Thursday, April 9, 2026
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75 साल की वृद्धा ने स्तन कैंसर को दी दो-दो बार मात

कोलकाता : 75 साल की एक वृद्धा ने स्तन कैंसर को दो-दो बार मात देकर जिंदादिली की मिसाल पेश की है। बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर इलाके की रहने वाली वह वृद्धा 2017 में स्तन कैंसर से पीड़ित हो गयी थी। मामला इतना गंभीर था कि ऑपरेशन कर उनके स्तन को अलग करना पड़ा था।

चिकित्सकीय भाषा में इस तरह के ऑपरेशन को ‘मोडिफाइड रैडिकल मैसेकटामी’ कहा जाता है। ऑपरेशन के बाद वृद्धा स्वस्थ हो गई थीं लेकिन ढाई साल बीतते न बीतते कटे स्तन वाली जगह पर ट्यूमर पैदा हो गया। परीक्षा करने पर फिर से कैंसर पनपने का पता चला, हालांकि वृद्धा ने इस बार भी हार नहीं मानी। निजी अस्पतालों में इलाज काफी महंगा था इसलिए वृद्धा के परिजन उसे कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले आए।

अस्पताल के ब्रेस्ट एंड एंडोक्राइन सर्जरी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉक्टर धृतिमान मैत्र ने बताया कि सबसे पहले हमने बायोस्पी कर कैंसर की पुष्टि की। गत सोमवार को इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। वृद्धा अब पूरी तरह स्वस्थ हैं, हालांकि उनके स्वास्थ्य पर कड़ी नजर रखी जा रही है।’

डॉक्टर मैत्र ने आगे कहा- ‘कोरोना काल में इस तरह का ऑपरेशन बेहद मुश्किल था लेकिन महिला मरीज जीना चाहती थी इसलिए हमने भी इस चुनौती को स्वीकार किया। मेडिकल जांच में वृद्धा की छाती की हड्डी में कैंसर फैलने का पता चला था।इस कारण उस हिस्से को काटकर अलग किया गया, जिसके कारण उनकी छाती में एक बड़ा सा गड्ढा हो गया। बहुत सी टिश्यू मांसपेशियों को भी ऑपरेशन करके अलग करना पड़ा है। पेट के निचले हिस्से के मांस को काटकर छाती में बने गड्ढे को भरा जाएगा।

(साभार – दैनिक जागरण)

बहनों को तोहफे में दें वित्तीय सुरक्षा वाला प्यार

बहनों को तोहफा देना हो तो सबसे बेहतर है कि आप वित्तीय स्तर पर उसे मजबूत बनाएं। आम तौर पर रक्षा बन्धन या भाई दूज, जन्मदिन पर ही ऐसे मौके आते हैं जब आप सोचते हैं कि आखिर आप बहनों को क्या दें। भारतीय परिवारों में यह मान लिया जाता है कि बहनों की जरूरत अच्छे भोजन, शौक, पढ़ाई या शादी तक सीमित है पर आज जब बहनें आगे बढ़ रही हैं तो उनको पंख देने के लिए आप ही आगे आ सकते हैं औऱ वह पंख है वित्तीय सुरक्षा जो आप अपनी छोटी या बड़ी बहन को दे सकते हैं या अपने घर की किसी भी महिला को दे सकते हैं –

