कोलकाता : एक्रोपॉलिस मॉल ने स्ट्रीट फूड फेस्टिवल ‘चटपटा’ का दूसरा संस्करण हाल ही में आयोजित किया। ‘गो लेबनीज’, ‘सेनगुप्ताज’, ‘द गैले’, ‘ओपन ओवन’, ‘ड्रन्केन’ ‘पौष पार्बन’, और ‘ श्रीनाथ नाग” ने इस स्ट्रीट फूड फेस्टिवल में भाग लिया। इस फूड फेस्टिवल में इटालियन से लेकर भारतीय व्यंजन थे। एक्रोपॉलिस के जीएम के विजयन ने कहा कि ‘चटपटा’ के पिछले साल की सफलता के बाद यह दूसरा संस्करण आयोजित किया गया था। इस आयोजन को लेकर कोविड -19 से जुड़े सारे नियमों, सुरक्षा व सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किया गया।
नयी दिल्ली : उत्तरी दिल्ली में समयपुर बादली थाने में तैनात दिल्ली पुलिस की महिला हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका अब आउट-ऑफ टर्न प्रमोशन अब असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर बन गई हैं। आउट-ऑफ टर्न प्रमोशन पाने वाली वह दिल्ली पुलिस की पहली महिला पुलिसकर्मी हैं। सीमा ढाका को नई इंसेंटिव स्कीम के तहत तीन महीनों के अंदर 76 गुमशुदा बच्चों को ढूंढ निकालने के लिए यह प्रमोशन दिया गया है।
पुलिस कमिश्नर एस.एन. श्रीवास्तव ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सीमा की वर्दी पर स्टार लगाकर प्रमोशन के लिए उन्हें बधाई दी। सीमा ने कहा कि इतने दिन तक बना ब्रेक के काम करने का आज मुझे परिणाम मिल गया है। मैं इससे बेहद खुश हूं। गुमशुदा बच्चों को उनके माता-पिता के साथ फिर से मिलाना मुझे बहुत खुशी देता है। मुझे खुशी है कि पुलिस कमिश्नर ने मेरे काम को सराहा और पुरस्कृत किया। इससे दूसरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बढ़ौत जिले की रहने वाली सीमा ढाका की शादी शामली जिले के रहने वाले अनिक ढाका से हुई है। अनिक भी दिल्ली पुलिस की सेवा में कार्यरत हैं। सीमा को आउट और टर्न प्रमोशन की खबर से उनके मायके से लेकर ससुराल तक जश्न का माहौल है।
गौरतलब है कि इस साल पांच अगस्त को पुलिस आयुक्त एस.एन. श्रीवास्तव ने गुमशुदा बच्चों को खोजने के काम को प्रोत्साहित करने के लिए यह घोषणा की थी। इसके तहत कोई भी हेड कॉन्स्टेबल या कॉन्स्टेबल अगर एक कैलेंडर वर्ष में 14 साल से कम उम्र के न्यूनतम 50 लापता बच्चों को तलाश करेगा तो उसे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जाएगा। हालांकि, इन 50 बच्चों में 15 बच्चों की उम्र आठ साल से कम होनी चाहिए।
सीमा ढाका द्वारा बरामद किए गए बच्चे दिल्ली के विभिन्न थानाक्षेत्रों से गायब हुए थे और इन्हें बिहार, बंगाल एवं देश के अन्य हिस्सों से बरामद किया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगस्त से अब तक पूरी दिल्ली में 1440 बच्चे बरामद किए जा चुके हैं।
गोवा की पूर्व राज्यपाल, साहित्यकार और बीजेपी नेता मृदुला सिन्हा का गत 18 नवम्बर को 77 साल की उम्र में निधन हो गया। वह अगस्त 2014 से अक्टूबर 2019 तक गोवा की राज्यपाल रही थीं। