Friday, April 10, 2026
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भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने दिया शास्त्रीय संगीत संस्कृति की परम्परा को बढ़ावा 

 कोलकाता : भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कालेज के संगीत समूह क्रिसेंडो के विद्यार्थियों ने अॉन-लाइन कार्यक्रम किया  जिसका उद्देश्य संगीत की मूल परंपरागत शास्त्रीय संगीत के प्रति युवा पीढ़ी को आकर्षित करना है।” क्रिसेंडो बंदिश ” के कार्यक्रम में संगीत विशेषज्ञ रवींद्रभारती विश्वविद्यालय के सौरभ गोस्वामी ने- तेरा नाम गीत की बंदिश के साथ बहुत अच्छी शुरूआत की। इस अवसर पर डीन प्रो दिलीप शाह ने आज संगीत में अपसंस्कृति का जो दुष्प्रभाव दिखाई दे रहा है उसे हम भारतीय शास्त्रीय संगीत की स्वच्छ परंपरा से  ही दूर कर सकते हैं। प्रीतम कुमार मिस्त्री-लब पर आये आ आज रही इबादत, मधुबन दास- हमसे तुमसे प्यार कितना, अनन्या मजुमदार – भरे नैना, पौलमी बैनर्जी – जागो मोहन प्यारे, नैन्सी कुमारी – मेरी ढोलना सुन, आर्शी रायचौधरी – साजन बिन, अभिरूप घोष – विरह आदि पारंपरिक संगीत का गायन किया। प्रीतम कुमार मिस्त्री, मधुबन दास, और अनन्या तीनों गायकी में अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुतियां दी। अॉन-लाइन हुए विद्यार्थियों की असाधारण गायकी ने सभी श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, दिव्या ऊडीशी और डॉ वसुंधरा मिश्र और कॉलेज के अनेक शिक्षकों की उपस्थिति रही।प्रो दिलीप शाह को विद्यार्थियों ने जन्म दिन की बधाईयाँ भी दी।
30 विद्यार्थियों के अॉडिशन में इस कार्यक्रम में सात विद्यार्थियों को चुना गया जिन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम के संयोजन में सम्राट घोष , अंजली दूबे, अभिरूप घोष, आर्शी रायचौधरी, संजना लाल, बिक्रमजित दास का रहा। इस कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने।

