कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया 15 अक्टूबर के बाद शुरू होने की संभावना है। इसी बीच भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में निर्वाचन अधिकारियों, विशेषकर बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के चयन में तय मानकों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत को एक नया पत्र भेजकर इन पदों के चयन से जुड़ी विस्तृत दिशानिर्देशों को दोहराया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों ने शनिवार को इसकी पुष्टि की है।
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, बीएलओ के चयन में प्राथमिकता स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारियों को दी जानी चाहिए, जिनमें सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं। केवल उन्हीं परिस्थितियों में संविदा (ठेका) कर्मचारियों को बीएलओ नियुक्त करने की अनुमति दी जा सकती है, जब किसी जिले या क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में स्थायी कर्मचारी उपलब्ध न हों। हालांकि, इस विकल्प को अपनाने से पहले संबंधित जिले के जिलाधिकारी —जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं —को यह स्पष्ट कारण बताना होगा कि संविदा कर्मचारी की नियुक्ति क्यों आवश्यक है और इस पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। इसी तरह, ईआरओ का चयन केवल पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस (कार्यकारी) के अधिकारियों में से किया जा सकेगा। ये अधिकारी कम से कम उपमंडलाधिकारी (एसडीएम), उपमंडल अधिकारी या ग्रामीण विकास अधिकारी के पद से नीचे के नहीं होने चाहिए। वहीं, पश्चिम बंगाल भाजपा इकाई ने लंबे समय से बीएलओ के चयन में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने निर्वाचन आयोग का ध्यान ईआरओ चयन में कथित गड़बड़ियों की ओर दिलाया। अधिकारी ने कहा कि कई मामलों में वरिष्ठता के सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। उन्होंने 226 ऐसे ईआरओ की सूची भी सौंपी है, जिनकी नियुक्ति उनके अनुसार आयोग के तय दिशा-निर्देशों के विपरीत की गई। अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस तरह की अनियमितताओं ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ईआरओ व बीएलओ चयन में नियमों से कोई समझौता नहीं : चुनाव आयोग
वर्षों बाद दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में फूटेंगे पटाखे
आईआईएसईआर कोलकाता ने कैंसर से लड़ने के लिए विकसित किया ‘फ्रेंडली बैक्टीरिया’
कोलकाता। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) कोलकाता की एक टीम ने कैंसर के इलाज में एक नई और प्रभावशाली पहल करते हुए इंजीनियर्ड प्रोबायोटिक्स तैयार किए हैं। इस परियोजना का नाम रिसेट (रिसेट – ट्यूमर माइक्रो एनवायरनमेंट की दमनकारी परिस्थितियों को पुनःसृजित करना) रखा गया है। इसका उद्देश्य केवल ट्यूमर का पता लगाना ही नहीं, बल्कि उसकी गतिविधियों को बाधित कर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को पुनः सक्रिय करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर अक्सर टी रेगुलेटरी कोशिकाओं (टीरेग्स) के पीछे छिपकर शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को दबा देता है, जिससे रासायनिक और प्रतिरक्षा आधारित उपचार कम प्रभावी साबित होते हैं। आईआईएसईआर कोलकाता की टीम ने ऐसे ‘फ्रेंडली बैक्टीरिया’ तैयार किए हैं, जो ट्यूमर की मौजूदगी का पता लगा सकते हैं और टीरेग्स की गतिविधियों को बाधित कर सकते हैं। इन बैक्टीरिया को जीवित दवाओं के रूप में तैयार किया गया है जो सीधे शरीर के अंदर कैंसर से लड़ते हैं। टीम ने उपचार की प्रभावशीलता पर नजर रखने के लिए एक निगरानी प्रणाली भी विकसित की है, जिससे उपचार और निगरानी एक साथ संभव हो सके। यह कदम कैंसर उपचार में सटीक और प्रभावी इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। टीम ने प्रयोगशाला की सीमाओं से