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम दिग्गजों ने शोक जताया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सिन्हा के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट किया, ‘लोकसेवा को लेकर अपने प्रयासों के खातिर श्रीमती मृदुला सिन्हा याद की जाएंगी। वह एक कुशल लेखक भी थीं और साहित्य के साथ-साथ संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं। ओम शांति। उन्होंने पाँचवाँ स्तम्भ के नाम से एक सामाजिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया। सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमन्त्रित्व-काल में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष भी रहीं। उनकी पुस्तक एक थी रानी ऐसी भी की पृष्ठभूमि पर आधारित राजमाता विजया राजे सिन्धिया को लेकर एक फिल्म भी बनी थी। मृदुला जी को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से साहित्य भूषण सम्मान व दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार के अतिरिक्त अन्य भी कई सम्मान-पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
कोलकाता : साहित्य अकादमी, क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता में राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह के अवसर पर दस दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की गयी है। प्रर्शनीद का उद्घाटन गत 18 नवम्बर को हुआ और यह 27 नवंम्बर तक चलेगी। प्रदर्शनी का आयोजन प्रातः 10 बजे से शाम 6 बजे तक किया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रतिष्ठित बांग्ला साहित्यकार रामकुमार मुखोपाध्याय द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में असमिया, बांग्ला, संताली, मणिपुरी, नेपाली, ओड़िया, संताली, हिंदी, अंग्रेजी एवं उर्दू की पुस्तकें बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
सन 2000 से पहले के संस्करणों पर विशेष रूप से 75 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। 2000 से 2010 के दौरान प्रकाशित पुस्तकों पर 30 प्रतिशत तथा अन्य पुस्तकों पर 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। प्रदर्शनी में कलकत्ता विश्वविद्यालय, विद्यासागर विश्वविद्यालय, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधछात्र तथा कोलकाता निवासी लेखकों का लगातार आगमन हो रहा है, जो अकादमी द्वारा प्रदत्त विशेष छूट का लाभ उठाते हुए किताबें खरीद रहे हैं। कोविड महामारी के कारण लाॅकडाउन के पश्चात् अकादमी द्वारा यह पहला इस तरह का आयोजन है, जिसमें आम जन की भागीदारी हो रही है। कोविड से बचाव संबंधी निर्देशों का यथानुसार पालन करते हुए यह प्रदर्शनी लगाई गयी है।
कोलकाता : एनसीसी के 72 वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर कोलकाता बी ग्रुप मुख्यालय एनसीसी द्वारा एनसीसी क्लब हाउस कोलकाता में एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कैडेट्स में 178 एसडब्ल्यू और एसडी लड़कों और लड़कियों ने एक बड़े उद्देश्य के लिए रक्तदान किया। कोरोना के कारण इस वर्ष का कार्यक्रम वर्चुअल तरीके से आयोजित किया गया। महामारी को देखते हुए एनसीसी निदेशालय (पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम) सभी 6 मुख्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गये। सभी रक्तदाताओं का पहले स्वास्थ्य परीक्षण कमाण्ड हॉस्पिटल के डॉक्टरों और नर्सों द्वारा किया गया। जिन लोगों को स्वस्थ पाया गया, सिर्फ उनको ही रक्तदान करने की अनुमति मिली। प्रत्येक वर्ष के विपरीत इस वर्ष उत्सव ऑनलाइन हो रहा है। वर्तमान महामारी के सिलसिले में .जारी कार्यक्रम एनसीसी निदेशालय पश्चिम बंगाल और सिक्किम के तहत सभी छह समूह मुख्यालयों में आयोजित किए जाते हैं। एनसीसी कैडेट्स के साथ स्टाफ ऑफिसरों ने भी सहयोग दिया। यह जानकारी पीआरओ मेजर डॉ. बी.बी. सिंह ने दी।