गोला – बारूद के बिना कार्य करती है पत्रकारिता : डॉ. कुसुम खेमानी

 भवानीपुर कॉलेज में हिंदी पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम पर दो दिवसीय कार्यशाला 
कोलकाता :   भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज में पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम  विषय पर भारतीय भाषा परिषद और ताजा टीवी के तत्वावधान में प्रथम दिन पत्रकारिता के प्रिंट मीडिया विषयों पर विचार विमर्श किया गया वहीं द्वितीय दिन सूचना प्रौद्योगिकी और संचार तकनीक संबंधी आधुनिकतम पत्रकारिता के विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। कार्यशाला काआरंभ करते हुए भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने पत्रकारिता को लोकतंत्र का ऐसा अस्त्र बताया जो गोला – बारूद के बिना समाज की आवाज सुनने वाला है। स्वाधीनता की लड़ाई में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों के कारण ही अंग्रेजों को भारत से खदेड़ा गया। बालगंगाधर तिलक ने केसरी, महात्मा गांधी ने यंग इंडिया, हरिजन और राजाराममोहन राय ने बंगदूत आदि निकाले ।पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम आज इलेक्ट्रानिक और वेब मीडिया में हो गए हैं लेकिन पत्रकार की गुणवत्ता और अर्थवत्ता में सच्चाई होनी आवश्यक है। आज मीडिया में गलत खबरें अधिक दिन नहीं चल सकेंगी वे पानी में लहरों की तरह खत्म हो जाएंगी। लेखिका और वागर्थ पत्रिका का सफल संचालन कर रही डॉ खेमानी ने कार्यशाला की छात्रा अर्चना दीक्षित के विडियो और निखिता पांडेय की लिखी रिपोर्ट की प्रशंसा की।
अस्सी से अधिक विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला में अॉन-लाइन भाग लिया।द्वितीय दिन कार्यशाला के अंतर्गत वेब मीडिया, स्ट्रिंमिंग सर्विस, कंटेंट राइटिंग, ब्लागर, यू-ट्यूब, फ्रीलांसिंग, पोर्टल और वेब डेवलपर आदि बहुविध  कैरियर के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
साहित्य टाइम्स और इंडिया टीवी डॉट इन के संस्थापक डायरेक्टर और भारतीय भाषा परिषद के मंत्री डॉ केयुर मजमुदार ने उन विद्यार्थियों को वेब डेवलपर के विषय में स्लाइड्स द्वारा स्ट्रिंमिंग सर्विस की जानकारी दी जो पत्रकारिता और इलेक्ट्रानिक मीडिया के महत्वपूर्ण लिंक उपलब्ध कराता है। वेब साइट, टीवी चैनल, सर्विसेज, ब्राउजर, कॉन्फ्रेंसिंग, यू-ट्यूब, जूम फेसबुक आदि से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ना वेब डेवलपर का काम है।कोडिंग, डिकोडिंग और जनसंचार संप्रेषण पर चर्चा की। आज कोरोना काल में बहुत से विद्यार्थियों के लिए कैरियर की समस्या है।
वेब पोर्टल” हमारा मीडिया” के इंटरप्रिनर गोकुल मुरारका ने व्यक्तिगत स्तर पर मीडिया में आज कैरियर के लिए अपार संभावनाएं बताईं। पोर्टल पर फेक न्यूज आदि न देकर अच्छा कार्य किया जा सकता है, सोश्यल मीडिया से जुड़ने का अच्छा मौका बताया।
शुभजित डॉट कॉम की संस्थापक और इंटरप्रिनर महिला वरिष्ठ पत्रकार सुषमा त्रिपाठी सन्मार्ग, सलाम दुनिया आदि हिंदी अखबारों में काम कर चुकी हैं। वेब मीडिया पर स्लाइड्स द्वारा विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि ऑनलाइन किस तरह वेब पोर्टल व्यवसाय में परिवर्तित हो जाता है। पत्रकार की भाषा अच्छी होनी चाहिए भले ही अॉन-लाइन लिखे। कंटेट वही हैं जो प्रिंट मीडिया में होते हैं। वेबसाइट परंपरागत पत्रकारिता का आधुनिक रूप है बिना नींव के छत नहीं बनती। वेब साइट युवाओं को साहित्य व्यवहार और उद्यम की ओर प्रेरित करती है।
जूनुनी फितुर ब्लॉगर लिखने वाली पीहू पापिया प्रभातखबर दैनिक पत्र से जुड़ी थीं, अब अपने ब्लॉग पर ज्वलंत विषयों पर व्यवसायिक रूप से जुड़ी हैं। फ्रीलांसिंग से कोई भी विषयों पर लिखा जा सकता है। ऐनालिटक और फेक्ट ओरियंटेड कंटेंट राइटिंग लिखने वालों की पूछ होती है चाहे किसी भी विषय पर किसी भी भाषा में लिखा जा सकता है उसे आजीविका का साधन बनाया जा सकता है।वीडियो द्वारा यूनिकोड के प्रयोग को स्पष्ट किया।
भवानीपुर कॉलेज की प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी ने इस कार्यशाला पर एक छोटे वीडियो में विद्यार्थियों को आमंत्रित किया। कार्यशाला को तकनीकी रूप से सफल बनाने में गौरव किल्ला, अदिति सिनोलिया, साक्षी जैन, दिव्या ऊडीशी का सप्रयास रहा। भारतीय भाषा परिषद की विमला पोद्दार, भवानीपुर कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने भविष्य में पत्रकारिता में विद्यार्थियों के लिए संभावनाओं का क्षेत्र बताया । दो दिवसीय कार्यशाला की संयोजक डॉ वसुंधरा मिश्र ने भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी, ताजा टीवी के डायरेक्टर विश्वंभर नेवर को धन्यवाद दिया जिन्होंने भवानीपुर एडुकेशन सोसाइटी कॉलेज में पत्रकारिता और जनसंचार माध्यम पर कार्यशाला में अपना पूर्ण सहयोग दिया। सभी विद्यार्थियों को ई – सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। कार्यशाला की सूचना डॉ वसुंधरा मिश्र ने दी।

