांसजेंडर्स और गरीबों के बीच फूड पैकेट बांटना शुरू किया। शिराज उनके साथ एनिमल वेलफेयर के लिए भी काम करता है।
जया की समाज सेवा से प्रभावित होकर जिस तरह लोगों ने उनकी मदद की, उस बारे में खुद कभी उन्होंने भी नहीं सोचा था। डलास के एक व्यक्ति ने उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की।
उसके बाद टर्की के एक व्यक्ति ने अपने सपोर्ट देना शुरू किया। टीवी की दुनिया के वे सितारे जिन्हें कभी जया जानती भी नहीं थी, उनकी मदद के लिए आगे आए। इनमें से प्रमुख नाम रेणुका शहाणे, अंकित बठला, सुहासिनी मूले ओर सुनीता राजवार हैं।
जया के कुछ क्लासमेट और कलीग्स ने भी उनकी मदद करना शुरू किया। जया इनके द्वारा भेजे गए पैसों को जिस समाज सेवा के काम में लगाती हैं, उसकी एक पर्ची भी इन्हें भेजती हैं ताकि इन सभी लोगों को ये पता चल सके कि इनके पैसे किसी नेक काम में लगाए जा रहे हैं।
जया ने अपने एनजीओ ‘थैंक्यू अर्थ’ का 2010 में रजिस्ट्रेशन कराया था। फिलहाल वे एक बार फिर इस एनजीओ के तहत काम करना चाहती हैं। उनकी एक और चैरिटी ‘गिफ्टिंग हैप्पीनेस’ के तहत भी वे समाज सेवा कर रही हैं।
जया ने अपने लंबे बाल क्यों कटवाए। इस बारे में पूछे जाने पर वह कहती हैं ”लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में मेरे अपार्टमेंट की लिफ्ट खराब थी। ऐसे में लोगों को फूड पैकेट बांटने के लिए मैं कई बार सीढ़ियों से चढ़ती-उतरती थी। मैं हर बार अपने घर पहुंचकर गर्म पानी से नहाती थीं क्योंकि बाहर से घर आकर नहाना भी सैनिटाइजेशन का ही हिस्सा है।
इसके अलावा मैं पूरे समय अपने बीमार पिता की देखभाल करती हूँ। ऐसे में मेरे लिए साफ-सफाई का ख्याल रखना जरूरी है ताकि वे कोरोना के इंफेक्शन से बचे रहें। इसी बीच एक दिन मुझे जुकाम हो गया और मैंने देखा कि ऐसा मेरे बाल बार-बार गीले रहने की वजह से हुआ। तभी मैंने ये सोचा कि मुझे इस परेशानी से बचने के लिए अपना सिर मुंडवा लेना चाहिए और मैंने बाल्ड लुक अपना लिया”।

कोरोना प्रभाव : यूएई में 19 सितम्बर से 10 नवंबर तक होगा आईपीएल

मैच पुराने शेड्यूल से आधा घंटा पहले यानी दोपहर के 3.30 बजे और शाम 7.30 बजे से होंगे

