Thursday, April 9, 2026
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एसएचआरएम ने भारत में पूरे किये 15 साल

कोलकाता : द सोसायटी फॉर ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एसएचआरएम) ने तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया। एसएचआरएमआईएसी और एसएचआरटीईसीएच एक वर्चुअल सम्मेलन के लिए साथ आये। सम्मेलन में 170 से अधिक प्रख्यात वक्ताओं ने विचार रखे। इस साल की थीम ‘टूगेदर टूवार्ड्स टूमॉरो’ थी जिसमें 75 से अधिक जानकारीवर्द्धक सत्र आयोजित किये गये। सम्मेलन को लेकर एसएचआरएम इंडिया की सीईओ तथा एपेक एंड मीना की बिजनेस हेड अचल खन्ना ने कहा कि भारत में एसएचआरएम और एशिया पैसेफिक को 15 साल हो रहे हैं। पिछले 10 महीने में अनुभव काफी सिखाने वाला रहा। अब 85 प्रतिशत संस्थाएं विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रही हैं। सम्मेलन में अनिश्चित परिस्थियों से निपटने, तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति, कौशल परिवर्तन जैसे कई विषयों पर चर्चा हुई।

पर्यावरण संरक्षण : हिन्दुस्तान जिंक को मिली सीडीपी ‘ए’ की मान्यता

कोलकाता : विश्व के अग्रणी जिंक निर्माता हिन्दुस्तान जिंक (एचजेडएल) एक वैश्विक संस्था की ओर से पर्यावरण संरक्षण रे लिए मान्यता मिली है। हिन्दुस्तान जिंक को उत्सर्जन तथा जलवायु सम्बन्धी जोखिमों को कम करने के साथ न्यूनतम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए पहचान प्राप्त हुई और अब एचजेडएल उच्च स्चर का प्रदर्शन करने वाली चन्द कम्पनियों में शामिल है। हिन्दुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने सीडीपी की ए सूची में शामिल होने हिन्दुस्तान जिंक की प्रतिबद्धता और निरन्तर किये जाने वाले प्रयासों की स्वीकृति बताया। डॉ. जोन्स सस्टेनिबिलिटी इन्डेक्स में एचजेडएल को भार में टिकाऊ खनन के लिए हिन्दुस्तान जिंक को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। दायित्वपूर्ण खनन कार्य संचालन का केन्द्र है और सीडीपी ‘ए’ लिस्ट में शामिल होना इस दिशा में मील का पत्थर होगा। सीडीपी के सीईओ पॉल सिम्पसन ने भी हिन्दुस्तान जिंक की इस उपलब्धि को सराहा। सीडीपी की वार्षिक पर्यावरणीय प्रकटीकरण और स्कोरिंग प्रक्रिया को व्यापक रूप से कॉर्पोरेट पर्यावरण पारदर्शिता के स्वर्ण मानक के रूप में मान्यता प्राप्त है। 2020 में, 515 से अधिक निवेशकों के साथ यूएस $ 106 ट्रिलियन से अधिक संपत्ति और 150+ प्रमुख खरीदारों के साथ यूएस $ 4 ट्रिलियन की खरीद में सीडीपीपी के मंच के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभावों, जोखिमों और अवसरों पर डेटा का खुलासा करने के लिए कंपनियों से अनुरोध किया। 9,600 से अधिक ने जवाब दिया – अब तक का सबसे अधिक।

सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में विश्व कम्प्यूटर साक्षरता दिवस

कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल में विश्व कम्प्यूटर साक्षरता दिवस मनाया गया। गत 2 दिसम्बर को स्कूल की छात्राओं ने अपने दादा – दादी, नाना – नानी को कम्प्यूटर के बारे में मूल जानकारी दी और डिजिटल दुनिया से उनको अवगत करवाया। पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों ने इन बुजुर्गों को ग्रीटिंग कार्ड डिजाइन करना सिखाया तो दूसरी ओर चौथी – पाँचवीं कक्षा की छात्राओं ने उनको इंटरनेट का इस्तेमाल करना, ई मेल लिखना, यू ट्यूब का उपयोग करना सिखाया। दोनों ने इस गतिविधि का आनन्द उठाया।

 

एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।

कैलाश गौतम
चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना
एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।
रेत भइलीं नदिया, पठार भइलीं धरती
जरि गइलीं बगिया, उपर भइलीं परती
एही अगिया में दहकै कछार हिरना।
चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना
एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।
निंदिया क महंगी सपनवा क चोरी
एही पार धनिया, त ओहि पार होरी
बिचवां में उठलीं दीवार हिरना।
चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना
एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।
बड़ी-बड़ी बखरी क बड़ी-बड़ी कहनी
केहू धोवै सोरिया, त केहू तौरै टहनी
केहू बीछै हरी-हरी डार हिरना।
चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना
एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।
गीतिया ना महकी, ना फुलिहैं कजरवा
लुटि जइहैं लजिया, न अंटिहैं अंचरवा
बिकि जइहैं सोरहो सिंगार हिरना।
चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना
एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।

मैं महापात्र हूँ, ना पात्र होने का मोह, ना श्मशान जाने का भय

प्रभाकर झा

महापात्र शब्द अपने आप में महान है वैसे तो महापात्र शब्द का शाब्दिक अर्थ महान+पात्र है, अर्थात वैसा पात्र(जन, मनुष्य ) जो महान है , अपने गुण, छवि , और पांडित्य से। परंतु व्यवहारिक दृश्टिकोण से ऐसा नही है
मिथिला क्षेत्र अपने कर्म, संस्कृति और परंपरागत सोंच के लिए विश्व में जाना जाता है और यहाँ हर वो संस्कृति अपने आप में जिज्ञासा उत्पन करता है। मिथिला में भी मुगल बादशाह का साम्राज्य था और उनके दरबार में अनेक पंडित रहा करते थे उनमे से एक थे महेश ठाकुर। जिन्हें मुगल बादशाह ने २७ मार्च १५५६ को उनके पांडित्य से खुश होकर उन्हें तिरहुत का साम्राज्य दिया। वे पंडित तो थे ही और कर्मनिष्ट भी थे. दान लेने के उपरांत उन्होंने दान करने की इच्छा प्रकट की और वे ऐसे ब्राह्मण के खोज में लगे जो उनका दानपत्री बन सके। ब्राह्मण हो , अग्निहोत्री वंश का हो ,कर्मनिष्ट और सुयोग्य भी हो ऐसे ब्राह्मण उन्हें मधुबनी के कोइलख ग्राम में मिल गए जिनका नाम क्रमशः इस प्रकार हैं
१. लोकनाथ झा २. देव नाथ झा ३. एक नाथ झा तीनो प्रकांड विद्वान थे जिनका काकोबेलोच मूल और भारतद्वाज गोत्र था। महेश ठाकुर ने इन्हें दानपत्री बनने का आग्रह किये , परंतु तीनो ब्राह्मण का एक ही उत्तर था सरकार मुझे कर्म करने की इच्छा है दान लेने की नही। महेश ठाकुर के नजर में यही तीनो सुयोग और कर्मकांडी ब्राह्मण है दानपत्री इन्हें ही बनाया जाय और वे दवाब डालते रहे। अंततः महेश ठाकुर ने उन्हें अपने राज्य से चले जाने को कहा की अगर आप मेरे और मेरे परिवार के दान पात्री नहीं बनते तो आपको तिरहुत साम्राज्य त्यागना होगा।