स्त्री पर विद्या भंडारी की 4 कविताएं

लड़की

द्वार पर लगे वंदन वार सी वह,
घर की दहलीज की रंगोली सी वह,
बिखर जाती है अपमान की
एक बूँद से ।
रिश्तो का पुल बनाती,
नदी सी तरल वह,
तिरस्कार की
बाढ़ से ढह जाती है वह।
सेमल के फूल सी छुई-मुई सी
मुरझा जाती है कोमल-कमलिनी,
मन के पक्षाघात से।
न जी पाती है,न मर पाती है वह।
तिलस्मी जीवन की भीङ मे
खो जाती है वह।
——–‘
2
पीड़ित बेटी
—–
बक्श दो इन सिसकियो’ को
मत बनाओ इन्हें अपना निवाला ।
कसम खाई थी, नहीं बनूँगी
स्त्री शोषण में भागीदार ।
अब मान रही हूँ इस घटना को भाग्य,
दुबक कर बैठी हूं, भाग्य के कोने में
ले रही हूँ लंबी-लंबी सांसे,
जप रही हूँ-
ओम् त्रयम्बकम् यजामहे।
माँ हूँ ना,
मेरे दर्द की कोई आवाज नहीं,
मेरी कसमों का कोई मूल्य नहीं ।
—-
3
डर लगता है
—–
इससे पहले कि
मेरे शरीर में फफोले पङ जाएँ,
दरारें पड़ जाएँ,
अपने आँचल में समाए रखो माँ ।
मैं बङी नहीं होना चाहती माँ,
डर लगता है ।
नहीं चाहिए मुझे बङा संसार
रहने दो मुझे छोटे खाँचे में ही
डर लगता है
नहीं रास मुझे खरोंचो भरा जीवन
सेमल के फूल सी उङा दी जाऊँगी ,
डर लगता है ।
मुझे नहीं उङना आकाश में,
रहने दो धरती पर ही मुझे,
नहीं देखने मुझे विशाल सपने,
रहने दो मुट्ठी भर सपनों में ही ,
नहीं चाहिए मुझे ताङ सी उम्र,
तुम्हारे आँचल की छाँव के बाहर धूप है माँ,
मुझे आँचल में ही समाए रखो माँ ।

मुझे आँचल में ही समाए रखो माँ ।

4
स्त्रीत्व
—-
स्त्रीत्व को बचाने के लिए
तुम्हें ही उठानी होगी गर्दन ।
लिपस्टिक की जगह रखनी होगी
पर्स में एक छुरी या दांती।
उठो,
रंगीन चश्मे उतारो,
जुबान का ताला खोलो
कुछ नये शब्द जोङ
अपने शब्द कोश में ।
उठो,
स्वयम् बनो अपनी रक्षक,
साहस की हर जङ में
छुपा होता है एक मजबूत वृक्ष ।
—–

कोरोना योद्धाओं को लेकर सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में परिचर्चा