मुम्बई : बीसीसीआई ने आईपीएल सीजन-13 का शेड्यूल जारी कर दिया। कोरोना दौर में आईपीएल बगैर दर्शकों के यूएई में 19 सितम्बर से शुरू होगा। पहला मैच पिछली बार के चैम्पियन मुम्बई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला जाएगा। फाइनल 10 नवम्बर यानी मंगलवार को होगा। शेड्यूल के हिसाब से दुबई में 24 मैच, अबु धाबी में 20 मैच और शारजाह में 12 मैच होंगे।
आईपीएल के इतिहास में पहली बार फाइनल रविवार की बजाय वीक-डे मंगलवार को रखा गया है। टूर्नामेंट में 10 डबल हेडर यानी एक दिन में 2-2 मैच होंगे। शाम के मैच पुराने शेड्यूल से आधा घंटा पहले यानी 7.30 बजे से शुरू होंगे। दोपहर के मैच 3.30 बजे से खेले जाएंगे। प्लेऑफ और फाइनल का वेन्यू बाद में घोषित किया जाएगा।
अनलिमिटेड कोरोना सब्सटिट्यूट होंगे
आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने कोरोना के कारण हर एक टीम को सिर्फ 24 खिलाड़ी ही साथ ले जाने की इजाजत दी है। पहले फ्रेंचाइजी को 25 खिलाड़ी रखने की अनुमति थी। टूर्नामेंट में अनलिमिटेड कोरोना सब्सटिट्यूट की भी मंजूरी दी। यानी टूर्नामेंट में कोई खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव निकलता है, तो टीम उसकी जगह दूसरा खिलाड़ी टीम में शामिल कर सकेंगी।
सभी 60 मैच तीन ही स्टेडियम में खेले जाएंगे
आईपीएल के सभी 60 मैच दुबई, अबुधाबी और शारजाह में खेले जाएंगे। भारत में यह मुकाबले 8 जगहों पर होते थे। सिर्फ तीन जगहों पर मैच होने की वजह से इस बार आईपीएल में भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग पर नजर रखना पहले के मुकाबले आसान होगा। यह बात हाल ही में बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट (एसीयू) के हेड अजीत सिंह ने कही थी।
इस बार क्या नया
कोरोना के कारण टूर्नामेंट बगैर दर्शकों के बायो-सिक्योर माहौल में होगा
आईपीएल के हर 5वें दिन खिलाड़ी और स्टाफ का कोरोना टेस्ट होगा
टूर्नामेंट में सभी फ्रेंचाइजी अनलिमिटेड कोरोना सब्सटिट्यूट ले सकेंगी
शाम के मैच पुराने शेड्यूल से आधा घंटा पहले यानी 7.30 और दोपहर के 3.30 बजे से होंगे
आईपीएल के इतिहास में पहली बार फाइनल रविवार की बजाए वीक-डे में खेला जाएगा
टूर्नामेंट में 10 डबल हेडर यानी एक दिन में 2-2 मैच होंगे
कमेंटेटर्स घर से बैठकर लाइव कमेंट्री करेंगे
इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों पर संशय
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी शुरुआती मैच खेल सकेंगे या नहीं, इस बात को लेकर अब भी सस्पेंस है। लीग में ऑस्ट्रेलिया के 17 और इंग्लैंड के 13 खिलाड़ियों को हिस्सा लेना है। दरअसल, इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया का तीसरा और आखिरी वनडे 16 सितंबर को मैनचेस्टर में होगा। दोनों टीमों के खिलाड़ी 16 को ही या फिर अगले दिन लंदन से दुबई के लिए रवाना होंगे। यूएई पहुंचने के बाद उन्हें कोरोना टेस्ट कराना होगा। अगर उनका टेस्ट निगेटिव आया, तभी वे 7 दिन के आइसोलेशन जोन से बाहर निकल सकेंगे। ऐसे में सभी प्लेयर दूसरे हफ्ते से आईपीएल खेल सकेंगे जबकि फ्रेंचाइजी कह चुकी हैं कि सभी खिलाड़ी बायो-सिक्योर माहौल से ही यूएई आएंगे, ऐसे में उन्हें आइसोलेशन में रखने की जरूरत नहीं होगी।