परंतु उस समय की परिस्थति ही कुछ ऐसा थी कि उनलोगों को प्राणत्याग करना सरल लगा परंतु ठाम त्याग कठिन। वैसा ही हुआ जैसा महेश ठाकुर ने चाहा अंततः उन्हें दानपात्री ( महापात्र) बनना परा।
मधुबनी से सटा हुआ यह गाँव जितवारपुर मिथिला पेंटिंग के लिए विश्विख्यात है वहां करीब १५० घर महापात्र ब्राह्मण है
तिरहुत साम्राज्य की पहली राजधानी भौरागढ़ी थी वही महेश ठाकुर और उनके पुत्र गोपाल ठाकुर राजा बने और वे अपने ही छत्र-छाया में महापात्र ( कंटाहा ) लोगो को आश्रय दिए। अभी भी वहां का एक तालाब कंटाही पोखर के नाम से जाना जाता है
राजा नरेंद्र सिंह के शासन के साथ ही भौरा का राजधानी का दर्जा समाप्त कर दरभंगा को नूतन राजधानी घोषित किया गया और राजा दरभंगा चले गए ।लोकनाथ झा , देव नाथ झा , एकनाथ झा , इन तीनो में से लोकनाथ झा और देव नाथ झा ही महापात्र बने। राज परिवार के चले जाने के बाद इन्हें भी कहा गया की आप व् उचित चले जाएँ और फिर जितवारपुर में पुराई झा आये। महनपुर में केशव झा गए और एक जान साहपुर गए वैसे महाराज का कुलपूज्य ( महापात्र ) श्री पुराई झा थे परंतु उनके भाई होने के कारन केशव झा को व् दान का भाग दिया जाता था
जैसे जैसे महाराज होते गए तदनुसार कुलपूज्य व् आते गए सर्वप्रथम १. स्व पुराई झा २ स्व हरी झा , ३. पोषण झा, ४. महामहा भजन झा, ५. दूल्हा झा, ६ कृष्ण्णा झा ७. जगधर झा ,९ उमाकांत झा १०. रामनारायण झा , पंडित श्री देवनारायण झा अभी है
कहने के लिए महाराज के महापात्र है उनके यहाँ सामान मिलता है परंतु व्यहारिक देखे तो लोग घृणा करते है समझ महि आता क्यों
महापात्र जनरल कास्ट में आते है परंतु उनके साथ जो व्यवहार किया जाता है वो शायद डोम (नीची जाति) के साथ व् नही कर सकते क्योंकि वो कानूनन अपराध है परन्तु ब्राह्मण के लिए कोई कानून नहीं।
लोग ये कहते है की महापात्र तब आते है जब किसी का देहांत होता है ये बात सत्य है हाँ आते है परन्तु बुलाने पर। लोग ये नही समझते की उन्होंने जो महामांस दग्ध किया है अतः उन्हें अशौच से निव्रत होना है इस परिस्थिति में तो अपने सगे- संबंधी भी उनके घर का जल ग्रहण नहीं करते उस विसम परिस्थिति में महापात्र ब्राह्मण ही सर्वप्रथम जल या भोजन ग्रहण करके उनको उस अशौच से मुक्ति दिलाते है
जहाँ तक मेरी सोच है महापात्र ब्राह्मण वो है जिन्हें अपने घर से पहले जजमान के घर की चिंता है उन्हें अपने जजमान को पहले मुक्ति दिलानी है । जितवारपुर महापात्र ब्राह्मण का गॉंव है वहां अभी १५० घर से ज्यादा महापात्र होंगे परंतु ५० घर ही जजमान पर आश्रित होंगे। १०० घर के पास जजमान नही है या फिर वो दूसरे कामो में चले गए है इसका ये मतलब नही की वो महापात्र नही है।  महापात्र के लिए एक कथन बिलकुल सत्य और जटिल है
मैं महापात्र हूँ
ना पात्र होने का मोह
ना श्मशान जाने का भय
(लेखक जितवारपुर मधुबनी, मिथिला हैं और चित्रकार हैं)