कोलकाता : महामारी के बीच, बिड़ला हाई स्कूल (सीनियर सेक्शन) के शिक्षकों ने गत 18 नवंबर 2020 को एक आभासी माध्यम पर बाल दिवस मनाया। कार्यक्रम का विषय ‘खुशी’ था। बिड़ला हाई स्कूल की निदेशक मुक्ता नैन, प्रिंसिपल लवलीन सैगल और विभागाध्यक्षों ने ‘खुशी’ पर ’पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसने शब्द को आयामों के असंख्य योगदान दिए। कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन संगीत शिक्षकों द्वारा किया गया संगीत की प्रस्तुति ऑर्केस्ट्रा ’के माध्यम से की गयी था, जिसकी अध्यक्षता संगीत शिक्षक अनिंदो साहा ने की। इसके बाद राजश्री चौधरी ने एक “कुकरी शो” पेश किया, जिसमें एक इतालवी डेजर्ट- “लेचे फ्रिटा” प्रदर्शित किया गया। गायन संगीत काकली बनर्जी और रिया खेतान द्वारा प्रस्तुत किया गया था। अरुण सेन द्वारा एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन रखा गया। बच्चों को डांस परफॉर्मेंस, ‘उत्तान’, मिस्टर प्रलय सरकार, रश्मि तिवारी, शुभ्रा भौमिक, मलंचा मजूमदार, ललिता अग्रवाल, मधुमिता मित्र मंडल, अंकिता चक्रवर्ती और देबांजलि गुप्ता ने मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद एक लघु नाटक जो अर्कियोस्वामी, रोहन सेनगुप्ता, लॉरेंस छेत्री, स्पंदन बनर्जी, अनिर्बान भट्टाचार्य, लवलीन सैगल, पियाली सान्याल, सदाफ सिद्दीकी और तृषा नाथ द्वारा प्रस्तुत किया गया। फैशन शो, दिन का सबसे प्रतीक्षित आयोजन, एक अनोखे मिश्रण में रखा गया था, जहाँ शिक्षकों ने दशक की प्रसिद्ध हस्तियों का प्रतिनिधित्व किया और छात्रों को उन्हें पहचानना पड़ा। फैशन शो में भाग लेने वालों प्रियांशा भट्टाचार्य, रेणु बुबना, कस्तूरी बनर्जी, रेणुका चोटानी, सुदेषना सेनगुप्ता, मधुमिता चौधरी, गौतम घोष, एन.एन. मिश्रा, और अर्नब दत्ता।
बांस एक ऐसा पेड़ है जो भारत के हर प्रांत में पाया जाता है। ये लगभग 25 से 30 मीटर तक ऊंचा होता है और इसके पत्ते लंबे होते हैं। लेकिन शायद आप ये जानकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे कि बांस के भी स्वास्थ्यवर्द्धक गुण होते हैं। इसके अलावा बांस के गुण रोगों के उपचार के भी काम आते हैं।
रायगढ़, जशपुर और सरगुजा जिलों में बहु उपयोगी और बहुतायत के साथ पाया जाने वाला हस्तशिल्प है – बाँस-शिल्प. बांस का काम करने वाले प्रायः तुरी या बंसोड जाति के लोग होते हैं। बाँस की अधिकांश वस्तुएं ग्रामीण दैनिक ज़रूरतों में काम आने वाली होती हैं. इसलिए ये बहुत बड़ी संख्या में बनती हैं और बिकती भी हैं। यह बंसोड़ो की आजीविका का प्रमुख साधन है. बाँस की वस्तुएं बनाने के लिए वैसे तो हरे बाँस की आवश्यकता होती है।
वन विभाग द्वारा जंगल से बांस-कटाई पर रोक है। ये किसानों से महंगे दामों में खरीदते हैं या फिर सूखा बाँस खरीद कर उसे पानी में डुबाकर रखते हैं। सबसे पहले एक विशेष प्रकार की छुरी ‘कर्री’ से बाँस की लम्बी पट्टियाँ छिली जाती हैं. यह काम प्रायः घर के बूढ़े लोग बैठे-बैठे करते हैं। उसके बाद इन पट्टियों को पुनः छीलकर और पतला किया जाता है।