भाई-बहन ने साइकिल को आटा चक्की के साथ अटैच कर बना डाली ‘साइकिल चक्की’,

जमशेदपुर : झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली सीमा पांडेय ने गजब का आविष्कार कर डाला है। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने घर में इंजीनियर भाई की मदद से इस मशीन का अविष्कार किया। इस वीडियो में एक महिला रूपांतरित की गई जिम साइकिल को चला रही है।
इस साइकिल को आटा चक्की के साथ अटैच किया गया है। इससे महिला की एक्सरसाइज भी हो रही है और आटा भी पीस रहा है। लॉकडाउन में आप इस आटा चक्की की मदद से घर में ही आटा पीस सकते हैं। साथ ही वेट लॉस करने का यह तरीका लोगों को खूब पसंद आया। शरण ने अपने ट्विटर पर लिखा – ‘काम और एक्सरसाइज दोनों एक साथ’। इस वीडियो में की गई कमेंटरी की भी शरण ने तारीफ की।
इस वीडियो को अब तक 6 लाख व्यूज और 4,500 लाइक्स मिले हैं। कई ट्विटर यूजर ने इस चक्की पर अपने कमेंट करते हुए लिखा – ‘जुगाड़ का बेहतरीन उदाहरण’। किसी ने इसे सबसे अच्छा आइडिया बताया तो कोई इसे अच्छा प्रयोग कह रहा है। कई लोगों ने यह भी पूछ लिया कि इसे कहां से खरीद सकते हैं? क्या ये चक्की ऑनलाइन उपलब्ध है?