कोलकाता :   सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल ने हाल ही में एक परिचर्चा आयोजित की। सुशीला बिड़ला मेमोरियल डे पर आयोजित इस परिचर्चा का नाम ‘सैल्यूटिंग द न्यू मसीहाज’ था। वर्चुअल माध्यम में गत 4 अक्टूबर को आयोजित यह परिचर्चा कोरोना योद्धाओं को समर्पित थी। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और मेडिका सुपर स्पेशिलियटी हॉस्पिटल के सीनियर वाइस चेयरमैन डॉक्टर कुणाल सरकार इस कार्यक्रम के मॉडरेटर थे। परिचर्चा में बेलेव्यू क्लिनिक के सीईओ प्रदीप टंडन, एडीजी तथा पश्चिम बंगाल आर्म्ड पुलिस के आई जी पी डॉ. देवाशीष रॉय, फोर्टिस हॉस्पिटल, आनन्दपुर के इन्टरनल मेडिसिन के डायरेक्टर सिबब्रत बनर्जी, माइन्ड वेलनेस की संस्थापक तथा फोर्टिस हेल्थकेयर की न्यूरोसाइक्रिआर्टिस्ट डॉ. इरा दत्ता ने भाग लिया। इन सबने महामारी को लेकर अपने विचार रखे और दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए।

लॉकडाउन के बाद कोटक म्यूचुअल फंड की नयी निवेशक शिक्षण पहल

कोलकाता : लॉकडाउन के बाद उत्पन्न हुई दुविधा को दूर करते हुए कोटक महिन्द्रा म्यूचुअल फंड ने अपनी डिजिटल मुहिम सपनो पे कोई लॉकडाउन नहीं होता उतारी है। कोटक म्यूचुअल फंड के शैक्षिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म www.kotakmf.com/letsplan लेट्स प्लान’ द्वारा यह अभियान शुरू किया गया है। अभियान में दर्शाया गया है कि अपने सपनों को हकीकत बनाने के लिए नियमित बचत और निवेश का कितना महत्व है। विषय-सामग्री और इनट्यूटिव कैल्कुलेटर की मदद से यह कैम्पेन ग्राहकों को आंतरिक उथल-पुथल से निकलने का रास्ता बनाने में सहायता देता है ताकि वे अपने वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपनी वित्तीय यात्रा को बिना बाधा जारी रखें।
इस अभियान की विषय-सामग्री में सभी प्रासंगिक प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जैसे- नौकरी या आजीविका का साधन छूटने की स्थिति से निपटना, इस स्थिति में एसआईपी बंद करें या जारी रखें, सीमित वेतन/आय में खर्चे और निवेश कैसे संभालें आदि। कैम्पेन की जो वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चलाई जाएगी, उसमें समाज के विभिन्न तबकों के ग्राहकों की आकांक्षाओं को दर्शाया जाएगा और कदम-कदम पर दिखाया जाएगा कि कैसे ’लेट्स प्लान’ लोगों के सपनों को आकार देने में मदद कर सकता है। कोटक महिन्द्रा असैट मैनेजमेंट कम्पनी लिमिटेड के डिजिटल बिज़नेस व मार्केटिंग हैड किंजल शाह ने इस अभियान को निवेशक शिक्षा पहल बताया। उन्होंने कहा कि लेट्स प्लान’ के साथ हमारा प्रयास यह है कि निवेशकों को साधनों व सूचनाओं से सशक्त किया जाए ताकि वे एसआईपी की ताकत के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकें।’’
इस अभियान की संकल्पना डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी हाइपर कनेक्ट द्वारा की गई है। हाइपर कनेक्ट के सह-संस्थापक और क्रिएटिव हेड किरण खड़के ने कहा, ’’सपने मुफ्त हैं, वे आपको संभावनाओं में यकीन दिलाते हैं। हमने इस बुनियादी विचार को लिया और इसे एसआईपी के मूलभूत विचार के साथ मिला दिया और इस तरह इस कैम्पेन का जन्म हुआ। यह वीडियो इसी विचार को स्थापित करती है और इसकी विषय-सामग्री नए और मौजूदा निवेशकों को मदद देती है कि वे ज़्यादा बारीकी से अपने सपनों के योजना बना सकें।

लॉकडाउन में खूब खाया, अब वजन प्रबन्धन की सलाह ले रहे हैं लोग

मेडीबडी के अनुसार 45 प्रतिशत सलाह लेने वाले बढ़े वजन प्रबन्धन की सलाह लेने वाले
महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक परेशान