परे जाकर ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जन, कैंसर सर्वाइवर, स्वयंसेवी संगठन और मरीज सहायता समूहों के साथ सक्रिय संवाद किया। उन्होंने स्कूलों में कैंसर जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षा अभियान जैसे सामाजिक अभियान भी चलाए। इन प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया कि तैयार की गई थेरेपी वैज्ञानिक रूप से मजबूत, नैतिक रूप से जिम्मेदार और सामाजिक रूप से प्रासंगिक हो। टीम के एक सदस्य ने बताया “हमारा काम यह दर्शाता है कि लक्षित माइक्रोबियल थेरेपी कैंसर उपचार की पूरी नई दिशा खोल सकती है। टीरेग्स मार्ग को लक्षित करके हम उपचार को सुरक्षित, प्रभावी और सभी के लिए उपलब्ध बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।” आईआईएसईआर कोलकाता की 11 सदस्यीय अंडरग्रेजुएट टीम इस परियोजना को आईजेम ग्रैंड जैम्बोरी-2025 में प्रस्तुत करेगी, जो विश्व की सबसे बड़ी सिंथेटिक जीवविज्ञान प्रतियोगिता है और इस अक्टूबर पेरिस में आयोजित होगी। टीम इस मंच पर अपने संस्थान और भारत का प्रतिनिधित्व करेगी
बंगाल में सात दिन में पूरी करें एसआईआर की तैयारी : चुनाव आयोग
कोलकाता । चुनाव आयोग की टीम चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए मंगलवार रात कोलकाता पहुँची। इस टीम में उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती, आयोग की आईटी विंग की महानिदेशक सीमा खन्ना, आयोग के सचिव एसबी जोशी और उप सचिव अभिनव अग्रवाल शामिल हैं। बुधवार सुबह ज्ञानेश ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और जिलाधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक की। आयोग ने पहले संकेत दिया था कि राज्य में एसआईआर कुछ ही दिनों में शुरू हो सकता है। बुधवार की बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया। उत्तर बंगाल में हालिया स्थिति के कारण, अधिकांश उत्तरी जिलों के डीईओ बुधवार की बैठक में उपस्थित नहीं थे। बाकी जिलों के साथ बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में ज़िलेवार इस बात पर चर्चा की गई कि अब तक प्रत्येक ज़िले ने इस संबंध में कितनी तैयारी की है। इतना ही नहीं, प्रत्येक ज़िले को अगले एक सप्ताह के भीतर अधिकांश तैयारी कार्य पूरा करने की समय सीमा दी गई है। यानी, एसआईआर की सभी तैयारियाँ अगली 15 तारीख तक पूरी कर लेनी होंगी। ज्ञानेश ने निर्देश दिए कि अधिसूचना जारी होने के बाद किसी भी प्रकार की देरी या टालमटोल नहीं होनी चाहिए। एसआईआर अधिसूचना प्रकाशित होने के चार से पाँच दिनों के भीतर ज़िलेवार गणना प्रपत्रों की छपाई का कम से कम 30 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया जाना चाहिए। प्रत्येक ज़िले में प्रपत्र अलग से छापे जाएँगे। ज्ञानेश ने ज़िलाधिकारियों से यह भी जानकारी देने को कहा कि क्या उनके ज़िलों में मुद्रण के लिए बुनियादी ढाँचा उपलब्ध है। गौरतलब है कि बिहार में प्रपत्र एक ही स्थान से मुद्रित करके प्रत्येक ज़िले में भेजे गए थे। हालाँकि, बंगाल में निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक ज़िले में गणना प्रपत्र अलग से छापे जाएँगे। प्रत्येक मतदाता प्रपत्र की सॉफ्ट कॉपी दिल्ली से ईआरओ को अलग से भेजी जाएगी। पोर्टल पर अपलोड करने के बाद उन्हें मुद्रित किया जाएगा। मुद्रण के बाद, प्रपत्र बूथ स्तरीय अधिकारियों या बीएलओ को दिया जाएगा। अंत में, बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म बाँटेंगे। राज्य में वर्तमान में लगभग 7.65 करोड़ मतदाता हैं। दोगुने फॉर्म छापे जाएँगे। प्रत्येक मतदाता के लिए दो आवेदन पत्र छापे जाएँगे। एक मतदाता के पास रहेगा। दूसरा बीएलओ स्वयं लाएँगे। इसके अलावा, बिहार का हवाला देते हुए, अधिकारियों को बार-बार बताया गया है कि पूरी प्रक्रिया जानने के बावजूद, बिहार में जिन भी अधिकारियों पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया था, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की गई है। अगर बंगाल में भी किसी अधिकारी पर ऐसे आरोप लगे तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, तबाह हुए उत्तर बंगाल के हालात को देखते हुए, वहाँ के ज़िला मजिस्ट्रेट और अन्य चुनाव अधिकारियों को बुधवार की बैठक से छूट दी गई है। क्योंकि लगभग सभी राहत और पुनर्वास कार्यों में व्यस्त हैं। आयोग इस महीने के अंत में उत्तर बंगाल के लिए एक अलग बैठक बुला सकता है।