मास्क-ग्लव्स-पीपीई किट्स जैसे कोविड कचरे से ईटें बनाएंगे बिनीश

कचरा डालने के लिए बनेगा कूड़ेदान
अगले डेढ़ महीने की बुकिंग भी हुई

गाँधीनगर : कोरोनावायरस की महामारी से आज पूरा विश्व जूझ रहा है, इस महामारी के साथ अब कई और परेशानियां भी सामने आ रही हैं। इसमें सबसे बड़ी परेशानी है कोविड मेडिकल वेस्ट। कोरोना के इस दौर में मास्क, पीपीई किट और ग्लव्स का इस्तेमाल करना हर शख्स की जरूरत बन चुकी है, ऐसे में इनका इस्तेमाल भी पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। कोविड मेडिकल कचरा डिस्पोज होने के बाद यह सारा कचरा लैंडफिल साइट्स में पहुँचता है, जो उसके आस-पास रहने वालों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है।
कोविड मेडिकल वेस्ट से आई इस पर्यावरणीय आपदा को अवसर में बदलने की कोशिश की है गुजरात के सोशल एंटरप्रेन्योर बिनीश देसाई ने। कोविड मेडिकल कचरे के प्रबन्धन पर काम कर रहे बिनीश को ‘रीसायकल मैन ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। वो इससे पहले भी वेस्ट से बिल्डिंग मटेरियल समेत करीब 150 प्रकार के प्रोडक्ट बना चुके हैं। बिनीश कहते हैं कि इस दुनिया में कुछ भी वेस्ट नहीं है, जो चीज आपके लिए वेस्ट है, वो किसी और के लिए एसेट हो सकती है।
बीड्रीम कंपनी के फाउंडर बिनीश देसाई इंडस्ट्रियल वेस्ट से सस्टेनेबल बिल्डिंग मटीरियल बनाने की तकनीक बना चुके हैं। बिनीश ने बताया कि उनका पहला आविष्कार पेपर मिल से निकलने वाले कचरे को रीसाइकल करके पी-ब्लॉक ब्रिक्स ईंट बनाना था। अब बिनीश कोविड मेडिकल वेस्ट जैसे यूज्ड मास्क, ग्लव्स और पीपीई किट से भी पी-ब्लॉक 2.0 बनाने जा रहे हैं। बिनीश बताते हैं कि मार्च 2020 के बाद से ज्यादातर लोग सिंगल यूज मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक बार इस्तेमाल के बाद ये मास्क या खुले में या कूड़े के ढेर में फेंक दिए जाते हैं। लॉकडाउन में घर बैठा था तो मैंने सोचा क्यों न मैं इस वेस्ट से भी ईंटें बनाने का काम शुरू करूं। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च के बाद से देश में हर दिन 101 मीट्रिक टन कोविड से जुड़ा बायोमेडिकल वेस्ट निकल रहा है। इसके अलावा, हमारे देश में एक दिन में 609 मीट्रिक टन बायोमेडिकल वेस्ट निकलता है।”
कोविड वेस्ट कलेक्शन की प्रक्रिया के बारे में बिनीश बताते हैं, ‘इसके लिए हम हॉस्पिटल, रेस्त्रां, सलून समेत पब्लिक प्लेस पर ईको बिन रखेंगे। जब यह बिन भर जाएंगी तो केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड की निर्देशिका के मुताबिक इस बिन को 72 घंटे तक आइसोलेट किया जाएगा यानी इसे छुआ नहीं किया जाएगा। 72 घंटे के बाद इन बिन को हमारी टीम पूरी सावधानी और नियमों का पालन करते हुए हमारे सेंटर तक लाएगी।
यह टीम पीपीई किट पहनी होगी। यहाँ आने के बाद बिन को डिसइंफेक्ट किया ​जाएगा और फिर इसकी पहली धुलाई होगी। इसके बाद इसमें से पीपीई किट और मास्क को अलग करके दोबारा धोया जाएगा। यह पूरा काम भी हमारे टीम मेंबर पीपीई किट पहनकर करेंगे। इस प्रक्रिया के बाद इस कोविड वेस्ट पूरी तरह डिसइंफेक्ट हो जाता है। फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर कागज की स्लेज और बाइंडर के साथ निश्चित अनुपात में मिलाकर ईंटें तैयार की जाएंगी।” बिनीश कहते हैं कि बाइंडर का फॉर्मूला हमारा ट्रेड सीक्रेट है, इसलिए हम उसके बारे में आपसे ज्यादा कुछ शेयर नहीं कर सकते हैं।
बिनीश बताते हैं, ‘इस ईंट को बनाने में 52 % पीपीई मटेरियल, 45% गीले कागज की लुगदी और 3% गोंद का इस्तेमाल किया जाएगा। बायोमेडिकल वेस्ट से ईंट बनाने की प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे पेपर मिल के वेस्ट से ब्रिक्स बनाई जाती है।’ बिनीश ने सबसे पहले अपनी होम लैब में काम किया और फिर अपनी फैक्ट्री में कुछ सैंपल ईंटें तैयार कीं। प्रयोग सफल रहने पर बिनीश ने इन ईंटों को वलसाड की ही एक सरकारी लैब से टेस्टिंग के लिए भेजा। बिनीश बताते हैं कि कोराना महामारी के चलते हम अपने सैंपल्स को नेशनल लैब नहीं भेज पाए। हमारे ब्रिक्स प्रोटोटाइप ने टेस्टिंग के दौरान सभी क्वालिटी टेस्ट को पास किया है।
बिनीश बताते हैं कि इन ईंटों का आकार 12 x 8 x 4 इंच है। एक वर्गफुट ईंट बनाने के लिए 7 किलोग्राम बायोमेडिकल वेस्ट का इस्तेमाल हुआ है। ये ईंट वॉटर और फायर प्रूफ हैं, यह ईंट ट्रेडिशनल ईंट की तुलना में हल्की भी होती है। एक ईंट की कीमत 2 रुपये 80 पैसे है। इन ईंटों का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन में किया जाएगा। बिनीश कहते हैं कि वे सितंबर के दूसरे सप्ताह से ईंटे बनाना शुरू करेंगे। उनके प्लांट में रोजाना 4 हजार ब्रिक्स तैयार होंगी। अगले डेढ़ महीने तक इन ब्रिक्स की भी प्री बुकिंग हो चुकी है।

च्युइंगम से शुरू हुआ वेस्ट से बेस्ट बनाने का सफर

वेस्ट से बेस्ट बनाने के सफर के बारे में बिनिश ने बताया कि जब वे छठवीं क्लास में थे तो एक दिन क्लासरूम में उनकी पैंट पर च्युइंगम चिपक गयी। क्लास में कागज के टुकड़े से च्युइंगम को जैसे-तैसे निकाला और इस कागज में ही लपेटकर जेब में यह सोच कर रख लिया कि बाद में इसको बाहर फेंक देंगे। स्कूल खत्म होने के बाद ​जब बिनिश का ध्यान इस कागज पर गया तो देखा कि कागज में रखी हुई च्युइंगम पत्थर जैसी हो चुकी है। यहां से बिनिश को आइडिया मिला कि क्यों ना इससे ईंटे बनाई जाए। बिनिश की बात किसी ने नहीं सुनी तो उन्होंने अकेले ही प्रयोग शुरू कर दिया।