‘कोरोना कवच’ पॉलिसी से दें स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी
सभी जनरल और स्टैंड लोन हेल्थ इंश्योरेंस कम्पनियों ने कोरोना कवच इंश्योरेंस पॉलिसी को लॉन्च किया है। इसे कोरोना काल में लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें कोरोना संक्रमित पाए जाने पर अस्पताल में भर्ती, भर्ती होने से पहले और बाद और घर में देखभाल सहित इलाज से जुड़े अन्य खर्चे कवर होंगे। कोरोना कवच पॉलिसी के लिए इंश्योरेंस की राशि न्यूनतम 50 हजार रुपये और अधिकतम 5 लाख रुपये है। इंश्योरेंस की अवधि कम से कम 3.5 महीने, 6.5 महीने और 9.5 महीने हो सकती है। इसमें मूल कवर का प्रीमियम 447 से 5,630 रुपये रहेगा।
बहन के नाम करा सकते हैं एफ डी या आर डी
अगर आपकी कोई छोटी बहन है तो आप भाई-दूज पर उसके लिए निवेश करके उसे वित्तीय सुरक्षा दे सकते हैं। इसके लिए आप फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रिकरिंग डिपॉजिट (RD) में से अपनी सुविधा के हिसाब से निवेश कर सकते हैं। इन दोनों में ही आपको लगभग सामान ब्याज मिलता है। FD और RD दोनों फिक्स्ड-इनकम निवेश हैं, ये दोनों मैच्योरिटी पर गारंटेड रिटर्न देते हैं। FD और RD पर दी जाने वाली ब्याज दरें भी लगभग समान हैं। इन दोनों में ही आप जॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं। ये दोनों ही निवेश किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में किए जा सकते हैं। इसके अलावा आप अपनी बहन के लिए SIP या म्यूचुअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड करें गिफ्ट
अगर आपकी कोई छोटी बहन है जो कॉलेज में पढाई कर रही है और तो उसे उसकी आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए उन्हें क्रेडिट कार्ड गिफ्ट दे सकते हैं। कई लोग क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग होने के डर से उसका इस्तेमाल करने से घबराते हैं, ऐसे में आप उन्हें समझदारी के साथ क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल के फायदे बताते हुए उसे अपने पास रखने के लिए तैयार कर सकते हैं। इससे पैसों की जरूरत पड़ने पर उसे परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। आप क्रेडिट कार्ड की लिमिट अपनी बहन की जरूरतों के आधार पर तय कर सकते हैं।
बहन के मोबाइल पर कराएं पूरे साल का रीचार्ज
अगर आप इस दिन अपनी बहन को कोई ऐसा तोहफा देने की योजना बना रहे हैं जो आपके बजट में भी हो और उनके काम का भी हो, तो आप उनका मोबाइल सालभर के लिए रीचार्ज करा सकते हैं। इससे उसे बार-बार रीचार्ज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जियो, आइडिया-वोडाफोन और एयरटेल के पास 365 दिन की वैलिडिटी वाले कई रिचार्ज प्लान हैं। इन प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग, डाटा और फ्री एसएमएस जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं। आप अपनी बहन की जरूरत के हिसाब से रीचार्ज प्लान चुन सकते हैं।
सेविंग बैंक अकाउंट खुलवाएं
अगर आपकी बहन का सेविंग अकाउंट (बचत खाता) नहीं है तो आप उसे एक निश्चित रकम के साथ किसी बैंक में बचत खाता खोलकर दे सकते हैं। इससे उसे हमेशा नकद लेकर चलने की जरूरत नहीं होगी और उसे जमा पर ब्याज भी मिलता रहेगा।

(मूल लेख में कुछ परिवर्तन के साथ साभार – दैनिक भास्कर)

बांग्ला सिनेमा का एक युग समाप्त, नहीं रहे वयोवृद्ध अभिनेता सौमित्र चटर्जी

कोलकाता :   दिग्गज बांग्ला फिल्म अभिनेता सौमित्र चटर्जी (85) का रविवार को कोलकाता के अस्पताल में निधन हो गया। सौमित्र को करीब एक महीने पहले कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से उनकी हालत में उतार-चढ़ाव चल रहा था। शनिवार को अस्पताल ने उनकी हालत बेहद गंभीर बताई थी। बुलेटिन में कहा था कि कोई चमत्कार ही उन्हें बचा सकता है।
सौमित्र को 6 अक्टूबर को अस्पताल लाया गया था। 7 अक्टूबर को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 15 अक्टूबर को वे कोरोना से मुक्त हो गए थे। चटर्जी ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में ही एक सीरीज की शूटिंग पूरी की थी। वे परमब्रत चट्टोपाध्याय की फिल्म ‘अभिज्ञान’ की शूटिंग भी कर रहे थे। इसके अलावा वह अपनी बायोपिक और वृत्तचित्र पर भी काम कर रहे थे।
सौमित्र को खासकर ऑस्कर विजेता निर्देशक सत्यजीत रे के साथ कोलेबोरेशन के लिए जाना जाता है। दोनों ने साथ में 14 फिल्मों में काम किया था। ये बांग्ला फिल्में हैं – ‘अपुर संसार’, ‘देवी’, ‘तीन कन्या’, ‘अभिजन’, ‘चारुलता’, ‘कुपुरुष’, ‘अरंयेर दिन रात्रि’, ‘अशनी संकेत’, ‘सोनार केला’, ‘जोय बाबा फेलुनाथ’, ‘हीरक राजार देशे’, ‘घरे बैरे’, ‘गणशत्रु’ और ‘शाखा प्रोशाखा’।
चटर्जी ने अपने करियर में करीब 100 फिल्मों में काम किया है, जिनमें दो हिंदी फिल्में ‘निरुपमा’ और ‘हिंदुस्तानी सिपाही’ भी शामिल हैं। उन्होंने हिंदी में ‘स्त्री का पत्र’ नाम से फिल्म डायरेक्ट भी की है।
राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री ने शोक जताया
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘सौमित्र चटर्जी के निधन से भारतीय सिनेमा ने एक दिग्गज अभिनेता खो दिया है। अपु ट्रायोलॉजी और सत्यजीत राय की फिल्मों में यादगार अभिनय के लिए याद किया जाएगा।’ 2012 में चटर्जी को मनोरंजन जगत का सबसे बड़ा सम्मान दादा साहब फाल्के सम्मान मिला। तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजे गए। 2004 में भारत सरकार ने सौमित्र को पद्म भूषण से सम्मानित किया।