एसिड हमले और दहेज उत्पीड़न के मामले में बंगाल आगे : एनसीआरबी
नयी दिल्ली । नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2023 की रिपोर्ट हाल ही में सोमवार (29 सितंबर 2025) को जारी हुई है। रिपोर्ट बताती है कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में हल्की कमी आई है। हालाँकि, तेजाब हमलों के मामलों में पश्चिम बंगाल लगातार सबसे आगे बना हुआ है, जो चिंता की बात है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेजाब हमलों के मामलों में पश्चिम बंगाल लगातार सबसे आगे बना हुआ है। साल 2023 में पूरे देश में तेजाब हमले के 207 मामले दर्ज हुए। इनमें से 57 मामले अकेले पश्चिम बंगाल के थे। इसका मतलब है कि देश के चौथाई से ज्यादा मामले सिर्फ बंगाल में हुए। इन 57 हमलों में 60 महिलाएँ पीड़ित थीं। तेजाब हमलों में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा, जहाँ 31 मामले दर्ज हुए। 2018 से ही बंगाल में यह स्थिति बनी हुई है। अभी एक माह पहले की बात है जब टीएमसी नेता अब्दुर रहीम बख्शी ने भाजपा विधायक को आँख फोड़ने और तेजाब से जलाने की धमकी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब हमलों को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए हैं, जिसे लक्ष्मी बनाम भारत सरकार केस के तहत जारी किया गया था। इन नियमों में बिना लाइसेंस के तेजाब बेचना मना है। अगर बेचा जाता है, तो खरीदार का नाम, पता और बेची गई मात्रा का रिकॉर्ड रखना जरूरी है। इसके बावजूद, खासकर पश्चिम बंगाल में तेजाब की बिक्री पर ठीक से निगरानी नहीं हो रही है। हाल ही में कोलकाता की एक दुर्गा पूजा में भी तेजाब हमले की पीड़िताओं की पीड़ा को दर्शाया गया था। पीड़ितों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर सख्त कार्रवाई की माँग की है। पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों में मामूली गिरावट आई है। 2023 में 34,691 मामले दर्ज हुए, जो 2022 के 34,738 मामलों से थोड़े कम हैं। राज्य में अपराध दर (हर एक लाख महिलाओं पर) 71.3% रही।
वहीं, दहेज उत्पीड़न (धारा 498 ए – पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) के मामले दर्ज होने में भी बंगाल का नाम राज्यों की लिस्ट में ऊपर है। इस धारा के तहत बंगाल में 19,698 मामले दर्ज हुए। यह संख्या उत्तर प्रदेश (19,889 मामलों) के बाद देश में दूसरी सबसे ज्यादा है। हालाँकि, दहेज उत्पीड़न की पीड़ितों की संख्या (20,462) में पश्चिम बंगाल पूरे देश में पहले स्थान पर है।
बिहार में बजा चुनावी बिगुल, 6 और 11 नवंबर को मतदान
– 14 नवंबर को आएंगे नतीजे
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। प्रथम और द्वितीय चरण का मतदान क्रमशः 6 और 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। यह जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को दी। ज्ञानेश कुमार ने यहां के विज्ञान भवन में सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को 122 सीटों पर मतदान होगा। बिहार विधानसभा चुनाव पूरी पारदर्शिता और शांति के साथ कराए जाएंगे। राज्य में कुल 7.