बिनिश ने 16 साल की उम्र में अपनी कंपनी बनाकर ऑर्गेनिक बाइंडर के साथ इस तरह की ईंट बनाने का प्रयोग शुरू किया। बिनिश ने अब इस तरह की ईंटे बनाने के लिए पेपर मिल वेस्ट, जिप्सम वेस्ट, मेटल और टैक्सटाइल वेस्ट का इस्तेमाल किया। वे इस वेस्ट से विभिन्न तरह की डिजाइन की ईंटें और बिल्डिंग मटेरियल बनाते हैं। गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में उनकी बनाई हुई ईंटों से 1000 से अधिक टॉयलेट भी बनाए जा चुके हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)

भवानीपुर कॉलेज में वायरल रोगों के विषय पर वेबिनार 

कोलकाता : भवानीपुर कॉलेज में वायरल रोगों के विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया। कोलकाता के पीयरलेस हॉस्पिटल के डॉ शुभ्रो ज्योति भौमिक ने मानसून के वारिश के मौसम में होने वाले वायरल रोगों के विभिन्न ज्वरों विशेष रूप से डेंगू के बारे में विस्तृत जानकारी दी। रसोई में, एसी यहां तक कि पुराने गमलों आदि में जमा हुआ पानी मच्छरों को जन्म देता है। शहर में बारिश के जमे हुए पानी और गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है अतः हमें सावधानी और सुरक्षित रहने के लिए सफाई पर जोर देने की आवश्यकता है। घर में बाथरूम आदि को सूखा रखने से और फिनायल या अन्य सफाई के द्रव्यों से सुरक्षित रखने की हिदायत दी। डेंगू के मच्छर दिन के समय काटते हैं। जहां काटते हैं वहां लाल खुजली होती है और बुखार तथा पूरे शरीर में दर्द होता है। डॉ से सलाह अवश्य लें। अभी कोरोना महामारी का संकट भी गहराया हुआ है इसलिए टेली मेडिसिन पर डॉक्टरों से सलाह लें। कोरोना वायरस के विषय में जानकारी देते हुए डॉ भौमिक ने बताया कि पृथ्वी पर इस तरह के बहुत से वायरस हैं। आज हमें बहुत ही सावधानी से अपनी सुरक्षा स्वयं करनी है।  दो गज की दूरी और हाथ को सेनेटाइज करने के साथ-साथ अपने हाथ को आंख नाक और चेहर पर न लगाएं क्योंकि इनकी मांसपेशियां बहुत ही नाजुक होती हैं। डॉ भौमिक क्लिनिकल डायरेक्टर अॉफ एकेडमिक हैं। आपने बताया कि पियरलैस के सभी टेस्ट हॉस्पिटल में ही किए जाते हैं। रोगी के घर जाकर कोई टेस्ट नहीं किया जाता इसी कारण रिपोर्ट सही आती हैं।
वेल व्यूह क्लिनिक की प्रमुख फिजियोथेरेपिस्ट डॉ शबनम अग्रवाल जो नोपानी ग्रुप ऑफ  इंस्टीट्यूट से संबद्ध हैं, कोरोना काल में घरों में रहकर किस प्रकार योग और प्राणायाम से स्वयं को स्वस्थ और सुरक्षित रखा ज सकता है। डाइट के विषय पर भी विस्तार से जानकारी दी।
पचास से अधिक विद्यार्थियों ने “प्रिवेंशन फॉर कॉमन वायरल डिजीज” विषय पर वेबिनार में भाग लिया। दोनों ही डॉक्टरों ने बहुत ही सहज भाषा में अपने विचार व्यक्त किए।
डीन प्रो दिलीप शाह की परिकल्पना से इस प्रकार का कार्यक्रम अॉन-लाइन संभव हो सका। कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, डॉ रेखा नारिवाल ने प्रश्न भी पूछे जिसका संतोष जनक उत्तर भी मिला। विद्यार्थियों ने भी कई प्रश्न पूछे। संयोजक रहीं डॉक्टर गार्गी गुइय।  डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।