जापान के नोबेल विजेता मासातोशी कोशिबा का निधन

टोक्यो : जापान के एस्ट्रो फिजिसिस्ट और फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार विजेता मासातोशी कोशिबा का गुरुवार को निधन हो गया। टोक्यो विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी है। हलांकि मौत के कारणों के बारे में नहीं बताया गया है। 94 वर्षीय कोशिबा ने सूर्य से निकलने वाली न्यूट्रीनो किरणों को लेकर परीक्षण के लिए विशालकाय अंडरग्राउंड रूम तैयार किया था। बता दें कोशिबा को 2002 में नोबेल पुरस्कार मिला था।

डब्ल्यूएचओ भारत में खोलेगा पारंपरिक दवाओं का वैश्विक शोध केंद्र

नयी दिल्ली : भारत में पारंपरिक दवाओं के शोध के वैश्विक केंद्र खोलने की विश्व स्वास्थ्य संगठन की घोषणा चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में भारत का निर्यात चीन के निर्यात का लगभग पांच फीसद है। जाहिर है वैश्विक शोध केंद्र खुलने के बाद आयुर्वेदिक दवाओं को आधुनिक चिकित्सा पद्धति रूप में न सिर्फ वैश्विक मान्यता मिलेगी, बल्कि दुनिया के वैश्विक बाजार में धाक भी जमेगी। आयुष मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को देखते हुए डब्ल्यूएचओ का भारत में शोध केंद्र खोलने का ऐलान सामान्य घटना नहीं है और इसका दूरगामी असर होगा। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को इस बात से समझा जा सकता है, उसकी तुलना में भारतीय पारंपरिक दवाओं का निर्यात महज पांच फीसद के आसपास है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से वैश्विक शोध केंद्र के लिए चीन की दावेदारी के मजबूत माना जा रहा था। लेकिन चीन के बजाय भारत को शोध का केंद्र बनाने का डब्ल्यूएचओ के फैसला वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते दबदबे का दिखाता है।
आयुष मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को देखते हुए डब्ल्यूएचओ का भारत में शोध केंद्र खोलने का ऐलान सामान्य घटना नहीं है और इसका दूरगामी असर होगा। आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को इस बात से समझा जा सकता है, उसकी तुलना में भारतीय पारंपरिक दवाओं का निर्यात महज पांच फीसद के आसपास है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से वैश्विक शोध केंद्र के लिए चीन की दावेदारी के मजबूत माना जा रहा था। लेकिन चीन के बजाय भारत को शोध का केंद्र बनाने का डब्ल्यूएचओ के फैसला वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते दबदबे का दिखाता है।

खेल मंत्रालय देगा 500 निजी अकादमियों को मदद

नयी दिल्ली : खेल मंत्रालय ने खेलो इंडिया योजना के तहत 500 निजी अकादमियों को अगले चार साल तक वित्तीय समर्थन देने का फैसला किया है। यह वित्तीय मदद 2020-21 वित्त वर्ष से लागू होगी।
इस मॉडल में कई पैमानों पर अकादमियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इनमें अकादमियों में खेले गए खिलाड़ियों की उपलब्धियां,अकादमियों के प्रशिक्षकों का स्तर जैसे पैमाने शामिल हैं।
स्कीम के तहत, साई और राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) मिलकर काम करेंगी। साई एनएसएफ के साथ चर्चा करेगी और अकादमियों को श्रेणियों में बांटने का काम करेगी।
इस पर खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, देश के अलग-अलग हिस्सों में कई छोटी-छोटी अकादमियाँ हैं जो खिलाड़ियों को पहचानने का और प्रशिक्षण देने का काफी अच्छा काम कर रही हैं। यह कदम सभी अकादमियों को प्रेरित करेगा, खासकर निजी अकादमियों को कि वह लगातार सुधार कर सकें।