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिला और 1,725 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। इसके अलावा 7.2 लाख दिव्यांग मतदाता, 4.04 लाख 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता, 14 हजार 100 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता और 1.63 लाख सेवा मतदाता हैं। राज्य में 18 से 19 वर्ष की आयु के 14.01 लाख और 20 से 29 वर्ष की आयु के 1.63 करोड़ मतदाता हैं। इस चुनाव में करीब 14 लाख मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। नए मतदाताओं को 15 दिनों के भीतर वोटर कार्ड प्रदान किए जाएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राज्य में कुल 90,712 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 76,801 ग्रामीण क्षेत्रों और 13,911 शहरी क्षेत्रों में हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर औसतन 818 मतदाता होंगे। इसके अलावा 292 दिव्यांग, 38 युवा और 1,044 महिला संचालित मतदान केंद्र बनाए गए हैं। साथ ही, 1,350 आदर्श मतदान केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की सुविधा उपलब्ध होगी ताकि निगरानी सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि बिहार ने मतदाता सूची को शुद्ध करने के मामले में पूरे देश के लिए एक मिसाल पेश की है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों को अद्यतन किया गया है। मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों को दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने का अवसर दिया गया था। अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई। नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक वोटर लिस्ट में नाम जोड़ा जा सकता है, लेकिन अंतिम सूची जारी होने के बाद कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा। बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, जिनमें 38 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) और दो सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग की इस पत्रकार वार्ता में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने विश्वास जताया कि आयोग की पूरी टीम और राज्य प्रशासन मिलकर बिहार में निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराएंगे।
बंगाल की जेलों में हैं सबसे ज्यादा विदेशी कैदी, बांग्लादेशी सबसे ज्यादा
-एनसीआरबी की रिपोर्ट में खुलासा
-जेलों में क्षमता से अधिक कैदी
कोलकाता । देश भर के कई जेलों में अनगिनत कैदी बंद हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे ज्यादा विदेशी कैदी किस राज्य में हैं? राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
एनसीआरबी ने भारतीय जेल सांख्यिकी 2023 की रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार, सबसे ज्यादा विदेशी कैदी पश्चिम बंगाल की जेल में बंद हैं। भारत में कुल 6,956 विदेशी कैदी हैं, जिनमें से 2,508 विदेशी कैदी (लगभग 36 प्रतिशत) पश्चिम बंगाल के सुधार गृहों में कैद हैं। पश्चिम बंगाल की जेल में बंद कुल विदेशी कैदियों में ज्यादातर कैदी बांग्लादेशी हैं, जो अवैध रूप से भारत में घुस आए थे। अब उनके खिलाफ भारत में मुकदमा चल रहा है। पश्चिम बंगाल की जेल में 25,774 कैदी बंद हैं, जिनमें 9 प्रतिशत विदेशी नागरिक हैं। इनमें 778 बांग्लादेशी कैदियों के खिलाफ अपराध साबित हो चुके हैं और 1,440 के खिलाफ मामला विचाराधीन है। पश्चिम बंगाल की जेल में बंद विदेशी नागरिकों में दूसरे नंबर पर म्यांमार से आए लोग हैं। भारत और बांग्लादेश की सीमा दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो लगभग 5000 किलोमीटर लंबी है। इसका ज्यादातर हिस्सा पश्चिम बंगाल से लगता है। यही वजह है कि कई बांग्लादेशी अवैध तरीके से पश्चिम बंगाल में घुस आते हैं। इन विदेशी कैदियों में कई महिलाएं भी मौजूद हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की जेलों में क्षमता से कहीं अधिक कैदी मौजूद हैं। 2023 में कैदियों की संख्या 120 प्रतिशत आंकी गई है। राज्य की 60 जेलों की क्षमता 21,476 कादियों की है, लेकिन इनमें 25,774 कैदी बंद हैं। वहीं, राज्य की एकमात्र महिला जेल में 110 प्रतिशत से अधिक कैदी मौजूद हैं। इस जेल में कुल 796 महिला कैदी हैं, जिनमें 204 विदेशी और 12 ट्रांसजेंडर महिलाएं भी शामिल हैं।