सपनों की उड़ान – प्रोफेशनल दुनिया का फेसबुक लिंक्ड इन

आज का समय कड़ी प्रतियोगिता का समय है और इसमें अपनी प्रतिभा को साबित करना बहुत मुश्किल होता है। आप चाहे विद्यार्थी हैं या गृहिणी हैं…अगर आपको कॅरियर बनाना है तो आपके लिए जरूरी है कि आपके सम्पर्क सूत्र तगड़े हों…आपनकी जानकारी और व्यावहारिक ज्ञान बढ़िया हो और नवीनतम जानकारी आपके पास रहें। आज मोबाइल के इस युग में फोन सबके हाथ में होता है मगर इसी फोन को आपने कायदे से इस्तेमाल किया तो यह आपका भविष्य भी बना सकता है। सपनों की उड़ान इसी दिशा में शुभजिता का नया कदम है। इस श्रृंखला में हम आपको रोजगारपरक जानकारियाँ देंगे और ऐसे ही आयोजन करने का प्रयास भी करेंगे।

आज सपनों की पहली उड़ान की कड़ी में आपके लिए लाये हैं प्रोफेशनलों की सोशल मीडिया नेटवर्क वेबसाइट्स लिंक्ड इन की जानकारी। आप इसे रोजगारपरक फेसबुक कह सकते हैं। शुभजिता की सलाह है कि आपका एक प्रोफाइल यहाँ पर होना चाहिए। आगे पढ़िए विस्तृत जानकारी –

लिंकडइन को प्रोफेशनल नेटवर्क भी कहते हैं क्योंकि इस नेटवर्क में, इस प्लेटफार्म में बड़े बड़े उद्योगपति, प्रोफेशनल और कर्मचारी हैं जो सिर्फ अपने कार्यक्षेत्र को लेकर ही सक्रिय हैं और इसके बारे में ही बात करते हैं। कई मीडिया माध्यम हैं तो रोजगार और अर्थव्यवस्था से लेकर कार्यक्षेत्र से जुड़ी जानकारी आपको यहाँ मिलेगी।

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प्रोफाइल कैसे बनाएँ – 

सबसे पहले गूगल में सर्च कीजिए “LinkedIn“. और उसके बाद LinkedIn की वेबसाइट पर जाइए. आपको सबसे ऊपर ही उस वेबसाइट की लिंक मिल जाएगी. और आपको इस वेबसाइट की link यहां पर मिल जाएगी।

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सबसे पहले आपको अपना नाम एंटर करना है और उसके बाद अपना सरनेम एंटर करें.
उसके बाद आपको अपना ईमेल एड्रेस देना है. आप वही ईमेल एड्रेस दीजिए जो सक्रिय रहता  हो मतलब कि आप उस मेल में आए हुए सभी मेल देखते रहें, जाँचते रहें।
उसके बाद आप जो भी पासवर्ड रखना चाहते हैं उसे एंटर कीजिए. आप 6 अक्षरों से बड़ा पासवर्ड रखें और अपने पासवर्ड में capital letters, special symbol का इस्तेमाल जरूर करें। आपके पासवर्ड में आपका नाम नहीं होना चाहिए और अगर आप अपने पासवर्ड में अपना नाम एंटर करोगे तो आपका अकाउंट नहीं बन पाएगा. मतलब कि अगर आपका नाम Rajesh है तो आप Rajesh123, Rajesh@0  जैसे पासवर्ड नहीं रख पाओगे.