भाद्राजून..जहाँ श्रीकृष्ण ने करवाया सुभद्रा और अर्जुन का विवाह

भगवान श्री कृष्ण को लेकर जालोर के इतिहास में कई कथाएं प्रचलित है। बताया जाता है भगवान श्री कृष्ण जिले के कई गाँवों से होकर गुजरे थे। महाभारत तथा पौराणिक कथानुसार आर्यों की यादव शाखा के नेता बलराम और श्री कृष्ण मरूकांतर ((रेगिस्तानी क्षेत्र))होकर गुजरे।

भाद्राजून अपभ्रंश शब्द है

पौराणिक कथाओं में ऐसा उल्लेख है कि कृष्ण भगवान भाद्राजून में अपनी बहन सुभद्रा से मिलने आए थे। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण की सहमति से जब अर्जुन यादव कुमारी सुभद्रा का हरण कर सुभद्रा-अर्जुन गाँव में दोनों ने विवाह किया था। इसी कारण इस स्थान का नाम सुभद्रा-अर्जुन पड़ा जो कालांतर में भाद्राजून हो गया। सुभद्रा का हरण करने की बात को लेकर भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र कृष्ण से नाराज हुए। तब भगवान कृष्ण सुभद्रा के पास गए। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण अपनी बहिन से मिलने इसी मार्ग से होते हुए गए थे।

अब यह छतरियाँ पुरात्व विभाग के संरक्षण में हैं
हर तरफ से पहाड़ियों से घिरा यह स्थान काफी सुरक्षिता माना जाता है

हल्देश्वर मठ के महंत शीतलाईनाथ के अनुसार भागवत कथा में वर्णित है कि भगवान श्री कृष्ण अपनी बहन के पास जाने से पहले हल्देश्वर मठ में कुछ देर विश्राम किया था। उन्होंने अपने रथ व घोड़े को हल्देश्वर मठ जालोर के पास छोड़ा था। यहां से वे जालोर स्थित जलंधरनाथजी के धुने पर दर्शन करने गए, जहां उन्होंने जलंधरनाथजी से आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे रायथल होते हुए भाद्राजून गए और अपनी बहन तथा अर्जुन को आशीर्वाद दिया।
नाथ बताते है कि ऐसा कहा जाता है उस समय हल्देश्वर मठ के आस पास जंगल ही था, जालोर किले की दूसरी तरफ था। मोहनलाल गुप्ता लिखित पुस्तक जालोर जिले का सांस्कृतिक इतिहास में सुभद्रा अर्जुन के भाद्राजून में विवाह करने तथा अपनी बहन सुभद्रा को आशीर्वाद देने से पूर्व कृष्ण का जालोर के वर्तमान हल्देश्वर मठ में विश्राम करने का वर्णन लिखा है।
यह स्थान महाभारतकाल में द्वारिका-हस्तिनापुर मुख्य मार्ग पर स्थित था।

कहा जाता है कि बलदेवजी का दैवीय हल किसी को भी 500 योजन की दूरी तक पकड़ लेता था। ऐसे में इस स्थान की दूरी द्वारिका से 500 योजन से अधिक होने के कारण श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस स्थान पर ही रुकने को कहा था। उस समय यह पर्वत अनेक ऋषि-मुनियों की तपोस्थलि हुआ करता था। तपस्वियों की उपस्थिति के बीच सुभद्रा व अर्जुन का गन्धर्व विवाह निकट के गाँव के पुरोहित ने सम्पन करवाया था।

सुभद्रा माता का मंदिर

विवाह उपरांत दक्षिणा रूप में अर्जुन ने पुरोहित को अपना शंख भेंट किया और  देवी सुभद्रा ने नाक की बाली भेंट स्वरूप दी थी। कालांतर में जिस स्थान पर पुरोहित रहते थे, उस स्थान का नाम शंख व बाली से शंखवाली पड़ा। वहीं धुम्बड़ा पर्वत स्थित जहां विवाह सम्पन हुआ उस स्थान का नाम सुभद्राअर्जुनपुरी पड़ा जो अपभ्रंश होते-होते वर्तमान में भाद्राजून के नाम से जाना जाता है। भाद्राजून गांव के निवट धुम्बड़ा पर्वत स्थित महाभारतकालीन सुभद्रा माता का ऐतिहासिक मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है।

 

 