जीएसटी सुधारों से त्योहारी सीजन में टूटा 10 साल की बिक्री का रिकॉर्ड
नयी दिल्ली । अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का अर्थव्यवस्था पर मजबूत प्रभाव दिखने लगा है और इससे चालू त्योहारी सीजन में रिकॉर्ड बिक्री देखने को मिली है। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से रविवार को दी गई। अर्थशास्त्री विनोद रावल ने कहा कि नए जीएसटी सुधार के लाभ जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “त्योहारों सीजन शुरू हो चुका है। नवरात्रि के दिनों में आमतौर पर 45 प्रतिशत त्योहारी बिक्री होती है, इस बार पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है।” रावल ने कहा, “मारुति ने 1,65,000 कारें डिलीवर की हैं, महिंद्रा की बिक्री पिछले साल की तुलना में 60 प्रतिशत बढ़ी है, हुंडई ने एसयूवी सेगमेंट में 72 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है और टाटा ने 50,000 वाहन बेचे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी का उद्देश्य “एक राष्ट्र, एक कर” था और नए जीएसटी सुधार ने सेस को समाप्त करके सिस्टम को सरल बना दिया है। निसान इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक अरुण मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी सुधार ने ऑटोमोबाइल उद्योग को काफी बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा, “95 प्रतिशत वाहनों की कीमतों में 8-10 प्रतिशत की गिरावट आई है। पहली नवरात्रि पर त्योहारी सीजन की शुरुआत के बाद से, उद्योग में मांग में तेज वृद्धि देखी गई है, जो कम कीमतों और चल रहे त्योहारी ऑफर्स के कारण है।” अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों ने न केवल कर संरचना को सरल बनाया है, बल्कि उपभोक्ता विश्वास को भी मजबूत किया है, जिससे एक मजबूत त्योहारी सीजन का आधार तैयार हुआ है।
बिहार को मिलीं ६२ हजार करोड़ रुपये की युवा-केंद्रित योजनाएं
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ६२ हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न युवा-केंद्रित योजनाओं का शुभारंभ करते हुए कहा कि एनडीए सरकार का संकल्प है कि अब बिहार का युवा अपने ही राज्य में सम्मानजनक रोजगार पाएगा और पलायन का दौर समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि कभी शिक्षा और रोजगार के अभाव में लाखों युवाओं को बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों की ओर जाना पड़ा था लेकिन आज राज्य विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री ने यह बातें यहां विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कौशल दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर उन्होंने देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के ४६ टॉपर छात्रों को सम्मानित किया। मोदी ने कहा कि यह समारोह भारत में कौशल विकास को नई प्रतिष्ठा देने का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार परिवर्तन (पीएम-सेतु) योजना की शुरुआत की, जिसके तहत ६० हजार करोड़ रुपये के निवेश से देशभर के १,००० आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा। इस मॉडल में २०० हब आईटीआई और ८०० स्पोक आईटीआई शामिल होंगे। इनके माध्यम से आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल लर्निंग सिस्टम और इनक्यूबेशन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मोदी ने कहा, च्च्पीएम-सेतु भारत के युवाओं को विश्व की स्किल डिमांड से जोड़ेगा।