कोलकाता के साहित्य प्रेमियों का अपना अड्डा सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय

शुभांगी जायसवाल

कोलकाता और साहित्य का गहर रिश्ता है और बात जब हिन्दी की हो, हिन्दी के प्रहरी की हो तो कुछ ऐसे संस्थान हैं जो दशकों से महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। शुभजिता की कोशिश है कि युवाओं को परम्परा, धरोहर, साहित्य से जोड़ा जाये और पत्रकारिता की मूल अवधारणा से अवगत करवाया जाये। इसके लिए हम अपनी स्टोरीज में युवाओं का साथ लेते हैं और इस बार हमारे साथ हैं शुभांगी जायसवाल। शुभांगी कलकत्ता विश्वविद्यालय की छात्रा हैं और कोलकाता के हिन्दी प्रेमियों के कॉफी हाउस यानी सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय यानी राम मंदिर लाइब्रेरी की जानकारी आपके लिए लायी हैं। तो पुस्तकालय की कहानी, शुभांगी की जुबानी –

मेरा नाम शुभांगी जयसवाल है। में कलकत्ता विश्वविद्यालय की छात्रा हूं। कोलकाता के बड़ाबाजार में स्थित सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय व्यक्तिगत रुप में मेरा प्रिय स्थान है में यहां अकसर प्रात: काल के समय में ही पुस्तक लेने जाती हूं। यहाँ के स्टाफ से मुझे काफ़ी मदद मिल जाती है अपने पसंदीदा किताबों को खोजने में वरना इस पुस्तक के खजानों में से अपने एक किसी पसंदीदा किताब को खोजना आसान नहीं है। स्टाफ का व्यवहार भी मददगार हमारे लिए और मुझे आशा है की आगे भी यह पुस्तकालय ऐसे ही कार्य करते रहे। सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय कोलकाता में स्थित प्रसिद्ध पुस्तकालयों में से एक है। क्योंकि कोलकाता एक अहिंदी भाषी प्रदेश है इस कारण यहां हिन्दी किताबों में रुचि रखने वाले की संख्या कम है इस कारण हिन्दी किताबों की पुस्तकालय कम ही हैं पर दिनोदिन हिन्दी की बढ़ती जरूरत ने इस पुस्तकालय को एक हम महतवपूर्ण साधन के रूप म स्वीकार करते है क्योंकि यह पुस्तकालय न सिर्फ पुस्तकों के माध्यम से छात्र-छात्राओं की जरूरत को पूर्ण करता है बल्कि यह कई सारे साहित्यिक कार्यक्रम या संगोष्ठी आयोजित कर हिन्दी के विकास में एक ऐतिहसिक योगदान भी दे रहा है। यह पुस्तकालय केवल कोलकाता की ही नहीं अपितु पूर्वी भारत के हिन्दी एवं संस्कृत साहित्य के श्रेष्ठतम पुस्तकालयों में से एक है।

यह पुस्तकालय सेठ सूरजमल जालान ट्रस्ट द्वारा संचालित है जिसकी स्थापना 75 वर्ष पूर्व 1941 ई. में सूरजमल जालान स्मृति भवन के अंतर्गत की गयी थी। इस पुस्तकालय में कूल 3307 पुस्तकें संग्रहित हैं। जिसमें हिन्दी के आलावा अग्रेजी, राजस्थानी एवं संस्कृत आदि कई सारे पुस्तकें सम्मलित रुप से यहाँ उपलब्ध है। पाठकों के लिए नियमित रूप से यहां प्रतिदिन 75 पत्र- पत्रिकाएं मंगाई जाती है। जिसमे दैनिक समाचार पत्रों की संख्या 23 साप्ताहिक पत्रिकाएं 17 पाक्षिक पत्रिकाये 12 मासिक पत्रिकाएं 20 तथा की संख्या 3 है। यह पत्रिकाएं वाचनालय के पाठकों की उपयोगिता प्रमाणित करती है। तुलसीदास जयंती के अवसर इस पुस्तकालय में प्रति वर्ष सार्वजनिक आयोजन व्यापक स्तर पर जालान पुस्तकालय की सुदीर्घ परम्परा रही है जिसमें देश के प्रतिष्ठित मनीषियों, तुलसी साहित्य के मर्मज्ञों, विद्वानों एवं साहित्यकारों ने अपने ओजस्वी तथ्यपरक व्याख्यान से हमें ज्ञानार्जन किया है। जिसमे से पण्डित सकल नारायण शर्मा, डॉ रामविलास शर्मा, प. श्याम नारयण पांडेय, डॉ हरिवंश राय बच्चन, डॉ. शिवमंगल सिंह सुमन आदि। तुलसी जयंती के अतिरिक्त यहां और भी कई संगोष्ठी – समारोह सफतापूर्वक आयोजित किए जाते है।
जालान पुस्तकालय न सिर्फ साहित्यिक ग्रंथो का भवन है बल्कि इस पुस्तकालय ने कई सारी पुस्तकें भी प्रकाशित की है।
वर्तमान समय मे पुस्तकालय मे कुल 1550 सदस्यों की संख्या में मौजूद है जिसमें से आजीवन 424 तथा साधारण 1123 है। पुस्तकालय के वाचनालय में प्रतिदिन 200 पाठक नियमित आते रहते है। यहां शोध विद्यार्थी और बाल साहित्य से जुड़ी चीज़े भी उपलब्ध है।
हमें आशा है की आने वाले दिनों में यह पुस्तकालय सत्- प्रतिशत शिक्षार्थियों और हिन्दी के विकास में उपयोगी सिद्ध होगा।
पुस्तकालय के अध्यक्ष तुलसी राम जालान, उपाध्यक्ष भरत कुमार जालान का पुस्तक के प्रति स्नेह सत्- साहित्य के प्रति विशेष अभिरुचि तथा पुस्तकालय की कार्यकारिणी समिति एवं पुस्तक निर्वाचन समिति के सदस्यों का मार्ग दर्शन इस साहित्यिक संस्थान को प्रगति की ओर अग्रसर कर रहा है।