कैमरे की नजर से आलोक पर्व की झलकियाँ

प्रतिष्ठा तिवारी

 


 

निखिता पांडेय

 

 

 

दिवाली पर कीजिए सबका मुँह मीठा

रेसिपी – सुनीता सुराना, क्रेजी फॉर चॉकलेट्स

काजू कतली
सामग्री : 200 ग्राम मिल्क पाउडर, 100 ग्राम चीनी, 20 – 25 काजू

विधि :  सबसे पहले काजू को जार में डालकर मिक्सर में बारीक पीस लें। उसके बाद पीसे हुए काजू और मिल्क पाउडर को एक बर्तन में डाल कर अच्छे से मिला लें। फिर गैस पर एक कढ़ाई रख दें कढ़ाई में चीनी को डाल दें और और उसी में 50 मिली पानी डालकर चीनी पानी को मिलाते हुए चीनी को अच्छे से गलाएं। जब चीनी गल जाए तो उसको एक तार की चाशनी बनने तक पकाएं।
अब उसमें मिक्स किए हुए काजू और मिल्क पाउडर को डाल दें और उसको चाशनी मिलाते हुए मध्यम आग पर लगभग 5 मिनट तक अच्छे से पकाएं। अब एक चम्मच देसी घी डालकर 2 मिनट तक और पकाएं जिससे काजू और मिल्क पाउडर अच्छे से पक कर गूथे हुए आटे जैसे बन जाएं। काजू और मिल्क पाउडर पकने के बाद उसे 5 मिनट तक ठंडा कर लें। मिश्रण को एक पॉलिथीन पर रखकर अच्छे से गूंथकर मसलें और फिर बर्फी को बेलन से मोटे और गोले आकार में बेल लें और चांदी का वर्क लगा दें। बर्फी को चाकू से काजू कतली के आकार में काट लें।

 

रेसिपी – संगीता तिवारी

मलाई सन्देश

सामग्री :   डेढ़ लीटर दूध, 1 लीटर छेना, चीनी चार चम्मच, 1 चम्मच वनिला एसेंस, 1 चम्मच गुलाब जल, 4-5 बारीक कटे बादाम, पिस्ता, और केसर के धागे

विधि :  छेना निकालकर मिक्सी में पीसकर मिला लें। चीनी मिलाकर मिश्रण बना लें। कड़ाही में डाल लें। मध्यम आँच में छेने को चलाएं और वनिला एसेंस चला लें। ध्यान रहे, छेना कड़ाही से चिपके नहीं। इसे अलग रखें। दूध को कड़ाही में डालें और लगातार चलाएं, इसमें चीनी अपनी स्वादानुसार मिला लें । आधा चम्मच गुलाबजल डालकर चला लें। बारीक कटे बादाम डालें। पहले से तैय़ार किया गया छेना मिलाएं, अच्छी तरह चला लें और सामान्य तापमान पर ठंडा करें। केसर औऱ पिस्ता से सजा लें। फ्रिज में ठंडा होने के लिए सन्देश को रखें और ठंडा ही परोसें।

एचआईटीके में आयोजित हुआ वर्चुअल प्रवर्तन कार्यक्रम

कोलकाता : हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोलकाता ने विद्यार्थी प्रवर्तन कार्यक्रम हाल ही में आयोजित किया। यह कार्यक्रम बी. टेक तथा एम.टेक के नये बैच के लिए वर्चुअल प्रणाली से जूम माध्यम से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एडुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रो वाइस चांसलर स्वामी आत्मप्रियनंदजी महाराज ने सम्बोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनको खुद को कमतर नहीं समझना चाहिए और दायित्व उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इनके साथ प्रधान अतिथि द असम रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. एस. पी, सिंह ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि असफलता, सकारात्मकता और परिश्रम की सफलता और खुशी की नींव रखते हैं। एचआईटीके के चेयरमैन पी. आर. अग्रवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में कल्याण भारती ट्रस्ट के निदेशक प्रबीर रॉय, सीईओ प्रदीप अग्रवाल, एचआईटीके के प्रिंसिपल डॉ. प्रणय चौधरीऔर रजिस्ट्रार डॉ.सुजीत कुमार बरुआ समेत कई अन्य अतिथि उपस्थित थे। विद्यार्थियों ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट में कार्यरत चन्द्रावली दत्ता तथा नासा जेट प्रोपल्सन लैबरोटरी में कार्यरत डॉ. चिरंजीत मुखर्जी के भी विचार सुने। दोनों ही एचआईटीके के पूर्व विद्यार्थी हैं।