ज्ज् उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के आईटीआई में १७० ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है और पिछले ११ वर्षों में डेढ़ करोड़ से अधिक युवाओं को स्किल ट्रेनिंग मिल चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि २०१४ तक देश में १०,००० आईटीआई थीं, जबकि पिछले एक दशक में ५,००० और स्थापित की गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में बिहार का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की युवा आबादी देश की शक्ति है। प्रधानमंत्री ने बिहार के लिए कई नई योजनाओं और परियोजनाओं का शुभारंभ किया, जिनमें मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना और बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत हर साल पांच लाख स्नातक युवाओं को दो साल तक एक हजार मासिक भत्ता और मुफ्त कौशल प्रशिक्षण मिलेगा, जबकि क्रेडिट कार्ड योजना में छात्रों को ४ लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बिहार युवा आयोग और जन नायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय का भी उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक स्तर का कुशल कार्यबल तैयार करेगा। उन्होंने पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत बिहार के चार विश्वविद्यालयों- पटना विश्वविद्यालय, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (मधेपुरा), जयप्रकाश विश्वविद्यालय (छपरा) और नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय (पटना)- में नई शैक्षणिक और अनुसंधान सुविधाओं की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में बिहार सरकार के ४,००० से अधिक नवनियुक्त उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, साथ ही कक्षा ९ और १० के २५ लाख छात्रों को ४५० करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का प्रत्यक्ष लाभ भी हस्तांतरित किया।
आखिर कहां चले गये भोजपुर के 38 हजार मतदाता?
– थर्ड जेंडर के 72 मतदाता लापता
-एसआईआर के बाद 1.41 लाख कम हुए वोटर
-सबसे ज्यादा मतदाता शाहपुर और अगिआंव में घटे
आरा(भोजपुर)। भोजपुर जिले में विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान का असर 30 सितंबर को की गई, अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में साफ दिख रहा है। पिछले पांच वर्ष पहले वर्ष 2020 में हुए विधानसभा चुनाव और इस बार के लिए होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या लगभग 38 हजार कम हो गई है। यह डाटा अपने आप में बड़ा अंतर है। एक तरफ जहां पांच वर्षों में लगभग एक लाख मतदाताओं की संख्या बढ़नी चाहिए थी, वहीं दूसरी तरफ बढ़ने के बजाए लगभग 38 हजार संख्या कम हो गई है। 30 सितंबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार भोजपुर जिले में इस बार सभी विधानसभा को मिलाकर कूल मतदाताओं की संख्या 20,80,605 रह गई है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान वर्ष 2020 में मतदाताओं की संख्या 21, 18, 504 थी। पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में 37,899 मतदाता कम मतदान करेंगे। सातों विधानसभा के डाटा पर नजर डाले तो सबसे ज्यादा मतदाताओं की संख्या शाहपुर विधानसभा में 12,108 उसके बाद अगिआंव विधानसभा में 5891, उसके बाद तरारी विधानसभा में 5110, उसके बाद बड़हरा विधानसभा में 4843, आरा विधानसभा में 4116, जगदीशपुर विधानसभा में 3488 और सबसे कम संदेश विधानसभा में महज 2343 मतदाता घटे हैं। जिले में विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरु होने के पहले कुल मतदाताओं की संख्या 22, 21,986 थी। 30 सितंबर को प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार कुल मतदाताओं की संख्या घटते हुए 20,80,605 हो गई है। इस प्रकार पूर्व के मतदाता सूची के अनुसार इस बार 1,41,381 मतदाताओं की संख्या घट गई है। इसके पहले एक अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन हुआ था उस समय लगभग 1.90 लाख मतदाताओं का नाम कटा था। अब उसमें कुछ कमी आते हुए वह संख्या 1,41,381 पर घटकर रह गई है। भोजपुर जिले में थर्ड जेंडर के 72 मतदाताओं का नाम इसबार की सूची से कट गया है। ये सभी मतदाता कहां चले गए इसका कोई अता पता नहीं है। वर्ष 2020 के चुनाव में इनकी कुल संख्या 100 थी। इस बार के चुनाव में घटते हुए मात्र इनकी संख्या 28 रह गई है। इस प्रकार 72 थर्ड जेंडर वोटर का नाम कटा है।