 

शुभजिता शॉपिंग बैग – नये ऑफर

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फ्लिपकार्ट, (ऑफर अवधि – 31 दिसम्बर 2020)

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500 किलोमीटर दौड़ेगी मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक कार

नयी दिल्ली : दुनियाभर में कहीं भी लग्जरी इलेक्ट्रिक कार का जिक्र होता है तो सबसे पहले टेस्ला का नाम याद आता है। टेस्ला कारें वैसे तो दुनियाभर में बेहद लोकप्रिय हैं लेकिन भारत में इन कारों को टक्कर देने के लिए भारतीय कार निर्माता कंपनियों ने भी तैयारी कर ली है। दरअसल बेंगलुरु स्थित Pravaig डायनैमिक्स अपनी पहली होमग्रोन इलेक्ट्रिक कार लेकर आई है, जो भारत में ईवी सेगमेंट में तेजी ला सकती है। Pravaig डायनैमिक्स की तरफ से हाल ही में आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से भारत में बनाई गई एक्सटीनेशन एमके 1 प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार का अनावरण किया, जो अगले साल लॉन्च की जा सकती है।
दरअसल भारतीय कम्पनी देश समेत दुनियाभर में इस कार को एक अलग पहचान दिलाना चाहती है, ऐसे में ये बेस्ट इन क्लास सेफ्टी फीचर्स और बेहतरीन टेक्नोलॉजी से लैस होगी। इस कार को टेस्ला की टक्कर में उतारा जाएगा। पिछले कुछ समय से भारत सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को जमकर प्रमोट कर रही है। दरअसल सरकार के इस कदम का मकसद देश में प्रदूषण कम करने के साथ ही जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को खत्म करना और क्लीन एनर्जी को प्रमोट करना है।
जानकारी के अनुसार Pravaig Extinction MK1 सिंगल चार्ज में 500 किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम हो सकती है। अगर इसकी तुलना अन्य प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों से करें तो फॉक्सवैगन ID.3 मुश्किल 500 किलोमीटर के रेंज दे सकती है, टेस्ला मॉडल 3 का शोकेस वर्जन सिंगल चार्ज में 507 किलोमीटर की रेंज देने का दावा करता है। वहीं अगर भारत में मौजूद हाई रेंज वाली इलेक्ट्रिक कारों की बात करें तो हुंडई कोना ईवी 452 किलोमीटर की रेंज, एमजी जेडएस ईवी 340 किलोमीटर की रेंज और मर्सिडीज EQC की रेंज महज 350 किलोमीटर की रेंज देती है।
कम्पनी की तरफ से चार्जिंग को लेकर भी एक बड़ा दावा किया गया है जिसके अनुसार Extinction MK1 को 80 फीसद चार्ज करने में महज 30 मिनट का समय लगेगा। किसी लग्जरी इलेक्ट्रिक कार के लिए चार्जिंग का ये समय अच्छा माना जाएगा हालांकि अभी इस बात में कितनी सच्चाई है ये इस कार की लॉन्चिंग के बाद ही पता चलेगी। बैटरी और मोटर की बात करें तो इस कार में 96 kHw की बैटरी दी गई है जो 200 hp की मैक्सिमम पर और 196 kmph की मैक्सिमम स्पीड जेनरेट करने में सक्षम है। ये कार शून्य से 100 kmph की रफ़्तार तक पहुंचने में 5.4 सेकेंड का वक्त लेगी। ये एक लग्जरी इलेक्ट्रिक कार होगी जिसमें बेहतरीन फीचर्स मिलेंगे। कम्पनी ने हर साल इस कार के 250 यूनिट्स बनाने का लक्ष्य लिया है।

 