उसके बाद आपको सहमति देते हुए Agree  & Join के बटन पर क्लिक करना है. अब आपका अकाउंट बन गया है. उसके बाद आप अपना ईमेल एड्रेस और पासवर्ड एंटर करके लॉगिन कर सकते हो और अपने बारे में, विवरण यानी आपकी शिक्षा, रुचि, लक्ष्य, योग्यता के अतिरिक्त आपने अगर कोई और कोर्स किया है, तो वह जानकारी देनी होगी। गूगल प्लेस्टोर पर लिंक्ड इन का ऐप भी मौजूद है जिसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

सावधानी – बकवास और अभद्र भाषा का उपयोग यहाँ न करें..वरना बात बनने से पहले बिगड़ सकती है।

लिंक्ड इन पर जाएँ

(अगर आप ऐसी किसी उपयोगी वेबसाइट्स या ऐप या अन्य कोई पाठ्यक्रम, इनके बारे में जानते हैं। अगर आपकी ऐसी कोई वेबसाइट है और आप हमारे माध्यम से कोई लेख या सामग्री या हमारे यू ट्यूब चैनल पर देना चाहते हैं तो रॉ फुटेज भेजें। हमारी ई मेल आई डी [email protected] या [email protected] अपने पूरे विवरण के साथ लिख भेजें। हम आपकी वेबसाइट के लिंक के साथ आपकी सामग्री साभार साझा करेंगे)

 

(साभार – द ग्रेट इन्फो)

मंजिल

 

परीक्षित जायसवाल
  • परीक्षित जायसवाल

मंज़िल ना सही सफ़र तो मिला है,

ज़िन्दगी जीने का एक बहाना मिला है,
लगा हूँ पूरी करने को ज़िद अपनी,
सपनो के पीछे दौड़ने का सलीका मिला है,
खोया हुआ था मैं ना जाने कहाँ पर,
खुद ही खुद को ढूँढने का रास्ता मिला है,
लड़ते-लड़ते खुद से,
दुनिया से लड़ने का हौंसला मिला है,
मंज़िल ना सही सफर तो मिला है।

करता रहा कोशिशें खुद को पाने की ,
कभी ना छोड़ी उम्मीद मंज़िल को पाने की।
हारा था मैं भी खुद से पर,
हौंसला ना टूटने दिया,
हर कोई रूठा मुझसे ,
पर खुद को खुद से ना रूठने दिया।

बिलासपुर छत्तीसगढ़
8251014292

जीने का अधिकार रखती हूँ

  • टिना लामा

“जीने का अधिकार सबको है आज”
रोज सुबह उठकर
मेरा खुद से ही संघर्ष होता हैं
कैसे कटेगा दिन
यह सोच मन झंझोड़ लेता हैं
क्यों मुश्किल हो जाता हैं
अपने अरमान पूरे करना?
कचोट लेता हैं मन
क्या स्वीकार करेगा
यह समाज मेरा कहना?
कहता हैं समाज
जीने का अधिकार सबको हैं आज
फिर क्यों सुनाता हैं समाज
हमें ताने बार बार और करता हैं
हमसे भेदभाव का व्यापार
क्यों काबिलियत को
लिंग के नाम पर तोला जाता हैं
सड़को पर निकलते ही
देखा जाता हैं घृणित भाव से
हाँ किन्नर हूं मैं
जिसे जिंदगी जीने से रोका जाता हैं
बुलाते हमें हिजड़ा,
किन्नर,छक्का और भी नामों से
पर क्यों भूल जाता है समाज
शिव का आधा रूप
हैं हम अब भी आज
मुश्किलों से डर कर पीछे हट जाए
यह हमारी चाह नहीं
कोशिश करके पाऐंगे
एक न एक दिन मंजिल सही
यही सोच कर अपने पंखों को उड़ान देती हूँ
किन्नर हूँ तो क्या
इंसान हूँ मैं
ज़िंदगी जीने का अधिकार रखती हूँ !