यद्यपि आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा बनांये गए उत्पादों, लकड़ी उत्पादों, विशेष रूप से सख्त, लकड़ी उत्पाद की तरह इस्तेमाल किये जाने के लिए तरह उपयुक्त है। सख्त लकड़ी की प्रजातियाँ जैसे टीक, साल, बांजु (ओक), मैफिल, माइकेला डी पटी रोकारपस आदि को परिपक्व होने में 80 वर्ष से भी ज्यादा समय लगता है जबकि बांस को परिपक्व होने में 4 वर्ष का समय लगता है। इस प्रकार जब हम बांस उत्पादों का उपयोग करते हैं उस समय हम कुछ हद तक लकड़ी का प्रतिस्थापन करते हैं जिसमें हम अपने वनों की सुरक्षा करते हैं जो हमारी धरती को अगली पीढ़ी के लिए हरा-भरा और स्वच्छ बनाते हैं।
छोटी छोटी टहनियों तथा पत्तियों को डालकर उबाला गया पानी, बच्चा होने के बाद पेट की सफाई के लिए जानवरों को दिया जाता है। जहाँ पर चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध नहीं होते, बाँस के तनों एवं पत्तियों को काट छाँटकर सफाई करके खपच्चियों का उपयोग किया जाता है। बाँस का खोखला तना अपंग लोगों का सहारा है। इसके खुले भाग में पैर टिका दिया जाता है। बाँस की खपच्चियों को तरह तरह की चटाइयाँ, कुर्सी, टेबुल, चारपाई एवं अन्य वस्तुएँ बिनन के काम में लाया जाता है। मछली पकड़ने का काँटा, डलिया आदि बाँस से ही बनाए जाते हैं। मकान बनाने तथा पुल बाँधने के लिए यह अत्यंत उपयोगी है। इससे तरह तरह की वस्तुएँ बनाई जाती हैं, जैसे चम्मच, चाकू, चावल पकाने का बरतन। नागा लोगों में पूजा के अवसर पर इसी का बरतन काम में लाया जाता है। इससे खेती के औजार, ऊन तथा सूत कातने की तकली बनाई जाती है। छोटी छोटी तख्तियाँ पानी में बहाकर, उनसे मछली पकड़ने का काम लिया जाता है। बाँस से तीर, धनुष, भाले आदि लड़ाई के सामान तैयार किए जाते थे। पुराने समय में बाँस की काँटेदार झाड़ियों से किलों की रक्षा की जाती थी। पैनगिस नामक एक तेज धारवाली छोटी वस्तु से दुश्मनों के प्राण लिए जा सकते हैं। इससे तरह तरह के बाजे, जैसे बाँसुरी, वॉयलिन, नागा लोगों का ज्यूर्स हार्प एवं मलाया का ऑकलांग बनाया जाता है। एशिया में इसकी लकड़ी बहुत उपयोगी मानी जाती है और छोटी छोटी घरेलू वस्तुओं से लेकर मकान बनाने तक के काम आती है। बाँस का प्ररोह (young shoot) खाया जाता और इसका अचार तथा मुरब्बा भी बनता है।
पिछले कुछ महीनों में केवीआईसी ने भारत के विभिन्न हिस्सों में, बम्बुसा तुलदा के लगभग 2,500 पेड़ लगाए हैं। अगरबत्ती निर्माताओं के लिए सही कीमत पर कच्चे माल की स्थानीय उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए नासिक में नवीनतम वृक्षारोपण के अलावा दिल्ली, वाराणसी और कन्नौज जैसे शहरों में बम्बुसा तुलदा के 500 पौधे लगाए गए हैं।
पूर्वोत्तर भारत के साथ ही बिहार भी बांस हस्तशिल्प का प्रमुख केन्द्र है। खासकर छठ पूजा और शादियों के दौरान सूप, टोकरी, दउरा की माँग हमेशा बनी रहती है। होम डेकोर में फर्नीचर से लेकर सजावट और क्रॉकरी तक में बांस का इस्तेमाल हो रहा है। यह इको फ्रेंडली है इसलिए आज उपहार के लिए कॉरपोरेट की पसन्द तो है, साथ ही आज बांस गिफ्ट पैकेजिंग उद्योग का एक प्रमुख हिस्सा है क्योंकि पैकेजिंग में ट्रे से लेकर टोकरी तक के निर्माण के लिए बांस का इस्तेमाल हो रहा है तो बांस की बोतलें भी बढ़ रही हैं।
कोलकाता में मछुआ फलपट्टी और रवीन्द्र सरणी इलाके में कुछ दुकाने हैं जहाँ आप बांस का सामान देख सकते हैं। कुछ दुकानें तो 150 साल पुरानी हैं…देखिए हमारी वीडियो रिपोेर्ट –