कोलकाता : अधिक वजन और मोटापा एक विश्वव्यापी समस्या है, जिसने लाखों व्यक्तियों के जीवन को प्रभावित किया है। हालांकि इसे अक्सर जीवन शैली की समस्या मान लिया जाता है, वास्तविकता यह है यह जटिल समस्या कई बीमारियाँ देती हैं। हृदय रोग और स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पित्ताशय की बीमारी सहित पित्ताशय की पथरी, पुराने ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्लीप एपनिया जैसी बीमारियों का खतरा इनमें शामिल हैं। मोटापे के पारिवारिक इतिहास (बॉडी मास इंडेक्स – बीएमआई – 30 या उच्चतर) और / या अन्य बीमारियों जैसे अतिरिक्त कारक जोखिम कारक में जुड़ जाते हैं।
मोटापे के गंभीर प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, मेडिबडी ने विश्व मोटापा दिवस से पहले इस मुद्दे से संबंधित हाल के आँकड़े साझा किये हैं। आँकड़ों से पता चलता है कोविड के बाद मेडिबडी से वजन प्रबन्धन का परामर्श लेने वालों की तादाद 45 प्रतिशत बढ़ गयी है और इनमें से 21 प्रतिशत लोग मोटापे से परेशान हैं। पुरुषों में 69.43% और महिलाओं में 30.56% ऐसे परामर्श माँगे गये हैं।
वास्तव में दिलचस्प यह है कि इनमें से अधिकांश परामर्श (72.2%) 19 से 29 वर्ष की आयु वर्ग से संबंधित हैं। मेडिबडी की पोषण विशेषज्ञ (न्यूट्रिशनिस्ट) ऋचा मानती हैं कि भले ही फिटनेस के बारे में जागरूकता और सराहना हो, असन्तुलित जीवन शैली, शारीरिक परिश्रम का अभाव समस्या को बढ़ा रहा है। कोविड -19 के दौरान चयापचय दर में गिरावट आई है जिसे कम से कम या बिना कसरत के साथ नए व्यंजनों की कोशिश करने और लॉकडाउन के दौरान खाद्य कौशल के साथ प्रयोग करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे भारी मात्रा में वजन बढ़ रहा है। नीचे के स्तर थे – 30 से 39 वर्ष (14.4%) इसके बाद 18 और नीचे (8.9%), 40 से 49 वर्ष (2.6%) और 50 और उससे अधिक (1.8%)।
गतिहीन जीवन शैली और अधिक भोजन के अलावा, मोटापा अन्य कारणों का परिणाम हो सकता है जिसमें खाने के विकार, आनुवंशिकता, कुछ अंतर्निहित रोग जैसे हाइपरथायरायडिज्म या कुछ दवा शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ महिलाएं जब प्रारंभिक अवस्था में स्तनपान करना बंद कर देती हैं, तो उन्हें मोटापे का सामना करना पड़ सकता है।
मेडीबडी-डॉक्सऐप के सह – संस्थापक तथा सीईओ सतीश कन्नन का कहना है कि “मोटापे की समस्या को गम्भीरता से लिया जाना चाहिए। आँकड़ों के माध्यम से, हम लोगों को उन चुनौतियों के बारे में जागरूक करना चाहते हैं जो समय-समय पर देखभाल और ध्यान देने के लिए प्रभावित लोगों को प्रेरित और प्रेरित कर सकती हैं।
जैसा कि कहावत है, रोकथाम इलाज से बेहतर है, एक स्वस्थ जीवन शैली को बनाए रखने और खाड़ी में मोटापे को बनाए रखना अनिवार्य है। आहार, व्यायाम और शारीरिक गतिविधि, वजन-प्रबंधन कार्यक्रम, दवा (कुछ मामलों में) जैसे सरल परिवर्तन अधिक वजन और मोटापे को रोकने और पीछे करने में एक लंबा रास्ता तय कर सकते हैं।