प्रख्यात बांग्ला अभिनेता मनु मुखर्जी का निधन

कोलकाता : जाने माने बांग्ला अभिनेता मनु मुखर्जी का दिल का दौरा पड़ने से रविवार को निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। मुखर्जी के परिवार के सदस्यों ने उनके निधन की सूचना दी। मुखर्जी के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। मुखर्जी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मृणाल सेन की फिल्म ‘नील अकाशेर नीचे’ (1958) से की थी। सत्यजीत रे की ‘जोय बाबा फेलूनाथ’ और ‘गणशत्रु’ में मुखर्जी के शानदार अभिनय को काफी सराहा गया। उन्हें ‘पातालघर’ में बेहतरीन अभिनय के लिए भी फिल्म समीक्षकों की खूब प्रशंसा मिली। ममता बनर्जी ने मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘जाने माने रंगमंच एवं फिल्म कलाकार मनु मुखर्जी के निधन से बहुत दुखी हूं। हमने 2015 में टेली-सम्मान पुरस्कार समारोह में उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार प्रदान किया था। मैं उनके परिजन, सहकर्मियों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूं।’’ पश्चिम बंगाल के ‘मोशन पिक्चर्स आर्टिस्ट्स फोरम’ ने भी मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुखर्जी इसके सक्रिय सदस्य थे। निर्देशक अतानु घोष, अभिनेताओं सुजान नील मुखर्जी और शाश्वत चटर्जी समेत कई कलाकारों ने मुखर्जी के निधन पर सोशल मीडिया के माध्यम से शोक व्यक्त किया।

माया सभ्यता के नए स्कैन में मिली ‘विशाल दीवार’

ग्वाटेमाला सिटी : माया सभ्यता की खोज कर रहे पुरातत्वविद उस वक्त हैरान रह गए जब उन्हें एक जंगल के नीचे प्राचीन सभ्यता की एक विशाल दीवार के संकेत मिले। 2000 ईसा पूर्व की सभ्यता के अविश्वसनीय ढांचे आज भी दक्षिणपूर्व मेक्सिको, ग्वाटेमाला, बेलीजे और होंडुरास के पश्चिमी हिस्सों में पाए जाते हैं। अब LIDAR (लाइट डिटेक्शन ऐंड रेंजिंग) टेक्नॉलजी की मदद से पुरातत्वविदों ने जंगलों को डिजिटली हटाकर देखा है। इससे पता चलता है कि कोलंबियाई सभ्यता से पहले के ये निशान जितने जटिल समझे जा रहे थे, उससे कहीं ज्यादा हैं।
एक्सपर्ट प्रफेसर अल्बर्ट लिन ने इतिहासकार डैन स्नो को ‘हिस्ट्री हिट’ पॉडकास्ट के दौरान बताया है कि LIDAR कितना उपयोगी है। उन्होंने बताया है कि हर जगह पर पहले के आकलन के मुकाबले ज्यादा सघन सक्रियता देखी गई है। लिन के मुताबिक यह पहले खोजा गया इलाका ही है और वहीं LIDAR डेटा को देखने से ज्यादा सक्रियता दिखती है।
हजारों साल भी खोज जारी
लिन ने तिकाल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया है कि यहां ज्यादातर घर ही हैं लेकिन पहले से ज्यादा सक्रियता दिख रही है। कभी माया सभ्यता की राजधानी रहा तिकाल सबसे बड़े पुरातत्वस्थलों में से एक है। हजारों साल बाद भी इससे जुड़े रहस्य खुलते जा रहे हैं। प्रफेसर लिन ने बताया, ‘आप किसी भी दिशा में देखें, सिर्फ 20-30 फीट दिखता है।’ इसलिए एक ही सर्वे को दोबारा नहीं मिल सकता।
ग्रेट वॉल ऑफ माया
उन्होंने बताया है कि हाल ही में एक खोज की गई है जिसे ‘ग्रेट वॉल ऑफ द माया’ कहा जा रहा है। यह एक विशाल दीवार है जो तिकाल को दूसरे शहरों से अलग करती होगी। उन्होंने सवाल किया है कि यह दीवार किसके खिलाफ बनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि बाद में वॉचटावरों जैसे ढांचे उत्तर और दक्षिण में मिलने लगे। इससे पता चलता है कि पुरातनकाल में समाज कैसे संपर्क करता था।
(नवभारत टाइम्स)