गुवाहाटी : असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता तरुण गोगोई का सोमवार दोपहर निधन हो गया। 86 साल के तरुण गोगोई पिछले महीने ही कोविड-19 संक्रमण के बाद ठीक हुए थे लेकिन उसके बाद उन्हें इस बीमारी के बाद होने वाली जटिलताओं ने घेर लिया। असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमंता बिस्वा सर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि तरुण गोगोई ने जीएमसीएच में शाम 5:34 बजे आख़िरी सांस ली। तरुण गोगोई का पार्थिव शरीर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए मंगलवार को शंकरदेव कलाक्षेत्र में रखा जाएगा। उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।”वे गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में भर्ती थे और पिछले दो दिन से उनकी हालत नाज़ुक होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। सोमवार सुबह उनकी हालत बेहद बिगड़ जाने की ख़बर के बाद असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल दिबरूगढ़ में अपने सब कार्यक्रम स्थगित कर गुवाहाटी पहुंचे। तरूण गोगोई के बेटे और सांसद गौरव गोगोई ने 21 नवंबर को ही ये ख़बर ट्विटर के ज़रिए दी थी कि उनके पिता के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया है। असम के स्वास्थ्य मंत्री हेमांता बिस्वा सरमा अस्पताल में तरूण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई के साथ मौजूद थे। तरूण गोगोई तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे।
कोलकाता : देश की राजधानी दिल्ली नहीं, बंगाल की राजधानी कोलकाता से सटा हावड़ा देश का सबसे प्रदूषित शहर है। हावड़ा का एयर क्वालिटी इंडेक्स दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल अन्य शहरों से ज्यादा खराब है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने एक रिपोर्ट जारी कर यह जानकारी दी। रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश एवं हवाओं के चलते वहां एक्यूआइ में सुधार आया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि हावड़ा के बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स के आधार पर राजस्थान का भिवंडी शहर दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर रहा, जबकि कोलकाता तीसरे स्थान पर।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा है कि डेली रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से जब देश भर में लॉकडाउन लगाया गया था, उस वक्त 1 मई, 2020 को कोलकाता और हावड़ा का औसत एक्यूआइ 50 से कम दर्ज किया गया था। इसे बेहतरीन हवा माना जाता है। एक्यूआइ स्केल की बात करें, तो 50 तक के वायु को स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। यदि एक्यूआइ 51 से 100 के बीच रहता है, तो इसे संतोषप्रद कहा जाता है, जबकि 101-200 को सामान्य माना जाता है। इससे अधिक यानी 201-300 को खराब और 301-400 को बहुत खराब माना गया है। एक्यूआइ यदि 400 से अधिक हो जाये, तो यह गंभीर खतरा उत्पन्न कर देता है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें सांस की तकलीफ होती है। इधर, पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्ल्यूपीसीबी) के आंकड़ों पर गौर करें, तो हावड़ा के घुसुड़ी में बुधवार की सुबह 6 बजे पीएम10 का स्तर 852 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब तक पहुंच गया था, जबकि सुबह 10 बजे इसका स्तर 915 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब हो गया था।