गीत

 

गीता दूबे

“गीत” खुशी के कैसे गाऊं

सारे सपने बिखर गए हैं।

कैसे सुख के दीप जलाऊं

सारे अपने बिछड़ गए हैं।

आंखों में मोती की लड़ियां

हरदम बहता खारा दरिया

भूल गयी सारी रंगरेलियां

खुशियों के पल फिसल गए हैं।

दहलाती हैं सूनी रातें

तड़पाती हैं भूली बातें

ठहर गया दुख जाते- जाते

जब से हाकिम बदल गए हैं।

घने हो गए गम के बादल

दागदार बेटियों के आंचल

न्यायालय पर चढ़ी है सांकल

अच्छे दिन कहीं ठहर गए हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अयी गिरि नन्दिनी..

अयि गिरि नन्दिनी नन्दिती मेदिनि, विश्व विनोदिनी नन्दिनुते।
गिरिवर विन्ध्यशिरोधिनिवासिनी, विष्णु विलासिनीजिष्णुनुते।।
भगवति हे शितिकण्ठ कुटुम्बिनी, भूरि कुटुम्बिनी भूत कृते।
जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
अयि जगदम्ब कदम्ब वन प्रिय, वासिनी वासिनी वासरते।
शिखर शिरोमणी तुंग हिमालय, श्रृंगनिजालय मध्यगते।।
मधुमधुरे मधुरे मधुरे, मधुकैटभ भंजनि रासरते।
जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
सुर वर वर्षिणी दुर्धरधर्षिणी, दुर्मुखमर्षिणी घोषरते।
दनुजन रोषिणी दुर्मदशोषिणी, भवभयमोचिनी सिन्धुसुते।।
त्रिभुवन पोषिणी शंकर तोषिणी, किल्विषमोचिणी हर्षरते।
जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्डवितुण्डित शुण्ड गजाधिपते।
रिपुगजदण्डविदारण खण्ड, पराक्रम चण्ड निपाति मुण्ड मठाधिपते।।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
अयि सुमन: सुमन: सुमन: सुमन:, सुमनोरम कान्तियुते।
श्रुति रजनी रजनी रजनी, रजनी रजनीकर चारुयुते।।
सुनयन विभ्रमर भ्रमर भ्रमर, भ्रमराधिपते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
सुरललना प्रतिथे वितथे, वितथेनियमोत्तर नृत्यरते।
धुधुकुट धुंगड़ धुंगड़दायक, दानकूतूहल गानरते।।
धुंकट धुंकट धिद्धिमितिध्वनि, धीर मृदंग निनादरते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
जय जय जाप्यजये जयशब्द परस्तुति तत्पर विश्वनुते।
झिणिझिणिझिणिझिणिझिंकृत नूपुर, झिंजिंत मोहित भूतरते।।
धुनटित नटार्द्धनटी नट नायक, नायक नाटितनुपुरुते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
महित महाहवमल्लिम तल्लिम, दल्लित वल्लज भल्लरते।
विरचित पल्लिक पुल्लिक मल्लिक, झल्लिकमल्लिक वर्गयुते।।
कृत कृत कुल्ल समुल्लस तारण, तल्लिज वल्लज साललते।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनी, रम्य कपर्दिनी शैलसुते।।
यामाता मधुकैटभ प्रमथिनी या महिषोन्मलूनी।
या धूम्रेक्षण चण्डमुण्ड मथिनी या रक्तबीजाशनी।।
शक्ति: शुम्भ निशुम्भ दैत्य दलिनी या सिद्धि लक्ष्मी परा।
सा चण्डी नवकोटि शक्ति सहिता मां पातु विश्वेश्वरी।।

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सफलता की ओर बढ़ता हुआ हर नया कदम ही आपकी उपलब्धि है : आशु पाटोदिया

ग्राफिक डिजाइनिंग की दुनिया में आशु पाटोदिया एक जाना – माना नाम है। मल्टीमीडिया की पढ़ाई के दौरान वे सर्वश्रेष्ठ 3 डी एनिमेटर अवार्ड जीत चुकी हैं। 2011 में आशु ने अपना ब्रांड आशुपी. क्रिएटिव्स शुरू किया। वे 123 ग्रीटिंग्स की शीर्ष स्टूडियो कलाकार भी हैं। बंगाल में महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए गठित में वेस्ट बंगाल मार्केटिंग काउंसिल (डब्ल्यूबीएमसी) से भी जुड़ी हैं। ग्राफिक एवं वेब डिजाइनर सह उद्यमी आशु पाटोदिया से शुभजिता की बातचीत हुए, प्रमुख अंश आपके लिए – 

मल्टीमीडिया के परचों से जाना अपना उद्देश्य

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मैंने देखा कि हर कोई सीए या सीएस बनना चाहता है और उसी को ध्यान में रखकर विषय भी चुनता है। मुझे यह नहीं करना था..कुछ अलग करना था। उसी दौरान मेरे हाथ में ऐरेना मल्टीमीडिया के परचे आए जो मेरे ही कॉलेज के बाहर बाँटे जा रहे थे…और इनको देखकर अहसास हुआ कि दरअसल, मुझे करना क्या है और भविष्य में मुझे करना क्या है।

कोई नहीं मानता था कि मल्टीमीडिया एक कॅरियर भी हो सकता है

2009 में मैंने अपना कॅरियर शुरू किया था। यह वह समय था जब लोग मल्टीमीडिया के बारे में कुछ नहीं जानते थे। किसी को तब यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र में नौकरी के अवसर हैं, कॅरियर बनाया जा सकता है। तब कोई स्वीकार ही नहीं कर पाता था कि डिजाइनिंग कोई कार्य क्षेत्र भी हो सकता है।

अपने दम पर काम करने की सन्तुष्टि अधिक प्रिय थी

जब शुरुआत की थी तो उद्योग जगत की हस्तियों तक मेरी पहुँच नहीं थी। बतौर फ्री लॉन्र्सर छोटी – छोटी जरूरतों के लिए काम करना पड़ता था। तब उस काम को करने के लिए जो भुगतान होता था, वह बहुत ज्यादा नहीं होता था लेकिन उस काम को करने में सन्तुष्टि अधिक थी क्योंकि यह अहसास होता था कि मैं अपने दम पर काम कर रही हूँ औऱ यह मेरा आत्मविश्वास बढ़ाता था।

युवाओं पर दबाव है. नहीं होना चाहिए

जरूरी है कि हम अपनी सामाजिक सीमाओं को तोड़कर अपनी क्षमताओं को जानें। मैंने देखा है कि आज के युवाओं को सही समय पर पर सही व्यक्ति का मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। उन पर दबाव है जो नहीं होना चाहिए…उनको समझना चाहिए कि कोई क्षेत्र छोटा या बड़ा नहीं होता। हर प्रतिभा का अपना महत्व है।

अधिकारों के प्रति जागरूक हो महिलाएं

मुझे लगता है कि महिलाएं पहले से ही काफी सशक्त हैं और पूरी दुनिया में अच्छा काम कर रही हैं। संघर्षशील महिलाओं को मेरा सन्देश होगा कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और उसका महत्व समझें।

सफलता की ओर हर एक नया कदम ही उपलब्धि है

मुझे लगता है कि सफलता की ओर बढ़ता हुआ हर नया कदम आपकी उपलब्धि है। मैंने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया है। वर्ष 2012 में 123 ग्रीटिंग्स डॉट क़म में और 2019 में विमेन ऑन्ट्रोप्रेनियर का अवार्ड पाना एक उपलब्धि है।

अपने लिए काम कीजिए और अपना महत्व बढ़ाइए

दूसरों के हिसाब से अपना आकलन मत करिए। आगे बढ़िए और अपना महत्व बढ़ाइए। किसी और के लिए नहीं अपने लिए काम कीजिए।